التالي
1 المشاهدات · 24/02/13
10 المشاهدات · 25/03/18
11 المشاهدات · 07/01/29
12 المشاهدات · 13/02/25
13 المشاهدات · 16/01/01
9 المشاهدات · 22/12/19
11 المشاهدات · 23/02/02
Quran wa Zindagi | H.I. Muhammad Hussain
0
0
10 المشاهدات·
23/12/20
في
محاضرات
Record date: 03 Dec 2023 - قرآن و زندگی AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/amehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
أظهر المزيد
Transcript
[0:13]बिल्ला समी अलीम मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल हमदुलिल्ला रब्बिल
[0:29]आलमीन अस्सला वस्सलाम अला सदना नबीना व हबी कुलना तबी नसना व
[0:55]शफीन बनाल कास मुस्तफा मोहम्मद अल्लाहु सल्ले अला मुहम्मद रीनल मासन मुंतज
[1:12]सलाम अमा बाद काला सुनहु ताला फ कुरान करीम बिल्ला मनता रजी
[1:29]मन वहु मुन फन हयात बा आवाज बुल सलात अला सलाद महम्मद
[1:51]बरा दराने मानी अजीज लवा प्यारे बच्चों अल्लाह ताला आप सबकी इबातों
[2:02]को अपनी बारगाह में कबूल मंजूर फरमाए और हम सबके दिलों को
[2:11]नूर मफत परवरदिगार अंबिया सुलहा मासूमीन से हमेशा मुनर रखे इंशा अल्ला
[2:19]ताला बरा दराने गिरामी जिस जात अकदर ने हमें नेमत जिंदगी से
[2:35]नवाजा है उस जात अकदर ने जिंदगी गुजारने के उसूल भी बयान
[2:41]किए हैं लाइफ स्टाइल का तन [संगीत] सिर्फ खालिक जिंदगी को हासिल
[2:49]है वह हस्ती जिसने मौजूदा को खल्क फरमाया और जिंदगी के नेमत
[3:01]से नवाजा वह हस्ती बेहतर जानता है कि इंसान की जिंदगी के
[3:08]लिए कैसे उसूल मुकर्रर फरमाए किसी भी इंसान को यह हक हासिल
[3:14]नहीं है कि यह नारा दे दे कि मेरा जिस्म है मेरी
[3:22]मर्जी नहीं बल्कि यह जिस्म अल्लाह की नेम अमानत है हमारे हाथ
[3:25]में हम इस जिस्म के मालिक नहीं है जिस्म हमारा ममलुक नहीं
[3:32]है हमारी मिल्कियत में नहीं है यह बॉडी अल्लाह की अमानत है
[3:40]हमारे हाथ में इस जिस्म से इस तरह काम लेना है जो
[3:46]अल्लाह की मर्जी के मुताबिक हो इस जिस्म को गुनाहों से बचाना
[3:53]हर शैतानी काम से बचाना इस जिस्म के आजा को सर तापा
[4:00]तमाम आजा जवारे को गुनाहों से बचाना और आजा जवारी को अच्छे
[4:05]काम में इस्तेमाल करना हमारी जिम्मेदारी है लाइफ स्टाइल के तायन तर्ज
[4:15]जिंदगी का तायन सिर्फ खालिक इंसान को हासिल है जिंदगी खुद अल्लाह
[4:19]के मखलूक में से एक मखलूक है जैसा कि सूरे मुल्क में
[4:24]इरशाद फरमाता है कि लकल म अल्लाह ने जिंदगी को हयात को
[4:40]और मौत को खलक किया जिंदगी और हयात भी मखलूक परवरदिगार है
[4:45]मौत भी मखलूक के परवरदिगार है लकल मौता मौत को खलक किया
[4:52]अल्लाह ने वल हयात जिंदगी को खलक किया क्यों क्यों अल्लाह ने
[4:58]हमें जिंदगी से नवाजा है य जिंदगी हमें क्यों दिया यह जिंदगी
[5:05]क्यों दी गई है जिंदगी का मकसद क्या है अल्लाह ने इस
[5:10]गरज के पेश नजर नेमत जिंदगी से हमें नवाजा है ताकि ला
[5:17]ताकि तुमसे इम्तिहान लिया जाए कि कौन जो है अच्छे काम करते
[5:24]हैं नहीं फरमाया अला कौन ज्यादा काम करते नहीं ज्यादा काम का
[5:28]ताल्लुक है क्वांटिटी से ज्यादा काम का ताल्लुक है कमय से लेकिन
[5:36]अच्छे काम का ताल्लुक है नेक काम जो काम अच्छी नियत से
[5:38]हो उस काम का ताल्लुक है क्वालिटी से कैफियत से इंसान से
[5:47]अल्लाह जो है क्वालिटी चाहता है ज्याद ज्यादा इबादत हो ज्याद ज्यादा
[5:54]रुकू सुजूद हो लेकिन तवज्जो अल्लाह की तरफ ना हो अल्लाह के
[5:59]लिए दिल में खुजू और खुशु का जज्बा ना हो मारफ का
