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Waqia e Ashura Kay Baad uthnay Wali Tehreek aur Imam Sajjad Ka Tarz e Amal | H.I. Syed Urooj zaidi
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Record date: 18 dec 2022
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2021 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:23][संगीत] सैयदना मौलाना रसूल करें तमाम hajrin अपने पाकिस्तान के istehkam के
[1:16]लिए मुकद्दस के हिफाजत के लिए उलमा हक़ की हिफाजत के लिए
[1:22]बीमारी की शिफा के लिए बेगुनाह की रिहाई के लिए बारात जो
[1:27]इस निश्चित का दश का है तमाम करते हैं इन सबकी तोहफे
[1:32]केट खैर में izaafe के लिए तमाम सेल्मी की नाबूदी के लिए
[1:37]majlumin की shujathamat और कामयाबी के लिए [संगीत] एक बार bulandtar मोहम्मदी
[1:45]सलाह पड़ी है अल्लाह ताला ने हमें टॉफी आता फरमाई के आपकी
[2:05]खिदमत में हम हाजिर हुए और एक हम मजूम जो यकीनन अभी
[2:08]आपने सुना भी बराबर में आपकी खिदमत में बयान किया की [संगीत]
[2:14]बातें कर्बला वादे आशूरा उठने वाली तहरी के और उन tahriko के
[2:22]दरमियां में या उन tahriko की मौजूदगी में इमामे सज्जाद अली सलाम
[2:27]का तर्जुमा हमारा इंशाल्लाह [संगीत] यह भी इसी से मिलता जुलता मौजूद
[3:12]है क्योंकि हजरते इमामे अलीम हुसैन हुसैन [संगीत] की जिंदगी इस तरह
[3:27]बयान नहीं हुई जिस तरह हक बनता है अगर हम देखें तो
[3:33]वुमेन ज्यादातर सैयद साजिद अली सलाम के बारे में जो हमें तारीफ
[3:36]में मसाला जो हमें ज्यादातर मेंबरों से मिला या हमने सुना वो
[3:44]सिर्फ इमाम का मसाइल का पहलू बयान हुआ अगर चाहिए कर्बला टिहरी
[3:57]के हुसैनी अणिमा में हुसैन जिंदगी हो khusosa नहीं इमामे सज्जाद की
[4:06]तो उसके अंदर हमारी हम तक जो ज्यादातर पहुंचा या हम जो
[4:14]ये का लें की हमारे muashre में जो ज्यादा बयान हुआ का
[4:20]मसाइल का पहलू ज्यादा बयान हुआ और अगर होना भी चाहिए उनकी
[4:22]majlumiyat का masasaib का पहलू लेकिन दिगर जो उनकी शख्सियत के अंदर
[4:28]पहलू है वो बयान नहीं हुई हुए तो बहुत ही कम ना
[4:35]होने के बराबर इसलिए यह एक बहुत ही खूबसूरत मौजो है और
[4:40]ये बयान भी होना चाहिए और यकीनन ये मैं कोशिश करूंगा की
[4:43]सारा मुक्तसर निचोड़ आपकी खिदमत में पेश करूं क्योंकि ये तो एक
[4:48]तफसील तालाब मौजूद है और इसके लिए कई निश्चित तने हो तो
[4:51]फिर जाकर इमामे सज्जाद की hikmaten अमली उनकी स्ट्रेटजी नज़र आती है
[4:55]की उनकी स्ट्रीट्स होती है hikmaten आवली वो फिर हमारे ऊपर जब
[5:00]भी खुलेगी की जब ये मुसलसल हम इसे मौजो को जो है
[5:05]वो सुने स्टडी करें mutaliya करें तो फिर हमें पता चलता है
[5:08]लेकिन ये की मैं इंशाल्लाह मुक्तसर साहब की खिदमत में आज की
[5:14]इस विशेष में मुक्तसर से वक्त है जितना वक्त है उसमें कोशिश
[5:16]करूंगा आपकी खिदमत में इस मौजो को बयान करूं सही उसे ताजुद्दीन
[5:21]की शख्सियत पे आने से पहले हमें एक चीज को समझना जरूरी
[5:28]है अल्लाह का एक कानून है अगर हम इस कानून को समझ
[5:29]गए तो पूरा दिन हमें समझ ए जाएगा और वो है कानू
[5:37]netedar कानू ने डाल का मैं ट्रांसलेट कर रहा हूं बैलेंस बराबर
[5:58][संगीत] अगर ना हो तो फिर क्या है अपराध हद से बड़े
[6:24]हुए लिमिट क्रॉस कर जाना बढ़ जाना अपराध बड़े [संगीत] के साथ
[6:30]अफराद पूर्णिमा है आखिर में अफराद घाटे हुए इसको फारसी में कहते
[6:42]kundravi और tundravi kundrao और tundrav kundrao और तुम रहो अब मैं
[6:48]इसका इंग्लिश में ट्रांसलेट करूंगा हाई-फेस और दो पेश हाई और लो
[6:54]के दरमियां में क्या होता है बैलेंस दरमियां दरमियां को क्या कहेंगे
[7:03]बैलेंस भाई बढ़ जाता है ऊपर लो पीछे रह जाता है और
[7:08]ऐसे दल यानी बैलेंस गर्मियों में आप सुनते उसूल ए दिन में
[7:15]दूसरे नंबर पर क्या है 16 दिन में क्या है दूसरे नंबर
[7:23]पे दूसरे नंबर पर अल्लाह आदिल है अल्लाह की जाट आदिल है
[7:34]की वो अल्लाह का कोई नहीं होता बैलेंस में रहता है बैलेंस
[7:46]में अल्लाह ने दिन नाजिल किया दिन भी मौका दिल है जिसके
[8:00]अंदर afraadhi हो लेकिन हमारे muashray में जो सबसे बड़ी मुश्किल है
[8:06]वो ये है की हम खुद हमारे पहला मरहला आता है दिन
[8:11]फैमी का जब हम दिन समझने लगते उसमें भी या तो अफराद
[8:16]का शिकार हो जाते हैं या तफरी का दिन पर जब अमल
[8:22]करने लगते उसमें भी या तो अफराद का शिकार हो जाते हैं
[8:24]या फिर तफरी का हमने करना क्या है दिन को समझने में
[8:29]और दिन पर अमल करने में ajajane मोहतरमा हमने उतना ही अमल
