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Sunni Muslims React to the Martyrdom of Imam Khamenei
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26/03/07
In this video, We asked Sunni Muslims about the martyrdom of Ayatollah Ali Khamenei and recorded their honest reactions. This street interview explores different perspectives within the Muslim community and highlights how people respond to major events affecting the Islamic world. Ayatollah Ali Khamenei, the Supreme Leader of Iran for more than three decades, got martyred recently by the enemies, leading to mourning and reactions across many Muslim communities. #sunni reaction, Imam #khamenei martyrdom, Muslim reactions, street interview Muslims, Sunni vs Shia opinions, Muslim unity, Islamic world reactions, Ali Khamenei news, Muslim community views.
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Transcript
[0:00]हम एक ऐसे वक्त में जी रहे हैं जो तारीख में लिखा
[0:03]जाएगा। आयतुल्लाह खामिनाई की शहादत के बाद मिडिल ईस्ट का मंजर बदल
[0:06]रहा है। अचानक इनकी शहादत की जो है खबर मिली तो सब
[0:08]लोग फूट-फूट कर रोने लगे। कौन है ये?
[0:11]हमारे रहबर हैं। तो आप सुन्नी है कि शिया?
[0:14]सुन्नी है भाई। जैसे घर का बड़ा या अपना कोई बाप खत्म
[0:17]हो जाता है। इस तरीके का दर्द मेरे अंदर है। फिलिस्तीन में
[0:19]उन्होंने पूरा पार्ट अदा कर दिया। फिलिस्तीन में शिया कहां है?
[0:22]जब किसी की मां या बाप कोई मरता के कैसा अफसोस हो
[0:26]रहा था?
[0:27]ऐसे ही रोना हम आया। इंटरनेट पर हर किसी की अलग राय
[0:32]है। लेकिन आज मैं कमेंट्स नहीं सीधा लोगों से बात करूंगा। चलिए
[0:33]सड़कों पर चलकर आवाम से पूछते हैं। उन्होंने अगर शहादत दी है
[0:38]तो इंशाल्लाह कोई ना कोई इंकलाब जरूर आएगा। हम पीछे नहीं हटेंगे
[0:40]आगे जाने से। शहादत के लिए हम भी तैयार हैं। आप इनको
[0:43]जानते हैं?
[0:43]बिल्कुल जानते हैं। कौन है?
[0:45]इस्लाम के जो हम लोग जिसे फॉलो करते हैं उसी लिहाज से
[0:48]तो कहीं ना कहीं वो गलत थे। ये अरब मालिक। वो इनका
[0:51]साथ क्यों नहीं दे रहे?
[0:52]क्योंकि वो उनके गुलाम हैं। यूएसए के। धोखे से धोखे से मारा
[0:56]गया। अभी तक सऊदी बचा हुआ है। वह आपका मक्के और मदीने
[0:59]की वजह से बचा हुआ है। कोई 57 बहनों के जो है
[1:02]बीच में एक भाई था मुस्लिम कंट्री में। आप इनको जानते हैं?
[1:05]बिल्कुल। कौन है ये?
[1:07]ये ईरान के सुप्रीम लीडर हैं। नाम है खमनाई साहब हैं। खामनाई
[1:11]साहब हैं। यस। तो इनके बारे में क्या जानते हैं आप?
[1:13]इनके बारे में बहुत कुछ जानता हूं सर। मेरा नाम मिस्टर आमिर
[1:16]खान है। और मैं एक टीचर हूं इनके बारे में। मैं इनको
[1:18]मतलब बहुत बता सकता हूं इनके बारे में। एक मतलब कौम के
[1:21]अब तक जनता को जब से दुनिया कायम हुई है मतलब एक
[1:24]ऐसे लीडर रहे हैं उन्होंने सिर्फ एक संकेत दिया कि अगर आप
[1:26]लोग अगर हम लोग एक रहते हैं तो हम लोग बहुत कुछ
[1:28]कर सकते हैं लाइफ में जाने के बाद तो इनका मोटिव था
[1:31]यूनिटी यूनिटी से था इनका मोटिव यानी कि अगर हम लोग एक
[1:33]साथ मतलब इकट्ठे होकर एक एक साथ हम काम करते हैं हम
[1:35]लोग तो हम लाइफ में कुछ भी कर सकते हैं सलाम वालेकुम
[1:37]वालेकुम सलाम इनको जानते हैं जी बिल्कुल जानते कौन है ये ये
[1:40]हमारे रहबर हैं आपके रहबर हैं हां साहब जी अच्छा तो आप
[1:44]सुन्नी है कि शिया सुन्नी है भाई ये आपके रहबर हैं जी
[1:47]बिल्कुल हैं तो क्या जानते हैं इनके बारे ये ईरान के रहबर
[1:52]हैं। सुप्रीम लीडर हैं हमारे। हमारी उम्मत के एक बहुत बड़े क्या
[1:55]कहते हैं?
