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[Majlis] Hai Koi Jo Allah Ko Qarz De? | H.I. Hadi Wilayati
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Record date: 02 April 2023 - ہے کوئی جو خدا کو قرض دے؟
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:12]वाला हवाला वाला हबीबी [संगीत] मुस्तफा मोहम्मद [संगीत] तट हीरा [संगीत] लाल
[1:38]इल्लल्लाह [संगीत] और परवरदिगार मुताल साथी यह दुआ भी है की जिन
[2:30]इबादतों को हम अंजाम दे चुके हैं परवरदिगार उसे अपनी बारगाह में
[2:38]काबुल फरमाए और आइंदा आने वाले माहे मुबारक रमजान के दोनों में
[2:42]हमें बेहतरीन अंदाज में इबादतें खुदा के जारी से अपने रब को
[2:44]राजी करने की तौफीक आता फरमाए जैसा की आपके सामने बयान हुआ
[2:53]की गुफ्तगू का उनवान क्योंकि आपको मालूम है की मां है मुबारक
[2:55]तेरा रमजान का जो चंद है वो था की 30 शाबान हो
[3:02]और उसके बाद अगर रमजान शुरू हो तो उसे एतबार से यह
[3:07]दर्श हमारा 10 मा मुबारक हो जाते ग्रामीण हजरत खदीजा अस्सलाम अजीबोगरीब
[3:38]अंदाज में परवरदिगार है मुताल मुकाब हो रहा है आपने देखा होगा
[3:44]की जब आप सफर करते हैं किसी बड़ी सहारा से गुजरते हैं
[3:49]किसी बड़ी सड़क से गुजरते है तो वहां बोर्ड लगे होते हैं
[3:51]और उसे पर लिखा होता है की है कोई की जो फला
[3:54]कम करना चाहे है कोई की जिसको जब की तलाश हो है
[3:59]कोई के जो अपना पैसा इन्वेस्ट करना चाहे है कोई के जो
[4:04]फल मुकाम पर प्लॉट खरीदना चाहे ये अंदाज दूसरे पढ़ने वाले में
[4:11]रखबत के ईजाद के लिए अपनाया जाता है की सवाल के जारी
[4:17]से उसके अंदर एक ऐसी रघुबात को इजाजत किया जाए की वो
[4:22]उसकी तरफ बढ़ता चला आए मिले हो जाए बकरा के अंदर इरशाद
[4:31]फार्मा रहा है की मंजिल लाजी है कोई तुम में सी के
[4:36]जो परवरदिगार है मुताल को कर्ज हसन ना दे हम क्या करेंगे
[4:47]फिर हम कई गुना करके उसको कई गुना मल्टीप्लाई करके तुम्हें वापस
[4:56]पलटा देंगे जो हाथ को खींचना है वही परवरदिगार है की जो
[5:04]हाथ को रोकना है वह अल्लाह हो या वो सोच और वही
[5:07]है जो खली छठ दे देता है वही है की जो कुशागीयता
[5:11]करता है वो हिले ही टर जाऊं और तुम ने इस की
[5:16]तरफ पलट के जाना इसी आयत के अंदर एक तरफ परिवार इंसानों
[5:23]से यानी अपनी मखलुकत से अपने ही दिए हुए माल में से
[5:29]कर्ज मांग रहा है और इसी ही आयत में दूसरी तरफ परवरदिगार
[5:31]इशारा कर रहा है की हम हैं के जो देते हैं हम
[5:35]हैं की जो लेते हैं तुम भी हमारी तरफ पलट करके आओगे
[6:09]वायो और तुम्हारा माल क्या तुमने खुद पलट करके उसकी बारगाह में
[6:15]जाना है दोबारा तिलावत होती है इना लिल्लाहि वी इना इलैही तुम
[6:21]उसकी तरफ से आए हो उसकी तरफ तो मैं पलट करके जाना
[6:25]है इस दरमियां सिर्फ तुम्हें इख्तियार इसलिए दिया गया है ताकि हम
[6:28]पहचाना अयुकू हसन और अल्लाह के तुम में से अच्छा अमल करने
[6:34]वाला है कौन से बन्ना की लोगों ने ये गुमान किया है
[6:38]की उन्हें छोड़ दिया जाएगा अगर वो कहेंगे अमन्ना और हम उनका
[6:42]इम्तिहान नहीं लेंगे कुरान का रहा की नहीं सुन्नते इलाही में से
[6:46]एक सुन्नत यह है की हम उसका इम्तिहान देंगे अब यहां पर
[6:51]सवाल [संगीत] नहीं है उसके हाथ है कुदरत से कोई चीज बाहर
[7:17]नहीं है जो हर चीज पर कुदरत रखना है ना बात पर
[7:35]और जमादार इंसान पर और जिन पर और जो शायद उसने हाल
[7:36]की है उसे पर कुदरत रखना है और ना सिर्फ ये की
[7:41]कुदरत रखना है बल्कि इंसानों का नवातात का जमादार का इस सारे
[7:43]आलम का वजूद उसके वजूद पर डिपेंडेंट है जो कहता है तुम्हारे
[7:52]इन दोनों एलामों से परवरदिगार गनी है परवरदिगार बेनियाज़ है प्रवर अधिकार
[8:04]को जरूर नहीं है तुम्हारे इन एलामों की यह तुम्हारे जितने आलम
[8:08]है इस दुनिया के अलावा जितने आलम इन तमाम तरह आलमीन से
[8:11]परिवार डीगरे मुताल गनी है बनियास है उसको जरूर नहीं है उसके
[8:16]लिए इजाफी है वो परवरदिगार की जिसकी शान यह है वह का
[8:21]रहा है कोई जो मुझे कर्ज दे क्या जरूर है इससे बढ़कर
[8:39]सवाल यह है की कर्ज होता कहां पर है कर्ज के लिए
[8:44]दो बटन का होना जरूरी है एक कर्ज हमेशा मध्य एशिया में
[8:49]होता है जिनको महसूस किया जा सकता है उन एशिया में खज
[8:56]होता है मैं आपको कहूं की आप अपने खुशी मुझे कर्ज के
[9:00]तोर पर दे दे और दे सकते हैं मटेरियल की दुनिया से