[8:34]करना है उतना ही लेना है इतना ही समझना है जितना अल्लाह
[8:38]ने हुकुम दिया है जैसे मैं आपको कराने करीम के मिसाल देता
[8:42]हूं कराने करीम में कई आयात ऐसी है जो बज साहब की
[8:48]आवाज़ अकरम के जो साथी द उनकी majhamat में नाजिल हुई है
[8:52]भाई क्या करते द वो जैसा की मैं आपको मिसाल डन की
[8:57]माहे रमजान में फजर से लेकर मगरिब तक रोजा होता है तो
[9:01]रोजे की हालत में अपनी जूजा भी उसके ऊपर हरम हो जाती
[9:08]है रोज़ की हालत में उसके साथ भी मुबाशरत नहीं कर सकता
[9:11]लेकिन होता क्या था बाद साहब आगे निकलने की कोशिश करने लगे
[9:18]की रमजान की रातों में भी उन्होंने मुबाशर छोड़ के हबीब इनको
[9:22]क्या कहूं इनको कहो की अपराधों तकरीर का शिकार ना हो जितना
[9:27]हुकुम है उतना करो अच्छा जब इनसे पूछा जाता था आप यह
[9:30]क्यों कर रहे हो तो कहते द की हम ज्यादा battakhva बन्ना
[9:33]चाहते हैं तो यहां पर अकरम ने उनको क्या तुम मुझसे भी
[9:36]ज्यादा muttakhi बन्ना चाहते हो क्या कोई रसूल अल्लाह से बड़ा मोटकी
[9:42]है दुनिया में कायनात में है रसूल अल्लाह से ज्यादा दिन जानने
[9:44]वाला लेकिन द ऐसे अफराद आज भी है बाजार से लोग जो
[9:50]afraton tafrid का शिकार हो जाते या तो बहुत आगे बढ़ जाएंगे
[9:56]या बिल्कुल ही खत्म हो जाएंगे कुछ भी नहीं करेंगे अमन इसीलिए
[9:59]ऐसे डाल में रहना है दिन को समझना है और सबसे ज्यादा
[10:08]नुकसान जो हुए इस्लामिया को वो इन्हीं लोगों से हुआ जो या
[10:12]तो हाई पेस में द या लो पेस में द चाहे वो
[10:16]हुक्मरान हो चाहे वह उलमा हो चाहे वो बादशाह हो या कोई
[10:21]भी शख्सियत तारीखे इस्लाम में हो अगर वो हाई प्रेशर लो पेश
[10:23]में गई इस्लाम को उन्होंने नुकसान दिया इसीलिए ahtedar में हमने दिन
[10:30]को समझना भी और दिन को लेना भी और दिन पर अमल
[10:34]भी करना इसलिए आगे नहीं बढ़ाना है जैसे बादलों लोग आगे बढ़ाना
[10:36]चाहते हैं इसलिए एक बड़ी खूबसूरत हदीस है मशहूर हदीस है आप
[10:41]सब ने सुनिए पैगंबर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जुमले अल्लाह हु
[10:48]अकबर paimber अकरम फरमाते मेरे अहले बैट मशहूर हदीस है मैं सिर्फ
[10:55]ट्रांसलेट कर रहा हूं जल्दी से सन लीजिएगा प्राइमरी फरमाते हैं मेरे
[10:59]अहले बैट नुक्ता ehtdar हैं एक हदीस तो आपने एक और मशहूर
[11:05]सुनिए पैबर अकरम ने कहा मेरे अल-बैत की मिसाल सफीना नूह की
[11:08]तरह हजरते नूह की कश्ती की मिसाल दी सफीना की तरह जो
[11:13]इनसे आगे बढ़ गया वो भी हलाल हो गया जो पीछे रह
[11:18]गया वो भी हलाल हो गया इसीलिए इनकी पैरवी करते हुए पीछे-पीछे
[11:21]ए जाओ आप देखिए इसीलिए नजूल balaaka में मौला अली ने एक
[11:26]और जुमला कहा इसी से मिलता जुलता मौला अली ने कहा मौला
[11:28]अली का जुमला नजूल बना लो कहने लगे मेरे बारे में मौला
[11:32]अली अपने बारे में कहने लगे मेरे बारे में दो लोग हालत
[11:37]हो जाएंगे दो लोग मेरे बारे में हक हो जाएंगे एक गली
[11:39]एक काली काली कफ के साथ काली काली वो है जो मौला
[11:45]अली के फजल का मुमकिन है मौला अली के फजल को एक्सेप्ट
[11:51]नहीं करता मानता नहीं है मौला अली को इमाम नहीं मानता मौला
[11:57]अली को उनके फजल को घटता है नहीं मानता इसको कहते काली
[12:00]इमाम ने कहा ये भी मेरे बारे में हक होगा और दूसरा
[12:04]गली जो मौला अली को तो मानता है लेकिन वो उनको मजला
[12:09]या तो रब बना देता है या राजिक बना देता है या
[12:15]इस तरह के alkababu देता है इसको कहते हैं गली गली यानी
[12:25]यह आगे बड़ा हुआ है और काली यानी जो घटा हुआ है
[12:30]नीचे इसलिए मौला अली ने बोला कामयाब कौन होगा जो अली के
[12:33]पीछे पीछे कदंब कदम अपना कदम रखते हुए ए जाए यानी मौत
[12:40]दिल आदमी कामयाब होगा और मौत दिल को तवज्जो से suniyega मैं
[12:43]एक और नुक्ता देने जा रहा हूं जो इंसान मौत का दिल
[12:48]होकर दिन को भी समझे मौत आदिल हो कर दिन पे भी
[12:51]अमल करें इस मौत का दिल को istelahe कुरान में मोती कहते
[12:59]हैं मोतीर किताब करने वाला है उनके कदंब कदम पीछे रखे अब
[13:13]ए जाए ये सारी तमीज मैंने इसलिए बंधी है ताकि हमें इमामे
[13:16]सज्जाद का दौर समझ गए दीनदार बनेंगे तो इतना ज्यादा दीनदार बनने
[13:31]की कोशिश करेंगे लोगों को के जैसे आईएमए से भी बढ़कर जैसे
[13:36]हम बहुत सारे कम करते हैं ना मजरत के साथ एक हकीकत
[13:40]है हमारे muashare में आम है हम बहुत सारे कम करते हैं
[13:41]जो ईमान नहीं कहा हम वो भी करने लगते अच्छा जब पूछा
