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Sabeel Media | Job ke liye Rishwat? | RIshwat dena kab Jaiz hai? | Rishwat in Islam
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#Nuqtenigah #Rishwat #Media_Sabeel
Sabeel Media | Job ke liye Rishwat? | RIshwat dena kab Jaiz hai? | Rishwat in Islam
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[0:00]रिश्वत के सिलसिले में इस्लामी नुक्ता निगाह क्या है 1400 साल पहले
[0:04]इस्लाम ने यह कानून क्यों बनाया और इसका क्या अंजाम बताया है
[0:06]हमारे मुल्क में रिश्वत की वजह से आवाम को किन मुश्किलात का
[0:11]सामना है और अगर बात इस पर मौक है कि अपना हक
[0:14]बगैर रिश्वत दिए नहीं मिल सकता है तो इस्लामी सिलसिले में क्या
[0:17]कहता है आइए देखते हैं इस वीडियो में नुक्ता ए निगाह हौज
[0:22]इलमिया कुम की तुल्ला की जानिब से नश्र होने वाला ऐसा प्रोग्राम
[0:24]है जिसमें हमारी हर बात मुस्त और मुस्त दल यानी ऑथेंटिक और
[0:29]रेशनल होती है और तमाम पॉइंट्स जो पेश किए गए हैं डिस्क्रिप्शन
[0:32]में उनके रेफरेंसेस मौजूद हैं अजु बिल्लाह मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमानिया
[0:36]सा बुरा काम है जो ना सिर्फ इस्लामी नुक्ता निगाह से हराम
[0:41]है बल्कि मुल्के अजीज हिंदुस्तान और दुनिया भर के तमाम ममालाकंडम और
[0:45]करप्शन की बड़ी वजह शुमार होता है कल तक रिश्वत की लेनदेन
[0:49]नाजायज कामों के लिए हुआ करती थी लेकिन आज मुल्क का सिस्टम
[0:53]इतना पस्त हो चुका है और गिर चुका है कि लोगों को
[0:58]अपने जायज कामों यहां तक के अपने हक के हुसूल के लिए
[1:01]भी रिश्वत देनी पड़ती है इस वीडियो में हम आपकी खिदमत में
[1:03]बयान करेंगे कि रिश्वत के सिलसिले में इस्लामी नुक्ता निगाह क्या है
[1:06]1400 साल पहले इस्लाम ने यह कानून क्यों बनाया और इसका क्या
[1:10]अंजाम बताया है मुल्क में आवाम को रिश्वत की वजह से किन
[1:13]मुश्किलात का सामना है और अगर बात इस पर मौक हो के
[1:17]बगैर रिश्वत दिए हुए अपना हक नहीं मिल सकता है तो इस
[1:21]सिलसिले में इस्लाम क्या कहता है तो आइए पहले जान लेते हैं
[1:22]कि रिश्वत क्या है और मुल्क के किन-किन शोबो में इसका लेनदेन
[1:27]है रिश्वत करप्शन की एक किस्म है जिसमें किसी साहब अख्तियार को
[1:30]माल पेश किया जाता है ताकि वह रिश्वत देने वाले के हक
[1:34]में या उसके मुखालिफ के खिलाफ फैसला दे मुल्के अजीज हिंदुस्तान में
[1:38]छोटे से छोटे महकमों से लेकर बड़े से बड़े और हस्सा महकमों
[1:43]तक अफसरा रिश्वत की लेनदेन में मुलस हैं रिपोर्ट्स के मुताबिक जुडिशियस
[1:47]सिस्टम पुलिस पब्लिक सर्विसेस टैक्स और कस्टम एडमिनिस्ट्रेशंस जमीनों के मामलात से
[1:53]लेकर करोड़ों डॉलर्स तक की बैनल अकवाबा नहीं और करप्शन मौजूद है
[1:58]अब आइए देखते हैं कि रिश्वत की वजह से मुल्क किन हालात
[1:59]से से जूझ रहा है रिपोर्ट के मुताबिक सन 2020 में रिश्वत