[1:56]पिलर। बिलर हैं। बिल्कुल जिनको शहीद कर दिया गया। तो क्या आप
[2:00]इनको जानते हैं?
[2:01]इनकी फोटो आपकी दुकान पे भी लगी है। जी बिल्कुल जानते हैं।
[2:03]कौन है?
[2:05]ये हमारे खामनी साहब हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर रहबर मुअज्जम। इनकी
[2:10]इज्जत हमारे दिल में बहुत है। हमारी जान से बढ़कर है इनकी
[2:15]अहमियत। दुश्मनाने जो इस्लाम है इस्लाम के जो दुश्मन है के बिल्कुल
[2:19]एक कैसे दुश्मनों के सामने एक मजबूत पिलर बनके 56 मुल्क इस्लाम
[2:27]के होने के बावजूद इस्लामिक 56 कंट्री होने के बावजूद एक वाहिद
[2:30]ईरान कैसे खड़ा डट के खड़ा बहुत अच्छी तरीके से जानते हैं
[2:35]जी ये कौन है ये सैयद आयतुल्लाह अली खामनी साहब हैं जो
[2:39]ईरान के सुप्रीम लीडर है जिनको अभी कुछ नाजायज और जालिम लोगों
[2:45]ने शहीद कर दिया गया। बता नहीं सकता इसके कोई वर्ड्स नहीं
[2:48]है। मैं जब से इनको जानता हूं तो रेस्पेक्ट के मामले में
[2:53]तो मैं इनको एक्सप्रेस ही नहीं कर सकता। बियों्ड द लव। मतलब
[2:55]कुछ न्यूज़ तो ऐसा बता रहे हैं कि अभी हुए नहीं है।
[2:58]मतलब जिंदा है ये। अच्छा आपको लगता है अभी जिंदा है। हां
[3:01]लगता है। बाकी उन्होंने कंफर्म कर दिया है। शहीद हो गए। कंफर्म
[3:03]कर दिया। पर मैंने कुछ रील्स देखी थी। कल कुछ वीडियो देखी
[3:07]थी उसमें दिखा रहे थे कि हॉस्पिटल के अंदर है अभी भी।
[3:10]तो जब इनकी खबर सुनी इंतकाल की शहीद होने की तो कैसा
[3:12]महसूस हुआ?
[3:13]ये बहुत बुरा महसूस हुआ है। क्यों?
[3:16]क्योंकि ये वहां के लीडर थे। सही काम कर रहे थे। अच्छे
[3:21]थे। बहुत काफी लोग मुतासिर हैं। लोगों को दिलों में बहुत दर्द
[3:25]है। एक यानी गम है। गम का एहसास है कि भाई एक
[3:29]आदमी फिक्रमंद आदमी था। मुसलमानों के बारे में और कौम के बारे
[3:32]में। क्योंकि देखिए आप इतना बड़ा लीडर जब जिनकी शहादत हो जाती
[3:37]है और लोग उनको फॉलो कर रहे होते हैं और एकदम से
[3:41]पता चलता है उनकी शहादत हो गई तो लोग बहुत अफसोस कर
[3:42]रहे हैं। देख रहा हूं मैं सब जगह सारे न्यूज़ पे चैनल
[3:45]पे यही चल रहा है आजकल तो फिर भी वो हमारे लिए
[3:48]बहुत मैटर कर रहा था कि ये किसी ने हम मुसलमानों के
[3:51]लिए आवाज उठाई है। वो बेचारे वहां गाजा के अंदर फिलिस्तीन छोटे-छोटे
[3:54]बच्चों को मारा जा रहा था। उनके लिए कोई आवाज नहीं उठा
[3:58]रहा था। और जितने भी अरब मुालिक हैं ये जितने भी हैं
[4:00]मुस्लिम देश वो कोई भी साथ देने को राजी नहीं है क्योंकि
[4:04]वो सारे सबको यूएसए को फॉलो करते हैं। बिल्कुल और इन्होंने जब
[4:08]आवाज उठाने की कोशिश करी उनको शहीद कर दिया गया। पहले तो
[4:11]यकीन नहीं हुआ और सच बताऊं तो आपको बहुत देर तक एटलीस्ट
[4:16]जब तक जो है ईरान से खबर नहीं आ गया कि ये
[4:21]शहीद हो गए तब तक यकीन नहीं हुआ। और मुझे याद है
[4:24]कि हमारे सारे रूममेट भी थे। जब अचानक इनकी शहादत की जो
[4:26]है खबर मिली तो सब लोग फूट-फूट कर रोने लगे। बिल्कुल। तो
[4:30]बहुत जो है उम्मते मुस्लिमा आपने एक जो है नौजवान ये एक
[4:36]लीडर खोद दिया है। एक तरह से आप कहेंकि मुस्लिम कंट्री तो
[4:42]57 कंट्री है। लेकिन एक ही मद मर्द मुजाहिद ऐसा लीडर जो
[4:44]है आया खनी थे। जो पूरे अगर आप कहें कोई 57 बहनों
[4:49]के जो है बीच में एक भाई था मुस्लिम कंट्री में। तो
[4:54]अल्लाह ताला इनको जो है जन्नत में आला से आला मुकाम अता
[4:56]फरमाए। तो जो ही आपने इनकी शहादत की खबर सुनी आप पे
[5:02]क्या बीती?