[13:46]जाए भाई आप ये क्यों कर रहे हो तो क्या कहते बस
[13:49]मौला को खुश करने के लिए कहते ना की जुमला की हम
[13:54]तो मौला की मोहब्बत में कर रहे हैं इश्क में कर रहे
[13:56]हो और हालांकि वो कम शरीयत से टकरा भी रहा होता है
[14:01]शरीयत के अगेंस्ट होता है दिन का गेम्स होता है यही अफराद
[14:07]का शिकार हमने उतना चलना है हमने आगे नहीं बढ़ाना हम क्या
[14:19]करते हम आइंदा के दिन मानते उनकी विलादत या शहादत के दिन
[14:25]मानते तो मजरत के साथ बहुत सारे कम ऐसे करते जो उनसे
[14:27]तरीका नहीं लेते अगर जैसे मिसाल के तौर पर अगर हम उनका
[14:32]कोई दिन बना रहे तो हमें चाहिए क्या तरीका दिन मनाने का
[14:37]तरीका भी उनसे लेना की उन्होंने यो ये दिन कैसे मनाया हम
[15:17]होम में कर रहे अब इसी तरह जब आती है तो बहुत
[15:26]सारे कम आज़ादरी के अंदर हम वोट दल देते हैं जो दिन
[15:29]के खिलाफ भी कर रहे हैं अब होता यह है जैसे आता
[15:59]है तो हमारे जहां में दो-चार चीज आती हैं पहले वो मैं
[16:04]वो बयान करता हूं फिर से हम क्लियर करेंगे जैसे आता है
[16:10]हमारे जहां में आता है एक लफ्ज़ बीमार है karblade इमाम के
[16:18]ऊपर जो बीमारी थी वह सिर्फ असुर के दिन लेकिन ऐसा नहीं
[16:44]की पुरी जिंदगी बीमार द सिर्फ इसलिए शाहिद मोब का बड़ा खूबसूरत
[16:48]जुमला है शायद मोब रहमतुल्लाही फरमाते द शाहिद उतर कहते द की
[16:55]ये अली का पोता है यह भी अली है इसको बीमारी कर्बला
[17:00]नहीं करारे कर्बला का करो करारे कर्बला क्योंकि इन्होंने कर्बला के मैदान
[17:06]इन्होंने कर्बला में जैसे मौला अली ने शुजात के जौहर दिखाए तलवार
[17:13]से सैयद सज्जाद ने अपने khudbu के जौहर दिखाई क्योंकि यहां जो
[17:18]जब वादे कर्बला जो मामला द शाम का बाजार है कोफा का
[17:22]बाजार है और फिर उसके बाद जो है दरबार के अंदर जाते
[17:24]हैं तो यहां पर तलवार नहीं चलानी थी यहां पर कुवेट बयान
[17:29]और फसी हो बालिक गुफ्तगू की जरूरत थी यहां पर सरहद चाहिए
[17:52][संगीत] मूसा की जबान में कोई लुक ना थी ऐसा नहीं था
[18:05]उन्होंने लिख दिया तारीख हमें पर्वत मेरी जबान को सही कर दे
[18:14]ये माशाल्लाह यहां तक लिख दिया एक नबी की ये नबी की
[18:15]शान में गुस्ताखी है बाद में माशा अल्लाह यहां तक लिख दिया
[18:20]हज़रत ए मूषक तुला के गुफ्तगू कर दे यह गलत एक बहुत
[18:24]सारी चीज जो हमारे आम हो गई हम भी यही समझते और
[18:28]बहुत सारे लोग नहीं looknath से मुराद कुरान यह नहीं का रहा
[18:30]की मूसा की जबान में कोई मसाला था नहीं लोकनाट्य मुराद हज़रत
[18:39]मूसा अल्लाह से जालिम वी जाबिर हुक्मरान के सामने हक़ बोलने की
[18:46]ताकत मांग रहे द हक़ बोलने की सलाहियत और ताकत मांग रहे
[18:53]द क्योंकि आप मुझे बताएं अभी हम सारे बैठ के पीठ पीछे
[18:55]बैठकर या आपस में अपनी गैलरी को में बैठ के hukmaralo को
[19:00]बुरा भला कहते हैं ना की वज़ीर आज़म न्यू है वज़ीर ए
[19:02]आज़म यह है और अगर अभी पाकिस्तान के वज़ीर आया तब हमारे
[19:07]सामने ए जाए कोई कुछ कहेगा क्या होगा बहुत ही कम हो
[19:12]गया उसको कहा जाए की आपने उसके दरबार में जाके उसको ललकारना
[19:28]है कितना मुश्किल कम है बहुत मुश्किल कम है ये और हज़रत
[19:34]मूसा को यही कम खुदा ने दिया वो जा रहे हैं फिरौन
[19:38]के दरबार में तो वो ये नहीं का रहे द की मेरी
[19:38]जबान में कोई मसाला है नहीं हज़रत मूसा की जबान सही थी
[19:45]वो कुवेट गयी तो थी उनमें लेकिन फसी हो बालिज गुफ्तगू के
[19:50]लिए ताकत मांग रही थी यानी हज़रत मूसा का रहे द परिवार
[19:56]दिखा रहा मुझे ऐसा बुरहान और दलाई दे के वहां मैं उसको
[19:58]गुफ्तगू कर सकूं अपनी गुफ्तगू से उसे खाने कर सकूं यानी सामने
[20:04]वाले को लाजवाब कर डन उसके पास फिर कोई जवाब मौजूद ना
[20:11]हो बोलने की फिर उसमें ताकत ना रहे अब आई यही जिहाद
[20:16]सैयद सज्जाद ने किया उसे वक्त की सुपर पावर आज का सुपरफास्ट
[20:27]है पुरी दुनिया के ऊपर जो होल्ड कर रहा है इसी तरह
[20:33]उसे वक्त की सुपर पावर हुकुम मस्जिद की थी उसे वक्त समझने
[20:39]के लिए तो उसे वक्त का उस था वो सारी साजिश जैसे
[20:44]आज उस करता है ना सारी sajished भी यही करता था अब
[20:52]सुपर पावर से टकराने के लिए क्या चाहिए जरूरत चाहिए ताकत चाहिए
[20:59]शुजात चाहिए कुवेट गयी चाहिए और कुवेट goyahi के अंदर हक कहने
[21:03]की सलाह यह चाहिए अब इमामे सज्जाद अली सलाम दरबार में जब
[21:08]खुत्बा दे रहे हैं तो ये मामूली खुदवा नहीं था इसलिए शाहिद
[21:10]मोब ने कहा ये करारे karblade कर्बला है खाली बीमारी कर्बला मत
