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Muhafiz-e-Naboowat Hazrat Abu Talib A.S | H.I Shabeer-ul-Hasan Tahiri
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Record date: 21 Nov 2021 - محافظ نبوت حضرت ابو طالب ع
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2021 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:00]झाल कि लाहौल विला कुव्वत इला बिल्ला वहेल धुंध आओ दो गिलास
[0:18]असमिया हिलारी में मिनट शैतान इलाही नदीम एस कि लाइन थाने रही
[0:25]है है अल्हम्दुलिल्लाह अल्लाह यह जाना बेहद लंबा गुना लेना तय लहू-लुहान
[0:35]हजारों अल्लाह हू की ताकत ज्ाांच रोशेल और अभिनव बिल हक लुट
[0:40]ग्राम अलार्म विश्वविद्यालय जबलपुर साइन इन अजय को एक व्यक्ति हर राह
[0:58]बने ना धुंध लुट बंधु बाद आशीर्वाद मिला अभिनव आनंद देव महाराज
[1:20]p15 शुभकामनाएं कर दो और सुनाओ प्रॉब्लम है कि राजन कि रमेश
[1:35]यादव बिरहा ग्राम ने है कि आज के लिए जो ध्यान पसंद
[1:41]किया जिसे मांड कृपया चेक करने के लिए कहा है वह है
[1:43]हजरत यह आबू तालिब अलैहेसलाम वह काफी देना वक्त हजरत अबू तालिब
[1:50]अलैह सलाम ब् इस मुद्दे की निभाती हैं वहां पर देते नवी
[1:57]हैं कि महक विदेश खैरियत है कि महक विद ए इस्लाम भी
[2:07]है इसलिए वह कि उम्मते मुस्लिमा के अबनी मुझसे निम्न में से
[2:16]हैं कि अगर दे अवतार गणेशाराम अ कि खुद रख उंधियू ने
[2:22]अपना मुसलमान है वह रसूलल्लाह के बीज हम ऑप्शन है प्रोफाइल आपकी
[2:27]उम्र के व्यवस्थित है हजरत यह उठाने वाले सलाम ने कि अल्लाह
[2:35]के नबी कि उनकी भगवत के अलावा के दिन कि अल्लाह के
[2:41]इस्लाम की और शरीर से मुद्रा की कि इस तस्वीर के साथ
[2:47]विकसित मत के साथ की कृपा दत्त शर्मा ई ई है इस
[2:53]बारे में है कुछ मुक्तसर से बखूबी याद है लिए सबसे पहले
[3:00]हम थोड़ा सा जाएगा लेंगे कि हज़रत अबू तालिब कौन है कि
[3:04]इनका तार्रुफ किया है इन के वारिस कौन है इन की वालिदा
[3:11]कौन है इनका खानदानी पश्चिम अंदर क्या है यहां पर इंच की
[3:16]विलादत कब हुई वफात कब हुई इनकी कुल मतदाता याद कितनी है
[3:21]है और उसके बाद इनकी स्थित बाद का एक है और इस्लाम
[3:27]पर इनके जो एहसानात हैं और प्रथम बार गिरामी की और उनकी
[3:34]हुकूमत की मोहब्बत के लिए निकले ज्योति के दामाद हैं कि उन
[3:37]पर एक नजर डालेंगे तो कि हज़रत अबू तालिब हैं जिनके नाम
[3:43]के मुतालिक तीन कॉल है कि इनका नाम क्या है कि यह
[3:48]कॉल यह है कि इनका नाम अब जैमन आफ है और एक
[3:54]कॉल यह है कि इनका नाम इमरान है अबू तालिब तो करनी
[4:00]है थैंक ऊ कि अबू तालिब को नियत है तो ना कि
[4:05]बताने के और वह है कि उनका नाम अब्दुल मनान से और
[4:09]एक कॉल यह किन का नाम मेंबरान है और एक पहलू यह
[4:14]भी है कि इनका नाम भी अबूतालिब है और कुंठित भी अब
[4:18]उतारकर अलबत्ता और लंबाई हम मीडियम और लंबाई जरिया जिस फॉल को
[4:24]तरजीह देते हैं वह यह है कि उनका नाम इमरान है और
[4:31]उनकी कुन्नियत अपुन साहेब हृदय अब हम इसके बाद चिन्ह है असरफ
[4:36]उत्तरदायित्व परदादा है हजरत हाशिम कि यह प्रत्याशियों के होते हैं हजरत
[4:45]हाशमी की औलाद को परिभाषित कहा जाता है यह जितने भी बनी
[4:51]हाशिम है जिसमें आलम मोहम्मद भी याद आते हैं कि यह जीत
[4:56]हासिल की वजह से इनेबल हाशिम कहा जाता है और हजरत हाशिम
[5:01]कौन थे यह हद थे अबू तालिब के दादा थे हजरत यह
[5:06]मुतालिक के वालिद हज़रत अब्दुल मुत्तलिब और हज़रत अब्दुल मुत्तलिब के जो
[5:10]वंचित हैं वह वृद्ध आश्रम है और फिर हजरत हाशिम के बाद
[5:17]आप हैं उनका नाम अपने मन अवसर पर जो अदृश्य तारे की
[5:21]जो बांधता है उनका नाम है अब बात माफ बनते अमृत महोत्सव
[5:27]में उ कि यह अद्वितीय उद्यानिकी वाले लार है कि हज़रत अब्दुल
[5:32]मुत्तलिब के 10 बेटे थे कि कुछ हद तक के तस्वीर थे
[5:41]और उनकी जगह एबी एक अंग्रेज चले आए लुटने के लिए अंग्रेजो
[5:54]से आधे यह दोनों तरफ संकेत है क्या मतलब यह है कि
[6:03]उक्त अभियुक्त इच्छुक तरफ लौट आते हैं कस्बा स्थित उनमें से उतर
[6:10]गए थे लेकिन हत्याकांड से जुड़े इस मुद्दे को आज की जो
[6:17]नोटिफिकेशन है अ कि हिंदुओंके जिस तरह वाली देखिए इसी तरह दूसरों
[6:23]की बाध्यता बीजेपी कि यह दोनों तरफ बढ़ते अमृत बाहों में एक
[6:27]ही बार रहा है इसलिए करते हैं [संगीत] कि यह माना करके
[6:36]रख सनम और उर्मिला के दादा दिए हैं और प्रतिनियुक्त हैं कि
[6:44]मौलिक अनुसंधान के दादा एक है दादी भी क्वेश्चन तो इस बात
[6:52]करते हुए धारक प्रिंटर में दादी का एक होता यह पूछा जाता
[6:58]था कि दादी भी है क्योंकि उस जगह साथियों का स्वास्थ्य हमेशा
[7:02]नरम-गरम मेरा ज्यादा कौन सा परिचय ज्यादा शादियां करना और इस्लाम से
[7:07]पहले तो वह बहुत ज्यादा करते थे यह तो इस्लाम व्याख्यान दिए
[7:11]कि एक वक्त में एक मत चार भी रख सकता है के
[7:14]अनुसार पहले उनकी कोई हद नहीं है मेरे वॉइस जा रहा शादी
[7:20]करते थे वहीं पर मैं एक मत जहां भी नहीं रख सकता
[7:26]है यह इस्लाम की कुएं में कि हज़रत अबू तालिब है हैं
[7:33]इनकी जो मिलाते हैं उसकी बिल्कुल दुरुस्त तारीख को तो तारीख में
[7:43]नहीं मिल सकी लेकिन मजाल से जो मुझे अंदाज़ा हुआ है वह
[7:50]यह है कि सन 534 इसवी मेल की विलादत हुई है कि
[7:54]उसकी वजह यह है कि मशीन नहीं है लगता है कि अंदर
[7:59]तेलुगु साहित्य हैं यह त्रिफला से उम्र में 35 परस बड़े थे
[8:08]कि कि अगर चेक उनकी मिला तक और उनके उनके विलादत की
[8:11]तारीफ मदद से उतारने की विरासत की तारीख शत्रुओं की विरासत स्थल
[8:15]को सही तरह मौत पर पुस्तक में नहीं मिल सका लेकिन उधर
[8:20]से करने के लिए ख्याति यह प्रश्न ग्लास से उम्र में 35
