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Seerat Siyasi Imam Hasan Askari | Dr Jawwad Haider Hashmi
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محاضرات
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Transcript
[0:38][संगीत] [संगीत] [संगीत] 11 इमाम हज़रत इमाम हसन की जानिब से एक
[1:20]अच्छा सिलसिला है की जो साल भर हरिद्वार को दुरुस्त का ससुरा
[1:28]के ऊपर होता है और मुहर्रम के बाद इस साल यह पहला
[1:30]आधार से और इमाम अली सलाम की सियासी जिंदगी है इमाम अली
[1:49]सलाम की विलादत के आवाज़ से हमारे पास चंद्र revayaten पाई जाती
[1:54]हैं की इमाम के इरादत चार रिव्यूज हनी को हुए बज देकर
[2:03]रिवायत के मुताबिक इमाम की इबादत रवि ओसेन को हुई और तीसरी
[2:10]रिवायत के मुताबिक इमाम की biradat 10 रबी उसनी को हुई तो
[2:15]ये अलग-अलग revayaten पाई जाती हैं और साल के हवाले से ये
[2:21]है की इमाम के viladate बाद शहादत का जो साल था वो
[2:24]232 और इमाम अली सलाम की शहादत के हवाले से आप जानते
[2:45]हैं इमाम की शहादत के आवाज़ से भी दो तरह की रिवायत
[2:48]पाए जाते हैं लेकिन हमारे यहां आमतौर पर जो मशहूर nibhaayad है
[2:55]हमारे कलम को याद है वो आठ रेगुलर हुआ है इसीलिए हमारे
[2:58]यहां अय्या में आजा मुहर्रम और आराम से जब इसका आगाज होता
[3:02]है तो आठ रबी उल तक होता है क्योंकि आठ रबी उल
[3:06]अव्वल को इमाम अली सलाम की शहादत का दिन है [संगीत] और
[3:18]260 हिजड़े इमाम अली सलाम की शहादत का दिन अगर हो शहादत
[3:24]का साल अगर हो तो इस तरह आप अंदाजा लगे तो आपको
[3:28]मालूम होगा की इमाम की उम्र मुबारक बनती है 28 साल टोटल
[3:32]नंबर बनती है 28 साल और आप बेहतर जानते हैं की 28
[3:37]साल को शाहिद किया गया इससे पहले आपके वादे मजीद की अगर
[3:50]हम बात कर लें इमामे अली अल्लाह सलाम के तो ईमान में
[3:52]हाजी अली सलाम को भी सिर्फ 42 साल की उम्र में शाहिद
[3:58]किया गया 254 हिजरी में इमाम के शहादत हो जाती है और
[4:01]जब आपकी शहादत होती है तो आपकी उम्र मुबारक है 42 साल
[4:05]बच्चे तो शायद समझ गए होंगे की 42 साल के बहुत बड़ी
[4:11]चीज है की 42 साल भी जवानी ही है और इमाम के
[4:22]जलते अमजद यानी हज़रत इमाम मोहम्मद तकिया अलैहिस्सलाम की अगर हम बात
[4:27]करें तो इमामे तकिया alaihissarat वसल्लम को 25 साल की उम्र में
[4:35]शाहिद किया है और 25 साल भी क्या है बिल्कुल एन जवानी
[4:38]के आलम में तो इमाम ज़माना से पहले ये जो आखिरी तीन
[4:42]इमाम है इनके उम्र मुबारक को अगर आप देखेंगे तो आपका अंदाजा
[4:49]होगा की उसे जमाने के हालत कितने सख्त होंगे उसे जमाने के
[4:55]जो हुकूमत है वो इन इमाम सलाम के हवाले से किस किस्म
[4:58]की पानी सी रखते द के इमाम की शहादत हो रही है
[5:02]25 साल की उम्र में 42 साल की उम्र में और उसके
[5:10]बाद 11 इमाम के शहादत हो रही है यादव [संगीत] पॉलिसी के
[5:30]तहत मदीने मुनव्वर छोड़ने पर मजबूर किया जाता है और तू उसके
[5:35]अंदर लाकर इमाम अली सलाम को कामरान अपनी tahjebil में और इसी
[5:42]तरह अपनी निगरानी में रखने की कोशिश करते हैं जिसके बाद इमाम
[5:47]के वहां पर शहडोल हो जाती है [संगीत] तारीखों को देखने के
[5:56]बाद और पढ़ने के बाद वो यही है की इन सलाम के
[6:01]दौर में सियासी हालत नहीं द आप जानते हैं की सलाम का
[6:09]जो मसकन था वह मदीने मुनव्वर था लेकिन आज 11वीं इमाम और
[6:17]दसवें इमाम के जो मकबरे हैं जो रोजे हैं जो हरम हैं
[6:22]वह समारा में है और इस्लाम का बगदाद में है कासिम में
[6:31]इमामे काजिम का बगदाद में है ठीक है तो आप एक सवाल
[6:32]मैं पैदा होता है की इमाम इन इमाई तहरीर ने मुस्सलाम का
[6:38]मस्का तो था यार मदीने मुहावरा तो यहां कैसे आए इमामे हाजी
[6:44]अली सलाम को जबरदस्ती मदीने से बुलवाया इससे पहले इस्लाम को बुलाएंगे
[6:54]इमाम ए मोहम्मद जब बुलाया गया दोस्तों इमाम अली सलाम यहां तशरीफ़
[7:05]ले लेकिन आप अपने फार्म को वहीं पर छोड़ कर आए यानी
[7:07]इमामे हाजी अली सलाम को वहीं छोड़ कर आए हम यहां तशरीफ़
[7:14]ले और उसके बाद आप देख लीजिए इस्लाम जो मदीने जिंदगी और
[7:34]फिर इमामे हाजी अली सलाम की तशरीफ़ लालू और समरे के अंदर
[7:43]रखा बगदाद असल में बढ़त की बुनियाद आप जानते हैं की अब्बास
[7:46]ना रखे इससे पहले बनी उमरिया के hukamuralu ने देवेश को यानी
[7:50]शाम के इलाके में इसको अपना दारू बनाया हुआ था लेकिन बनी
[7:55]अब्बास ने क्योंकि बनिया बस की बनी उमिया के साथ बनती तो
[7:59]नहीं थी उनको गिरा कारी है लोगों को barsedar है 132 ई
[8:04]में संवाद की बुनियाद राखी है और फिर क्या है दारू था
[8:12]साम्राज्य में फौजी ilakata था एक फौजी छावनी थी उसे जमाने में
