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Ahtamam e Mahe Rajab | H.I. Muhammad hussain Raisi
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24/07/29
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Record date: 22 jan 2023
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
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Transcript
[0:12]बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन रसूलुल्लाह [संगीत] चंद बातें आपके सामने
[1:09]अर्ज कर लूं वह लाश यानी अस्त्र की कसम आखिर क्या किसी
[1:23]ने कहा असर रसूल किसी ने कहा अशरफ हो किसी ने वक्त
[1:31]हसीर है अल्लाह तबारक वी ताला जिसे कसम खाने की जरूरत नहीं
[1:55]है जब वो कसम खाता है तो इसकी एक वजह तो यह
[1:59]है की जो पैगाम दिया जा रहा है वो पैगाम बहुत है
[2:04]कहने कसम के बाद जो पैगाम आने वाला है उसकी अहमियत की
[2:08]वजह से खुदा कसम खाता है और दूसरी वजह वह यह है
[2:16]की जो कायनात का खालिक अगर किसी चीज की कसम खाए तो
[2:20]पता चल जाता है की जिस चीज की कसम खाई गई है
[2:23]उसकी कितनी अजमत है खुदा के पास तो इसका मतलब यह हुआ
[2:28]और जमाना अल्लाह तबारक वी ताला के पास इस कदर रखता है
[2:35]की अल्लाह उसकी कसम खाता है यह 2000 पैगाम बहुत हम हैं
[2:41]और जिस जिस चीज का नाम लेकर खुदा कसम खा रहा है
[2:44]उसकी अहमियत को बयान करने के लिए खुदा कसम खाता है की
[2:54]अल्लाह तबारक वी ताला जब कसम खाता है तो जो पैगाम दिया
[2:58]जा रहा है उसे परम की दलील उसे खत्म के अंदर मौजूद
[3:05]है मसाला यहां पर पैगाम क्या है इन साल इंसान हमारे में
[3:10]है तो हम कहेंगे पार्वती घर हम किस तरीके से खसरे में
[3:14]है दलील क्या है जबकि बैंक बैलेंस में ज्यादा हो रहा है
[3:21]कारोबार में तरक्की हो रही है बहुत सी चीज हमारे पास नहीं
[3:23]थी वहां गई है तो मैं किस तरह मालूम की इंसान हनसरे
[3:30]में है तो उसका जवाब यह है की premati चीज वह नहीं
[3:31]है जो तुम जमा कर रहे हो प्रेम की तुम्हारी जिंदगी है
[3:35]जो खत्म हो रही है तुम्हारा जो वक्त है वह तुम्हारी जिंदगी
[3:40]है यह हर रोज उसके अंदर कमी आती जा रही है यह
[3:44]दलील है की इंसान हनसरे में है वो नुकसान नहीं है और
[3:50]इंसान का मिजाज है की पहले जो है वो इस दुनिया को
[3:55]हासिल करने के लिए वक्त को खर्च करते हैं खुदा ने जब
[4:01]बीमार होता है तो मजीत टाइम लेने के लिए उसे दौलत को
[4:03]उसके ऊपर खर्च करते हैं जो एक लेकिन असली तमाम इंसानों को
[4:14]शरमाया एक जैसा दिया है वो है 24 घंटा वक्त है वह
[4:20]आपके पास भी है हमारे पास भी है सबके पास है लेकिन
[4:25]उसे वक्त को सही तरीके से इस्तेमाल को सही जगह पर खर्च
[4:35]करके दुनिया के अलावा हमेशा रहने वाली जिंदगी क़यामत को हासिल कर
[4:39]लेते हैं तो आगे यही कहा गया है वाला आश्रय इन नल
[4:44]इंसान अलग से वक्त की कसम तुम्हारी जिंदगी की कसम जमाने की
[4:51]कसम इंसान हर रोज नुकसान की तरफ जा रहा है इला जीना
[4:56]आमीन मगर वो लोग जो अल्लाह और केड क़यामत पर अकीदा रखते
[4:58]हैं वो अमीरों अस्सलाम तमाम ने किया अंजाम देते हैं यह लोग
[5:04]नुकसान में नहीं है नुकसान में क्यों नहीं है इस वजह से
[5:07]नुकसान में नहीं है की वह दुनिया की खत्म होने वाली niyamaton
[5:12]को बेचकर जन्नत की हमेशा की niyamaton का वारिस बन रहा है
[5:16]दुनिया की खत्म होने वाली जिंदगी को बेचकर जन्नत की हमेशा की
[5:21]जिंदगी का वारिस बन रहा है तो लिहाज नुकसान से कौन बचेगा
[5:26]वो तो बहुत ही ज्यादा नुकसान में है जो उसे वक्त को
[5:28]जाया करता है ना दुनिया हासिल करता है ना आखिरत हासिल करता
[5:35]है और वो आदमी nisbatan कम नुकसान में है जो जिंदगी को
[5:37]खर्च करते हैं दुनिया हासिल करने के लिए जब एक दिन ए
[5:42]जाता है तो सब कुछ छोड़ के तन्हा जो है वो कब्र
[5:45]के अंदर खाली हाथ चला जाता है तो ये भी नुकसान में
[5:46]होता है तो नुकसान से कौन बच जाता है नुकसान से वो
