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Mah e Khuda or Kalam e Ellahi | H.I. Syed Mushbir Abbas Rizvi
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Record date: 26 Mar 2023
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
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Transcript
[1:12][संगीत] सलामन नहीं आका माफलाल फजर मोहम्मद वाले मोहम्मद [संगीत] इकट्ठा और
[3:15]जमा है और मां महेशियम नहीं ए शक्ति है मशहूर हूं यहां
[4:15]की इंतजामियां और हमारे मोमिनीन के और हमारे किया मैं बगैर किसी
[4:29]तन्हा के मुक्तसर आपकी समातों को रहमत दूंगा मुक्तसर सी इस मुद्दत
[4:38]में मेरा मौजूद माहे खुदा और कल में इलाही यानी आसन लफ्जों
[4:47]में कुरान और माहे मुबारक के रमजान इन दोनों का इतना गहरा
[4:55]ताल्लुक है की जैसे कुरान का जुजदान से ताल्लुक होता है और
[5:02]इमाम मेरे और आपके इमाम मासूम फॉर्मेट हैं की रवि अल कुरान
[5:11]शेरों रमजान हर चीज की एक बाहर है मार्च का महीना आता
[5:26]है बेल बूटे दोबारा उन्हें शुरू हो जाते हैं वह जमीन के
[5:29]जो कल तक मुर्दा थी उसमें दोबारा सब्जा उगना शुरू हो जाता
[5:36]है उसमें जो कल तक मुर्दा थी आज वह जिंदा होना शुरू
[5:41]हो जाति है इसी फसल की तब्दीली को मौसम की तब्दीली को
[5:46]और अच्छी और खुशगवार तब्दीली को बाहर कहा जाता है तो इसी
[5:55]तरह से पूरा साल तिलावत किताब हम करते हैं पढ़ने हैं लेकिन
[6:00]इस महीने में तिलावत का कुछ और ही तबर्रुक हमें नसीब होता
[6:07]है और कुरान की बाहर माहे मुबारक के रमजान है माहे नजूल
[6:25]कुरान भी है देखिए जब हम कहते हैं की कुरान और माहे
[6:29]मुबारक के रमजान सबसे पहले ताल्लुक तो यह है की खुदा बंदे
[6:45]मुताल अपने इस मिल में रेप को यानी कुरान को जब उतारना
[6:50]चाहा और नाजिल करना चाहा और बसर को देना चाहता हूं आपसे
[7:03]तो हम किसी खास मौके की तलाश में नहीं रहते हैं की
[7:08]ये वक्त ए जाए ये वक्त ना आए दिन का वक्त हो
[7:13]रात का वक्त हो लेकिन जब हमें इंतहाहै हम बात आपसे कहानी
[7:16]हो तो हम उसके लिए एक मुनासिब वक्त की तलाश में रहते
[7:21]हैं की जब ये वक्त आए जब ये सामने वाला तैयार और
[7:25]आमादा हो तो फिर हम इससे यह बात करें तवज्जो है ना
[7:29]पैगंबर या कर्म को सूरा मुजम्मिल में किताब होता है हम करीब
[8:01]एक बहुत हम बात तुम पर नाजिल करने वाले हैं एक हम
[8:06]हकीकत को उतारने वाले हैं इसके बाद जब मौका आया मुनासिब मौका
[8:23]कब आया इस हम किताब और हम बात और हम इल में
[8:30]इलाही को बसरियत को देने के लिए कोई मौका माहे मुबारक के
[8:32]रमजान की शब कादर से बेहतर ना था बात इतनी हम के
[8:42]जिसके मुकदाप पुरी बशरीयत है जिसके मुखातिब सारे इंसान हैं और बात
[8:51]इतनी हम के जिसकी एक्सपायर डेट नहीं है वह मैसेज मां वह
[8:55]मैसेज शुरू हुआ था वह कयामत रहेगा ऐसा एक मैसेज देने के
