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Shocking Statement About Ayatullah Khamenei #khamenei
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26/03/13
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Shocking Statement About Ayatullah Khamenei #khamenei
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[0:00]और प्रेसर चाहे कितना भी ताकतवर हो, उसके सामने भी खड़ा रहा
[0:03]जा सकता है। एंड दैट इज़ द बिगेस्ट कंट्रीब्यूशन [संगीत] ऑफ़ आयतुल्लाह।
[0:08]आपको क्या लगता है विक्ट्री किसकी होगी?
[0:10]ऑलरेडी ईरान जीत चुका है। तो जब आयतुल्लाह खामनाई की शहादत की
[0:16]खबर आपने सुनी, आपकी क्या फीलिंग्स रही?
[0:17]तो ऐसा लगा कि किसी ने पास से कोई चीज छीन ली।
[0:19]क्या उम्मीदें हैं नई लीडर से?
[0:21]जंग में कत्ल सिपाही होंगे, सुरखरू जुल इलाही होंगे। मेरे ख्याल से
[0:28]नैतन्या को ईरान में एक गाजा बनाने के लिए कोशिश कर रहा
[0:32]है। अस्सलाम वालेकुम वालेकुम सलाम रहमतुल्लाह। तो जब आयतुल्लाह खामनाई की शहादत
[0:45]की खबर आपने सुनी आपकी क्या फीलिंग्स रही?
[0:48]नहीं नहीं मैं समझता हूं वो ग्रेट लॉस है और यह के
[0:49]हमें यह समझना चाहिए कि हमने एक ऐसी शख्सियत को खोया है
[0:55]जो सिर्फ ईरान के लिए सरमाए इफ्तखार नहीं था बल्कि पूरे आलम
[0:58]इंसानियत के लिए था जिसने शिया और सुन्नी को करीब लाने के
[1:04]लिए सबसे ज्यादा कोशिश की। अजीब सी कैफियत थी और ज़हन जो
[1:11]है वो दिलो दिमाग बेकाबू हो रहा था कि दुनिया अब किस
[1:14]तरफ जाएगी। क्या तानाशाहों का कब्जा हो जाएगा दुनिया पे?
[1:20]क्योंकि देखिए यह ईरान की लड़ाई नहीं है। यह इस्लाम की भी
[1:23]लड़ाई नहीं है। ये कुल्ली तौर पर इंसानियत की लड़ाई है। इंसानियत
[1:28]की लड़ाई है। हम जब कहते हैं कि कर्बला जो है वो
[1:32]इंसानियत की लड़ाई है। तो हो सकता है कुछ लोगों को इसका
[1:34]जवाब आज तक ना मिला हो। मैं दे रहा हूं। आप सोचिए
[1:38]कि आज मुट्ठी भर यजीदी इस्लाम को दहशतगर्द की दहशतगर्दी की तरफ
[1:42]ले जाना चाहते हैं। मुट्ठी भर जो आज पैदा हो गए। सोचिए
[1:46]अगर इमाम हुसैन ने उस वक्त ना रोका होता यज़ीद को बेनकाब
[1:51]ना किया होता तो आज इस्लाम की क्या शक्ल सूरत होती?
