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Polygamy in islam | Islam mein 4 Shadi | Why is Polygamy allowed in Islam? | Chaar Shadi ke Fayeda
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#Reaction #Polygamy #Islam #4Shadi
Polygamy in islam | Islam mein 4 Shadi | Why is Polygyny allowed in Islam? | Chaar Shadi ke Fayeda
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[0:00]क्या वाकई इस्लाम चार शादियों का हुकम देता है जिसकी वजह से
[0:05]खवातीन के ऊपर जुल्म होता है बसे बसाए घर उजड़ जाते हैं
[0:09]हवस परस्ती आम होती है आज हम इसी टॉपिक पर गुफ्तगू करेंगे
[0:12]अजु बिल्लाह मिन शैतान रजमंद सलाम अलेकुम मौजूदा दौर में इस्लामोफोबिया से
[0:17]मुतालिक तरह-तरह के नमूने में दुनिया भर खुसूस अपने ही मुल्क में
[0:20]देखने को मिलते हैं जिनमें से एक यह है कि इस्लाम चारचार
[0:25]शादियां करने का हुक्म देता है जिसकी वजह से हवास परस्ती आम
[0:27]होती है खवातीन जुल्म का शिकार होती हैं घर उजड़ जाते हैं
[0:32]और बर्बाद हो जाते हैं तो क्या वाकई इस्लाम चार शादियां करने
[0:34]का हुकम देता है क्या वाकई इस्लाम के मुताबिक एक से ज्यादा
[0:39]शादी हवस परस्ती को आम करती है क्या वाकई एक से ज्यादा
[0:43]शादी करने का कांसेप्ट असल में इस्लाम का है या ये कहीं
[0:45]और से आया है देखिए आगे बढ़ने से पहले हम एक बात
[0:49]आपके लिए क्लियर करते चल कि हमारा मकसद इस क्लिप से किसी
[0:53]मजहब या आईडियोलॉजी को नीचा दिखाना नहीं है या उसका मजाक उड़ाना
[0:57]नहीं बल्कि मिसा के जरिए से इस्लामिक पॉइंट ऑफ व्यू को समझने
[1:02]की कोशिश करेंगे और उसकी वजाहत करेंगे तो पहली बात तो यह
[1:05]है कि एक से ज्यादा शादी का कांसेप्ट इस्लाम का नहीं है
[1:09]बल्कि दूसरे मजहिया जाता है और इनमें चार ही नहीं बल्कि इससे
[1:14]कहीं ज्यादा की तादाद में शादियों का तस्करा मिलता है मिसाल के
[1:21]तौर पर हिंदू धर्म के मुताबिक अगर हम देखें तो श्री राम
[1:23]के वालिद राजा दशरत की तीन बीवियां थी जिनमें से एक श्री
[1:28]राम के वनवास का भी सबब बनी थी श्री कृष्ण के सिलसिले
[1:31]में मिलता है कि उनकी 16000 से ज्यादा बीवियां थी या हिंदू
[1:38]खुदाओं ब्रह्मा विष्णु गणेश शिवजी वगैरह की कई-कई बीवी आती है और
[1:42]ये चीजें उनकी किताबों और ग्रंथों में भी लिखी हुई है और
[1:46]हमें मिलती है इसी तरह ईसाइयों और यहूदियों की अगर बात करें
[1:49]तो इनके यहां भी कई-कई शादियां करने का रवाज था और रवाज
[1:53]है लमद के मुताबिक हजरत सुलेमान की सास सबसे ज्यादा बीवियां थी
[1:56]हजरत दाऊद अल सलाम की भी कई बीवियां थी तो यह चीजें
[2:00]कुरान में नहीं लिखी हुई है यह हमने तलमूद और बाइबल से
[2:02]आपकी खिदमत में इसको यहां पर नकल किया है इसके अलावा अरब
[2:07]और ईरान में भी इस्लाम से पहले कई शादियां करने का रवाज
[2:11]है इसके अलावा दूसरी आईडियोलॉजी और दूसरे मकातिब फिक्र या मजहिर जो
[2:15]हैं उनमें भी एक से ज्यादा शादी करने का कांसेप्ट पाया जाता
[2:18]है इस मसले में इस्लाम और दीगर आईडियोलॉजी में जो फर्क है
[2:23]वह यह है कि इस्लाम से पहले पॉलिगामी यानी एक से ज्यादा
