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Why there was No Celebration this Eid for shia muslims, Shocking public interviews | Eid Voxpop
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26/03/24
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Why there was No Celebration this Eid for shia muslims, Shocking public interviews | Eid Voxpop This Eid felt different for many Shia Muslims. In this emotional public interview, people share why there was no celebration and how grief shaped their Eid this year. Real voices, real emotions, and a side of Eid rarely seen. Watch till the end to understand the feelings behind this silent Eid. Eid 2026, Shia Muslims, Eid no celebration, emotional Eid, public interview Eid, Shia community reactions, Eid in mourning, why no Eid celebration, Muslim interview, Eid reactions 2026 ayatollah khamenei, iran war, imam khamenei, iran, new rehbar
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Transcript
[0:00]हम ईद नहीं मना सकते। हमारे दिलों में वह खुशी ही नहीं
[0:02]है जो कि मतलब ईद पे खुशी होती है। हमने रहबर को
[0:05]खोया है। हम क्या ही ईद मनाएं। जब वह कहता था ईद
[0:11]शुमा मुबारक। हमारे क्या कहूंगा मैं मुझे क्या आज की युद्ध जो
[0:16]है जैसे कर्बला की मंजिल है वैसे ही हमारे घरों में रोने
[0:20]की आवाज है। किसी बच्चे ने आज ईद ही नहीं मांगी। वो
[0:22]खुश ही नहीं मानी। तीन साल के बच्चे, चार साल के बच्चे
[0:27]वो शहीद हो रहे हैं। हम कैसे ईद मना सकते हैं?
[0:28]हम हमारी खुशी ही रहबर थी। जब हमारा रहबर ही नहीं आ
[0:32]रहा। हमारी खुशी ही नहीं रही तो हम कौन सी खुशी मनाएंगे?
[0:34]लेकिन हम पीछे हटने वाले नहीं है। हम इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की
[0:38]कौम है। इसी तरह हम भी अपना सब कुछ कुर्बान करेंगे। इजा
[0:42]नसरुल्लाह वफत और हम बिल्कुल फतह के करीब हैं। ये दुनिया ना
[0:47]भूलेगी शजात तेरी नायब इमाम अली खामनाई। सुनाएंगे किस्से हम नस्लों को
[0:52]अपनी गैरत तेरी। ऐ अली खौमनाई दी अपनी जिंदगी फलस्ती के लिए
[0:59]गाजा के लिए या अक्सा के लिए हो जिंदा मुस्तबा की शक्ल
[1:02]में अलमदार मेहंदी अली ख्वा मनाई अस्सलाम वालेकुम आज है 21 मार्च
[1:08]यानी कि ईद उलफितर का दिन और हम आए हैं अभी बड़गांव
[1:10]और यहां पे लोगों का कहना है कि बिल्कुल सादगी से ईद
[1:15]मनाएंगे बिल्कुल जो हमारे रहबर गुजर गए शहीद हुए उनकी याद में
[1:17]आज बिल्कुल सिंपलीसिटी के साथ और जो दुनियावी ईद का तरीका होता
[1:22]है उससे हटके ईद करेंगे देखेंगे लोगों का क्या कहना है और
[1:25]क्यों है ऐसी मेंटालिटी लोगों में कि आज की ईद को सादगी
[1:29]से मनाएंगे। तो चलते हैं पब्लिक में सीधा ईद नमाज के बाद
[1:34]करते हैं उनसे सवालात कि क्यों आज का दिन इतना गमगीन है।
[1:36]आपने आज की ईद कैसे मनाई?
[1:38]आज की ईद बिल्कुल हमें बिल्कुल भी खुशी नहीं थी क्योंकि हाल
[1:44]ही में हमारे रहबर मुअजम शहीद हुए तो इसकी वजह से हम
[1:49]ईद हमने वैसे नहीं मनाई जैसे मनाई जाती थी। तो आज की
[1:51]ईद बिल्कुल भी हम बिल्कुल हमने सादगी से मनाई और इस ईद
[1:57]में खुशी से ज्यादा हमें गम था। परवरदिगार आलम ने कुरान में
[2:04]फरमाया है सूर आल इमरान आयत नंबर 169 बिस्मिल्लाह रहमानहीम व्लाह यानी
[2:15]जो लोग खुदा की राह में शहीद होते हैं उन्हें हरगिज़ मुर्दा
[2:19]ना समझो बल्कि वो खुदा के यहां अपना रिस्क हासिल करते हैं।
[2:22]सो इसराइल अमेरिका को क्या लगता है कि उन्होंने कोई गेम जीती?