[8:25]बरस पड़े थे तो अगर 35 वर्ष बड़े थे जो रसूल अल्लाह
[8:30]की विलादत सन 570 स्विमिंग है यह सचिन ने लिखा है क्योंकि
[8:33]मिलाकर चुप यह 570 इसी में इस तरह मृत्युकारक की विलादत 535
[8:38]विनती है एक और चीज जो वाटर से ने लिखी है वह
[8:43]यह कि आमिर फिल्म के देहात से रसूल अल्लाह की विरासत यह
[8:50]कमाल फील्ड में हुई है और मौर्य ने लिखा कि इस बातें
[8:56]फिर से अदृश्य उठाने की विलादत 35 प्रस्तुत किए हैं है तो
[8:59]रसूलल्लाह से उम्र में 35 बरस पड़े थे आप ए रसूल अल्लाह
[9:06]या मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह अल में आ उनकी जॉब मिला है तुम्हें
[9:13]दोनों की मुलाकात से पहले ही उनके बारे में यही हजरत अब्दुल्लाह
[9:16]इस दुनिया से जा चुके थे कि हज़रत अब्दुल्लाह टाइम तक का
[9:23]रसूल की राशि पहले हो गया है हैं तो ज्यादा खून की
[9:27]विलादत के पहले रोड से ही उनकी प्रश्नों पदार्थों की तबीयत खराब
[9:31]तक काम जहर उनके दादा ने जन्म लिया अध्यक्ष उत्तर प्रदेश और
[9:36]शरवां बिश्रोई से शत्रुओं कि पैग़ंबरे अकरम की छह बरस उम्र हुई
[9:44]तो उनकी वाले तबीयत खराब है और पैग़ंबरे अकरम जब होंठ बरस
[9:47]के हुए हैं तो उनके दादा का इंतकाल हो गया हजरत इब्राहीम
[9:54]तरीका तो यह आम साल तक सरकारी दो आलम अपने दादा खेड़े
[9:57]निकाह रहे उन्हीं के जरिए साया रहे उन्होंने ही तबीयत कि उन्होंने
[10:03]ही पाला उन्होंने हिफाजत की लेकिन हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने अपने विशाल
[10:08]से पहले ही जी हां अपने तमाम बिलों पर निगाह दौड़ाई यह
[10:13]सवाल एसे कि मैं अपने इस यतीम होते कहा कौन से बेटे
[10:17]के हाथ में देकर जाऊं को टोन की निगाह हजरत है वह
[10:21]तनिक पर आकर ठहर गई हजरत हुसैन अलैहिस्सलाम को फिर उन्होंने वसीयत
[10:26]की और उन्होंने कहा कि देखो मैं मोहम्मद कहा तुम्हारे हाथ में
[10:32]दे रहा हूं कि मेरे बाद इसकी हिफाजत भी करनी है इसकी
[10:39]तबीयत में कर रही है इसकी लिखित शिकायत करनी है इसकी जरूर
[10:43]याद को भी पूरा करना है है तो हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने
[10:49]अपने बेटे आधुनिक को जो वसीयत की थी मेन उस पर अमल
[10:51]किया है प्रतियोगिता से भरे सलाम है और हज़रत अबू तालिब अलैहिस्सलाम
[10:58]ने है मैं अपने इस भतीजे की तबीयत भी कि उन्हें पाला
[11:01]भी परवान भी चढ़ाया उनकी ने केदार की और उनकी हिफाजत विक्की
[11:06]हर तरीके से उनके फादर कि अ है और हत्या के अपने
[11:11]बेटों से भी बढ़कर उनका खयाल रखा है है और कोई किसी
[11:16]भी बात को नतीजा यह मांजा होने रिश्ता है उससे हमदर्दी भी
[11:22]हो सकती है मोहब्बत भी होती है लेकिन किसी भी बाप को
[11:24]अपनी औलाद से अपने बेटे से बढ़कर नतीजा यह होता है ना
[11:30]वह नेट चालू होता हर बाप को सबसे ज्यादा प्यारी उसकी अपनी
[11:35]ही औलाद होती है है मगर हज़रत अबू तालिब ने है कि
[11:41]हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने अपनी औलाद से बढ़कर हैं जो अपने इस
[11:50]भतीजे को चाहा यहाँ तक के अगर कुर्बान होने क्या वक्त आ
[11:56]जाएं तो भनेको मेरा बेटा किसी मेरे बेटे की जान जाती है
[11:58]तो जल्दी जाए लेकिन मेरा भतीजा पत्ते ऐसा सिर्फ इसलिए कर रहे
[12:05]थे क्योंकि वह जानते थे है कि अल्लाह के नुमाइंदे हैं यह
[12:11]बहुत ज्यादा होता है यह नवी ओर लाएं भतीजा समझकर नहीं बल्कि
[12:16]अल्लाह के नबी समझकर उनके लिए यह सब कुछ कर रहे थे
[12:21]है वरना यह तो की बात व्रत के खिलाफ होगी कि कोई
[12:28]इंसान अपने बेटे को भतीजे पर कुर्बान कर देंगे बेटे कभी भी
[12:31]भतीजा और बांधों पर कुर्बानी किए जाते हां बेटे नगरी और मकसद
[12:36]पर कुर्बान किए जाते हैं और हव्वा साधना लग जाता है कि
[12:47]अल्लाह माशा अल्लाह बहुत दिमाग प्रधान तो जो लोग हज़रत अबू तालिब
[12:55]अलैहिस्सलाम के इस्लाम पर गया विमान पर शक करते हैं उन्हें यह
[12:58]बात समझ में नहीं आती हैं आज के आज भी बहुत सारे
[13:04]नगरी सती लोग ऐसे हैं क्या चाहिए क्या अपने बेटे को प्रगति
[13:07]के व्यापक यह किसी अधिक शरीर प्रवेश द्वार पर प्रेस करेंगे तो
[13:13]नहीं करेंगे लेकिन उस तांत्रिक हाथी जोकर अपने नजरिए पर कुर्बान करने
[13:17]के लिए तैयार हो जाएंगे का नजरिया और आधा मुकादम होता है
[13:23]कि इंसान मसले पर अपनी जान की परवाह न कर सकता था
[13:28]कि वह पीना युधिष्ठिर जान-माल और आधुनिक पौराणिक अजीब लगता है और
[13:34]ज्यादा मत पीना तो वह चीज है यह चीज समझ में आती
[13:37]है कि आती था वह अच्छा है कि जिस पर बेटे को
[13:42]अगवा किया था सकते हैं टॉप अपने यह अगर रसूलल्लाह को रात
[13:49]में खतरा है बारिश ने लिखा है कि पैग़ंबरे अकरम को बचपन
[13:52]ही से हसरत है वह सारी बैलेंस अलावा अपने साथ चलाते थे
[13:59]अ एक सफल घर में अपने साथ देते हैं कि अगर कमी
[14:02]खतरा पैदा होता है कि राष्ट्रभक्तों के भतीजे पर कोई हमला कर
[14:10]सकता है हैं तो उनके बिस्तर को तब तक करते थे और
[14:12]अपने बेटों को बारी-बारी उनके बिस्तर पर सुलाते थे कि आखिर ऐसा
[14:17]वक्त हां भी जाए तो कोई मेरा बेटा कुर्बान हो जाए तो
[14:19]है मगर मोहम्मद बिन अगला की जान बच्चा है कि तुम करिए
[14:24]अमल बता रहा है कि वह सरकार के साथ ये कौन सा
[14:30]रिश्ता रहते थे यानी खूनी रिश्ते की बिना पर नहीं बल्कि जो
[14:36]पति रिश्ता था उनका जो आती था कि अल्लाह के नबी है
[14:37]उन्हें कैसे पता कि अल्लाह के नबी है कि उन्हें इस्लाम तथा
[14:43]कि के यह कहते अबूतालिब अलैहिस्सलाम और हज़रत अब्दुल्लाह और हज़रत अब्दुल
[14:49]मुत्तलिब और जनाब हाशिम ने इस पूरे दिन पैग़ंबरे अकरम और मोला
