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Jang e Khybar Kay Awamil Asbab Aur Nataij |H.I. Dr Aqeel Musa
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محاضرات
Record date: 28 Jan 2024 - جنگ خیبر کے عوامل اسباب اور نتائج AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:16]अजु बिल्लाह मिन शैतान रजी बिस्मिल्ला रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन व
[0:25]सलातो वस्सलाम अला अशरफ अंबिया वल मुरसलीन अबील कासिम [संगीत] मोहम्मद सला
[0:40]सलाम मास अजनाला र तरा सलेला मोहम्मद बल्ला मनता रम बिस्मिल्ला रहमान
[0:58]रहीम आज के दिन यह जो महीना है इसमें बहुत सारी मुनासिब
[1:07]हैं और हमारा टॉपिक जो है वह गजवा खैबर है लेकिन उससे
[1:17]पहले मैं कुछ मुकदम न कुछ बातें इस माह के बारे में
[1:22]और कल जो बीवी की शहादत जनाबे जैनब कुबरा सलाम उल्ला अलहा
[1:29]एक सवात पढ़े मोहम्मद वा आले मोहम्मद उनके बारे में चंद कलमा
[1:39]अर्ज करके इंशा अल्लाह अपने टॉपिक का आगाज करेंगे आपको जैसे कि
[1:46]पता है कि यह माह माहे रजब और शाबान रमजान की तैयारियों
[1:53]का है किस चीज की तैयारी खुदा से नजदीक होने की खुदा
[1:56]से मुलाकात करने की खुदा को राजी करने की के लिए मुकद्दमा
[2:02]जरूरी हैं और उन मुकद्दमा के लिए माहे रजब और माहे शाबान
[2:06]रखा गया है माहे रजब को माहे असब भी कहा जाता है
[2:12]यानी अल्लाह की रहमत पहुंचाने वाला महीना रिवायत में है कि बहिश्त
[2:19]में एक नहर है रजब की जिसमें दूध से भी ज्यादा सफेद
[2:29]जो है वो उसका पानी है और माहे रजब को माहे खुदा
[2:33]भी कहा गया है और इसी रिवायत में माहे शाबान को माहे
[2:36]रसूलल्लाह और माहे मुबारक रमजान को माहे उम्मते रसूल खुदा बताया गया
[2:45]है एक रोजा इस महीने में रखना नारे जहन्नम को एक साल
[2:56]के फासले पर कर देता है और अगर कोई इस महीने में
[3:03]तीन रोज रखले कम से कम तीन रोज रख ले तो जन्नत
[3:04]उसके लिए वाजिब और जहन्नम उसके लिए हराम हो जाती है इमाम
[3:12]जाफर सादिक अल सलातो सलाम के हदीस है के मेरी उम्मत के
[3:25]लिए यह इस्तग फार का महीना है लिहाजा हम सबको चाहिए कि
[3:28]हम इस महीने में जितना हो सके इस्तग फार करें यह इस्तग
[3:35]फार किस लिए है यह तौबा किस लिए ताकि पाक साफ होकर
[3:41]माहे मुबारक रमजान में पहुंचे ताकि उसकी नूरानिया को हासिल कर सके
[3:47]यह था माहे रजब का एक उसकी फजीलत का एक मुकद्दमा जनाबे
[3:54]जैनब कुबरा की शहादत जो कि कल की तारीख में हमें मिलती
[4:00]है रिवायत में बहुत सारी तारीखें मिलती हैं उनमें सबसे ज्यादा जो
[4:04]है कवी के जो हदीस है तारीख है वह कल की है
[4:10]देखि एक नुक्ता सिर्फ बयान करूंगा और फिर अपने टॉपिक का आगाज
[4:13]करेंगे हमें इस बात पर गौर खज करना चाहिए कि यह जो
[4:19]असबे कर्बला है यह जो असबे इमाम हुसैन है यह कैसे असब
[4:24]बन गए इनमें ऐसी क्या बात थी जो दूसरों में नहीं थी
[4:29]हजारों लोग चाहने वाले बहुत थे जैसे आज चाहने वाले बहुत हैं
[4:32]उस जमाने में भी अहले बैत को चाहने वाले इमाम हुसैन को
[4:39]चाहने वाले नवासे रसूल को चाहने वाले कूफा भरा हुआ था मदीना
[4:42]में भी लोग थे ठीक है लेकिन उनमें से सिर्फ 72 ही
[4:47]कर्बला के लायक और उस फाइक बन सके तो आखिर ऐसी क्या
[4:54]बात थी उनमें उनमें यह बात थी कि उनको बचपन से ही
[5:00]तैयार किया जा रहा था जैसे कि आप जानते हैं कि जब
[5:06]जनाब जैनब के अगद के लिए बातचीत हुई तो इमाम अली ने
[5:12]दो शराय रखी एक यह शर्त रखी कि वह इमाम हुसैन के