[2:04]की लेनदेन की शराह 39 फ रही है कि जो एशिया में
[2:08]सबसे ज्यादा है रिपोर्ट बताती हैं कि हिंदुस्तान रिश्वत की लेनदेन के
[2:12]मामले में 194 ममालाकंडम बन चुका है शर्मनाक आंकड़े बताते हैं कि
[2:32]मुल्क में हुकूम इदार के अफसरा रिश्वत की लेनदेन में सबसे ज्यादा
[2:35]मुलस हैं जिनकी शराह 60 फी से ज्यादा है ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के
[2:41]मुताबिक सिर्फ 222 करोड़ हाईवेज पर ट्रक ड्राइवर से रिश्वत के तौर
[2:45]पर लिए जाते हैं इन सब बातों को जानने के बाद अब
[2:48]आइए देख लेते हैं कि इस सिलसिले में इस्लामी नुक्ता निगाह क्या
[2:50]है सबसे पहली बात तो यह कि इस्लाम एक निजाम और इंस्टीट्यूशन
[2:54]है जिसने इंसानी जिंदगी के हर पहलू के लिए कानून बना रखा
[2:57]है मुशे में अदल इंसाफ को कायम करना इस्लाम की पहली तरजीह
[3:02]है कुरान करीम में इरशाद होता है यकीनन हमने अपने रसूलों को
[3:05]खुली हुई दलीलों के साथ भेजा और उनके साथ किताब और मीजान
[3:09]नाजिल की ताकि लोग अदल इंसाफ पर कायम हो दूसरी बात यह
[3:14]कि इस्लाम की निगाह में जुल्म बहुत बड़ा जुर्म है और इस्लाम
[3:16]इस बात पर ताकीद करता है कि कोई भी हुकूमत कभी भी
[3:19]जुल्म के साथ बाकी नहीं रह सकती है रसूल खुदा सल्लल्लाहु अल
[3:24]वसल्लम इस सिलसिले में इरशाद फरमाते हैं कुफ्र के साथ तो हुकूमत
[3:27]चल सकती है लेकिन जुल्म के साथ नहीं बद उनवान करप्शन हरामखोरी
[3:32]और रिश्वत जैसी बुराइयां मुशरा में जुल्म को रवाज देती हैं मुशरा
[3:35]अफरातफरी का शिकार हो जाता है और इस्लाम इन तमाम चीजों को
[3:39]कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता यही वजह है कि इस्लाम ने 1400
[3:42]साल पहले यह कानून बनाया कि रिश्वत का लेना और देना हराम
[3:47]है क्योंकि अमल जुल्म है और मुशरा में नाइंसाफी को रवाज देता
[3:50]है और इसकी वजह से कमजोर तबका कभी भी अपने हक तक
[3:54]नहीं पहुंच सकता है आइए देख लेते हैं कि रिश्वत के सिलसिले
[3:56]में आयात और रवाया क्या कहती हैं इस्लामी नुक्ता निगाह से रिश्वत
[4:01]का लेना और देना दोनों ही नाजायज अमल है इसलिए कि यह
[4:03]हराम माल के जमरे में आता है कुरान करीम में सिलसिले में
[4:07]इरशाद होता है और तुम आपस में एक दूसरे का माल गलत
[4:12]तरीके से ना खाओ और ना ही रिश्वत के तौर पर वह
[4:15]माल इस गरज से हुकाम तक पहुंचाओ ताकि गुनाह के तौर पर
[4:17]लोगों का कुछ माल तुम भी खा सको जबकि तुम जानते हो
[4:21]इसके अलावा रसूल खुदा सल्लल्लाहु अल वा वसल्लम रिश्वत लेने और देने
[4:24]वालों के सिलसिले में सख्त लहजा इख्तियार करते हुए फरमाते हैं रिश्वत
[4:30]लेने देने से बचो क्योंकि यह कुफ्र महज है साहिबे रिश्वत यानी
[4:33]रिश्वत लेने और देने वाला जन्नत की खुशबू तक नहीं सूंघ पाएगा
[4:36]रसूले खुदा सल्लल्लाह अ वसल्लम का यह सख्त लहजा और ताकीद इस
[4:41]बात की निशानदेही करते हैं कि इस्लाम की निगाह में रिश्वत कितना