[6:05]जजबा ना हो हुजूर कल्ब ना हो तो वह ज्यादा इबादत इंसान
[6:13]के लिए फायदेमंद साबित नहीं होगी लेकिन कम इबादत हो वही हुजूर
[6:15]कल्ब के साथ वही पूरी तवज्जो के साथ गैरुल्लाह की तरफ तवज्जो
[6:21]ना रहे तो कम इबाद तों को अल्लाह ताला कबूल फरमाता है
[6:24]अगर ज्यादा इबादत तवज्जो के साथ हो तो अल्हम्दुलिल्लाह वो भी बेहतर
[6:30]है तो [संगीत] जिंदगी जिंदगी के कई मराब है कई कैटेगरी है
[6:38]पल पदे दरख व भी जिंदा है उसको हयात नबाती कहा जाता
[6:47]है पदों की जिंदगी पदों की जिंदगी पदों पर भी खेत पर
[6:51]भी मौत आती है अल्लाह जिंदा करता है जमीन को बाद महा
[7:01]उन पर मौत वाकी होने के बाद फसले सरमा में जमीनों पर
[7:08]मौत वाकी होती है सब्ज नहीं है दरख्तों के पत्ते गिर जाते
[7:15]हैं फसले खजा में लेकिन दोबारा जब फसले बहार शुरू होता है
[7:18]स्प्रिंग सीजन का जब आगाज होता है तो दोबारा फूल खिलने लगते
[7:25]हैं दोबारा जमीन आबाद हो जाती है अल्लाह ताला आसमान से बारानगर
[7:29]फरमा करर जमीनों को दोबारा जिंदगी के नेमत से माला मर फरमाता
[7:36]है य अल्लाह जिंदा करता है जमीन को बाद महा उनके मौत
[7:38]के बाद तो नेमत हयात एक जिंदगी हैवानी है हैवानी जिंदगी वही
[7:49]साइंस साइंस दन हजरात या इल्म हयाती यात के माहिर बायोलॉजी पढ़ने
[7:56]वाले बायोलॉजी के बारे में नजरिया पेश करने वाले वही जो चंद
[8:01]खुसूसियत बयान करते कि ये खुसूसियत अगर किसी मौजूद जिंदा में हो
[8:05]तो उसको हम जिंदा कहते हैं सांस ले सके लीद मिसल अपने
[8:11]जैसे पैदा कर सके उसमें हरकत हो उसमें नश नुमा हो ग्राउथ
[8:17]हो तो यह जिंदगी की अलामत हैं क्या इंसान के बारे में
[8:23]भी यह कह सकते हैं कि जिस तरह हैवान जिंदा है अगर
[8:28]इंसान भी उसी अंदाज से जिंदगी करे तो क्या ये इंसान के
[8:30]लिए कमाल है नहीं है जिस तरह हैवान जिंदा है उसी तरह
[8:36]इंसान भी जिंद जिंदगी करें सिर्फ मादी हुू तक सोचे सिर्फ ये
[8:43]खुश रहे कि अच्छी नौकरी है खाने पीने को कुछ मिल रहा
[8:45]है पेट भर रहा है इसी पर अगर राजी रहे नहीं अल्लाह
[8:53]इंसान से कुछ और तवको रखता है ये तो सब वसाय है
[8:54]खाते हैं पीते हैं ताकि जिस्म सेहतमंद रहे जिस्म तवाना रहे ताकि
[9:00]वह काम करे जो इंसान के लिए जजता हैक ताकि वह आमाल
[9:05]सालि बजा लाए जिस को अंजाम देने के लिए अल्लाह ने इंसान
[9:08]को खलक किया है तो अल्लाह इंसान से कौन सी जिंदगी का
[9:13]तलबगार है कौन सी जिंदगी मतलूब परवरदिगार है ख रिवाय तों में
[9:22]जिक्र है कुरान शरीफ में जिक्र है कि हयात तयबा पाक पाकीजा
[9:26]जिंदगी हयात का मानी है जिंदगी से हयात के माने जिंदगी तबा
[9:33]त का मानी है पाक पाकीजा अल्लाह हमसे हयात तैयबा चाहता है
[9:40]अल्लाह ने पूरे तमाम के साथ इंसान को खलक फरमाया फरिश्तो और
[9:46]मलाइक से बेहतर होने की सलाहियत इंसान के अंदर रख के इंसान
[9:52]को खलक किया है तो अल्लाह हक रखता है कि हमसे हयात
[9:55]तैबा का तव रखे पाक पाकीजा जिंदगी करने का रख पाको पाके
[10:04]जिंदगी कैसे हासिल होती है सूर नल आयत नंबर 97 में सूरे
[10:11]नहल आयत नंबर 97 में इरशाद रब्बानी है वह आय करीमा जिसको
[10:15]मैंने अनवाने कलाम करार दिया इशाद होता है कि मन सा जो
[10:21]भी नेक काम करें जो अच्छे काम करें मक चाहे मर्द हो
[10:28]चाहे औरत हो कोई नहीं है इस्लाम में कोई इमतियाज नहीं है
[10:31]कि अगर मर्द नेक काम करे तो सवाब मिलेगा और औरत चकि
[10:36]पस जात है तो उसको महरूम रखा जाएगा नहीं व तो जाहिल