[21:16]कहा करोगी तो करारे कर्बला है मोहतरमा बस में गुफ्तगू में कोशिश
[21:27]करूंगा अब आए इमामे sajjadon ने सलाम का दौर ए जाता है
[21:35]कर्बला का वाक्य हो जाता है मैं थोड़ा सा आपको तारीख और
[21:39]हिस्ट्री से थोड़ा सा sunhariyon बताऊंगा की किस दौर में इमामे सज्जाद
[21:44]द और इमामे सज्जाद का tarjiyamal क्या रहा और इस तरह तारीफ
[21:49]ये कहती है की मक्का और मदीना दोनों जो इस्लाम के सदर
[21:57]रहे सदर-ए-इस्लाम सदर-ए-इस्लाम यानी मरकाजी जगह मक्का और मदीना दोनों में लोगों
[22:03]की अखलाक की बस्ती यह हो गई थी अखलाक की बस्ती यानी
[22:06]तरबियत बिल्कुल नहीं थी बेशर्म आश्रम हो गया था और अखलाकी बस्ती
[22:19]के अलामत ये थी की शाम के अंदर शाम के अंदर मरकाजी
[22:27]हुकूमत थी और हुक्मरान को जब कोई हुक्मरानों को रक्षा को मौसिकी
[22:31]की महफिलन लगानी होती थी तो मशहूर rakhasen मशहूर नाचने वाली औरतें
[22:36]और रखा सही मक्का और मदीना से बुलाई जाती शाम में बुलाई
[22:44]जाती नहीं मदीना और मक्का के लोगों की हालत इतनी पस्त हो
[22:50]गई थी इतनी पास हो गई थी कर्बला के बाद एक जुमला
[22:52]और सुनते जाएं मैं एक हदीस है हजरते इमामे जफर सादिक अली
[22:56]सलाम का जुमला है सलाम फरमाते हैं सादिक अली सलाम iradana सा
[23:11]बड़ा katlil हुसैन कटले हुसैन के बाद यानी कर्बला के बाद इमाम
[23:18]साधक कहते हैं तमाम मक्का और मदीना के लोग मुर्दाद हो गए
[23:26]इस्लाम से वापस पलट गए उसे कहते अपनी अब यह अहलेबैत की
[24:00]बात नहीं हो रही है अहलेबैत तो दिन पर ही है लोगों
[24:04]की बात कर रहे हैं सलाम alebeth के घराने के अलावा जितने
[24:06]भी लोग द मक्का और मदीना में इमाम साहब का रहे हैं
[24:11]सब murtat हो गए द यानी इतना सोसाइटी और muashray इतना पस
[24:16]हो गया था इमामे सज्जाद का सब लोग मूर्त दोगे फिर वहां
[24:19]में सादिक कहते हैं मेरे जड़ अली ये बुलंद हुसैन ने इनको
[24:25]वापस दिन पर paltaya ये बहुत बड़ा जिहाद था की मामूली कम
[24:33]नहीं था तलवार से बड़ा जिहाद था ये लोगों की muashre में
[24:57]हाजिर होते हैं और जब उनको मुसीबत झेलनी पड़ती है तो फिर
[25:02]उन्हें पता चलता है की तरबियत कितना मुश्किल कम तलवार के जिहाद
[25:07]से ज्यादा मुश्किल कम लोगों की फिक्री सतह को अपग्रेड करना ज्यादा
[25:12]मुश्किल कम है मैं अगर बिना mukhalta कहूं इमामे सज्जाद अली सलाम
[25:19]का दौर ऐसा हो गया था की जैसे रसूल अल्लाह आए द
[25:22]अरब मौसेरे में यानी इतना jahilya पर पलट गए द लोग और
[25:27]रसूल अल्लाह ने क्या किया लोगों की फिक्री सतह को बुलंद किया
[25:40]इनको तालीम इनको एतराज भी करते हैं ना कहते की भाई इमामे
[25:49]सज्जाद ने तलवार क्यों नहीं उठाई इमामे सज्जाद ने तलवार से जिहाद
[25:56]क्यों नहीं किया इमाम जानते हैं किस दौर में तलवार का जिहाद
[26:02]जरूरी है और किस दौर में तरबियत जरूरी है किसी इमाम में
[26:08]कोई कमी नहीं है पहले तो ये कन्फ्यूजन क्लियर होनी चाहिए हमारी
[26:11]इमाम अली से लेकर 12 में तक किसी मैं में कोई कमी
[26:16]नहीं है अल्लाह ने यह 12 मुकद्दर की है अल्लाह ने इनको
[26:20]मासूम बनाया ना किसी इमाम में कमी नहीं है कमी या तो
[26:25]वो आवाम जो इमाम को मिलती थी या तो उसमें कमी होती
[26:32]थी या उसे वक्त के दौर की स्ट्रेटजी और हिकमत अम्लीय सारा
[26:35]होती थी की आईना को वो बनाना पड़ता मैं आपको मिसाल देता
[26:42]हूं इमामे हसन ने सन कर ली और इमामे हुसैन ने सन
[26:44]नहीं की जिहाद किया कर्बला में इमाम हसन और इमामे हुसैन में
[26:51]कोई फर्क है फर्क pairokaaron में था इमाम हसन खुद का रहे
[26:56]द की मुझे पैरों का ऐसे नहीं मिले जैसे मैं चाहता था
[27:00]और इमामे हुसैन को बेहतरीन पैरों में मिले कर्बला में जो इमाम
[27:04]पर शाहिद हुए बेहतरीन पैरों कर मिले इमामे हुसैन ने फक्र किया
[27:10]एक रीजन एक सबब एक वजह तो ये हो गई के इमामे
[27:13]हसन और इमाम में हुसैन के पैरों कारों में फर्क था उनको
[27:16]जो फॉलो कर रहे द इमाम के जो फॉलोअर्स से उनमें फर्क
[27:21]था इमाम हुसैन का दौर था इमामे हसन अगर कर्बला के वक्त
[27:35]होते और इमामे हुसैन अगर सुनहे इमामे हसन के वक्त होते तो
[27:38]याद रखें इमामे हुसैन सन करते इमामे हसन जिहाद कर क्योंकि फर्क
[27:45]इमाम में नहीं है फर्क किसी इमाम में नहीं है फर्क उसे
[27:50]वक्त के muashre के अंदर नजर आता है लोगों के अंदर नजर
[27:55]आता है हम जैसन के अंदर नजर आता है फर्क हम आईएम
[28:01]का साथ इस तरह नहीं दे पाए की हिम्मत ना हो गए
[28:09]इमाम को कैद में ले गए आठवीं इमाम को खुरासान ले आए