[8:20]जो जाएंगे होती थी और उसे जांघों के अंदर ले जाने वाले
[8:27]हो रामू को और जो गिरफ्तार होकर आने वाले लोग द उनको
[8:34]समर के अंदर आबाद किया गया था उनकी तबीयत करके उनको क्या
[8:39]है इस्लामी कोर्ट का हिस्सा बनाया गया था मुसलमान की फौज का
[8:41]हिस्सा बनाया गया था ठीक है तो इसलिए इमामे हाजी अली सलाम
[8:46]को भी वहां से बुलाया जाता है और तकरीबन उसी तरीके के
[8:48]मुताबिक बुलाया जाता है की जिस तरीके के मुताबिक हजरते इमामे राजा
[8:53]ने सलाम को मामू ने बुलाया और उसका मकसद जिस तरह जो
[8:59]मकसद महमूद का था वही मकसद यहां पर क्या है बनी अब्बास
[9:04]के mutavakil का है इमाम को बुलाने का मामून का मकसद क्या
[9:08]था की इमाम ए राजा मदीने के अंदर उसकी हुकूमत के खिलाफ
[9:14]बनी अब्बास की हुकूमत के खिलाफ कोई सियासी तारिक शुरू ना फरमाए
[9:22]और उसने फिर यह तरीका [संगीत] खत्म हो जाएगा इसी मकसद के
[9:39]खातिर बोला है लेकिन इमाम ने उसे से फायदा उठा और दिन
[9:43]की नशा के लिए आपने अपने shlokiyat को इस्तेमाल किए जो विलायती
[9:47]का आपको मिला था इसी तरह इमामे हाजी अली सलाम और इमाम
[9:53]हसन अली सलाम को भी मदीने से बुलवाया गया और मदीने से
[9:55]बुलाने का मकसद क्या है mutravakil का मकसद यहां पर ये है
[10:01]की इमाम हाजी अली सलाम मदीने के अंदर रह कर क्योंकि मदीना
[10:06]तो अरब से काफी दूर है वहां रहकर हुकूमत बनी अब्बास के
[10:10]खिलाफ कोई सियासी तहरीक शुरू ना करें जिसके नतीजे में उनकी हुकूमत
[10:16]खतरे में पद जाए क्योंकि बनी अब्बास के जो उम्र द वो
[10:18]ऐसे द की वो अपनी हुकूमत के सामने किसी की भी परवाह
[10:24]नहीं करते द चाहे कोई भी हो उनका जो मकसद था वो
[10:30]ikhtedar था उनका मकसद क्या था हुकूमत हासिल करना था उनका मकसद
[10:33]ताकत के मार्कस को अपने अंदर जमा रखना था तो इस मकसद
[10:39]की खातिर वो हर जायज नाजायज कम करने के लिए तैयार द
[10:44]जिस तरह से पहले बानो मैया के यही तरीके कर रहा ठीक
[10:48]है तो इसलिए इन लोगों ने ईमानदारी ने मुसलमान को वहां से
[10:51]बुलाया अगर इनकी तरफ से ये जबरदस्ती ना होती तो ना तो
[10:57]इमामे हाजी अली सलाम मदीना छोड़कर समर तशरीफ़ लेट और ना इमामे
[11:01]हसन जो आपकी आवाज़ का वतन है अपना वतन है वहीं पर
[11:10]आप ठहरते और उसी शहर के अंदर आप अपनी तकदीर और इलाही
[11:15]हिदायत की सर दरमियां देते लेकिन वो इन्होंने [संगीत] इस्लाम के सियासत
[11:25]के हवाले से जब हम बात करते हैं तो ज़ाहिर है लोगों
[11:31]के जहां में यह सवाल ही उठाता होगा की इमाम हसन [संगीत]
[11:41]जोशी आमतौर पर लोकसभा में अंजाम देते हैं उसे तरह इमाम ने
[11:47]कोई सियासी सर गर्मी खुलकर अंजाम नहीं दिए तो कैसे इमाम अली
[11:50]सलाम के सियासी जिंदगी यानी इमाम हसन अर्ज कर रहे हैं उनकी
[11:55]सियासी जिंदगी के हवाले से हम बात कर सकते हैं तो इसके
[12:00]लिए हमें सियासत के हकीम को देखना होगा सियासत का जो हमारे
[12:04]सहनो के अंदर एक तसव्वुर पाया जाता है वो मौजूदा दौर के
[12:08]मुताबिक है की मौजूदा दौर में हमारे जहानो के अंदर सियासत वही
[12:13]चीज है की जो हमारे आज के सियासत डैन कर रहे हैं
[12:16]झूठ धोका फ्रेम ikhtedar की ख्वाहिश हुकूमत को हासिल करने के खातिर
[12:26]हर जायज नाजायज कम करना इसको हम आज के दौर में सियासत
[12:28]समझते हैं और हमारे नजदीक इस लिहाज से आज के दौर में
[12:35]कामयाब सेडान वही है की जो इन तमाम त्रिकोण को इस्तेमाल करते
[12:41]हुए हुकूमत हासिल करने में कामयाब हो जाए [संगीत] [संगीत] इस्लाम के
[13:00]तार से tapakpur के मुताबिक यह सियासत नहीं है इस्लामी जो सियासत
[13:06]है इस्लामी सियासत की बुनियाद इस्लाम है इस्लामी सियासत की बुनियाद दिन
[13:10]है जब हम आईएमए ताहिरी एन नहीं सलाम की भी सियासी जिंदगी
[13:15]के हवाले से गुफ्तगू करते हैं या उसके बारे में जब सोचते
[13:17]हैं तो हमारे जहानो के अंदर बुनियादी तौर पर दिन का तसव्वुर
[13:24]होना चाहिए बुनियादी तौर पर इस्लाम होना चाहिए bajahir अमीर मोमिनुल इस्लाम
[13:28]को हुकूमत भी मिली अपनी जिंदगी के आखिरी 5 साल में लेकिन
[13:31]इसका मतलब क्या है की आप सिर्फ आखिरी 5 साल में सियासत
[13:38]करते रहे नहीं अमीर और मोमिन हुजूर है कम सल्लल्लाहो कसम आपके
[13:45]बारे में हमारा यही है की आपने इस्लामी रियासत का आई एम
[13:52]फाइन रियासत मदीना की बुनियाद राखी तो सर रियासत है मदीना के
[13:54]हेड ऑफ डी स्टेट हुजूर है एकदम sollalah साल की अपनी जाट
[14:00]इकराम है और आपके सबसे बड़े मुशीर और मोह के साथ डरमी
[14:02]है अमीर और मोमिनुल इस्लाम क्या सियासत कर रहे हैं हुजूर अकरम
