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Mafakhir-ul-Islam - Part 12 - Imam Khomenie Aur Azmat Shohda | H.I. Hamid Hussain Mashadi
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محاضرات
Record date: 12 May 2024 - ِامام خمینی اور عظمت شہداء
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:16]बिल्ला मन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अ हमदुलिल्ला रबल आलमीन मुरसलीन
[0:34]म सलातो सलाम अला अरफ अमिया मुरसलीन हबी बना हबीब लाला आलमीन
[0:45]कास मोहम्मद वाया मा अम्मा बाद कलन रिज अले सलाम मन जारा
[1:16]कबरा अम मती बिकम फल हुल जन्ना माय जकात की यकम से
[1:32]11 का तक दहा करामत से मशहूर है दहा करामत जनाबे बीवी
[1:46]मासूमा सलाम उल्ला अलहा को करीमा अहले बैत केते और बाज तारीन
[2:00]मशहूर है करीम अले बैत लिहाजा यकम कात विलादत सा दत बीवी
[2:12]फातिमा मासूमा सलाम उल्ला अलहा और 11 ज काद विलादत बा सहादत
[2:23]है इमाम रऊफ हजरत अली इब्ने मूस रिजा अ सलातो मैं दहा
[2:41]करामत के आयात के मुनासिब से कुले आलम इस्लाम और अहले बैत
[2:48]के मुहि बान और सेयान दीगर जो खुसूसी तौर पर बारगाह है
[3:00]कलब आलम इमकान इमाम जमाना अल सलातो सलाम में अपनी अकीदत वाले
[3:08]हाना अकीदत की बिना पर मुबारक बादी पेश करता हूं अजने गिरामी
[3:17]मौजू दर्स म फाखर इस्लाम के उनवान से दुनिया भर के तारीख
[3:30]इस्लाम के काबिल फखर जो उलमा और शख्सियत है उन पर गुफ्तगू
[3:36]करने की कोशिश कर रहे हैं और गुफ्तगू इमाम खुमैनी की नूरानी
[3:44]हयात पर कुछ गुफ्तगू हो गया है तो सीरा अमली इमाम खुमैनी
[4:00]इमाम खुमैनी की जो सीरा अमली है हजरत मूसा बने जाफर की
[4:08]औलाद में से एक औलाद जिसके बारे में हदीस में भी मौजूद
[4:11]है कुम से एक मर्द उठेगा जो हजरत मूसा बने जाफर अल
[4:19]सलाम के औलाद में से होगा वह इंकलाब बरपा करेगा इमाम खुमैनी
[4:28]ने जो इंकलाब किया है सीर अमली इमाम खुमैनी शुमार होता है
[4:34]इमाम खुमैनी ने इंकलाब किया इंकलाब किसी दुनिया की मादी गरज के
[4:45]लिए मकसद के लिए नहीं किया है इंकलाब करने वाले बानी का
[4:49]मकसद जो है खुदा है निजाम इलाही है मैं इससे कबल आप
[4:57]लोगों की खिदमत में अर्ज कर चुका हूं इंकलाब जब कामयाब हो
[5:00]गया तो शहीद अब्दुल करीम हाशिमी नजात सैयद औलाद जहरा शहीद हो
[5:10]गया इंकलाब दुश्मनों ने उनको शहीद किया इंकलाब कामयाब होने के बाद
[5:22]आगा की खिदमत में आया अर्ज किया आगा साहब उलमा की क्या
[5:25]शान बढ़ गया इमाम खुमैनी नाराज हो गए और फरमाया आ गई
[5:33]हाशमी नजात हमने इंकलाब उलमा की इज्जत को बढ़ाने के लिए नहीं
[5:38]किया है हमने इंकलाब खुदा के लिए किया है और यह इलाही
[5:43]निजाम के कयाम जो है कोई मामूली नहीं है जब आगा जला
[5:54]वतन का 15 16 साल या 18 साल गुजारने के बाद वतन
[6:01]वापस आए तो तेहरान में बहिश्त जहरा में 6 हज शोहदा के
[6:10]कुबू पर जाकर तकरीर फरमाया अब आपको एक छोटी सी मिसाल इस
[6:14]मुद्दत में तेहरान जैसे शहर में तेहरान जैसे शहर का एक कब्रिस्तान
[6:21]जिसका नाम है बहिश्त जहरा उस कब्रिस्तान का नाम है बहिश्त जहरा
[6:29]बहत जहरा में 6 हज इंकलाब के शोहदा राह खुदा में जो
[6:36]है शहीद हो गए अब उसके बाद जो [संगीत] है पूरे शहर
[6:44]में कितने इंकलाब की शोहदा हैं जो राह खुदा में शहीद हो
[6:52]गए हैं इस इलाही मकसद के लिए इमाम खुमैनी के दावत पर