[4:44]बड़ा संगीन जुर्म है और इस्लाम की निगाह में ना सिर्फ रिश्वत
[4:48]लेने और देने वाले बुरे हैं बल्कि इस बुराई में वह शख्स
[4:52]भी बराबर का शरीक है जो इन दोनों के दरमियान राबता और
[4:54]वास्ता बने रसूल खुदा सल्लल्लाहु अल वसल्लम इस सिलसिले में इरशाद फरमाते
[4:58]हैं अल्लाह की लानत हो रिश्वत लेने वाले और देने वाले और
[5:02]जो इन दोनों के बीच में राबता हो मुल्क में रिश्वत के
[5:06]सिस्टम की वजह से आवाम तरह-तरह की मुश्किलात में गिरफ्तार हैं और
[5:09]अक्सर ऐसा होता है कि यह मुश्किलात बर्दाश्त से बाहर हो जाती
[5:15]हैं जिसकी बुनियाद के ऊपर आवामी जिंदगी की सतह रोज बरोज गिरती
[5:17]जा रही है यहां पर एक काबिले गौर नुक्ता है और वो
[5:21]यह है कि रिश्वत लेने वाला माल लेकर और रिश्वत देने वाला
[5:23]अपना काम करवाकर खुश हो जाते हैं लेकिन दोनों ही इस बात
[5:28]से गाफिल रहते हैं कि वह खुद और उनकी मले रिश्वत के
[5:33]भयानक अंजाम की चपेट में आ सकते हैं क्योंकि जब मुल्क बर्बाद
[5:34]होगा तो सब के सब उसकी चपेट में आएंगे अब आइए देख
[5:38]लेते हैं कि रिश्वत से बचने का तरीका क्या है और उसका
[5:42]राहे हल क्या है सबसे पहली बात तो यह कि मुत्त इदज
[5:43]और तय कर ले कि ना रिश्वत देंगे और ना ही रिश्वत
[5:46]लेंगे रिश्वत लेने और देने वालों के खिलाफ मिलकर आवाज बुलंद करें
[5:51]और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाएं यह तरीका जनाबे अमीर मोमिनीन
[5:55]अली इब्ने अबी तालिब अल सलातो वसलाम का है जब मौला अली
[5:59]अल सलाम को खबर मिली कि अहवाज के बाजार की नजारत पर
[6:01]मामूर इब्ने हरमानी शख्स लोगों को परेशान करता है और दुकानदारों से
[6:07]रिश्वत लेता है तो आपने वहां पर अपने नुमाइंदे को लिखा इब्ने
[6:09]हरामा को माजू कर दो और उसे गिरफ्तार कर लो ऐलान कर
[6:14]दो जिसको भी उससे शिकायत है वह सामने आए अपने तहत काम
[6:19]करने वालों से कह दो जो भी बद उनवान करेगा उसको सख्त
[6:20]सजा मिलेगी और काम से माजू भी कर दिया जाएगा इब्ने हरम
[6:25]को हर जुम्मे को बाजार में लाया जाए और उसे सजा दी
[6:29]जाए और जिससे भी उसने रिश्वत है उसकी रकम उसे इब्ने हरमालकर
[6:32]मा को सख्त कैद में रखा जाए और सिर्फ नमाज के वक्त
[6:37]ही आजाद किया जाए मौला अली के फरमान से यह समझ में
[6:41]आता है कि इस्लाम रिश्वत जैसे जुर्म को लेकर किस कदर हसास
[6:43]है तीसरी बात यह कि अपनी पहचान ऐसी कौम की सूरत में
[6:47]बनाए कि यह कौम ना रिश्वत लेती है और ना ही रिश्वत
[6:51]देती है क्योंकि यह अमल जुल्म और नाइंसाफी है कौम और समाज
[6:56]के दरमियान तकादीना की बुनियाद को मजबूत करें क्योंकि अल्लाह और जन्नत
[7:00]और जहन्नम पर और ईमान इंसान को बुराइयों से दूर रखता है
[7:02]और अच्छाइयों से नजदीक करता है समाज के दरमियान से अमीरी और
[7:07]गरीबी जैसे तबकात फासले को दूर करने की कोशिश करें क्योंकि यह
[7:10]फासला और दूरी जुल्म और डिस्क्रिमिनेशन का सबब बनता है और इसी
[7:15]फर्क की वजह से एक तबका अपने रसूक की बुनियाद के ऊपर