[14:10]सियासत कर रहे हैं लेकिन राय जरूर वाक सियासत के खिलाफ है
[14:12]हमारे ज़माने में raijul वक्त के खिलाफ है उसे वक्त जो ये
[14:17]हस्तियां सियासत कर रहे हैं वो क्या है वो दिन के बालासती
[14:22]का कम है जान दे रहे हैं वो अल्लाह रब्बुल इज्जत की
[14:23]तालिम को उम्मत तक लोगों तक पहुंचने का farzaam दे रहे हैं
[14:29]और इसके लिए जायज तरीका इख्तियार कर रहे हैं नाजायज रास्तों से
[14:33]परहेज कर रहे हैं यही आमिर साहब रसूल को उदास के बाद
[14:38]भी अंजाम दे रहे हैं यानी आपका मकसद हुकूमत का उसूल नहीं
[14:44]था आपका मकसद ikhtedar का उसूल नहीं था इस्लामी और इलाही aakadar
[14:48]की पाबंदी करते हुए ठीक है उनकी पाबंदी करते हुए इलाही दिन
[14:55]की नशत का त्याग था उसके लिए फौरन बाद रसूल का हुकूमत
[14:58]नबी मिले फिर भी आप साइट पर हो जाते हैं हुकूमत को
[15:03]छोड़ देते लेकिन अपने इस फर्जी को नहीं छोड़ते farishen को अंजाम
[15:06]देते रहते हैं वो क्या हिदायत का लोगों को दिन के जाने
[15:12]पर प्रकृति करने का लोगों को दावत देने का इस्लाम है मोहम्मदी
[15:15]के रास्ते के ऊपर लोगों को गंजाम रखने का यह फराज आप
[15:19]25 साल भी अंजाम देते रहे और जब हुकूमत मिली तो आखिरी
[15:24]5 सालों के दौरान भी अंजाम देते रहे ठीक है तो लिहाजा
[15:27]इस्लाम का जो तार से तसव्वुर है सियासत के हवाले से वो
[15:33]ये है की वो कम वो जीतो चाहे जो इस्लाम की बाला
[15:38]दस्ती का सबब बने जो दिन की बाला दस्ती का सबब बने
[15:45]जो हिदायत को muashre के अंदर आम करने का बाइस बने ऐसी
[15:53]सरकार नहीं है की haftedar के हुजूर की कोशिश करना मैया के
[16:01]लोग कर रहे हैं बनी अब्बास के लोग कर रहे हैं इसीलिए
[16:04]एक बात मौके पर ऐसा हुआ ना की अमीर मोमिन सभी किसी
[16:09]ने कहा की यमुना रासउल्लाह ये जो शाम का जो हकीम है
[16:10]ना वो बड़ा सियासत जानता है इमाम अली सलाम ने फरमाया की
[16:16]अगर मेरे सामने इलाही talimaat ना होती ये हुडूड ना होते तो
[16:20]फिर दुनिया देखते की मुझसे बड़ा अकलुज सियासत जानने वाला कोई नहीं
[16:27]था उनके सामने जायज नाजायज कुछ भी नहीं है लेकिन आई मिस
[16:30]साइना ने इस्लाम के सामने मजबूरी यह है की इलाही talimaat के
[16:35]मुताबिक अमल करना है सीरते मुस्तकीम पर चलते हुए सियासी आगे बढ़ाना
[16:40]है की अपना रसूल अल्लाह [संगीत] देश था सियासत था उसने तो
[17:20]अपनी सियासत के और akalamandi और ज़हनत के जोर पर इतने अर्से
[17:25]तक जमाने तक हुकूमत की उसने वो क्या था इमाम अली सलाम
[17:29]ने उसे मौके पर जवाब दिया आपने तिल का नकारा तिलका शैतान
[17:34]वही है शब्बीर बिल इमाम ने इरशाद फरमाया की है वो अकिल
[17:43]के शबीह तो है लेकिन अक्ल नहीं है इसका मतलब है की
[17:50]सलाम ऐसी सियासत कर देते हैं जिस shyatanat के जरिए क्या है
[17:57]जिसका मकसद और जिसका हड़प हुकूमत का हुजूर हो ikhtedar का हुजूर
[18:01]हो दिन की बाला दस्ती ना हो इस्लाम की बाला दस्ती ना
[18:09]हो सियासत अंजाम देते हैं कॉर्पोरेशन रखा जाता है उनकी जीतो जहां
[18:13]इस्लामी तालिम का फिरोक पर मुसम्मी होती है तो इसलिए इमाम हसन
[18:20]अली सलाम ने अपने जमाने में जो है सख्त हालत द उन
[18:26]हालत के अंदर भी दिन की और दिन के फ्रॉक की खातिर
[18:27]जो अंजाम दी वो आपके ज़माने में किसी और neljam ही नहीं
[18:32]दी इस दुनिया का सबसे बड़े इमाम हसन askaria इस्लाम अपने जमाने
[18:39]के अगर चूहा में दे अब्बासी के पास है अगर मौत से
[18:42]अब्बासी के पास है वकील के पास है लेकिन हुकूमत और ikhtedar
[18:46]इनके पास होने के बावजूद हकीकत है दे रहे हैं आप अंजाम
[19:00]दे रहे हैं और दूसरी जाने क्या है की इमाम अली सलाम
[19:08]नहीं दे रहे द सबसे पहली बात ये है की अगर आपसे
[19:12]आशीष अंजाम नहीं दे रहे द तो आपको मदीना छोड़ने पर मजबूर
[19:18]क्यों किया गया एक खामोश बैठने वाले आदमी को जो अपनी मसान
[19:21]हमारे जहां के अंदर यही है ना दिन रात बैठ के मूसा
[19:25]अलैह इबादत बिठाकर बैठे रहते होंगे बस अल्लाह ताला की हम तो
[19:30]सदा और राज और कोई muashrayti कम कोई सामाजिक कम कोई इस्तेमाल
[19:32]ही कम कोई सियासी का अंजाम नहीं देते हो देते द जिसकी
[19:38]वजह से वहां से मदीने मुनव्वर छोड़ने पर मजबूर किया और समर
[19:42]लेकर आए एक ऐसी शख्सियत से बैठे रहे उनको क्या खतरा हो
[19:48]सकता है नमाज पढ़ रहे होते सर मुसल्ला बेचकर बैठ रहे होते
[20:01]और कोई इस्तेमाल का और samajiyat का सियासी याद का कोई कम
[20:06]अंजाम ना दे रहे होते तो ये होता वकील है अब्बासी इमाम
[20:10]को मदीने मुनव्वर छोड़ने पर मजबूर क्यों करते आराम से बैठने देते
[20:17]हैं उसका ये कम हम रामू का यह कम बता रहा है