[5:02]अ अगर मुझसे वाकई अगर सच में पूछे तो ऐसा लग रहा
[5:06]था कि जैसे जैसे घर का बड़ा या अपना कोई बाप खत्म
[5:09]हो जाता है। तो कुछ दिन तो ऐसे ही रहा और अभी
[5:12]भी इस तरीके का दर्द मेरे अंदर है। बहुत दुख हुआ। हमें
[5:15]तो पहले यकीन ही नहीं हो रहा था कि हमारे रहबर शहीद
[5:18]हो गए हैं। लेकिन फिर बाद में काफी सोर्सर्सेस से हमें पता
[5:21]चला तो हमें काफी दुख हुआ। फिर हमने काफी प्रोटेस्ट भी किए
[5:26]इसके अगेंस्ट। कल भी हम हमने कैंडल मार्च निकलवाया था। माशा्लाह काफी
[5:28]अच्छे तादाद में लोग आए थे। सुन्नी शिया साहब आए थे। जब
[5:32]किसी की मां या बाप कोई मरता के कैसा अफसोस हुआ था।
[5:37]ऐसे ही एक मुसलमानों के लिए जब ये गए तो ऐसे ही
[5:42]रोना हम आया। अफसोस हुआ। यहां तक कि तीन से चार दिन
[5:46]खाना भी नहीं खाया। एक लिक्विड पे जी जी। सिर्फ पानी जूस
[5:50]जैसे रमजान चल रहे हैं तो बस पानी और जूस पर रहेगा।
[5:52]खाना तो अलग नहीं खाया। ये मानो कि मतलब हम अपने को
[5:56]संभाल नहीं पा रहे थे किसी भी कीमत पर। मतलब यानी कि
[5:57]मतलब आप जिसको अपना एक आइडियल मानते हो अपना लीडर मानते हो।
[6:01]ठीक दिल से लीडर मानते हो आप लोग तो उसकी शहादत मतलब
[6:04]अचानक से ऐसा हमला हुआ है। अगर ये हमला कहने सामने सामने
[6:06]हुआ होता तो हम बिल्कुल एक तरफ जीत चुके होते। लेकिन ये
[6:10]ये जो एक काराना हमला था ये बिल्कुल यानी कि मैं ये
[6:12]कहना चाहूंगा इस कंडीशंस में कि मतलब इंसान के खिलाफ हमला हुआ
[6:15]था। बिलकुल सुनी यार बहुत गम रंज हुआ। कैसा महसूस हुआ?
[6:18]बहुत रंज हुआ। जब से सुनी बहुत ज्यादा यार। तो ये इस्लामिक
[6:23]स्टेट डिफरेंट डिफरेंट इस्लामिक स्टेट्स हैं जिनके लिए इन्होंने मुहिम छेड़ी जो
[6:27]कि बहुत ज्यादा अप्रट होकर चीजों को मतलब इन्होंने अपफ्रंट होकर ये
[6:32]चीजों को क्या कह सकते हैं?