[14:54]सलाम के जो आप बावजूद हैं इनके बारे में मौजूद थी ने
[14:56]लिखा है कि इनमें से कोई भी कभी न भूलूं बरस रहा
[15:01]है और न कभी मुशरिक रहा है और न कभी का बिरहा
[15:06]इनमें किसी ने भी कभी बुत परस्ती नहीं कि यह हमेशा तो
[15:11]हित प्रेस रहे और यह दी ने इब्राहिमी पर रहे हैं कि
[15:15]यदि ने ब्रेंबल है अच्छा मुसलमानो मे से एक तब का है
[15:20]आज के जो पैग़ंबरे अकरम के बाद उनको यह उनके अजदाद को
[15:26]मुसलमान नहीं मानता एक तबका है उसकी तादाद को मानने वालों के
[15:32]मुकाबले में ज्यादा नहीं है कम है कि उनका नजरिया है कि
[15:38]रसूल के जो वाले हैं या उनके जो अ जाता है वह
[15:42]उनकी तरफ को फिर की निष्पत्ति देते हैं मगर वह बहुत कम
[15:46]लोग हैं इस वक्त उससे हमें कोई बहस नहीं है मुसलमानों की
[15:48]गाली बक शरीयत मानती है कि क़ुरआने मजीद कह रहा है कैन
[15:54]अभी हमने आपको सजदा करने वालों की पोस्ट में रखा कि जब
[15:57]क़ुरआने मजीद यह कहना है कि हमने आपको सजदा करने वालों की
[16:01]पोस्ट में रखा है तो इसका मतलब है कि साजिदीन और मुजाहिदीन
[16:03]अजदाद हैं पैग़ंबरे अकरम के और मौला अली अलैहिस्सलाम के जो अड्डा
[16:09]है वह अधीन है तो इट्स फर्स्ट है और सा दिन है
[16:12]और फिर मक्के की तारीख यह है कि वह ज़माना ज़माना जाहिलियत
[16:18]कहलाता है बेशक दबाना पैगंबर गिरामी के अलावा से पहले का जमाना
[16:21]है उस ज़माने को दबाना जाहिलियत कहा जाता है कि उस जवान
[16:26]है जहां बीच में क्यों दबाना जाएंगे इतना जाता है कि जो
[16:32]लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं और जहालत की इंतिहा की वजह से वह
[16:33]बरसते कि यह नहीं असल नाम परस्ती हो रही थी सनम परस्ती
[16:38]और हर घर का हर फटका लग सनम था यह ऊपर का
[16:42]हर घर का अलग होता था और उनके अपने हाथों से तराशे
[16:46]हुए बनाए हुए वह उनके बाबू तय है वहीं को सजदा करते
[16:51]थे उनकी बातें करते थे बुत परस्ती थी और यह हालत की
[16:55]वजह से थी वह फिर था तहजीब वगैरह फैसला कोई चीज नहीं
[16:58]थी सखावत शराफत द्यानत अदालत उस माजरे में इन चीजों यह चीजें
[17:03]नहीं थी अ हैं उस मावे के अंदर यह खानदान इग्नोर हाशिम
[17:07]पढ़ा-लिखा खानदान था यह आला तालीम याफ्ता खानदान और आधुनिक बोध भिक्षु
[17:14]यह नमाज पढ़ने वाले लोग रोजा रखने वाले लोग और यह लोग
[17:21]इबादत करने वाले सखावत करने वाले और लोगों के साथ अच्छा सलूक
[17:24]करने वाले खानदान ही फंदा ने बनवाया था यानी अ प्रति हैं
[17:29]यह आदत है वह व्यक्ति होता है अगर के मुताबिक दारा हजरत
[17:39]यह चैप्टर हैं इनके पास यह मतलब था कि खाने का बाद
[17:45]है मैं उसके करीब बर्दाश्त बीते और आदमियों की शिकायत और सहमत
[17:49]कम अनुसार उनके पास था और वह आज के जमाने में तमाम
[17:55]हाजियों को खाना खिलाते थे उनके फिर मत करते थे और उनका
[17:57]ख्याल रखते थे फिर यह हजरत यह श्रम से हज़रत अब्दुल मुत्तलिब
[18:03]की प्रत्यंचा पाया और हज़रत अब्दुल मुत्तलिब के बाद जो यह मनसब
[18:06]हज़रत अब्दुल मुत्तलिब के बेटों में से हजरत है वह तारीख को
[18:11]मिला था कि हज़रत अबू धाबी यही काम करते थे यह खाने
[18:13]काबा के मुताबिक लें और हमने काबा की खिदमत का मनसब हाजियों
[18:20]की शिकायत और उनके पिता उनका मन शक यह बड़ा मकसद था
[18:26]यह हजरत है अबू तालिब अलैहिस्सलाम के बाद का ताकत यह नृत्य
[18:29]मुख्तलिफ के बेटों में से हसरतें अब तालिबान के माली हालात दूसरों
[18:36]के मुकाबले में ज्यादा अच्छे नहीं थे माली हालात न का मिश्रण
[18:39]उन्हीं के दूसरे भाग हैं यदि फिर मतलब तो वह मानसिक तौर
[18:44]पर घोषाल से या और अपराध की निष्पक्षता के मुताबिक माली लिहाज
[18:47]से उनकी हालात ज्यादा अच्छे नहीं थे मगर की मंशा उनके पास
[18:52]था और वह इतनी सखावत का मुजाहिरा करते थे कि बावजूद इसके
[18:55]उनकी हालात ऐसे ही थे लेकिन उसके बावजूद भी तारीफ में लिखा
[19:00]है कि हज के मौसम में पानी के जो हाउस थे उनमें
[19:02]हज़रत अबू तालिब खजूरें है और यदि शरीर खजूर हैं और किशमिश
[19:09]डलवाते थे ताकि हाजी जब पानी पीएं तो अधिकतर अंबानी और अच्छे
[19:12]जाकर वाला पानी उन्हें मिले स्लोवाक और प्रसन्न रखे लुट और तारीख
[19:23]में यह भी लिखा है कि 1 मर्तबा हज़रत अबू तालिब यह
[19:28]मौसम आ गया हज का हांजी आ गए और हज़रत अबू तालिब
[19:33]अलैहेसलाम के पास पैसे नहीं थे वह जिलों के लिए यह सिर्फ
[19:35]मत कर सकें दोनों ने अपने ही भाई अब्बास पर नवनिर्मित तरफ
[19:41]से 10,000 देगा हम बतौर एक बार इसलिए कि अगले साल तक
[19:44]इंशाल्लाह होता तो पिछले दर्द देखा तो वापिस कर दूंगा मगर अब
[19:49]हज का मौसम में हाजी आने वाले है तो उन्होंने 10,000 कर्ज
[19:54]लेकर हाथियों की हिम्मत की और हाथियों के लिए यह गंध किया
[19:56]10,000 दे रहा मुसलमानों में आपको चाहिए थी 14 साल दर साल
[20:01]पहले 10,000 दिन हम कितनी बड़ी कृपा होगी वैल्यू के लिहाज से
[20:04]उसको आप देखिए जो सी किया रैली होगी उतना पैसा उन्होंने खर्च
[20:10]किया और दूसरा साल आ गया तो हज़रत अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब
[20:14]का कर्ज राधानगर सके हालात अच्छे ना होने की वजह से और
[20:18]फिर वही वक्त आ गया के भाइयों की इज्जत करनी है तो
[20:22]दोबारा हजरत अब्बास में नवनिर्मित तब से 14 2013 में बतौर कर्ज
[20:24]दिए अपने भाई से के हाथ जी आने वाले हैं अल्लाह के
[20:28]घर के मेहमान मुझे उनके से बात करनी है तो आप बाद
[20:33]में नवनिर्मित ली अपने इस छत पर दोबारा 14 दर्द हम करता
[20:35]हूं दिया क्या अगले साल तक आप यह संख्या वापस ना कर
[20:39]सके तो आप यह सब मुझे वापस करेंगे मुझे देंगे यह मनसब
[20:43]फिर मेरे पास रहेगा हाजियों की सहमत का जो असाध्य फिर मेरे