[9:07]लिए सबसे अच्छी चुन्नी थी और मौका भी सबसे अच्छा चुना था
[9:16]क्योंकि शख्सियत ऐसी चुन्नी थी की जिसके बड़े में पता हो की
[9:24]वह खूनी जिगर पी के भी कुर्बानी और ईशर दे के भी
[9:29]घर की कुर्बानी माल की कुर्बानी आबरू की कुर्बानी सब चीजों को
[9:37]की कुर्बानी देकर भी वो बसरियत तक इस मैसेज को पहुंचाएगा ऐसी
[9:41]शख्सियत को कुरान की अमानत देनी थी कुरान की अमानत कोई आम
[9:52]अमानत नहीं थी सौंपना था किस पुरी बशरीयत के हवाले करना था
[9:55]पुरी बशरीयत के हवाले करने के लिए कोई एक ऐसा पहले वास्ता
[10:00]होना चाहिए की जो सर चश्मा से डायरेक्ट लेने की सलाहियत रखना
[10:04]हो और वह हस्ती इस पुरी आलम में बसरियत में शिवाय मेरे
[10:12]और आपके आखरी नबी इमाम अहमद मुस्तफा मोहम्मद ए मुस्तफा सल्लल्लाहु अलेही
[10:20]वल्लम के अलावा और कोई ना था इंतिखाब गया वक्त के इंतिखाब
[10:43]में सबसे हम वक्त का इंतिखाब किया शब कद्र का अच्छा शब
[10:48]नुजुले कुरान है नजूल का मतलब है उतारना किसी चीज का नाजिल
[10:59]होना जैसे बारिश के कतरे ऊपर से नीचे की तरफ नाजिल हुआ
[11:02]करते हैं उतरते हैं लेकिन अगर एक ऐसी हकीकत के जो आसमानी
[11:13]हकीकत होती है उसको जमीन वालों को देना हो तो इसे भी
[11:18]कहा जाता है की हमने उसे हकीकत को उतारा है नाजिल किया
[11:21]है नाजिल किया है कुरान को उतारा है किस पर उतारा है
[11:30]अकरम पर उतारा है ताकि इस सर्च करता रहे पुरी बस शरियत
[11:46]को इस इसके खानदान का आखिरी फर्क इस दुनिया के आखिरी दिन
[11:54]तक क्योंकि जिंदा रहने वाला है तवज्जो है ना इस पैगंबर केव
[12:04]का जो आखिरी फर्ज है वह खुदा बंदे मुताल का असली फैसला
[12:12]यह है की वो कयामत कयामत तक रहने वाला है जब तक
[12:17]किताब है हाले बैट है जब तक हाले बैट है किताब है
[12:19]जब तक किताब है किताब का पैगाम पहचाने वाले हाले बैट है
[12:26]जब तक हाले बैट थे उनके पास ये अजीम तारीन टफे इलाही
[12:31]कुरान की सूरत में मौजूद है पर सुकरात किया गया आपके अच्छा
[12:39]अब सवाल है जब पुराने करीम को शब कद्र में अच्छा मौलाना
[12:46]साहब आपने यह बता दिया बहुत अच्छा आज हमें मालूमात में इजाफा
[12:52]किया के सबसे अच्छा वक्त शब कद्र का और सबसे अच्छा कलाम
[12:59]और सबसे अच्छा रेप का पैगाम देकर भेज दिया हमारे लिए क्या
[13:08]मैसेज है यह जो हम जी मौजो पे गुफ्तगू कर रहे हैं
[13:11]की माहे खुदा और कल में इलाही यानी कुरान और माहे मुबारक
[13:17]के रमजान अब तवज्जो कीजिएगा साड़ी बात और सर मैसेज इसी में
[13:23]छुपा हुआ है हमारे बुजुर्ग की यह रमेश रही है बल्कि हमारे
[13:30]बुजुर्गों की क्या हमारे अहम से ये रवीश रही है की वह
[13:36]तवज्जो कीजिएगा शब कद्र को अपने के लिए शब कद्र को अपने
[13:45]के लिए बुजुर्गों समझ रहे हैं मेरी बात शब कद्र को अपने