[6:33]वैलिडेट किया। बिल्कुल। बिल्कुल काउंटर किया। बिल्कुल इस्लाम के लिए। जबकि बहुत
[6:38]से सुन्नी सुप्रीम लीडर्स भी हैं जिन्होंने आवाज नहीं उठाई। बिल्कुल। और
[6:40]ये बीइंग अ शिया मुस्लिम बीइंग अ शिया लीडर इन्होंने बिना किसी
[6:44]कंसीडरेशन के कौन शिया है कौन सुन्नी है। उसी को बरकरार रख
[6:46]बिल्कुल उस चीज को बरकरार रख। इंसानियत के ऐतबार से देखा जाए
[6:52]तो सही थे। वरना अगर इस्लाम के जो हम लोग जिसे फॉलो
[6:55]करते हैं उसी लिहाज से तो कहीं ना कहीं वो गलत थे।
[6:57]गलत किस लिहाज से थे?
[6:59]तौहीद की तरदीद भी इन्होंने की है। कहां पे?
[7:02]कहीं की थी शायद कुरान कुरान में। सुना हूं ऐसे पढ़ा हूं।
[7:07]मतलब कहां से पढ़े हैं?
[7:09]शायद न्यूज़ पे ही सुना हूं। मतलब आप शोर नहीं है। आपने
[7:13]बस देख ही दिखाई चीजों पे यकीन कर लिया। तो रहने दीजिए
[7:17]भाई। बाकी आप छोड़ें। आपने इनकी शहादत की खबर सुनी?
[7:19]जी सुनी। कैसा महसूस हुआ?
[7:21]बुरा लगा। क्यों?
[7:22]अभी तो बुरे थे। अच्छे इंसान ही हैं। कहीं ना कहीं तो
[7:27]हमने कहा पहले इंसानियत के नाते तो भाई कोई भी हो तो
[7:31]उतना तो गिल्ट होता है। आपको क्या लगता है अभी जो वॉर
[7:36]चल रही है ईरान, इजराइल कौन जीतेगा?
[7:38]वो तो अब पता नहीं कौन जीतेगा। ऐसे क्या लग रहा है
[7:42]ग्राउंड लेवल पे आप न्यूज़ बहुत देखते हैं जैसे आपने बताया तो
[7:44]क्या लगता है कौन जीतेंगे?
[7:48]ईरान को ही जीतना चाहिए। चाहिए लेकिन जीतेंगे कौन?
[7:51]अब ये तो वोट पता लगेगा वार के लास्ट में। कौन जीतेगा?
[7:56]पहले ही बताया गया था। अभी जो मुसलमान कौम है, यूनिटी की
[8:02]कितनी जरूरत है?
[8:03]जरूरत तो है। जरूरत है बहुत। कितनी?
[8:06]काफी है। क्यों जरूरत है यूनिटी की?
[8:10]बगैर मेल मिलाओगे तो कुछ होगा नहीं भाई। अच्छा मेल मिलाओ की
[8:15]बात हो रही है जो हमारी सऊदी हैं, अरब कंट्रीज हैं वो
[8:18]क्यों नहीं साथ दे रहे?
[8:19]तो उनसे जाकर पूछिए। अच्छा अच्छा तो उनसे जाकर पूछेंगे। तो मैं
[8:24]उनसे जाकर पूछूंगा लेकिन आप बताएं वो साथ क्यों नहीं दे रहे?
[8:27]आपको क्या लगता है अपनी लेवल पे?
[8:28]हमें क्या मालूम भाई?
[8:29]हम तो यहां रह रहे हैं इंडिया में। अच्छा। कभी जाना होगा
[8:33]तो फिर। तो आप साथ हैं किसके?
[8:36]इस जो कि हमारी मुसलमान कौम है अभी लड़ रही है दुश्मन
[8:42]के साथ शैतान के साथ उनके साथ नहीं है आप बताइए शैतान
[8:46]कौन है शैतान इजराइल है शैतान नहीं है इजराइल बिल्कुल है तो
[8:49]उनके साथ अभी ईरान लड़ रहा है हां उसी बारे में मैं
[8:54]बता रहा हूं सही है बिल्कुल सबसे पहली चीज कि वो हमारे
[8:56]लिए लड़ रहे थे हां सबसे पहली चीज को वो दिखाए कि
[8:59]इस्लाम है क्या फस्तीन के लिए लड़े लड़े बिल्कुल और वो खुद
[9:04]तो शिया थे लेकिन फस्तीन में शिया नहीं है। लेकिन लड़े वो।
[9:07]बिल्कुल। तो अभी यूनिटी की कितनी जरूरत है?