[5:51]आदमी बच जाता है की वो दुनिया के अंदर जो खत्म होने
[5:56]वाली जिंदगी है उसे बेचकर जन्नत की हमेशा की जिंदगी का मलिक
[5:59]बनता है दुनिया की खत्म होने वाली niyamaton के हवस जन्नत की
[6:05]हमेशा के लिए मत उनका वारिस बन जाता है वही लोग कामयाब
[6:09]है उसी का एक निस्ता है तो एक पहला मुकदमा आपके सामने
[6:15]अर्ज किया है की हमारी जिंदगी हमारा जो वक्त जो है बहुत
[6:22]ही है और वक्त से ज्यादा कोई शेर नहीं है अगर आप
[6:24]बंगले का मलिक है अल्लाह और भी दे दे आपको मल का
[6:28]मलिक है तो वो उसे जिंदगी का आवाज है जो आपने वक्त
[6:32]जो आपने दिया है उसका आवाज़ है उसको उसे टाइमिंग की वजह
[6:36]से है और अगर कुछ लोग दुनिया के अलावा आखिरत को भी
[6:38]आबाद करते हैं जन्नत हासिल करते हैं तो वो भी उसे जिंदगी
[6:42]का उससे की वजह से उसकी कीमत है जो दुनिया के अंदर
[6:45]वो खर्च करता है फिर उसके बाद फिर अमल के लिए कौन
[6:51]है तो मैं उसे बुजुर्ग का कोई आपके सामने नकल करूंगा ताकि
[6:54]बच जाए हमारा उससे पूछा गया की आखिरत के लिए बेहतरीन अमल
[6:59]करने का वक्त कौन सा है उसने जवाब में ये इरशाद फरमाया
[7:03]की मरने से एक दिन पहले मौत से एक दिन पहले बेहतरीन
[7:10]वक्त है की इंसान आमले नहीं करें तो सामने वाले ने हंस
[7:12]के कहा किसको पता है की जिंदगी का आखिरी दिन कौन सा
[7:17]है कब मौत आने वाली है किसी को नहीं पता तो उसने
[7:21]कहा मैं भी यही समझाना चाहता हूं क्योंकि मौत का किसी का
[7:23]पता नहीं है लिहाज हर आने वाले दिन को जिंदगी का आखिरी
[7:28]दिन समझ के हर दिन को और उसकी तैयारी करें बोलो की
[7:37]आज का दिन हमारे पास मौजूद है और फारसी के शहर है
[7:39]साड़ियां दे रहा पर्दा हम चीन मौजूद निज साथी अपने आप से
[7:48]खिताब करता है ऐसा आदि गुलदस्ता कल वो चला गया पुरी दुनिया
[7:54]देके भी वापस नहीं ला सकते वो तो खत्म हो गए जो
[7:55]कल था जो कल है वो खत्म है वो वापस नहीं आने
[7:59]का है वो पर्दा हम चीन मौजूद नहीं और आने वाला कल
[8:03]पता नहीं आएगा या नहीं है वो भी हमारे हाथ में है
[8:07]नहीं है gujarishta दिन गुजर गया वापस नहीं ए सकता है कल
[8:10]के दिन का कोई पता नहीं है लिहाज शादी कहता है इसके
[8:22]अलावा कोई और फुर्सत तुम्हारे पास मौजूद नहीं है यह आज के
[8:31]दरस का हमारा दूसरा मुकदमा हो गया दूसरी बात हो गई अल्लाह
[8:43]तबारक वी ताला की रहमत बहाने की तलाश में है तो करीम
[8:49]रब देना चाहता है तो उसके लिए मैक्सस आयाम रखा है हफ्ते
[8:55]के दिन शबे जुम्मा है रोज़ जुमा है किसी तरह कैसे रातों
[8:57]में से रखते रहे शबे बारात है इसी तरीके से महीना में
[9:02]से कुछ महीना को अल्लाह ने अजमत आता फरमाई है ताकि बाकी
[9:09]महीना के अंदर जो कमी रह जाए वो कमी पुरी हो जाए
[9:13]और मुक्तसर वक्त के अंदर जो है वो जो इंसान जो है
[9:15]वह आमाल को ज्यादा जो है सवाब अल्लाह तबारक वी ताला से
[9:20]हासिल कर सके तो लिहाज तिल हमारे रसूल है सब अल्लाह के
[9:31]रसूल अलग है लिहाजा हर दिन एक जैसा नहीं है हर रात
[9:34]एक ऐसी नहीं है हर महीना एक जैसा भी नहीं है यह
[9:40]दूसरी बात हो गया तीसरी बात की तरफ इंशाल्लाह तो आप पढ़ते
[9:51]हैं रहमतुल्लाह अलैह ने जब आमाल को तरतीब देना शुरू किया है
[10:00]तो अगर हिजरी के लिहाज से हजरत के लिए हाथ से हो
[10:04]तो फिर शुरू करना चाहता है मुहर्रम से की साल बदलता है
[10:09]मुहर्रम पहला महीना होना चाहता है फिर आमाल शुरू करना चाहिए था
[10:14]अगर फजीलत के लिहाज से अगर वो तरतीब देते तो फिर माहे
[10:19]रमजान को सबसे पहले होना चाहिए था की सबसे पहले रमजान के
[10:23]आमाल का जिक्र करते उसके बाद फिर सावाल जलकर इस तरह से
[10:26]यह हज को मैं यार बनाते failasa कलम यह है की मकती
[10:30]जो आपके सामने हैं इंशाल्लाह आप जाकर देखेंगे तो आपका अंदाजा होगा
[10:36]की साल के आमाल का जब आगाज होता है तो किस शुरू
[10:41]होता है माहिर से शुरू होता है यानी साल भर के लिए
[10:45]अगर कोई नया अंदाज़ से नया वाले के साथ शोक के साथ
[10:50]अगर कोई इरफानी सफर करना शुरू करता है तो इस अजीम अली