[13:51]के लिए वो माहे रज्जब से अपनी तैयारी शुरू करते हैं माहे
[13:55]रज्जब से अपनी तैयारी माहे रज्जब से रोज रखना शुरू करते हैं
[14:01]माहे शाबान में और एक रोज रखते हैं फिर माहे मुबारक के
[14:07]रमजान के रोज रखते हैं यहां तक के शब कद्र की तैयारी
[14:09]उनकी मुकम्मल होती है जब यह दो महीना 21 दिन या दो
[14:17]महीना 23 दिन मुकम्मल होते हैं तो उसे 23वें दिन में उनको
[14:23]तोहफे इलाहिज़्सर होता है शब कद्र का सबसे बड़ा तोहफा यही कुरान
[14:36]है वो तोहफा वो अरमगन वो गिफ्ट गॉड गिफ्ट की जिसे पैगंबर
[14:49]अकरम पे उतारा गया था उसकी पुरी हकीकत समेत तवज्जो कीजिएगा इसी
[14:53]दिन हर साल तमाम इंसानों के दिलों पे उतारा जाएगा उनकी शख्सियत
[15:00]के कद को देख के देखिए ये ऐसे ही है की आप
[15:11]जितनी जोली फैलाएंगे आपको उतना ही तबर्रुक मिलेगा आपका ज़र्फ़ जितना बड़ा
[15:19]होगा उसकी अतः उतनी ही ज्यादा होगी है ना ऐसे उसकी अतः
[15:22]में कोई कमी नहीं है हमारी जर्फियत और हमारे लेने के स्टाइल
[15:27]में कमी है हमारी जोली छोटी है हमारा दमन कोटा है बस
[15:34]अब समझते जाइए अब यही से नतीजा ले बहुत हम बात करने
[15:40]जा रहा हूं माहे मुबारक के रमजान में पहले मां मां के
[15:44]पहले दिन से 23 दिन तक हमें यही तैयार किया जाता है
[15:49]बल्कि माहे रज्जब से तैयार किया जाता है अगर देखा जाए तैयार
[15:52]किस लिए किया जाता है की अपनी जर्फियत और शब कद्र में
[16:00]जो तुम्हें मिलने जा रहा है उसके लिए तैयारी पकड़ो उसके लिए
[16:05]अपनी जोली को वीडियो एरीज करो ताकि शब कद्र में जो तुम्हें
[16:12]मिलन चाहिए वो मोमिनीन में जो सबसे साले मोमिनीन को जो तबर्रुक
[16:18]मिलता है वो हमें नसीब हो जाए माहे मुबारक का तोहफा कुरान
[16:26]है अच्छा मौलाना साहब कुरान तो हमारे सामने मौजूद है की मेरे
[16:38]भाई कुरान तो सबके सामने मौजूद है कुरान तो बुरे से बुरे
[16:45]काफिर के सामने भी मौजूद है अच्छे से अच्छे मन के सामने
[16:51]भी मौजूद है लेकिन एक होता है कुरान और एक होता है
[16:54]इल कुरान देखो रिसालत की गवाही देने के लिए ए रसूल अल्लाह
[17:06]काफी है और वो इंसान का भी है वो हस्ती के जिसके
[17:12]पास इल में किताब है जिसके पास इल में किताब ए जाता
[17:18]है वो आसमान के रास्तों को जमीन के रास्तों से बेहतर सक
[17:21]करने लगता है हमें भी इस रास्ते पर चलना है वो ए
[17:30]गई वो मारे फैट वो कुरान का तबर्रुक कुरान का तबर्रुक क्या
[17:36]है कुरान तो हमें एक पता है 114 सुरेश में कद्र में
[17:41]मिलने क्या वाला है जिसके लिए परवरदिगार ए आलम शुरू से का
[17:51]रहा है की तैयारी पकड़ो पेट का रोज रखो इसके साथ-साथ आंखों
[17:59]का रोज रखो कान का रोज रखो जबान का रोज रखो यहां
[18:07]तक जैसे लोगों को यह कहा जा रहा है की दिल का
[18:08]और जहां का भी रोज रखो हमारे और आपके लिए तो नहीं
[18:13]है ना वह तो लेवल बहुत ऊंचा है ना दिल का दिल