[20:18]की इमाम अली सलाम वहां पर सियासी jiddle फार्मा रहे द और
[20:23]इससे वो अपनी हुकूमत को खतरा महसूस कर रहे द जिसके बाद
[20:28]से इमाम को वहां से बुलाया और सांभर राम करें दूसरी बात
[20:32]यहां पर देखें इमाम अली सलाम दी है तो समराला आने का
[20:38]मकसद क्या था ताकि हुकुम राम के जेरी नजर रहे दूर अगर
[20:42]होंगे तो उनके नजरों से koshida कोई भी कम अंजाम दे सकते
[20:47]हैं लेकिन अपने सामने अगर रखेंगे उसी शहर के अंदर तो हमेशा
[20:49]कड़ी निगाह में वो रखेंगे ठीक है और उसके बाद क्या है
[20:54]इमाम अली सलाम ताकि कोई ऐसा कम अंजाम ना दे सके जिससे
[20:58]उनके बगैर हुकूमत को खतरा देखिए बल्कि इससे भी आगे दूसरी बात
[21:03]ये है की इससे भी आगे बढ़कर हुकुम राम ने हुकुम रानो
[21:05]ने इमाम अली सलाम के खिलाफ जो पाबंदी लगाई हुई थी वह
[21:10]यह थी [संगीत] की आप हर पिए खिलाफत में हाजिर हो जाए
[21:26]और उनके सामने मसाला एक मर्तबा हाजिरी दे दे इमाम अली साहब
[21:36]के अलावा लेकर ए गए फिर भी हमें इनके ऊपर एतबार नहीं
[21:48]इनकी जो का विषय हैं इनकी जो जीतो jaihad है उससे हमें
[21:52]फिर भी खतरा लायक है तो पाबंदी ये है की हर हफ्ते
[21:58]हमारे यहां पर हाजिर होंगे और हाजरी देंगे और फिर चले जाएंगे
[22:01]और आम जो muashre के लोग द वो बेचारे 86 बसेरा से
[22:07]जो दूर द वह यही समझते द की इमाम अली सलाम को
[22:11]क्या है [संगीत] हकीम से मिलना है हकीम से मिलना है क्या
[22:26]है उसके मकाम और मरते हुए नहीं यहां पर हकीम का मकसद
[22:30]इमाम अली सलाम की ताजिम और तौहीद नहीं है हकीम का मकसद
[22:36]यहां पर ये देखना है की इमाम ये शेर छोड़कर कहीं बाहर
[22:41]तो नहीं चले गए किशोर इलाके के अंदर तो नहीं गए 3
[22:45]दिन के फुर्सत भी नहीं दे रहे हफ्ते में दो दिन हाजिरी
[22:47]की शर्त राखी एक पीर को और एक जो मारा है अगर
[22:51]कहीं दूर अगर जाना भी चाहे तो ना जा सके हफ्ते में
[22:56]एक दिन छह दिन कहीं और अगर चले जाएं और वहां से
[23:00]होकर ए सकते हैं लेकिन दो-तीन दिनों के अंदर कहां जा सकती
[23:05]उसे जमाने में तो ये पाबंदी लगाई हुई इमाम अली सलाम के
[23:10]ऊपर और फिर इससे भी बढ़कर जब इमाम ऐसा तशरीफ़ ले जाते
[23:13]हैं तो उसे जमाने में कुछ लोग ऐसे द की जो ईमान
[23:20]की जियारत के लिए आते द रास्ते में जिस जिस मकाम से
[23:25]जिस रास्तों से इमाम अली सलाम गुजर के आगे जाते द कुछ
[23:30]लोग अकीदत में इमाम अली सलाम की मोहब्बत में आकर क्या है
[23:32]इमाम को देखने की कोशिश करो की जब मैं गुजर रहा होता
[23:50]हूं हकीम के रास्ते के जाने तो अकीदत से मेरी जानिब सलाम
[23:53]ना करना [संगीत] इमाम अली सलाम की सियासी जो है थी इस्लाम
[24:23]के हवाले से निजामी इमामत के muashre के अंदर तबलीग के हवाले
[24:30]से इससे उनको एक खतरा था और उसे खतरे से बचाव के
[24:34]खातिर वो ये पाबंदियां लगा रहे हैं ठीक है अगर ये चीज
[24:38]ना होती इमाम की जानिब से ऐसी कोई सियासी जिद तो जहां
[24:43]तक ना होती तो हुकूमत की जानिब से इसको सनकी पाबंदियां ना
[24:49]उठानी पड़ती ये पाबंदियां बता रही है की इमाम खास क्या है
[24:52]जी तुझे तंजाम दे रहे हैं और यहां पर एक और रखना
[24:57]चाहे इमाम जो अपनी का विषय अंजाम देते अपनी जीत अंजाम देते
[25:05]muashre के अंदर वह सिर्फ आश्रय के एक फर्क के तौर पर
[25:08]नहीं करते द बल्कि bhaishat इमाम अंजाम देते द यानी इमामत के
[25:14]तसव्वुर को आपने लोगों के जहानो में ज़िंदा रखा हुआ था और
[25:21]इसी से मुकाम रनों को खौफ था वो इसी से करते द
[25:25]की यह इमामत का विलायत का जो नजरिया है जो तसव्वुर है
[25:27]ये कही लोगों के दिलों के अंदर द अगर फेरे में आएगी
[25:34]तो इसलिए इमाम के ऊपर पाबंदी की एक वजह यही की इमाम
[25:40]नजरिया इमामत का प्रचार फार्मा रहे हैं और अपने दरबार में हाजिरी
[25:48]की जो पाबंदी लगाई इसी खौफ से लगाई के लोगों भी हमारे
[25:53]पास आने पर क्या है मजबूर हैं लेकिन इसके ऊपर भी जब
[25:58]बात नहीं बनी तो बात जिगर रिवायत के मुताबिक यह है की
[26:02]इमाम अली सलाम को गिरफ्तार किया जाता है गिरफ्तार किया इमाम अली
[26:13]साहब को गिरफ्तार कर लेता है इमाम अली सलाम की गिरफ्तारी इस
[26:22]बात की अलामत है की इमाम की रोजमर्रा का जो इमाम का
[26:31]मामूल था वो सिर्फ चंद zaahari रूस पर मदनी नहीं था इमाम
[26:35]अली सलाम की काव्यशास्त्र आबादी आमाल को अंजाम देने की हद तक
[26:45]नहीं था बल्कि वहां शर्तें सामाजिक तौर पर आपकी काव्य थी लोन
[26:48]के अज़ान को लोगों के afgar को बेडर करने की हवाले से
[26:54]नज़रे मिले और इमामत के हवाले से आपकी काव्य थी जिसके नतीजे