[1:52]उन्होंने सुप्रीम सैक्रिफाइस देखे। सुप्रीम एक मिसाल कायम की है जिससे ना
[2:02]सिर्फ पूरी मुस्लिम कम्युनिटी को पूरे वर्ल्ड में बल्कि जितने भी मुस्तजफीन
[2:06]है यानी के जितने भी डेवलपिंग नेशंस हैं ग्लोबल साउथ भी जिन्हें
[2:11]कहा जाता है उन सबको एक उम्मीद दी के ऑपरेशर चाहे कितना
[2:16]भी ताकतवर हो उसके सामने भी खड़ा रहा जा सकता है। एंड
[2:19]दैट इज द बिगेस्ट कंट्रीब्यूशन ऑफ कमिटी। बहुत अफसोस हुआ। रोना आया।
[2:26]अभी तक आंसू नहीं थम रहे हैं। सिलसिला गम का तो जारी
[2:28]रहेगा ही। लेकिन एक जातेजाते भी तमाम शिया और सुन्नियों को एक
[2:34]प्लेटफार्म पे लाके खड़ा कर गए। वो तमाम मुस्लिम उम्मत के लिए
[2:36]वो पैगाम दे गए कि अगर हिम्मत हो दम हो तो जंग
[2:40]बदर का वो किस्सा जहां पे 313000 पे भारी होते हैं क्योंकि
[2:46]अल्लाह ताला के फरिश्ते मदद के लिए नाजिल होते हैं। ऐसा लग
[2:48]रहा है कुछ ऐसे ही फरिश्ते अल्लाह ताला की तरफ से ईरान
[2:51]पे भी नाजिल हो गए हैं। इतना सा मुल्क जो ग्लोबली आइसोलेट
[2:54]हो के बैठा था। इंटरनेशनल सेंशंस के तहत दबा हुआ था। तब
[2:57]भी डट के अमेरिका की बहुत ही दरेगम बेखौफ होके वो लड़
[3:03]रहे तो इसमें सलाम है ईरान को और सलाम है खामनाई साहब
[3:08]की शहादत को उनके लीडरशिप को और उनकी उस सोच को जो
[3:09]उनके जाने के बाद भी उनके बेटे और पूरी आवाम में देखने
[3:13]को मिलेगा और मिल रहा है। काफी टाइम तक एहसास नहीं हो
[3:18]रहा था शहादत का और लग रहा था कि दुश्मनों की कोई
[3:21]चाल ना हो। लेकिन जब पता चला तो ऐसा लगा कि किसी
[3:23]ने पास से कोई चीज छीन ली। लेकिन उनकी शहादत एक राह
[3:28]बन गई पूरी दुनिया के लिए और ईरान के लिए और उसी
[3:32]राह पर जो उन्होंने बताई थी उस पर चलकर आज दुश्मनों के
[3:35]मुंह खट्टे करें। आपके क्या थॉट्स हैं नई लीडर को लेकर?
[3:38]आयतुल्लाह मुजतबा खाम। देखिए अभी एक चीज एस्टैब्लिश हो चुकी है पूरी
[3:45]दुनिया में। इस वक्त दो खेमों में पूरी दुनिया बंटी हुई है।
[3:48]एक खेमा रिप्रेजेंट होता है एबस्टीन। मेंटालिटी से और दूसरा खमा जिसके
[3:55]सबसे आगे खड़े थे आयतुल्ला खमे साहब ईरान एस अ कंट्री तो
[3:58]इसमें कम से कम मुझे कोई शक और शुबे की गुंजाइश नहीं
[4:04]है ना सिर्फ पूरी मुस्लिम कम्युनिटी उम्मत जो दुनिया में है उसके
[4:13]और पूरे ग्लोबल साउथ के अगर कोई लीडरशिप है किसी कंट्री के
[4:16]के तरीके से देखी जा सकती है तो वो ईरान ही है
[4:21]और उसमें बेशक उनके के सुप्रीम लीडर अभी नए सुप्रीम लीडर हैं।
[4:23]तो ही इज़ द अनडिस्प्यूटेड लीडर ऑफ एंटायर मुस्लिम कम्युनिटी एंड द