[18:18]में भी गुना का ख्याल ना आए दिल का रोज वो तो
[18:23]हमने और आप हमसे और आपसे तो बहुत मुश्किल कम है लेकिन
[18:27]कम से कम आंखों का रोज आंखों का रोज मेरे और आपके
[18:33]चाटे इमाम इमाम में जफर सादिक अली सलाम वो जब फार्मा रहे
[18:44]हैं की जब ए मन तू अपने शिकम का रोज रख रहा
[18:50]है तो कोशिश यह करके अपनी आंखों कानों और जबान कभी रोज
[18:58]रख वह मेरे और आपके मौला यही हमें सीखना छह रहे हैं
[19:01]की यह रोज जितना ज्यादा तुम्हारा सुपर से सुपर होता जाएगा नसीब
[19:09]होता चला जाएगा यह जो 23वीं किया 21 वन की सब आएगी
[19:18]जिसमें हमें मिलने जा रहा है हम कुरान को सर पे रख
[19:19]के जो तबर्रुक के कुरान और हाले बैट लेने जा रहे हैं
[19:24]चाटे इमाम ये बाटला रहे हैं की देखो अपने अंदर महारत पैदा
[19:31]करो अपने अंदर क्वालिटी पैदा करो क्वालिटी कब से पैदा करोगे अगर
[19:35]कर सकते हो तो माहे राजा से लेकिन आम मोमिनीन नहीं कर
[19:40]सकते जाहिर सी बात है मुश्किलात है चले शाबान से शाबान एन
[19:43]हुआ शाबान के एक दो रोजी रख के वो भी ना हुआ
[19:48]कम से कम मां है मुबारक के रमजान से और माहे मुबारक
[19:51]के रमजान से जब हम यह तैयारी शुरू करते हैं तो हमारी
[19:54]तैयारी अच्छे तरीके से हो क्या ही बेहतर है की जब इंसान
[20:03]अपने आप को हल से बच्चा रहा है खुदा की खातिर तो
[20:08]अपने आप को हराम से क्यों नहीं बच्चा सकता है भाई आम
[20:10]दोनों में तो खाना पीना हल है जब उससे इंसान अपने आप
[20:17]को खुदा की खातिर इन 30 दोनों में बच्चा सकता है रोजी
[20:22]की जो आयत है 183 सूरा बकारा की या आयु कुटी वाले
[20:32]तोहफा क्या नसीब हो रहा है तोहफा है तोहफा इलाही है की
[20:44]जो हमें और आपको दिया जा रहा है डर हकीकत वो तोहफे
[20:46]इलाही क्या है शब कद्र में दिया जा रहा है उसका आखिरी
[20:51]जो मरहला है आता का वो है शब कद्र इसीलिए रिवायत में
[20:57]है की जब एक मन शब कद्र को और उसके अमाल को
[21:03]मुनासिब और अच्छे अंदाज में करके जब शुभ करता है तो गाया
[21:05]ऐसा है की जैसे सिक्का में मदर से ताजा ताजा मूतवालिद हुआ
[21:11]हो अब उसको कहा जाता है की आप नई जिंदगी की इब्तिदा
[21:17]करो अब तुम्हारे सारे गुना माफ हो गए तुम्हारे अंदर वह तक्वे
[21:26]की सलाहियत कमांड पैदा हो गई है यह मुबारक के रमजान और
[21:34]मिल में कुरान हर एक को शेव कद्र में उसकी जर्फियत उसकी
[21:42]सलाहियत के मुताबिक कुरान का इल दिया जाता है देखिए दोस्तों यह
[21:51]किताबें इलाही इल में इलाही है तवज्जो कीजिएगा की जिसको 600 सपू
[22:00]में परिवार ए आलम ने एक समंदर को केन में समेत दिया
[22:08]है इसकी इम्तिहान नहीं होती है इसकी कोई इम्तिहान नहीं है यहां
[22:12]तक के जब ये कयामत के दिन कुरान खुदा की बारगाह में
[22:18]पहुंचेगी तो यह शिकायत करेगा की मुझे लोगों ने फायदा ही नहीं
