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5- توبه کی اهمیت - حجة الاسلام مولانا غلام حسنين وجدانى
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24/10/06
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محاضرات
انسان کے اندر چهار طاقتیں هیں. قوت عقلی, قوت شهوت, قوت وهمی اور قوت غضبی. اگر انسان میں ان چهاروں کا بیلنس برابر هو تو انسان میں صفت عدالت اور تقوی پیدا هوگی. اور اگر انسان ان قوتوں کو خدا کی راه میں خرچ کرے تو اس صورت میں ایک انسان کامل بن جائے گا. انسان کامل بننے کیلئے بیداری اور توبه لازم هے. توبه کامطلب یه هے که انسان گناهوں کو ترک کرکے راه الهی کی طرف واپس پٹےخ. توبه کیلئے چند شرائط هیں ان شرائط اور مزید اطلاعات جاننے کیلئے آئیےدیکےےه هیں...
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Transcript
[0:00]झाला झाला मेरे को वर्कर हुआ था जो क्या स्वादिष्ट कुन्नू पिछड़ों
[0:15]बेचैन है तो फिर इन थीं मानवीय निलेश को हुई ए रुद्दर
[0:20]मुख्य आरोप तय जल्दी पांच लूंगी वन मोंठ विद लूज 4000 हेलो
[0:34]हाउ टो बिल्लाहे मिनस यह पानी और अजीम बिस्मिलाहिर्रहमाननिर्राहीम अल हमदुलिल्ला ही
[0:44]रब्बुल आलमीन वाला खेल भतोल हद तक अव्वल यत्न ये सुन्नत वाला
[0:51]तो अस्सलाम वाला अशरफी लंबी आयल मुरसलीन वह बहुत है पर यह
[0:59]बीना पांडे रिनल मासूमीन पिछला वाला गाना तू मिला है यह आंवला
[1:06]आधा एग्जाम अजवाइन उन्होंने बिना हाइट दाखिला ले कायम विदीन हिम बुध
[1:11]फकत काला हो यह किन फिल्मों में किताब हिल क्रीम बिस्मिलाहिर्रहमाननिर्राहीम अन्हू
[1:21]मना नीलम इनकम सू लंबी जहां 30 तांबे ही वापस लाना है
[1:31]की राजधानी ग्रामीण सबसे पहले आप की खिदमत में सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह
[1:40]बराकातहू तो नागिण मोहतरम और सा महीने के राम आप जानते हैं
[1:46]कि अखलाख से इस्लामी के जेल में हमारी यह आज पांच बीम
[1:54]नष्ट है है और पिछले प्रोग्राम में हमने और पिछली नष्ट हुए
[1:59]दे जो मोदी इंतखाब किया था शीघ्र कि आज के इस तरफ
[2:09]का दौर में कि जो टेक्नोलॉजी और मीडिया का दौर है है
[2:13]जहां इंसानी तमद्दुन ने इतनी तरक्की की है कि वहां तहजीब चीफ
[2:23]हवाले से इंसान और ज्यादा गिरावट का शिकार हो चुका है कि
[2:30]इंसान अ ख्याति इतवार से बस्ती और तनु जल की तरफ जा
[2:38]रहा है 272 के इस्लामी राष्ट्रों के अंदर भी वही हालत है
[2:43]कि जो Maggi मोक्ष अरे के अंदर या मगरिब के मुख़्तलिफ़ मार्शलों
[2:51]के अंदर पहला तीव्र गिरावट और अगला पति पति की जो हालत
[2:55]नजर आती है वह हां नक्श हमें इस्लामी मामलों के अंदर भी
[3:01]नजर आ रही है उसके अशुभ क्या है उस पर कुछ गुफ्तगू
[3:06]हुई थी और उसके साथ सात बार इंसान के कि इस जिस्म
[3:13]के अंदर इंसान की शुरू के अंदर जो चार अहम ताकत हों
[3:18]या चार अहम को वस्तुओं का हमने जिक्र किया था कि अगर