[4:28]एंटायर ग्लोबल साउथ। एक प्रिंसिपल है कि डायनेस्टिक सक्सेशन सक्सेशन ठीक नहीं
[4:36]है। और इसलिए गल्फ जीसीसी में बहुत फियर था। लेकिन मेरे ख्याल
[4:45]से नया सुप्रीम लीडर स्टेबलाइज करेगा गवर्नमेंट का फंक्शनिंग और ईरान जीतेगा।
[4:52]नहीं नहीं इंशाल्लाह वो अपने वालिद के मिशन को आगे बढ़ाएंगे और
[4:58]ईरानी कौम जो है उसको नई बुलंदियों तक और सर बुलंदियों तक
[5:00]ले जाएंगे। जाहिर सी बात है मुस्तफा साहब अपने फादर के देखरेख
[5:07]में पले बड़े हैं। उनकी हमने पिछले लेबन के टाइम पे वॉर
[5:13]के टाइम पे हमने उनकी जो स्ट्रेंथ थे शो ऑफ स्ट्रेंथ थी
[5:15]वो देखी थी। इराक के टाइम पे देखी थी। हालांकि कोई ऑफिशियल
[5:19]पोजीशन वो होल्ड नहीं करते थे। लेकिन बैक एंड पे बहुत बड़ा
[5:21]सपोर्ट थे। और आज ईरान की तमाम आवाम के लिए एक रहबर
[5:26]बनने के लिए वो तैयार हुए हैं। ऐसे सुरते हाल में जहां
[5:30]पे उनकी खुद की जान भी खतरे में है। बावजूद उसके वो
[5:31]बैक आउट नहीं कर रहे हैं। बहुत बड़ी बात है। अल्लाह ताला
[5:35]उनके लिए काम आसान करे और इंशाल्लाह ताला ईरान को फतेह दे।
[5:37]ये तो सच है कि बेटा बाप की राह पर चलता है।
[5:40]वफादार बेटे वही होते हैं जो बाप के कहने पे चले। बाप
[5:44]के बताए हुए रास्ते पे चल। वो उस पर चल रहे हैं
[5:48]और मुबारकबाद के काबिल तो वहां की आवाम है ईरान की जो
[5:52]ईरान साथ दे रही है और पूरी दुनिया आप खाली ईरान की
[5:53]लड़ाई नहीं है ये पूरी दुनिया की लड़ाई है पूरी दुनिया सड़क
[5:57]पर है अब जहां तक ताल्लुक है नए सुप्रीम लीडर का तो
[6:00]देखिए उनकी बड़ी खिदमात है जो हमने पढ़ा है कि उन्होंने जो
[6:06]बसीजी फोर्स है उसकी भी उन्होंने कयादत की है और आज भी
[6:13]वह उसके सरबराह हैं। इससे पहले उन्होंने 89 90 की जो जंग
[6:19]थी उसमें भी उन्होंने बहुत अहम किरदार रोल किया है। फिर उनकी
[6:24]जो तालीमी सफर है वो बहुत ज्यादा हर फील्ड में उन्होंने तालीम
[6:28]हासिल की। तकरीबन 20 से 25 साल तक उन्होंने बड़े उलमा से
[6:34]तालीम हासिल की है। तो इससे अंदाजा ये होता है कि जो
[6:42]भी वहां के ग्रुप ने इनको मुंतखब किया है। वह बहुत सोच
[6:48]समझ के किया है। और इंशा्लाह जैसा कि अब कहा जा रहा
[6:56]है कि अल्लाह ने अगर 87 इयर्स ओल्ड आयतुल्लाह को लिया रहबर
[7:00]मुअज्जम को लिया तो वापस जो है 57 इयर्स ओल्ड वो ईरान
[7:06]को दिया है और जब से वो आए हैं मैं देख रहा
[7:11]हूं कि बहुत जोश है आईआरजीसी में बहुत जोश है ईरान की
[7:13]फौज में ईरान के लोगों में और कल जब ऐलान हुआ रात
[7:19]में शब में तो जिस तरह के नारे पूरे ईरान में तेहरान