[22:21]उठाया यानी इसकी इम्तिहान नहीं होगी यहां तक के यहां तक के
[22:24]बड़े-बड़े औलिया जिन्होंने गौरव फिक्र करके पता नहीं क्या-क्या लोकाट तफ्सीरे कुरान
[22:31]के निकले हैं कयामत के दिन वह देखेंगे की कुरान इसी तरह
[22:36]से तारों ताजा पड़ा हुआ है हमने तो कुरान को अभी तक
[22:40]एक फिस नहीं समझा इसी तरह खुदा का इल है ला महदूद
[22:56]यानी अनलिमिटेड ना खत्म होने वाला मिल उसकी हस्ती ना खत्म होने
[23:05]वाली हस्ती है उसका इल ना खत्म होने वाला इल है बशर
[23:10]खत्म होने वाली चीज है बसर लिमिटेड चीज है बसर मादड़ी चीज
[23:13]है दुरुस्त है की उसके अंदर रू है लेकिन वो भी महदूद
[23:17]है हर एक की रू को उसके अपने जर्फ के मुताबिक उसके
[23:24]अपने कांसे के मुताबिक अपने कटोरा के मुताबिक अपनी जर्फियत और सलाहियत
[23:32]के मुताबिक शब कद्र में वो कुरान का मिल मिलने वाला है
[23:36]और इसीलिए जब शाबान का आखिरी हफ्ता आया तो पैगंबर अकरम ने
[23:45]एक खुत्बा दिया एक तकरीर की और खुत्बे में शबानियां के नाम
[23:51]से मशहूर है उसमें बहुत साड़ी बातें कहानी के देखो लोगों तुम
[23:55]तक एक ऐसा महीना ए रहा है की जो बरकत रहमत और
[24:01]मखाफिरत लेकर ए रहा है उसमें तुम्हारा सोना भी इबादत है उसमें
[24:10]तुम्हारी सांस तस्वीर है यह सब बयान करने के बाद क्या कहा
[24:13]कहा की फसल का देखो लोगों करना यह है की सच्चे दिल
[24:22]से इस महीने में यह दुआ मांगों के परवरदिगार तुम्हें दो चीजों
[24:26]की तौफीक दे परवरदिगार तुम्हें दो चीजों की इस महीने में तौफीक
[24:30]दे ये सच्चे दिल से मांगना है फर्स्ट औला में ही के
[24:40]अच्छे तरीके से मैं रोज दरी का हक अदा कर सुकून देखिए
[24:48]तौफीक दे रोज की लेकिन किस रोजी की जिसको मेरा और आपका
[24:55]मौला बाटला रहा है की अगर शिकम का रोज है तो आंखों
[24:59]का भी रोज होना चाहिए कान का भी रोज हो अच्छे तरीके
[25:01]से रोजेदारी की तौफीक ने और दूसरी चीज के जो खुदा से
[25:07]सच्चे दिलों से मैंगो वो ये है की परवरदिगार अपनी किताब की
[25:13]तिलावत की तौफीक दे अच्छा मौलाना सब किताब की तिलावत कर रहे
[25:19]हैं हम इससे होगा क्या इससे होगा यही की जब आप बार-बार
[25:30]फूल के पास जाएंगे बार-बार खुला के पास जाएंगे तो खाना का
[25:36]ना का एक वक्त ऐसा आएगा की आपसे भी खुशबू आने लगेगी
[25:40]जब बार-बार हमारे बुजुर्गों की क्या रवि रही है मैं आपको बताऊं
[25:46]तो आपके हैरान हो जाएंगे चाटे इमाम के पास एक रवि आता
[25:54]है आबू बशीर मेरे और आपके चाटे इमाम इमाम में जफर सादिक
[25:57]अली सलाम अजीब सहाबी भी और मतलब भी अजीब होते थे एक
[26:12]सवाल सही लगता है की ये कैसे मन थे सवाल पूछ रहे
[26:17]हैं की मौला क्या माहे मुबारक के रमजान में मैं एक दिन
[26:20]में कुरान खत्म कर सकता हूं एक दिन में मौलाना का नहीं
[26:30]और भी तो कम है तुम्हारे खाली बैठकर कुरान पढ़ने रहोगे कहा