[3:21]इनमें से ओवर थे रफ लिया या पूर्वकाल और अक्ल की ताकत
[3:28]व हम की ताकत पर सहमत की ताकत पर और रजब की
[3:34]जो ताकत और पूर्वक इंसान की रूह के अंदर पाई जाती है
[3:39]अगर इन सब तेरा असली बाप आ जाए तो फिर यह इंसान
[3:44]एक आम इंसान हो जाएगा लेकिन अगर खुदा न खास्ता इन चार
[3:55]युवकों में से अक्ल मजबूर हो जाए और कूड़े के ढेर व
[3:57]बरकत पध अक्ल के ऊपर ग़ालिब आ जाएं तो इसका नतीजा यह
[4:05]निकलेगा कि इंसान पति की तरह चल जाएगा है लेकिन अगर आयल
[4:15]ग़ालिब आ जाए तो यह यह वतन सहमत यही को 13 बस
[4:20]यही पूर्व व हम अ कि आप चल के अगर तांबे हो
[4:26]तो सहमत का नतीजा इफ्फत और पाकदामनी और रजत का नतीजा शुजाअत
[4:34]है और इंसान के पास जो ताकत व हम है वह दुनियां
[4:40]है इसके नतीजे में इंसान हिकमत वाला हो सकता है उस वक्त
[4:50]कि जब इन तीनों ताकतों के ऊपर अपील की ताकत मगुलु भोगी
[4:53]और इन तीनों और इन चारों के बाहमी सही और तिब्बत के
[5:00]जरिए से जब इन चारों में अदालत बरकरार होगी और जब इन
[5:03]चारों में ताहुल होगा और बैलेंस होगा और अगले दिन फिर ऑलिव
[5:11]होगी तो फिर एक सिफत इंसान के अंदर मौजूद में आएगी कि
[5:17]उस सिफत का नाम है अदालत है और यह तो आधुनिक इंसान
[5:23]की रूह में हमें नजर आएगा कि जब इंसान अपनी इन तमाम
[5:30]सिफ़ात के जरिए से सही इस्तेफ़ादा करेगा सहमत को राहे ख़ुदा में
[5:34]इस्तेमाल करेगा रजत को राहे ख़ुदा में इस्तेमाल करेगा और को तत्व
[5:39]हमको भी इंसान अल्लाह के रास्ते में और जो अल्लाह के दिखाए
[5:45]हुए सही रास्ते हैं उनमें इस्तेमाल करेगा तो यह इंसान एक इंसान
[5:51]ए कामिल हो जाएगा तो है लेकिन किस तरीके से इंसान अपने
[6:00]आपको इन आंख सिफ़ात से आरास्ता करें और बुराइयों की जड़ को
[6:04]अपने अंदर से काट के फेंक देते हैं यह किस्सा नामुमकिन इंसान
[6:09]के लिए और किस तरीके से इंसान इंसानियत का मिलन हो सकता
[6:12]है इस पर हम आज की इस देश में शुरू करेंगे सबसे
[6:20]पहले जो चीज इंसान को मध्य नजर रखना जरूरी है वह यह
[6:26]कि इंसान को चाहिए कि वह पहले बेदार हो जाए जिसको ऑल
[6:32]माय अगला या और आप यह कहते हैं यानी बेदारी इंसान मुतवज्जेह
[6:41]हो जाए कि मेरी जो हालत है मौजूद झाल वह कैसी हालत
[6:43]है मैं पति के किस मोहल्ले में हूं मैं तरक्की और कमाल
[6:50]के किस मोहल्ले में हूं आया मैं एक इंसान लाए जाने के
[6:56]लायक हूं इस वक्त जो मेरी हालत है इस हालत में क्या
[7:03]मुझे यह हक हासिल है कि मैं अपने आपको एक इंसान हूं
[7:06]हैं जो कि हमने पहले आपके हित में बयान किया था कि
[7:12]इंसान के अंदर है वाणी ताकतें भी पाई जाती हैं और जब
[7:19]इंसान बुराइयों के अंदर गिर जाए और बुराइयों के दलदल में अगर
[7:22]फस जाए तो फिर इस इंसान के अंदर और आराम है वह
[7:27]अनाथ और बाहें के दरमियान कोई ज्यादा फर्क नहीं है एक आम
[7:32]है वन भी सहमत के पीछे भागता है एक आम हैवान को
[7:37]भी सुबह से शाम तक यह फ़िक्र लगी रहती है कि किस