[7:24]हो या मशहद हो या कुम हो हमने वीडियोस देखे हैं तो
[7:31]उससे यह लग रहा है कि ईरान ने बहुत जल्द बरव और
[7:35]एक सही फैसला लिया है। पूरी दुनिया को जो उम्मीद है वही
[7:37]हमें उम्मीद है कि जो ये हैजेमनी है जो रूह के बगैर
[7:45]लोग हैं जो दिल के बगैर लोग हैं ईमान की तो खैर
[7:49]उनसे क्या ही उम्मीद की जाए जिनकी रूह भी नहीं है ऐसे
[7:54]लोगों को उनकी सही जगह करके इंसानों की बरतरी हो सके इन
[7:57]शैतानों और हैवानों के ऊपर यही उम्मीद है पूरी दुनिया की ईरान
[8:04]से गज्जा के फस्तीन के लिए इमाम हमीई ने क्या किया देखिए
[8:06]उनको अगर उनकी आवाज उठाइए उनको इज्जत दी उनके लिए कहा सभी
[8:11]लोग आज कह रहे हैं कि गजा में जो कुछ हो रहा
[8:14]है गलत हो रहा है जो इन्हने किया इसराइल ने जो अमेरिका
[8:16]ने अमेरिका गलत साथ दे रहा है तो आज गजा और हमें
[8:20]बैतुल मुकद्दस हमें आजाद कराना है ऐसा क्या है ईरान हमास को
[8:27]सपोर्ट देता था लेकिन कुछ मटेरियल सपोर्ट बेचता नहीं था और आप
[8:31]गा के बारे में कहा मेरे ख्याल से नितन्या ईरान में एक
[8:36]गाजा बनाने के लिए कोशिश कर रहा है। ऐसा है कि सबसे
[8:40]बड़ी बात दुनिया की और छोड़ दीजिए जो बुनियादी तौर पे खवातीन
[8:46]को जो कि हमें दर्जा दिया गया है वो गैर मामूली है।
[8:48]दूसरी बात जो है जिस तरह के हमें और कयामे यमेस की
[8:54]इमाम खुमेनी ने बागबेल डाली उससे जिस तरह से दुनिया के अंदर
[8:58]एक बेचैनी पैदा हुई ईरान फस्तीन के मसले को लेकर और फलस्तीन
[9:06]को जिस तरह से आलम इस्ला आलम आलमी नक्शे पर कि हमें
[9:13]इमाम खुमेनी ने पेश किया और उसको बाद में ईरानी कौम ने
[9:15]जारीसारी रखा वो गैर मामूली बात है और यह रमजान है और
[9:20]अगला जुमा जो है वह रूह के यमेस का ही है। हमें
[9:24]इंशा्लाह उसका सब मिलके वह करेंगे। नहीं चाहे मैं देखिए अगर सिर्फ
[9:30]हम उन्हें गाजा में महदूद करेंगे तो हम उनके रोल को कम
[9:33]करके बताएंगे। गाजा, क्यूबा, वेनेजुएला यहां तक कि मैं कहूंगा इंडिया भी
[9:41]अमेरिका जिस तरीके से बिहेव खासतौर पे ट्रंप साहब जब से आए
[9:47]हैं बिहेव कर रहा था कि तुम ये करोगे, तुम वो करोगे,
[9:51]हम ग्रीनलैंड ले लेंगे, वेनेजुएला का ऑयल ले लेंगे, ईरान का ऑइल
[9:54]ले लेंगे, मिडिल ईस्ट का ऑयल ले लेंगे, ये कर देंगे, वो
[10:00]कर देंगे। उसमें पहला ब्रेक अगर किसी ने लगाया तो वो ईरान
[10:03]ने आया खमिनी साहब की लीडरशिप में लगाया। इसीलिए हम सब अब
[10:09]दुआ ही कर सकते हैं और यही उम्मीद करते हैं कि अल्लाह
[10:10]अगर हम में भी मौत आनी है तो हयातुल्लाह साहब के राह
[10:15]पे तो अभी मुसलमान कौम में यूनिटी की कितनीेंस है?