[5:14]रोजाना चेहरे की जियारत करती हैं लिहाजा उन्हें इजाजत दी जाए कि
[5:19]वह हर रोज देखि इससे शौहर के हुकूक भी पता चलते हैं
[5:28]इमाम जो है पहले इजाजत ले रहे हैं अगद से पहले के
[5:29]बीवी जो है अपने भाई की जियारत को हर रोज जाया करेंगी
[5:35]और दूसरी शर्त उन्होंने यह रखी के जब मदीने से मेरा बेटा
[5:44]जो है सफर शुरू करेगा तो वह उस सफर में उनके हमरा
[5:50]जाएंगी लिहाजा आप उसकी इजाजत देंगे तो इसीलिए जब सफर शुरू किया
[5:54]गया तो जो है जनाब अब्दुल्ला ने फरमाया कि यह बात पहले
[6:01]से तय हो चुकी तो कर्बला की तैयारी उस दिन नहीं होती
[6:07]बहुत सालों पहले से होती है अपनी नस्लों को बहुत पहले से
[6:14]ही न मोहम्मद को बीवी ने तैयार करके रखा था कि एक
[6:16]दिन जो है वो मामू जान पर अपनी जान को कुर्बान करना
[6:21]है तो अगर हम चाहते हैं कि हम अपने बच्चों को और
[6:27]अपने आप को लश्कर इमाम के लिए तैयार करें तो बच्चों को
[6:32]अभी से हमें बताना होगा कि तुम्हारी जिंदगी का मकसद और हद
[6:41]एक ही है जब जहूर हो तो लब्बैक कहना है हर चीज
[6:43]कुर्बान करनी है इमाम वक्त के नाम पर तो यह हमें भी
[6:52]इन हस्तियों से सबक सीखने की जरूरत है अब हम आ जाते
[6:56]हैं अपने टॉपिक यानी खैबर पर मा एक रिवायत जो है मौला
[7:05]की वह भी मैंने वो भी रिवायत भी पढ़ देते हैं काला
[7:08]रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अल वा वसल्लम एक सवात पढ़े अली इने अबी तालिब
[7:25]याक सत कमाता नार अल हत अली इने अबी तालिब की मोहब्बत
[7:30]तमाम गुनाहों को ऐसे खा जाती है जैसे आग जो है लकड़ी
[7:40]को खा जाती है इसका मतलब यह है के अली इने अबी
[7:47]तालिब की मोहब्बत और गुनाह दोनों जमा नहीं हो सकते अगर मोहब्बत
[7:52]है तो गुनाह जल जाएंगे और अगर गुनाह है तो फिर मोहब्बत
[7:57]नहीं है चेक करें अपने आप को अगर मेरी जिंदगी में गुनाह
[8:03]है मैं मोहिब बे अली इब्ने अबी तालिब सिर्फ जबान का हूं
[8:09]जबान पर हर वक्त मौला रहता है हमारे लेकिन किरदार में दिल
[8:16]में अपनी रूह में कितने अली इब्ने अबी तालिब की मोहब्बत है
[8:21]तो अली से मोहब्बत करने वाला शख्स गुनाहों के नजदीक नहीं जा
[8:29]सकता यह इस हदीस का खुलासा है एक सवात पढ़े मोहम्मद वाले
[8:34]मोहम्मद स जंगे खैबर जाहिर है कि एक बहुत तूला बाब है
[8:46]तारीख इस्लाम का और रसूलल्लाह की जिंदगी का क्योंकि मौजू दिया गया
[8:55]है कि उसके अवाम और उसके नताइएपीजीईटी है तो वह मौला की
[9:02]और मरहब की जो जंग है उसके बारे में बताया जाता है
[9:08]लेकिन आज हम कोशिश करेंगे कि उसका पस मंजर और उसके बाद
[9:10]क्या नताइएपीजीईटी थी बहुत तूला नहीं जंग थी और उसमें मुसलमानों को
[9:34]फत हासिल हो चुकी थी तो लिहाजा मुसलमान अपर हैंड पर थे
[9:43]एक एक उनको नफ्स तौर पर सुपीरियोर हासिल हुई हुई थी उस
[9:48]जंगे अजाब के बाद छोटी-छोटी जंगे जो तारीख में कम मिलती हैं
[9:56]ढूंढना पड़ती है कि छोटे-छोटे जंगे झड़पें होती रही हैं तलिफ कबीलों
[10:01]के साथ और मुसलमान उसमें जीतते रहे हैं तो अब मुसलमानों की
[10:08]फतह का दौर है मुसलमान फतह के ऊपर फतह हासिल करते चले
[10:10]जा रहे हैं फिर सात हिजरी में क्या हो गया सुल हुदे
[10:16]बिया पेश आ गया सुल हुदे बिया आपको पता है के जो
[10:23]है रसूल खुदा ने ख्वाब देखा था और फिर वह हज के
[10:30]लिए मक्का तशरीफ लाए थे लेकिन मक्का के बाहर हुदबे वालों ने
[10:34]कहा हम तो इजाजत नहीं देंगे लिहाज कुरान के आयतें नाजिल हुई