[7:42]तरीके से अपना पेट भरे और जब पेट भर जाता है तो
[7:47]वह फिर सहमत के पीछे लगा रहता है और जब पेट भर
[7:51]जाता है तो हैवानात आपस में रज्जब के जरिए एक-दूसरे से लड़ाई
[7:54]झगड़ा करते हैं एक दूसरे को मारते हैं पीटते हैं मुकाबला उनके
[7:59]धर्म ध्यान रहता है तो इंसान देखें कि मैं अपनी इस हालत
[8:07]पर हूं आई एम मेरे अंदर इन नियत मौजूद है यह इंसानियत
[8:09]आहिस्ता-आहिस्ता खत्म होती चली जा रही है इंसान बेदार हो जाए इंसान
[8:18]जाएंगे इसी को और अपनाने और ऑल माय अखलाक ने यह कहा
[8:24]है जुए के साथ यह इंसान बेदार हो जाए मुतवज्जे हो जाए
[8:27]अपने आप की तरफ वो और अपने खुदा की तरफ के मुझे
[8:33]अपने आपको सवारना है अपनी रूह को बनाना है अपने अकाउंट को
[8:36]अपने नफ़्स को आम रास्तों पर आस्था करना है अ खिलाते फंसे
[8:41]जिसको अगर हम कुरान की रूट्स देखें और हल्दी से मासूमीन अलार्म्स
[8:51]सलातो अस्सलाम में इसी यकजा को अगर हम कहें कि क़ुरआने मजीद
[8:55]ने इसे तौबा का नाम दिया है तो मेरे ख्याल में कोई
[8:59]इसमें ऐड नहीं है कि क़ुरआने मजीद ने इसको तौबा का नाम
[9:06]दिया कि इंसान तोबा के जरिए से मैं अपनी गुलदस्ता हालत को
[9:10]छोड़कर एक नए और जो सिराते मुस्तकीम है उस रास्ते पर चलने
[9:18]के लिए है और तौबा का मतलब यही है कि इंसान अपने
[9:20]गुनाहों को छोड़कर अल्लाह की तरफ़ मुतवज्जेह हो जाए इसलिए क़ुरआने मजीद
[9:32]में है तो वह अल्लाह का जो लफ्ज़ इस्तेमाल हुआ है यह
[9:35]जो आयत में यह लगाया है तू इल अल्लाह अल्लाह की तरफ
[9:40]तोबा करो फोन शायद हम इस कल में इसे या आयत के
[9:46]इस टुकड़े से एक इस्तेफ़ादा यूज कर सकते हैं कि तौबा का
[9:47]मानना यह है जहां अल्लाह की तरफ मुतवज्जे होना है अपने गुनाहों
[9:54]को छोड़ देना है तर्क कर देना है मासियत इलाही को तर्क
[9:58]करने के बाद अल्लाह की तरफ़ मुतवज्जेह होना यह तो वह कहलाता
[10:05]है लेकिन तू इलल्लाह से हमारे जहन में एक और माना भी
[10:12]जाता है कि अल्लाह की तरफ पलटना तौबा करना अल्लाह की जाने
[10:15]यानि क्या अल्लाह की तरफ पलट के आ जाना जिस तरीके से
[10:21]एक भटका हुआ आदमी अगर किसी सहरा में किसी जंगल में वह
[10:28]अपने किसी has हदफ के लिए किसी एक मंजिल है मठ भूत
[10:29]की तलाश में निकला था लेकिन उसे कई दिन या कई घंटे
[10:36]चलने के बाद यह एहसास होता है कि मैं गलत रास्ते पर
[10:41]चल निकला अब इसकी जिम्मेदारी क्या है कि जो जंगल में भटक
[10:57]गया है जो किसी बयान और सहरा में अपना रास्ता भूल गया
[11:03]है और काफी दूर निकल गया है तो अब इसकी जिम्मेदारी यह
[11:10]है कि यह इसने जहां से अपना सफर शुरू किया था कोशिश
[11:12]यह करें और यह वापस वहां पर आए यानी उस भटके हुए
[11:18]रास्ते को छोड़कर वापस उस जगह आए कि जहां से इसने अपना
[11:26]रास्ता भटक रहा था और इसने रास्ता अपना गुम कर दिया था
[11:32]अब यह वहां पहुंचने के बाद अब दोबारा से यह सही रास्ते