[9:09]हद से ज्यादा है। जब तक हम लोग यूनिटी नहीं करेंगे तब
[9:14]तक जो है ना हमारा इस्लाम और पीछे जाता रहेगा। सबसे पहले
[9:17]तो जो वॉर चल रही है कौन जीतेगा?
[9:20]कब्जा तो इजराइल का ही होगा। अच्छा। लास्ट तक। उसके बाद फिर
[9:26]जाके लास्ट में फिर ईरान फतह करेगा इजराइल को लास्ट में। ठीक
[9:28]है। आपको लगता है ईरान कब्जा कर ये आपको लगता है इजराइल
[9:31]कब्जा कर लेगा?
[9:31]बिल्कुल। ऐसा क्यों लगता है?
[9:34]क्योंकि कुरान में जाहिर है भाई। कुरान में जाहिर है। हां बिल्कुल
[9:37]है। हदीस इसमें भी है। मैं रात ही सुना रहा हूं इसका
[9:41]बयान ये जो थे आपके नाम इसरार अहमद का। अच्छा डॉक्टर इसरार
[9:46]का डॉक्टर इसरार का मैंने क्या बता रहे हैं डॉक्टर इसरार?
[9:49]भाई वो बता रहे थे जैसा के कि कब्जा होगा। कुछ-कुछ मालिक
[9:54]जो हैं वो कब्जा होंगे उसके। की बात कर रहे थे। क्योंकि
[10:00]हदीस में पूरा बयान था। मैंने पूरा ये नहीं था। अजान का
[10:04]टाइम हो रहा था। मैं नमाज पढ़ने चला गया था। बिल्कुल बिल्कुल।
[10:07]तो आपको क्या लगता है?
[10:07]अभी आगे ईरान के लिए क्या होगा?
[10:10]थोड़ा सा दिक्कतें आएंगी। हां मगर इंशाल्लाह फिर हम लोगों की जीत
[10:16]होगी। इंशा्लाह तो आप एक सुन्नी हैं। तो कितनी जरूरी है शिया
[10:19]सुन्नी यूनिटी अभी?
[10:19]बहुत जरूरी है उम्मत के लिए तो खासकर बहुत जरूरी है क्योंकि
[10:24]दुनिया में इतनी नफरत फैल चुकी है कि मुसलमान को तोड़ने के
[10:26]पीछे सब लगे हुए हैं और ये हमारा फर्ज है कि हम
[10:31]साथ में रहकर मुसलमान उम्मत की तरह आगे बढ़े आज ही जरूरी
[10:33]नहीं है। ये तो हमेशा से जरूरी है। इस मैटर पे नहीं
[10:38]और ये हमेशा से जरूरी थी। जरूरी है और जरूरी रहेगी। बहुत
[10:42]जरूरत है। बहुत जरूरत है। यूनिटी तो बहुत की जरूरत बगैर यूनिटी
[10:48]के काम चलेगा नहीं। भाई अपने आप आपसी इलाफ अलग हैं। लेकिन
[10:51]जब मुसलमानों का इ्तमाई कोई मसला आए तो सबको एक होना चाहिए।
[10:54]बहुत ज्यादा जरूरी है। पर वो हमारे अंदर है नहीं। अभी है
[10:58]नहीं तो होनी चाहिए। बिल्कुल होनी चाहिए। तो आप मुझे अभी बताएं
[11:02]अभी हमारी कौम में यूनिटी की कितनी जरूरत है?
[11:04]बहुत ज्यादा जरूरत है। ये शिया सुन्नी का मसला छोड़ के सबको
[11:10]एक अपना अल्लाह के पीछे अल्लाह के रसूल के पीछे हमने इतात
[11:14]करनी है। आयतुल्लाह खामनाई का भी यही मोटिव था। कि शिया सुन्नी
[11:18]छोड़कर उनका फिलिस्तीन में उन्होंने पूरा पार्ट अदा कर दिया। फिलिस्तीन में
[11:21]शिया कहां है?