[9:09]ताल्लुक नहीं रखती महसूसाद की दुनिया से ताल्लुक नहीं रखती आप अपने
[9:12]खुशी मुझे कर्ज के तोर पर नहीं दे सकते लेकिन मैं आपको
[9:15]कहूं अपनी गाड़ी मुझे कर सके तोर पर दे दे तो आप
[9:18]दे सकते हैं गाड़ी जा शक्ति है महसूस की जा शक्ति है
[9:23]वो परिवार नहीं है की जो मुजरे मुतालख है की जिसको महसूस
[9:37]नहीं किया जा सकता जिसको देखा नहीं जा सकता वो का रहा
[9:41]है की मुझे कर्ज दो जब के कर्ज सिर्फ और सिर्फ महसूस
[9:45]की जान वाली चीजों में दिया जाता है कार्य हमेशा जरूर को
[9:55]पूरा करता है रिवायत का जुमला है इमाम फॉर्मेट हैं की सदका
[9:59]देने का सवाब 10 बराबर है और कर्ज देने का 18 बराबर
[10:06]है अजीब है इसी आयत के जीवन में इरशाद फरमाई मेरे जहां
[10:15]में सवाल था की किस तरह से मुमकिन है जब इंसान सदका
[10:20]देता है तो हमेशा के लिए माल इंसान से चला जाता है
[10:25]उसकी फजीलत ज्यादा हनी चाहिए वन निस्बत इसके के खर्च दे के
[10:27]जिसके बड़े में पता है की आज नहीं तो कल वापस पलट
[10:31]करके आएगा लेकिन इमाम फार्मा रहे की नहीं कर्ज देना अफजल है
[10:34]और सदका देना अफजल नहीं है यही सवाल अभी मेरे जहां में
[10:39]था और मैंने दो-चार रिवायत थे और पड़ी और आगे बड़ा तो
[10:41]अगली सेफ के ऊपर इमाम ए रहा सलातो सलाम से एक और
[10:45]रिवायत मैंने अच्छी की जिसमें इमाम ने इसकी वजह बयान की थी
[10:48]और वाकण ऐसी वजह बयान की है की जो शिवाय आले मोहम्मद
[10:52]है मुसलातो सलाम की कोई बयान नहीं कर सकता इस वजह का
[10:56]बयान करना ये बता रहा है की इनके पास वो मिल मौजूद
[11:00]है की जो इल इलाही है इमाम ने कहा की इसलिए इसलिए
[11:13]कर्ज की फजीलत ज्यादा है जवाब सदका दे रहे होते हैं तो
[11:17]कभी कोई ऐसा शख्स भी ले जाता है की जिसको जरूर नहीं
[11:20]होती लेकिन कर्ज लेने सिर्फ वही आता है की जिसको जरूर होती
[11:22]है इमाम कहते हैं चूंकि सदका मुस्तक को गैर ए मुस्ताक दोनों
[11:27]के पास चला जाता है इसलिए सड़के की फजीलत कब है कर्ज
[11:32]देने की फजीलत ज्यादा है आज हमारे मुअशरे के अंदर जो सूरत
[11:38]है हाल है फकरोटांग बस्ती का जो आलम है और खास कर
[11:43]वो अपराध के जो मिडिल क्लास से ताल्लुक रखते हैं उनके हालात
[11:46]शादी एतबार से अच्छे नहीं हैं इसमें वाकई जरूर है की हम
[11:52]जहां इतने ज्यादा सदका तो खैरात पर तवज्जत देते हैं वरना इस
[11:54]पर भी तवज्जो दी जाए की एक मिल्क गिलास आदमी की जो
[11:58]सदका नहीं ले सकता उसकी इज्जत नफ्फामल होती है ऐसे इदारे कायम
[12:02]किया जैन की जो कर्ज हसन फरहान करें ताकि एक शख्स अपने
[12:07]इज्जत नफ्स को महफूज रखते हुए आकर के कर्ज ले और उसे
[12:10]कर्ज को वापस करें इसमें उसकी इज्जत है ना उसमें और दूसरी
[12:14]तरफ से जो अपराध ये कम करेंगे वो अपने एक ही पैसों
[12:19]से कई दफा कई लोगों की मदद कर सकेंगे जरूर है हमारा
[12:39]तोर पर मांगने वाले होते हैं मिसल आपके सामने पेस करता हूं
[12:46]मैं और आप हमेशा हर एक रक्षा का सफर करता है और
[12:52]अच्छे वाले जगह पर जाना होगा तो ₹200 लूंगा हम कहते हैं
[13:00]इस वक्त रक्षाबंधन वह पेशावर यह कम करके अपने बच्चों का पेट
[13:22]पालना चाहता है हम इसको प्रमोट नहीं करते हम उसे पेशावर मांगने
[13:24]वाले को प्रमोट करते हैं उसको ₹50 देते हुए हमें बड़ा नहीं
[13:28]लगता अगर हम वो अपराध के जो कम करते हैं उनको कुछ
[13:41]इजाफी दे तो जो मांगते हैं वो भी इस पर ए जाएंगे
[13:45]की हमें भी कुछ ना कुछ कम करना चाहिए क्योंकि कम करने
[13:49]वालों को दिया जाता है मांगने वालों को नहीं दिया जाता अपराध
[13:55]हैं की जिनके लिए वाकई ने हालात में सख्त हो गया है
[14:01]अपने बच्चों का पेट पालना वो किसी तरह से सरवाइव कर सके
[14:07]खैर इस आयत के सारे हुजूर के तोर पर रिवायत जुमला आया
[14:09]की सबसे पहले ये वाली आयत नाजिर हुई मान्य एबल हसंते फलाहु
[14:14]के रूप में ना ये कुरान माजिद किया है की अगर कोई
[14:18]अच्छी नेकी परवरदिगार है वो लाल के पास लेकर के आएगा तो
[14:20]परवरदिगार उससे बेहतर बदला उसे देगा की जब ये आयत नाजिल हुई
[14:24]तो रसूल अल्लाह ने दुआ की रब्बी ज़िद नहीं परवरदिगार ये सब
[14:27]आप कम है मेरी उम्मत के लिए अल्लाह की र में खर्च
[14:31]करने के शबाब को बड़ा दे तो फिर ये वाली आयत नाजिल
[14:36]हुई मान्य एबल हसंते फैलाओ आश्रम सलेहा अगर कोई अल्लाह के पास
[14:39]एक नहीं की लेकर के आएगा परवरदिगार उसका 10 बराबर उसको आता