[7:20]कमजोर तबके को उसके हक तक पहुंचने से महरूम कर देता है
[7:21]अब यहां पर सवाल यह पैदा होता है कि मसला अगर इस
[7:25]बात के ऊपर मौक हो कि हमारा हक बगैर रिश्वत दिए हुए
[7:30]हासिल नहीं हो सकता है तो इस सिलसिले में शरई हुक्म क्या
[7:32]है तो आयतुल्लाह सिस्तानी और आयतुल्लाह खामरा दामद बरकात इस सिलसिले में
[7:36]फरमाते हैं अगर शख्स के पास इसके अलावा कोई चारा ना हो
[7:40]तो अपना हक हासिल करने के लिए रिश्वत दे सकते हैं लेकिन
[7:42]लेने वाले के लिए जायज नहीं है यहां पर एक और बड़ी
[7:46]मुश्किल का आवाम को सामना करना पड़ता है और वो यह है
[7:49]कि बच्चों के अच्छे स्कूल में एडमिशन के लिए या नौकरी के
[7:53]लिए या यूनिवर्सिटी में अच्छी रैंक के लिए रिश्वत दी जाती है
[7:55]तो इस सिलसिले में इस्लाम का क्या हुक्म है आयतुल्लाह सिस्तानी और
[7:58]आयतुल्लाह खाम नई दमत बरकात इस सिलसिले में फरमाते हैं अगर किसी
[8:04]दूसरे का मुसल्लम हक जाय नहीं हो रहा है और मकसद जायज
[8:05]हो तो रिश्वत दे सकते हैं लेकिन लेने वाले के लिए जायज
[8:09]नहीं है अभी तक जो बातें हमने आपकी खिदमत में बयान की
[8:12]आइए देखते हैं कि उसका नतीजा और कंक्लूजन क्या निकलता है रिश्वत
[8:15]करप्शन की एक किस्म है और शरई और मुल्क के कानून दोनों
[8:20]ही के ऐतबार से संगीन जुर्म है रिश्वत का अंजाम जुल्म अफरातफरी
[8:23]और साहिबान हक को उनका हक ना मिलना है जो मुल्क की
[8:28]बर्बादी और पिछड़ने का पेश कैमा है रिश्वत के सिलसिले में मुल्के
[8:30]अजज के हालात बहुत खराब हैं सिर्फ सन 2020 में एशिया में
[8:35]रिश्वत के सिलसिले में मुल्क की शराह सबसे ज्यादा रही है मुल्क
[8:38]का सिस्टम छोटे से छोटे महकमों से लेकर करोड़ों डॉलर तक की
[8:41]इंटरनेशनल डील तक में रिश्वत जैसी बद उनवान का शिकार है हालात
[8:47]यह है कि लोग खौफ और लाइल्ली की वजह से रिश्वत देते
[8:51]हैं और करप्ट अफसरा इसका फायदा उठाकर रिश्वत लेते हैं इस्लाम की
[8:54]निगाह में रिश्वत लेने वाला रिश्वत देने वाला और वह शख्स जो
[8:59]इन दोनों के दरमियान वास्ता और राबता है सभी मुजरिम है क्योंकि
[9:02]रिश्वत आवाम के दरमियान नाइंसाफी जुल्म और भेदभाव और मुल्क मिल्लत के
[9:06]लिए बर्बादी का सबब है इसलिए इस्लाम उसे कभी बर्दाश्त नहीं करता
[9:11]इमाम अली अलैहि सलाम रिश्वत और करप्शन में मलव अफराद के साथ
[9:14]सख्ती से पेश आते थे और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देते
[9:18]थे जो इस बात की अलामत है कि इस्लाम इस बुराई के
[9:20]सिलसिले में किस कदर हसास है तो दोस्तों हमने आज आपकी खिदमत
[9:24]में बयान किया कि रिश्वत के सिलसिले में इस्लामी नुक्ता निगाह क्या
[9:27]है मुल्क किन हालात से जूझ रहा है और का अंजाम कितना
[9:31]भयानक और बुरा है इंशा अल्लाह एक नई वीडियो के साथ आपकी
[9:33]खिदमत में हाजिर होंगे तब तक के लिए खुदा हाफिज
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