[2:29]नहीं क्योंकि जो हमारी जो शहादत है वो हमारी मिराज है। वी
[2:32]हैव रिसीव्ड दिस मार्ट टर्नर फ्रॉम इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम फ्रॉम आशूरा अलैहिस्सलाम।
[2:38]सो वी विल रिमेन स्टेट फ़ास्ट ऑन दिस पाथ। एस लोंग एस
[2:44]वी आर अलाइव। एस लोंग एस आवर जनरेशंस कंटिन्यू। वी विल रिमेन
[2:47]स्टेट फ़ास्ट ऑन दिस पाथ। आज की हमारी जो ईद है वो
[2:51]अच्छी नहीं गुजरी क्योंकि हमारा दिल रंजीदा है। हमारे दिल जले हुए
[2:54]हैं। क्योंकि जो वक्त का जालिम है अमेरिका और इजराइल वो हमारे
[2:59]जो है मुसलमानों पे मज़ालिम डाल रहे हैं। इसी वजह से हमने
[3:02]ईद नहीं गुजारी। ये कर्बला का पैगाम है जो आलम रहबर मोजिम
[3:08]ने उठाई थी। ये वही आलम वो जो आपने सुना होगा बड़े
[3:13]एक जो है स्कॉलर अहले सुन्नत के डॉक्टर असरार कहते हैं कि
[3:16]खुरासान से एक लश्कर निकलेगा। वही वो लश्कर है रहबर के बगैर
[3:20]मुझे लगता है कोई ईद नहीं है क्योंकि हमारी ईद ही रहबरी
[3:22]थी उसकी वो जब वो कहता था ईद शुमा मुबारक हमारे क्या
[3:28]कहूंगा मैं मुझे अल्फाज ही नहीं है मैं उसके बारे में क्या
[3:34]कहूं अल्लाह की कसम ऐसा लग रहा है कि जैसे 10 मुहर्रम
[3:36]सुबह हम निकलते हैं जुलूस की सूरत में वैसे हमारा वही फील
[3:42]हो रहा है हम ईद नमाज पढ़ने आए हैं बट दिल ही
[3:46]नहीं करता हम बिल्कुल कोई बात नहीं हम सब ये इस दर्द
[3:51]के साथ हैं। इस फीलिंग्स के साथ हैं। हमने आज ईद बहुत
[3:54]ही सादा तरीके से मनाई क्योंकि जो हमारे शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह
[3:57]सैयद अली हुसैन ख्वामिनाई थे वो शहीद हुए हैं। आज की ईद
[4:02]जो है जैसे कर्बला की मंजिल है ऐसे हमारे घरों में रोने
[4:06]की आवाज थे। की मांओं बहनों की रोने की आवाजें थी। बच्चों
[4:08]के रोने की आवाज किसी बच्चे ने आज ईद ही नहीं मांगी।
[4:11]वो खुशी नहीं मांगी। मीट नहीं पकाई हमने घर में। अल्लाह पाक
[4:16]के सामने हमें घर में आज दले वाले पकाए बस ईद नहीं
[4:17]ईद नहीं पकाए कुछ नहीं पकाए आज रमजान और ईद भी और
[4:21]नौ रोज भी है आज दो दो बड़े दिन हमारे लिए दो
[4:25]दो ईद नहीं मान देखिए आज ईद तो है लेकिन हमारे लिए
[4:30]एक बहुत ही बहुत ही दुख भरी खबर है कि जो कि
[4:31]हमने अपने लीडर आयतुल्लाह सैयद अली खामनाई को खो दिया सो लेकिन
[4:36]मैं एक मैसेज देना चाहती हूं उनको मतलब खासकर अमेरिका और इसराइल
[4:39]उन्हें क्या लगता है वो वो रहबर को मारेंगे फिर देन दे
[4:43]विन द बैटल नो आज से 1400 साल हिजरी में भी यही
[4:47]साबित हुआ कि उस टाइम भी यज़द यज़द यजीद को आज भी