[10:41]का दौर था जिस जमाने में जाहि सोच के मुताबिक जब किसी
[10:49]के हां बच्ची पैदा होती थी तो मर्द खाना उसको नंग आर
[10:51]समझ के अपने हाथों से अपनी बच्ची को जिंदा दर गौर करते
[10:56]थे रसूलल्लाह ने जो है वो पैगाम रहमत लेकर आया ये फरमाया
[11:02]कि बच्ची तो रहमत इलाही है परवरदिगार के रहमत है अपनी साहिबजादे
[11:07]कनन की जिस तरह तकरी की जब तशरीफ लाते थे जनाबे सैयदा
[11:13]हुजूर के बारगाह में तो तजीम उठ खड़े हो जाते थे तमाम
[11:20]कत और उस शहजादी की इस्तकबाल के लिए तशरीफ ले जाते थे
[11:23]इज्जत चाहे मर्द हो चाहे औरत हो जो भी अच्छे काम करें
[11:29]वहु ममन बशत की मोमिन हो बशर्ते के दिल में ईमान हो
[11:34]अब ने कम करने वाले बहुत सारे हैं बहुत सारे जो नॉन
[11:39]मुस्लिम है लेकिन फलाही काम करते हैं उनके लिए हयात तैयबा नहीं
[11:42]है हयात तैयब उनके लिए है जो नेक काम करें और नेक
[11:47]काम करने के साथ-साथ दिल में ईमान हो अल्लाह के और अल्लाह
[11:52]के रसूल के लिए ईमान हो और विलायत मौला अमीर मोमिनीन अली
[11:54]अबी तालिब उसके दिल में हो और औलाद की विलायत उसके दिल
[12:00]में अगर होते हुए नेक काम अंजाम दे दे तो अल्लाह का
[12:06]वादा है कि फया हम जो है हयात तबा पाकीजा जिंदगी उसे
[12:09]अता करेंगे पाक पाकी ऐसी जिंदगी की जो शिर्क से पाक है
[12:15]ऐसी जिंदगी जो नाशक से पाक है ऐसी जिंदगी जो निफा से
[12:20]पाक हो ऐसी जिंदगी जो हसद और किब और कीना से पाक
[12:24]हो बद नियती से पाक एक जिंदगी अता करेंगे हयात त बस
[12:29]मिसाल जिंदगी क्या है जी इंसान के लिए हयात तैयब है पाक
[12:31]पाकीजा जिंदगी पाक पाकी जिंदगी कब हासिल होती है जब इंसान नेक
[12:39]अमल करे और मोमिन भी हो अच्छे काम करे और मोमिन भी
[12:47]हो तो अल्लाह ताला जो है अमल सालेह और ईमानदार शख्स के
[12:50]लिए अमल साले बजा लाने वाले के लिए हयात तैयबा से नवाज
[12:56]है पाक पाकी जिंदगी से नवाजता है पाक पाकीजा जिंद जिंदगी से
[13:00]क्या मुराद है वो जिंदगी है ऐसी जिंदगी अब पाक पाकी जिंदगी
[13:06]से मुराद ये नहीं है कि जिस किसी को इस तरह इस
[13:10]नयत की जिंदगी दी जाए तो व उसके लिए कोई परेशानी नहीं
[13:11]है कोई मुश्किल सेचा किसी भी मुश्किल से दोचा नहीं होगी नहीं
[13:17]मोमिन भी मुश्किल से दोचा होता है मोमिन भी आजमाइश से दोचा
[13:19]हो जाता है लेकिन मोमिन का रदद अमल मोमिन का रिएक्शन वहां
[13:24]पर सब्र होता है इसमें कोई मसलत होगी रिवायत बहुत मशहूर है
[13:34]कि जो मोमिन मुश्किलात से दोचा होते हैं अगर सब्र करें तो
[13:37]अल्लाह ताला उनके उसके गुनाह को माफ फरमाता है उसके दर्जा और
[13:42]मकाम को बुलंद फरमाता है अगर एक बुखार बीमारी बुखार की बीमारी
[13:45]से कोई मोमिन अगर दो चार हो जाए सब्र करें तो एक
[13:50]साल के गुनाह बख्शे जाते हैं ये मुश्किलात भी मोमिन के लिए
[13:56]रहमत है रहमत परवरदिगार है तो हयात तैयबा अल्लाह ताला हमसे कौन
[14:05]सी जिंदगी चाहता है हयात तैयबा अब हयात तैयबा हासिल करने के
[14:08]लिए जिद जात करना व मोमिन की जिम्मेदारी है कि अमल सालेह
[14:13]बजा लाए और दिल में ईमान को दिन बदन मजबूत करें तो
[14:15]हया हयात तबा अल्ला ताला इनायत फरमाता है ऐसी जिंदगी की मुश्किलात
[14:21]के वक्त सब्र कर सके ऐसी जिंदगी की जब नेमत हासिल हो
[14:28]जाए तो शुक्र गुजारी बजा ला सके ऐसी जिंदगी की मुश्किलात के
[14:31]वक्त मुश्किल [संगीत] से [संगीत] निमटूरी से जिंदगी पर मामूली सी मुश्किल