[14:46]करेगा अपने हाथों को उठाया और परवरदिगार से कहा रब्बी जितनी परवरदिगार
[14:50]इसको और बड़ा दे फिर ये आयत नाजिल हसन दे प्रिया बात
[14:59]नहीं करते की कितने गुना बढ़ाएंगे बस इतना समझो की हम कश्मीर
[15:04]बड़ा करके तुम्हें वापस करें परवरदिगार कर्ज मांग रहा है वह की
[15:10]जो महसूस साथ से ताल्लुक नहीं रखना वो के जो आलम है
[15:11]से बा लता है वो के जो मुजर्रत ए मुतालख है वो
[15:14]के जो कमल है मुतलाक हैं वो की जिसके यहां किसी किम
[15:17]की जरूर नहीं पी जाति जरूर में होता है मिसल आपके सामने
[15:24]पेस करता हूं आपने अपने पड़ोस में बच्चे को जो पड़ोसी चीनी
[15:26]ले आओ घर में चीनी खत्म हो गई पड़ोस वाला चीनी देने
[15:31]के बजे 1 किलो चीनी के पैसे दे दे आप कहेंगे की
[15:34]ये वो नहीं है की जो मैंने मांगा था क्यों क्योंकि पैसे
[15:38]मेरे पास भी है फिलहाल घर में लेने जान वाला कोई नहीं
[15:40]है दुकान बैंड है या कोई और मसाला है इसलिए आप से
[15:44]चीनी मांगी जा रही है अगर चीनी कर्ज मांगी जाए तो आप
[15:48]चीनी दीजिए ताकि वो जरूर पुरी हो की जो जरूर की वजह
[15:49]से हमने कर्ज मांगा है कर्ज़ हमेशा एक जरूर को पूरा करता
[15:57]है अगर कोई ऐसी चीज दी जाए की जो जरूर को पूरा
[15:58]ना करें तो उसको कर्ज़ नहीं कहा जाता मैं आपसे कहूं की
[16:03]मुझे आपकी गाड़ी चाहिए एक दिन के लिए और आप का मौलाना
[16:07]के घर की चाबी रख लीजिए मैं घर मुझे नहीं चाहिए जो
[16:09]मेरी जरूर है उसको पूरा कीजिए जो दुनिया की जरूर को पूरा
[16:18]करता है वो का रहा है की मुझे कर्ज दो परवरदिगार मैं
[16:21]तुझे किस तरह से कर डन तेरे यहां जरूर नहीं पी जाति
[16:30]तेरी मैं तरीका बताता हूं अगर मुझे कर्ज देना चाहते हो अब
[16:39]यहां पर फर्क बजे हो जाएगा लेकिन मैं पहले थोड़ी बजाहट करता
[16:41]चालू करने रिवायत आपके सामने पेस करता हूं यहां पर हो जाएगा
[16:47]एक दफा अब इन दो चीजों में फर्क महसूस कीजिएगा एक दफा
[16:53]इंसान अपना माल अपनी मर्जी से अल्लाह की र में खर्च करता
[17:00]है मेरी मर्जी है की मस्जिद बनाने में खर्च करूं मेरी मर्जी
[17:03]है की इमामबाड़ा बनाने में खर्च करूं मेरी मर्जी है की मजलिस
[17:08]में खर्च करूं मेरी मर्जी है की फकीर को देने में खर्च
[17:10]करूं पैसा खर्च कर रहा है अल्लाह की र में भी कर
[17:15]रहा है खुलूस के साथ भी कर रहा है लेकिन अपनी मर्जी
[17:17]से कर रहा है यह सदका है इनफैक्ट है लेकिन अल्लाह को
[17:23]कर्ज देना नहीं है इमाम फॉर्मेट हैं की अल्लाह को कर्ज देना
[17:28]क्या है रिवायत है काफी के अंदर इमाम फॉर्मेट हैं की अल्लाह
[17:33]को कर्ज देना ये है की अल्लाह की र में खर्च करो
[17:39]अपना पैसा खुलूस के साथ खर्च करो लेकिन इसमें तुम्हारी अपनी मर्जी
[17:43]भी नहीं हनी चाहिए यानी एक कम और आगे बढ़ो अपनी मर्जी
[17:48]को भी कुर्बान कर दो यह कैसे होगा की ऐसे होगा की
[17:55]रिवायत का जुमला है की ये आयत मैक्सस है सी अतुल इमाम
[17:57]खस्तान के माल अपना निकालो अल्लाह की र में खर्च करने की
[18:03]नित से वो खुलूस के साथ लेकिन अल्लाह की र में अपनी
[18:07]मर्जी से खर्च मत करो बल्कि जमाने की हुज्जत के कदमों में
[18:09]ले जाकर के रखो और कहो के ए मौला आप अपनी मर्जी
[18:13]से इसे खर्च कीजिए यह है अल्लाह को कर्ज देना यानी अगर
[18:18]कोई अल्लाह को कर्ज देना चाहे तो किसको कर्ज़ दे परवरदिगार का
[18:22]रहा है अगर मुझे कर्ज देना चाहते हो तो मेरे नुमाइंदों को
[18:24]कर्ज दो अपना माल मेरे नुमाइंदों के कदमों में रखो हुज्जते खुदा
[18:28]के कदमों में रखो और अपनी मर्जी को भी कुर्बान करो ये
[18:32]नहीं की मौला मैं ये चाहता हूं की मस्जिद बना ये लीजिए
[18:37]पैसे मस्जिद बनाया नहीं जा करके जमाने की गुजरात के कदमों में
[18:39]रखो जहां आप बेहतर समझे वहां से खर्च कीजिए ये है अल्लाह
[18:43]को कर्ज देना तो अब इसे हम 10 बराबर वापस नहीं करेंगे
[18:53]बल्कि कश्मीर बना करके वापस करेंगे क्यों क्योंकि इसने अपनी मर्जी भी
[18:59]खत्म कर दी है इसलिए अपने आप को खत्म कर दिया है
[19:04]खर्च कर रहा था लेकिन बिलख रे अपनी मर्जी और शामिल था
[19:08]अब यहां पर इसने अपने आप को खत्म कर दिया इसने कहा
[19:13]मौला आप चूंकि अल्लाह के नुमाइंदे हैं तो आप जैसे बेहतर समझे
[19:15]से खर्च कीजिए ये वो मुकाम है की जहां पर रिवायत कहती
[19:21]है की ये है मंजिल लाजी जो फ़राज़ अल्लाह कर्जन हसन की
[19:24]जब इंसान अपना माल इमाम को दे दे अनिल मोमिनीन अली सलातो
