التالي
1 المشاهدات · 25/07/28
8 المشاهدات · 25/07/17
8 المشاهدات · 24/10/28
10 المشاهدات · 16/10/12
15 المشاهدات · 17/02/13
10 المشاهدات · 17/02/21
10 المشاهدات · 17/02/22
14 المشاهدات · 17/05/02
7 المشاهدات · 17/05/06
9 المشاهدات · 17/05/06
Khutbay Jinab Zainab DarBare Sham Main | Brother Zaigham Rizvi
0
0
34 المشاهدات·
24/07/29
في
آخر
Record date: 27 Nov 2022 - خطبہ جناب زینب دربار شا،م میں
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2022 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
For more details visit:
📡 www.almehdies.com
🖥 www.facebook.com/groups/almehdies
🎥 www.youtube.com/almehdies
🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
أظهر المزيد
Transcript
[0:14][संगीत] अल्हम्दुलिल्लाह [संगीत] [संगीत] [संगीत] सुभान अल्लाह [संगीत] [संगीत] [संगीत] मोहम्मद वाले
[1:41]मोहम्मद [संगीत] का तमाम तारीख खुदा शरीफ के लिए दुरूद और सलाम
[1:55]मोहम्मद और अहले बैट मोहम्मद अली सलाम की जबान मुकद्दर हम हैं
[2:00]उसे खुदा की की जिसने हमें और आपको पुराने करीम फैलाए द
[2:09]अमीर उल मोमिन और आए मैन आए हैं मुसलाम की विलायक से
[2:12]मतलब से किया उसने हमें और आपको आज ये एक और मौका
[2:28]इनायत फरमाया की हम अपने वक्त में से कुछ वक्त निकल के
[2:35]बैठे हैं खाने खुदा में और गौर और फिक्र कर रहे हैं
[2:42]कला में इलाही और कला में मासूमों अलैहिस सलाम है आज इस
[2:55]मुक्तसर से लेक्चर का जो उनवान करार पाया [संगीत] रोम की 10
[3:21]नंबर की आयत से किया यह वह आयत है की जिसके जरिए
[3:30]से बीबी जैनब सलाम अल्लाह अलैह ने अपने खुत्बे का आगाज किया
[3:34]था जब हम सुर और खास इस आयत पर नजर करते हैं
[3:47]तो दो मसाले समझ में आते हैं नुक्ता आपकी samaaton की नजर
[3:57]करना चाहता हूं और वो ये जब कभी भी पुरानी कारी जाए
[4:04]बयान की जाए तो यकीनन होती है यानी की वह आए कब
[4:14]नशीद हुई किन हालत में नाजिर हुई क्या होगी किसी मकान के
[4:33]mutaaliyon को आए तो होगी या कोई भी इससे मुताले आयत होगी
[4:40]दूसरी बहस होती हैं शांत तिलावत कहां पर की थी और वह
[4:59]भी तारीख ही हैसियत के उनवान से जो बयान किया जाए मैं
[5:04]मिसाल देकर बात को बसी करता हूं मतलब सर मरियम छोड़ मरियम
[5:09]का जूस सबको मालूम है कब नाजिल हुआ मरियम का नाम ही
[5:16]क्यों दिया इसलिए के सुरभि मरियम का पूरा तस्कीन मौजूद है हजरते
[5:20]इस की पैदाइश का सिलसिला मौजूद है और तमाम के तमाम वो
[5:29]तैयार हैं वो सुर के अंदर मौजूद हैं तो जब शान-ए-मुजुल बयान
[5:32]किया जाएगा उन आयात का तो उसमें बीपी मरियम कब आता है
[5:53]लेकिन जब मुसलमान एन जायसी के दरबार में मौजूद द और एक
[6:03]ऐसी मंजिल आई के मुसलमान गाया डिफेंसिव हो गए द apnatifa नहीं
[6:11]कर का रहे द और करीब तव के नजाशी इन्हें हुकुम देता
[6:14]के गिरफ्तार करके दोबारा वापस कर दिए जाएं ऐसे में जब इन्हें
[6:21]यह मौका नहीं असर आया की ये अपनी हफ्ता नियत के लिए
[6:27]कुछ सबूत पेश करें तो हज़रत खुदा उन पर रहमत नाजिल फरमाए
[6:34]दुरूद नाजिल फरमाए उन्होंने करीम की तिलावत के जरिए से अपनी hakkaniyat
[6:40]को साबित किया अगर पुरानी करीम ही तिलावत करना थी तो कितने
[6:47]सुर ए चुके द कितनी आया था चुकी थी वह किसी भी
[6:51]आयत की तिलावत द वह सूर्य पुल तिलावत कर लेते वहां तो
[7:00]इससे बेहतर तो कोई सुर ना था की हमारा नजरिया क्या है
[7:05]खुदा के बाद मैं क्या नजरिया है रसूलल्लाह को हम किस हैसियत
[7:07]से जानते हैं ये तमाम के तमाम मामलात को किसी और सुर
[7:14]से बयान कर सकते द लेकिन अगर हज़रत तैयार है और सूरा
[7:21]मरियम पढ़ने का जो नतीजा यह करार पाया की वो najayashi के
[7:27]जिसके दिल के अंदर नूर के कुछ jarraat मौजूद द जब सूर्य
[7:32]मरियम को सुनता है तो खींच कर उसका कल जो है वो
[7:37]इस हफ्तों को काबुल कर लेता है यानी मैं का सकता हूं
[7:43]की जा फिर तैयार करना ये हज़रत यार ने हमें उसे मार
[7:55]के में बतला दिया अब हम लेकर आते हैं क्या अब आयत
[8:06]कौल क्या है शान के अलावा क्या है और अगर मेरे जुमले
[8:11]जाया ना जाए तो दोनों को जहां में रखिएगा शान-ए-नज़ूल भी मोजेजा