[26:57]में इमाम अली सलाम को जिंदा में डाला जाता है वर्ण आम
[27:03]इंसान को क्यों गिरफ्तार करें एक muashre के आम फल कोई गिरफ्तार
[27:08]करने की हुकूमत को क्या जरूरत है उसे जमाने में हुकूमत की
[27:12]जानिब से शक्तियां उन लोगों के खिलाफ होती थी की जिनसे उनको
[27:16]सियासी तहरी का खतरा होता था आम लोग नहीं समझ पाको मत
[27:22]समझ रही थी इमाम अली सलाम है वो चल रही है और
[27:28]इमाम एक मर्तबा गिरफ्तार नहीं हुए कई मौके पर गिरफ्तार और मैंने
[27:33]सरनेम कलम में जिस आयतें करीमा की आपके सामने तिलावत की वो
[27:36]सर सब किया है नूर अल्लाह [संगीत] ताला के नूर को बुझाने
[27:52]की जैसे अपने मुंह के फूंका से अपने मुंह के फूंका से
[27:59]बोलो क्या है नूर इलाही को बुझाने की कोशिश करते हैं लेकिन
[28:06]काफिरून अगर चाहिए बात काफिरों को नागवार ही क्यों ना गुजरे यह
[28:12]तिलावत में ऐसी देखिए एक खास मकसद के खातिर है वो क्या
[28:16]है एक रवि बयान करते की एक मौके पर इमाम अली सलाम
[28:21]जब jinddan से आजाद हुए तो इमाम इसी आयतें करीमा की तलाश
[28:23]है यह आए द करीमा इमाम अली सलाम ने अपने खत्म मुबारक
[28:28]के साथ लिखा हुआ तो और आपके 10 म्हारे के अंदर करते
[28:38]हैं अल्लाह ताला होता अपने नूर को फहरा के रहेगा अग्रस ये
[28:51]बात काफिरों को नापसंद ही क्यों ना हो यानी इमामत को मिटाना
[28:57]चाहते हैं हम इस खास में आना का बयान कर रहे हैं
[29:02]आपके इमामत को मिटाना चाहते लेकिन अल्लाह ताला नजर इमामत को फैला
[29:08]देगा अगर जी इसके मैन के लिए इनके ऊपर ये बात ना
[29:11]गवार ही क्यों ना गुजरे करीमा की तिलावत जैसे मालूम ये होता
[29:17]है की उसे जमाने में हुकुम राम की जाने से जो शक्ति
[29:20]आती है फरमाया हुआ था वो ये था की बहुत सारे बनाए
[29:27]द ठीक इमाम के नवाब द और मुख्तार पे लाखों के अंदर
[29:37]है आपका अपना वजूद मुबारक समर में है लेकिन समर से बाहर
[29:39]देकर इलाकों में इमाम ने अपने नुमाइंदे रखे हुए हैं क्योंकि उसे
[29:44]वक्त तक इमाम हसन askaria अलैहिस्सलाम के जमाने तक अल्हम्दुलिल्लाह tasahiyon काफी
[29:49]फैल चुका तारों में नहीं द हजारों से ज्यादा उसे करती थी
[29:55]बहुत सारे इलाकों के अंदर टशन खेल चुका था खास तौर पर
[29:59]पांचो और छठे इमाम के दौर में और उसके बाद आठवें इमाम
[30:02]अली सलाम के तरीके [संगीत] और इमाम अली सलाम क्या है जवाब
[30:30]आईबीएम के जरिए लोगों तक पहुंचा देते हैं और जो bujhahat हैं
[30:34]जो माली वह ज़ब्त और फ्राइज हैं वो लोग इन नवीन तक
[30:39]पहुंचने और ये nayviin किसी ना किसी तरह इमाम अली साहब की
[30:42]खिदमत में पहुंचा देते द जो मलिक वगैरा के हवाले से फिर
[30:48]इमाम अली सलाम अली सलाम अपने muashre के अंदर मकतब अहले के
[30:58]पेड़ों में जो मोहताज हैं जो जरूरतमंद है उनके ऊपर खर्च फरमाते
[31:04]हैं यानी पूरे एक निजाम था और आपने एक निजाम बनाया और
[31:08]इसी निज़ाम से उनको खतरा है इसी हिसाब से उनको खतरा है
[31:13]की अगर माली तौर पर इमाम मुस्तहकम अगर होंगे [संगीत] वो भी
[31:28]siyajil पर हैं पहुंचने द हज़रत उस्मान मोहम्मद [संगीत] के बाद इमाम
[31:44]ज़माना के बिना एक बने और पहले ले हज़रत ए उस्मान बिन
[31:50]मोहम्मद उनके हवाले से उनका जो नकाब है ना वो सम्मान है
[31:52]उसके बारे में कहा जाता है की इनका जो कम था यह
[31:56]तेल वगैरा भेजने का कम करता था रोगन तेल जो ऑयल वगैरा
[32:02]था लोग अपनी जो इमाम अली साहब के खिदमत में पहुंचने वाले
[32:11]wazehbad हैं उनको इनकी पहुंचा देते और ये इमाम के पास लेकर
[32:17]आते हैं अब ज़ाहिर ऐसे ही लेकर अगर जाएंगे तो गोमती करंदी
[32:23]हो कुंती जासूस हुकूमत तो इन्होंने जो तरीका है प्यार किया हुआ
[32:29]था वो ये था की जो वजह बात है वो जो हाथ
[32:32]है शरिया है उनको अपने उसे रोहन इल के दरमियां में जो
[32:38]मल है उसके अंदर छुपा लेता और एक तेल फिरोज और ऑयल
[32:42]फ्रॉस्ट बंदे के तौर पर मुहासे के अंदर घूमते हैं घूमते घूमते
[32:44]इमाम के घर के अंदर हाजिर हो जाते और इमाम की खामोश
[32:48]में पहुंचा देते द यह परेशान उन्होंने जान और फिर इमाम अली
[32:53]साहब वो उनसे गुसल फरमाते हैं और फिर जहां आपने इसका मसरख
[32:58]फरमाना था जहां पर खर्च करना खर्च करवा देते द तो इमाम
[33:00]के जो जानशीन हैं वो ये fariyaan जानते हैं आपने अपने निमों
[33:05]के जरिए अपने पैगाम को लोगों तक पहुंचा और समर के अंदर
[33:11]जो आपका वजूद मुबारक था आपका उठाना बैठना चलना फिरना ऐसा था
[33:15]की जिसकी वजह से समर के लोगों के दिलों के अंदर आपकी
[33:21]मोहब्बत बैठ गई थी आम लोग भी समर में इमाम अली सलाम
[33:26]के maqbooliyat से लोग हुकूमत और कुमारन के जो जासूस वगैरा है