[4:51]पूरी दुनिया लानत करती है और अमेरिका तो अमेरिका तो ऑलवेज अमेरिका
[4:54]इसराइल उनको भी आज पूरी दुनिया ही लानत करती है। दे थिंक
[4:56]दे विन द बैटल बट दे लूज़ द बैटल। रहबर के बगैर
[5:01]ईद बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी क्योंकि रहबर की जुदाई का जो
[5:06]गम है ये बहुत ही बड़ा गम है। जिसका मतलब जिसका कोई
[5:08]भी चीज जो है उसका मदावा नहीं कर सकती। जुल्म बेशक मज़द
[5:12]हो जाए। जुल्म बेशक मज़द हो जाए। बच्चा-बच्चा शहीद हो जाए। हम
[5:19]हुसैनी है हुसैनी रहेंगे। चाहे पूरी दुनिया यज़ीद हो जाए। जैसे हमारा
[5:22]ये रमजान था। एक तो इमाम अली की शहादत थी। उसके बाद
[5:26]रहबर शहीद हुए। उसके बाद हमारे बड़े-बड़े लीडर जैसे आगादारी जानी और
[5:29]भी बहुत सारी हस्तियां शहीद हुई। कैसा गुजरा अब ये वाला रमजान?
[5:32]मतलब जिस तरह रमजान में खुशियां होती थी, बरकत का महीना होता
[5:37]था। मतलब कुछ भी कोई भी वैसी फील ही नहीं है। जैसे
[5:41]हम हम पे आज ईद है लाइक आशुरा लगता है। सो ये
[5:44]मतलब मैं मैं कहती हूं कि ये माह रमजान जो है बहुत
[5:46]ही ज्यादा मतलब दुख के साथ हमने गुजारा। बिल्कुल भी 10 रमजान
[5:51]से फिलहाल आईसी है। 10 माहे रमजान से आईसी है। मतलब हमने
[5:55]रहबर को खोया है। हम क्या ही ईद मनाएं?
[5:55]ये रमजान गम और दुखों से भरा हुआ था। क्योंकि इसमें इतनी
[6:01]ज्यादा शहादतें हुई जिसकी वजह से इस्लाम को बहुत नुकसान हुआ। रमजान
[6:05]बहुत अच्छा महीना है, बरकतों वाला महीना है। मगर इसमें हमने बहुत
[6:11]सारे जुल्मात देखे कि हमारे मैंने आपको बोला कि हमारे सैयद अली
[6:14]ख्वामिनाई शहीद हुए और ईरान पे भी बहुत सारे जुल्म हो रहे
[6:19]हैं। ईरान ही नहीं फस्तीन पे जुल्म हो रहे हैं। वहां पे
[6:20]छोटे-छोटे बच्चे शहीद हो रहे हैं। तो हमारा माह रमजान मतलब कि
[6:26]अच्छा ही गुजरा और हमें फक्र है कि हमारे कौम में हमारे
[6:28]छोटे-छोटे भाई हमारी छोटी-छोटी बहनें शहीद हो रही हैं। ये हमारे लिए
[6:34]फक्र की बात है। उन यजीदियों को क्या पता कि शहादत एक
[6:36]फक्र की बात है। शहादत शोदाओं में एक दर्ज है। जैसे कि
[6:41]इमाम हुसैन अल सलाम ने शहादत पाई। हजरत अब्बास अल सलाम ने
[6:44]शहादत पाई। वैसे ही हमारे जो ये मुसलमान भाई है वो भी
[6:49]शहादत पा रहे हैं। जैसे मतलब आपको पता है कि 21 रमजान
[6:54]इमाम अली अली सलाम की शहादत है। पहले हमारे सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह
[6:57]सैयद अली खामनाई शहीद हो गए। हम इंतजार करते हैं कि रमजान
[7:00]कब आएगा?