[8:14]है शांत तिलावत भी mojeje से कम नहीं कलम तो मौजूदा है
[8:20]इसमें तो कोई शक नहीं है सोने रो जहां parvardigane आलम ने
[8:28]परवरदिगार ए आलम ने इस सुर में एक खबर दी मुसलमान को
[8:37]खास और मुसलमान के जरिए से अथवा में आलम को वो रोंग
[8:42]के तरफ इशारा किया यह 10वीं आए द और अगर देखा जाए
[8:48]तो पहली आयत से नौ आया पढ़ डालिए उनका जो निचोड़ है
[8:55]जो एसेंस है वह इन 10वीं आयत के अंदर मौजूद है जहां
[9:02]परवरदिगार ए आलम ने भारत को शुरू कहां से किया रोम मखलूक
[9:10]हो गया और फिर कहां की वह अपने मुल्क के करीब की
[9:14]ज़मीन में जहां पर maghlook हुए द अल्लाह ने उन्हें यानी इन
[9:22]लोगों को खबर दी जा रही है की ये दो 12 वाले
[9:28]हो जाएंगे जिस वक्त में ये खबर दी जा रही है की
[9:31]रोम हो गया है यह गालिब हो जाएगा इससे काबुल करना नामुमकिन
[9:37]आप में से था हो चुका था और वहां से जो खुसरो
[9:47]परवेज है वो वहां से निकल कर और रोम की ईरानी इलाका
[9:52]जाट के अंदर शामिल हो गए हैं अगर यहां तारीफ की कुछ
[9:58]बहस की जाए तो गलत ना होगा [संगीत] इसके खिलाफ बगावत होती
[10:24]है और इसको कत्ल कर दिया जाता है इसके घर वालों को
[10:27]कत्ल कर दिया जाता है इसके 18 बेटों को इसकी नज़रों के
[10:33]सामने कत्ल किया जाता है और आखिर में इसको कत्ल किया गया
[10:36]जिन साहब ने यह कम किया उनका नाम था फोकस अब ये
[10:43]जो इन्होंने तक पर कब्जा कर लिया तो यहां से जो आसानी
[10:49]से सल्तनत का बादशाह है खुश रहो प्रवेश यह मरीज को गाया
[10:59]अपना रूहानी वाले जानता था इसके बहुत एहसान द इसके ऊपर जो
[11:05]उसको पता चला की उनके साथ ऐसा हो गया [संगीत] मुस्तकाम करने
[11:20]के लिए मरीज ने जितना साथ दिया तो यकीनन ये का जा
[11:23]सकता है की उसे ही के मार होने मिलना था जो इसको
[11:27]यहां तक मिला हुआ था तो जिसने एहसान किया हो जिसने आपके
[11:35]लिए इतना कुछ किया हो जिसको आप अपना रूहानी बाप कहते हो
[11:37]अगर ये मालूम चले की उनको बेदर्दी से nafkat ये के कत्ल
[11:43]किया गया है उनके घराने वालों के साथ ऐसा किया गया है
[11:45]तो फिर नेचरली फितरत और तकाजा क्या है की इसका बदला लिया
[11:51]जाए तो खुसरो परवेज ने वहां से अपनी फोजन को तैयार किया
[11:58]की चलो और फोकस किए इससे फोकस से इसका बदला लिया जाएगा
[12:01]603 हिजरी आफ्टर डेथ यानी की ई की ₹603 ई की बात
[12:08]है की हुस्न परवेज ने रोम पर फिर हमला किया अपनी पुरी
[12:14]ताकत के साथ और इस अंदाज़ से फिर जो आसानी से बादशाह
[12:21]जो होसुर है उसके romacho का इसने कैसे रोक जिसको हम मालिश
[12:29]का नाम दे रहे हैं जो की मारा जा चुका था जब
[12:33]इस पर हमला किया तो यह भी बड़ी अजीब बात है की
[12:39]वहां पर मौजूद उसकी सल्तनत में मौजूद कुछ ईसाइयों ने भी उल्टा
[12:44]इन्हीं का साथ दिया हमारे यहां के बादशाह को कुचलना के लिए
[12:53]तो यह भी फिर सामने आए द ठीक है हम भी साथ
[12:54]देते हैं आपका उसने ईसाइयों की गिरजाघर को और उनकी इबादत गांव
[13:05]को तहस-नहस करना शुरू कर दिया जिसे कहते खर्च खर्च के निकलना
[13:10]शुरू कर दिया यहां तक की जो एक सलीम जिसके लिए यह
[13:18]मशहूर था की हज़रत के ऊपर लटकाया गया था इसलिए वह सलीम
[13:25]भी उसे गिरजा से ukhadva आई और एक विवाह ऐसा ले गया
[13:30]वहां से उखाड़कर यह जो वक्त है 613 इसलिए चल रही है
[13:38]रोम आहिस्ता aahistam बबलू होता जा रहा है और यहां तक भी
[13:45]पता कर लिया यह पूरा मसीही दुनिया पर क़यामत और शनि हो
[13:58]गई 90 हजार मसीह को कत्ल किया इसने एक मरीज का इंतजाम
[14:03]लेने के लिए और उसके बाद इनकी जो ये मुक़द्दस करीब थी
[14:06]ये भी उखाड़ कर ले गया एक विवाहित है उसको पहुंचा दिया
[14:15]यहां पर किसी अंदाज़ से अपनी हुकूमत को मुस्तकाम करते करते और
[14:23]रोमन को kuchalte kuchalte तकरीबन 600 19 ई मामलात ऐसे हो गए
[14:31]के पूरा रोम इसके हाथ में ए गया और बहुत ताकत से
[14:35]आया अब किसी की मजल नहीं थी की उठकर यह उसकी आंखों
[14:40]में आंखें डालकर भी देख सके और यहां तक की एक vyavayat
[14:41]में कहते हो गया खुदाई का दवा कर दिया बताओ कौन है