[20:47]पास रहेगा कि दूसरे साल तक भी हजरत अब्दुल मतीन हजरत ने
[20:49]मुतालिक हालात इस काबिल जाओगे केवल यही वह 10,000 यज्ञ 14000 वापिस
[20:55]कर सकते तो यादव ने मोहल्ले के मुताबिक के बंसल हजरत अब्बास
[20:58]को देना पड़ गया मनसब देना पसंद कर लिया लेकिन मेहमान नवाजी
[21:04]और सखावत से हाथ नहीं उठाया है यह शिकायत भी की है
[21:10]तो उस मआशरे के अंदर यह वह घर आना था और फिर
[21:14]यह मनसब लिया है तो किस ने उन्हें के भाई ने यह
[21:17]वह खून है यह नस्ल है यह वह खानदान है कि इसके
[21:21]अंदर शहादत पाई जाती है जिसमें शराफत पाई जाती है जिसमें मेहमान
[21:23]नवाजी पाई जाती है जो इस मामले में यह चीजें नहीं थी
[21:26]है और हज़रत अबू तालिब के बारे में कि हज़रत अब्दुल मुत्तलिब
[21:31]चेंज हो हजरत इब्राहिम की तबीयत की थी उन्हें पढ़ाया-लिखाया और हज़रत
[21:36]अबू तालिब अपने ज़माने के बेहतरीन सुखनवर और बेहतरीन अधिक थे बेहतरीन
[21:41]शायर थे और शायद कोई अनपढ़ आदमी नहीं होता है और उस
[21:47]जगह का त्यौहार के लिए पढ़ा-लिखा होना जरूरी है और हज़रत अबू
[21:49]तालिब का जो दीवान है वह बताता है कि अब हज़रत अबू
[21:52]तालिब का इल्मी बखान किया था और उनका जो दीवान और उनके
[21:58]जो आसान हैं उनके वह आचार बताते हैं कि उनका आसमानी किताबों
[22:00]का कितना मुकाबला था आसमानी सही होकर कितना मोटा रखे हुए थे
[22:07]फिर हम का कलाम यह बताता है कि वह सिर्फ वर्कर्स विल
[22:09]नहीं रखते थे बल्कि इल्हामी इल्म भी रखते थे हजरत अबू तारीख
[22:16]को कि हज़रत अबू तालिब ऐसे ऐसा अनुमान है कि जिस पर
[22:19]कई अश्लील होने चाहिए एक विशिष्ट और लाल नहीं है जरूरतें मुतालिब
[22:24]और यह लाइक तहसीन हमारे ब्रांड के जिन्होंने इस हनुमान पर तो
[22:27]यहां पर यह मिक्सचर कर रहे हैं हजरत है वह तालिब अलैहिस
[22:32]सलाम है कि वह कि वह आती है और वह शक्शियत हैं
[22:38]कि अगर आबू तालिब होते तो ना आज दिन होता है ना
[22:39]इस्लाम होता ना इंसानियत होती कुछ भी नहीं होता कि आज हम
[22:44]तक खेरियत पहुंची है मैं बात करूंगा आगे चलकर यह एहसान हजरत
[22:50]आबू तालिब का अ है बल्कि ओशो रसूल ही पाल के उम्र
[22:54]को हज़रत अबू तालिब ने दिया है और सिर्फ पाना नहीं है
[22:56]बल्कि उनकी हिफाजत की है वो मान सिंह ने लिखा कि हमेशा
[23:00]ही कुछ कार्य पूरा इससे और आश्चर्य उससे अ को इज्जत करते
[23:06]थे अगर त्याग तारिक मोहम्मद बिन अगला कि अ कि अक्षरा रही
[23:10]हूं सभी स्वागत करते हैं quora इससे भी स्वागत करते हो न
[23:14]खतरा रहता था वॉल्यूम को फिर से भी और युद्ध के अशरार
[23:17]से भी पैग़ंबरे अकरम की जान को खतरा रहता था यह सफर
[23:21]बाजार में कभी भी रसूलल्लाह अकेला नहीं छोड़ते थे के बल के
[23:26]बगैर घर में रहते तो साथ रखते दिन में भी रात में
[23:30]भी सफर पर भी जाते तो साथ ले जाते और बचपन का
[23:34]मित्र रसूलल्लाह का बचपन था जब सफर में अपने साथ लेकर तो
[23:36]शाम से पहले ही व्यापारियों के एक राहिब ने एक हमने देखा
[23:43]और एक यहूदी आने में देखा दोनों की गुफ्तगू एक तरह की
[23:48]थी और उन्होंने व्रत के मुताबिक से कहा कि देखो हलवा के
[23:51]इसकी राय मुताबिक है अपने ही सहयोगियों से मतलब यह सुविधा आलिम
[23:57]है मगर अपने युगों से महिमा नहीं है आसमानी किताबों को पढ़ा
[24:01]हुआ है कि राहिब जिसका ताल्लुक ईसाई मतलब से है उसने तो
[24:04]यह बात कहनी थी लिहाजा उसने भी कही जी के दिखाए इन
[24:10]हमें बुज़ुर्गी के आसार नजर आ रहे हैं और नबूवत के आसार
[24:14]नजर आ रहे हैं और आसमानी किताबों के ताला की रोशनी में
[24:17]हम इन्हें आश्विन अभी देख रहे हैं और बुआ क्या पूरी तफसील
[24:23]के साथ है में एक मकान पर तो यह है कि रावत
[24:26]ने कहा तो मैंने इनके अंदर नबूवत की सारी निशानियां देख लिए
[24:28]एक निशान रह गई अगर आप मुझे इजाजत दें तो मैं मूवी
[24:32]देखना चाहता हूं हैं और बहुत हम और ये नबूवत इन दोनों
[24:35]शहरों के बीच में से कपड़ा हटाकर उसने देखा तो उसे मोहन
[24:38]भागवत की नजर आए तो उसने हज़रत अबू तालिब ने सलमान से
[24:43]कहा कि आप ऐसा करें कि युद्ध इलाकों से ने दूर रखें
[24:45]युवतियों को पता चल गया तो वह नुकसान पहुंचाएंगे है और हज़रत
[24:50]अबू तालिब ने वहीं पर रुमाल प्रो किया और सरकार की बरकत
[24:55]से माल भी जल्दी भी गया और फोरम वतन की पहली किस
[24:59]लिए अपने भतीजे मोहम्मद बिन अभिलाख फादर दिखाते हैं ए रसूल को
[25:04]पाला-पोसा परवान चढ़ाया और कुछ साथ रखा उनको राहत जानत पर लगाया
[25:10]उनको अपने पांव पर खड़ा किया फिर उनकी शादी की पर जाना
[25:12]पर खजूर कोबरा कमाल की सरकार की बरकत से बहुत जल्दी बिक
[25:16]जाता था और जनाब खैरियत इरुकुरा यूं समझ लीजिए कि जो करोड़पति
[25:19]थी और फिर सरकार की बरकत की वजह से आलम यह रहा
[25:23]कि अरबपति खत्म हो गई तो जनाब खदीजतुल कुबरा कु एक अजनबी
[25:28]खजूर को बढ़ाने जो ख्वाहिश कि मेरी शादी होनी चाहिए उनके साथ
[25:33]तो वह भी इसलिए कि जनता बखूबी शुल्क को बढ़ाकर मुतालिक भी
[25:35]तारीफ में लिखा है कि वह आलिम फ़ाज़िल नाडेला अदिबा हाथों इतिहास
[25:42]मानी किताबों का मुतालिक तिथि और उस गली इसका सी फीमेल्स और
[25:45]ज़माना जाहिलियत वाले वषरें के अंदर यह बीवी इतनी पाक दामन थी
[25:50]के लिए तैयार ताहिरा कहा जाता था यानी जनाबे खदीजतुल कुबरा को
[25:53]तो जनाबे खदीजातुल कुबरा रख अलग टॉपिक्स पर मैं कभी-कभी पढ़ाई करता
[25:56]हूं और वह तो जब मजलीस हम पढ़ते हैं अभी तो हम
[25:59]लेक्चर दे रहे हैं तो वह फिर कुछ एक और अलग समाज
[26:02]बनता है जब हम मजलीस बढ़ते हैं और अगर इतने उतावले पर
[26:06]बात करते हैं या जनाब शादी जरूर कोबरा पर तो जा रहे