[7:01]जब हमने देखा कि उनकी शहादत हुई तो हमारे घरों में हमारे
[7:06]दिलों में ऐसा गम हुआ वैसा हमने कभी देखा ही नहीं था।
[7:08]बहुत ज्यादा अफसरदी की है हमारे दिलों में। हम बहुत ज्यादा मायूस
[7:13]है। लेकिन जो मतलब इसराइल और अमेरिका है उनकी ये भूल है
[7:15]कि वो ईरान में रिजीम चेंज करेंगे और मतलब वो हमारे बहुत
[7:19]सारे लीडर्स को शहीद करेंगे। उनको लगता है कि ये चुप बैठेंगे।
[7:22]लेकिन हक हमेशा हक ही है। जा हकल बाततिल इनल बातिला कानका
[7:27]बेशक बाततिल मिट गया और हक आ गया। मिटने ही वाला है।
[7:31]बाततिल मिटने ही वाला है। हम इसराइल को तबाह करके ही रहेंगे
[7:33]और फलस्तीन को आजाद करेंगे। इमाम हुसैल सलाम को कहा गया कि
[7:37]यज़द ने मेरी बयत करो। उसने कहा मुझ जैसा तुझ जैसे की
[7:39]बयत नहीं करेगा। ताम यानी तब तो हुसैन था लेकिन आज कौन
[7:43]है?
[7:44]आज रहबर मोजिम ने वही आलम उठाई है और उसने भी कहा
[7:47]कि मैं आपके सामने बयत नहीं करूंगा। ये जो रमजान है ये
[7:49]पूरी तरह से हमें सौग में गुजरा क्योंकि हमारे मैंने अभी बताया
[7:54]कि हमारा जो है घर में खासकर मतलब तमाम मुस्लिम ये अहले
[7:58]मुसलमान जो है उन्होंने अच्छे से ईद नहीं मनाई और इवन रमजान
[8:02]भी हमें इस अच्छे से नहीं गुजरा जिस तरह गुजरा था। ये
[8:05]किसके लिए लड़ रहा था?
[8:07]फ़स्तीन के लिए जो हमारे सुन्नी भाई है उसमें कोई भी देखो
[8:11]आप शिया उसमें कोई भी श नहीं है। फ़स्तीन में कोई भी
[8:13]श्या नहीं है। लेकिन क्यों लड़ रहे हैं?
[8:16]क्योंकि हमने कर्बला से दरस लिया है। हमने कर्बला से यह सीखा
[8:21]है कि हमने अगर कोई भी मजलूम हो, हमें यह नहीं देखना
[8:26]है कि ये शिया है, ये हिंदू है, ये सिख है, ये
[8:28]ईसाई है। बल्कि हमें ये देखना है कि ये मजलूम है। तो
[8:32]जैसे हम शॉपिंग करते थे, खुशियां बांटते थे, ईदी बांटते थे, इतना
[8:37]सारा खर्चा करते थे। आपने इस साल वैसे किया?
[8:38]नहीं। इसका क्या मेन रीज़न है?
[8:42]इसका मेन रीजन यह है कि अभी आप देखिए कि ईरान पे
[8:46]जुल्म हो रहे हैं। वहां पे छोटे-छोटे बच्चे शहीद हो रहे हैं।
[8:48]तीन साल के बच्चे, चार साल के बच्चे वो शहीद हो रहे
[8:53]हैं। हम कैसे ईद मना सकते हैं?
[8:54]वो शिया हो, वो सनी हो, आखिरकार वो हमारे मुसलमान भाई हैं।
[8:59]इसलिए हम ईद नहीं मना सकते। और हमारे आयतुल्लाह सैयद अली हुसैन
[9:02]ख्वामिनाई शहीद हुए हैं। अली लारानी शहीद हुए। हम कैसे ईद मनाए?