[6:54]मां-बाप ने अपने बेहतरीन अजीज को इसी राह में दिए इंकलाब खून
[7:03]इंकलाब को खून की जरूरत है सखियां बर्दाश्त करने की जरूरत है
[7:11]इंकलाब ऐसे नहीं इमाम खुमैनी ने इंकलाब ना फौजी इंकलाब किया ना
[7:15]कोई जो है इति सादी मशती इंकलाब है ना किसी और मकसद
[7:22]के लिए है मकसद खुदा है खुदा के लिए इमाम खुमैनी ने
[7:26]इंकलाब किया था क्यों किया इस इसलिए कि एक जालिम हाकिम रहा
[7:33]और ढाई हजार साला जालिमा निजाम को समेटना है उसको उसका बिस्तर
[7:44]लपेट कर किनारे पर फेंकना और आगा अपनी इलाही मकसद में वह
[7:49]कामयाब हो गए जब कामयाब हो गए तो उसी निजाम विलायत फकी
[7:58]मु विलायत फकी यानी क्या मुस्तैद की हुकूमत हुकूमत अल्लाह हुकूमत रसूल
[8:11]हुकूमत अमा ताहिरी इमाम पद गैब में है अमा ताहिरी की जो
[8:15]है हुकूमत के कयाम के लिए अहा दीस है निजाम इलाही विलायत
[8:22]फकी का निजाम जो है निजाम इलाही है इलाही निजाम है इमाम
[8:29]खुदा की मस्लत की बिना पर 1000 से जायद साल इमाम मासूम
[8:38]पर्दे गैब में है और हम इमाम की खिदमत इमाम तक दस्सी
[8:42]नहीं रखते तो क्या बिला तकलीफ छोड़ दिया है नहीं है हम
[8:51]सब मुकलम है खुदा की अकाम के ताबे हैं अब इन आकाम
[8:58]को सीखने और उस को अपनी फर्दी और इजतिमा निजाम में राइज
[9:06]करने के लिए एक रहनुमा की जरूरत है एक सरपरस्ती करने वाले
[9:09]की जरूरत है जिसका नाम है फकी मुस्तैद जामे शराय मुस्तैद का
[9:19]निजाम है हुकूमत और आगा इस मकसद में इस निजाम को कायम
[9:25]करने में कामयाब हो गया हमारे उलमा भी फरमाते हैं विलायत फकी
[9:30]का निजाम इमाम खुमैनी ने कोई अपनी खुद साख निजाम नहीं है
[9:37]और इस निजाम के बारे में कुरानी आयात और अहा दीस मासूम
[9:40]मौजूद है किताबों में लिखा हुआ है और उस लिखा हुआ किताब
[9:48]में जो निजाम है वह अमली तौर पर आज दुनिया में राइज
[9:55]किया है तो बानी इंकलाब इस्लामी हजरत इमाम खुमैनी रजवान अल्ला ताला
[10:00]आगा ने इंकलाब किया और आगा की दावत पर ईरानी कौम ने
[10:08]कुर्बानी दिया खून दिया एक एक दिन में 12 12 हज 15
[10:13]15 हज जो है एक एक दिन में जो है शोहदा रा
[10:17]खुदा में तकदी म किया है पेश किया तो आप लोगों की
[10:24]खिदमत में अर्ज करने का मकसद यह है कि इमाम खुमैनी ने
[10:30]एक निजाम कायम किया तो दीन जिंदा किया इमाम खुमैनी के इंकलाब
[10:32]से अया दन हो गया है दीन जिंदा हो गया है तेहरान
[10:40]यूनिवर्सिटी में जो लड़का लड़कियां जो है अयाशी करते थे और वहां
[10:48]शराब नोशी करते थे दुनिया भर की जो है जो गैर शरी
[10:55]काम होते उस यूनिवर्सिटी को पाक किया आज उस यूनिवर्सिटी पर फर्जन
[11:03]तौहीद मर्द जन जुमे के दिन ईद के दिन लाखों की मिलियन
[11:08]हा इंसान जाकर वहां रुकू और सुजूद करते हैं तकबीर बुलंद करते
[11:14]हैं तहलील पढ़ते हैं तस्बीह खुदा करते हैं उस जमीन को गंदे
[11:23]जमीन को जो गुनाह से आलूदा हो गया था आगा के इंकलाब
[11:28]की बरकत से खुदा की इबादत गुजार बन तकबीर पढ़ रहा होता
[11:31]है हरान की नमाज जुमा देखे ना नेट पर सर्च करें मिलेगा
[11:37]रहबर मजम की जो ईद की नमाज देख ले सब मासरे की
[11:45]बूढ़े बच्चे जवान नौजवान सब जो है खुदा की इबादत के लिए
[11:52]सब आरा होकर अल्लाह अकबर रुकू सुजूद तहलील तस्बीह खुदा अंजाम आगा
[11:58]के इंकलाब आने के के बाद जंग में भी खुदा रसूल अम
[12:04]ताहिरी का नाम बुलंद है और सुलह के वक्त भी खुदा रसूल