[11:34]पर चलना शुरू करें सही रास्ते को ढूंढे तलाश करें पैदा करें
[11:40]और उसके पास सही रास्ते पर चलना शुरू करें तो यह जो
[11:43]गलत रास्ते पर निकला था और उसे एहसास हुआ वहां जाकर मैं
[11:49]रास्ता भूल गया हूं और वहां से यह जब दोबारा वापस आता
[11:54]है तो शायद हम यह कह सकते हैं कि इसी वापस आने
[11:59]को सही रास्ते की तरफ और उसी मुद्दे की तरफ के जहां
[12:02]से उसने सफर का आगाज किया था वहां युसरा उस नुस्खे तक
[12:08]पहुंचने का नाम शायद तोबा है इस नेक इंसान गुनहगार मासूमियत कार
[12:17]इंसान ख़ताकार इंसान जो रास्ता भटक चुका है वह एक मंजिल पर
[12:22]पहुंचने के बाद इस बात का एहसास करता है उसे यह महसूस
[12:28]होता है कि मैं रास्ता भटक गया हूं कि मुझे इंसान होना
[12:33]चाहिए था मुझे अल्लाह ने अपना हलीफा बनाकर भेजा था लेकिन अफसोस
[12:37]कि मैं रास्ता भटक गया हूं अब वह वापस आता है और
[12:43]पलटता है वापस लाता है और वापस आने के बाद वहां से
[12:48]अपनी एक नई जिंदगी का आवास करता है और वह नई जिंदगी
[12:50]और वह नया रास्ता जो हकीकत का रास्ता है जो कमाल का
[12:55]रास्ता है वह उस कमाल के रास्ते को तय करना शुरू कर
[13:02]देता है से ज्यादा इसी को तोबा कहा जाता है और परवरदिगार
[13:04]ए आलम ने भी सूरए अनआम के अंदर आयत नंबर 54 में
[13:10]इरशाद फरमाता है परवरदिगार ए आलम के आहूजा बिल्लाहे मिनस यह पानी
[13:15]रजीम अनहुक मन्नुम सुअन अगर तुममें से मैं कोई किसी बुराई का
[13:25]मुर्तकिब हो जाएं किसी ने कोई गुनाह का काम अंजाम दिया किसी
[13:27]सूखे को अंजाम दिया इस वजह से जो हालत की वजह से
[13:33]नादानी की वजह से अगर किसी ने कोई काम अंजाम दिया है
[13:38]ब्राह्मी का और मां वसीयत का या कोई खता अंजाम दी है
[13:45]सुबह मतालबा तो उसके बाद वह तौबा करें अल्लाह की तरफ वापस
[13:48]पलट आय अल्लाह की तरफ़ मुतवज्जेह हो जाए तो फिर उसके बाद
[13:55]जब वापस लगा और अपनी इस्लाह करें तो यकीनन इंसान एक नेक
[14:04]इंसान है और यह इंसान ए कामिल बनने का जो रास्ता है
[14:06]गया उसने अब एक नए सफर का आवास कर दिया है और
[14:11]उस रास्ते पर अपना कदम रखा है और हत्या के अंबिया अलैहीस
[14:18]सलाम अस्सलाम जैसी हस्तियों ने भी परवरदिगार ए आलम की बारगाह में
[14:22]टॉप बाकी है अपनी जो खताएं हैं उन्हें बख्श की तलब की
[14:29]है अलबत्ता अंबिया की सताए और जो हमारी हटाए हैं उनमें जमीन-आसमान
[14:34]का फर्क है अंबिया अलैहीस सलाम तो वस्सलाम या जिस तरीके से
[14:40]हज़रत आदम अलैहिस्सलाम तो सलाम के बारे में क़ुरआने मजीद में आया
[14:45]है कि सूरए बक़रा की आयत नंबर 37 में परवरदिगार विषाक्त फरमाता
[14:49]है कि फतेह लपका दामों में रबी ही कलेमात इन फतेह वाले
[14:55]परवरदिगार ए आलम ने हज़रत आदम को कुछ कली मा तिल का
[15:05]कि कुछ कल मास की तालीम दी तो जरूर कर लें इस
[15:06]बात का इल्म हासिल हुआ हजरत आदम को और अपनी गलती का