[10:53]की नजर में उसका आगाज किस होता है माहे rajabuljjab से होता
[10:58]है और रजब जो है उम्मत का महीना है शबन रसूल का
[11:04]महीना है और रमजान अल्लाह का महीना है और उनके हमारे maulatmahe
[11:08]रजब में है तो लिहाज ये मैन है रजब जो है वो
[11:13]अली का महीना है शबन रसूल का महीना है और रमजान खुदा
[11:17]का महीना है और ये जुमला बिल्कुल सही है अली से मैं
[11:23]मिलकर नबी से मिला हूं नबी से मिल कर खुदा से मिला
[11:25]ये रास्ता तो महाराणा प्रताप जो है कौन सा महीना है मैन
[11:32]है रमजान की तैयारी है माहे रमजान की तैयारी है इतिहास से
[11:40]अगर कोई मेहमान बड़ा है तो अब दरवाजे तक लेने के लिए
[11:44]जाते हैं या छोड़ने के लिए जाते हैं उससे बड़ा है तो
[11:46]आप गाड़ी तक जाते हैं उससे बड़े हैं तो आप एयरपोर्ट तक
[11:49]भी जाते हैं जहां तक हर दिन कान है मेहमान जितना बड़ा
[11:53]है उसको इस्तेमाल करने में दूर-दूर तक चले जाते हैं तो माहे
[11:57]रमजान अल्लाह का महीना है जहां खुदा का मेहमान बनने वाला इंसान
[12:00]तो अल्लाह तबारक वी ताला ने अपने फसल से 2 महीने को
[12:05]फजीलत अदा की है एक राजा परेशान ये दो महीना वो है
[12:09]जिसके अंदर इंसान अपने आप को पाकीजा करें और इंसान ताजिया करें
[12:12]कुछ आमाल अंजाम दे दें रहे माहे रमजान के अंदर का को
[12:17]पाकीज़ा होकर खुदा का मेहमान बनने की sulahiyat उसके अंदर पैदा हो
[12:20]जाएगा लायक उसके अंदर पैदा हो जाए और जो जमीन कस करते
[12:26]हैं वो बेहतर है वो जानते हैं की एक दिन ऐसा आता
[12:30]है जिसके अंदर जमीन को नरम किया जाता है फिर कुछ दिन
[12:34]के बाद उसके अंदर दाने डालते हैं उसके बाद उसको बराबर कर
[12:37]उसको पानी दिया जाता है फिर जमीन हो जाती है बिल्कुल उसी
[12:45]तरह से मैन है राजापुर शबन जमीन को हम वॉर करने का
[12:48]महीना है और अपने आप को आमदार करते हैं रमजान के अंदर
[12:56]रहमत ए जाए क्या खाना पकाना चाहता है या खाना जो है
[13:02]सिर्फ करना चाहते हैं तो फिर क्या करेगा जाहिर है की बर्तन
[13:08]को doyega साफ करेगा उसके अंदर कोई सुरक है तो उसको सही
[13:13]करेगा कोई खराबी है तो जिसके अंदर इंसान को सही करेगा अगर
[13:14]उल्टा है तो उसको सीधा करेगा गंदा है तो उसको साफ करेगा
[13:18]ना जी से तो उसको पाक किया जाएगा बिल्कुल उसी तरीके से
[13:20]मैन है रजब के अंदर जब खुदा की रहमत उनकी बारिश ए
[13:24]जाए तो उससे पहले इज्जत को सीधा किया जाता है उसे और
[13:29]पाक किया जाता है ताकि अल्लाह तबारक वी ताला की रहमत उसके
[13:34]अंदर ए जाए तो होगी लेकिन अगर हमारा जारो फिर उल्टा है
[13:39]यानी बाहर बारिश हो रही है आप बर्तन को उल्टा रखेंगे तो
[13:43]ऊपर से तो बारिश हो रही है लेकिन बर्तन के अंदर एक
[13:46]कटरा भी नहीं आएगा तो बारिश की गलती तो नहीं है जरा
[13:48]भी उल्टा रखा है वह भी छत के नीचे है या बाहर
[13:52]जो है उल्टा रखा गया है यह सीधा तो रखा है लेकिन
[13:56]वह गंदा है गंदा है तो सिकंदर पानी तो आएगा लेकिन वो
[14:00]पानी इस्तेमाल आएगा तो लेकिन वो पानी को भी नजिस कर देगा
[14:10]उल्टा लेकिन अगर उसे बर्तन के अंदर सुराख है तो पानी तो
[14:15]आएगा लेकिन रहेगा नहीं रुकेगा नहीं वहां से निकल जाएगा तो कुलसी
[14:17]का नाम ये है की मैन है राजापुर समान माहे रमजान की
[14:22]तैयारी और आमद हाकी है जरूरत को सीधा करना ही रह गई
[14:31]है तो कमी को पुरी करके सही तैयार और हमारा रखना है
[14:36]ताकि मैन है रमजान ए जाए तो रहमत ए जाए अल्लाह तुम्हारे
[14:41]को तलाक अल्लाह तबारक वी ताला फैयाज देने वाला है उसने सूरज
[14:43]को बनाया है क्या हम सूरज का रोशनी लेने के लिए वहां
[14:47]जाना पड़ता है नहीं जहां होते हैं जहां हम हैं वहां रोशनी
[14:53]खुद पहुंच जाती है क्या हवाओ लेने के लिए हम कहीं चले
[14:54]जाते हैं नहीं जहां मौजूद हैं वहीं पे हवा खुद बहुत पहुंच
[14:59]जाती है जब सूरज इतना फैयाज है उसको लेने के लिए वहां
[15:01]जाना नहीं पड़ता है तो जिसने सूरज को बनाया है वो उससे