[10:17]देखिए यूनिटी तो है कुछ लोग हैं जो दबाव में हैं या
[10:21]अपने लालची हैं वो कर रहे हैं। ऐसा नहीं तो सारा एक
[10:25]हैं। और खाली हिंदू मुस्लिम का मामला नहीं है। यह मामला है।
[10:27]बुराई पर अच्छाई का बुराई पर अच्छाई के लिए सब एक हो
[10:32]रहे हैं। मैं यह कहूं कि नहीं ये गलत बात है जो
[10:35]ये समझता है कहता है कि मुसलमान एक हो रहे हैं। ये
[10:38]नहीं यूनिटी कायम हो चुकी है अभी मतलब हम सबको कि हमें
[10:41]ट्रंप का शुक्रगुजार होना चाहिए और इसराइल का कि उसने शिया और
[10:47]सुन्नी को सबको एकदम एक क्या जगह जमा कर दिया है। नहीं
[10:49]अब तो लीडरशिप भी है ना जिसके पीछे हम इकट्ठे हो सकते
[10:55]हैं। अभी तक तो लीडरशिप क्लियर नहीं थी। अब तब तक जब
[10:57]तक के ईरान से ज्यादा तब तक जब से आया खोमेनाई साहब
[11:02]से बड़ा कोई कुर्बानी नहीं दे दे तब तक कम से कम
[11:08]मुस्लिम कम्युनिटी की लीडरशिप ईरान और आया सुप्रीम लीडर ऑफ ईरान के
[11:11]हाथ में है। इसके बारे में कोई किसी को शक नहीं करना
[11:15]चाहिए। इससे बड़ी कोई कुर्बानी देगा तो बेशक वो मुस्तहक होगा। अरब
[11:17]कंट्रीज के बारे में जो इस वक्त उनका जो रिएक्शन है उस
[11:22]पे बात करें। अरब कंट्रीज का देखिए कहीं ना कहीं डिप्लोमेसी होती
[11:24]है। फॉरेन पॉलिसीज होती है। बहुत सारी इन्वेस्टमेंट होती है। जिसके लिए
[11:27]ओपनली अरब कंट्रीज नहीं बोल पा रही थी ईरान के फेवर में।
[11:30]लेकिन हम देख रहे हैं कि किस तरह से मुसाद के एजेंट्स
[11:34]जाके या तो सऊदी अरको में सऊदी अरेबिया में जिसे कोई वो
[11:36]उड़ा देते हैं या यूएई में बकायदा से अटैक्स करवा रहे हैं।
[11:40]तो सऊदी मुल्कों को भी समझ आ रहा है कि अमेरिका हमारा
[11:41]दोस्त नहीं है। उसका दोस्त सिर्फ इजराइल है और वो काम पड़ने
[11:46]पे सिर्फ और सिर्फ इजराइल का साथ देगा। तो अरब कंट्रीज भी
[11:49]धीरे-धीरे करके ऑन प्लेटफार्म सपोर्ट पे आ ही रही हैं ईरान के।
[11:54]आवाम और जनता तो हमेशा से वहां पे ईरान के सपोर्ट में
[11:58]थी और इंशा्लाह ताला हुकूमतें भी बहुत जल्द खुलेआम इस चीज को
[12:00]कहेंगी कि हम ईरान का सपोर्ट कर रहे हैं। इंशाल्लाह हमें पूरी
[12:01]उम्मीद है। तो जो अभी बाकी अरब मालिक हैं वो क्यों नहीं
[12:04]साथ दे रहे हैं?
[12:05]वो क्यों नहीं हिमायत [संगीत] कर रहे हैं। देखिए ऐसा है कि
[12:08]आप अगर ये सोचते हैं या दुनिया सोचती है कि साहब वो
[12:12]आए एक साथ और फौरन जो है वो अटैक कर दें मिलकर
[12:16]के। ऐसा नहीं होता है। आपको कहां लग रहा है कि साथ
[12:17]नहीं है?