[15:12]एहसास हुआ और अपनी ख़ता का एहसास हुआ फतेह व्ााले तो उन्होंने
[15:18]कहा कि तो उन्होंने तौबा की है और परवरदिगार आलम दूसरी आयत
[15:21]मे इरशाद फ़रमाता है कि हमने आदम की तौबा क़ुबूल किया तो
[15:27]हज़रत आदम ने जो तौबा की थी वह यकीनन हमारी तो बस
[15:32]सफर करती है हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को सलाम ने या हज़रत यूनुस
[15:35]अलैहिस्सलाम तो अस्सलाम जब मछली के पेट में जाते हैं और खुदा
[15:40]की बारगाह में दुआ करते हैं ला इलाहा इल्ला अंता शोभन का
[15:47]इन खून तो मिला वाले मीन कोई रब नहीं कोई परवरदिगार नहीं
[15:55]कोई खुदा नहीं सिवाय उस अल्लाह के और वह मजा है इन
[15:57]कंधों में सवाल मीन यह मैं ही हूं कि जो आलमीन में
[16:02]से हूं मैंने अपने नेल्स पर ज़ुल्म किया तो हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम
[16:06]हज़रत आदम अलैहिस्सलाम जो तौबा कर रहे हैं और अपने आपको जालिम
[16:12]कह रहे हैं यह अपने और परवरदिगार के दरमियान जोन चित्तौड़ जो
[16:21]ताल्लुक है उसके हवाले से उसको मध्य नजर रखते हुए अपने मकाम
[16:30]मकान में अभियुक्त और दूसरा मकान उसके मुकाबले मध्य मुकाबिल मकान में
[16:37]रूबी उस मकान में रूबी को देखते हुए उन्हें और अपने आप
[16:40]को मकान में अब तबीयत पर पाते हुए जो उनसे गलती हुई
[16:45]थी जो तरह के अलावा उन्होंने अंजाम दिया था उस स्तर के
[16:52]ओला को मद्देनजर रखते हुए और में रूबी और में अभियुक्त के
[16:55]दरमियान फर्क है उस पर को मध्य नजर रखते हुए और अपने
[17:03]गुणों को देखते हुए उसे अपने स्तर को देखते हुए हैं है
[17:06]तो तौबा कोई ऐसी चीज नहीं है कि इंसान सिर्फ हम इंसानों
[17:11]के लिए हम गुनहगार इंसानों के लिए है और सिर्फ गुनाह आने
[17:14]कबीरा से इंसान तो व करता है इंसान मकरू हाथ से भी
[17:20]तौबा करता है इंसान गुनाहे कबीरा से भी तौबा कर सकता है
[17:25]और इंसान जो बेहतर के ओला है जिस तरीके से अंबिया ने
[17:28]तर्क के ओला को बाद हम भी अंजाम दिया उनसे उन अभिनेताओं
[17:33]की तो लोहा तौबा का जो दरवाजा है परवरदिगार ए आलम ने
[17:40]हर इंसान के लिए खोल रखा है कि जब भी इंसान तौबा
[17:45]करें तो परवरदिगार ए आलम उसकी तौबा क़ुबूल करता है तो यह
[17:49]तो हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तौबा कर सिद्ध करें और इसी लिए
[17:56]परवरदिगार ए आलम ने जहां तौबा का दरवाजा खुला रखा है इसी
[17:59]तरीके से वह अफराद जप है जो तौबा करते हैं परवरदिगार ए
[18:08]आलम उनसे मोहब्बत करता है परवरदिगार ए आलम उन्हें दोस्त रखता है
[18:15]और परवरदिगार ए आलम सूरह बकरा में आयत नंबर 222 में इरशाद
[18:18]फरमाया है इन न वह बहुत तव्वाबीन मेरे परवरदिगार ए आलम जो
[18:28]तव्वाबीन है जो तौबा करने वाले हैं उन्हें दोस्त रखता है उनसे
[18:31]मोहब्बत करता है यह है बेताबी या एक और आयत के अंदर
[18:38]परवरदिगार ए आलम इरशाद फरमाता है सूरह बकरा की फिर आयत नंबर