[19:34]अस्सलाम [संगीत] के ख़ज़ाने जिसके लिए इंसान अपनी अजमत को पहचान की
[19:56]वह की जिसके लिए जमीन और आसमान के ख़ज़ाने हैं ये कौन
[19:58]का रहा है मौलाए कायनात का रहे हैं अमीर मोमिनान का रहे
[20:02]हैं मुलाहिम मुस्तफायन का रहे हैं जिसके लिए है जिसकी मिल्कियत में
[20:10]है वो तुमसे कर्ज मांग रहा है बेनियाज़ है यह सर आलम
[20:18]भी उसके सामने कोई हैसियत नहीं रखना वो कमल है मतलब है
[20:24]मतलब है वो गनिया मुतलाक है फिर मौला आप ही बताइए की
[20:32]वो कर्ज मांग क्यों रहा है इमाम फॉर्मेट हैं वो इन नमिला
[20:35]परवरदिगार देखना ये चाहता है की किसके वजूद में मेरी उबडियत कितनी
[20:41]पी जाति है परवरदिगार देखना ये चाहता है की कौन मेरी बारगाह
[20:45]में कितना बारबिदा है कितना मेरे रास्ते पे आगे बड़ा है पुराने
[20:51]माजिद इरशाद फरमाता है तुम्हारा अपना नहीं है ये वो माल है
[21:03]जिसमें हमने तुम्हें अपना खलीफा बनाया है यह माल तुम्हारा माल नहीं
[21:09]है हमने तुम्हें इसको खर्च करने में अपना नुमाइंदा बनाया है अगर
[21:13]इंसान की यह सोच हो जाए की यह वजूद इन परवरदिगार का
[21:17]दिया हुआ है यह माल खुदा का दिया हुआ है ये जिंदगी
[21:21]खुदा की दी हुई है ये हयात खुदा की दी हुई है
[21:25]ये बच्चे खुदा के दिए हुए हैं ये जितनी नेमते हैं ये
[21:26]खुदा की दी हुई हैं तो फिर इंसान ये नहीं कहता मेरा
[21:29]माल मेरी मर्जी बल्कि कहता है मेरा माल खुदा की मर्जी फिर
[21:34]इंसान ये नहीं कहता की मेरा जिस मेरी मर्जी बल्कि कहता है
[21:36]मेरा जिस खुदा की मर्जी फिर ये नहीं कहता मेरे बच्चे मेरी
[21:40]मर्जी ये कहता है मेरे बच्चे खुदा की मर्जी क्यों इसलिए क्योंकि
[21:46]इंसान के सोच तब्दील हो गई अब जैसे अपना समझ ही नहीं
[21:53]रहा है की इसमें अपनी मर्जी चलाएं का रहा है जिसका है
[21:57]उसको जेबा है की वो अपनी मर्जी चलाएं मेरा तो है ही
[22:01]नहीं फिर ना माल के आने पर इंसान अपने अप्प से बाहर
[22:03]होता है ना माल के चले जान पर अब सुंडा होता है
[22:07]क्योंकि अगर ए गया तो उसका था उसने दे दिया परवरदिगार तेरा
[22:11]शुक्र है और अगर चला गया तो कौन सा मेरा था जो
[22:16]चला गया जिसका था उसने वापस ले लिया फिर ना इंसान औलाद
[22:20]के मिलने पर अधिकार को भूलता है ना औलाद के छन जान
[22:25]पर खुदा से शिकवा करता है अगर मिल गई तो परवरदिगार तेरा
[22:27]शुक्र है तूने अपना खजाना है कुदरत से औलाद आता की और
[22:31]अगर चली भी गई तो क्या हुआ कौन सा मेरी थी तेरी
[22:34]थी तूने वापस ले ली अगर आप सलातो सलाम की जिंदगी में
[22:42]जाकर के देखें तो दुनिया पर यह निगाहें के जो उनको परवरदिगार
[22:44]है मुताल की बारगाह में वर्ग इस का बना था के अंदर
[22:51]इमाम फॉर्मेट हैं की मेरे लिए गुजरा जमाने में एक भाई था
[22:57]और फिर इमाम अपने भाई की खुसूसियत बयान करते हैं बयान करते
[23:03]हैं की मेरी नजर में वो इसलिए बड़ा था क्योंकि दुनिया उसकी
[23:08]नजर में छोटी थी वो मेरा भाई मेरी नजर में क्यों बड़ा
[23:17]था की दुनिया उसकी नजर में छोटी पर जो भी अली की
[23:20]निगाह में बुलंद होना चाहता है उसका फॉर्मूला क्या है दुनिया जितनी
[23:23]उसकी निगाह में छोटी होती चली जाएगी वो अली के निगाह में
[23:27]उतना बुलंद होता चला जाएगा बेटा सबसे पहले तुम्हारा लाश आना चाहिए
[23:47]क्या है इस कलाम के पीछे कौन सी फिक्र छुपी हुई है
[23:54]एक मां अपने बच्चे से ज्यादा किसी से मोहब्बत नहीं करती उसकी
[23:59]पुरी दुनिया उसका बच्चा होता है फिर बच्चा अगर जवान हो जाए
[24:00]तो मां के क्या अरमान और क्या ख्वाहिशात होती है लेकिन ये
[24:05]मे कर्बला की जो शब हजूर हुसैन इब्ने अली की जबान से
[24:09]परवरदिगार ये कैसी मैं हैं जो अपने बच्चों को कुर्बान करना चाहती
[24:11]क्या फिक्र है यही फिक्र है की ये मेरा है ही नहीं
[24:16]ये है ही खुदा का जब ये अली अकबर है खुदा का
[24:20]तो अली अकबर की मां ये नहीं रहेगी की बेटा अपनी जान
[24:23]को बच्चा ले बेटा तू खुदा की तरफ से दिया गया है
[24:26]जब खुदा के दिन पर वक्त आया है तो सबसे आगे जाकर
[24:29]के अपनी जान को कुर्बान कर तब्दील हो जाएगी तो फिर अमल
[24:34]तब दिन हो जाएगा फिर बात करने का अंदाज तब्दील हो जाएगा
[24:47]तो सलाम की तौहीन ना कर रहे हो बाज दफा कर्बला की
[24:55]मऊ को इस तरह से पेस किया जाता है जी तरह वो
[24:59]अपने बच्चे बचाना चाहती थी वल्लाह खुदा की कसम कर्बला की मैं