[14:45]से दोचा होने की वजह से वह डिप्रेशन का शिकार हो जाता
[14:50]है जैसा कि आप मगरिब दुनिया में आप देखें यूरोप कंट्रीज में
[14:57]देखें मुशाहिद करते हैं मादी लिहाज से कोई कमी नहीं है आलीशान
[15:00]घरों में जिंदगी बस रहे हैं गाड़ी है बैंक बैलेंस है हर
[15:07]किस्म के मादी जिंदगिया मौजूद है लेकिन जवान मनुसिया के आदी है
[15:11]जवान खुदकुशी करते हैं अगर इंसान के लिए सहादत सिर्फ इसम हो
[15:18]कि बेहतरीन घर हो बेहतरीन कोठी हो गाड़ी हो बैंक बैलेंस हो
[15:25]बाकी मादी सहूलियत सब हो अगर सहादत सर्फ इसमें हो तो फर
[15:31]उनकी जिंदगी अच्छी होनी चाहिए वो खुशहाल जिंदगी गुजारनी चाहिए हालांकि बहुत
[15:35]सारे ममालाकंडम को कैसे खुशगवार बनाए जाए किस तरह जिंदगी गुजारे के
[16:00]जिंदगी में माली माशी मुश्किलात होने के बावजूद खुशी से जिंदगी गुजार
[16:08]सके खुशगवार जिंदगी कब गुजार सकेंगे जब याद इलाही में मशगूल रहे
[16:13]आय करीमा है कि अलाला आगाह रहो कीला सिर्फ याद इलाही से
[16:24]सिर्फ जिक्र इलाही से दिलों को सुकून मिलता है दिल मुतमइन रहता
[16:28]है दिल बेचैनी से पाक रहता है इसके मदद मुकाबिल अगर कोई
[16:35]अल्लाह की याद से गाफिल रहे शैतानी कामों में गर्क रहे तो
[16:42]उसकी जिंदगी तंगी से गुजर जाएगी आय करीमा इसी हवाले से जो
[16:48]भी मेरी याद से मुह मोड़ ले जो भी इंसान मुझे याद
[16:54]ना करें जो भी इंसान अल्लाह को याद ना करें तो फल
[16:59]मातन का तो उसकी जिंदगी में सख्ती आएगी उसकी जिंदगी में तंगी
[17:03]आएगी वह हमेशा मामूली सी चीजों पर जो है वो डिप्रेशन का
[17:08]शिकार हो जाएगा वह एंजाइटी का शिकार हो जाएगा वह मामूली सी
[17:10]मुश्किलात पर वह खुदकुशी करने पर उतर आएंगे याद इलाही इसीलिए फरमाया
[17:17]अल्लाह ताला चाहता है कि मोमिन खुशहाल जिंदगी गुजारे अल्लाह ताला अरहम
[17:22]राहन है अल्लाह चाहता है कि अपने बंदे की जिंदगी खुशगवार हो
[17:26]खुशहाल जिंदगी गुजारे खुश रहे इसलिए खुशी याद इलाही में है खुशी
[17:32]अल्लाह को याद करने में है लिहाज फरमाया कि अल्लाह को ज्यादा
[17:36]याद करो यारा ईमान वालो अल्लाह को याद करो बहुत ज्यादा हर
[17:44]हाल में याद करो चाहे मस्जिद में मस्जिद में अल्लाह को हम
[17:50]ज्यादा याद करने की तौफीक हासिल होती कक माहौल का असर है
[17:51]यहां तमाम मोमिनीन तशरीफ लाते हैं अल्लाह को याद करते हैं मलायका
[17:55]यहां हाजिर हो जाते हैं मासूमीन के बारगाह में रोज मुकद्दस में
[18:02]फरिश्ते वहा हाजिर होते हैं वहां ज्यादा हम अल्लाह को याद कर
[18:05]सकते हैं क्योंकि वह अल्लाह के मुती फरमाबरदार सराफ तस्लीम हस्तियों का
[18:13]रोज अकस वहां फरिश्ते मलाइका आते जाते घर में भी हो अल्लाह
[18:16]को याद रखें स्कूल में हो अल्लाह को याद रखें ऑफिस में
[18:20]हो अल्लाह को याद रखे मार्केट अल्ला को हर हालत में अल्लाह
[18:23]को क्योंकि अल्लाह जो है वो इमाम नी रतुला फरमाते हैं कि
[18:31]आलम खुदा दर मजर खुदा मसयत न को आलम अल्लाह ताला का
[18:34]महजर है अल्लाह ताला हर जगह हाजिर हाजिर है नाजिर है जहां
[18:39]अल्लाह ताला हाजिर नाजिर हो वहा गुनाह नहीं करो गुनाह से अपने
[18:43]आप को बचाओ यह है हयात तैयबा का नतीजा फिर इस हयात
[18:47]तबा जिस मोमिन को यह अता होती है [संगीत] मिसालीडिंग करें उनके
[19:00]लिए अल्लाह का वादा है अगर मोमिन हो तो वरना अगर नॉन
[19:06]मुस्लिम हो जैसा कि नॉन मुस्लिम है क्रिश्चियन है दूसरे हिंदू मजहब
[19:09]है सिख मजहब के पैरोकार हैं वो अगर फलाही काम करें तो