[18:43]37 है मैं इसमें परवरदिगार इरशाद फरमाता है नुव्वु और रहीम इन
[18:51]हुं तवा रहीम के परवरदिगार ए आलम व है कि जो तौबा
[18:59]क़ुबूल करने वाला है और रहीम भी रहम करने वाला भी तो
[19:05]यह झाल तौबा का दरवाज़ा एक ऐसा दरवाजा है जो इंसान के
[19:12]लिए हमेशा खुला हुआ है तो लहजा इंसान हमेशा इस तरफ और
[19:19]करें तौबा करें तो है और यह दरवाजा ऐसा है कि यह
[19:28]सिर्फ इंसानों के लिए नहीं यह हम पिया के लिए भी खुला
[19:35]हुआ है लेकिन जाने ग्रामीण तौबा के लिए कुछ शरारत है तो
[19:38]बाकी कुबूलियत के लिए कुछ शरारत और शरायत खुद क़ुरआने मजीद की
[19:48]बहुत सारी और बाज आयात से देते वजह होती हैं कि सबसे
[19:51]पहली आयत जो आपके फिर मत में हम तिलावत करना चाहते हैं
[19:57]सुबह शाम रात की आयत नंबर 12 है कि परवरदिगार ए आलम
[20:03]तौबा की कुबूलियत के लिए गया एक शर्त बयान कर रहा है
[20:09]और घ्र है वह है विमान या टक्स वाले इलाहे है मेरे
[20:16]परवरदिगार साथ वर्मा ताऊ बिल्लाहे मिनस से पानी राजीव व तुम तक
[20:24]वैवाहिक तैयार करो फोन इन्नल्लाहा हुआ तब रहीम यदि अल्लाह उन लोगों
[20:33]की तौबा कबूल करता है कि जो तक वे ही रखते हैं
[20:39]जो ख्याल रखते हैं जिनके दिल में खुदा नहीं जिनके दिल में
[20:44]तक नहीं परवरदिगार ए आलम ऐसे लोगों को नहीं करता है कि
[20:52]इंसान के पास होना चाहिए होना चाहिए परवरदिगार उस इंसान की को
[20:57]कुबूल है है और दूसरी एक और तो बाकी कुबूलियत के लिए
[21:17]एक और अहम मुद्दा जो क़ुरआने मजीद ने बयान किया सूर्य नमस्कार
[21:24]की आयत नंबर 3 है कि फांस सबै हम द्रौपदी का वस्त्र
[21:32]और फिर इन हुकाना तवा तुम अल्लाह की तस्वीर करो फस अब
[21:37]हम द्रव्य का अल्लाह की तस्वीर और उसकी हम करो और साथ
[21:46]स्पेसिफिक करो न रुकना तवा के वह जाता है कि जो तौबा
[21:51]को कबूल करती तो इंसान हमेशा कि हम करें कि तस्वीर करें
[22:00]और साथ में स्थिर करें जहां तक का होना जरूरी है वहां
[22:05]या अल्लाह का जिक्र अल्लाह की हम्द ओ सना उसकी तकदीर और
[22:12]तस्वीर और में इंसान हमेशा जब भी मौका मिले इंसान हो या
[22:22]खुदा से रा दाणा सेओ रा दाणा सेओ रा दाणा हो हुआ
[22:26]था और साथ में इंसान इस तरफ कार्यकर्ता रहे इन हुकाना तवा
[22:33]तो यह दो अहम आयात जो यह बता रहे हैं कि इंसान
[22:39]अगर यह चाहता है कि उसकी तौबा कुबूलियत कशप हासिल कर ले
[22:43]तो उसे चाहिए कि वह शहर खुदा रखें और यादें खुदा से
[22:49]कभी हासिल ना हो कि इस प्रकार करें है और इस तरह
[22:59]के लिए एक हदीस जो मुझे हजरत इमाम जाफर सादिक अलैहिस्सलाम तो
[23:05]वसल्लम से मिली कि वाकई ने एक अजीबोगरीब और इंतिहाई अहम हदीस
[23:11]है कि किमाम फरमाते हैं कि कि कुन लाइन इन थे बाकी
[23:21]अत उन हर आंख कयामत के दिन रोएगी कुन लाइन इन बाकी
[23:27]अतुल्य उबल हर आंख कयामत के दिन रहेगी इन लॉ सलाह सिवाय
[23:38]तीन-तीन आंखें ऐसी होंगी जो कयामत के दिन नहीं करेंगी लेकिन हर