[15:06]भी ज्यादा फरियाद है वो सिर्फ यही गर्भ को सीधा रखना पड़ता
[15:09]है जो है वो पाक और पकिश रखना पड़ता है जो है
[15:12]गलतियां हमारे अंदर होती है इस वजह से अंगड़िया जो आते हैं
[15:16]वो यही समझने के लिए आता है रहमत ए रही है गर्व
[15:20]को सीधा कर लो रहमत ए रही है सर को पाक रखो
[15:23]रहमत ए रही है सांप और पाक और सांप रखो तो ये
[15:27]है तो वहां है रजब जो है अब शुरू होने वाला है
[15:28]तो बेहतर जानते हो बहुत सारी नमाजे हैं और दुआएं हैं उनमें
[15:41]से एक नमाज का जिक्र करता हूं की हर मैन की पहली
[15:46]रात को दो रकात दिमाग पढ़ी जाती है रात की नमाज़ और
[15:57]उसके बाद फिर दिन की नमाज़ इंशाअल्लाह आदमी पढ़ते होंगे और बेहतरीन
[16:02]जो हर माह की पहली तारीख को दो रकात नमाज़ पढ़ी जाती
[16:07]ये पूरा महीना हिफाजत के लिए आम है यहां पर इंशाल्लाह की
[16:09]नमाज़ होगी यानी हर मैन की पहली तारीख को दौरा कर नमाज
[16:14]है बहुत मुश्किल भी नहीं है पहली रकात में अलहम के बाद
[16:18]सूर्य कुल वल्लाह है थोड़ी तरतीब के साथ तख्ती बदल गए और
[16:26]तया 30 से 30 तक और दूसरी डकैत के अंदर अलहम के
[16:35]बाद इन जालना है वो भी 30 दफा है की दो रकात
[16:42]है और दूसरा याद रखना है की पहली रकात में कुल हो
[16:44]अल्लाह है दूसरे रकात में ईंधन जालना है और तीसरा यह याद
[16:48]रखना है की उसकी तादाद 30 है ये तो हर माह की
[16:53]पहली तारीख को पड़ी पढ़नी चाहिए तो आप इस सूर्य से ही
[16:54]से आप अंदाजा कर सकते हैं की आपने ईंधन जन्नती महीने के
[16:58]अंदर 30 दिन होता है तीसरा आते हैं तो अगर आप यह
[17:04]नमाज पढ़ेंगे तो इंशाल्लाह पूरा महीना आप जो है बिल्कुल महफूज है
[17:07]बलाऊ से मुसीबत से परेशानियों से महफू से सबका देना है आपको
[17:12]छोटी सी दुआ भी है सदका देना है तो यह हर वहां
[17:16]के अंदर पहली तारीख को अगर ये दौरा का नमाज पढ़ेंगे तो
[17:20]खास तौर पर जो गाड़ी चलते हैं उससे भी खा चुका जो
[17:21]बाइक चलते हैं उनको यह नमाज तारक नहीं करनी चाहिए बेहतर तरीका
[17:25]तो ये होता है की सुबह की नमाज़ के बाद फौरन पढ़
[17:29]ली जाए ताकि कोई दिन में mashhuriyat हो तो रहना जाए अगर
[17:31]किसी वजह से रह जाए इंशाल्लाह अभी करते हुए तो एक तो
[17:42]यह और दूसरी बात मैन है रजब के हवाले से बहुत सारी
[17:46]दुआएं हैं मुश्तरका दुआएं हैं मैक्सस दुआएं हैं और उनमें से जो
[17:52]है वो रोजा जो है बाहर अजब के अंदर सबसे ज्यादा जिसका
[17:57]सवाल है वो है रोज़ का है सबसे ज्यादा सवाल किसका है
[18:02]माहे रमजान रजब के अंदर रोज़ का है आप मैन है रजब
[18:06]का आज करेंगे रात को तो रकात नमाज़ पढ़ के आप उसका
[18:08]आगाज करेंगे दो रकात नमाज़ पढ़ के जिसकी तरक्की मैंने आपके सामने
[18:15]है उसको थोड़ा सा बयान किया और उसके बाद दुआएं तो बहुत
[18:17]सारी है दुआ है mustfair के मौजूद है जो हान आज हमारे
[18:21]मौसम में शामिल नहीं है दुआएं तो बहुत ज्यादा है और जब
[18:24]के अंदर है मार्केट अजब के अंदर रोजा फिर माहे रजब के
[18:31]अंदर भी रोज़ अलग-अलग दिनों की अलग-अलग फजीलत है जिसका सवाब सबसे
[18:34]ज्यादा है वो पहली तारीख का रोजा है अब मैं सिर्फ माहे
[18:40]रजब में एक रोजा रखने वालों का स्वभाव बयान करूंगा बाकी तो
[18:45]शायद आपका tahmul भी नहीं कर सकेंगे आप हंसना शुरू करेंगे क्या
[18:49]करेंगे इतना क्या करेंगे सोचेंगे एक रोजा रखने वाले का सवाल एक
[18:52]रवायत के अंदर आया की आकाश में है रजब में एक रोजा
[18:56]रखे अल्लाह तबारक वी ताला 70 साल का रोजा रखने को सवाब
[19:00]देता है दूसरी तरफ से आता फरमाता है एक रोजा रखे तो
[19:08]यह तो एक सवाल हो गया माहे रजब के अंदर अगर कोई
[19:13]एक रोजा रखे तो अल्लाह का गुस्सा ठंडा हो जाता है खुदा
[19:16]ठंडा हो जाता है अगर एक रोजा रखे तो अल्लाह तबारक वी
[19:22]ताला जहन्नम का दरवाजा उनके लिए बंद कर देता है अगर एक
[19:24]रोजा रखता है अल्लाह तबारक वी ताला जन्नत का दरवाजा उसके लिए
[19:30]खोल देता है और इसी तरीके से अगर कोई रोजा रखता है