[10:40]और वहां पर एक सुलहनामा किया गया सुलहनामा यह था कि 10
[10:43]साल तक कोई जंग नहीं होगी और हम अगले साल आके हज
[10:49]करेंगे फिर वो उमर तोल कजा जो है वो आखिर में अगर
[10:57]हुआ तो तो 10 साल तक मुसलमानों को पता था कि जो
[10:59]है मक्का से हम पर हमला नहीं होगा यानी कुफा मक्का को
[11:06]कंट्रोल कर चुके थे सुलह हुदे बिया के बाद रसूल इसी के
[11:16]साथ-साथ जो आपने खत का सिलसिला जारी किया और जितनी भी दुनिया
[11:20]में ताकतें थी हुकूमत थी उन सबको रोम को ईरान को सबको
[11:28]खत भेजना शुरू कर दिए थे यानी इस्लाम फैल रहा था यह
[11:32]यह वह जमाना था तो मुसलमानों को मक्का के अंदर से मक्का
[11:37]के कुफर से कोई अब खतरा नहीं था लेकिन मदीना के बाहर
[11:46]जो है मदीना के बाहर से मुसलमानों को खतरा ला हक था
[11:52]और वह भी यहूदियों से यहूदियों से जो बुनियादी खतरा है ना
[11:56]यहूदी मसला यह था कि यहूदी किसी भी मुहा पर बाकी नहीं
[12:02]रहते थे रसूलल्लाह ने पहले तो इस बात को समझे कि मदीना
[12:05]के इर्दगिर्द य यहूदी क्यों जमा हुए थे इनके जो राहिब थे
[12:11]इनके जो उलमा थे यहूदियों के बनी इसराइल के उन्होंने उनको यह
[12:15]बताया था के अगला नबी यहां पर आने वाला है इस खते
[12:23]में आने वाला है तो वह मदीना और मक्का के इर्दगिर्द आकर
[12:30]आबाद हुए लेकिन जब वो आने वाला आया तो वह बनी इसराइल
[12:37]से नहीं था वह बनी इस्माइल से था इसको उन्होंने एक्सेप्ट नहीं
[12:41]किया कि यह कैसे हो सकता है बनी इसराइल से जो है
[12:46]नबी ना आए सही है जबकि यह तो खुदा का काम है
[12:51]खुदा के कामों में मुदा नहीं करनी चाहिए मुझे ऐसा लगता है
[12:53]कि हमारा भी हाल ऐसा ही हो गया है कि हम इंतजार
[12:57]तो कर रहे हैं उस मुंजी बशरी अत का लेकिन वह मुंजी
[13:03]बशरतपुर हम किस कहां खड़े हैं इमाम के कितने चाहने वाले हैं
[13:33]तो वहां पर जो यानी बरक्स वहां पर क्या हुआ जो लोग
[13:40]इंतजार कर रहे थे रसूल खुदा का वह उन्होंने जंगे करी रसूल
[13:48]अल्लाह से और वह मुशरिक जो के बुत परस्त थे वह तब्दील
[13:50]होते होना शुरू हो गया सही तो जो अहले किताब थे यानी
[13:57]यहूद और नसा वो ईमान नहीं लाए जब वो इंतजार कर रहे
[14:04]थे अपने आखिरी अगले रसूल का और जो लोग बुत परस्त थे
[14:07]गुमराही में पड़े हुए थे वह जो है वह रसूलल्लाह पर ईमान
[14:13]लाना शुरू हो गए पस लेकि इस बात को समझे के यहूदी
[14:21]यानी खैबर का वाकया जरा यहूदियों से यहूदियों के तीन बड़े कबीले
[14:25]थे ठीक है एक था बनू कुरजा एक था बन कनका और
[14:32]एक बनू नजीर यह तीन बड़े कबीले थे जो कि आबाद थे
[14:41]इर्दगिर्द मदीना के तूला नहीं बहस ना हो जंगे बदर के बाद
[14:44]बनू कनका का मुहास किया रसूलल्लाह ने और उनको मदीने से निकाला
[14:53]मदीना में रहते थे ठीक है इसी तरीके से जंगे एहज जंगे
[15:00]खंदक जब खत्म हुई तो रसूलल्लाह जो है साथ ही मदीने के
[15:03]साथ ही बनू कुरजा रहते थे उनका मुहास किया ठीक है उनका
[15:10]मुसरा करके उनको भी मदीने से बेदखल किया और फिर आखिर में
[15:14]बनू नजीर यह बनू नजीर जो है यह सबसे खतरनाक मुसलमानों के
[15:21]खिलाफ यह कबीला साबित हुआ और बनू नजीर को जंगे खंदक के
[15:28]बाद इनको मदीना से निकाल दिया गया था जब अ बल्कि पहले
[15:35]ही निकाल दिया गया था और यह जंगे खंदक को शुरू करवाने
[15:43]वालों में से थे और जो है कुरैश के पास यह गए
[15:47]थे कि हम मिलकर मुसलमान बहुत फैलते जा रहे हैं इस्लाम फैल
[15:49]रहा है लोगों में जगह कर रहा है हमें इसका मुकाबला करना