[14:46]जो की इस वक्त मेरे सामने खड़ा भी हो सकता है ऐसी
[14:51]सल्तनत ऐसा हलवा अतः हो चुका हो और ऐसे में आयत ए
[14:57]रही हो की रोमी जो है [संगीत] वहां वो अपने आप को
[15:13]खुदा के अलावा रहा था कोई था ही नहीं इसके मुकाबला पर
[15:18]कितनी बड़ी बात है रोंग लेकिन देखा है उसका फिर अच्छा गया
[15:58]अब यहां पर शनि जो कहा जाता है की चंद छालों के
[16:03]अंदर तो तर्जुमा किया जाएगा लेकिन वृत्त का ताल्लुक किस आदत से
[16:11]है 3 से 10 गिनती के जो अपराध है जो जो आधार
[16:18]हैं जब तीन से 10 तक की गिनती की जाती है यदि
[16:21]पुराने करीम यह भी इशारा दे रहा है की 10 साल के
[16:26]अंदर ही ये कम हो जाएगा तर्जुमा में ये नज़र नहीं आएगा
[16:32]लेकिन अगर गौर करेंगे तो लब्ज बताया की ये जो वेलवेट होगा
[16:35]ये 10 साल के अंदर हो जाएगा और भू अभी कुछ इसी
[16:39]अंदाज़ से के फिर आहेस का आहिस्ता यहां से हुआ जहां से
[16:53]उसने ईरान पर पुष्ट से हमला किया वहां से इसकी फौजी चल
[17:00]चुकी हो और फिर राजस्थान की यहां तक के इस कदर बरबादिया
[17:14]वहां से भी श्रद्धा से दिखाई गई की जो इनके शाह के
[17:20]जो महल द जहां से गुजरते गए वहां के महलों को भी
[17:26]masumar कर देते यानी की उनका भी नामोनिशान मिटाना शुरू कर दिया
[17:28]यानी की जब अभी यहां पर हम किसी के हक में या
[17:34]किसी के मोहल्ले में बात नहीं कर रहे हैं हम तारीफ देख
[17:39]रहे हैं की जुल्म किया गया जालिम ने जैसा सन किया था
[17:46]जब मजलूम उठा तो वही रमेश जो उसने अपनी थी यही रामेश्वरम
[17:48]भी अपनी गई और जो जो फोरकास्ट और इसके साथियों के साथ
[17:55]हुआ पलट कर देखा की फसलों के साथी वही वही होना शुरू
[18:02]हो गया यहां तक के 628 ई आई और खुसरो प्रवेश के
[18:04]खिलाफ घर ही में बगावत शुरू हो गई और तारीफ ने देखा
[18:10]की उसको कैद किया गया उसकी आंखों के सामने भी उसके भी
[18:16]बेटों को कत्ल किया गया इस बेदर्दी से कत्ल किया की फिर
[18:23]इसको कत्ल करने की जरूरत ना पड़ी ये कैद ही मैं बीमार
[18:25]हूं और वहीं पर इस तरह नहीं जाते द यह तारीख है
[18:32]यानी की तुमने जुल्म किया था और जुल्म करने के बाद खुद
[18:35]को खुदा समझ बैठे द तुम्हें तुम्हारे जुल्म का बदला दुनिया ही
[18:43]में नफरत दिखा दिया गया बल्कि दूसरों को भी यह पैगाम मिल
[18:46]गया की देखो जो जालिम है उसका अंजाम ये होता है यह
[18:51]सब कहां हो रहा है अब ए जाइए [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] जबकि
[19:16]के तादाद में भी थोड़े द गहरी ताकत में भी कम द
[19:22]जो सामने मौजूद है वह ताकत में भी ज्यादा है उसको घमंड
[19:26]भी अपनी ताकत पर बहुत है लेकिन परिवार दिगरे आलम को कुछ
[19:28]और ही मंजूर था की जालिम को जलील और इसी दुनिया में
[19:37]करेगा चुना छे रोम दोबारा फैट आया आपको औरत की पेशेंट को
[19:41]ही सच्ची साबित हुई जिस वक्त ये वाक्य हुआ यहां मुसलमान को
[19:46]बदर की फटा नसीब हुई थी यानी एक तरफ कुरान की वह
[19:52]पेशेंट को ही सही साबित हुई और दूसरे तरफ मुसलमान को यहां
[19:55]बदर में भी फ़साना नसीब हुई तो इन दोनों खबरों के साथ
[19:59]मुसलमान को बहुत तकलीफ हुई की देखो जो पैगाम हमारे पास मौजूद
[20:06]है हक है सच है और यहां मदीना में जिस तरीके से
[20:08]तुमने देखा की हजरत के बाद अब हम पर वहां से चढ़ाई
[20:12]हुई वहीं पे हमला हुआ हमने उसका कम तादाद के साथ कैसे
[20:18]मुकाबला किया 313 लोक से पकड़ लड़ने के लिए इस्लाम भी नहीं
[20:21]था तादाद में ये भी कम द वो तादाद में ज्यादा द
[20:26]यह कुआं में कम द वो कवक में ज्यादा द लेकिन कलमा
[20:30]कैसे मिला समझ में ए रही है वहां पर तत्पर हो गया
[20:45]यहां मुसलमान यहां इस्लाम इस अंदाज़ से फैलने लगा बस इसी को
[20:51]यहां तक तो मैंने नजूल बयान की है अब ए जाइए शान
[20:53]टी से पहले एक बुलंद आवाज़ में धूल ए रहा है टीला
[21:05]के पहले ही मुस्सलाम का लूटा हुआ काफिला यह बातें हम सुनते
[21:17]हैं हम रोना शुरू कर देते हैं हम पर जज्बात बहुत ज्यादा
[21:20]हावी होते हैं तो बताओ अल्लाह रहमत नाजिल करें से जो हम
[21:31]इस वक्त यहां बात ये कर रहे हैं ये vakyatan सेमिनार का
[21:37]मौजूद है ये darshatarish का मौजूद है जाह्नवी को बुरा ने रोम