[26:36]मौला अच्छा दो दिन में कहा नहीं कहा मौला 3 दिन में
[26:43]फिर हाथ से इशारा किया हाथ 3 दिन में तुम्हें इजाजत है
[26:47]की पूरा कुरान पढ़ लो तीन दिन में कुरान का मकसद क्या
[26:59]यानी एक दिन में 10 सिपरे कुरान के और इजाजत मांग रहे
[27:03]की क्या मैं एक दिन में पढ़ लूं मैं दो दिन में
[27:09]पढ़ लूं हमारे आई एमा की जो रवि थी वो ये थी
[27:14]हमारे इमा के रवीश आम दोनों में ये होती थी की वो
[27:15]तीन दोनों से 6 दोनों में या तीन दोनों में ज्यादातर अहमद
[27:19]से ही मिलता है की 3 दोनों में एक मर्तबा खाट में
[27:24]कुरान का फॉर्मेट हैं तीन दोनों में लेकिन हम उनकी हद तक
[27:28]शायद ना पहुंच पे यकीनन ना और उनकी तिलावत कहां और हमारी
[27:32]तिलावत कहां से हकीकतों का सफर ते करते और हम जो पढ़ने
[27:41]हैं तो हमें अल्फाज ही सही तरीके से समझ नहीं ए रहे
[27:45]होते इल्म इलाही में घूम रहे होते तो वह तिलावत हक के
[27:55]तिलावत है होगा क्या मौलाना साहब आप रोज एक साफा कुरान पढ़ें
[28:02]उसे खुत्बे शबानियां में ये भी जुमला है की मंगल सी है
[28:09]आयतन मीनल कुरान की जो भी मां है मुबारक के रमजान में
[28:12]कुरान की एक आयत पड़ेगा कान लहू मिसालु आजारे मां खत्म अल
[28:22]कुरान फिर गैर ही मेरा शुरू तो उसका सवाब एक आयत पढ़ने
[28:25]का ऐसे होगा महे मुबारक तेरा रमजान में जैसे के माहे मुबारक
[28:31]के रमजान के अलावा पूरे कुरान की तिलावत आपने करने का सवाब
[28:35]लिया है वो इस एक आयत के पढ़ने से सवाब मिल जाएगा
[29:14]तो मैं क्या अंदाज़ के लैलातुल कद्र की क्या शान है यानी
[29:20]आम इंसान को उसे लैलातुल कद्र की हकीकत का इदरत हो ही
[29:27]नहीं सकता जब तक वह इस्मत में ना ए जाए जब तक
[29:32]सई इस्मत उसे पर सैया फिगण ना हो उसको लैलातुल कादर की
[29:37]हकीकत का इल नहीं हो सकता है भाई हमें क्या पता ले
[29:42]लातुल कादर में क्या हो रहा है मालिका नाजिल हो रहे हैं
[29:46]तो किस डर पे नाजिल हो रहे हैं वो क्या उम्र लेकर
[29:52]ए रहे हैं साइन करवाने के लिए हमें क्या पता उसकी हकीकत
[29:58]तो वही जान की जी पर मालिका नाजिल हो रहे हैं शब
[30:02]कद्र में हजार मीना से क्या मतलब है समझ में आई है
[30:23]नहीं की दूसरी तस्वीर आमतौर पर इंसान 8085 साल जीता है जी
[30:48]एवरेज आजकल तो 83 साल इनकी हौसला अफजाई के लिए एक बुलंद
[30:52]आवाज में दुरूद पढ़ने मोहम्मद अल्लाह सल्ले अलहम इंसान की एक जो
[31:04]उम्र होती है आजकल तो और भी कम हो गई है तो
[31:10]8085 साल होती है यानी यह बतलाया जा रहा है की देखो
[31:15]अगर सही तरीके से तैयारी करके आओगे पुरी तैयारी करके आओगे तो
[31:22]इस एक शब्द में हम तुम्हारी उम्र की तकदीर बादल देंगे वो
[31:28]दे देंगे वो तोहफा दे देंगे की जो इंसान को पुरी उम्र
[31:33]की रियाज के और तपस्या के बाद दिया जाता है हम एक