[26:08]जश्न का माहौल अलग होता है और मजलिस में फिर भक्तों को
[26:12]खाती बाना लाख से की जाती है तो वह एक अलग चीज
[26:16]होती है इन पर अश्लील होने चाहिए जनाब गंज छतरपुर और हज़रत
[26:21]अबू तालिब पर यज्ञ न होते तो कुछ भी ना होता और
[26:22]एक ही सुरा में परवरदिगार ए आलम ने दोनों के एहसान कर
[26:27]देकर किया है कि हम शुक्र यदि मन पापा कि हमने आपको
[26:31]क्या हमने आपको यतिन पाकर अपनी आंखों नहीं दिया है अघोषित हड़ताल
[26:34]अवधि और अल्लाह खैरान कि हमने दी है और यह बात अहले
[26:39]इस्लाम के पास मुस्लिम है कि अल्लाह कभी भी किसी काफिर के
[26:41]तेल को अपना फील नहीं कहता अबू तालिब के फेल को अल्लाह
[26:46]ने अपना फिल्म का बल के एक तिहाई मोमिनो तकलीफ परहेज़गार के
[26:51]तेल को ही अल्लाह अपना फिर कहेगा बल्कि बहुत सारे अलार्म तो
[26:54]यह राय रखते हैं कि अल्लाह मासूम के फिर को अपना फिर
[26:58]कहता है तो इस तरह हजरत या मुताबिक के इस मत की
[27:02]तरफ नहीं तो कम से कम उनके जो तक व तहारत की
[27:05]तरफ जरूरी आया इशारा करती है कि जिसमें अल्लाह कहता है कि
[27:07]क्या हमने आपको यह तीन पाकर अपनी आंखों पर हमने कि है
[27:12]जनाब खदीजतुल कुबरा ने भी आसमानी किताबों के ताला की रोशनी में
[27:15]है अब कि काश कि का रिश्ता तय हो गया निस्बत ठहर
[27:19]गई और वह वक्त भी आया कि जब निकाह की तकरीर होना
[27:25]सिद्ध होगी तो पैग़ंबरे अकरम की तरफ से निकाह का ख़ुदा हसरतें
[27:28]अब उतारी भले ही सड़क पर पटक आधुनिक लहरावै बल आनंद सफल
[27:35]बुद्घिप्रमाद झालावार शुभेंदु को है और हज़रत अबू तालिब अलैहिस्सलाम ने जो
[27:49]निकाह का खुतबा पढ़ा है उससे निकाह के रुतबे की इतना यहां
[27:57]से होती है अलहम दो लिललाह अल्लाह दी जरनल नॉमिनल झुर्रियां तेल
[28:05]अब्राहिम अच्छा-अच्छा निकाह कब हुआ फैलाने व से 15 साल पहले अच्छा
[28:10]ठीक है यहीं पर नंबर नबूवत का ऐलान फरमाएंगे दौरान का नुजूल
[28:16]शुरू होगा 15 साल बाद अ कि 15 साल पहले पैगंबर के
[28:21]निकाह का रुतबा बितानी पड़ रहे हैं उक्त व्यक्ति पर्दा कि यह
[28:26]कहां से अल हमदुलिल्ला से है जहां से अबू तालिब के रुतबे
[28:32]की स्थिति पैदा हो गई है वह इसे अल्लाह के दौरान की
[28:33]विविधता बनी रहेगी अलहम दो लिललाह तुरंत आवाज़ कहां से और है
[28:40]अलहम दो लिललाह जब लाल मिर्च अबूतालिब की जुबान से पहला कलमा
[28:47]इतना खूबसूरत निकला है इतना पाकीजा निकला है अब मैं क्या कहूं
[28:52]कि अबू तालिब की कमान से निकला होगा जुमला अल्लाह आप को
[28:54]इतना पसंद आ गया कि अल्लाह ने अपने फॉर की सदा ही
[29:00]वहां से की कुव्वत या अबूतालिब तनु ले दौरान से पहले जहां
[29:02]कुरान मौजूद था वहां अबूतालिब की निगाह देख रही थी आप झाल
[29:11]शुभेंदु [संगीत] झालरिया हज़रत अबू तालिब ने अच्छा बहुत भारी भरकम आंख
[29:22]मारे हज़रत अबू तालिब पैदा किया शादी के रखा जाता मुतालिक ने
[29:28]किए निकाह का अथवा मुतालिक ने पड़ा वलीमा मुतालिक ने किया है
[29:32]और सारे मक्की को दावत त्याग दी गई तीन दिन तक लोगों
[29:36]ने खाना खाया है एक अच्छा [संगीत] फोन पर नंबर घनाक्षरी जरूर
[29:42]आपकी तो सिर्फ शादी पर बात करने के लिए मुझे डेढ़ घंटा
[29:44]चाहिए मैंने 20 पर नहीं बात करना चाहता यह शादी है कि
[29:49]जिसका सजे इसका दक्षिण जमीनों पर भी हुआ और आसमानों में भी
[29:54]हुआ मलाइका ने अशरफ इसका जश्न किया है और जन्नत में भी
[29:56]इसका जश्न हुआ है और हो रहा मैंने और बेल मानने भी
[30:01]इस गोष्ठी में शिरकत की है और जन्नती इत्र परफ्यूम जो है
[30:06]वह मकान के पहाड़ों पर छिड़केंगे इस मौके पर बारातियों के लिए
[30:10]जो खुशबू है थी वह भी जन्नत से आई थी तो वह
[30:15]कोई अलग मौका होगा तो उस पर हम बयान करेंगे कि किस
[30:19]अंदाज से बारात सजा घटाई गई और किस तरीके से इस खूबसूरती
[30:22]के साथ पैगंबर की बारात सजी अच्छा यह पैगंबर की शादी अरनव
[30:26]है 11 है तेरा है तारीख में जितने भी लिखे हैं मुझे
[30:28]इससे इनकार नहीं है को लेकर मैं एक बात सपने तस्वीर किया
[30:33]और मानी है कि पैगंबर अपनी पूरी जिंदगी में दूल्हा सिर्फ एक
[30:39]ही मर्तबा बने हैं और बारात सिर्फ एक ही मर्तबा लेकर गए
[30:40]हैं और वह भी जा के घर में लेकर के आलावा और
[30:52]कि शादी के बाद भी रसूल की हिफाजत फरमा करें यहां तक
[30:57]कि बहुत सारे मौके आए शंख मौके आ गए मगर हज़रत इब्राहीम
[31:03]अलैहिस्सलाम पीछे नहीं हटते पैग़ंबरे अकरम की जान की माल की हिफाजत
[31:06]करते रहे और जितना मैं पहले कह चुका हूं कि किसी फर्द
[31:11]पर जाननी प्रदान की जाती है ना औलाद कुर्बान की जाती है
[31:12]नजरिए पर कुर्बान की जाती है हजरत हड़ताली बड़े सलाम आसमानी किताबों
[31:17]के मुताबिक की रोशनी में क्योंकि वह ढूंढ रहें हैं पर थे
[31:18]तो हित परस थे उन्होंने कभी बुत परस्ती कुरुक्षेत्र नहीं किया था
[31:24]वह अपने आसमानी किताबों के मुलाकात की रोशनी में जानते थे कि
[31:27]अल्लाह के नबी है इसलिए वह पैगंबर की हिफाजत फरमा रहे थे
[31:31]उनकी जान की मांग की और हर मौके पर 69 के जान
[31:36]की भी बाद लगाना पड़े तो इसके लिए भी तैयार रहते थे
[31:39]कि मैं अपनी जान कुर्बान कर दूंगा मगर बहुत सारे वहां पर
[31:42]आते हैं तो लानी हो जाएंगे उस तरफ मैं नहीं जाता अभी
[31:44]भी कि यहां तक के सिलसिला चलता रहा और बात वहां तक
[31:49]पहुंची कि जब अल्लाह की तरफ से पहली वहीं आई है और
[31:54]पैगंबर ग्रामीणों ने उक्त महिला ही से दीन-ए-इलाही की सर्जरी का आगाज
[32:00]किया और फिर अल्लाह के दीन की तकरीर के के लिए जब
[32:05]सैलानी शाहरुख माया के बाद और अच्छी तकलक रवींद्र तो इस टोक
[32:07]मुख्य आने के बाद अल्लाह के रसूल ने दीन की दावत दी