[9:05]नहीं इस साल नहीं हुआ क्योंकि हमारे रहबर जो है हमारी ईद
[9:09]तो उनसे ही थी ना लेकिन वो हमारे बीच नहीं रहे। हम
[9:12]ईद बिल्कुल भी नहीं मना सकते। आज किसी बच्चे ने हमको नहीं
[9:15]मांगी ना हमको दिया ना हमने कुछ ना कोई एक पैसा भी
[9:20]नहीं उन्होंने मांगी ना मांगी ना हमने दिया घर में हमारे घर
[9:25]में आज बिल्कुल रोने की आवाज है हर एक घर में आज
[9:26]आज रोने की आवाज है मां बहने बच्चे रोते हैं सिर्फ जो
[9:30]अभी बाकी मालिक हैं अरब कंट्रीज है अभी जैसे वो ईद मना
[9:35]रहे हैं जैसे उन्होंने कल ईद मनाई हमने देखा कितनी खुशियां थी
[9:39]उनमें तो उनके बारे में कुछ बताएंगे जी हां बिल्कुल उनको लग
[9:42]रहा है कि शिया शिया झुकने वाले हैं ना शिया कभी झुकने
[9:44]वाले थे ना है उनको ये गलतफहमी है कि शिया झुकने वाले
[9:48]हैं शिया कभी झुकने वाले नहीं है वो लोग जो ये ट्रंप
[9:52]और नितन याू है उनके सामने झुकते हैं मगर हम वो नहीं
[9:57]है हम हुसैनी है हुसैन जिंदाबाद था है और रहेगा हमेशा हुसैन
[9:59]जिंदाबाद है और हम वो नहीं है कि हम यजीद के सामने
[10:05]झुकेंगे हम अपना सर देंगे हम अपने छोटे-छोटे जो भाई बहन है
[10:07]वो देंगे हम अपने घर वाले इस इस्लाम पे फिदा करेंगे मगर
[10:11]हम यजीद के सामने नहीं झुकेंगे। ये सिर्फ ईरान की बात नहीं
[10:17]है। ये मजलूम के हक के हक के के लिए बात करनी
[10:21]है। फिलस्तीन में जो इनोसेंट किलिंग्स हुई वहां पे कौन थे?
[10:25]देयर वर ओनली आई थिंक 99% देयर आर सुनीज़ बट हु टूक
[10:32]देयर स्टैंड?
[10:31]ईरान बट इट्स आई थिंक उनके लिए शेम है। वेदर दे विल
[10:36]बी टर्की है, सऊदी अरबिया है। वेयर आर दे नाउ?
[10:40]अरब के लोग हैं वो खुप है नींद में है वो जब
[10:44]वो बेदार हो जाएंगे तब तक तमाम दुनिया खत्म हो जाएगी अजीम
[10:47]हस्ती है उसने कहा था ये मुसलमान पड़ गए सजदों में जब
[10:52]वक्त कयाम आया ये मुसलमान अल्लाहू अल्लाहू कर रहे हैं उनको नहीं
[10:57]पता कि इस अल्लाह अल्लाहू से और इस जो है क्या कहते
[10:58]हैं नमाज से उनको जन्नत नहीं मिलेगी क्योंकि वक्त के मजलूम को
[11:04]ललकारना सबसे बड़ी बात है जो कि सिर्फ एक वाहिद कौम है
[11:05]वो है ईरान का कौम ये आपको पता होगा इस वक्त के
[11:09]दौर दौर में मुसलमानों में यूनिटी इत्तहाद कितना जरूरी है और कैसे
[11:12]इसको मजबूत बनाएंगे सबसे अहम और मौजू है जो आज देखा जाए
[11:21]वो वाहदत है इत्तहाद यानी इन तमाम मसाइल को मद्देनजर रखते हुए
[11:23]अगर हमें देखना है कि इसराइल कैसे नाबूद हो अमेरिका कैसे कमजोर
[11:26]हो तो इसमें सबसे बड़ा रोल मुसलमानों का है कि आपस में
[11:33]वहादत इत्तेहाद मुताहिद होकर दुश्मनों को पहचाने दुश्मनों के चालों कुरान ने
[11:37]वाज़ किया दुश्मन की चाले क्या है दुश्मनों की एक चाल खुसन
[11:42]यहूदियत इजराइल की कि मुसलमानों को डिवाइड करें। मुसलमानों को एक दूसरे