[31:39]शब्द में क्योंकि बरकतों की शब है ना यानी वह तोहफा बहुत
[31:45]बड़ा तोफा है अल में इस लब्ज इतना मजलूम है मेरे भाइयों
[31:51]यह लब्ज इतना मजलूम बन गया है तकवा की जब भी हम
[32:00]कहते हैं भाई इतना सुना है इतना सुना है इतना सुना है
[32:03]इतना सुना है लेकिन यह आप देखिए की सबसे ज्यादा मोमिनो को
[32:15]जी चीज की तरफ बुलाया जा रहा है वो तवा है ना
[32:23]भैया इसके बाद क्या कहा जा रहा है इत्ता कला तकवा इख्तियार
[32:35]करो यानी अभी तक इनाम की एक ऐसी मंजिल है की तकवा
[32:40]हमारा नहीं हुआ है मन है लेकिन गुना है मोटकी नहीं बना
[32:49]है मोटकी नहीं हुआ है हां ये अलग बात है की तकवा
[33:01]आने के बाद भी कभी-कभी उससे भी ऊपर का दर्ज है मोटकी
[33:35]वह होता है की बड़ी मुश्किल से कंट्रोल करता है नफ्स पे
[33:39]और गुना नहीं करता खाता तो कर सकता है गलतफहमी तो हो
[33:45]शक्ति है लेकिन मासूम वो होता है की जो ना गुना करता
[33:50]है ना खाता करता है तकवा और इस्मत इस्मत अथवा से ऊपर
[33:57]की चीज है उससे नीचे क्या है इनाम एक मैसेज आज की
[34:06]गुफ्तगू का यह है की शब कद्र में हमें क्या तोहफा मिलने
[34:12]वाला है और हमें उसकी क्या तैयारी करनी है कुरान का और
[34:15]तकवा का तोहफा कुरान का तोहफा क्या है और उसकी माना कार्ड
[34:26]चीजों से रुक जो कुरान का मैसेज यही है और दूसरी चीज
[34:35]वहां पर करें के इमामे मासूम फॉर्मेट हैं की देखिए मेरी तरफ
[34:44]देखिए अल इस्लाम मेरी तरफ सब देखें पर से पहले पहला इंसान
[35:07]के अंदर इस्लाम आता है इस्लाम यानी शहादतें खाली जबान पर जारी
[35:16]करता है चाहे दिल में हो या उसका अकीदा ना हो उसे
[35:22]कहते हैं यह इंसान मुसलमान हो गया है लेकिन अभी तक इस्लाम
[35:25]के बाद इनाम नहीं आया है जब वो आराम और बद्दू आए
[35:30]आपके पास कहा की हम इनाम लिया है कहा ये ना कहो
[35:35]इनाम ले आए हो यह कहो की तुम खाली अभी इस्लाम ले
[35:38]आए हो जबान से होता है इस्लाम के बाद मरहला आता है
[36:02]इस हकीकत को जब दिल में उतार लेट है तो इसी को
[36:08]कहते हैं इनाम लेकिन हकीकतों को दिल में उतारने के बाद भी
[36:13]अल्लाह का बांदा नहीं बन पता गुना करता है झूठ की आदत
[36:20]नहीं जाति तो हिम्मत की आदत नहीं जाति रीमत की आदत चुगलखोरी
[36:28]की आदत हरामखोर की आदत रिश्वतखोरी की आदत ये सब नहीं जाति
[36:31]तो इनाम तो है लेकिन तकवा नहीं है ऊपर की मंजिल अच्छा
[36:37]मां है मुबारक के रमजान में जो तोहफे इलाही मिलने वाला है
[36:45]वो तोहफा इलाही ये है की मोमिनीन को ऊपर का मर्तबा मिलने
[36:55]वाला है इनाम को टकवे का तोहफा नसीब होने वाला है बस
[36:59]यही मैसेज है माहे खुदा और कल में इलाही का माहे खुदा
[37:06]में कल में इलाही यानी कराने करीम से अपने आप को जोड़
[37:11]के रखें मस्जिद में कुरान की तिलावत का जैसे की दूसरे जगह
[37:19]पर हो रहा है अल्हम्दुलिल्लाह ईरान में और जहां पर भी हो