[19:16]अल्लाह आदिल है अल्लाह उसको इसी जिंदगी में फराक और खुशहाली अता
[19:19]फरमाएंगे लेकिन आखिरत में उनके लिए बहिश्त नहीं है बहे सिर्फ मोमिनीन
[19:23]के लिए है वो मोमिन जो नेक काम करते हैं वो मोमिन
[19:28]जिसके दिल में विलायत अली अ सलाम और औलाद मासूमी सलाम की
[19:31]मोहब्बत अकीदत हो इसके इसके होते हुए अगर नेक काम करें तो
[19:38]इसकी दुनियावी जिंदगी भी सवर जाएगी और आखिरत में भी उसका ठिकाना
[19:41]बहिश्त बरीन होगा जैसा कि अल्लाह का वादा है इशाद फरमाते है
[19:46]कुरान शरीफ में कि जो भी मोमिन नेक काम करता है उसके
[19:51]लिए फल जन्ना उनके लिए जनात नम है ऐसे जन्नत है ऐसे
[19:53]बागा है जो नेमतों से भरे हुए हैं जो चाहे अता होता
[19:59]है जो ख्वाहिश करें अल्लाह ताला उसके सामने फराह फरमाता है तो
[20:06]हयाते तैयबा वह जिंदगी है वह मिसालीडिंग इसी पाकीजा जिंदगी से इंसान
[20:38]मुत होने के लिए अंबिया किराम खुसूस हमारे नबी करीम हजरत मोहम्मद
[20:45]मुस्तफा सल्लल्लाहु [संगीत] अलम जिम्मेदारियों में से हम जिम्मेदारी यही थी कि
[20:56]इंसानों के सामने हयात तैयबा के राह हम वार करें इस तरह
[21:02]जो है डायरेक्शन दे दे उनकी जिंदगी को कि उसके नतीजे में
[21:04]हयात तैयबा पाक पाकी जिंदगी अता हो जाए लिहाजा वह जमाने जाहिल
[21:11]जिस दौर में नबी करीम मूस पर रिसालत हुए सबसे अहम जो
[21:18]पैगाम था सबसे पहला जो मैसेज था जो लोगों को दिया वह
[21:20]तौहीद का पैगाम था फरमाया कि ला इला इलल्लाह कहो ला इलाह
[21:28]इल्लल्लाह अल्लाह के सिवा को माबूद नहीं है अगर यह कहोगे तो
[21:33]तु तुम कामयाब हो जाओगे कामयाबी खुदा मेहरी में है कामयाबी इंसान
[21:40]की जिंदगी का जो पगार है उसका मरकज अकी तौहीद हो उसका
[21:46]मरकज जो है खुदा पर तद हो तो जिंदगी के दूसरे उमर
[21:52]भी खर सलाह की तरफ जाएंगे इंसान की अकीदा और इंसान के
[21:58]अफल के दरमियान राबता है जो फिक्र में है वही जामे अमल
[22:02]पहनाया जाता है इंसान अपनी सोच को सही करें तो कैरेक्टर भी
[22:08]सही हो जाता है लिहाजा माइंड सेट को इंसान अपने तर्ज फिक्र
[22:11]को दुरुस्त करे ताकि तर्ज अमल भी दुरुस्त हो जाए लिहाजा रसूलल्लाह
[22:17]ने सबसे पहले यही कहा कि शिर्क बुत परस्ती बुतों की परस्तिश
[22:20]करना इन तमाम चीजों से दस्त बदार हो जाओ शिर्क और निफा
[22:27]और कुफर को अपने दिल से दूर करो और तौहीद के अकीदह
[22:35]जो पहला जो पैगाम था वो अकी तौहीद अकीदत करना अकीदा अगर
[22:43]दुरुस्त हो तो इंसान अपनी जिंदगी में तमाम उमर को अच्छे अंदाज
[22:50]में अंजाम दे सकता है यह सबसे पहला पैम मासूमी सलाम ने
[22:52]जो हमारे लिए जिंदगी गुजारने का रास्ता बयान किया है जो लाइफ
[22:59]स्टाइल मयन किया है वह भी हमारे लिए मसल राह है क्योंकि
[23:03]इमाम की जिम्मेदारी रसूलल्लाह की मिशन को आगे बढ़ाना और पाए तकल
[23:10]तक पहुंचाना है इमाम रसूलल्लाह का नुमाइंदा है इमाम रसूलल्लाह का जानशीन
[23:15]है चना की जानशीन मुकर्रर करने का काम लोगों पर नहीं है
[23:22]कि व जमरी अंदाज से जो है लोगों को लोगों का कोई
[23:26]इमाम या लीडर मन करे बल्कि इमाम जो है का की जिम्मेदारी
[23:29]है इमाम किसको मयन करना है अल्लाह जानता है अल्लाह जानता है
[23:37]अल्लाह ने जि जिन हस्तियों को बत की नेमत से नवाजा है
[23:42]वही हस्तिया इमाम बरहक होंगे जैसा कि सूरे मायदा आयत नंबर 55
[23:46]में एक आय करीमा है की उसको आय विलायत कहते हैं उस
[23:55]आए विलायत में अल्लाह ताला ने जो है मयन फरमाया कि रसूलल्लाह