[2:27]शादी के लिए कोई कानून नहीं था कोई तादाद मोयन नहीं थी
[2:30]लोग अपनी हवस मिटाने के लिए कई-कई शादियां करते थे कोई उसूल
[2:34]नहीं था बीवी का कोई हक नहीं था उसके साथ कैसा सुलूक
[2:39]किया जाए कोई हुक्म नहीं था उसे सिर्फ जिस्मानी लज्जत और बच्चा
[2:42]पैदा करने का जरिया समझा जाता था जिसकी वजह से बहुत सी
[2:47]मुश्किलात पैदा होती थी जैसा कि हिस्ट्री में कई राजा महाराजा और
[2:50]बादशाहों वगैरह के यहां यह चीज हमको देखने को मिलती है इस्लाम
[2:55]की खासियत इस मकाम प यह है कि उसने आकर इस मसले
[2:56]के लिए कानून बनाया उसूल दिया तादाद मोयन की खवातीन पर होने
[3:02]वाले जुल्म को खत्म किया शादी को खातून और मर्द दोनों के
[3:04]लिए इज्जत मोहब्बत और सुकून का जरिया करार दिया और इसमें सबसे
[3:10]अहम अदल इंसाफ का कानून रखा हर किस्म का इंसाफ जिस्मानी जहनी
[3:13]माली और यह भी कह दिया कि अगर तुम एक से ज्यादा
[3:17]बीवियों के दरमियान इंसाफ नहीं कर सकते हो तो सिर्फ एक ही
[3:22]शादी करो साहिबे तफसीर अजाना अल्लामा तबा तबाई अले रामाम इसी आयत
[3:25]के जिम्न में एक बहुत अजीम बात कहते हैं कहते हैं वो
[3:29]शख्स या वो लोग जो खवातीन को सिर्फ जिस्मानी जरूरत पूरे करने
[3:32]का जरिया समझते हैं इस्लाम उनकी बातों को कबूल नहीं करता है
[3:37]उनकी इस सोच के साथ उनके लिए शादी ही करना जायज नहीं
[3:39]है तो अब सवाल यह है कि चार या एक से ज्यादा
[3:43]शादी की ही क्यों जाए क्या यह चीज पहली बीवी के हक
[3:47]में जुल्म नहीं है यहां पहले तो मैं यह कहना चाहूंगा कि
[3:52]इस्लाम ने दो तीन या चार शादी करने को कहीं पर वाजिब
[3:53]नहीं कहा है दूसरी बात यह कि पूरे इस्लामी माशे खुसूस हमारे
[3:58]मुल्क में अगर हम देखें तो एक से ज्यादा शादी करने वालों
[4:03]की तादाद बहुत ही कम है क्योंकि उसके शराय ही नहीं होते
[4:05]उनके पास कि वो एक से ज्यादा शादी करें तीसरी सबसे अहम
[4:09]बात यह है कि एक से ज्यादा शादी या टेंपरेरी मैरिज यानी
[4:15]मता को इस्लाम ने समाज में पैदा होने वाली मुश्किल के सलूशन
[4:17]और उसके हल के तौर पर पेश किया है मतक सिलसिले में
[4:22]हम डिटेल से तीन वीडियोस की एक सीरीज बना चुके हैं जिसे
[4:25]आप सविल मीडिया के youtube0 कि अगरचे कुछ लोग यह बहाना बनाकर
[4:31]एक से ज्यादा शादी करते हैं कि इस्लाम ने जायज करार दिया
[4:34]है और फिर उसके तकाज और शराय को भी पूरा नहीं करते
[4:39]जिसकी वजह से उंगली दीन इस्लाम पर उठती है यह गलत है
[4:41]मुश्किल दीन इस्लाम के कानून में नहीं है बल्कि उन लोगों में
[4:45]है जो कानून का गलत इस्तेमाल करते हैं और उसकी रियायत नहीं
[4:48]करते हैं तो पहला जवाब इस्लाम के मुताबिक एक से ज्यादा शादी
[4:53]करना वाजिब नहीं है एक से ज्यादा शादी जिसकी हद चार बीवियों
[4:58]तक है जरूरत के वक्त की जाती है लेकिन जरूरत के बावजूद
[5:00]शर्त यह है कि बीवियों के दरमियान इंसाफ करने की सलाहियत मौजूद
[5:06]हो अगर इंसाफ ना करवाने का खौफ है तो कुरान के मुताबिक
[5:09]एक ही शादी पर इफा करना वाजिब है अब यह जरूरत कई
[5:13]तरह की हो सकती है मैं आपकी खिदमत में अर्ज करता हूं
[5:16]मुमकिन है कि शादी की जरूरत मर्द को नहीं बल्कि खातून को