[28:14]मदीना से गिरफ्तार करके नव दसवें इमाम को समर ले गए नव
[28:18]इमाम 25 साल की उम्र में जवानी में शाहिद हो गए दसवें
[28:20]इमाम भी 42 साल की उम्र में और 11 इमाम इतने मजलूम
[28:25]11 इमाम वो वहीद इमाम है जिन्होंने जिंदगी में एक भी हज
[28:31]नहीं किया हज वाजिद हज अपना नहीं कर सके उसकी वजह क्या
[28:37]है उसकी वजह ये है की इमामे स्क्री को समर ले जाकर
[28:42]नज़र बंद कर दिया था पुरी 28 साला जिंदगी इमाम की 28
[28:44]साल जिंदगी थी नजर बंद कर दिए इतनी मुसीबत में हमारे आईने
[28:51]की जिंदगी गुजरिया अपनी लेकिन इनकी स्ट्रेटजी अपराध भी मुझे मेरे मुताबिक
[29:34]मिलते तो मैं अपने बाबा के हक के लिए कायम करता हूं
[29:38]इमामे सज्जाद तलवार चलाना नहीं जानते द बेहतरीन सुजा द जैसे मौला
[29:45]अली जिहाद जानते हैं ऐसे इमामे सज्जाद भी जानते हैं जैसे इमाम
[29:50]हुसैन लड़ना जानते हैं ऐसी इमाम सज्जाद भी जानते द लेकिन फर्क
[29:54]ये है की कोई भी इमाम जज्बातों कम नहीं करता पुरी स्ट्रीट्स
[30:01]और हिकमत अमली से अहि मकाम करते हैं अकाल से हमारे मजरत
[30:07]के साथ हम फर्क ये हमारे फैसले हो गए जज्बातों हमारे फैसले
[30:10]होते ना जज्बातों जज्बातों फैसले कर देते हम जोश में आके लेकिन
[30:16]कोई भी इमाम जज्बातों फैसला नहीं करता जो दौर है अगर इस
[30:29]दौर में इमाम में सज्जाद तलवार उठा के जिहाद करते और खुद
[30:33]भी शाहिद हो जाते का कोई रंग नहीं आता यानी एक लॉन्ग
[30:39]टर्म प्लानिंग इमामे सज्जाद हर इमाम लॉन्ग टर्म प्लानिंग करता है प्लानिंग
[30:43]दो तरह की होती है एक शॉर्ट टर्म एक लॉन्ग टर्म शॉर्ट
[30:47]टर्म यह होती है की जिसका नतीजा जल्दी आता है लॉन्ग टर्म
[30:52]ये होती है की जिसके नाती आते रहते हैं वो हस्ती अगर
[30:59]गुजर भी जाए दुनिया से गुजर भी जाए तो उसे तहरीर के
[31:04]उसने जो हरकत लोगों में पैदा की थी उसके natais आते रहते
[31:06]हैं अभी जैसे जनाबे सैयदा का कायम हमें नजर आता है की
[31:12]बीवी निकली जाके खुदवा दिया अच्छा फिडक बीवी को नहीं मिला मिला
[31:14]था फिदा नहीं मिला बीवी का अच्छा नजर गहरी तौर पे नज़र
[31:20]ये ए रहा है माशाल्लाह कामयाब हुई क्योंकि सैयद खाली फिट के
[31:37]लिए जाती तो हम का सकते द नाकाम हुए सैयद उम्मते इस्लामिया
[31:39]की तबीयत के लिए निकली थी दिन इस्लाम के यहां के लिए
[31:44]निकली थी दिनेश इस्लाम को बचाने निकली थी पूरे khudbe में जनाबे
[31:48]सदा के दिन इस्लाम की सारे और ये सारी चीज नज़र आती
[31:53]है बस अब मुक्तसर मुक्तसर दो-तीन जुमले सन ले जनाबे सदा का
[31:57]कायम लॉन्ग टर्म प्लानिंग था जनाबे सैयद के कायम के नाती कब
[32:03]आए कब आए सैयद की ने जो तरबियत के लिए निकली इतना
[32:06]उम्मत की जो दिन बचाया सैयद ने दिन बचाया क्योंकि वादे रसूल
[32:12]फौरन दिन को खतरा था munaphicle जो द और कुफर जो द
[32:17]वो तक लगा के बैठे द की रसूलल्लाह की आंख बंद हो
[32:19]क्योंकि रसूल अल्लाह की शख्सियत का एक वजन था रोक था जलालत
[32:24]लोग उनकी मौजूदगी में ये कम खुल के नहीं कर का रहे
[32:29]द मुनाफे इन भी लेकिन हुजूर किया आंख बंद हुई इस्लाम पर
[32:31]यलगार लेकिन जानते नहीं द नबी की बेटी मौजूद है नबी की
[32:36]बेटी निकली मस्जिद गई इंशाल्लाह बयान करेंगे khudbe में है क्या क्या
[32:49]खुत्बे में बहुत खूबसूरत चीज है जनाबे सैयदा ने बयान की उसे
[32:53]khudbe की तश्री की जरूरत नहीं लॉन्ग टर्म प्लानिंग इमामे सज्जाद की
[32:58]लॉन्ग टर्म प्लानिंग इमामे सज्जाद अगर तलवार उठा के jihat करते हैं
[33:02]अपने दौर में तो natais नहीं आने द हान अगर इमाम ए
[33:10]हुसैन 60 डिग्री में तलवार नहीं उठाते तरबियत करते तो तरबियत के
[33:16]नाती नहीं आते यही तो हमने समझना है मैं आपको एक खूबसूरत
[33:19]जुमला इमाम है सज्जाद का बताता हूं सज्जादिया की दुआओं के अंदर
[33:24]मिलता है इमामे सज्जाद फरमाते हैं परिवार दिगरा ये नोट कर ले
[33:27]जुमला और इतनी खूबसूरत दुआ है की अगर हम हर नमाज़ के
[33:31]बाद तक ही बात में इसको दुआ को अपनी ताकत के बाद
[33:34]में शामिल करें इमाम ए सज्जाद का खूबसूरत jumleba में सज्जाद कहते
[33:37]हैं परवरदिगार जिन कामों में तू ताजिम चाहता है जिनका वो मैं
[33:42]तू जल्दी चाहता है तेरी हिकमत यह है की तू चाहता है
[33:48]वो कम जल्दी हो तो मैं उसमें तकिर ना करूं और जिन
[33:51]कामों में तू टिकर चाहता है मैं उसमें ताजिम ना करूं ताजिम
[33:58]कहते हैं जल्दी को टिकर कहते हैं देर जल्दी और देर इमामे
[34:03]सज्जाद का रहे हैं परवरदिगार जिन कामों में तेरी तरफ से जल्दी