[32:14]है कि उस दीन की दावत के लिए हसरतें मुतालिक के घर
[32:17]का इंतजाम किया गया है यो यो नींद सुला लोगों को अल्लाह
[32:22]की तो हित की तरफ और अपनी नबुव्वत तो रिसालत की तरफ
[32:25]महोदया मत की तरफ दीन-ए-इलाही की तरफ दावत देंगे बुलाएंगे और यह
[32:31]काम कहां करेंगे हज़रत अबू तालिब के घर में करेंगे हज़रत अबू
[32:34]तालिब अलैहिस्सलाम ने अपना घर पेश किया मुझे यह बताइए कि कोई
[32:40]शख्स अगर किसी के किसी ने अगर किसी खास नजर है की
[32:42]तरफ लोगों को बुलाना हो आप अगर उस नजरिए के साथ इत्तेफाक
[32:46]ना हो आप अपना घर देंगे उन्हें कि आप अपना घर पेश
[32:52]करेंगे कि मेरे घर से जनाब आप अपना नजरिया पेश करें अपनी
[32:56]जमात अपनी पार्टी की बुनियाद रख लें मसलन किसी सर्कुलेशन पाकिस्तानी है
[33:00]एक मिसाल हम पाकिस्तान से बहुत मोहब्बत करते हैं हमें हमारा वतन
[33:04]बहुत ही प्यारा है कोई शख्स जो है एक मिसाल दे रहा
[33:09]हूं कि कोई शब्द है वह अपनी एक जमात की अपनी पार्टी
[33:15]की बुनियाद रखता है इस नजरिए पर के पाकिस्तान कुछ नहीं है
[33:18]पाकिस्तान से मोहब्बत नहीं करनी है और इससे आगे निकलो और वतन
[33:24]की सरहदों को तोड़ डालो और आंशिक नहीं करो जो कानून हमारा
[33:27]चल रहा है इसके खिलाफ को हमें बुलाया और वह अपना नजरिया
[33:31]पेश करें और उस नजरिए के लिए वह लोगों को बुलाया और
[33:35]हमारे घर का इंतिख़ाब करें जब कि हम उसके नजरिए से मुताबिक
[33:36]ना हो कि हम अपना घर बेच करेंगे इसको अ कि यह
[33:41]वही कर सकता है कि जिसका आप के नजरिए से इत्तेफाक हो
[33:45]क्योंकि यह निशान आसानी से समझ में आ सकती थी मंत्री मिसाल
[33:50]है मगरमच्छ बाद बात समझाने के लिए दी है ताकि बात समझ
[33:54]में आ जाए कि एक मजबूत पॉइंट को समझाने के लिए मैंने
[33:57]मंत्री मिसाल दी ठीक है ना इसमें साल का उससे इस बात
[34:01]में नहीं है यह फ्री में लेकिन अल्लाह के रसूल जिस दिन
[34:06]की तरह बुला रहे थे वहीं दिन हक था है मगर वहां
[34:10]के मार्शल राजस्थान उसे वहीं कबूल नहीं था वह माफिया के लोग
[34:16]बुत परस्ती कर रहे थे उनके नजरिए और उनके जज्बात के खिलाफ
[34:18]थी यह बात कि हज़रत अबू तालिब अलैहिस्सलाम के जानते पीछे से
[34:23]का किरदार उबला जब यह दावत देंगे तो इसके नतीजे में यह
[34:28]पूरा माजरा यह सारे को फॉर और तमाम बाद प्रेस सेंसरशिप इनके
[34:32]भी दुश्मन बनेंगे मेरा कोई दुश्मन बनेंगे उसके बावजूद अपना घर पेश
[34:37]किया और ना सिर्फ यह के अपना घर पर इस किया बल्कि
[34:41]घर भी अबू तालिब का दस्तरखान भी मुतालिब का खाना भी अबू
[34:44]तालिब का और इस दावत पर जो खर्चा हुआ है वह खर्चा
[34:48]भी अबू तालिब का रावत व जीरा का स्वभाव है कि इस
[35:02]पर जो खर्च हुआ वह खर्चा भी हज़रत अबू तालिब अलैहिस्सलाम कथा
[35:08]तो इतना काम तो वही करेगा कि जो न सिर्फ यह कि
[35:13]उस दावत से मुफ़्तख़ोर बल्कि उस दावत के दायरों में उसका शुमार
[35:18]होता है बुझाने वालों में उसका शुमार होता तो जोधावत जिसकी तरफ
[35:22]पैगंबर बुला रहे थे उन बुलाने वालों में मुताबिक शामिल थे और
[35:28]अबू तालिब की तरफ से भी वही धूप बत्ती तीन दिन तक
[35:29]यह दस्तरखान है मुतालिक के घर में लगता रहा और लोग खाना
[35:33]खाते रहे और अल्लाह के रसूल रसूल लोगों को दिन की तरह
[35:39]बुलाते रहे हो कि यह दीन की पहली दावत है यह इस्लाम
[35:40]की पहली दावत है यह विमान की पहली दावत है और इस
[35:45]प्राणी दावत में जो 40 अपराध आए थे और उन्होंने खाना खाया
[35:50]और जब वह खाना खा चुके और रसूलल्लाह जब खड़े हुए फतवा
[35:56]देने के लिए तो अबू लहब अपने मद में को मंत्र शेयर
[35:59]कर दिया है और कहां के भी जादूगर जादू किया है और
[36:04]खाना तो एक आदमी तथा चार इस बंदे ने खाया है इसकी
[36:08]बात नसों सारे लोगों को लेकर चला गया दूसरे दिन फिर दावत
[36:14]रखी गई फिर खाना फिर खर्चा फिर दस्तरखान फिर लोगों को खाना
[36:17]खिलाया फिर प्रथम बार जख्म देने के लिए खड़े हुए तो फिर
[36:22]आबू तालिब बबूल अपने वही हरकत कि मैं यह कहता हूं कि
[36:26]अब है वगैरह को चेहरे के वह भी उस जमाने की ज्यादतियों
[36:27]से ताल्लुक रखते थे उन्हें मालूम तो होगा कि पैगंबर खाना खिला
[36:32]रहें पैसे नहीं खिला रहे दिन की तरह बुलाने के लिए खिला
[36:36]रहें हैं तो अगर होने पैगंबर की दावत पसंद नहीं थी तो
[36:38]हानि नहीं चाहिए था लेकिन चलें फर्ज करें कि उन्हें पहली पहले
[36:43]दिन जब वह है तूने मालूम नहीं होगा तो आ गए हैं
[36:45]कि नादानी में खाना खा लिया मालूम नहीं था कि मिशन क्या
[36:49]है लेकिन जब खाना खा लिया और मिशन पता चल गया तो
[36:53]दूसरे दिन जॉब लांबा रहे हैं तब दूसरे दिन तो नहीं चाहिए
[36:57]अगर बात नहीं सुनी तो आना ही नहीं चाहिए ना मगर वह
[36:59]दूसरे दिन भी याद आ है और खाना भी खाया यह नहीं
[37:05]के बात भी नहीं सुनी और खाना भी नहीं छोड़ना ठीक है
[37:08]ना हम आपकी बात भी नहीं छोड़ेंगे आपका मिशन पर कबूल नहीं
[37:14]करेंगे मगर हम आपका खाना भी नहीं छोड़ेंगे आपको समझ में आ
[37:16]गया होगा कि यह तथा कहां से हुई है अच्छा हम तो
[37:21]चुके सुननी लोग हैं सुन्नतों पर अमल करते हैं सुनने उसे कहते
[37:26]हैं जो सुन्नतों पर अमल करें सुन्नत पर अमल करने वाले को
[37:28]सुनने के हैं और मैं तो फक्र से कह दूं कि हम
[37:31]सुननी है ले सुन्नतें अगर सुन्नत पर अमल करने वाला ही सुननी
[37:34]होता है तुमसे अच्छा समय तो कोई नहीं सकता लोग एक मोहम्मद
[37:37]की सुन्नत पर अमल करते हुए 14 मोहम्मद की सुन्नत पर अमल
[37:44]करते हैं साला बात और मुसलमान हूं हां यह हमारे पास 14
[37:50]मासूमीन है 14 मासूमीन है और जो 14 मासूमों की सुन्नत पर