[15:56]चाहिए तो बनू नजीर जंगे अजाब में भी उनका किरदार था मुसलमानों
[16:01]के खिलाफ और फिर इस खैबर से पहले वह जब मदीना से
[16:08]निकाले गए तो वह जाकर खैबर में आबाद हो गए अब जब
[16:13]खैबर में आबाद हो गए तो वहां पर उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ
[16:16]तबलीग शुरू की कि इनका मुकाबला जरूरी और बि जरूरी है अब
[16:22]उसके लिए उन्होंने दो-तीन काम किए नंबर एक काम किया वहां पर
[16:26]एक बहुत बड़ा कबीला था कबीला गत फान जो कि खैबर से
[16:32]ही शुमाल और मशरिक की जानिब था मशरिक और शुमाल की जानिब
[16:41]एक कबीला था गत फान तो इस गत फान को इन्होंने अपने
[16:47]साथ मिलाया और कहा कि हम यहूदियों को कन्विंसिंग जंग करें अब
[16:59]उसमें और भी तफसी त है हम बहुत ज्यादा तफसील में नहीं
[17:07]जाते हैं रसूल तक य खबर पहुंची कि यह यहूदी जो है
[17:09]वह तैयारी पकड़ रहे हैं तैयारी कर रहे देखें इस बात को
[17:14]भी समझे के रसूल अल्लाह को हर चीज की खबर मिलती थी
[17:19]कि उनका दुश्मन क्या प्लानिंग कर रहा है इसीलिए वह मुकाबला कर
[17:24]पा रहे थे तो उनकी सीरत से हमें यह भी मिलता है
[17:28]कि आपको अपने दुश्मन से बाख पर रहना चाहिए कि दुश्मन क्या
[17:30]सोच रहा है क्या प्लानिंग कर रहा है क्या कर रहा है
[17:34]खैबर जो है खैबर को समझने की जरूरत है कि खैबर में
[17:39]यहूदी जो है किले की सूरत में रहा करते थे किलो की
[17:44]सूरत में एक नंबर एक यह सरसब्ज शादाब इलाका था यहां पर
[17:48]पानी था फरवानी थी जो है इनकी एक इक्त साद बहुत स्ट्रांग
[17:58]थी खेतीबाड़ी हुआ करती थी तो यह खेतीबाड़ी के हवाले से बहुत
[18:02]मजबूत थे माशी लिहाज से बहुत मजबूत थे खैबर वाले नंबर दो
[18:09]जंगी साजो सामान बनाने में इनकी बड़ी एक्सपर्टीज थी जिरा बनाना तलवारें
[18:15]बनाना और असलहे में भी यह बड़े एक्सपर्ट हुआ करते थे आज
[18:19]के यहूदी भी असले में ही एक्सपर्ट है माशाल्लाह से ठीक है
[18:24]और तीसरी चीज जो खास बात थी वह यह थी कि वह
[18:28]किले बनाकर रहा करते थे तो उनकी प्रोटे बड़ी होती थी ठीक
[18:31]है किले में कोई दाखिल नहीं हो सकता था और किले में
[18:35]वह सेफ फील करते थे ये जो इसराइल यह जो अभी बनाना
[18:39]चाह रहे हैं यह भी चाह रहे थे कि इसराइल जो है
[18:45]एक ऐसा मरकज हो जो सेफ हो और यहूदियों के लिए एक
[18:46]रहने की जगह हो ठीक है जोक सेफ तो क्या वो तो
[18:52]उस दुनिया का सबसे सबसे बड़ी जंग जो है वहीं पर होने
[18:56]जा रही है तो यह था पस मंजर खैबर के बहुत सारे
[19:02]किले थे उनमें से उसी के नजदीक फेदक की जमीने थी फेदक
[19:06]प भी इंशाल्लाह आते हैं बताता हूं मैं फेदक का क्या सिलसिला
[19:09]था और जो है सबसे बड़ा जो किला था वह किला कमूस
[19:16]कहलाया जाता था और उसका जो सिप सालार था वह था मरहब
[19:22]मरहब उसका सिप सालार था तो जब रसूलल्लाह को इसका इसकी खबर
[19:26]हुई तो सात हिजरी में 1600 मुसलमानों के लश्कर के साथ अब
[19:32]ये जो तादाद है ना जाहिर है उस जमाने में कोई इस
[19:36]तरह से गिना नहीं करता था कोई कोई मुख्तलिफ अहा दीस में
[19:39]लोगों ने अंदाज कोई एक तदा कह दी तो बहुत यह जो
[19:45]मुसलमानों की त तादाद इतनी थी कुफर की तादाद इतनी थी यह
[19:49]बहुत ज्यादा जो है वह ऑथेंटिक नहीं है एक अंदाज है अंदाज
[19:55]1600 मुसलमान जो है क्यों रिवायत में मुख्तलिफ तदा बयान की गई
[20:00]है और यह जो मदीना के शुमाल में 165 किलोमीटर के फासले
[20:07]पर तो रसूलल्लाह ने 1600 अफराद को जमा किया और फौज को