[34:07]है मुझे तौफीक दे की मैं उसमें जल्दी करूं मैं टिकर ना
[34:13]करूं लेट ना हो जाओ और जिन कामों में तू ताहिर चाहता
[34:18]है की ये देर से हो उसमें मैं ajalat पसंद ना बन
[34:22]जाऊं मैं जल्दी ना कर जाऊं यह स्ट्रेटजी इमा की यह स्ट्रेटजी
[34:30]साथ कर रहे हैं जगद निज़ाम के खिलाफ उसे वक्त ताजिम है
[34:38]जिहाद के लिए ताजिम का हुकुम है स्ट्रेटजी है लेकिन इमामे सज्जाद
[34:43]के दौर में अगर तलवार उठा ली जाती तो ये फिर जल्दी
[34:47]हो जाती इस वक्त आखिर की जरूरत थी क्योंकि इस वक्त कर्बला
[34:55]एक हो गई कर्बला इमाम इमाम हुसैन कर दी बरबा कर दी
[35:01]अब उसे कर्बला को तहरीर और हिदायत का मांबा आईना बना दिया
[35:04]बना दिया मैं आपको एक मिसाल देता हूं जैसे बात कहते हैं
[35:10]ना कर्बला हर इमाम ने अपने दौर में कर्बला क्यों नहीं बहुत
[35:18]सारे करते हैं आपसे भी करेंगे आप कहीं यूनिवर्सिटी जाएंगे कॉलेज जाते
[35:24]आपके ऑफिस में होंगे बहुत सारे लोग सवाल आपसे कर लेंगे जो
[35:27]हिस्ट्री पढ़ता है जो जानता है वो करने का सवाल की भाई
[35:30]आपके 12 इमाम द 12 इमाम ने सब ने कर्बला क्यों नहीं
[35:35]की सवाल बनता है ना तो यहां याद रखें जवाब ये है
[35:41]की कर्बला एक काफी थी हर इमाम ने उसको tahrig बना दी
[35:44]मैं आपको एक मिसाल देता हूं अगर हजार दम बिजली के 1000
[35:51]दम पानी के ऊपर दम बनता है ना बिजली के 1000 दम
[35:56]बनाए जाएं और एक घर को भी बिजली नहीं मिलेगी तो क्या
[36:01]होगा दम किसी कम के किसी कम के नहीं बेकार है लेकिन
[36:06]अगर एक दम हजार घरों को रोशन कर दी तो यह दम
[36:11]काफी है ना एक दम काफी है ना जो हजार घरों को
[36:15]रोशनी दे देगा कर्बला 61 हिजरी में जो हुई हिदायत का एक
[36:23]दम है हिदायत का एक दम है जो टाक क़यामत आने वाली
[36:29]नस्लों को हिदायत देती रही थी बस उसे दम से उसे हिदायत
[36:35]के दम से हमने तब बनाई लेनी है हिदायत लेनी है इल्म
[36:40]लेना है हर इमाम ने वादे कर्बला सैयद सज्जाद से लेकर 11वीं
[36:44]इमाम तक 12वीं को तो मौका नहीं मिला वो तो पर्दा गैप
[36:48]में चले गए छोटे से 5 साल की उम्र में ही पर्दा
[36:51]में चले गए 12 इमाम में सज्जाद से लेकर इमाम में स्क्री
[36:56]तक की जितने इमाम है इनको कर्बला वफा करने की जरूरत इसलिए
[37:00]नहीं पड़ी क्योंकि कर्बला एक हिदायत का दम मौजूद था उसी कर्बला
[37:07]को तहरीक बना के आईएमए ने अपने अपने दौर में लोगों की
[37:10]तरबियत की इमामे सज्जाद का दौर तरबियत का दौर है अब मुझे
[37:17]बताएं जो लोग जिनकी फिक्री सतह लोगों की जीरो पे चली गई
[37:23]इमामे सज्जाद तलवार उठाते तो वो इमाम का साथ देते नहीं देते
[37:26]अखलाक की बस्ती इतनी थी की नाचने वाली औरतें मक्का और मदीना
[37:33]की मशहूर हो गई शाम में उनको बुलाया जा रहा है गुलु
[37:36]का रहा हूं की मरने के ऊपर ये मैं नहीं का रहा
[37:40]तारीफ का रही है मक्का और मदीना की जो गुल्लू का रहा
[37:44]है ये थी उनके मरने के ऊपर मक्का और मदीना में तीन
[37:48]दिन का शौक मनाया जा रहा है कितना इस्लाम से दूर हो
[37:53]गए द ये लोग कितना दूर हो गए द इस्लाम से किया
[37:58]किसने बनवाया खानदान है जिसने हिम्मत इस्लामिया को दूर कर दिया रसूल
[38:03]अल्लाह नहीं पड़ी लेकिन कोशिश करते रहे की उम्मत वापस मेरे नाना
[38:20]के दिन पे ए जाए किसी मैं ने छोड़ा में सज्जाद का
[38:25]तर्जुमा लिए था अब मुक्तसर से सन ले बस मैं गुफ्तगू को
[38:28]समेत इमामे सज्जाद का tarjiyam ये था की इमाम सज्जाद ने सबसे
[38:34]पहला अब देखें बड़ी खूबसूरत तब्लीगी सिस्टम बनाया इमाम साहब लीजिए सिस्टम
[38:38]अभी हम समझते हैं तब लीजिए सिस्टम ये दूसरों का है सिस्टम
[38:41]हमारा है अब अगर दूसरे तबलीग करने लगे तो हम समझते हैं
[38:46]की ये तब्लीगी जमात वाले जो तब्लीगी तबलीग करते हैं ना हम
[38:50]समझते हो सब उनका है नहीं इमामे सज्जाद ने बनाया था इसलिए
[38:54]बहुत सारी चीज आप देख कर परेशान ना हो क्या कहते हैं
[38:58]की हम का देते ना जैसे हम कहते हैं जापान के पास
[39:01]क्या रूल्स हैं अमेरिका के पास यह कानून उसके पास ये कानून
[39:03]यूरोप के पास ये कानून वो सारे कानून इस्लाम के द जो
[39:09]बोले गए द हमारे निराश हमारी लूट गई हम देखते रहे हमारी
[39:16]सबसे बड़ी मिराज थी इल हिम्मत ईमान जो हमें दी थी ilmohak
[39:23]लूट गई हमारी मीरास मुसलमान की और दिल खुश तो सही होगी
[39:26]मेरा हमारी आंखों के सामने हमारी चली गई आज हम का रहे
[39:30]हैं की यूरोप के आज हम यूरोप के गुण गेट हैं यूरोप
[39:34]में क्या कानून है अमेरिका में क्या कानून है फल जगह क्या