[25:04]वो मे हैं की जो बढ़-चढ़कर अपने बच्चों को हुसैन इब्ने अली
[25:06]पर कुर्बान करना चाहते हैं इस तरह के कोई नोहे कोई मर्सिया
[25:13]ना हो की जिससे ये नतीजा निकले के कर्बला की मां ये
[25:15]चाहती थी की हमारा बच्चा बैक जाए नहीं वो चाहती थी की
[25:19]हमारा बच्चा जल्द जल्द हुसैन ने अपने अली पर कुर्बान हो जाए
[25:24]क्योंकि वो सिर्फ नहीं थी बल्कि वो उसे जमाने में हुसैन ने
[25:26]अपने अली की बेहतरीन सिया भी थी बेहतरीन मोहित भी थी जब
[25:34]मेरा और आपका मुकाम यह है की मैं और आप अपना सब
[25:38]कुछ हुसैन आईबी अली पर कुर्बान करने के लिए तैयार है तो
[25:41]वो जो कर्बला की मे हैं की अब अपने बच्चों को बचाना
[25:44]चाहती होगी आज एक आम मोहब एक आम सिया के जो हुसैन
[25:50]अली से मोहब्बत करता है कहता है अभी मौला मेरा सब कुछ
[25:54]आप पर कुर्बान हो जाए मोहब्बत करने वाले का ये मौका है
[26:00]तो कर्बला की मैं के अपना बचाना चाहती होगी अपने बच्चों को
[26:03]दोबारा पलट करके आते हैं अल्लाह को कर्ज देना ये है की
[26:13]इंसान अपने माल को जमाने के हुज्जत के हवाले कर दे क्या
[26:28]क्योंकि इनकी मर्जी खुदा की मर्जी है हमारा ये वो है की
[26:38]जिन्होंने अपना लफ्ज़ बीच करके खुदा की मर्जी को खरीद लिया है
[26:40]अब अगर हुज्जते खुदा अपनी मर्जी से खर्च कर रहा है तो
[26:45]हुज्जते खुदा अपनी मर्जी से खर्च नहीं कर रहा बल्कि खुदा है
[26:49]की जो अपनी मर्जी से खर्च कर रहा है और अब अगर
[26:52]इंसान कराने माजिद ही में इस कैफियत को महसूस करना चाहे तो
[26:57]आए और हजरत खदीजा सलाहुल्लाह के बड़े में ए करके देखिए की
[27:00]हजरत खदीजा साला इस खुलूस के साथ अपना माल उसे जमाने की
[27:06]हुज्जत और नुमाइंदा इलाही रसूल खुदा के हवाले कर दिया की परवरदिगार
[27:09]ए मोटा जेबा रसूलुल्लाह ने अपनी मर्जी से उसे माल को खर्च
[27:14]किया तो अब ये नहीं कहा की ए खदीजा आपने अपनी मर्जी
[27:18]से अपने माल को खर्च किया ये नहीं कहा की ए रसूल
[27:20]आपने अपनी मर्जी से इस माल को खर्च किया बल्कि परवरदिगार ए
[27:23]मुताल ये कहता हुआ नजर आता है हबीब जब हमने तुम्हें टांग
[27:30]10 पाया तो हमने तुम्हें कमी कर दिया दरअसल वो माल खतीजा
[27:32]का था लेकिन खुदा की मर्जी से घर छोड़ रहा था माल
[27:38]खतीजा कथा लेकिन क्योंकि रसूल अपनी मर्जी से खर्च कर रहे थे
[27:44]यानी खुदा अपनी मर्जी से खर्च कर रहा था और जी माल
[27:47]को खुदा अपनी मर्जी से खर्च करता है उसे माल को अपनी
[27:48]तरफ निस्बत देता है ये नहीं कहता की हबीब हमने तुम्हें टांग
[27:52]10 पाया तो मां ने खतीजा के जारी से गनी कर दिया
[27:56]नहीं ए हबीब जब हमने तुम्हें टांग 10 पाया तो हमने तुम्हें
[27:58]गनी कर दिया वो माल माल खतीजा कमल था लेकिन क्योंकि रजाई
[28:07]खुदा से खर्च हो रहा था मर्जी है परवरदिगार से खर्च हो
[28:08]रहा था तो वो माल खतीजा का माल नहीं था बल्कि वो
[28:12]खुदा बंदे मुताल की मर्जी से खर्च हो रहा था इसलिए खुदा
[28:16]का रहा है वो माल मेरा माल है गाया ऐसे है जैसे
[28:17]खदीजा ने मुझे कर्ज हंसना दे दिया बयान करते हैं कहते हैं
[28:26]की अगर कोई कम माल देगा तो खुदा कसीर बना करके पलटाएगा
[28:31]लेकिन अगर कोई कसीर माल देगा तो खुदा क्या देगा खतीजा ने
[28:33]कसीर माल परवरदिगार है बारगाह में दिया खुदा ने कहा की अगर
[28:38]कोई आम चीज देता तो मैं कश्मीर बना करके पलटा था खतीजा
[28:41]तूने कसीर माल दिया है मैं तुझे कौसर की सूरत में फातिमा
[28:46]जा रहा था [संगीत] सल्लल्लाहु अलेही वल्लम तूने अपना सब कुछ हमारे
[28:58]रास्ते में कुर्बान कर दिया अब मेरे पास भी जो बेहतरीन तोहफा
[29:01]है फातिमा की सूरत में वो मैं रसूल को आता करूंगा लेकिन
[29:06]तेरे जारी से अदा किस तरह से अपना माल लुटाया यह नहीं
[29:12]है कैफियत खतीजा सलाम अल्लाह अलैह की यहां की या रसूल अल्लाह
[29:16]बताइए कहा खर्च करना है एक दफा ये होता है ना की
[29:21]हम माल मेरा माल है मौलाना आप बताइए कहां देना है नहीं
[29:23]खतीजा के यहां कैफियत यह है की या रसूलल्लाह आज के बाद
[29:27]ये माल मेरा माल है ही नहीं ये आपका माल है जहां
[29:31]चाहे आप खर्च करें जहां अपने मर्जी को कुर्बान कर देता है
[29:46]अल्लाह के हबीबाज के बाद से ये माल खदीजा का माल नहीं
[29:54]है घर आपका घर है ये पाल आपका माल है वह अनामतहो
[29:56]और आज के बाद से मैं भी आपकी कमीज हूं भतीजा के
[30:01]जुमले तसव्वर करें किस तरह से अपना माल परवरदिगार है जिसका माल