[19:35]तो इफ्तारी के वक्त अल्लाह तबारक वी ताला 10 दुआएं उसकी मुस्तफा
[19:38]फरमाता है और 10 दुआएं काबुल करने के बाद मुझसे बात खुदा
[19:44]फरमाता है की तुमने इतना सवाब कमाया है की इस दुनिया के
[19:46]अंदर तुम इतना सवाब जो है उसका जो तुम जो है वो
[19:50]अपने हाथ में रख ही नहीं सकते लेकिन अल्लाह तबारक वी ताला
[19:56]जखीरा फरमाता है और इस तरीके से कितने सवाल कितना सवाल है
[19:59]समझने के लिए है ये भी है की अगर एक रोजा रखे
[20:03]उसका स्वभाव इतना है की अगर ये पुरी जमीन सोना बन जाए
[20:07]गोल्ड बन जाए तो अगर वह अल्लाह की रह के अंदर अगर
[20:12]दे दे तो जितना सवार मिल सकता है एक रोज़ का सवाल
[20:14]इस पुरी जमीन के वजन के बराबर अल्लाह के रह में जो
[20:18]है वो देने से ज्यादा एक रोज़ का सवाब ज्यादा है मैंने
[20:23]पहले आज किया था ये तो एक रोज़ का है फिर दो
[20:27]रोज रखे तो ये मिलता है फिर तीन रोजा रख तो ये
[20:32]मिलता है फिर चार रोजा रखा है तो इसी तरीके से जो
[20:35]है वो अल्लाह के रसूल बयान करते हुए आखिर तक फरमाते हैं
[20:40]की 30 रोजा रखने वालों के बारे में तो इतना इतना है
[20:42]की आप सोच भी नहीं सकते हैं की हम बयान भी नहीं
[20:45]कर सकते हैं की काबिले tahamul नहीं है क्यों क्योंकि हम अपनी
[20:50]सोच के मुताबिक सोचते हैं और खुदा अपने फ़ज़ल के मुताबिक आता
[20:55]करता है की हम लेने वाले हैं लेकिन महदूद सोच रखते हैं
[20:58]तो हम सोचते हैं की इतना कैसा हो सकता है तो लिहाज
[21:01]लेने वाले को अपनी हैसियत के मुताबिक नहीं देखना चाहिए देने वाला
[21:07]कितना अजीब है कायनात का खालिक है iskaynat को बनाने वाला है
[21:10]और इतनी बड़ी कायनात बनाने के बाद उसकी कुदरत खत्म नहीं हुई
[21:15]इतनी बड़ी कायनात भी अल्लाह के कुदरत का एक ज़रा है पुरी
[21:18]कुदरत नहीं है तो लिहाज बहुत ज्यादा सवाब है माहे रजब के
[21:23]अंदर रोजा रखने का और हदीस के अंदर आयत जन्नत के अंदर
[21:33]एक नहर का नाम है और जो की जो है लवण रंग
[21:39]के लिहाज से दूर से ज्यादा सफेद होगा वो ahlaam इन असल
[21:44]वो शान से ज्यादा वो पानी मीठा होगा और ये उन लोगों
[21:49]को अल्लाह तबारक वी ताला सीधा फार्मा आएगा क़यामत के दिन और
[21:52]वहां की प्यास का इंसान अंदाजा भी नहीं लगा सकता अभी सूरत
[21:56]इतना दूर है फिर भी इतनी प्यास लगती है वहां तो सूरज
[21:58]बिल्कुल सर पे होगा प्यास बहुत लगाई तो अल्लाह तबारक वी ताला
[22:03]माहे रजब के अंदर रोजा रखने वालों को उसे नहर से पिलायेगा
[22:06]और फिर खास मुनादी क़यामत के दिन आवाज़ देगा अल्लाह की तरफ
[22:16]से ऐलान farmaega रजब के अंदर बेहतरीन अमल करने वाले कहां हैं
[22:23]वो खड़े हो जाएं तो बहुत नूरानी अफराद खड़े हो जाएंगे जो
[22:28]मैन है हमारे के रजब के अंदर उन्होंने इबादत की होगी दुआएं
[22:35]पड़ी होगी और नमाजे पढ़ी होगी और वह जब जन्नत जैसा कोई
[22:39]बादशाह वहां से गुजर रहा है वहां से एक बादशाह के मानंद
[22:44]रजब की हुरमत का ख्याल रखने वाले माहे रमजान रजब के अजमत
[22:47]कोई का ख्याल रखने वाले को अल्लाह तबारक वी ताला इतना मकाम
[22:52]क़यामत की दिन आता farmaega तो खुलासा सबसे ज्यादा जो है वो
[22:59]रोजा रखने का सवाब ज्यादा है वहां रजब के अंदर रोजा रखने
[23:01]का सबब ज्यादा है आप चूंकि हमें आसान करना है और उसी
[23:04]हदीस के अंदर मौजूद है की मैंने एक रोजा रखने का समान
[23:09]आपके सामने बयान किया 3 करोड़ सभा कितना सभा और इसी वक्त
[23:19]निकल ना जाए मैं पहले बता देता हूं अब वाले माहे राजा
[23:21]साहब ज्यादा है उसके बाद ज्यादा है और आखिर गजब के अंदर
[23:35]रोजा रखने का स्वभाव है राजा पूरा शबन रोजा रखना मुस्ताहब है
[23:38]पूरा रमजान पूरा शबन रोजा रखना मुस्ताहब है की उसका सवाब बहुत
[23:46]ज्यादा है तो और रोज़ की फजीलत बहुत ज्यादा है अच्छा एक
[23:51]मसाला बयान करना जरूरी है जिनके जिम्मे वाजिब रोजा है है वह
[23:54]मुसाहब रोज़ की नियत नहीं कर सकते हैं अलविदा रखने से मुस्तफा