[20:14]तैयार किया और तीन दिन की मसाफत के साथ कहां पहुंच गए
[20:17]शुमाल मदीना में खैबर को पहुंच गए अब यह एक अचानक मूवमेंट
[20:24]थी रसूलल्लाह की यह भी एक जंगी हिकमत अमली है के यहूदी
[20:29]यह एक्सपेक्ट कर रहे थे कि हम जो इतने स्ट्रांग है हमारे
[20:33]पास इतना असला है हमारे पास जो है किले हैं तो मुसलमान
[20:39]हम पर आ सकते हैं चढ़ाई कर सकते हैं वह कभी सोच
[20:41]नहीं सकते थे उनके वहम गुमान में नहीं था और रसूल खुदा
[20:46]1600 अफराद को लेकर खैबर के किलो पर पहुंच गए तो वह
[20:51]हो गए हक्का बक्का कि यह क्या यह क्या हो गया अचानक
[20:55]जो है रसूलल्लाह ने मुहास कर लिया इस जंग में रसूलल्लाह ने
[21:03]हत्ता खवातीन ने भी शिरकत की और जनाब उम्मे सलमा जो हैं
[21:05]वह भी इस इस जंग में आपके साथ शरीक थी सबसे पहले
[21:12]मुसलमानों ने क्या किया वह जो कबीला था गत फान जिसकी हिमायत
[21:19]जो है बनू नजीर वाले लेकर यहूदियों के साथ हमला करना चाह
[21:23]रहे थे वह लाइन उन्होंने कट ऑफ कर दी यानी खैबर और
[21:29]और कत फान के बीच में मुसलमान आ गए ताकि जो है
[21:34]वह इनकी मदद को ना आ सके यह देखें हिकमत अमली से
[21:40]जंगे जीती जाती है सिर्फ जोश और जज्बे से जोश और जज्बा
[21:42]भी जरूरी होता है लेकिन मुसलमानों की हिकमत अमली जो है वह
[21:49]कामयाब थी अब यहूदी थे ऊपर और मुसलमान थे नीचे और मुसलमान
[21:51]बिल्कुल महासर यानी चैलेंज कर दिया था उन्होंने तो अब उनको ला
[21:57]महाला जो है जंग के लिए आना पड़ा अब जंग में उन्होंने
[21:59]सबसे पहले क्या किया वही जो डरपोक इंसान करता है तीर अंदाजी
[22:05]और पत्थर फेंकना शुरू किए अगर जो है बहादुर होते तो आते
[22:07]कि भाई ठीक है जंग कर लेते हैं लेकिन जो है उन्होंने
[22:11]पत्थर मारना शुरू किया और तीर अंदाजी मुसलमानों ने बहुत सख्ती से
[22:14]इसका मुकाबला किया जाहिर है जब दुश्मन ऊपर होता है आप नीचे
[22:19]होते हैं तो मुकाबला सखत सख्त लेकिन खैर मुसलमानों ने कई दिनों
[22:24]के बाद सारे जो किले थे उन पर कब्जा हासिल कर लिया
[22:29]सिर्फ सबसे बड़ा किला जो है कमूस वह रह गया जिसका सिप
[22:36]सालार मरहब था तो लिहाज सीर इने हशाल रह गया तो फिर
[22:49]रसूल खुदा ने सबसे पहले जो खलीफा अव्वल है उनको भेजा गया
[22:59]ठीक है ना एक नंबर तो वह वो भी वापस आ गए
[23:03]फिर जो है ये तमाम अहले सुन्नत इसको कबूल करते हैं उनकी
[23:05]किताबों में भी मौजूद है फिर खलीफा दवम को भेजा गया ठीक
[23:12]है ना तो वह भी जो है वापस आ गए और इस
[23:16]केले को जो है वह इसका मुहास जो इस किले को फतह
[23:21]नहीं कर सके तो फिर वह मशहूर और मारूफ जुमला जो रसूल
[23:24]खुदा ने फरमाया कि कल मैं वो अलम जो है उसको दूंगा
[23:30]कि जो हतमान और हतमान इसको फता याप करेगा और वह अल्लाह
[23:37]और रसूल का चाहने वाला होगा और अल्लाह और रसूल भी उसको
[23:39]चाहते होंगे अब तारीख में है कि वह रात जो है सब
[23:45]परेशान थे कि अलम किसको दिया जाएगा ठीक है और इमाम अली
[23:51]की आंखों में आशुब चश्म था इसलिए वह जो है अपने खमे
[23:57]में थे तो जब सुबह हुई तो रसूल ने फरमाया कि अली
[24:02]कहां पर है और फिर जब अली तशरीफ लाए तो फिर अपने
[24:04]लबे दहन से शिफा बख्शी आपकी आंखों को तो वहां पर जो
[24:12]है यह हस्सान बिन साबित हस्सान बिन साबित एक शायर है और
[24:17]उसने अशर पढ़े इन अार का तर्जुमा मैं आपके सामने पढ़ना चाहता
[24:21]हूं जिसमें पूरी ही कहानी मौजूद है और अली आशुब चश्म में
[24:27]मुब्तला थे और इसकी दवा चाहते थे ले लेकिन कोई इलाज करने