[30:13]ऊंट पर लाख करके जाता और मबदला ऊंट पर लात कर के
[30:19]लता आता हो रिवायत ने लिखा की एक दो ये चंद ऊंट
[30:24]की बात नहीं थी हजारों ऊंट पर खदीजा का माल लेती जरत
[30:29]जाता था हजारोंतो पर हिमालय जा रहा था लेकिन वो बीबी जब
[30:33]समझ में ए गया की हम कहां पर है तो कहा की
[30:37]यार रसूल अल्लाह घर आपका घर है खदीजा का सर माल आपका
[30:43]माल है और सिर्फ यह नहीं बल्कि आज के बाद से खतीजा
[30:45]भी आपकी कमीज है रसूल अल्लाह जी तरह से याद किया करते
[30:53]थे इस बीबी को उसकी कोई मिसल नहीं मिलती जब हर एक
[31:12]ने अपने हाथ को मुझे रॉक हुआ था खतीजा मुझमें पर लूट
[31:16]रही थी ताकि जब पति मक्का के बाद अजीब रिवायत है की
[31:21]जो फतेह मक्का के बाद रसूल अल्लाह मक्का में दाखिल होना चाहते
[31:25]थे मक्का के दरवाजे पर बैठ गए किसी ने आकर के रसूल
[31:27]अल्लाह से कहा या रसूल अल्लाह चलिए मक्का फतह हो गया है
[31:31]आज के बाद मक्का है मक्का मुसलमान का है मक्का इस्लाम का
[31:36]है मुशरिकीन इस्लाम कुबूल कर चुके हैं यह हथियार दाल चुके हैं
[31:39]ये वही मक्का है की जहां रसूलल्लाह को पत्थर मारे जाते थे
[31:41]उजूरी राखी जाति थी कचरा फेंका जाता था अजीयतें दी जाति थी
[31:46]या रसूल अल्लाह आई वह मक्का फतह हो गया है रसूल अल्लाह
[31:50]ने कहा मेरा मक्के में जान को जी नहीं करता कहा या
[31:51]रसूल अल्लाह क्या हो गया कहा मैं मक्के में कैसे जाऊंगी जब
[31:55]मेरे साथ खतीजा नहीं है एक वो जमाना था की जब इसी
[31:58]मक्का के अंदर सब मेरी मुखालिफत किया करते थे लेकिन खदीजा मेरे
[32:00]साथ हुआ करती थी आज सब साथ है तो क्या हुआ भतीजा
[32:04]मेरे साथ है इस तरह से याद किया करते थे कोई दिन
[32:10]अल्लाह के नबी का नहीं गुजरा था की जब खतीजा कुबरा सलामउल्लाले
[32:14]है कोई याद ना करें हीरा कितना ऊपर है आज सीढ़ियां बनी
[32:24]हुई है उसके बावजूद जवानों को ऊपर जान में 50 55 मिनट
[32:26]का वक्त लगता है सांस फूल जाता है इंसान आप जाता है
[32:29]रास्ते में कई दफा प्यास लगती है उसे जमाने में कुछ चिड़िया
[32:32]नहीं थी चट्टान थी और खतीजा रोज खाना लेकर के रसूलल्लाह के
[32:39]लिए और मैं कहूंगा की कमल यह नहीं है की खड़ी कमल
[32:46]यह है की जो नौकर के जारी भिजवा सकते हो वो खुद
[32:50]रसूल अल्लाह की रेखा ना लेकर के जा रहा है जब रसूल
[32:56]अल्लाह मस्जिद में मस्जिद और हराम में नमाज पढ़ने के लिए आते
[33:00]हैं तो फकीर अगर इंसान तसव्वर करें तो खाने कब जो बेहतरीन
[33:07]मकान है उसमें बेहतरीन नमाज पड़ी जा रही है कौन पढ़ा रहा
[33:12]है मुस्तफा पड़ा रहे हैं और कौन पीछे पद रहा है मुर्तजा
[33:14]और खदीजा पीछे नमाज पढ़े ये इस्लाम की बेहतरीन नमाज है की
[33:20]जो खाना है कब मैदा की जा रही है रसूल अल्लाह पर
[33:23]पत्थर मारे जाते हैं की रसूल अल्लाह जितने भी परेशान होते थे
[33:28]जैसे ही दरवाजा खतीजा के अंदर कम रखते थे रसूल अल्लाह की
[33:29]परेशानी या दूर हो जय करते हो वो बीबी एक वक्त यह
[33:53]ए जाए की कहा की जब से अभी तालिब में थे 3
[33:57]बरस रहे ढाई साल खतीजा ने अपना माल लुटाया और जब तक
[34:01]खतीजा के पास माल का एक सिक्का भी बाकी रहा अब्दुल मुट्टलिब
[34:03]के बच्चों पर एक दिल फला नहीं आया लेकिन जब खतीजा का
[34:08]माल खत्म हो गया तो अब आलम ये था की लोग जो
[34:13]जन वाले रिश्तेदार थे वो रात की तरीके में चुप करके खजूरों
[34:15]का एक कष्ट रख के चले जाते थे तारीख ने जुमला लिखा
[34:21]अजीब है ना अजीब है जुमला लिखा की जब खजूर आई थी
[34:26]तो एक वक्त में पुरी खजूर नहीं खाता थे खजूरों के टुकड़े
[34:29]करते थे एक वक्त में एक टुकड़ा खाता थे दूसरे वक्त में
[34:34]दूसरा टुकड़ा खाता थे जब खजूर खत्म हो जाति थी तो उसे
[34:43]गुठली को मुंह में रखते थे जो गुठली के ऊपर गुड़ा बच्चा
[34:44]र जाता है उससे अपनी भूख को मिटते थे जब खजूर खुश
[34:52]हो जय करती थी तो उसके बाद उसे खजूर की गुठलियों को
[35:04]जमा किया जाता था उसको पीस जाता था और उसका पाउडर यह
[35:12]आलम है आंखों का वह की जिसके घर में एक वक्त में
[35:20]इतना माल हो उसे पर यह फाल्कन की नौबत ए जाए लेकिन
[35:23]एक दफा रसूलुल्लाह से शिकवा नहीं किया बल्कि हमेशा मुस्कुरा करके कहा
[35:26]यार रसूल अल्लाह इससे ज्यादा भी होता तो खदीजा आपकी रास्ते पे
[35:28]कुर्बान कर देती थी वो की पूरा मक्का खतीजा के गिर घूमता
[35:36]हो और एक जमाना वो ए जाए की जब औरत पर जो