[39:36]कानून है लेकिन सब झूठ है ना आपको मीडिया नहीं दिखाता असल
[39:43]में क्यों की आलमी मीडिया इनका है लेकिन सब झूठ है जितना
[39:46]अभी आप देखते ना ये आपके इलाके में अक्सर न्यूज़ हम सुनते
[39:51]जाफरी तैयार में कितनी डकैती की वारदातें हो रही है ना यहां
[39:54]पे सुनते ही हम तो क्योंकि हम यहां नहीं रहते खबरें आती
[39:58]रहती हैं यहां हो रही है बात आती है लेकिन पाकिस्तान में
[40:02]ठीक है ये भी है चोरी चकरी में बेरोजगारी में सब है
[40:05]लेकिन एक आदमी रेशों के मुताबिक सबसे ज्यादा गण कल्चर और कटिया
[40:11]खुद अमेरिका में होती उस में जिसको हम समझते बड़ा सेफ मॉल
[40:27]थी यूरोप के अंदर होती है आज वो यूरोप हमें बताया की
[40:33]औरत को क्या मकाम देना है यूरोप से नहीं पूछे सहारा से
[40:39]पूछे औरत का मकाम किया सैयद ने औरत को औरत का मुकाम
[40:41]दिया दिन ने दिया है यह फहस औरतें जो यूरोप की ओर
[40:47]ये निकल के और जो पाकिस्तान के अंदर भी इनका असर हो
[40:52]रहा है निकलती है और खूब की बात करती झूठ है ह्यूमन
[40:54]राइट्स के दावे करते ह्यूमन राइट्स अच्छा सारा इंसानी हुकूक इन्हें यूक्रेन
[40:59]में नजर ए रहा है सारे इंसानी हुकुम ये हो गया यूक्रेन
[41:05]में ये हो गया इंसानी हुकुम की अगर तुम vakayan इंसानी हुकुम
[41:10]के दावेदार हो तो यमन के बच्चों के लिए क्यों नहीं बोलते
[41:13]इराक के अंदर जुल्म नहीं हो रहा हो रहा है सीरिया के
[41:18]अंदर जुल्म नहीं है जो भी मुसलमान मुल्क है वहां जब जुल्म
[41:23]होगा म्यांमार के अंदर रोहिंग्या के अंदर मिया मैन के अंदर मुसलमान
[41:31]को अभी चंचल पहले की बात है ना 8 साल पहले की
[41:35]कत्ल कर दिया बेदर्दी से ह्यूमन राइट्स की तंजी में खामोश खामोश
[41:39]ईरान के अंदर एक औरत को पर्दे के ऊपर जो मामला हुआ
[41:43]सब जानते हैं भारत के अंदर हिंदू लड़के ने अपनी क्लास फेलो
[41:57]लड़की मुसलमान लड़की को हरा सा किया उसने चौथी मंदिर से कूद
[42:03]के जान दे दी यूनिवर्सिटी की एक भी मीडिया ने उसको हैडलाइन
[42:05]भी नहीं चलाई क्यों क्योंकि वो मुसलमान थी क्योंकि मुसलमान थी अगर
[42:11]यही कम कहीं और हो जाता तो ह्यूमन राइट्स की तंजी में
[42:16]वह वाला मचा देती शोर कर कर के प्ले कार्ड उठा के
[42:18]सारे मुल्कों में इसलिए aalmiy सतह पर जो साजिश है इसको हम
[42:23]समझे बहरहाल मेरा मौजों है ये करंट अफेयर हम ज्यादा इसमें ना
[42:24]चले जाएं अब तो मुझे सुने इन साथियों को समझे इस्लाम के
[42:30]खिलाफ इमाम ने पहला कम यह किया में सज्जाद ने तारीख कहती
[42:53]है 173 173 अफराद की पहले तरबियत की जिनको इमामे सज्जाद के
[42:58]खास सहाबी कहा जाता है खास शागिर द जो इमामे सज्जाद के
[43:03]दर्शन में महफिलों में इमामे सज्जाद की दवाइयां nishchiton में आकर बैठते
[43:06]द और इमाम सज्जाद से दिन सिखा और इनको इमाम ने अपग्रेड
[43:13]किया इन 173 अपराध में है मशहूर है उनकी आप दुआएं सुनते
[43:21]और आप बिन ahanaf है और बहुत सारे लोग मुस्लिम ने मक्का
[43:37]और मदीना के और फिर उसके टर्फ के मुख्तलिफ इलाकों में भेजा
[43:44]आप बताइए सिस्टम बनाया किसने अभी आप देखते हैं देखा है ना
[43:49]आपने जमा होते हैं फिर उसके बाद नसीहत होती फिर उसके बाद
[43:55]वो जाते हैं मुख्तलिफ को तो ये सिस्टम असल में यहां इमाम
[44:00]में सज्जाद ने इनको तैयार किया और फिर भेजा फिर इन्होंने जाकर
[44:06]तबलीग की imammat की रिसालत की तौहीद की अखी दूर उसकी है
[44:09]लोगों के तो बस बहरहाल mukhasar में कर रहा हूं तो मुझे
[44:15]सुने पहला कम इमामे सज्जाद ने किया की खवास तैयार किए इनको
[44:18]कहते हैं खवास खवास या नहीं क्रीम इमामे सज्जाद अली सलाम की
[44:27]ये क्रीम थी तहरी की 173% 173 रन यह खास साहब ने
[44:30]अच्छा शिकंजे बहुत खतरनाक दुश्मन और हुकूमत जो थी उसे वक्त जो
[44:37]अब्दुल मलिक बिन मरवान का दौर था उसके दौर में अब्दुल मलिक
[44:39]बिन मरवान के जितने भी ये कहने पे कड़ी निगाह रखते द
[44:47]की इमामे सज्जाद से कौन मिल रहा है कौन ए रहा है
[44:52]इमाम सज्जाद क्या कर रहे हैं कड़ी नहीं कहा था अम्लीय अपनी
[44:57]दरस जैसे मैं अभी बैठ के आपको दश दे रहा हूं ना
[45:03]लेक्चर इमामे सज्जाद लेक्चर नहीं दे सकते द पाबंदी थी इमामे sajjaddar
[45:06]सनी दे सकते द ऐसा दौर था लेकिन इमाम सज्जाद ने हिकमत
[45:11]है इमली क्या बनाई जितनी बातें इमाम ने दश में करनी होती
[45:14]थी उन सबको दुआओं में बयान कर दी और सही कमला है
[45:20]ना हमारे पास ये दुआएं जब हम दुआओं को पढ़ते हैं तो
[45:25]नाम दुआ है लेकिन अंदर सारे हैं अंदर मार्फत के खजाने जैसे