[12:18]एक भी हमें मुस्लिम मुल्क बताइए जहां पे ईरान खिलाफ प्रोटेस्ट हुआ
[12:23]हो कि अटैक क्यों किया?
[12:23]एक भी हमें किसी ऐसे शाह का नाम बताइए, प्रिंस का नाम
[12:28]बताइए कि जिसने ये कहा हो कि हम जो है इसके खिलाफ
[12:30]कारवाई करेंगे। ओआईसी का क्या कोई हंगामी इजलास हुआ?
[12:33]10 दिन आज हो गए हैं। तो आप ये ये क्यों समझ
[12:38]रहे हैं कि सपोर्ट नहीं है?
[12:38]या आज भी जो वजीर खारजा है सैयद अब्बास राक्षशी वो तमाम
[12:43]मिडिल ईस्ट के लीडरान से बात कर रहे हैं। उनको राब्ते में
[12:49]ले रहे हैं। तो ये जो तमाम चीज़ इस इसको आप कैसे
[12:50]ये मानते हैं कि साहब सपोर्ट नहीं है। हां। फिर इसी दौरान
[12:54]आप देखिए अभी दो दिन पहले चीन से जिस तरह से सऊदी
[12:58]अरब ने एक बड़ी डील की है। यह आईना दिखाया अमेरिका को।
[13:01]अरब ने कहा कि साहब अब हम जितने हमने सौदे किए थे
[13:05]हम उसमें तकफीफ करेंगे। रिड्यूस करेंगे क्योंकि हम अमेरिका के साथ अब
[13:08]हमारी पोजीशन नहीं हमारा बड़ा लॉस हो गया है। तो यह एक
[13:13]चेंज देखिए जब ट्रेन भी अपना रास्ता बदलती है ना पटरी से
[13:18]तो वहां भी वो स्लो होती है और थोड़े झटके भी लगते
[13:19]हैं तो वो वो ट्रैक जो है चेंज हो रहा है पूरे
[13:23]मिडिल ईस्ट का जैसा कि हम बता रहे हैं। तो इसको इतनी
[13:27]जल्दबाजी मत कीजिए कि साहब वो साथ क्यों नहीं आ रहे?
[13:30]इतना आसान नहीं होता है जैसा हम समझते हैं। वक्त लगता है
[13:33]और ईरान अपने मकसद में पूरी तरीके से कामयाब है। उसका जो
[13:40]ऑब्जेक्टिव था कि बेसिस खत्म हो। इंशा्लाह आने वाले दिनों में आप
[13:43]देखेंगे कि मिडिल ईस्ट से कोई अमरी बेस नहीं रहेगा। आपके क्या
[13:48]थॉट्स हैं जो ईरान ने इस्लामिक रेवोल्यूशन सेट किया था दुनिया में।
[13:52]थोड़ा लेट ही सही लेकिन अब कामयाबी की तरफ बढ़ रहा है
[13:57]वो और मुझे तो कम से कम इसमें कोई शक और शबे
[14:00]की गुंजाइश नहीं है कि ईरान ने अमेरिकन हेजमनी को हरा दिया
[14:06]है। बाकी अब बाकी सब तो अल्लाह के हाथ में। एक रेवोलेशन
[14:08]तो हमने उनका देखा था इमाम खुमेनी साहब का। मैं ईरान गया
[14:13]था। मैंने उनका घर देखा। ऐसे लोग होते हैं मुजाहिद लोग जो
[14:16]क्या कहते हैं के किराए का मकान, टूटा हुआ मकान, साइकिल है
[14:21]ना?
[14:22]और एक इन लोगों का भी देखा कि सब बेटे किराए पे
[14:24]रहते हैं। खुद किराए पे रहते थे। मैं जो वहां के सुप्रीमो
[14:29]थे निजाज साहब उनके साथ रहा वहां एज ए के मैंने सब
[14:34]कुछ देखा कि ये नहीं कि जो कहते हैं वो करते हैं।
[14:38]गिरते हैं शह सवारी मैदान जंग में। वो तोफुल क्या चलेंगे जो
[14:40]घुटनों के बल चले?