[24:00]रोजे कभी सवाब उसे मिल जाता है यानी खाजा अच्छा है रोजा
[24:03]अपना जो है वो या किसी मरहूम का हो या किसी मरहूम
[24:07]वाले दिन का हो किसी का भी हो अगर आप रोजा रखेंगे
[24:10]तो वो आज भी अदा हो जाएगा और मुस्तफा का सवाद भी
[24:14]जो बयान हुआ है वो आपको मिल जाएगा यहां तक बिल्कुल क्लियर
[24:16]तो फजीलत और भी है सवाब और भी है जो मैंने मुक्तसर
[24:22]के अब जो राजनीति था सुनने वाला था उनमें से एक ने
[24:28]कहा या रसूल अल्लाह का रोजा ना रख सके तो रोजा ना
[24:31]रख सके तो फिर क्या है वह आपने और भी आसान कर
[24:38]दिया फरमाया की अगर कोई मैन है रजब के अंदर रोजाना रख
[24:39]सके alvaten वहां राजा के साथ महसूस नहीं है लेकिन इस रवायत
[24:44]के अंदर मौजूद है वाकई हुई है लेकिन पैगंबर से जब सवाल
[24:45]है की वो किसी वजह से रोजा नहीं रख सका बीमार है
[24:48]इस वजह से रोजा नहीं रख सकता सहर में है रोजा नहीं
[24:52]रख सका या masrufiya ज्यादा किसी वजह से भरोसा ना रख सके
[24:56]तो क्या रहमत का दरवाजा बंद हो गए उसके लिए क्या वो
[24:59]सवाब नहीं हासिल कर सकेगा तो आपने इरशाद फरमाया की अगर कोई
[25:04]मैन के अंदर सदका दे दे खैरात करें और खाना खिलाए तो
[25:09]अल्लाह तबारक वी ताला इतना ही सवाब देगा फिर रसूल फरमाया अक्सर
[25:11]बल्कि उससे ज्यादा भी आता कर सकता है कितना आसान हो गया
[25:21]तो रोजा रखने का सवाब मिल जाएगा तो यह हदीस पढ़ते ही
[25:28]मुझे ये जहां में ए रहा था यह जो नियाज आप देते
[25:34]हैं माहेरा हाथ उसके अंदर मौजूद होगी यहां से लेकिन कम से
[25:37]कम मेरे से इनके अंदर यह भी ए जाता है जिसने भी
[25:40]शुरू किया है अल्लाह उनको जय खैर दे की जब आप नियाज़
[25:44]करते इमाम शादी की कुंडली के लिए आज करते हैं तो अगर
[25:48]आप ये राधा करें की इनमें वो भी है नियाज़ के अलावा
[25:49]कुछ ऐसा मेरा वो भी है की मैं रोजा नहीं रख का
[25:52]रहा हूं उसके बाद जो है बोला तो ये जितना स्वभाव अल्लाह
[25:56]तबारक वी ताला ने रोजा रखने वाले के लिए अल्लाह ने किया
[25:58]है आपकी नियाज भी और उसके अलावा आपको यह सदका देकर रोजा
[26:05]रखने का सवाब भी आपको मिलेगा और अगर आप आता देते हैं
[26:13]30 किलो अगर आप आता 10-10 किलो की तीन आदमी कोई आएगा
[26:18]आदमी को आप दे दें तो पूरा मा है रजब रोजा रखने
[26:22]का सवाब अल्लाह तबारक वी ताला आपको पता फरमाता है अल्लाह तबारक
[26:25]वी ताला आपको ये सवाब जो है आता farmaega तो कितना आसान
[26:29]हो गया की अगर आप रोजा नहीं रख सकते हैं तो आप
[26:34]सदका देकर खाना खिला के ये सब आप हासिल कर सकते हैं
[26:37]आपको करीम है करीम का दरवाजा कभी भी बन नहीं होता है
[26:43]मस्ट या रसूल अल्लाह अगर रोजा भी नहीं रख सके आता भी
[26:48]नहीं दे सका किसी वजह से तो फिर क्या होगा तो उसे
[26:52]वक्त उसके क्या उसके लिए रहमत का दरवाजा बंद हो गया की
[26:54]ये सवाब से वो महरूम रहेगा तो आपने एक छोटी सी तस्वीर
[26:58]है लंबी नहीं है बहुत छोटी सी एक तस्वीर है की अगर
[27:04]कोई रोजाना इस तस्वीर को पड़ेगा तो बने वो रोजाना रखें पहले
[27:08]इसको रोसा जो है वह सदका पीना दे सके तो रोजाना दीवार
[27:12]को लिखेंगे तो शायद एक लाइन के अंदर ए जाएगी सुभान अल्लाह
[27:37]उसी हदीस के अंदर की रवायत है बाहर अजब के अमल के
[27:41]अंदर देखे वो पहली रवाया था यह यहां दूसरी रवायत है जो
[27:45]बेहोश के अंदर ये मौजूद है लेकिन ये तोलानी हदीस में कई
[27:48]सफा निकल जाते हैं लिहाज आपको आखिर में देखना है तो लिहाज
[27:50]रोजा रख सकते हैं तो बेहतर रोजा ज़रा ये तस्वीर ये पढ़े
[27:57]तभी अल्लाह तबारक वी ताला आपको सवाब अजीब आता farmaega मैन है
[28:01]रजब के अंदर इस हदीस के अंदर तो मौजूद नहीं है की
[28:09]किसी और बातें के अंदर ये मौजूद है किसी तस्वीर के बारे
[28:13]में इरशाद फरमाया की यह तस्वीर फरमाया की अल्लाह की रह में
[28:20]अगर ये दोगे तो इतना सवाब मिलेगा तो लोगों ने वो देना
[28:22]शुरू कर दिया है की ठीक है आपको देने के लिए कुछ
[28:39]नहीं है लेकिन दसवीं पढ़ो तो वो लोग कमाएंगे और तुम जो