[33:29]कारण दे दे वो डरते द इमाम के maqbooliyat इतनी दिन-ब-दिन क्या
[33:34]है बढ़ती चली जा रही है और उससे उनको एक खौफ महसूस
[33:40]होता है इमाम हिदायत का इलाही फरीदा मशहूर शख्सियत है इमाम के
[34:05]दौर के हैं पता ही नहीं चलता है की इमाम अली सलाम
[34:15]क्या है अपने इल्म में इमामत की बुनियाद और जो इल में
[34:19]लेटर अल्लाह ताला की तरफ से आपको हासिल था उसकी दुनिया पर
[34:23]आपके आगाह हो गए इल्मी का एक और वाक्य में आपके सामने
[34:25]पेश करूंगा पुराने करीम के तनाव को साथ आयात ए करीमा के
[34:40]अंदर tampoojaat पर musamil किताब लिख रहे हैं कुछ का रही है
[34:44]दूसरी आयत कुछ और का रही है कुछ हो गई और पैगाम
[34:49]पहुंचा रहे इस तरह कुरान [संगीत] के अंदर मिलता है की इसने
[34:56]किसी को बताया नहीं था जिसके बारे में किसी को खबर नहीं
[34:58]दी थी लिख रहा था जब कम मुकम्मल हो जाता तो उसने
[35:02]सामने लाने का इरादा किया हुआ था तो एक दिन उसका एक
[35:07]shakirt इमाम की खिदमत में हाजिर हुआ उससे कहा की तुम्हें मालूम
[35:10]है की तुम्हारे फलन उस्ताद जो है वो क्या कम अंजाम दे
[35:14]रहे हैं यार तुम जाकर उससे एक सवाल पूछो तुम यह कहो
[35:27]की क्या तुम इस बात को तस्लीम करते हो की कुरान ए
[35:33]करीम के अंदर अल्लाह ताला ने आयते करीमा के अंदर जो पैगाम
[35:39]दिया है तुमने जो समझा है उसे आयते करीमा से तुमने जो
[35:42]एक माफूम लिया है तुमने हो सकता है की अल्लाह ताला का
[35:49]मकसूद और उसके मुराद इसके अलावा कुछ और हो मैंने जो तुमने
[35:56]समझाया उसके बारात हो फिर जाहिर है वो कहेगा का कार्य हो
[36:01]सकता है मुमकिन तो है फिर उससे कहो की अगर हम मुमकिन
[36:06]है तो तुम कैसे कुरान ए करीम के बारे में अपनी बहन
[36:08]के मुताबिक तालाब तलाश कर रहे हो मशहूर फलसफा के सामने और
[36:20]उसने आकर यह पूछा की आपसे एक सवाल करना है कहा पूछो
[36:23]उन्होंने क्या आप यह तस्लीम करते हैं की कराने करीम में अल्लाह
[36:30]रब्बुल इज्जत ने ये जो आयतें करीमा के अंदर जो एक पैगाम
[36:36]दिया है इंसानों को उम्मत को आपने जो समझा है अल्लाह ताला
[36:42]के मुराद उसके अलावा कुछ और हो यानी आपने सही तरह ना
[36:45]समझो ठीक है मैंने जो समझे जरूरी नहीं की यही मुराद हो
[36:50]कुछ और भी हो फिर उसने कहा अगर ऐसा है तो जो
[36:58]आग माना करते हुए कुरान करीम के अंदर tamakuza क्यों तलाश कर
[37:02]रहे हैं उसे पर मुस्तफा mustamiz किताब क्यों तहरीर कर रहे हैं
[37:06]वो हैरान कसम खाए कहा की ये तुम्हारा तुम्हारी बात नहीं है
[37:10]तुम्हें किसने कहा ये देखिए मैंने इसकी खबर किसी को नहीं दी
[37:16]थी तो फिर उसने कहा की ये मुझे इमाम हसन करीना का
[37:19]इमाम अली सलाम का जो एक लकब उसे जमाने में पशु थी
[37:23]ibnur राजा यानी फर्जंद इमाम राजा के तौर पर मशहूर है मुझसे
[37:31]कहा तो फिर उसने कहा की हान खुदा की कसम ये तुम्हें
[37:33]ये तुम्हारा जुमला नहीं हो सकते ये इमाम नहीं कहा होगा और
[37:38]उसके बाद इमाम के पास आए और उसके बाद उन्होंने जो कुछ
[37:39]लिखा था उनको जला दिया वो खत्म कर दिया मतलब यह नहीं
[37:44]लोगों के दरमियां एक ऐसा फर्क जो खुफिया तौर पर कुरान करीम
[37:50]के खिलाफ एक कोशिश कर रहा था अंजाम दे रहा था इमाम
[37:51]अली सलाम उसके रहनुमाई फार्मा और उसको उसे कम से रोका हिदायत
[37:58]अंजाम दे रहे हैं ठीक इसी तरह एक और इतिहास कम जो
[38:03]इमाम ने अपनी मुक्तसर से जिंदगी के अंदर अंजाम दे आप जानते
[38:08]हैं की इमाम 260 ई में क्या है दर्ज हो जाते हैं
[38:17]और रसूल अल्लाह होंगे| उनमें से पहले अमीर और मोमिन हज़रत अली
[38:41]सलाम और आखिरी इमाम महदी अली सलाम [संगीत] आपने मोमिन को अपने
[39:23]चाहने वालों को और अपने unnaibin को की जिनको आपने नियमित की
[39:26]जिम्मेदारी दी थी उन तक इमाम मेहदी अली साहब की आवाज़ है
[39:30]ये देखिए मेरे बाद कायम आने वाले हैं इमाम जमानत तशरीफ़ लाने
[39:37]वाले हैं और [संगीत] हुकूमत हुई है 255 hijrare में आप जानते
[39:51]हैं 255 हिजड़े में इमाम ज़माना की विलादत abajat हुई समर के
[39:57]अंदर 255 हिजरी में और 260 ई में इमाम की शहादत होती
[40:02]है तो इमाम ज़माना की बात इन्हीं बनी अब्बास के हुकुम रनों
[40:10]की जानिब से इमाम ज़माना के हवाले से जो खौफ था की
[40:11]वो इसको नुकसान पहुंचाएंगे इमामे ज़माना जल अल्लाह ताला फर्जी शरीफ को
[40:21]आम लोगों के सामने आने से रोकते द उनका तपस फरमाते द
[40:26]लेकिन क्या किसी के सामने भी आने नहीं देते द नहीं आने
[40:31]देते द अपने खास जो नवी हैं जिनके ऊपर आपको एचटी होता
[40:36]था उनके सामने आप लेके आते द हवाले से हमें ये रिवायत