[24:30]वाला नाना था इनको रसूल अल्लाह ने अपने लबे दहन से शिफा
[24:37]बख्शी पस लबे दहन जिसमें डाला गया और जिसने डाला दोनों बाबकॉक
[24:58]का इंतखाब किया सब लोगों को छोड़ते हुए और इनका नाम वजीर
[25:07]भाई चारा रखने वाला रखा यह तारीख में हस्सान बिन साबित के
[25:14]अार उस जमाने में लोग अशर जो है हिफ कि करते थे
[25:17]और वह फिर सदियों के एक सदी से दूसरी सदी दूसरी सदी
[25:22]से तीसरी सदी महफूज होकर चले आते थे तो यह तारीख की
[25:30]किताबों में अशर महफूज है अब वोह पूरी तफसील में हम नहीं
[25:38]जाते हैं थोड़ा सा शॉर्ट करते हैं के आपको अलम दिया गया
[25:40]और जो है आप अलम को लहराते हुए हरवला की सूरत में
[25:46]किले कमूस तक पहुंचे और फिर मरहब हर रोज की आदत के
[25:53]मुताबिक किले से बाहर निकला और मस्त हाथी की तरह मैदान में
[25:55]आया और उसने एक रजस रजस पढ़ा ठीक है वह रजस जो
[26:04]है वो रजस क्या था वो रजस यह था के कद आलिम
[26:10]तो खैरानी मरहबा खैबर वाले जानते हैं खैबर वाले जानते हैं कि
[26:22]मैं मरहब हूं मुकम्मल जंग के हथियारों से आरास उसका वह जो
[26:25]साजो सामान था वह बहुत ज्यादा हुआ करता था मुकम्मल जंग के
[26:32]हथियारों से आरास्को बहादुर हूं ठीक है कद अलि मत बरा नहीं
[26:43]मरहब मरहबा तो इस पर अमीरुल मोमिनीन ने फिर अपने अशर पढ़े
[26:49]कि जो कि मशहूर है अन लजी समत नहीं उम्मी हैदरा मैं
[26:58]वह हूं जिसका नाम उसकी मां ने हैदर रखा और जरघम आजा
[27:01]वल कसूर यह सब मुख्तलिफ किस्में हैं अरबी जबान में शेरों की
[27:10]ठीक है ना जरगा और आजा तो पेशा मैं जो हूं बड़ा
[27:17]शेर हूं ठीक है एकदम से जो है मरब को याद आता
[27:25]है कि उसकी दाई ने उसको यह कहा था कि तुम हर
[27:28]एक पर हावी आ जाओगे सिवाय एक शख्स जिसका नाम हैदर होगा
[27:30]उसको याद आता है वह पलट जाता है कि भाई इससे मैं
[27:36]मुकाबला नहीं करूंगा एकदम से शैतान इब्लीस जो है यहूदी आलिम की
[27:42]सूरत भेज बदलता है और उसको कहता है कि तुम्हें क्या मालूम
[27:44]यह वही हैदर है कि नहीं है देखें शैतान इस तरह से
[27:49]वरगला आता है आपके अंदर वस्व डालता है कि पता नहीं इतने
[27:54]सारे हैदर है यह वही हैदर है कि नहीं है क्या मालूम
[27:56]ठीक है वोह फिर तैयार हो जाता और फिर जाता है और
[28:02]फिर गजब की जंग होती है और अली जो है उसके दो
[28:07]टुकड़े कर देते हैं कोई कोई यह एक्सपेक्ट नहीं कर सकता था
[28:14]कि मरहब जैसा पहलवान जो है अली जैसा एक जवान सा बच्चा
[28:17]जो है वो उसके दो टुकड़े कर देगा सवा अल्लाहु सल्ले अला
[28:28]मोहम्मद वाह तो उनके जो है ना औसान खता हो जाते हैं
[28:34]यहूदियों को समझ में नहीं आ रहा होता है कि भाई यह
[28:38]तो हमारा जो है मरहब ही मार दिया गया अब हमारा क्या
[28:42]होगा ठीक है तो वह सब किले में जाते हैं अली जो
[28:47]है वह खैबर का दर कहते हैं कि दो दो उंगलियों के
[28:50]इशारे पर जो है और बाद में पूछा गया इमाम अली से
[28:54]कि आपने किस ताक क्योंकि पता नहीं कितने रिवायत में 16 या
[28:59]14 अफराद जो हैं वह मिलकर उस दरवाजे को खोला करते थे
[29:05]बंद किया करते थे इतना भारी दरवाजा था तो आपने कहा कि
[29:08]मैंने अपनी रूह की ताकत से उसको उखाड़ था खैर उस दरवाजे
[29:14]को अब आप अपनी ढाल बनाते हैं मुकाबला करते हैं अंदर तक
[29:20]जाते हैं खंदक के ऊपर रखते हैं ताकि उसको मुसलमान अबू कर
[29:24]सके और फिर पूरा लश्कर जो है वो खंदक को करके जो
[29:32]है वह उस कले में दाखिल हो जाता है और फिर इस