[11:22]हम एक उन्होंने फिलिस्तीन के लिए लड़ाई लड़ी उन्होंने। वहां शिया है
[11:26]नहीं। वहां कोई नहीं बिल्कुल वो उनके लिए चीज नहीं था। शिया
[11:31]सुनने का कोई मसला था। वो तो ये था कि हक के
[11:34]लिए लड़ाई लड़ते थे। ये उनका मेन मकसद था हक के लिए।
[11:36]सुनी सब एक है। हमारा दीन, हमारा कुरान एक है। हमें इस
[11:39]चीज से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि कौन शिया है और
[11:43]कौन सुनी है। हम लोगों को सिर्फ इस बात का सिर्फ इस
[11:46]बात के ऊपर नजर रखनी है कि हमको एक साथ जाना है।
[11:48]बिल्कुल चाहे जिएंगे चाहे मरेंगे सब एक साथ मरेंगे। इंशा्लाह और इस
[11:53]टाइम में अगर कामनाई साहब मतलब शहीद हुए तो लोग उन लोगों
[11:58]को ये नहीं लगना चाहिए कि मतलब ईरान मतलब हार गया। इंशा्लाह
[12:02]उन्होंने अगर शहादत दी है तो इंशाल्लाह कोई ना कोई इंकलाब जरूर
[12:06]आएगा इंशा्लाह और हमारी दुआ ये है और हमारा अगर हमारी और
[12:09]हमें भी मौका मिले तो हम पीछे नहीं हटेंगे आगे जाने से
[12:14]कहीं भी और हम भी शहादत के लिए हम भी तैयार हैं
[12:16]किसी भी टाइम थैंक यू इंशाल्लाह थैंक यू सो मच और ये
[12:19]उसी इंसान को मिलता है जिसको ऊपर वाला नवाजता है बाकी शहादत
[12:23]पाना बहुत बड़ी बात है अभी के वक्त में शिया सुन्नी यूनिटी
[12:26]कितनी जरूरी है बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा इनफैक्ट इस चीज में तो
[12:30]अभी डिफरेंसेस आने नहीं चाहिए लोगों के बीच में उन्हें इस चीज
[12:34]का तफरका जो पैदा हो गया है उन्हें इसे माइन्यूट करना चाहिए
[12:36]बहुत ज्यादा क्योंकि यूनिटी इंटीग्रेशन बहुत जरूरी है आज के टाइम पे
[12:39]क्योंकि इस चीज का डिवाइड एंड रूल वाली पॉलिसी आज के इस्लाम
[12:43]में बहुत ज्यादा चैनलाइज कर रहे हैं लोग इस चीज को तो
[12:47]जो बाहर के हैं दूसरी कौम के लोग हैं वो इस चीज
[12:47]को बहुत ज्यादा फायदा उठा रहे हैं इस चीज का तो इस
[12:50]चीज को थोड़ा दरकिनार करके हमें सोचना चाहिए उस बारे में कुछ
[12:52]भी नहीं है देखिए हमारा मेरा सिर्फ कहने का मतलब ये है
[12:55]कि हम लोग सिया सुन्न वो तो सेकेंडरी बात है फर्स्ट हम
[12:57]मुस्लिम्स हैं ठीक है हमारे क्योंकि हमारा प्रॉफिट एक है और हमारा
[13:01]क्या नाम है सारी कंडीशन से एक रखी हुई है। अगर हम
[13:04]लोग सिर्फ बस जो आने वाली जनरेशन है अगर हम उसको यह
[13:07]मैसेज दे के सियास सुन्नी कुछ नहीं होता। हम सब लोग एक
[13:08]ही हैं। ठीक है?
[13:09]और वो लोग एक डायरेक्शन में काम कर हम लोग फिर कुछ
[13:11]भी कर सकता है बेटा। आपको लगता है खामनाई साहब की मैसेज
[13:13]यही थी। यही थी। यही बिल्कुल यही मैसेज थी। तो जो बाकी
[13:17]अरब मलिक हैं वो साथ नहीं दे रहे हैं। जी क्यों?
[13:20]अब इंसान ये तो हर दौर में रहा है ना। सबके ज़हन
[13:24]में पर्दा होता है। इंशाल्लाह वही पर्दाफाश होगा कभी ना कभी। सबको
[13:30]अकल आएगी। अल्लाह हिदायत दे उन्हें भी। व्यसन परस्त हो चुके हैं
[13:32]और वो उनको गुलामी की आदत पड़ चुकी है। गुलामी की आदत
[13:35]हां और इस लेवल के गुलाम हो चुके हैं कि अब उनको
[13:38]बॉडी में जो होते हैं ना हरारत भी नहीं होती अब उनकी।
[13:41]अब इसको तो वही जानते हैं ना क्यों नहीं दे रहे साहब?