[21:45]ही की सूर रोम ही की तिलावत क्योंकि भाई आपने [संगीत] [संगीत]
[22:13][संगीत] और अगर मैं एक वाकया बयान करूं तो डिवीज़न के khudbe
[22:28]की अहमियत दो चंद हो जाएगी इस वक्त नहीं भाई हम कर
[22:36]सकूंगा लेकिन इशारा करूंगा आया तो अल्लाह मराशि nashifi जाइए आपकी सामने
[22:42]में और आपके बाप ने जो किताबें लिखी है और जो wafyaat
[22:49]लिखे उन्होंने ये वाकई मौजूद है इमामे ज़माना है सलाम ने कुछ
[22:52]nasihate फरमाई थी आए तो लंबा बहुत बड़ा नाम है आरिफ है
[23:00]आपको देखिए हर एक शख्स की कोई एन कोई स्पेशलिटी होती है
[23:13][संगीत] ना जब अमन दिया जा रहा होता है तो 41 लाया
[23:21]गया सामने उसके लिए मामा आए और सफेद रंग का [संगीत] मैं
[23:32]सैयद नहीं हूं कहा क्या बात कर रहे हो तुम्हारी नस्ल में
[23:36]मैं सदा देख रहा हूं उन्होंने कम किया था अंसार पर कम
[23:45]किया था और वह जो उनका ना रिश्ता है आप अगर जाए
[23:48]तो मैं तो अगर चाहे वो आप देख तो नहीं सकेंगे आप
[23:50]काफी अपने हाथ से इन्होंने तहरीर की आप लिखा है मलय श्री
[23:54]लाइब्रेरी के अंदर जो है वो ना जाने कितनी kutubn अपनी जगह
[24:00]मौजूद ही हैं वो छत नहीं सका है अभी और शायद छाप
[24:01]सत्ता भी नहीं है इसलिए की उसमें अनसब और वह तमाम की
[24:09]तमाम सर्जरी मौजूद हैं कितने काले इमाम हैं की जो मुझको को
[24:13]जाएंगे तो उसको फिर एक ही तरफ रख दिया गया की ठीक
[24:14]है रहने दीजिए रास्ता इधर-उधर हो गया नजर नहीं ए रहा ठीक
[24:29]है पानी नहीं है पीने के लिए खत्म हो गया रास्ता टेबिल
[24:35]है गर्मी से दर्द है आजकल आजकल की मशीन है mohibin का
[24:49]इलाका नहीं है की मैं बिल्कुल जैसे मेरी जान जाने लगी अचानक
[24:59]कोई हस्ती है जो मेरी आई और मुझे पानी दिया मैंने पानी
[25:08]पिया जाने के बाद पता चलता है की आने वाला कौन था
[25:13]लेकिन अजीब वाक्य है की पानी पीने के बाद आपने जब देखा
[25:18]रुके अनवर की तरह पहचान गए नंगे वाला कदमों में गिर गए
[25:27][संगीत] आठवीं नसीहत क्या है कहा यजीद के दरबार में जीना बिनते
[25:50]अली के khudbe को हिप्स करो याद कर लो इसको देखो यह
[26:04]तो कोई talibil भी याद कर सकता है [संगीत] और लोगों को
[26:24]वजह क्या फरार भाई भी डिजाइनर को सामने आकर खुद पर देने
[26:29]की क्या जरूरत पड़ी हो रही है सरदार से कभी सोचा है
[26:35]या नहीं सोचा इमामे जमा से क्या रब बनता है कुछ तो
[26:57]ऐसा है [संगीत] क्या है जवाब देता हूं सुनिए की उसे दिन
[27:07]दरबार में वक्त का इमाम कौन है जमाने का इमाम यानी 61
[27:33]हिजरी बंद आसरे असुर इमामे समान कौन सा है दरबार में मौजूद
[27:41]हैं या नहीं क्या दरबार वाले जानते हैं की इमामे जमा इनके
[27:48]दरमियां में मौजूद है ना गए हैं ना दरबार भी बैठ जाएं
[28:04]लेकिन बहरहाल है कितने लोग हैं इनमें से किस्तों को मालूम है
[28:11]की इमामे जमा इस वक्त यहां मौजूद इमाम है मौजूद मालूम नहीं
[28:19]क्या मैं का सकता हूं की इमाम मौजूद है की जब पहले
[28:42]हरम उसे माहौल में दाखिल हुए हैं तो वो जो सामने कुर्सी
[28:48]पर मालाओं यजीद बैठा हुआ है और खुद को कहता है की
[28:51]मैं खलीफा हूं का क्या रहा है खुशी में झूम रहा है
[28:56]और कहता है [संगीत] अलका ज़रा बिन वक्त इल असल फ हेलो
[29:05]वास्ता हेलो फरहान या ज़िद कुछ असर पद रहा है [संगीत] [संगीत]
[29:21]कहता है की काश के मेरे वो बुजुर्ग एशिया सिंह के बदला
[29:33]कैसे ले लिया और वो जब देखते तो खुश होते और खुश
[29:41]होकर पहुंचे दुआ देते कहते माशाल्लाह ढोंग रचाया था एक खेल खेलना
[29:55]था हुकूमत के लिए कोई वही नहीं आई थी कोई फरिश्ता नहीं
[29:57]आया जब मलाऊं शराब के नशे में इस अंदाज़ से असर पद
[30:03]रहा हो अपने कुफ्र का ऐलान कर रहा हो और ऐसे में
[30:08]जो खुशी का माहौल बन चुका है की तुम इस कदर खुश
[30:18]क्यों हो यह कौन सा सफेद था यह रोम का सफेद था
[30:22]शेन तिलावत समझिए यह बात कहां हो रही है शाम में यह
[30:28]शाम कौन सा ilakata है यह रोम का माफ तोह इलाका था
[30:34]यानी बीवी जहां मौजूद है वो कौन सी जगह है वो रोंग
[30:39]ही है जहां आप मौजूद हैं यह सफेद है जो उठा है