[24:01]के बाद कौन इमाम है रसूलल्लाह के बाद वही हस्ती है जिस
[24:05]हस्ती ने मस्जिद नबवी में हालत नमाज में रुकू की हालत में
[24:13]अपनी अंगूठी साइल को इनायत की वही हस्ती बयान हो सर मायदा
[24:18]आयत नंबर 55 में इनमा वली कोला तुम्हारा वली वली का मानी
[24:26]है हाकिम वली का मानी है हाकम वली के बहुत सार मानी
[24:28]है वली का एक मानी है दोस्त वली का एक मानी है
[24:35]नासिर मददगार वली का एक मानी है हाकिम सरपरस्त साहिब तियार तो
[24:39]यहां इस आय करीमा में इनमा वली कोला तुम्हारा वली तुम्हारा हाकिम
[24:48]कौन है अल्लाह है अब अल्लाह तो नुमाइंदा मुकर फरमाता है जो
[24:53]बशक बशर हो लेकिन इसत के मालिक हो मलकू हस्तिया हो इमा
[24:59]और रसूल अल्लाह का रसूल लोगों के सरपरस्त है लोगों के हाकिम
[25:06]है और रसूलल्लाह के बाद फिर अल्लाह ने फिर इस बात का
[25:11]एहतमाम किया कि नूर हिदायत कयाम कयामत तक रोशन रखने के लिए
[25:15]रसूलल्लाह के बाद खुदा ने इमाम मुकर फरमाया रसूल का जानशीन मुकर
[25:19]फरमाया रसूलल्लाह के बाद कौन है इमाम इमा लीला तुम्हारा वली तुम्हारा
[25:28]हाकिम खुदा है रस और अल्लाह का रसूल है नारा वह हस्ती
[25:40]व हस्तिया जो हालत रुकू में जकात देते हैं हालत रुकू में
[25:46]साइल को साइल की मदद फरमाते हैं वह हस्ती रसूल के बाद
[25:51]इमाम उल मुस्लिमीन है इस आयत का श नजूल मौला अमीर जब
[25:56]मस्जिद नबवी में एक साइल दाखिल हुआ एक फकीर एक नादर एक
[26:02]मोहताज श दाखिल हुआ दाखिल होने के बाद तमाम मुसलमानों से जो
[26:05]इबादत में मशगूल थे बा इबादत से फारिक हो चुके थे सबसे
[26:10]कहा कि कोई है मेरी मदद करने वाला किसी ने मदद नहीं
[26:16]की किसीने म आखिर में वह साइल व मोहताज मायूस होकर मस्जिद
[26:19]से निकलने का अजम किया यह शिकवा करते हुए अल्लाह से कि
[26:25]अल्लाह तेरे घर से मैं खाली हाथ निकल रहा हूं मौला अली
[26:29]अ सलाम ने अपने अंगूठी अपने अंगत मुबारक इशारा किया व मोहताज
[26:35]व फकीर समझ गया कि मौला अपनी अंगूठी इनायत फरमाना चाहता है
[26:39]तो अंगूठी अंगू मुबारक से उतार कर निकले तो यह आय करीमा
[26:45]जो है मौला अली सलाम के शान में नाजिल हुई है कि
[26:50]अल्लाह और अल्लाह का रसूल तुम्हारा वली है तुम्हारा हाकिम है रसूल
[26:55]के बाद वह हस्ती है जिसने हालत रुकू में को जकात दिया
[27:01]है वह हस्ती है जिसने रुकू की हालत में अंगूठी फकीर को
[27:08]इनायत फरमाए और जिंदगी कैसे गुजारना है गुजारनी है इस हवाले से
[27:13]मैं इमाम मस काजम अ सलाम की हदीस आपकी खिदमत में बयान
[27:18]करू अल्ला [संगीत] सला देख जी अज तुलबा आपकी जिंदगी का यह
[27:27]मरहला बहुत बेहतरीन मरहला है इस मरहले के हर लमहे को गनीमत
[27:35]समझना चाहिए तालीम पर पूरी तवज्जो दे वालिद का एहतराम उस्ताद का
[27:39]एहतराम नमाज पढ़ना की हदीस में जिक्र है कि न साल की
[27:43]उम्र से लड़कों को चाहिए कि नमाज पढ़ना शुरू करें वाजिब तो
[27:49]नहीं है लेकिन नमाज पढ़ना शुरू करें ताकि अल्लाह से राबता कायम
[27:56]करने में जो लज्जत है जो लुत्फ है उससे आशना हो जाए
[27:59]बालिक होने के बाद नमाज बोझ ना बन जाए बाज रिवायत में
[28:06]है सा साल की उम्र में उम्र से बाज रिवायत में है
[28:10]न साल की उम्र से लड़कों को चाहिए कि नमाज पढ़े वादन
[28:14]को चाहिए कि उनको हुकम दे दे थोड़ी सख्ती भी करें नमाज
[28:17]पढ़ो ये वगैरा कभी मस्जिद में आके नमाज बा जमात प ना
[28:22]हो सके घर में कभी हमेशा पढ़ना भी जरूरी नहीं क्योंकि वाजिब