[13:44]उनके अपने मफाद हैं। ईमान की कमजोरी है। ईमान का ज़फ है।
[13:49]हमारे मफाद खत्म हो जाएंगे। हमारे बिजनेस मुतासिर हो जाएंगे। बिल्कुल। क्योंकि
[13:53]वो उनके गुलाम है यूएसए के। अच्छा। साफ सीधी बात सब दिखता
[13:58]है कि वो उनके इनको फॉलो कर रहे हैं। उनके पीछे चल
[14:02]रहे हैं और इन्होंने उनसे हट के आवाज उठाई तो इनको शहीद
[14:04]कर दिया गया। हां भाई ये तो अब देखो उन्हें करनी चाहिए
[14:06]सब उन्हें तो करनी चाहिए। वो तो सब उनके चमचे बने पड़े
[14:09]हैं। अमेरिका अमेरिका के चमचे बने हैं। सब अमेरिका ठीक। सब हरामखोर
[14:15]है। हराम मालिक तो इनका चापलूस बना पड़ा है। इजराइल का और
[14:17]अमेरिका के क्योंकि पहले से उनके अड्डे हैं वहां। हम तो वो
[14:21]तो साथ देंगे ही। देखो क्या रीजन है उनका वो वो जानते
[14:25]हैं इसके बारे में मैं कुछ वो वो नहीं करता एक्सप्लेन लेकिन
[14:27]हां ये है कि ईरान का साथ देना चाहिए साथ देना चाहिए
[14:31]चलता हूं क्या आपको लगता है ईरान हक पे है हक पे
[14:36]है नहीं देखो साथ का तो मसला ऐसा जिस जो जैसा माल
[14:38]खाएगा हालात तो उसके ऐसे ही होंगे उस्ताद अब जब आदमी अमेरिका
[14:44]में जाके मसर में जाके अय्याशी गड्ढे करेगा अय्याशी करेगा तो उस्ताद
[14:48]वो कहां से एक होंगे अगर इंसान का दिल मुर्दा होता है
[14:51]ना तो वो कुछ नहीं कर क्योंकि उन लोगों का दिल मुर्दा
[14:54]है। ठीक है?
[14:53]वह लोग बिक चुके हैं और जो उनकी जनरेशन है वन आइटम
[14:55]वह भी बिक चुकी है। बिक चुके हैं। तो वह लोग बिक
[14:58]चुके हैं। ठीक है?
[14:59]तो हम उनके ऊपर बिलकुल नहीं कर सकते। भाई मैं आपसे कहना
[15:00]चाहता हूं कि अपनी ताकत एक साथ बनाइए आप लोग। जो भी
[15:03]आपके अंदर पोटेंशियल है, ताकत है आपकी। ठीक है?
[15:05]वो ताकत आप स्टडी में लगाओ। भाई बहुत सारी चीजें हैं। गिव
[15:08]एंड टेक वाला मामला है हिसाब किताब है। यूएस के साथ भी
[15:10]इनका बहुत ज्यादा चलता है। गल्फ कंट्रीज का। ऑयल के बदले में
[15:12]रिटालिएशन होता है इनका। बहुत सारी पॉलिसी फॉर्मुलेशन में काम आता है
[15:16]ये सारी चीजें। तो बहुत देखो यह सब जितने भी अरब कंट्री
[15:20]है वह सब जो है इजराइल और अमेरिका के जो है पिट्ठू
[15:22]हैं गुलाम हो चुके हैं और इन लोगों का जो जितने भी
[15:25]आप देखेंगे सूदी जो है इंटरेस्ट है इन लोगों का बैंक में
[15:29]जितने भी पैसे हैं वो कहां है इजराइल और जो है यहूदी
[15:31]मेंटेन करता है तो उन्हें डर होती है कि भाई गवर्नमेंट पलट
[15:34]देगा बदल देगा और जो है पैसे खत्म कर देगा तो एक
[15:38]डर होती है इसकी वजह से वो साथ नहीं दे रहे हैं
[15:42]वो बोलते हैं ईमान तो नाम का तो मुसलमान है लेकिन अंदर
[15:44]से ईमान खोखला है तो आपको लगता है जो कि कर्बला की
[15:49]स्टोरी थी वो आज रिपीट हो रही है। हां बिल्कुल सही बात
[15:51]है। हो रही है यस यस इसमें मतलब ये सही हुई मतलब
[15:54]रिपीट हो रही है। बिल्कुल हमारे रहबर भी उसी सिचुएशन में शहीद
[15:58]हुए हैं जो कि एक बहुत बड़ी बात है और ये हमारे
[16:01]लिए बहुत गर्व की बात है कि हमें कर्बला वापस से याद
[16:06]आई है। इस हिसाब से तो ये काफी अच्छी बात है। मैंने
[16:07]मैं अभी कई दिन से मेरे मन में एक सवाल आ रहा
[16:13]था। मैंने यजीद की कहानी तो पढ़ी थी लेकिन अब जाहिर तौर
[16:16]पर यजी दिखाई दे रहे हैं। क्या इमाम हुसैन दिखाई दे रहे
[16:21]हैं?