[37:51]अमल करें इससे अच्छा सुननी कौन हो सकता है है लेकिन छह
[37:56]सुनी तो वही होगा जो रसूल अल्लाह की कोई भी सुन्नत ना
[37:59]छोड़े यह तो कोई बात नहीं हुई कि हम अपनी पसंद की
[38:01]सुन्नत लेंगे और जो सुन्नत हमें पसंद नहीं है वह नहीं लेंगे
[38:05]दो अगर अच्छा सुननी बनना है तो उसके लिए तो पैगंबर की
[38:09]हर सुन्नत पर अमल करना होगा पैगंबर की पहली सुन्नत तो यह
[38:11]बनी यह नमः लगाया खाना खिलाया और उसे हिसाब किया तो मजमा
[38:15]लगाकर खिताब करने को ही अरबी में मजलीस कहते हैं क्या कहते
[38:20]हैं मजलीस हज़रत अबू तालिब ने पहली चुन्नट ज्योति है उस संत
[38:24]का नाम मजदूरी से ठीक है मगर इस रसूल अल्लाह की पहली
[38:29]सुन्नत है तो अच्छा सुन वही होगा के जो मजलीस करें अच्छा
[38:32]ठीक है अच्छा उसके बाद जब रसूल अल्लाह ने खाली दावत नहीं
[38:37]की बल्कि के वह भूखा नहीं बुलाया नहीं लोगों को बल्कि उनको
[38:39]खिलाया भी है तो बंदा जलाकर मजे इसमें कुछ खिलाना पिलाना तबर्रुख
[38:45]बांटना यह भी सुन्नत है अच्छा ठीक है ना मगर रसूल अल्लाह
[38:50]ने दो दिन खिलाया खाने वालों ने खाया और जब तक अंबर
[38:52]को हवा देना शुरू करना चाहते थे कि देना चाहते थे तो
[38:57]लोग उठकर जाने हमने अपना इस चिह्नित किया और हमने यह नतीजा
[39:03]निकाला कि रसूल अल्लाह की एक सुन्नत मजलीस करना दूसरा सुन्नत है
[39:07]उसमें जिसमें खिलाना हम यह दोनों काम करेंगे मगर हम मछली इससे
[39:11]पहले नहीं खिलाएंगे खिलाएंगे मजलिस के बाद कि पहले हमें सुनो फिर
[39:20]खाओ हां पहले खा लोगे तो चले जाओगे सुनो गई नहीं जिस
[39:23]कार में सवार थे कि यह आयल खैर नहीं एक अच्छा हम
[39:34]यह काम करते हैं कम करते हैं हम खिलाते हैं मछली के
[39:38]बाद अलबत्ता हमारे बहुत सारे इलाका मैं यह रस्में रिवायत हजारों सीन
[39:40]में पंजाब का भरोसा दिलाकर मजे से पहले भी किए जाते हैं
[39:44]इसके बाद भी खिलाते हैं को मिनिमम जिसके बाद जरूर खेलेंगे अगर
[39:48]पहले खिलाएंगे न खिलाएं इसके बाद को खिलाने-पिलाने और बहुत सारे इलाकों
[39:55]का दीया रस्मों रिवाज है कि मछली से पहले भी न्यास होगी
[39:58]और मस्जिद के पास आदमी नहीं दोगी शायद यही बरकतें हैं चिया
[40:03]कॉम के पास प्यार हम दो लीला हमारे रिश्तों में बरकत इनके
[40:06]नाम पर खर्च करने से आती किताब यह खर्च करना भी अबू
[40:11]तालिब ने सिखाया मुतालिक को तो हज के मौसम में हाथियों को
[40:16]खिलाने की आदत थी तो यह आदमी हज के मौसम में दुनियाभर
[40:18]से आने वाले हाजियों को खिलाता हो 40 आदमियों को खिलाना उसके
[40:24]लिए कौन-सी बड़ी बात थी है फिर उसके बाद हज़रत अबू तालिब
[40:26]अलैहिस सलाम जहर अच्छा यह जो दीन की दावत पर अंबर नतीजों
[40:31]के मुताबिक के घर से आधी किसी तहरीक को कामयाब होने के
[40:36]लिए तीन चीजों की जरूरत होती है कोई भी तहरीक अपनी एंड
[40:38]तीन जिलों के बगैर कामयाब नहीं हो सकती है हैं उसमें पहली
[40:43]चीज है कयादत ठीक है यह नहीं तहरीर को अपने दस्तूरी अदाओं
[40:47]मकसद हासिल करने के लिए तहरीक का का एक मुस्तैद होना चाहिए
[40:53]हेलो होना चाहिए बार चलाइए तो होना चाहिए दयानतदार होना चाहिए मुंसिफ
[40:58]होना चाहिए उसके अंदर पाया दत्त की तरह है तू नहीं चाहिए
[41:03]तो तभी वह तहरीक अपने प्रकाशित को पा सकती और अपने आधार
[41:08]पर हासिल कर सकती है दूसरी चीज हां लिखवाया आदत नहीं कार्य
[41:11]कितना ही अच्छा क्यों न हो वह शामिल न हो तो बेहतरीन
[41:15]गायक भी हो तो वह अपने आधा यहां से नहीं कर सकता
[41:17]तो कयादत के साथ वसाइल में दो चीजें जो बहुत जरूरी है
[41:23]कि एक है माली बरसाए और दूसरा है डिफाई को बंद लेकिन
[41:29]हमारी बजाय फाइल के साथ-साथ माली व साल भी चाहिए होते हैं
[41:35]को आगे बढ़ाने के लिए दूसरा यह है कि यह नहीं कि
[41:36]तरीका आगे चल पड़े तो कोई भी कुचल डाले डिफाई ताकत भी
[41:42]होनी चाहिए है तो जब दिन कि यह तहरीक पैगंबर ने शुरु
[41:45]की है अल्लाह के दीन ई इस्लाम की तहरीक जिसका आवाज दावत
[41:50]यह जो लचीला से हुआ प्रकंपन शुरू किया तो इस्लाम की स्त्री
[41:54]को का एक तो मिल गया मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल लाहो अलैहे व
[41:57]आलेही व सल्लम जैसा है कि अब बाकी दो वसाइल चाहिए थे
[42:07]क्या चाहिए थे एक माली व साहिल है और दूसरे डिफाई विशाल
[42:12]चाहिए थे दिखाई कुंवर चाहिए थी तो इस तरीके को खाए गुफा
[42:15]की सूरत में मिला माली वसायल खदीजातुल कुबरा ने पहनती है और
[42:21]डिफाई पावर हज़रत अबू तालिब ने पर हम की जनाबे खदीजतुल कुबरा
[42:25]ने कहा कि मैं अपना माल ख़र्च करूंगी पैग़ंबरे अकरम दिन की
[42:28]अवधि के लिए आगे बढ़ते रहे उसके लिए जितना मानो पैसा चाहिए
[42:32]था वह अजनबी खजूर कोबरा का खर्च हुआ है और फिर इस
[42:37]दिन को इसकी हिफाजत के लिए जो कुर्बानियां दी हैं जिस घर
[42:42]आने व के मुताबिक का घर आना है कि हज़रत अबू तालिब
[42:46]ने उनके बेटों ने उनकी औलाद ने यह रिकॉर्ड बना में भी
[42:49]जितने बन वाशिम शहीद हैं वह सब और देवता की में जितने
[42:51]वहां से 18 वनवास समझो शहीदे कर्बला के अंदर वह सारे के
[42:56]सारे हज़रत अबू तालिब क्यों अलग विषय है आज तो दिन को
[42:59]फैलाने पर भी अबु तालिब का खर्चा दिन को बचाने पर भी
[43:02]अबु तालिब का खर्चा रसूल अल्लाह ने मक्के से जो तहरीक शुरू
[43:09]की थी वहीं फैलाने के लिए थी दिन की तरफ लोगों को
[43:10]बुलाने के लिए थी इमाम हुसैन कर्बला में दिन को बचाने के
[43:15]लिए आज तो दिन फैलाने पर भी अबु तालिब का खर्चा हुआ
[43:17]दिन बचाने पर भी अबु तालिब का खर्चा हुआ तो अब भूतानि
[43:22]बगैर ना होते हैं तो नदी ना आगे फैल सकता था ना