[30:48]और कहता है की तुम क्यों खुश हो यही कहता है तुझे
[30:53]इससे क्या मतलब है कहा नहीं मुझे मतलब है जब मैं अपने
[30:58]मुल्क जाऊंगा तो मुझसे पूछा जाएगा की वहां खुशियां मनाई गई थी
[31:02]वो खुशी क्यों मनाई गई थी तो मैं क्या जवाब दूंगा हासिल
[31:15]की है फ़ातिमा का बेटा कौन सा तुम्हारी नबी की बेटी है
[31:42]खुदा की कसम मेरा दिन तुम्हारे दिन से बेहतर है और मेरा
[31:57]और उनके दरमियां में कई नस्लों का फैसला है लेकिन जब मैं
[32:02]अपने इलाके में जाता हूं तो वो लोग इस nishpat को देखते
[32:05]हुए मेरी पांव की जूते की खाब तबर्रुक में ले लेते हैं
[32:14]जानता है इसके बारे में कहता है नहीं कहता है हज़रत इस
[32:20]जिस गधे पर सवार द उसे गधे के पैरों के जगह जहां
[32:25]पर उसे गधे के पैरों का निशान है ईसाइयों ने उसे जगह
[32:31]गिरजा तामीर किया और वहां वह इबादत करते हैं ये यजीद को
[32:40]इस अंदाज़ से चेहरा दिखा रहा है की यह दिन यह है
[32:48]और तुमने उसको कत्ल किया है अपने नबी के उसे फरजाद को
[32:51]कत्ल किया है जिसकी दरमियां में एक बेटी से ज्यादा फैसला नहीं
[32:58]है तो बताओ किसका दिन रहता है जब यजीद ने यह सुना
[33:00]तो वो तो पहले ही ताकत के नशे में था हुकुम दिया
[33:03]है उसकी गार्डन उदा दो कत्ल कर दो उसको बस यह सुनना
[33:10]था की यह रोने लगा दौड़ता हुआ गया और सारे हुसैन को
[33:18]अभी मुझमें में वह कुवत नहीं है की मैं वो मंजर बयान
[33:20]करूं की ये मालूम उसे वक्त कर क्या रहा था बस समझ
[33:24]जाइए की कुछ ऐसी बेहुरमति कर रहा था मेरी जुबान में यह
[33:27]ताकत नहीं है और बोलता रहा कल रात मैंने ख्वाब में मुसलमान
[33:34]के रसूल को देखा था जो मुझे जन्नत की बशारत दे रहे
[33:39]द मैं सोच रहा था की मुझे मुसलमान का रसूल ले रहा
[33:50]है कलमा भी पड़ता जा रहा है इसी हालत में इसके ऊपर
[33:54]तलवार चलाई गई और उसी दरबार में रोम के सफेद को कत्ल
[34:01]कर दिया गया यहां पर एक रिवायत कहती है की सारे हुसैन
[34:04]से लोगों ने अपने कानों से सुना ला हावला को हुआ था
[34:09]इलाहा इल्लल्लाह की आवाज़ आई यह है दरबार के सफर को अब
[34:24]जब जैनब आगे बढ़ो और दरबार तो पहले ही खामोश हो चुका
[34:31]था परेशान हो गया था की ये क्या हो गया इसको कत्ल
[34:32]कर दिया सफल कर दिया वो जो इमाम हुसैन की हिमायत में
[34:37]बोला था उसको कत्ल कर दिया यहां तक आने के बाद जब
[34:43]दरबार यहां तक ए गया अब बीवी जैनब आगे बधाई और उनकी
[34:45]जुबान पर कराने करीम जारी हुआ तो कोई और सुर नहीं सूरा
[34:52]रोंग ही की तलाश और सूर्य रूम की तिलावत भी कर रही
[34:58]हैं तो रोंग जहां से शुरू हुआ और लड़के को जो गालिब
[35:02]हो गए हैं अल्लाह उनको गालिब निकी वो वकालत का आता होगा
[35:07]गाया एक इशारा कर रही है के यजीद जान ले यह वही
[35:12]रोम है जो कल makhalu घुमा था तादाद में थोड़े द ताकत
[35:14]में थोड़े द आज हम भी ताकत में तुझे जाहिरी अंदाज़ में
[35:18]कम नजर ए रहे हैं तादाद में थोड़े नजर ए रहे हैं
[35:24]लेकिन याद रखना जालिम हम ही होंगे तू हलीम नहीं होगा जिस
[35:26]तरह पहले जालिम का अंजाम होगा नामी और आठवीं आयत का खुलासा
[35:31]भी यही है की लोग चल फिर कर देखते नहीं है की
[35:35]सेल मुंह के साथ क्या हुआ थालिम के साथ हुआ था तू
[35:41]भी वही जालिम है और आयतें नहीं फक्कड़ दसवीं आए पढ़ी के
[35:48]जिसका तर्जुमा ही अगर आपके सामने पेश करूं की तुम मत कहना
[35:53]बुरा है जिन्होंने अपने दामिनी हयात को बुराइयों की सियाही से दागतार
[36:03]करके अपने खुदा की आयात की takjib की और आयात के परवरदिगार
[36:06]का मजा पड़ाया आयते परवरदिगार फाटक सियाही और सफेदी का नाम नहीं
[36:20]है यह जिन्हें तूने जंजीर पहनाई हुई हैं ये जो जिनको तूने
[36:24]bechadar अपने सामने खड़ा किया हुआ है आयात ए परवरदिगार का मजाक
[36:32]कोई इससे बढ़कर उदा सकता है जो तूने उदा लिया शायद बाद
[36:38]में मौका ना मिले एक बात यहीं पर कहता चलो अब जो
[36:42]बीवी senatmak दे दिया इस खुत्बा देने के बाद उसे फिर इमाम
[36:52]ने समान जो की मौजूद हैं अभी तक गोयल नहीं हुए हैं
[36:54]अब आगे बढ़ते हैं और कहते हैं एक अजीब इजाजत है की