[5:21]हो और शादीशुदा मर्द दूसरी शादी के जरिए इस जरूरत और मुश्किल
[5:24]के हल का जरिया बने जैसे रिसर्च कहती है कि खवातीन के
[5:31]दर लाइफ एक्सपेक्टेंसी मर्दों से ज्यादा होती है आमतौर पर मर्द हादसात
[5:34]का शिकार हो जाते हैं उनकी जाने चली जाती हैं जिनके पीछे
[5:39]उनकी बेवाए होती हैं जिन्हें जिंदगी की जरूरियत सरपरस्ती और दीगर मसाइल
[5:43]को हल करने की जरूरत होती है और जाहिर सी बात है
[5:48]आमतौर पर कुवारे और जवान लड़के बेवा से शादी नहीं करते हैं
[5:51]तो अब इस बेवा खातून की तीन हालत है पहली यह शादी
[5:56]ना करके बे सरपरस्त रहे और माशे की मुख्तलिफ खतरा जसे बद
[6:01]नियत अफराद की गंदी नियत गंदी निकाह और गंदी सोच का अकेले
[6:04]सामना करें और मुकाबला करें और अपनी नेचुरल जरूरतों पर कंट्रोल रखने
[6:08]की कोशिश करें जो एक सख्त काम है शायद यह चीज औरत
[6:11]के हक में जुल्म हो ऐसा हमें उन मशर में ज्यादा देखने
[6:16]को मिलता है जहां सिंगल खवातीन के सिंगल रहने का रवाज हम
[6:21]है दूसरी बात यह अपनी जरूरियत को नाजायज तरीके से पूरा करें
[6:24]कम से कम इस्लाम और इस्लामी मुश में या गैरत मंद मुश
[6:28]में यह चीज काबिले कबूल नहीं है तीसरी सूरते हाल इस खातून
[6:31]के लिए यह है कि वो किसी कुवारे शख्स से या किसी
[6:35]शादीशुदा शख्स से शादी करके अपनी इज्जत इफत और सरपरस्ती का इंतजाम
[6:38]करें अपनी जरूरतों को जो उसकी नेचुरल जरूरतें हैं उसको जायज तरीके
[6:44]से पूरा करें और खुद को और मुशे को बुराइयों से बचा
[6:46]ले मैं अर्ज कर चुका हूं कि आमतौर से कुआरे जवान लड़के
[6:50]बेवा या तलाकशुदा खातून से शादी नहीं करते हालांकि इस्लाम की रू
[6:54]से ऐसा कोई कानून या हुक्म नहीं है तो अब सवाल ये
[6:57]है कि इस बेवा या तलाकशुदा खातून को कौन सा रास्ता चुनना
[7:02]चाहिए फैसला आपके हाथ में है इस्लाम यह कहता है कि उसे
[7:08]शादी करनी चाहिए लेकिन टर्म्स एंड कंडीशन अप्लाई होंगी और वह यह
[7:11]है कि ऐसे शख्स से शादी करें जिसमें बीवियों के साथ इंसाफ
[7:14]करने की सलाहियत पाई जाती है अगर किसी माशे में ऐसी सूरत
[7:22]हाल हो जहां खवातीन की तादाद मर्दों से ज्यादा हो तो जाहिर
[7:24]सी बात है एक मर्द एक से ज्यादा शादी कर सकता है
[7:28]उसे करना पड़ेगी ताकि मुशरा हराम और नाजायज कामों से बचा रहे
[7:31]यहां कुंवारी और शादीशुदा खातून के दरमियान कोई फर्क नहीं है मुमकिन
[7:37]है कि एक ऐसा मुशरा हो जहां फास शराबी बद अखलाक लड़कों
[7:43]की तादाद ज्यादा हो जो शादी और खवातीन को जिस्मानी जरूरत और
[7:46]अपने घरेलू काम वगैरह करवाने का जरिया समझते हो जहां मोहब्बत इज्जत
[7:53]सुकून और शादी के मकसद की कोई अहमियत ना हो जिनसे शादी
[7:55]करने के बाद लड़कियों की जिंदगियां बर्बाद हो जाने का खतरा हो
[8:01]लेकिन इसके मुकाबले में कुछ ऐसे शादीशुदा जवान हो जो शरीफ हैं
[8:04]पढ़े लिखे हैं और बीवियों के साथ इंसाफ करने की सलाहियत उनमें
[8:09]पाई जाती है वह उनको इज्जत सुकून और मोहब्बत दे सकते हैं
[8:12]तो अब यहां पर जरा सोच कि एक अकलमंद दीनदार शरीफ और
[8:17]काबिल लड़की किसका इंतखाब करेगी जवाब आप दें मुमकिन है तमाम कोशिशें