[28:25]नहीं है आप पर वाजिब उस वक्त होता है जब बालिक हो
[28:29]जाए अब बालिक होने के अपने शराय है तो बालिक होने से
[28:33]पहले सा साल या 9 साल की उम्र से नमाज पढ़ना शुरू
[28:39]करो लड़को से कहा गया इमाम साद सलाम की हदीस ताकि अल्लाह
[28:41]से बात करने में जो लुफ है जो सुकून हासिल होता है
[28:46]उससे आशना हो जाए उसको तजुर्बा करें तो यह उम्र जो आपके
[28:49]तियार में है इस उम्र से भरपूर फायदा उठाते हुए अपने फ्यूचर
[28:54]को आप बना सकते हैं जिस फील्ड में आप आइंदा जाना चाहते
[28:58]हैं उस फीड में कामयाबी के साथ कदम रख सकते हैं तो
[29:00]ये 24 घंटे जो हमारे तियार में है 24 घंटे हमारे तियार
[29:06]में है वही जमा होकर जो उम्र बनते हैं तो इस 24
[29:12]घंटों को कैसे गुजारना चाहिए इमाम मस काजम सला सलाम फरमाते हैं
[29:16]कि इन 24 घंटों को चार हिस्सों में तकसीम करो लाइफ स्टाइल
[29:22]बयान कर रहे इमाम मासूम तर्ज जिंदगी बयान कर रहे इमाम मासूम
[29:27]अ सलाम और इमाम का पैगाम अल्लाह का पैगाम होता है क्योंकि
[29:31]इमाम अल्लाह का क्या है जी नुमाइंदा है सही है जी अल्लाह
[29:38]का तर्जुमा है मौला फरमाते हैं कि अपने औकात को 24 घंटे
[29:41]के जो वक्त है जो आपके इख्तियार में है उसको चार हिस्सों
[29:46]में तकसीम करो एक हिस्सा जो है वो परवरदिगार के साथ मुनाजात
[29:52]करने के लिए मख सूस करो इबादत परवरदिगार खुदा की इबादत नमाज
[30:01]पढ़ना जिक्र पढ़ना कुरान शरीफ पढ़ना दूसरी इबादत जो है फिर दूसरा
[30:06]हिस्सा फरमाते हैं किमल माश रोजी कमाने के लिए वो तो आपकी
[30:13]जिम्मेदारी अभी नहीं है क्योंकि आप अभी छोटे हैं स्टूडेंट लाइफ जिंदगी
[30:17]गुजार रहे हैं तालिब इल्मी का दौरान से आप गुजर रहे हैं
[30:23]स्कूल जाते हैं कॉलेज जाते हैं सेंटर जाते हैं लेकिन बड़े जो
[30:25]आपके बाप है या बड़े जो जवान है जो जब प लगे
[30:29]हुए हैं उनके लिए है कि 24 घंटे में से एक हिस्से
[30:34]को मुकर्रर करो अमल माश कमाने के लिए रोजी कमाने के लिए
[30:39]मशत को दुरुस्त करने के लिए स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग को हाई करने
[30:42]के लिए माशी जिंदगी को बेहतर करने के लिए काम करो रोजी
[30:48]कमाओ नानो नफ का बंदोबस्त करो अपने अलो अयाल के लिए फिर
[30:50]तीसरा हिस्सा 24 घंटे में से तीसरा हिस्सा जो है मुजा सवान
[30:56]अपने मोमिन भाइयों से मिलो उनके साथ गैदरिंग रखो बातचीत करो डिस्कस
[31:04]करो मुत मजत पर उनका कोई दर्द हो तो सुनाओ सुनो हमदर्द
[31:08]बनो अपना अपने लिए कोई मुश्किल है तो उनसे शेयर करो ताकि
[31:13]दिल का बोझ हल्का हो जाए मुजा वान दनी बातो मजत पर
[31:20]डिस्कस करो दूसरे अ मजज पर डिस्कस करो ताकि उनत मोमिनीन के
[31:24]दरमियान मुस्तहकम हो जाए मजाल सतवान मोमिन भाइयों से मिलो जैसा कि
[31:32]अभी मस्जिद इमाम बारगाह बेहतरीन जगह है जहां हम इबादत खुदा बजा
[31:35]लाते हैं मस्जिद में इमाम बारगाह में जिक्र हुसैन से अपने दिल
[31:37]को मुनव्वर करते हैं लेकिन साथ-साथ मोमिनीन से भी मुलाकात होती है
[31:42]उनका हाल भी पूछते हैं यह भी एक बेहतरीन मौका है फराम
[31:44]होता है कि आप अपने दोस्तों से मिलते हैं उनका हाल पूछते
[31:49]हैं और 24 घंटों में से जो चौथा हिस्सा है वो लज्ज
[31:55]तों के लिए वो काम जो जिनसे आप लु उठाते हैं लुफ
[32:00]अंदज होते हैं जो लज्जत आपको हासिल होती है वह काम बशर्ते
[32:02]कि हराम काम ना हो शैतानी काम ना हो गर मुहर्रम की