[35:38]सबसे अमीर वक्त होता है की जब उसके विलादत होने वाली होती
[35:42]है फातिमा की विलादत का वक्त वो पूरे मक्का में सिक्कों एक
[35:46]खातून ना हो के जो खतीजा की मदद के लिए जाए कोई
[35:47]एक खातून नहीं कोई खतीजा की मदद के लिए लूट दिया और
[36:04]सिर्फ यह कमल नहीं है बल्कि कमल ही है की कभी शिकवा
[36:09]नहीं किया शिकवा तो क्या कभी माथे पर बाल भी नहीं आया
[36:11]कभी चेहरे से भी ये जाहिर नहीं हुआ की खड़ी और होता
[36:19]तब भी आपके रास्ते पर कुर्बान कर दे यह खदीजा का खुलूस
[36:25]था की जिसके नतीजा में परवरदिगार है मुताल ने अपनी जैब से
[36:28]बेहतरीन तोहफा फातिमा जरा की सूरत में खदीजा सहारा खतीजा कुबरा को
[36:34]आता किया पसंद किया और फिर खतीजा के माल को अपने आप
[36:41]से निस्बत दी का बाबा ज्यादा कहा इसने पकाना ए हबीब गाया
[36:45]हमने तुम्हें नहीं कर दिया तो जब इस दुनिया से जा रही
[36:52]है तो किस आलम में जा रही है की रिवायत ने लिखा
[36:55]की फागुन की वजह से खदीजा की हालात ये हो गई है
[37:00]की जी कमजोर हो चुका है बिल्कुल वही हालात है की जी
[37:06]दुनिया से जाते वक्त फातिमा जरा की हो गई की रिवायत लिखा
[37:10]की मजाल अभी आना हिल जी फातिमा का बाबा चला गया तो
[37:15]फातिमा का बदन घुलता चला जा रहा था खड़ी या नहीं कर
[37:31]दिया तुम्हारे पास जो कुछ था तुमने मेरे रास्ते में लूट दिया
[37:41]अब तुम्हारे पास बच्चा क्या है अफसोस का मुकाम यह नहीं है
[37:50]की खतीजा के साथ मुशरिकों ने क्या किया अफसोस का मुकाम यह
[37:54]है की मुसलमान को तो मालूम था की खदीजा के कितने ऐसा
[37:59]नात है की खदीजा की बेटी दरबार में जाकर के अपना हक
[38:07]मांगे मुसलमान के अंदर इतनी गैरत नहीं थी की कोई खड़ा होकर
[38:15]के मदीने में कहता की फातिमा खतीजा की बेटी है जब हम
[38:19]पर फकीर्त खदीजा ने अपना सब कुछ लुटाया था आज फातिमा जुम्मानती
[38:21]ऐसे दे दो खदीजा ने इस्लाम का पेट पलटा खतीजा ने तुम्हारे
[38:31]रसूल की हिफाजत की थी क्या खतीजा का हक यह था की
[38:36]खतीजा के बच्चे दरबदर भटकती रहे ताकि तुम खदीजा की बेटी के
[38:44]दरवाजे पर जाकर के आज लगाओ खतीजा की बेटी का हक यह
[38:52]था की खड़ी पर दरवाजा गिराओ खदीजा ने क्या कुछ नहीं किया
[38:59]तुम्हारे लिए मुसलमान खदीजा ने अपना सब कुछ इस्लाम के लिए लूट
[39:02]दिया की तुम में इतनी गैरत नहीं थी की मदीने में एक
[39:06]बांदा कोई खड़ा होकर के कहे की जो भी है फातिमा का
[39:11]हक है नहीं है फातिमा खदीजा की बेटी है मांगती है दे
[39:13]दो क्या खतीजा के नवाजों का हक था की खदीजा के नवाजों
[39:19]को मदीने से निकाला जाए क्या खतीजा की नमाजियों का हक ये
[39:27]था की खतीजा की नमाजियों के सरों से निगाहें को छीना जाए
[39:31]क्या मुसलमान में क्यों इतनी गैरत नहीं थी बाकी तमाम बातें अपनी
[39:37]जगह सिर्फ ये कहते की हम इसलिए जंग नहीं करेंगे क्योंकि खदीजा
[39:41]के बच्चे सामने ए गए हैं इसकी मां का हम पर एहसान
[39:44]है ना दुनिया में अगर उसके आप ने एहसान किया उसका बेटा
[39:49]पोता ए जाएगा खड़े होकर के सलाम करता है कहता है तुम्हारे
[39:53]आप ने मुझे एक मुश्किल वक्त में मुझमें पर एहसान किया था
[39:55]मुसलमान में इतनी गैरत नहीं थी की जी खतीजा ने अपना सब
[39:59]कुछ दे करके इस्लाम का पेट पाल हो उसके बच्चों के साथ
[40:03]अच्छा सुलूक करें यहां तो मुसलमान थे यहां तो रसूलल्लाह का कलम
[40:15]पढ़ने वाले थे इनको क्या हो गया था क्या भूल गए तुम
[40:20]भतीजा कैसा नात की खतीजा ने एक सिक्का अपने पास नहीं रखा
[40:26]सब कुछ तुम्हारे नबी के हवाले कर दिया क्या भूल गए की
[40:30]यही फातिमा है की जिसने इस्लाम के लिए शिब अभी तले में
[40:35]फकीर कटे रिवायत का जुमला एक है की जब खतीजा इस दुनिया
[40:40]से रुखसत हो गई क्या उसके बाद फातिमा की हालात ये थी
[40:45]की यह अपने बाबा के गिर घुमा करती थी और एक जुमला
[40:50]कहती थी बाबा कहानी ना बताओ मेरी मां कहां है बार-बार यही
[40:55]सवाल करती थी बाबा ये बताओ हमारी मां कहां है बाबा ये
[40:59]बताओ हमारी मां का रिवायत का जुमला है की जब बहुत ज्यादा
[41:03]फातिमा की हालात हो जाति थी जिब्रील नाजिल होते देखा यार रसूल
[41:10]अल्लाह फातिमा को हमारा सलाम दीजिए और फातिमा को कहिए तुम्हारी मां
[41:13]जन्नत में बहुत अल मुनाजिल पर है खुदरा मत रो फातिमा का
[41:19]रोना आसमान वालों से देखा नहीं जाता तो रसूल ए गिरामी फातिमा
[41:29]की उंगली पढ़ते थे जन्नतुल माला खदीजा की कब्र पर ले जाते