[8:25]करने के बाद भी किसी को औलाद ना हो रही हो तो
[8:30]इंसान नस्ल बढ़ाने के लिए दूसरी शादी कर सकता है वाजिब नहीं
[8:32]है लेकिन ऐसा होता चला आया है यहां तक कि पहली बीवियों
[8:37]ने दूसरी शादी करने की इजाजत दी अपने शौहर को लेकिन शर्त
[8:40]यही है कि बीवियों के साथ इंसाफ के साथ पेश आया जाए
[8:45]और तवज्जो उनको बराबर से दी जाए एक और जरूरत है वो
[8:51]यह कि हो सकता है कि शादी के तकाज पूरे ना हो
[8:55]रहे हो जैसे जौजा में जिस्मानी मुश्किल या मर्ज वगैरह हो तो
[8:58]जाहिर सी बात है य इंसान उस पहली बीवी को या तो
[9:02]तलाक देके बेसहारा कर दे बे सरपरस्त कर दे और दूसरी शादी
[9:06]करके करके अपनी जरूरियत को पूरा कर ले जो इंसानियत और इस्लाम
[9:09]की रू से दुरुस्त नहीं है या इन तकाज को नाजायज तरीके
[9:14]से पूरा करें या पहली बीवी के हुकूक की रियायत के साथ
[9:18]दूसरी शादी करके इन तकाज को हलाल और जायज रास्ते के जरिए
[9:25]से पूरा करें एक इंसाफ पसंद मुत दयनसंपदा के रास्ते का इंतखाब
[9:31]करेगा यह काम पहली बीवी की तरफ से हराम से बचने में
[9:36]मदद करने में अज्रो सवाब का बाइ भी होगा अब यहां पर
[9:37]सवाल यह है कि बताई हुई सरतो के पेशे नजर एक से
[9:41]ज्यादा शादी करना पहली बीवी के हक में क्या जुल्म नहीं होगा
[9:46]जी हां जुल्म होगा मगर उस सूरत में जब एक से ज्यादा
[9:48]शादी हवस परस्ती के लिए की जाए हवस पूरी करने के लिए
[9:54]की जाए खातून को जिस्मानी ख्वाहिश का जरिया समझते हुए की जाए
[10:00]जब बीवी के हुकूक की यानी तमाम हुकूक की हर किस्म के
[10:02]हुकूक की रियायत ना की जाए बराबर से दूसरी बीवी को और
[10:07]पहली बीवी को तवज्जो ना दी जाए अगर हक अदा ना कर
[10:11]पाने का खौफ है तो यहां पर जुल्म भी होगा और दूसरी
[10:12]शादी करना जायज भी नहीं होगा दूसरी बात यह कि हमने इस
[10:18]सवाल में सिर्फ औरत के एक पहलू को देखा है कि अगर
[10:22]दूसरी शादी होती है उसके शौहर की तो पहली बीवी पर जुल्म
[10:27]हो सकता है इसका एक और पहलू भी है वह यह है
[10:27]कि जो शराय हमने जिक्र किए हैं अगर इन शराय में बेवा
[10:32]या तलाक शुदा खवातीन से शादी ना की जाए और उनकी शादी
[10:37]ना होने की सूरत में अगर माशे में बुराइयां फैश फशा और
[10:39]नाजायज तालुकात आम होते हैं तो इसका गुनाह इस गुनाह का जिम्मेदार
[10:45]कौन होगा इस गुनाह यह गुनाह किसके सर जाएगा अगर यह खवातीन
[10:47]तन्हा बेसहारा और बेसाया रहे और खतरा इनके सर पर मंडराते रहे
[10:55]उनकी जरूरियत नेचुरल जरूरियत जो है वह पूरी ना की जाए तो
[10:57]क्या यह उन पर जुल्म नहीं होगा इसका जम्म जिम्मेदार कौन होगा
[11:02]जिम्मेदार पूरा मुशरा होगा और इसमें मर्द और खवातीन दोनों शामिल होंगे
[11:06]जिन्हें अल्लाह के सामने जवाब देना होगा तो देखें यहां पर इस्लाम
[11:12]ने एक दरमियानी रास्ता पेश किया है जो आकला भी है जो
[11:15]अकल के ऊपर भी खरा उतरता है और वह यह है के
[11:18]बीवियों के साथ इंसाफ और शराय की रियायत के साथ शादी की
[11:23]जाए और मुशे को बुराइयों और बद कायों से बचाया जाए इंशाल्लाह
[11:26]एक नए वीडियो के साथ आपकी खिदमत में हाजिर होंगे तक के
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