[40:41]मिलती है की इमाम के सामने आपकी कुछ खास चाहने वाले आए
[40:46]हुए हैं और इतने में इमामे ज़माना आज अल्लाह ताला फ़र्ज़ अकबर
[40:48]ने बचपन में खेलते खेलते आपके कमरे में तशरीफ़ लेट हैं आपके
[40:54]होश में उठाते हैं आपके साथ प्यार करते हैं और उसके बाद
[40:56]फरमाते हैं और अपने उन नवीन से फरमाते हैं की मेरे मैन
[41:01]तुम्हारे हुज्जत ये हैं इमाम तुम्हारे दिला देते हैं की मेरे बाद
[41:14]जो है तुम्हारे जो हुज्जत है जो इमामे कायम है वो ये
[41:17]एक रिवायत और मिलती है जिसके मुताबिक इमाम के [संगीत] इमाम की
[41:25]खिदमत में तकरीबन 40 अपराध पर mustmi मोमिन ने कर मौजूद है
[41:32]40 अप्रैल ऐसे खास लोग हैं की जिनके ऊपर इमाम को भरोसा
[41:35]है की मेरे चाहने वाले हैं तकरीबन 3 साल की उम्र में
[41:52]3 4 साल की उम्र में और फिर उनके सामने आप इमाम
[41:57]का तारों फरमाते हैं की मेरे बाद इज्जत ये है तो एक
[42:00]inthahai हम कम जो 11 इमाम ने अंजाम दिया लोगों को फिक्री
[42:06]तौर पर नजरिया आती तौर पर इमाम जमाना के जमाने और उसे
[42:10]वक्त इमामत के हवाले से तैयार करना था जिसके लिए आपने उनको
[42:16]तैयार फरमाया इसीलिए आपने अपना कर दिया हज़रत-ए- उस्मान बिन सईद को
[42:24]जो इमाम ए yajnaon यानी 11वीं इमाम की शहादत के बाद इमामे
[42:27]ज़माना आज अल्लाह ताला फोर्ज शरीफ के भी निक बने उनके भी
[42:32]खास नवीन में से जो पहला नायक है अरबाज 4 नए गुजरे
[42:36]ना हज़रत उस्मान भी सही हज़रत मोहम्मद बिन उस्मान हुसैन बिन रो
[42:39]और अली मोहम्मद से पहले जो नायब है वो इमाम-ए-हसनस करेले इस्लाम
[42:43]के बिना एक द और आपसे पहले आपके बाबा यानी हजरते इमामे
[42:48]अली सलाम के दिन आए द इसी तरह उनके बनाया हज़रत मोहम्मद
[42:57]उस्मान उनको वह भी इमामे yaajdaon अलैहिस्सलाम के नुमाइंदे द और यह
[43:05]जो 40 लोगों को इमाम ने बकायदा उनके सामने इमामे ज़माना की
[43:07]जियारत करवाई ठीक है उनके सामने लेकर आए उनका तारो फरमाए उन
[43:13]में ये भी मौजूद है तो इस तरह इमाम लोगों के सामने
[43:16]केड इमामत को बयान farmaten और इसी तरह इमामे ज़माना के हवाले
[43:23]से लोगों के अंदर इमामे ज़माना जल्लाद अल फर्ज शरीफ के हवाले
[43:26]से उनको आगाह करते हैं की मेरे बात ये इमाम होंगे ताकि
[43:31]लोग किसी और गलत शख्स की इमामत के कायल ना हो जाए
[43:34]यह खतरा था और यह खतरा है दोनों तरफ से नहीं था
[43:39]उनके अपने खानदान से था खानदान में मौजूद था जब इमाम हसन
[43:45][संगीत] के भाई हैं उसने इमामत का दवा किया जो जिसके वजह
[43:55]कहलाएगा कुछ लोग उसकी इमामत के कायल हो गए बे खतरा था
[44:01]यानी इमाम के लिए खतरा है की लोग खुदान खस्ता इन हरम
[44:06]की तरफ ना चले जाए इमाम के मसाले में hatifi इमाम की
[44:07]जानिब आने के बजाय इन हरम का शिकार ना हो जाए जफर
[44:11]एक अजब जैसे लोगों के पीछे लो चल जाए इसने इमाम ने
[44:15]अपने खास मोमिनीन के सामने इमाम का तरफ़ करवाया ठीक है तो
[44:19]इसलिए इमाम ने अपने जमाने में आगाही के साथ बसीरत के साथ
[44:24]दिन को जिंदा रखा इस्लाम को जिंदा रखा हुकूमत की जानिब से
[44:27]होने वाली शक्तियों के बावजूद हुकूमत के जहां से होने वाले तमाम
[44:32]पाबंदियां के बावजूद आपने नजरिया इमामत को जिंदा रखा और आने वाले
[44:39]लोगों तक पहुंचा अगर आज ये नजर इमाम जिंदा है नजर मिली
[44:42]ज़िंदा है और आज अल्हम्दुलिल्लाह आप मोमिन ने कहा हम यहां पर
[44:46]बैठे तो इसका मतलब है की इमाम हसन कामयाब हो गए अगर
[44:51]क्या बना होते आज इमामत के कायल लोग ना होते आज पुरी
[44:57]दुनिया के अंदर इमामत के कायल विलायत के कायल लोग अगर मौजूद
[45:00]हैं तो उसे बनी अब्बास के जमाने में इनकी हाई काटन और
[45:05]मुश्किल मरहले के अंदर जब इमाम हसन स्क्री रह साम इमामे हाजिर
[45:07]है इस्लाम जिंदाबाद रहे द तो उसे मरले से नजर इमामत को
[45:13]नज़रे मिलायड को बचाकर आगे पहुंचने में इमाम हसन इसके लिए सब
[45:17]कामयाब हो गए अगर ये ना होता तो आज विलायत इस तरह
[45:23]ना होती आप जानते हैं की हुकुम राम की जाने से तो
[45:25]लोगों के लिए हुकुम यह था की उनको नव से मिला बुरा
[45:29]भला कहें लेकिन आज अगर इन हस्तियों की मोहब्बत मुसलमान के दिलों
[45:33]में है मोमिन करम के दिलों में है तो इन imashuman अली
[45:36]सलाम की नतीजा है अल्लाह रब्बुल इज्जत के एजेंसी कामयाब कामयाबी से
[45:42]हम किनार हो गए हम बात करते हैं तो इसके साथ फौरन
[45:51]आपके जहानो में ये तसवार ना आए की हुकूमत क्यों नहीं हासिल
[45:53]कर पाए बे हुकूमत मंजिल नहीं है हुकूमत मकसद नहीं है औरैया
[45:57]इलाही का हुकूमत मकसद नहीं है रसूल खुदा रसूलुल्लाह अलैहिस्सलाम जब मक्के