[37:23]रहा है कम अच्छा हो तो कहानी पे भी हो उसकी तारीफ
[37:25]करनी चाहिए एक नमाज के बाद हल्का बना ले कुरान अच्छा पढ़ने
[37:34]वाला खुशहाल खुशहाल हनी के साथ एक शख्स आए एक मन आए
[37:41]और सब बैठ के उसको लाइन से साफ लगाकर सुन खाली सुन
[37:45]माहे मुबारक में खाली कुरान सुनने का देखने का तक का सवाब
[37:51]है यानी किसी ना किसी तरह से हम जितना जुड़े रहेंगे सब
[37:56]कद्र में हमें कुरान की हकीकत उतनी ही मिलने वाली है इस
[38:04]महीने की हुरमत का वास्ता अहलेबैत की हुरमत का वास्ता इस महीने
[38:10]के शाहिद का वास्ता शाहिद ए मेहराब अमीरुल मन का वास्ता पाक
[38:17]परवरदिगार इस महीने की तमाम बरकतों और रहमतों को हमारे शामिल फरमाने
[38:25]की तौफीक आता फार्मा कुरान की हकीकत और कुरान की तालीमात को
[38:31]दिल के सुकुर करने और दिल पर इलाम होने की इस माहे
[38:37]मुबारक में तौफीक आता फार्मा परवरदिगार हमारी सभाएं कद्र को मुफीद और
[38:45]फायदेमंद कादर कार दे शोभायात्रा के साथ हमेशा कद्र को मुनकित करने
[38:53]और गुजरते की तौफीक आता फार्मा परिवार डीगरे मुताल इस महीने में
[38:58]हमें पाक और पाकीजा बनाकर बाहर निकाल पाक परवरदिगार साल भर नफ़्ज
[39:06]पर रू पर नफ्स पर जितने भी मेल को जय गुनाहों का
[39:08]दाग ढाबा ग गया है पाक परवरदिगार इस महीने की टहरत के
[39:12]सब अब इस महीने की पॉकीज की शबाब हमें भी पाकीज़ह बना
[39:18]दे उन हस्तियां की पैकीजगी के शबाब आता की है इस महीने
[39:30]में जब मेरे और आपके मौला और आका के पास मालिका नाजिल
[39:38]हो और तकदीर के सारे फैसला लेकर आए तो पाक परवरदिगार हम
[39:42]और आप सारे मोमिनीन के लिए जो बेहतरीन मोमिनीन के लिए फैसला
[39:48]होता है पाक परवरदिगार वह फैसला हमारे हक में होने की तौफीक
[39:52]आता फार्मा हम सबको कुरान और अहलेबैत से जुड़े रहने की तौफीक
[39:57]आता फार्मा हम सबको अपने जमाने के इमाम को खुशहाल राजी करने
[40:05]की तौफीक आता फार्मा उनके जहूर के जमीन के परचम को सर्बुलेंधार
[40:14]फार्मा मोमिनीन जी महज पर भी जहां पे भी बातें से भरसर
[40:23]बेकार है पाक परवरदिगार उन सबको नुसरत आता फार्मा पाक परवरदिगार ओलमा
[40:29]इकराम मोरज आजम रहबर ए मौज में इंकलाब इन सबका सैया हमारे
[40:36]सरों पर कायम उदाएम फार्मा हमें जमीन साझाजे जमीन आजा ने जहूर
[40:45]इमामे मेहंदी जल होता अल फर्ज हो शरीफ में से कार दे
[40:47]रब बना तबल में में का अंत समीर रहीम एक मर्तबा सूरा
[40:57]फातिहा और एक मर्तबा सूरज कुलु अल्लाह की तिलावत फार्मा के इस
[41:02]दुनिया से रुखसत हो गए हैं जो भी शोहिडा है सबकी रू
[41:08]को एक मर्तबा सुरा अल्हम्दुलिल्लाह की तिलावत फरमाकर इस साल मिलाहिर्राह्मणिर्राहीम अल्हम्दुलिल्लाह
[41:25]बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीमi
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