[29:37]पर फता या हो जाते हैं अब इसकी फत के बाद असल
[29:45]चीज जो है वह यहूदी जो है वह एक महादे पर तैयार
[29:50]हो जाते हैं देखि यहां से हमें फेदक को समझने की जरूरत
[29:52]है कि फेदक का बैकग्राउंड क्या है और तो वोह कहते हैं
[29:58]खैबर वाले कहते हैं कि हम आदी आमदनी जो है वह आपको
[30:04]देंगे और आप जब चाहे हमें अपनी जमीनों से बेदखल कर सकते
[30:06]हैं क्योंकि कब्जा तो हो ही चुका था ठीक है रसूलल्लाह अनएक्सपेक्टेड
[30:11]यह भी अनस उनको यह था कि रसूल अल्लाह इन सबको खत्म
[30:17]कर देंगे क्योंकि यहूदियों ने मुसलमानों के खिलाफ बहुत साजिशें और बहुत
[30:22]उन्होंने तकलीफें पहुंचाई थी लेकिन रसूल जो है इनके साथ महादा कर
[30:25]लेते हैं और आदी जमीन की आमद आदी आमदनी जो है वह
[30:32]हुकूमत इस्लामी को मिलती है और व जो आदी जमीन है उस
[30:37]पर वह लोग रहते हैं और वह इनका महिदा होता है कि
[30:42]मुसलमान जब चाहे उनको खाली करा सकते हैं अब फेदक भी इसी
[30:44]जमीन से खैबर से नजदीक एक जमीन थी फेदक इसको आप वो
[30:51]भी बहुत सरसब्ज और शादाब और उसकी आमदनी बहुत ज्यादा थी देख
[30:57]ये इक्त सादी मसला था ठीक है दो चीजें होती हैं जो
[31:01]जंग की बाद जो चीजें हासिल होती है वह दो तरह की
[31:06]होती है एक होती है माल गनीमत ठीक है जंग करके जो
[31:08]चीजें हासिल होती हैं जो असला हासिल होता है जो जमीन हासिल
[31:13]होती है वह होती है माले गनीमत माल गनीमत जो है वह
[31:18]मुसलमानों में तकसीम किया जाता है और रसूलल्लाह खुद तकसीम किया करते
[31:24]थे लेकिन वो वो जमीन जो कि बगैर किसी जंग के यानी
[31:32]दुश्मन सरेंडर कर कर आ जाए और कहे कि यह आप ले
[31:36]ले हम शिकस्त मानते हैं उसको कहते हैं खालिसा एक होता है
[31:40]माले गनीमत एक होता है खालिसा खालिसा यानी य खालिस रसूलल्लाह की
[31:44]मिल्कियत है इसका नाम ही यह है खालिसा यह रसूल अल्लाह की
[31:51]जाती मिलकियत होता है यह इस पर रिवायत भी है और आयात
[31:58]भी है तो फेदक भी इसी तरी से वो लोग यहां पर
[31:59]आए उन्होंने बगैर जंग के जब उनको पता चल गया कि सब
[32:03]पर ही कब्जा हो चुका है तो फेदक वालों ने कहा कि
[32:07]आप जो है यह हमारी जमीनें जो हैं वह आपके लिए हैं
[32:12]इसकी आमदनी आपकी होगी और हमें सिर्फ यहां पर रहने की इजाजत
[32:14]दी जाए तो रसूल अल्लाह की जाती मिल्कियत में आ गया और
[32:19]फिर जब बनी इसराइल की 66वीं आयत यह सब अहले सुन्नत सब
[32:26]मानते हैं इसको कि वाते जल कुरबा हह जब यह आयत नाजिल
[32:30]हुई कि आपके अहले कराबे उनका हक अदा कर दिया कर दें
[32:40]तो रसूल खुदा ने इस फिद को जनाबे सैयदा को अता कर
[32:42]दिया अब क्योंकि अहले बैत के पास यह एक इक्त सादी हार्ट
[32:50]लाइन थी ठीक है आपकी यानी अहले बैत को किसी से कुछ
[32:57]मांगने की जरूरत नहीं थी और यहां से आपका जो है ना
[33:00]वह इक्त साद जब मजबूत होती है तो फिर आप हर चीज
[33:06]की तैयारी कर सकते हैं और व जो दुश्मना अहले बैत थे
[33:08]व नहीं चाहते थे कि इक्त साद जो है अहले बैत की
[33:11]वह मजबूत हो तो जो है तब जाके जो है यह फेदक
[33:18]के मसले को लिया गया फेदक जो है वापस लिया गया और
[33:25]फिर उसकी अपनी एक तारीख है जंगे अब जो है इतम की
[33:31]बात हम करते हैं कि खैबर का मुकद्दमा मैंने आपको बता दिया
[33:34]कि यहूदियों की साजिशों की वजह से रसूलल्लाह ने खैबर की तरफ
[33:40]आए थे खता में बहुत ही अहम तरीन वाकया इतना अहम तरीन
[33:44]वाकया जिसको हम ज्यादा अहमियत नहीं देते हैं और वह यह था