[11:46]के साथ लड़ाए। हां इस टाइम मैं कहूंगा जितने दिन के लिए
[11:53]एक रोशनी जरूरी है उतनी उतनी हमें मुस्लिम उम्मते मुस्लिम को इतिहास
[11:56]जरूरी है। बट आप देख लीजिए सऊदी अरब का हमें सऊदी अरब
[12:02]से कोई भी मसला नहीं है। वहां वो शहर है नबी पाक
[12:04]सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमारे चश्मे उस पर कुर्बान बट हम हमें उनके
[12:11]शेखों से मसला है जो अमेरिका और इसराइल के पेरू के तले
[12:13]झुके हैं। अभी तमाम मुसलमान इकट्ठे हो चुके हैं रहबर मुजिम की
[12:19]शहादत के बाद। लेकिन यह जो हुकूमतें हैं, हुकूमतें इसलिए मतलब बिके
[12:22]हुए हैं रीजन यह है वजूहात ये है कि उनको पैसे मिल
[12:26]रहे हैं। शिया सुन्नी इत्तहाद अभी कितना जरूरी है। जरूरी है। हर
[12:29]लम्हे में जरूरी है। ये हर लम्हे में इमाम खली रजाना ताला
[12:33]की देन है। उनकी कहावत है ये। ईरान को अभी इतना सताया
[12:38]गया। शहादतें देनी पड़ी। एक तो लीडर गए। फिर उनके जो साथी
[12:42]थे उनको भी जाना पड़ा। तो आपको फिर भी लगता है ईरान
[12:45]की जीत होगी?
[12:44]हां इंशाल्लाह जीत जो है हमेशा हक की होगी क्योंकि हम हमें
[12:50]पता है कर्बला में भी इमाम हुसैन अल सलाम के साथ सिर्फ
[12:54]72 अफराद थे जिन्होंने हक की जंग लड़ी और यज़ीद का लश्कर
[12:56]जो उसमें हजारों के अफराद शामिल थे। लेकिन फिर भी जीत जो
[13:01]है वो इमाम हुसैन अल सलाम की की ही हुई। ऑब्वियसली ये
[13:06]कुरान में लिखा गया है कि जब भी जब भी बैटल में
[13:07]हमेशा और हमेशा यज़द है हमेशा ही लेकिन हमेशा हर हमेशा उन
[13:12]पे लानत ही उतरेगी इजा नसरुल्लाह व फत और हम बिल्कुल फतह
[13:15]के करीब हैं। आगे इंशाल्लाह हमारी फतह होगी जल्दी ही वो दिन
[13:19]आएगा। अह मैं इस बात से इत्तफाक करता हूं क्योंकि हमने जो
[13:24]ये आलम उठाई है कर्बला की आलम इमाम हुसैन अलमला की आलम
[13:26]हजरत अब्बास अल सलातो सलाम की आलम आप जल्दी देखेंगे इंशाल्लाह जरूर
[13:31]ये हम फतायाब होंगे प्रोवाइड करेंगे इंशाल्लाह इंशाल्लाह इंशाल्लाह जरूर इसराइल नेस्तनाबूद
[13:36]हो जाएगा अमेरिका ने फिर भी यकीन है ईरान जीतेगा इंशाल्लाह जरूर
[13:40]जी जिनके साथ अल्लाह की ताकत है उनको कोई नहीं हरा सकता
[13:44]क्योंकि हम बेशक अल्लाह की तरफ से मदद आएगी और हम इसराइल
[13:47]को नाबूद करके रहेंगे दुश्मन के लिए एक मैसेज दुश्मन के लिए
[13:53]यही मैसेज रहेगी कि नो मैटर अब हमारे कितने भी लीडर्स शहीद
[14:00]करें। हमारा जो मकसद है वो यही है कि हम हमेशा दीन
[14:02]इस्लाम के लिए अपनी जान कुर्बान करेंगे और इस दुनिया में जो
[14:07]है इस्लामी निजाम कायम करेंगे। जुल्म और जालिम के खिलाफ हम हमेशा
[14:11]आवाज उठाएंगे और उसके खिलाफ हमेशा खड़े रहेंगे। चाहे हमारी कितनी नस्लें
[14:15]कुर्बान हो जाए। चाहे कितनी भी जनरेशंस आए वो शहीद हो जाए।
[14:20]दुश्मन के लिए क्या बोलेंगे?