[16:19]हां, इमाम हुसैन भी दिखाई दे रहे हैं। और यजीद तो सामने
[16:23]खड़े हुए हैं। बिल्कुल और उनके खिलाफ वही वाला मंजर के अकेले
[16:27]लड़ रहे हैं। वो वाला बिल्कुल सीन एकदम डिक्टो क्रिएट हो रहा
[16:31]है। कुर्बानी तो देखो इस्लाम में शर्त है। जो भी हक को
[16:33]लेकर आएगा उसको कुर्बानी देनी पड़ेगी। बिल्कुल। और कुर्बानी किसी भी तरह
[16:39]से हो सकती है। और ये तो होता है कि भाई आपस
[16:42]में कुछ गद्दार भी होते हैं, कुछ मुनाफिक भी होते हैं। हुजूर
[16:44]के जमाने से बताया है। बिलकुल तो उनसे चौकस रहने की ज़रूरत
[16:49]है। बिलकुल गलत कर्बला जैसा हुआ। बिलकुल बहुत ज्यादा ही लिव्ड लाइक
[16:53]अह हज़रत हुसैन डाइड लाइक हिम। बिल्कुल बिल्कुल वैसा ही है। एकदम
[16:57]जो है अगर आप हिस्ट्री जो है रिपीट हो चुकी है अगर
[16:59]देखें तो और ईरान कभी भी झुकने वाला नहीं है। आप हिस्ट्री
[17:04]अगर जो लोग नहीं जानते हैं तो हिस्ट्री पढ़ लेना चाहिए ईरान
[17:07]से लड़ने से पहले कि ये लोग तब भी ना झुके थे
[17:11]और आज भी नहीं झुकेंगे। बिल्कुल बिल्कुल। तो आपको क्या लगता है
[17:14]आगे ईरान के लिए क्या होने वाला है आफ्टर ह देखो अल्लाह
[17:18]बेहतर जानता है उस्ताद हम तो दुआ ही कर सकते हैं और
[17:22]दुआ कर रहे हैं कि क्या होगा बाकी हमारी दुआ साथ में
[17:27]है हम दुआ भी कर रहे हैं और जितने भी हमारे भाई
[17:28]हैं सब दुआ कर रहे हैं इंशाल्लाह ईरान फतेह होगा और इन
[17:32]सब पे गालिब आएगा इंशा्लाह तो आपको लगता है ईरान जीतेगा इंशा्लाह
[17:37]भाई पक्का यकीन है पक्का उम्मते मुस्लिमा भी एक होकर इंशा्लाह आगे
[17:41]आएगी सिया सुन्नी होकर इस दावे को इंशाल्लाह मजबूत करेंगे कि इंशाल्लाह
[17:47]साथ में खड़े ईरान के साथ में खड़े कोई भी यहां पे
[17:50]खिलाफ नहीं पूरे 40 फुटे पे पूरे शाहीन बाग में अल्हम्दुलिल्लाह सब
[17:52]साथ में है कोई खिलाफ नहीं है बिल्कुल सिया सुन्नी सब आपस
[17:57]में भाई हैं तो ये है हमारे सुन्नी भाइयों की आवाज जैसे
[17:59]आपने देखा कितना यूनिटी के साथ है और कुछ लोग तो उनको
[18:03]अपना रहबर मानते हैं उनको अपना इमाम मानते हैं बाकी आपने देखा
[18:08]होगा कितना जज्बा है इनमें भी ईरान को लेकर रहबर को लेकर
[18:11]और दुश्मनों के लिए बिल्कुल भी पीछे नहीं हट रहे हैं आवाज
[18:15]उठाने से और कैंडल मार्चेस हमारे जो प्रोटेस्ट होते हैं उनमें भी
[18:18]शामिल होते हैं। बाकी मैसेज यही है इनकी तरफ से भी हमारी
[18:22]तरफ से भी कि शिया सुन्नी यूनिटी को मेंटेन करना है। इंशा्लाह
[18:25]फतह हमारी होगी। सबका यही कहना है कि इंशा्लाह ईरान की ही
[18:30]जीत होगी।
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