[36:59]इस लकड़ी के तख्त पर जाऊं गाया उसे लकड़ी के तख्ते पर
[37:07]जाने के बाद इमाम अली सलाम ने अपना तरफ़ कर दिया और
[37:23]उसे आम आदमी के बाद इमामे ज़माने खुद को जाहिर किया इस
[37:29]अंदाज़ से की हम कौन हैं शिव तंवर को दिल ना बेशरम
[37:34]मोहब्बत हमें छह चीज आता हुई और सात से बा फजीलत किया
[37:44]है हमें अल्लाह खाता हुआ हमें ilmata हुआ और इलैयाराजा इलाहा तो
[37:53]मुझे बताइए इमामे जमा को खुद को ज़ाहिर करने के लिए जो
[38:00]सबसे हम किरदार अदा की अभी भी जैनब के khudbe ने किया
[38:05]या ना किया तो मेरे वक्त के इमाम मुझसे ये तकाजा कर
[38:07]रहे हैं की बीवी जैनब के khudbe को हिप्स करो जैसे उन्होंने
[38:13]पूरा शो दौर में अपने वक्त के इमाम के taronof के लिए
[38:20]नाश्ता होमवर्क किया ज़मीन सजी की जुबुर की ज़मीन साझे की तुम
[38:23]भी अपने वक्त के इमाम के जोर की जमाना साजिद उसी अंदाज़
[38:28]से करते रहो ये एक मैसेज नजर आया हमें भी वैजाइना के
[38:35]khudbe के लिए दुरूद बड़े मोहम्मद वाले मोहम्मद अज़ीज़ हो मैंने आपको
[38:47]ध्यान दें चला जाऊंगा [संगीत] [संगीत] शायर ने क्या खूब कहा है
[39:55]कहता है दुनिया में लोग अच्छे अजीब होते हैं तेरे khudon का
[40:07]फ़ैज़ है जैनब आज हमने खातिर होते हैं अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन वो
[40:20]औरत की जिसके घर आने को लूट लिया हो जिसकी भाइयों को
[40:29]नगर के सामने कत्ल किया हो अब्बास जैसे भाई को कत्ल किया
[40:37]हो हुसैन को पीएमएल किया होगा चादर करने से बाहर आना गवारा
[40:49]नहीं था आज शराबी के दरबार में खड़ी हैं मुसीबत की इंतकाल
[40:57]नहीं समझ नहीं कर सकते उसे मौके पे अगर जुबान से निकले
[41:01]अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन अब मजीद किसी खुदा की दलील देने की जरूरत
[41:08]है की कोई खुदा है जो अलामिन का पालने वाला है अगर
[41:16]बीपी जैनब के इस जुमले को फक्र देखा जाए की ये एक
[41:20]बीवी है जिसका जाहिर कुछ नहीं बचा है का रही है हम
[41:25]है जुबान के ऊपर क्या आया शिकवा नहीं आया हम पहला नुक्ता
[41:32]भी डिजाइनर हमने क्या दे दिया मैं बच्चों को खास कहूंगा कभी
[41:37]जुबान पे शिकवा नहीं आया सबर किया सब्र किया नामुम हजरते मशहूर
[42:06]है ना उसके ऊपर बात आती है ना जो जल के मरना
[42:13]गवारा करती है चादर के बगैर मौजूद है यह अंबिया की मंजिलों
[42:24]से बहुत आगे की बात हो रही है अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन कौन
[42:33]रब बुल आल नबी सलाम की जिसने हमारे अव्वल को शहादत थी
[42:46]mahfirat के साथ और आखिरी को शहादत दी ये देखिए हमारे अव्वल
[42:54]को हमारे आखिर को यह पंचतंत्र हो रहा है की तुम्हें मालूम
[43:01]है ना की बहाना मैं कौन आए द उसमें से अवल कौन
[43:02]है रसूल अल्लाह आखिरी कौन है वो जिसको कत्ल किया है तुमने
[43:08]ये है वो आखिरी इन्हें शहादत दी है अल्लाह ने दी है
[43:11]उसकी हम है तो जुबान पर शिकवा नहीं आएगा [संगीत] रसूल की
[43:40]आल को रस्सी और जंजीरों में जकड़ कर दरबदर फैलाने से तू
[43:45]खुदा की बारगाह में सरफराज हुआ है और हम रुसवा हुए हैं
[43:50]और तवज्जो रहे मोमिनीन खास tavajjat ही इन सुदूर के ऊपर जो
[43:53]बीवी का रही है की तुम ये समझ रहा है की तू
[43:56]सुर्खरू हो गया है और तुमने हमेशा दिल किया है अल्लाह हु
[44:01]अकबर क्या तेरे ख्याल में हम मजलूम होकर जलील हो गए और
[44:05]तू जालिम बन कर तू समझता है की हम पर सुनकर के
[44:11]खुदा की बारगाह में तुझे शाम मुकाम हासिल हो गया है इलाही
[44:21]का मजाक तूने उदय है [संगीत] हम मजलूम करार पाए हैं इज्जत
[44:33]क्या शहर तुझे क्या मालूम तू समझ रहा है की ये इज्जत
[44:35]है की तू तक पर बैठा है और हम राशन में जकड़े
[44:40]हुए हैं लेकिन तारीख शायद है के घोड़े तो दौड़े लाश आए
[44:48]शबीर पर मगर तारीफ ने यजीद को पहन कर दिया वह जो
[44:53]का रहा था छोटी की तरह मसाला देना वो समझ तो ये
[45:05]रहा था ताकत के नशे में लेकिन बता आज शुरू कौन हुआ
[45:07]यदि कुरान ने जिनके एहतराम का हुकुम दिया है तूने उन आयात
[45:19]की तकदीर की है ऐसा लानतुल्लाह करार पाया खुदा की कसम बहुत
[45:24]ही शख्सियत है अभी तक डाउटफुल है की मुकद्दर है या नहीं