[23:45]आंख रो रही होगी और जो क़यामत के दिन नहीं रहेंगी कयामत
[23:51]के दिन इंसान की आंख का रोना इंसान करो ना की वजह
[24:00]से यह जो उसे उसके शामिल होने वाला है उसकी वजह से
[24:05]अपने करतूतों की वजह से जो इंसान दुनिया में अंजाम देता था
[24:12]जो यह इंसान ने अंजाम दिया है उसके नतीजे में जो है
[24:19]कि उसके शामिल हाल होगा कयामत के दिन उसकी वजह से हर
[24:22]आंख रोएगी चुके इंसान जब वहां जहन्नम को और जहन्नम को अपनी
[24:29]आंखों के जरिए से देख रहा होगा और मुशाहिदा कर रहा होगा
[24:34]और अपना अंजाम देख रहा होगा का यकीन वहां और रोने के
[24:40]अलावा गिरिवर-धारी के साथ और कोई चारा नहीं रहेगा तो यह इमाम
[24:45]फरमाते हैं कि कुन लाइन इन बाकी अतुल ह्यूमन हम हर आंख
[24:55]रोएगी इलावा सलाह सिवाय तीन आंखों के कौन-कौन सी इन कि वह
[25:04]आंख जो वह जतन म्हारी मिला कि वह आंख के जिसने हराम
[25:13]से चश्म पोशी की होगी मैं हिंदी सीख या ऐसा इंसान के
[25:22]जिसने हराम से अपनी आंखों को बंद कर लिया होगा जो म्हारे
[25:25]मिला है जिन चीजों को अल्लाह ने हराम करार दिया है उनसे
[25:31]इंसान ने अपनी आंखों को झुका लिया होगा उनसे सबसे नजर किया
[25:37]होगा अगर तो वहां खयानत के दिन रोएगी अब वहां के जरिए
[25:43]इंसान चाहे वह अ करें इंच है वह गुना के जरिए करने
[25:50]वाले गुना हो जिनसे इंसान ने अपने आप को रोका हो एक
[25:56]नाम मैहरम औरत एक या एक नाम है हर मर्द किसी औरत
[25:57]के लिए या किसी मर्द के लिए कोई ना मैहरम औरत अगर
[26:01]सामने से आ रही है या कोई मर्द आ रहा है और
[26:06]यह औरत यह अमरुद तो अपनी आंखों को नीचा करले यह खराब
[26:14]है है तो यह आंख कयामत के दिन नहीं रहेगी या हराम
[26:17]माल पड़ा हुआ है एक अमानत है जो किसी ने रखवाई है
[26:22]अब इंसान का दिल यह जा रहा है कि उस अमानत में
[26:26]खयानत करें लेकिन इंसान अपनी दिल की जो आंख है अपने दिल
[26:33]को अपने न उसको कंट्रोल कर लें यानि सर फिर नजर कर
[26:40]लें अपनी आंखों को नीचा करले अ कि अमानत में खयानत करने
[26:46]से चोरी करने के लिए एक हराम काम है चोरी करने के
[26:52]लिए फर्ज करें कि तमाम चीज़ें आमादा है और मईया है कोई
[26:54]रोकने वाला नहीं कोई टोकने वाला नहीं लेकिन इंसान अपनी आंखें बंद
[27:00]कर लें क्योंकि यह भी हमें सिलाई म्हारे मिला हम इसे एक
[27:03]यह भी है और इस तरह की बहुत सारी मिसालें जो आप
[27:07]बेहतर जानते हैं इंसान की जिंदगी में कितने मावा कैसे आते हैं
[27:13]कि इंसान गुनाह करने के लिए बिल्कुल आमादा होता है तैयार होता
[27:16]है लेकिन एक लम्हे के लिए इंसान याद है खुदा से चुपके
[27:19]फील हो गया है लिहाजा गुनाह करने के लिए तैयार होता है
[27:22]लेकिन एक लम्हे के लिए अगर वह यादव खुदा की तरफ पलट
[27:28]आए और परवरदिगार का जिक्र करें तस्वीर करें ऑफ द उसके दिल
[27:34]में आ जाए तो यकीनन वह चश्म पोशी कर लेगा तो यह