[14:40]आपका क्या यकीन है कि आगे यकीन अल्लाह की जात पर है।
[14:46]अल्लाह से की जात से कभी मायूसी नहीं करनी चाहिए। ये लड़ाई
[14:48]तेल की नहीं है। ये लड़ाई बस बुराई पर अच्छाई की विजय
[14:55]की लड़ाई है। डू यू बिलीव कि ईरान की इन शैतानों पर
[14:58]फतह होगी। अगर मैं मुसलमान हूं तो मुझे यह पता है मेरा
[15:02]ईमान है ये। के ईमान की शैतान पे हमेशा फतेह हुई है।
[15:06]भले ही लेट हुई हो लेकिन होती है। और अब तो खैमनाई
[15:09]साहब के बाद तो अब रास्ता एकदम साफ नजर आ रहा है।
[15:13]अब कोई शक और शुबे की गुंजाइश बची ही नहीं। इंशा्लाह ताला
[15:18]ईरान की क्योंकि अगर वॉर ऑफ परसेप्शन है जैसे कि मैंने कहा
[15:20]तो ऑलरेडी ईरान जीत चुका है। एक छोटा सा मुल्क एक अकेले
[15:24]तन्हा मुल्क छोटा सा तो खैर वो इन साइज नहीं है बट
[15:25]छोटा सा मे बी इन टर्म्स ऑफ़ द काइंड ऑफ़ मिलिट्री दैट
[15:27]दे हैव इन टर्म्स ऑफ़ द काइंड ऑफ़ सपोर्ट दैट दे हैव
[15:32]उसमें ऑलरेडी ईरान जीत चुका है। अमेरिका, इजराइल, जैसी तानाशाह सरकारों के
[15:36]सामने अकेले तन्हा तन्हा मुल्क खड़ा हुआ है। तब भी बैकआउट नहीं
[15:39]करना है। जुमे का दिन होता है तो जुम्मे की नमाज़ पढ़ने
[15:42]करोड़ों की तादाद में वहां पे जनता मौजूद है। लोग वहां नहीं
[15:44]डर रहे हैं, नहीं बैक आउट हो रहे हैं। रमजान के महीने
[15:47]में ही कुरान नाजिल हुआ था। रमजान के महीने में जंग बदर
[15:51]हुई थी और रमजान के ही महीने में इंशा्लाह ताला ईरान को
[15:53]भी फतेह मिलेगी। हमारी दुआएं भी हैं और अल्लाह ताला से बहुत
[15:57]बहुत हमें उम्मीदें भी हैं इंशा्लाह। आपको क्या लगता है विक्ट्री किसकी
[16:02]होगी?