[45:31]है लेकिन यजीद एक ऐसी palidagi का नाम बन गया की अगर
[45:35]कहीं से yajidiya जिंदाबाद का नारा लगता है ना तो खुद वहीं
[45:41]आती है अगर कोई मुफ्ती फतवा देता है ना तो najaajat तो
[45:49]फिर क्या धुलती है वो मुफ्ती को नाजिर हो जाता है और
[45:58]जो का रही हूं की ना तेरा ताज रहेगा ना तेरा तख्त
[46:05]रहेगा खुदा की कसम तो हमारे जिक्र को मिटा नहीं सकता जब
[46:08]ये हम अपनी आंखों से देखिए किसी को मालूम नहीं है की
[46:14]यजीद की कब्र कहां है लेकिन इलाका किस नाम से मशहूर है
[46:28]बीवी ने इज्जत की तारीफ बयान कर दी इज्जत वो होती है
[46:45]जो खुदा देता है और जिल्लत वो होती है जो खुदा देता
[46:52]है हम ahalebaid मजलूम होके शुरू आए तो जालिम हो के लाना
[46:56]लैब करार पाया है इज्जत किसे कहते हैं बच्चों को ऐसी अल्फाज
[47:00]ऐसे मिसाल में समझा दो बच्चा भी समझ जाए इज्जत मालूम है
[47:04]किसे कहते हैं इज्जत का मतलब ये है की अगर किसी सख्त
[47:08]दीवार पर तुम कल थोक रहे हो तो वो कल कभी भी
[47:12]दीवार के अंदर बसा कर ऐसा होता है की टेढ़ी हो जाती
[47:13]है दीवार में नहीं जा पाती इसे कहते हैं इज्जत अगर कोई
[47:20]किसी के लिए अगर कोई आपके लिए बात करें की जानते हो
[47:37]आप तुलना जैसा कहे ऐसा है यूं कर रहा था बात कर
[47:41]रहे हो अब्दुल्ला और ये यकीनन तुम ही ऐसे हो जो की
[47:46]मोमिन की बुराई कर रहे हो इसको कहते हैं इज्जत क्या कोई
[47:50]अब्दुल्ला के लिए गलत बात करें चाहे कहीं पर भी बात करें
[47:55]आप दीवार से भी कहें तो वो मानने को तैयार ना हो
[48:00]की मुमकिन नहीं है यकीनन तुम उसके लिए ऐसी बात कर रहे
[48:02]हो तुम ही ऐसे हो बकरा ना उसको तो हम जानते हैं
[48:06]alebeth ए मुसलाम ने इज्जत का तरफ़ ये का कर आती है
[48:12]और तो इस ममता तू चाहता था हमने जलील करें लेकिन तू
[48:14]खुद जलील हो गया इसीलिए शायर ने कहा दो हाथ आगे बढ़
[48:22]गई जो julfenkar से नस्ल यजीद काट दी चादर की धार से
[48:29]नस्ल यजीद काट दी चादर की धार से आबाद अल कम पे
[48:38]है बस्ती शाहिद की खुशी में गर्क हो गई कश्ती यजीद की
[48:43]यह भी ईसाई ना देखो बस फरमाते हैं की अल्लाह अंदाज़ से
[49:05]किसी के सजदे को बयान कर रहे हैं किसी का सजदा shaistagi
[49:11]से कैसे अंदाज़ से बयान हो रहा है जाने वाला जिसका बाप
[49:25]कौन था पुकारे जाने वाला यानी जिसके लिए vajiyat के कॉलम में
[49:29]मल्टीपल नाम ए जाएंगे [संगीत] एक तो सुर्खरू जिल्लत लेने का रास्ता
[50:06]है एक शहादत का रास्ता है एक मार जाने का रास्ता है
[50:08]और एक जिला का रास्ता है वह है हम सर काटा देंगे
[50:19]लेकिन सर झुकाएंगे नहीं इसीलिए तो कहा था की झुकना चाहा था
[50:24]जिस सर को शाम वालों ने सर को खुद उठाके चले मोहम्मद
[50:29]वाले मोहम्मद [संगीत] ग़ालिब होने पर इतना रहा है और खिलाफत के
[50:47]हमारे musallemma हुकुम करके खुशी और सुरूर का जसरा में मशहूर है
[50:57]ये जुमले का कर बीवी ने क्या बयान कर दिया की तू
[51:02]जिस खिलाफत को छीन कर बैठा है वो असलम हम अहलेबैत कहां
[51:04]से हैं बस आप समझ लीजिए एलोपैथ का हक है ये हुकूमत
[51:10]ये ये जो खिलाफत है ये हमारा हक है कब से छेना
[51:15]है समझ में ए रही है बात तो यकीनन तू तो सामने
[51:16]इस वक्त सामने हक छीन लिया बीवी ने अपने हक का बरवाला
[51:24]इजहार किया सारा फार्मा रही हैं जिनको रसूल अल्लाह ने उम्मत के
[51:34]लिए छोड़ा था ऐलान ए gadheer की तरफ इशारा फार्मा रही हैं
[51:39]की हम ही तो वो अहले बैट हैं की जिनकी विलायत के
[51:42]ऐलान को परवरदिगार ए आलम ने अपने रसूल अल्लाह के ऊपर वाजिब
[51:47]करार दिया था और जब करार दिया था अपनी गलत सोच पर
[51:51]मगरूर ना हो और होश की सांस ले क्या तूने खुदा का
[51:58]यह फरमान भुला दिया है और इस अंदाज़ से बीवी ने फिर
[52:00]कुछ आयत की तिलावत सरकार रहा हूं [संगीत] की अल्लाह जो का
[52:17]रहा है की हक का इनकार करने वाले ये ना समझे की
[52:21]जो उन्हें मोलर देते हैं ये उनके हक़ में भलाई है बल्कि
[52:23]हम उन्हें मोहलत इसलिए देते हैं की वो गुनाह में ज्यादती करें
[52:28]यानी तुझे ये मोहर्रम मिल रही है ये तुझे कोई तुझ के