[27:35]वहां है कि जो कयामत के दिन नहीं रहेगी और दूसरी आंख
[27:40]व है कि आई नू व्रत पाथ अल्लाह वह आंख कयामत के
[27:48]दिन नहीं रोएगी है और कयामत के दिन वह आंख खुश होगी
[27:53]पूर्णम नहीं होगी कौन-कौन सी आंख है कि जो राहे ख़ुदा में
[28:01]इताअत खुदा में पूरी रात जागी होगी सैरत ज़ला जिसने अल्लाह की
[28:12]इताअत में इस आंवले में जाकर पूरी रात गुजारी हो वहां खयानत
[28:16]के दिन क्रिया नहीं कर सकती वहां नहीं रह सकती हैं है
[28:20]और आखिरी जुमला हदीस का कि हमारे और आपके छोटे विमान फरमाते
[28:31]हैं वह लाइन उक्त फीडर फ्लू मंहत वह आंख के जो रात
[28:36]के अंधेरे में रोई हो अल्लाह के हुक्म से है जहां अल्लाह
[28:44]की इताअत में पूरी रात उस आंख ने जागकर गुजारी है वह
[28:50]शहर खुदा में उस अ खगरिया भी किया है पूरी रात वो
[28:55]आंख रोती रही है कौन मोमिन है वह कौन सा मोमिन है
[29:01]कि जो अल्लाह के हुक्म से पूरी रात रोता रहे और इसकी
[29:08]मिसालें हमें सिर्फ और सिर्फ आई महिला बटालियन में सलातो सलाम में
[29:10]अंबिया के बाद अगर हमें मसाले नजर आती है तो अहलेबेत अलेहिमुस्सलाम
[29:16]तो वह सलाम में अली की जात वो जात है कि जो
[29:23]पूरी रात अल्लाह की इबादत में गुजार थी इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम
[29:26]तो वस्सलाम वह शख्सियत है कि जब अल्लाह की इबादत के लिए
[29:36]मेहरा वे भारत में खड़े होते थे तो रिवायत में आया है
[29:39]और तारीख में तारीख ने इसका जिक्र किया है कि उनका बदन
[29:44]है मुबारक तूफान में घिरे हुए किसी तरह की तरह है वह
[29:49]रास्ता था और झूलता था कि यह अल्लाह की के लिए ताकत
[29:57]में और हकीकत इलाही में फैला ही में पूरी रात जागकर और
[30:04]गिरिया करते हुए इबादत करने का एक बेहतरीन नुस्खे है तो परवरदिगार
[30:09]ए आलम की बारगाह में हम दुआ करते हैं कि परवरदिगार ए
[30:14]आलम हमें तौबा करने की तौफीक अता फरमाए और हमें इस तरफ
[30:17]और करने की तौफीक अता फरमाए इसलिए कि इस तरफ और है
[30:24]जो इंसान को राहे इलाही पर गांव भोजन करने के लिए पहला
[30:27]Step है और पहला कदम है और इसके बाद इंसान हमेशा मुतवज्जे
[30:34]रहे और विशाल अगर मौका मिला तो अगली नस्ल में हम तौबा
[30:41]के जो मराहिल है उनके बारे में मुक्तसर जिक्र करेंगे कि इंसान
[30:45]कितने मराहिल में तो ब कर सकता है क्या यही जो हम
[30:50]आम तौर पर तौबा करते हैं अपने कानों को पकड़कर कहते हैं
[30:52]अशरफ-उल-हक भी वास्तु भी लड़की या तौबा तौबा करते हैं यह तो
[30:58]वह काफी है कि इस तौबा को तवा कहा जाता है या
[31:03]नहीं तो बाबा के कुछ मराहिल है तो बाकी कुछ शरारत है
[31:05]इंसान किस तरीके से अल्लाह की बारगाह में मुतवज्जे हो और तवा
[31:10]करें इंशाल्लाह इसके बारे में हुए दक्षेस में आप से शुरू करेंगे
[31:16]उस वक्त तक के लिए हमें इजाजत दीजिए फिर अ क्या हुआ
[31:23]अजय को शो मोर कर दो
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