[41:31]थे और कहती थी बेटी जितना रोना चाहती हो मां की कब्र
[41:35]के किनारे बैठ करके रो लो के चार-पांच बरस की बच्ची अपनी
[41:39]मां के कब्र पर बैठकर के रो लेती थी फातिमा का दिल
[41:41]हल्का हो जाता था दिल ठंडा हो जाता था मां की याद
[41:46]कुछ कम हो जाति थी मैं कहूंगा शहजादी ये कौन है कामिनी
[41:51]मैयतीम हो गई वाकई कामिनी में यतीम होना कोई करमडास नहीं है
[41:54]लेकिन बीबी मां की कब्र का पता तो था की जो जा
[41:59]करके रो लेती थी जब आप इस दुनिया से जाएंगे अली जैनब
[42:03]की उंगली पड़कर के कहा लेकर के जाए मदीने में कहा जा
[42:06]करके जैनब से कहे की जैनब ये तेरी मां की कब्र है
[42:10]दिल भर कर के यार रन जी भर कर के अब आंसू
[42:13]भा ले अपना दिल ठंडा कर ले लेकिन मैं कहूंगा जैनब आप
[42:20]भी खुशनसीब थी मां की कब्र का नहीं पता था लेकिन गले
[42:24]से लगाने वाला आप तो था साइन से लगाने वाले भाई तो
[42:29]थे मोहब्बत और शफकत करने वाले ऐसा और अकराबाद तो थे लेकिन
[42:32]एक कर साल की यतीम और कर्बला में भी है की जिसको
[42:37]आप की कब्र तो ना मिली एक बेसर का लाश मिला और
[42:41]आप की कब्र पर आकर के जब बेटी तो कहा बाबा देखो
[42:46]मेरे बंदे छन गए बाबा देखो मेरे दमन में आज लगी बाबा
[42:52]बाबा आखिरी दफा सकीना को अपने साइन पे सुला लो सकीना को
[42:54]कर्बला के मां में कहानी नींद नहीं आई लाश है हुसैन से
[43:01]आवाज आई ए मेरी बेटी मेरे साइन पे सो जा लाल मिनेबल
[43:11]मोहम्मद वाले मोहम्मद का इबादत को अपनी बारगाह में काबुल मकबूल फरमाए
[43:19]परिवार उसमें जो हमने कायम और श्याम अंजाम दिए उसे बारे बजा
[43:27]अपनी बारगाह में काबुल फार्मा बड़े इलाही आई इन डी आने वाले
[43:32]मी मोबाइल का रमजान के बाकी अय्याम में हमें बेहतरीन अंदाज में
[43:35]कयामत आयाम के जारी तुझे राजी करने के तौफीक आता फार्मा बड़े
[43:38]इलाही तुझे वेस्ट मोहम्मद वाले मोहम्मद का परवरदिगार इला आलमीन मोहब्बत खतीजा
[43:45]औलाद खदीजा की मोहब्बत को परवरदिगार हमारी आइंदा आने वाली नसों में
[43:49]कायम फार्मा अली और फातिमा की मोहब्बत को हमारी आइंदा आने वाली
[43:52]नसों में कायम फार्मा परवरदिगार हमें कोई गम ना दे शिवाय हुसैन
[43:58]के परवरदिगार जो मोमिनीन मुश्किलात परेशानियां में गिरफ्तार है हाजतों को लिए
[44:04]आते हैं परवरदिगार तुझे खतीजा कुबरा की सखावत का वास्तव पर अधिकार
[44:07]इस दुनिया से खदीजा के जान के बाद फातिमा के आंसू बहाने
[44:13]का वास्तव परवर इन तमाम तरह फातिमा की तमाम तरह इनकी तमाम
[44:17]तिला तो परेशानियां को दूर फार्मा परवरदिगार तो मोहम्मद वाले मोहम्मद का
[44:22]दुनिया हमारी जिंदगी को नूर कुरान हमारी कब्र को नूर कुरान वाले
[44:29]बहस से मुनव्वर फरमान कयामत के दिन हमारे वजूद को नूर ए
[44:32]कुरान अहलेबैत से मुनव्वर फरमान परवरदिगार दुनिया में कुरान और अहलेबैत का
[44:35]रास्ता आखरत में कुरान ओ अहलेबैत की सफाहट नसीब फार्मा परवरदिगार दुनिया
[44:41]में कुरान और अहलेबैत की तालीमात की जारी से अपनी जिंदगियां को
[44:44]बेहतर बनाने की तौफीक आता फार्मा परवरदिगार जो दुनिया से चले गए
[44:49]हैं परवरदिगार जंग के तमाम मेबिन हाजिर एन बनियान के तमाम मरूमिन
[44:52]जिनका कोई फतिया पढ़ने वाला नहीं है जिनके लिए कोई दुआएं बख़्जफिरत
[44:54]करने वाला नहीं है हर वो के मोहब्बतें अली जी अपने अभी
[44:59]तालिब और फातिमा फातिमा के बच्चों की मोहब्बत को लेकर के दुनिया
[45:02]से गया है परवरदिगार अगर गुनहगार है उसके तमाम कबीर और सखरा
[45:07]के मक्फिरत फार्मा परवरदिगार तू वास्ता मोहम्मद वाले मोहम्मद का जो अपराध
[45:12]दिन है मूवी ने इस्लाम की सर बुलंदी के लिए कम कर
[45:16]रहा है परवरदिगार उन सब की तौफीक हाथ में इजाफा फरमाए कर
[45:19]मर्जी नेहा मकान मौजे में रहबरी का सैया दराज फार्मा परवरदिगार अमेरिका
[45:23]इजरायल ऑल खलीफा समेत वो तमाम तरह ताकत देंगे जो इस्लाम के
[45:27]सामने खड़ी हुई है अगर काबिले इस्लाह नहीं उन सब को नहीं
[45:31]तो नाबूत फार्मा परवरदिगार हमारी तमाम तरह इबादतें खुशियां गम रमजान ईद
[45:35]जमाने की हुज्जत के बगैर अधूरा है परवरदिगार अपनी आखरी इज्जत इमाम
[45:42]जमा के जरूर में ताज़ील फार्मा हम सब को हजरत के आबान
[45:44]अंसार और माहएबीन और मूणतजारी में सकरार दे रहमत का यार हमार
[45:49]आमीन बजाएं नबी ये जमीन ताहिरीन इल्लल्लाह [संगीत]
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