[45:31]मैं अब जब हम दुआ का नाम लेते हैं हमारी दुआ क्या
[45:35]होती परवरदिगार नौकरी दे दे परवरदिगार राशन दे दे परवरदिगार तरक्की दे
[45:38]दिए होती है ना दुआ लेकिन जब इमाम में सज्जाद की दुआ
[45:42]हम देखते तो यह शरीफ सज्जादिया में तो ये नहीं नजर ए
[45:47]रहा तरक्की नौकरी राशन कुछ नहीं इमामे सज्जाद की दुआ में नजर
[45:49]ए रहा है परिवार दिगरा जो कम तू चाह रहा है मुझे
[45:52]उसमें जल्दी जो चाह रहा है मैं उसमें जल्दी ना करूं जो
[45:56]तू जो जल्दी जा रहा है उसमें टिकर ना करूं जो तू
[45:57]टिकर जा रहा है उसमें मैं जल्दी ना करो इस तरीके की
[46:01]जुमला फिर उसके बाद दुआओं के अंदर 47 नंबर दो क्या करते
[46:14]द जैसे हम दुआएं को महल पढ़ते हैं ना जैसे हम बैठ
[46:18]के दवाई इतना खतरनाक दौड़ता में सज्जाद ने क्या किया दुआओं की
[46:33]महफिल राखी हाथ बुलंद किए लोग समझ रहे द इमाम दुआ कर
[46:36]रहे हैं लेकिन उन दुआओं के जरिए इमाम तौहीद आदिल नबूवत रिसालत
[46:43]क़यामत के maujuaat पड़ा रहेगा यानी तरबियत कर रहे द दुआ में
[46:50]लेक्चर सारे मौजूद द मैं की और याद रखे अगर इमामे सज्जाद
[46:57]लोगों की तबीयत ना करती इमामे सादिक को 4000 शागिर्द नहीं मिलते
[47:07]जब हम पीछे जाते हैं तो उनको तैयार उनको शुरू में तैयार
[47:14]करने वाले इमामे सज्जाद अब ये 40 साल जिंदगी इमाम ने कर्बला
[47:21]के बाद गुजरी हम समझते हैं की सिर्फ इमाम रोते द बेशक
[47:25]रोते द अपने बाबा को भी रोते द बाजार ए गुफा और
[47:28]शाम पे भी होते द लेकिन उसके साथ-साथ में बताया की देखो
[47:43]एक बेहतरीन आज़ादर वही होता है जो आबिद भी हो जो अलीम
[47:47]भी हो जो जाहिद भी हो जो अपने चला जाए अपने दौर
[48:11]में होता है सज्जाद ने बयान किया की ज़कात क्या है ऑफिस
[48:36]जकात की स्टडी इमामे सज्जाद का तर्ज अमल यही था की उन्होंने
[48:54]लोगों की तरबियत की लोगों की तरफ की सीरत क्या है बहुत
[49:11]सारी त्रिकोण के बारे में सज्जाद ने साथ नहीं दिया थी की
[49:20]इमामे सज्जाद लोगों से मिल नहीं सकते द आप दौड़ देखें जुबान
[49:30]बंदी किसी ज़ाकिर पर किसी अलीम पर जबांबंदी हो जाती है हुकूमत
[49:35]लगा देती ना जबान बंदी का मतलब होता है की ये तकरीर
[49:41]नहीं कर सकता इमाम ए सज्जाद पर जबांबंदी हुकूमत की हुई तकरीर
[49:44]नहीं कर सकते क्योंकि हुकूमत देख चुकी थी शाम के दरबार में
[49:50]इमाम की तकरीर सन चुकी थी गुफा के दरबार में इमाम में
[49:55]सज्जाद की तकरीर सन चुकी थी हिला के रख दिया था इमाम
[49:57]ने पुरी उसे वक्त की khilkat को अब यह का रहे द
[50:02]की हमने अगर तकरीर की पाबंदी दे इनको तकरीर की इजाजत दे
[50:06]दी तो ये बानो मैया के चेहरे को बेनकाब कर देंगे इसलिए
[50:09]जुबान बंदी की हुई थी हुकूमत ने अब ऐसे दौर में अगर
[50:16]इमाम खुल कर तलवार वाली तहरी के जो चल रही थी गुफा
[50:19]के अंदर इलाकों के अंदर जो तलवार से उठने वाली तरीके थी
[50:24]इमामे सज्जाद अगर खुलकर हिमायत करते तो क्या होता इमाम को यकीनन
[50:30]फिर जेल में दल दिया जाता इमाम को कैद कर दिया जाता
[50:33]है इसलिए इमाम ने कैद में वापस नहीं जाना था इमाम की
[50:37]hikmaten अमली ये थी की मैं बाहर लोगों के दरमियां में रहकर
[50:42]इनकी तरबियत करो क्योंकि अगर इमाम है सज्जाद भी उसी वक्त कर्बला
[50:48]के फौरन बाद दोबारा जैसे की शाम से आए द अगर दोबारा
[50:50]कैद में चले जाते तो जानते क्या होता आज हमें हम क्या
[50:57]कर रहे होते हम भी असुर को जश्न का दिन समझ रहे
[51:04]होते हमें फर्क नहीं नजर आता हक को बदल में फर्क ही
[51:06]नजर नहीं आता अगर सैयद ए सज्जाद वादे कर्बला इस खट्टे हक
[51:12]को बदल के दरमियां खत्म कीजिए और ये खत्म में सज्जाद ने
[51:15]तरबियत के जरिए मौत हो तरबियत आज हमारी तमाम मिसाइल का हाल
[51:22]हमारे muashre में तालीम उत्तर दिया के मैदान में आगे आई यही
[51:30]इमामे सज्जाद की सीरत है यही इमामे सज्जाद का तर्जुमा है और
[51:33]यही हमारे मसाइल का हाल है हमारे मसाइल के अलावा कुछ भी
[51:39]नहीं है याद रखिए आप इस नियत से पढ़े की मैं इमाम
[51:50]के लिए पढ़ रहा हूं की अल्लाह ताला हमें हकीकत इमाम shahdal
[52:11]अस्सलाम के तर्ज अमल को जैसे की मैंने अर्ज किया की ये
[52:16]तो मुक्तसर साहिब लेक्चरर था जिसमें मैंने मुख्तसर सीधा-सीधा चीज बयान की
[52:19]वर्ण यह मौजूद इमाम की ये थी की पहले खवास तैयार की
[52:32]है फिर आवाम की तरबियत की यानी स्टेप बाय स्टेप को बनाने
[52:44]की तौफीक आता फरमाए
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