[52:31]ऊपर एहसान नहीं हो रहा है बल्कि तेरे ऊपर तो ये और
[52:34]वो बाल है की तू अपने गुनाह को और बधाई चले जा
[52:38]रहा है बधाई चले जा रहा है ताकि जब परवरदिगार रस्सी को
[52:42]खींचे तो तेरे पास समझने का मौका भी नहीं होगा बीवी ने
[52:45]वहां पर यह बयान किया सन रहे हैं ठीक है मुसलमान का
[53:05]बादशाह बैठा हुआ है ना कहिए बादशाह तो कहते हैं तो वो
[53:10]जो मुसलमान का बादशाह बैठा है उसको देखकर अली की बेटी अगर
[53:12]कुरान की आयत पद रही है तो का रही है और काफिर
[53:16]ये गुमान ना करें [संगीत] अल्लाह हु अकबर के बेटे आजाद किए
[53:56]हुए के बेटे मैं बहुत मोहताज गुफ्तगू कर रहा हूं तो उसका
[54:05]अलग कैसे ढूंढे जाते हैं शख्सियत के बारे में mukadshat को देखना
[54:11]हो तो देखना पड़ता है की कौन सी शख्सियत कैसे मुकदास होती
[54:17]है बीवी बयान कर रही है शख्सियत के बारे में आजाद किए
[54:21]हुए की औलादे मिल गया मैंने आलम के सई में इमामबाड़ा में
[54:42]सावधानियां को शादी ब्याह के मामला द हम तो उठकर बाहर चले
[54:53]गए छोड़ कर चले गए हम नहीं पता था की ऐसा भी
[54:55]कुछ होगा वहां पर क्योंकि एलन का तो ख्याल किया जाएगा अल्लाह
[54:58]हु अकबर makhalu तैयार किया बिल्कुल बंधन करते पर्दा और आलम के
[55:08]साइन के अंदर बैठकर डिनर हो रहा है क्यों फैमिली फैमिली अलग-अलग
[55:11]बैठी है [संगीत] क्या हुआ परेशान द वो भी बाहर जाकर जहां
[55:29]वह देख पगड़ी होती है वहां जाकर बैठ गए बेचारे [संगीत] जब
[55:38]भी पुष्टि सदा हम फना जगह [संगीत] मुझे बुलाया गया शादी में
[56:12]मैंने पूछा पार्टीशन है लानत हो तुम पर लेकिन वहां पर जहां
[56:31]बजे और उसके बाद फिर क्या-क्या याद आया तो हाथ लगाएंगे और
[56:42]जब सब कुछ हो जाएगा सारे आराम कम हो जाएंगे सारी खुराफात
[56:47]हो जाएंगी आखिर में पता चलेगा वो कुरान ले आओ कहीं से
[56:50]वो ऊपर से उठाया और दुल्हन को नीचे से निकल लिया क्या
[56:52]बच के निकल गए नीचे कुरान से कुरान के नीचे से निकल
[57:00]दो खबरदार पढ़ना नहीं है उसको लाहौली यह है हमारा मशरा अब
[57:06]जरा समझिए की ये सादात और ये शिया फैमिली कहां खड़ी है
[57:11]और यजीद कहां खड़ा है की बीवी क्या का रही हैं तुल्का
[57:13]के बेटे क्या ये तेरा इंसाफ है की तूने अपनी मशहूर रात
[57:21]और laundiyon को चादर और chadardi का tahfuj दिया है फाजिल शराबी
[57:28]जो अहलेबैत का मजाक उदा रहा है अपनी औरतों को चादर में
[57:35]रखा हुआ है yajidiyon की औरतें चादर के बगैर बाहर नहीं जाती
[57:39]और यह तादाद है जो बगैर चादर के बाहर जाना फखर समझती
[57:47]हैं यजीद से बत्तर तो चादर में है तेरी औरतें और तूने
[57:52]अहलेबैत के साथ ऐसा किया हुआ है आज यहां देखेंगे तो क्या
[58:01]कहेंगे की वो यजीद था लेकिन उसने अपनी औरतों को बेपर्दा नहीं
[58:05]किया तुम्हें क्या हो गया हक़ नहीं है उन्हें रोने का जिनके
[58:12]घर की महफिले संडास से होती हो किस चीज पर रो रहे
[58:15]हैं फिर आपने सौदा का तस्कर किया खुदा आले रसूल पाक तुझसे
[58:29]इंतेक़ाम लेकर इन majlumon का नो दिलाएंगे और उन्हें आमना अम्मान और
[58:32]सुकून की नेमत से मालामाल कर देंगे सूरा कस की पांचवे नंबर
[58:38]की आयत जहां पर परवरदिगार एलन ने ये ऐलान फरमाया की मनोहारी
[58:41]वो अनुन अल्लाह जीनता से कर रही हैं इशारे कर रही हैं
[58:51]आयात की तरफ यह खुदवा ऐसा है की कम से कम अगर
[59:00]50 लेक्चरर्स भी हो तो कम है आज मैंने सिर्फ खुलासा किया
[59:02]है आपके सामने वो भी पूरे khudbe को नहीं पद सका वाका
[59:06]खत्म हो गया बस परवरदिगार ए आलम से दुआ है की हमें
[59:13]इन kalimaten नूरानिया के नूर को अपने नफ़्स में जस करने की
[59:23]taufikra था परवरदिगार ए आलम से दुआ है की हमें आईना लेकिन
[59:29]जिस तरह भी मिल जाएगा अपने मैन में सम्मान किया मोहम्मद रह
[59:45]गए
0 تعليقات
sort ترتيب حسب
- أعلى تعليقات
- أحدث تعليقات
التالي
1 المشاهدات · 25/07/28
8 المشاهدات · 25/07/17
8 المشاهدات · 24/10/28
10 المشاهدات · 16/10/12
15 المشاهدات · 17/02/13
10 المشاهدات · 17/02/21
10 المشاهدات · 17/02/22
14 المشاهدات · 17/05/02
7 المشاهدات · 17/05/06
9 المشاهدات · 17/05/06