[28:42]ये तस्वीर पढ़ते हो सब आपका मल है ये तो मालूम है
[28:46]लेकिन एक दिन एक आदमी वाला है कोई शिकायत ले के आया
[28:50]है अब हुआ क्या कुछ लोगों का लैंड रसूल ने फरमाया की
[28:53]अल्लाह के रहम भी देने का इतना सवाब इतना सवार खर्च करना
[28:57]शुरू किया फिर लोग शिकायत करने लगे की हमारे पास तो नहीं
[28:59]है तो कहा ये तस्वीर बढ़ो तो तस्वीर पढ़ने लगे वो अल्लाह
[29:03]की रह में देने लगे यह लोग तस्वीर के अंदर मसरू हुए
[29:04]तो एक तीसरा दिन आपका कहता है अल्लाह के नबी ये जो
[29:10]मालदार है जिसको अल्लाह ने दिया है वो मल भी खर्च कर
[29:14]रहा है और हमारे साथ तस्बीह पढ़ने शुरू कर दिया है तो
[29:17]यहां पर निशा फरमाया यहां के अल्लाह तबारक वी ताला अगर किसी
[29:20]को ये तौफीक देता है की वो मल भी दे रहा है
[29:24]और तस्वीर पड़ा है तो रहमत के दरवाजे को मैं अल्लाह का
[29:28]रसूल बन नहीं कर सकता हूं तो यह उसके इसी तरीके से
[29:32]का कोई सुशीला रखता है रोजा रखने के बावजूद वो भी देता
[29:34]है सदका देने के बावजूद अगर वो तस्वीर भरता है तो फिर
[29:39]नूर नाला नूर इससे जो है इंसान जो है वो बहुत ही
[29:42]खुशकिस्मत इंसान शुमार हो जाएगा तो अभी तो मैंने कहा मल के
[29:48]बारे में वो तो आपने सुना है ना हमारे रूम में दौड़
[29:50]के बारे में अच्छा हमारे उम्मीद में दावत के बारे में अच्छा
[29:55]आप उसकी तारीफ भी शायद आपको मालूम है इशारा करता हूं क्यों
[30:00]मैं इशारा इसलिए कर रहा हूं क्योंकि ताकि इस महीने की अजमत
[30:02]का अंदाजा हो जाए उनमें दावत कामना क्या है दौड़ की मैन
[30:08]ये तो मालूम है उम्र दौड़ यानी दौड़ की मैन आज का
[30:11]पूरा कसा क्या है पूरा का सही है की दावत एक जवान
[30:18]है अबू दवानी मंसूर अबू धाम उसके जमाने के अंदर लोगों को
[30:21]पकड़ पकड़ के दिलदार में डाला जाता था उनको कत्ल किया जाता
[30:25]तो बुरे तरह से सपाटी किया जाता है तो बहुत सारे लोग
[30:29]पकड़े गए और मार दिए गए तो उनमें से एक जवान मदीने
[30:33]के अंदर दौड़ था उसको भी पकड़ लिया जाएगा कितने लोगों को
[30:45]मारा है दूसरे दिन खबर आती थी इतने दिन काफी हादसा गुजर
[30:49]गए तो फिर उसकी मैन यानी दौड़ की मैन हमारे मौला इमाम
[30:55]में जफर ने साधक salamatullahi व सलाम वाले वहां पहुंची तो आपने
[31:05]फरमाया की दौड़ की क्या खबर है रसूल सबब तो बुरी है
[31:10]पता नहीं जिंदा भी है नहीं है क्या है क्या है क्या
[31:11]है और शादी सुनिए उसे खातून का दूध पिया था वो rizari
[31:16]मैन भी थी उस्मान रो रो के कहा या अल्लाह के वाली
[31:21]आप हमारे लिए दुआ करें की मेरा बेटा जो है वापस ए
[31:26]जाए वो आपका रिज़वी दूध के भाई भी है और खबरें जो
[31:29]है इराक से बहुत बुरी बुरी खबर है ए रही है और
[31:30]मैं बुढ़ापे की सालन के अंदर आंखों के बिना ये खत्म हो
[31:35]गई है बुढ़ापा ए गया है अब दुआ करें इसके लिए छूट
[31:38]के ए जाए तो ये हमारा तो फिर क्या फरमाया की तुम
[31:46]अपने बेटे की रिहाई चाहती हो तो माहे रजब के तीर्थ की
[31:48]13 14 15 को रोजा रखो यानी माहे राजा का इंतजार करो
[31:54]फिर आपने हमारे उम्मीदवार के अंदर है बस सिर्फ इतना ज़माना गुजर
[32:14]गया की जितना इराक से मदीना ए सकता था उनका बेटा बहुत
[32:16]बड़े एहतराम के साथ वापस मदीना पहुंचे उसे आमाल की वजह से
[32:20]मैन की इस दुआ की वजह से फिर एक ख्वाब मैन ने
[32:25]बयान किया आमाल अंजाम दिया तो अल्लाह के रसूल को आते हैं
[32:31]अल्लाह के रसूल ने मुझे देखा है की देखो इस तरफ देखो
[32:35]देखा तो हर तरफ अंध्या खड़े एक तरफ देखा तो मलाइका खड़े
[32:40]हैं साल्ही खड़े हैं अल्लाह के रसूल ने फरमाया तुम्हारे इस आमाल
[32:43]की वजह से ये सब के सब तुम्हारे और तुम्हारे बेटे के
[32:46]हाथ में दुआ के लिए खड़े तुम्हारी sudharej के लिए लोग खड़े
[32:52]हैं यह सब के सब दुआ कर रहे हैं और तुम्हारा बेटा
[32:53]बच के ए जाएगा मदीने के अंदर पहुंचा दिया तो उसने जब
[33:10]बेटे से पूछा की बेटा क्या हुआ किस तरीके से तुम्हें रहा