[16:00]नहीं ईरान के लिए सिर्फ सर्वाइवल विक्ट्री है। अमेरिका के लिए अगर
[16:10]ईरान का सरेंडर होता है तो अमेरिका का विजय नहीं है और
[16:19]नितिन आयोग को मैंने कहा वह कहता है एक गाजा बनाने के
[16:21]लिए वह होगा नहीं तो नतिन आयोग को विजय होगा नहीं खामोश
[16:25]मिजाजी तुझे जीने नहीं देगी दौर में जीना है तो हक की
[16:29]आवाज बुलंद कर दे इमाम खामनाई की शख्सियत के बारे में बस
[16:31]कुछ लाइंस बताएं नहीं इमाम खुमेनी इमाम खामनाई जो है बुनियादी तौर
[16:36]पे अगर आप उन्हें देखें तो बुनियादी तौर पे जैसे मैंने कहा
[16:40]कि शिया सुन्नी इत्तहाद के लिए उन्होंने कोशिशें की इसके अलावा अलावा
[16:45]सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने इस बात का हमें एक
[16:51]नया पैगाम दिया के कि हमें जंग में कत्ल सिपाही होंगे सुरखुरू
[16:55]जुल इलाही होंगे उन्होंने ऐसा कोई मौका नहीं दिया बल्कि वो ईरानी
[16:59]कवाम के साथ खड़े रहे और जब लोगों ने उनके लिए हिफाजती
[17:04]इंतजामात किए तो उन्होंने यह कहा कि मुझे आप पहले ईरानी कौम
[17:11]के साथ इत्तहाद और इत्तेफाक का वो कीजिए। उनकी हिफाजत का मामला
[17:13]कीजिए। उसके बाद मेरी फिक्र कीजिए। आयतुल्लाह खामिनाई की पर्सनालिटी के बारे
[17:18]में कुछ। एक ऐसा लीडर जिसके लिए एक मौका था कि वो
[17:23]वहां पे बंकर में जिस तरह से नथन या जाके पहले तो
[17:27]सुनने में आया था जर्मनी में और अब पता नहीं कहां जाके
[17:31]छुपा हुआ है। खामनाई साहब के पास मौका था कि वो भी
[17:34]कहीं छुप जाते। प्रोटेक्शन ले लेते। लेकिन उन्होंने कहा कि मेरी आवाम
[17:38]मेरी जनता का क्या होगा। ये अपने आप में उनका एक बहुत
[17:40]बड़ा करेज का सिंबल है। उनके चारों के चारों बेटे किराए के
[17:45]मकान में रहते थे। अपने खुद के मकान तक नहीं उनके पास।
[17:50]एक ऐसा लीडर जो सिंपलीसिटी जो एक हाथ से पूरी ईरान को
[17:51]चला रहा था। पूरी उम्मत के लिए कहीं ना कहीं वो रहबर
[17:55]रहनुमा बना हुआ था। एक हाथ उनका पैरा पैरालाइज था। बावजूद उसके
[17:58]इतनी हिम्मत, इतना दम, इतना ईमान सिर्फ और सिर्फ एक सच्चे इंसान
[18:04]के पास हो सकता है। आयतुल्लाह खामनाई की पर्सनालिटी के बारे में
[18:09]क्या जानते हैं?
[18:09]ऐसा है जब मैं उधर था ये आयतुल्लाह खुमेनी था। उसके बाद
[18:20]आयतुल्लाह का आ गया। लेकिन यह स्पष्ट है ऐसे अससिनेशन ठीक नहीं
[18:29]है। ये एक इविल एक्ट है। ये इलजिटमेट है। इमोरल है। ऐसा
[18:35]है कि आप सुना होगा मल्यया चाणक्य ने कहा मलसी न्याया लो
[18:45]ऑफ़ द फिशेस। वो बिग फिश इट्स अ स्मॉल फिश। बिलकुल। वही
[18:50]हो रहा है। दूसरा एक एग्जांपल आपको चाहिए तो नई दिल्ली की
[18:57]ट्रांसपोर्ट देख लीजिए। हम सब रूल्स ओबे करता है। इमेजिन एक आदमी
[19:04]आता है बहुत बड़ा बस और रूल्स रेड लाइट में रुकता नहीं
[19:12]है और किसी को मारता है। ये होता है। अमेरिका अभी ये
[19:16]करता है। इजराइल करता है और इजराइल करता है। क्यों?
[19:23]अमेरिका का सपोर्ट है। लेकिन एक बहुत दिनों रहेगा नहीं मेरे ख्याल
[19:30]से प्रेसिडेंट ट्रंप इनका इनबल स्टाइल है डिक्लेअ विक्ट्री एंड सीज फायर
[19:37]होगा क्योंकि तेल का प्राइस और स्टॉक मार्केट ये हो सकता नहीं
[19:45]है। परवरिश जिसके खौफ के साए में होगी अपनी परछाई भी देखे
[19:48]तो डर जाएगा।
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