[32:08]कते हदीस में कि गैर मुहर्रम हराम ना हो ऐसी लज्जत लज्जत
[32:13]वाले जो काम है व अंजाम दे दो शर्त कि उसम हराम
[32:14]ना हो गुनाह ना हो आंख के जरिए गुनाह ना करें कान
[32:18]के जरिए गुनाह ना करें जबान के जरिए नहीं गुनाह ना करें
[32:23]कदमों के जरिए मजलिस गुनाह में ना जाए गुनाह को अपने आप
[32:25]से बचाते हुए जो हलाल लत है आपको जो गजा पसंद है
[32:29]आपको जो फल पसंद है वो खाते हैं लज्जत हासिल अल्लाह ताला
[32:33]ने उसम लज्जत भी करार दिया है और उसमें विटामिन भी है
[32:37]उसम प्रोटीन भी है मुख्तलिफ किस्म की हमारे जिस्म को मुस्तहकम करने
[32:40]के लिए मुख्तलिफ अनास उसके अंदर मौजूद है लेकिन साथ साथ लज्जत
[32:42]भी है और दूसरे जो है सब्ज बाग का सेर करना उसमें
[32:47]भी लज्जत रखा है तो मुख्तलिफ लज्जत जो हलाल लज्जत हैं वो
[32:53]भी उससे भी 24 घंटे में से चौथा हिस्सा इस काम के
[32:56]लिए मुकर्रर करो हलाल लतों से लुफ अंदज होने के लिए हदीस
[33:01]के आखिरी हि में फरमाते हैं कि ये हलाल लज्ज तों से
[33:02]इंसान को जो एनर्जी मिलती है जो ताकत मिलती है उस ताकत
[33:08]के जरिए बाकी तीन कामों को अच्छे अंदाज में अंजाम दे दे
[33:16]सकोगे अगर आप तरोताजा हो शादाब हो खुशगवार मिजाज के साथ हो
[33:21]तो इबादत अच्छे अंदाज में बजा ला सकेंगे तो हलाल लज्ज तों
[33:26]से जो इंसान अल्लाह ताला के ताकत से जो एनर्जी हासिल होता
[33:34]है उससे दूसरे काम भी अच्छे अंदाज में बजा ला सक तो
[33:36]यह वसी मौजू है कुरान और जिंदगी एक ही महफिल में सारी
[33:42]बातें तो बयान नहीं की जा सकती है इंशाल्लाह य बातें सिलसिलेवार
[33:45]जारी रहेगी अगर आइंदा किसी वक्त और मौका मिला तो इंशाल्लाह बहस
[33:51]को तकल के उस मंजिल तक पहुंचा हंगा और अहम बातें जो
[33:56]जिंदगी के हवाले से कुरान और सुन्नत और जिंदगी के मौजू पर
[34:01]और भी अहम बातें इंशाल्लाह ताला मैं आपकी खिदमत में बयान करू
[34:04]अल्लाह ताला आप सबको सलामत रखेला या अल्लाह या अल्लाह या अल्लाह
[34:15]या अल्लाह या अल्लाह या अल्लाह या अल्लाह या अल्लाह या अल्लाह
[34:19]या अल्लाह परवरदिगार बहक मोहम्मद आले मोहम्मद जितने भी मोमिनीन तशरीफ फरमा
[34:25]है जितना भी अ लबा तशरीफ फरमा उनको अपनी जिंदगी में कामयाबी
[34:31]अता फरमा परवरदिगार हमारे गुनाह सगीरा कबीरा को माफ फरमा जो भी
[34:35]मोमिन परेशान आन की परेशानियों को दूर फरमा मुसलमाना ने मजलूम आलम
[34:42]खुसूस श अयाने परनार मुसलमाने फिलिस्तीन को जालिमीन के शर से महफूज
[34:47]फरमा जुल्म करने वालों को शिकस्त से दो चार फरमा परवरदिगार फुकाहा
[34:50]उलमा मुश्त आयला खाम आला सतानी बाकी मराज जाम बाकी शिया उलमा
[34:57]जो दीन और मकतब अहले बैत की खिदमत बजा ला रहे हैं
[35:00]खुदाया परवरदिगार उन सबको सलामती के साथ तूल उम्र बाजत अता फरमा
[35:06]हमारे मरहन की मगफिरत फरमा परवरदिगार बहक मोहम्मद ल मोहम्मद हमारे अजीज
[35:12]तलबा को शौक और दिलचस्पी के साथ अपनी तालीम पर तवज्जो देने
[35:16]की तौफीक अता फरमा परवरदिगार नूर मफत अले बैत से हमारे कुलूर
[35:23]को मुनव्वर फरमा इमाम जमाना अ सला सलाम के कल्ब मुबारक को
[35:25]हम सबसे राजी खुश फरमा हम सब की आक बत बखैर फरमा
[35:30]तमाम मोमिनीन की सलामती के लिए बा आवाज बुलंद सलात
0 تعليقات
sort ترتيب حسب
- أعلى تعليقات
- أحدث تعليقات
التالي
1 المشاهدات · 24/02/13
10 المشاهدات · 25/03/18
11 المشاهدات · 07/01/29
12 المشاهدات · 13/02/25
13 المشاهدات · 16/01/01
9 المشاهدات · 22/12/19
11 المشاهدات · 23/02/02