[43:26]दिन महसूस हो सकता था तो आबू तालिब सिर्फ वहां के दिन
[43:31]अवगत नहीं है बल्कि अबूतालिब वहां पर शरियत है अब तो आइए
[43:33]वहां पर इस्लाम भी हैं अब मुतालिक वहां पर दिन भी हैं
[43:38]कि अगर ब्रितानियों का मौजूद ना होता तन्हा दिन बच सकता था
[43:41]ना इस्लाम बच सकता था न शरीयत बच सकी थी क्योंकि अगर
[43:47]आप उतारने होते तो आईना होते अली न होते तो हम न
[43:51]होते हुसैन न होते तो करवाना बनती कर बनाना बनती दो दिन
[43:55]बचता ठीक है मैं अपनी तरफ वाला बात है अस्सलामु अला मोहम्मदीन
[44:02]की सलाह बुझाला वसल्लम ओं पैग़ंबरे अकरम का इरशाद है और पर
[44:14]नंबर गिरामी के इस हदीस पर मैं अपने इस गुप्ता को तमाम
[44:16]करता हूं वरना खुद जनाब सतीश मित्तल कोबरा और हज़रत अबू तालिब
[44:23]मेरे पसंदीदा टॉपिक से मेरे करीबी दोस्त जानते हैं कि मेरे इंतिहाई
[44:26]फेवरेट सब्जेक्ट हैं यह दोनों और मैं जनाब खैरियत उनको बराबर मजलीस
[44:29]या पढ़ता हूं तो बहुत पुरानी मछली हो जाती है कभी-कभी ढाई
[44:34]घंटे और तीन घंटे की वृद्धि हो जाती है हज़रत अबू तालिब
[44:39]पर भी मगर वह पंजाब में जहां दूसरे शहरों में मुझे अपने
[44:41]शहर का तो बताना मेरा शहर लोग जल्दी थक जाते हैं तो
[44:45]मैं अपने शहर के मिलाएं लोगों के इलाज से वाकिफ हूं यह
[44:47]इतनी लंबी मछली नहीं पड़ते हैं लेकिन हज़रत अबू तालिब और यकीन
[44:53]जानिए मौसम का असर जाफरी साहब की हत्या मुतालिक पर यह जनाबे
[44:56]आली रे सुगुरा पर अगर कभी ड्राई घंटे भी बात की है
[45:01]ना हमें कभी महसूस हुआ ना सुनने वालों को कभी महसूस हुआ
[45:05]है और मैरी का एक शेर कि हज़रत अबू तालिब अर्चना के
[45:07]सदस्यों को ब्रा पर दोनों हस्तियों पर हमसे होने चाहिए इस बहुत
[45:12]ज्यादा 14 सर्दियों में उनके साथ आज भी आप देखें कि पता
[45:14]नहीं किस-किस की घी व खासतौर विलादत के दिनों में जंग अखबार
[45:18]और बड़े अखबार मदद मिल जाते हैं ए टेलिविजन प्रोग्राम नजर होते
[45:23]हैं लेकिन जिन्होंने इस्लाम फैलाया इस्लाम बचाया उनका नाम ना मीडिया पर
[45:28]है ना अखबारात में है ना हमारी निशान की किताबों में हमारी
[45:32]स्कूलों की कॉलेजों के हिसाब-किताब में जनाब सज्जन कटारा हत्याकांड के बारे
[45:39]में क्या है फिर सोशल मीडिया को आप देखें प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक
[45:42]मीडिया था आप देख लीजिए नाइंसाफी हो रही है तो यह जा
[45:45]जनाब सैयद अकबर और हत्या मुतालिफ़ मगर समझेंगे तो दिन समझ में
[45:52]आएगा हज़रत अबू तालिब माफी देने अवगत हैं और वहां से दिमाग
[45:54]मत हैं वहां पर शरियत भी है पैग़ंबरे अकरम कि वह इसको
[45:59]आपको सुना रहा था हालांकि रसूल इरशाद फरमाते हैं कि मां हम
[46:02]लें इस्लाम एंड अल्लाह विद सैफ अली खन वह सर्वत्र खदीजतुल कुबरा
[46:08]कु कि अगर अली की तलवार न होती और खदीजा की दौलत
[46:15]न होती तो इस्लाम खाएं भी नहीं हो सकता था इस्लाम अगर
[46:18]खाएं हुआ है तो खरीदा की दौलत और अली की तलवार कि
[46:23]अब यह जनाब मेरे मम्मी के पास घास जरूर तरह जाता है
[46:26]यह कहां से आई हज़रत अबू तालिब से आई है परवरदिगार अमित
[46:30]फिर देखिए मैंने शक्तियों को जान सकें समझ सकें मेरे मालिक तो
[46:32]जब आस्था है मोहम्मद वाले मोहम्मद रहमत सलाम का और मेरे मालिक
[46:35]अमीरुल मोमिनीन वाले पुस्तक ज्ञान सरकार यह सलाह तो अस्सलाम के बीच
[46:41]बाबा का जिक्र हुआ है आज और हम समझते हैं कि हज़रत
[46:44]अबू तालिब का जिक्र करना और अगर के भूतानि वह इस्लाम का
[46:46]दुश्मन ना बहुत बड़ी यह बात है यह कितनी बड़ी वारदात है
[46:50]यह तो कोई जाकर जनाब अमेज़न से पूछे आपके वाले कि अगर
[46:55]कोई तारीफ करें आपको अच्छा लगेगा किसी के भी बात क्लियर वाली
[46:57]की कोई तारीफ करें तो अच्छा लगेगा ना तो मर यह बताइए
[47:00]कि मौला अली अलैहिस्सलाम के वाली कि अगर हम तारीफ करेंगे तो
[47:02]बिल्कुल अच्छे लगेंगे यह लगेंगे मौला को पसंद आएंगे या नहीं आएंगे
[47:07]इस सिलसिले में एक बाकी अभी अभी नहीं सुना था कि 85
[47:09]बरस की उम्र में एक शख्स जो कट देवबंदी वहाबी थे और
[47:14]वह शिया हुए और उन पर जनाब अनिल अंबानी का करम हुआ
[47:19]जो वो शिया हो गए और मां ने उनको अपनी मेहनत करवाई
[47:24]और वह यह बहुत सारे कर्म फिर मॉल आने के लिए और
[47:25]सिर्फ इस वजह से कि किसी महफ़िल में उन्होंने हजरत यह मुताबिक
[47:29]का दावा किया था कि किसी महफ़िल में उन्होंने हजरत अबू तालिब
[47:33]का दावा किया तो मौज ले श्रमिक यह तेरा मुझ पर एहसान
[47:37]था लिहाजा हम उसका बदला देना यह जब हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का
[47:41]दावा किया जाए हम की बात की जाए तो महिला के लिए
[47:44]सलमान को इतनी पसंद आती है तो कोई शख्स अगर विमान पर
[47:47]ना भी हो तो महिलाओं से ही मांग की दौलत से मालामाल
[47:50]करते हैं उसकी दुनिया अच्छी बनाकर में फंसा उसकी व्याख्या थी बनाते
[47:54]हैं तो मेरे मालिक हज़रत अबू तालिब है सलाम का तो जब
[47:58]आस्था है कि जो हज़रत अबू तालिब का जिक्र किया गया सुना
[48:00]गया मेरे मालिक तमाम सुनने वालों को करने वालों को इसका बेहतरीन
[48:06]नजर अता फरमा हमारे यह ब्राउन के मुसलसल हर हफ्ते यह लेक्चर
[48:08]यहां पर करते हैं इन्हें ज्यादा जल्दी अध्यक्षता वर्मा इस मिशन को
[48:13]आगे बढ़ाने की तौफीक अता फरमा विमानों को सेहत अता फरमा कोरोना
[48:16]वायरस बाबा यह ब्राच सब दुनिया जहान किसानों को महफूज वर्मा मेरे
[48:20]मालिक जितनी हां तेरी ब्रेंबल जा सकी जाएगा जूते पूरी फरमा परेशानियां
[48:26]दूर बर्मा मुश्किलें आसान वर्मा इन गांवों के कोरियर के लिए बादशाह
[48:31]लगाओ झाल झाल
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