[33:15]ही मिली तो कहा की मैं सोया हुआ था और जब सोया
[33:20]हुआ था और अचानक उठा तो बादशाह के लोग यहां जमा हुए
[33:26]द उनका पक्ष की तरफ से माफी की दरखा से और जो
[33:29]है इतना समान आपको रखा है की समान ले ले और हम
[33:31]आपको मदीना पहुंचा देंगे तुम्हारे लिए सिफारिश कर रही थी susparik कर
[33:41]रहे द तुम्हारे हाथ में तुम्हारी दुआ पे इसी तरीके से ख्वाब
[33:46]उसे बादशाह ने देखा की तुम्हारे समान की वजह से उसे बादशाह
[33:50]ने उसे जालिम अच्छा ने ख्वाब में देखा की मोलाई कायनात तलवार
[33:52]लेकर खड़े द की इस बेटे को छोड़ो वर्ण मैं तुम्हारी गार्डन
[33:54]उदा दूंगा वो दर के छोड़ दिया है तो कहने का मतलब
[33:58]ये है एक अमल दौड़ के जो है वो भी मैन है
[34:01]रजब के अंदर आमाल के अंदर शामिल है और वो भी आप
[34:05]अंजाम देंगे तो फिर अगर 13 14 15 रोजा रखेंगे तो क्या
[34:11]होगा मसाला अच्छा उसके बाद फिर आपको पता है की नाम से
[34:15]काफी होता है देता है और आप मस्जिद के अंदर जाते हैं
[34:25]खुदा के मेहमान बन जाते आप तीन दिन के लिए तो सबसे
[34:41]पहले तो तीन रोजे आपके जो वाजिब है वादा हो जाएगा एक
[34:49]तो यह दूसरा अमल दावत के लिए रोजा शरद है उसका अमल
[34:52]ए दावत का रोजा भी उसी में हो जाएगा यह दो हो
[34:58]गया और तीसरा जो है वह मैन है रजत के अंदर रोजा
[35:00]रखना मुस्ताक है वह सौभाग्य आपको मिल जाएगा और चौथा यह है
[35:06]की पूरा महा रजब रोजा रखने का सवाब है वो भी आपको
[35:10]मिल जाएगा खुलासा है वो रोज़ जो आप रखेंगे उसमें एक सवाब
[35:12]नहीं होगा बेशुमार स्वभाव अल्लाह तबारक वी ताला आपको आता farmaega मोहतरमा
[35:20]माहे राजा बाकी महीना से ज्यादा आपको पता है की हुरमत वाले
[35:28]महीने चार है और उनमें से एक महीना जो है माहे रजब
[35:33]है बाकी तो एक तीन साथ है जिल्का तो जेल हज मुहर्रम
[35:35]ये तीनों साथ है मैन है रजब बिल्कुल अलग से है हदीस
[35:40]के अंदर आया है की रजब वो महीना है जिसका एहतराम दौरे
[35:45]जा hiliyat के अंदर भी किया जाता था यानी जाहिर के अंदर
[35:48]जब राजा शुरू होता था तो तमाम जाएंगे बंद हो जाती थी
[35:52]राम में jahiyat के अंदर भी किया जाता था इस्लाम आने के
[35:59]बाद रजब के अजमत में और इजाफा हुआ है और मौला के
[36:04]विलादत की वजह से इस माह के हुरमत में और भी मुश्किल
[36:08]kushag की विलादत के हवाले से इस माह के हुरमत और इज्जत
[36:15]में और भी असाफा हुआ है तो दुआएं मुनाजात रोजा सदका और
[36:17]खैरा स्मार्ट के अंदर बहुत ज्यादा है लिहाजा यही गुजारिश है की
[36:23]अल्लाह से दुआ भी है की अल्लाह तबारक वी ताला हमें इस
[36:25]माह के अंदर से ज्यादा से ज्यादा रोजा रखने की टोक्यो अदा
[36:30]फरमाए नियाज़ के नाम पे जो भी हो इस माह के अंदर
[36:30]से ज्यादा से ज्यादा खिलाने मोमिन के खिदमत करने उनको खाना खिलाने
[36:36]की तो फिर आता फरमाए और तेरी रह के अंदर खर्च करने
[36:38]के अल्लाह तबारक वी ताला आप सबके और हम सब के कारोबार
[36:42]में तरक्की आता फरमाए हम सबको आता फार्मा बदन में घर में
[36:49]सुकून आता फार्मा मुलुक में आता फरमाए रमजान में तेरा मेहमान बनने
[37:03]की सलाह दिया और हमें मोहल्ला आता फार्मा और एक करीम परवतिकर
[37:06]जब तक तू तो फिर नहीं देगा उसे वक्त तो हम कुछ
[37:11]भी नहीं कर सकते परवरदिगार तो हमें इस माह के अंदर ज्यादा
[37:15]से तीन मुनाजात की हम सबको तौफीक आता फार्मा और जिन जिनके
[37:18]इस तरह से निकाह किया है उन सबको हाजिर azimata फार्मा और
[37:23]जो अखरार यहां खालिस mukhhtistan है यहां बैठे हैं खाली जो है
[37:26]वो अल्लाह तबारक वी ताला इस बैठने को इबादत का darjata फार्मा
[37:32]और इस बैठने के नतीजे में हमारी ईमान को कहां मिलता ही
[37:35]नहीं ईमान का दर्ज था फार्मा हमारे मौला हम सब से राज्यों
[37:41]खुशबू फार्मा हम सबको हमारे मौला का दीदार है करीम पार्वती घर
[37:45]इसमें रजब के अंदर हमारे तमाम और मोमिन के maksirat है [संगीत]
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