[33:50]कि हश से हजरत जाफर इब्ने अबी तालिब जो हैं वो वापस
[33:58]आए थे ठीक है तो रसूल अल्लाह की मसर्रत का हाल यह
[34:02]था कि आपने यह फरमाया कि मैं किस पर ज्यादा खुशी मनाऊं
[34:08]खैबर की फतह पर खुशी ज्यादा मनाऊं या जाफर की आमद पर
[34:16]ज्यादा खुशी मनाऊ क्यों क्योंकि वो हश का वक्त याद था मुसलमानों
[34:19]को कि जब मुसलमानों पर बहुत सख्त और कड़ा वक्त था और
[34:25]वह हश हिजरत करकर हजरत जाफर को उसका जिम्मेदार बनाकर भेजा गया
[34:29]था तो अब इस जंग के खतामुल मानों की कुदरत और ताकत
[34:35]बहुत ज्यादा हो चुकी थी लिहाजा रसूलल्लाह ने फिर शाम पर शाम
[34:41]को फतह करने के लिए जंगे मौता जिसको कहा जाता है और
[34:44]जंगे मौता में यही हजरत जाफर ने अबी तालिब को भेजा गया
[34:52]और तीन कमांडर्स थे उसके के पहले जाफर इब्ने अबी तालिब कमांडर
[34:56]होंगे अगर वह शहीद हो गए तो बिन हारे सा यह जैद
[35:00]बिन हारे सा वही हैं जो उसामा के वालिद हैं जो रसूल
[35:05]खुदा ने अपने आखिरी अया में जो लश्कर तश्वी दिया था लश्कर
[35:12]उसामा जेश उसामा जिसको कहा जाता है यह उनके वालिद थे जो
[35:14]कि शाम में शहीद किए गए थे तो एक वजह यह भी
[35:18]थी कि मुसलमानों को अपना बदला लेना था तो जैद बिन हारिस
[35:23]भी इस जंग में जंगे मौता में शहीद होते हैं उसके बाद
[35:25]अब्दुल्ला इब्ने रवा हा को को रसूलल्लाह ने जो है कमांडर बनाया
[35:32]था और वह भी शहीद हो जाते हैं और फिर जैसे कि
[35:36]आप लोग जानते हैं कि खालिद बिन वलीद के कहने पर मुसलमान
[35:38]लड़े बगैर जंगे मौता से वापस आ गए थे मदीना बहुत लंबा
[35:45]सफर वह हुआ करता था तो इस तरीके से जंगे खैबर के
[35:51]बाद मुसलमानों को यहूदियों पर एक सुप्रीमेसी हासिल हो गई और कुफर
[35:55]कुफर पर जंगे खंदक के बाद हासिल हो गई थी तो एक
[36:01]नए फेज में जो है ना इस्लाम दाखिल हो गया और फिर
[36:07]बहुत फते मक्का से मुसलमान बहुत नजदीक हो गए और जो है
[36:11]मुसलमान इस्लाम के फैलने की जो है वह दिन आ गए वाखर
[36:18]दावानल हमदुलिल्ला रब्बिल आलमीन इसी दुआ के साथ हम इस दर्स का
[36:25]ताम करते हैं कि खुदा हमें जो है वह दीन इस्लाम को
[36:26]बेहतर तौर पर पढ़ने की समझने की और उस पर अमल करने
[36:32]की तौफीक इनायत फरमा खुदा माहे रजब है माहे तफर है हमारे
[36:38]छोटे बड़े गुनाह वह गुनाह जो हमने जानबूझ कर किए और वह
[36:40]गुनाह जो हमसे सर्जर हो गए हैं और हमें उसका इल्म नहीं
[36:45]है तमाम के तमाम गुनाहों को इस माहे रजब की फजीलत के
[36:51]सिलसिले में बरकत के सिलसिले में इन गुनाहों को माफ फरमा दे
[36:55]खुदा हमें अहले बैत ार से मतमस रहने की तौफीक इनायत फरमा
[37:02]उनकी सीरत पर चलने की तौफीक इनायत फरमा खुदा जितने भी मरीज
[37:09]है उनको शिफा आजल इनायत फरमा खुदा जो बेगुनाह असीर है उनकी
[37:13]जल्द अस जल्द रिहाई फरमा खुदा हमारे मरहन की कब्रों में नूर
[37:20]अहले बैत इनायत फरमा खुदा हमारे बच्चों को इल्म हासिल करने की
[37:26]और खास तौर पर में दन हासिल करने की तौफीक इनायत फरमा
[37:33]खुदा माहे मुबारक रमजान नजदीक है हमें कुरान से मतमस होने की
[37:37]तौफीक इनायत फरमा कुरान की तिलावत की कुरान को समझने की और
[37:44]उस पर अमल करने की तौफीक इनायत फरमा ऐ खुदा कल्बे नाजनीन
[37:47]इमाम जमाना को हमसे राजी और खुशनूर फरमा हमें उनके आवान अंसार
[37:55]में शामिल फरमा और उनके जहूर में ताजल फरमा वा हमदुलिल्ला रब्बिल
[38:01]आलमीन एक सवात पढ़े मोहम्मद वाले मोहम्मद
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