[14:20]ये उनकी आखिरी बस। ये कयामत की अलामत है। आपने देखा खुद
[14:25]ये कुरान में भी लिखा है। हर जगह लिखा है कि जब
[14:26]कयामत आएगी आखिरी जुमा होगा। माहे रमजान का जो जुम्मा होगा वो
[14:32]आखिरी होगा। तो दिख रहा है और हर तरफ काले परचम होंगे
[14:33]गम होगा। तो ये उनके लिए आखरी है। तो जो हमारे नए
[14:37]लीडर हैं उनसे क्या उम्मीद है?
[14:38]इंशाल्लाह इंशाल्लाह वो उससे भी बेहतर है। जैसे कि हम ये नहीं
[14:42]कह सकते कि रहबर हमारे शहीद हो गए। अब कुछ नहीं है।
[14:46]जैसे इमाम अली थे पहले। उसके बाद इमाम हसन इमाम हुसैन जैसे
[14:48]रहा वैसे ही इंशाल्लाह जरूर उम्मीद रखनी है सब ठीक हो जाएगा
[14:54]इंशाल्लाह अमेरिका और इसराइल नेस्तनाबूद हो जाएगा एक दिन उनके लिए बस
[14:57]यही कहूंगा मैं ए इसराइल हम डरने वाले नहीं है ऐ अमेरिका
[15:02]हम डरने वाले नहीं है ना हम झुकने वाले हैं ना हम
[15:08]हटने वाले हैं ना ही हम अपने सर आपके पैरों के तले
[15:09]झुकने झुकाएंगे हम कभी नहीं झुकाएंगे क्योंकि हम हुसैन अली सलाम के
[15:15]मानने वाले हैं हम शेर खुदा मौला अली सलाम के मानने वाले
[15:18]हैं। उनको लग रहा है शिया चुकने वाले हैं। हम हुसैनी ही
[15:20]थे। हुसैनी है और हमेशा हुसैनी ही रहेंगे। शेम ऑन यू। आपको
[15:24]लगता है कि आपने पता नहीं कौन सा बड़ा कारनामा कर दिया।
[15:27]बट नो यू लॉस्ट द बैटल। और मैं एक बात कहना चाहती
[15:32]हूं कि ये दुनिया ना भूलेगी शजात तेरी नायब इमाम अली खामनाई।
[15:35]सुनाएंगे किस्से हम नस्लों को अपनी गैरत तेरी। ऐ अली खामनाई। दी
[15:44]अपनी जिंदगी फलस्ती के लिए गाजा के लिए या अक्सा के लिए
[15:47]हो जिंदा मुस्तबा की शक्ल में अलमदार महदी अली खामिनाई लबक या
[15:50]ख्वामिनाई लबक या हुसैन बाकी व सलाम तो ये थी हमारी आज
[15:55]की पहचान कैसे हमने आज ईद के मौके पर भी रहबर की
[15:59]शहादत को नहीं भुलाया ऐसे ही जो भी हमारे दीन में कुर्बानी
[16:01]देता है उनकी शहादत को हम कभी नहीं भूलते हैं और हमने
[16:05]कर्बला के दर्स को भी जिंदा रखा उसको ऐसे ही आगे ले
[16:09]जाएंगे इंशाल्लाह बाकी आप कमेंट्स में बताएं आपको क्या पसंद आता आपको
[16:12]क्या पार्ट वीडियो का अच्छा लगा?
[16:13]ऐसे ही आपके लिए और वीडियोस लाते रहेंगे। आपसे अगले वीडियो में
[16:16]मुलाकात होगी। तब तक के लिए खुदा हाफिज।
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