[46:03]में द तो क्या हुकुम थी हुकूमत नहीं है तेरा साल नबवी
[46:05]जिंदगी के 23 में से 13 साल मक्के में है हुकूमत के
[46:10]बगैर है तो क्या हुकूमत के बगैर होने की वजह आपके मकाम
[46:14]और मर्तबा में कोई कमी थी हुकुम मदीने में आने के बाद
[46:16]हुकूमत जब आपको मिली तो आपके मकाम और मरते हुए कोई इजाफा
[46:19]हुआ ऐसा कुछ नहीं है हुकूमत चाहे हो या ना हो यह
[46:25]अल्लाह रब्बुल इज्जत के नुमाइंदे और दिन इलाही के प्रचार और दिन
[46:28]ए इलाही के तबली का फ्रिज हर हाल में अंजाम देते द
[46:32]और यही दिन के मुताबिक सियासत है ये सियासत इमाम हर दौर
[46:37]में है जान देते रहे इमाम हसन askarires इस्लामिया जान देते रहे
[46:41]और आखिरी नुक्ता आपके सामने अर्ज कारणों की जैसा की मैंने इल्म
[46:43]ना दुनिया वाले से आपके साथ बताएं एक और नुक्ता और यह
[46:46]भी बयान करूंगा आपने अपने खादिम से फरमाया की मदीने चले जाओ
[46:53]मदीने भेजा जो वो जो हाथ आई थी वो लेने के लिए
[46:57]या बाहर असीम करने के लिए आपने भेजा और उनसे आपने फरमाया
[46:59]और उनसे आपने फरमाया के देखे तुम वहां पर जाकर यह अपना
[47:06]farzaam दे दो 14 दो हफ्ते की बात तो वापस ए जाओगे
[47:11]यहां पे सांबर राहु लेकिन जब तुम वापस आओगे तो उसे वक्त
[47:13]तुम उसे वक्त तुम यहां पर pahunchoge समारा में जब मैं इस
[47:18]दुनिया से जा चुका हूं और मेरी tajijon takhin हो रही होगी
[47:21]रिवायत के अंदर है की वो इमाम अली सलाम का जो खादिम
[47:25]है जहां से जब चला गया और दो अपने फ्रीजा अंजाम दे
[47:28]के जो इमाम ने जिम्मेदारी दी थी वो जो हदीस शरिया के
[47:31]हवाले से वो फ़राज़ अंजाम देखे जब दो हफ्ते के बाद यहां
[47:34]पर जब आए हैं तो इमाम अली सलाम की उसे पेशेंट हुए
[47:39]के मुताबिक वो उसे मौके पर समर में दाखिल हो जाते हैं
[47:41]जब इमाम अली सलाम इस दुनिया से जा चुके हैं शाहिद हो
[47:45]चुके हैं और इमाम अली सलाम का रहे हैं और उसके बाद
[47:51]इमाम अली सलाम वहां पर होती है रिवायत के अंदर है की
[47:55]समर के सारे लोग इमाम अली सलाम की tajijon तकरीर में शिरकत
[47:58]करते हैं यहां तक खलीफा के जो नुमाइंदे हैं वज़ीर हैं वह
[48:04]भी इमाम अली सलाम के उसमें शिरकत करने पर मजबूर हो जाए
[48:07]क्यों आवामी राय की वजह से ठीक है आम लोग इमाम की
[48:11]ताजिया में शिरकत कर रहे हैं इससे भी एक बात सामने ए
[48:16]जाती है की इमाम की maqbooliyat और इमाम की महबूब आयात इतनी
[48:19]सारी पाबंदियां के बावजूद समर के अंदर इतनी फैल चुकी थी की
[48:24]इमाम अली सलाम 28 साल की उम्र में जब जाम शहादत नो
[48:25]फरमाते हैं उसी समर के अंदर रहने वाले लोग इज्जत एहतराम के
[48:31]साथ आई ajijon takhin में शिरकत करते हैं और लोगों के रुझान
[48:36]को देकर खलीफा का नुमाइंदा भी मजबूर हो जाता है अपने आवामी
[48:39]राय को हासिल करने के खातिर आपकी तकलीफों के अंदर शिरकत करने
[48:45]के ऊपर तो इस से बात वज़ीर हो जाती है की इमाम
[48:49]अली सलाम की बहुत बड़ी कामयाबी थी की जहां इतनी पाबंदियां थी
[48:51]आपको कहते नजर रखा गया आपको गिरफ्तार किया गया आपसे मुलाकात करने
[48:58]वाले लोगों के ऊपर पाबंद दिया लगाए आपको इज्जत एहतराम के साथ
[49:01]सलाम करने वाले लोगों के ऊपर शक्तियां पेश ए रहे द उसे
[49:05]दौरान भी इमाम ने अपने किरदार के जरिए अपने अमल के जरिए
[49:07]अपनी मोहब्बत को अपनी मोहब्बत का मतलब इमाम की मोहब्बत को इमामत
[49:12]की मोहब्बत को विलायत की मोहब्बत और उल्फत को लोगों के दिलों
[49:15]के अंदर आपने कायम फार्मा और उसके साथ आप इस दुनिया से
[49:20]तशरीफ़ ले गए और आपके आ नवीन के जरिए फिर इमामे ज़माना
[49:22]अर्ज अल्लाह ताला शरीफ की आवाज़ है जो आपने एक माहौल बनाया
[49:27]था इमाम की इमामत का वो लोगों के दिलों के अंदर फैलता
[49:31]चला गया और ये ससुरा जो है वो आज यहां तक पहुंचा
[49:32]है और उसे वक्त चलेगा की जब तक इंशाल्लाह अल्लाह रब्बुल इज्जत
[49:37]की एजेंसी इमाम ज़माना खजुर नहीं हो जाता दुआ है की परवरदिगार
[49:41]मोहम्मद वाले मोहम्मद हमें तैरने सलाम की सीरते तैयबा को हकीकी इमाम
[49:46]में समझने की तौफीक आता फार्मा और जिस तरह आई में मासूमों
[49:51]ने हर आसान और मुश्किल मौके पर दिन की खिदमत और दिन
[49:56]की तबले का फर्ज़ अंजाम दिया हमें उनके नक्शे कदम पर चलते
[49:58]आज के दौर में दिन के हिफाजत का और दिन के तबलीग
[50:02]का फ्रिज अंजाम देने की taufikrae फार्मा इनाम ताला फॉर जो शरीफ
[50:06]के जोर में ताजिम फार्मा हमें उनकी आवा साहब में से करार
[50:11]दे पर मोहम्मद वाले मोहम्मद सल्लल्लाह
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