[12:11]आइम ताहिरी का नाम बुलंद है अब आप ईरान में जाएं तो
[12:13]एक जियारत मासूम के साथ-साथ एक बा बसीरत सफर करें वहां शहीदों
[12:21]के कब्रिस्तान में जाकर देखें फूल की तरह जो बच्चे 18 18
[12:29]साल 16 साल मांओं ने राह खुदा में अपनी जो है कुर्बानी
[12:32]दी है कर्बला की पैरवी करने वाली मांओं ने राह खुदा में
[12:40]कुर्बानी दिया है और मशद में बहिश्त रजा शहीदों की जो है
[12:43]कब्रिस्तान से आबाद और कुम में बहिश्त मासूमा आबाद और तेहरान में
[12:51]बहिश्त हजरत जहरा आबाद बहिश्त यानी उस कब्रिस्तान का नाम बहिश्त रखा
[12:56]है बहिश्त जहरा बहिश्त रजा बहिश्त हजरत मासूमा इसी पर गौर करें
[13:05]कब्रिस्तान का नाम आइमा से मंसूब हां यह जो वादी हुसैन का
[13:09]नाम जो है इससे पहले आप कहीं पाकिस्तान में जो है अ
[13:15]तारीन के नाम से कोई कब्रिस्तान आबाद था नहीं है यह यही
[13:20]इंकलाब की तकलीद में इधर भी जो है जिस खर ने जिस
[13:24]खुदा के मुखलिस बंदे ने जो है वादी हुसैन का नाम जो
[13:29]है मौला हुसैन के के नाम से मंसूब किया व उसी से
[13:31]है आम खुदा रसूल जंग में आठ साला इंकलाब को बचाने के
[13:40]लिए जंग किया इस्लामी सरजमीन को बचाने के लिए जंग किया अमेरिका
[13:46]और उसके हमनावा और सबने जो है सद्दाम को वरगला करर ईरान
[13:48]पर हमला किया और जंग किया मर्दाना जंग किया आज दुनिया डॉक्टर
[13:55]इसरार अहमद एक मुतासिर अहले सुन्नत है वो खुद अभी जो है
[13:57]मो तरफ है व कहते हैं अगर दम है तो शियों में
[14:01]है जो आलम इस्तक बार के आंखों में आंख डाल के मुकाबला
[14:07]करें जान का नजराना दे डट जाए जनाबे डॉक्टर इसरार अहमद ने
[14:13]अपने तकरीरों में कहा ये क्लिप है मौजूद है नेट पर मौजूद
[14:17]है सर कीजिए ये काबिल है तो जंग में आप देखो जंग
[14:23]में व 13 साल का बच्चा बाप इजाजत नहीं देता इस इंतजार
[14:26]में है कि बाप सो जाए तो वो उसका अंगूठा लगाकर मैं
[14:31]चुपके से जो है महाज चंग पर चले जाऊं इस बच्चे की
[14:36]13 साल के बच्चे में क्या जज्बा है जो मां ने अपने
[14:41]आगोश में कर्बला इसके बदन में वजूद में जो है तजक किया
[14:44]था व 13 साल का बच्चा जज्बा शहादत से सरशर होकर बाप
[14:49]इजाजत नहीं देता बाप को नींद आने के इंतजार में है यह
[14:55]सो जाए तो मैं बाप की जो है अंगूठा लगाकर जाऊंगा मुझे
[14:57]शौक है यह कहां से आ गया यह दन जिंदा किया आगा
[15:03]ने दन जिंदा किया और यह 13 साला बच्चा हुसैन फिदा मारूफ
[15:11]है कि ईरान इराक जंग के दौरान जब टैंक आए वहां से
[15:17]जो है टैक आ रहा है यह 13 साला जहीन बच्चा जो
[15:23]है जो अपने कुम में पोजीशन होल्डर था बेहतरीन पढ़ाकू और पढ़ाई
[15:27]में बेहतरीन नंबर लेने वाला बच्चा वो जज्बा शहादत से सरशर होकर
[15:32]महाज पर गया सामने से दुश्मन टैंक ला रहा है अब उसके
[15:38]दिमाग देखो अब देखें यह बढ़ रहा है हमारे लोगों की तरफ
[15:44]उसने जो अपने वजूद में जो उसको धमाके से उड़ाने की चीजें
[15:47]था उसने जो सामने से आने वाले को जो है मार दिया
[15:51]इधर से मार दिया बीच में टेंक आ रहा है इससे तबाही
[15:57]मचेगा अपने वजूद में जो है धमाका खेज वजूद लेकर के नीचे
[16:03]गए और दुनिया वालों के लिए आला शहादत की मिसाल पेश किया
[16:06]इमाम खुमैनी ने इस हुसैन फहमीदा शहीद हुसैन फहमीदा का नाम रखा
[16:14]है य फरमाया यह मेरा रहबर है असल रहबर तो यह है
[16:19]मुझे यह 13 साल का बच्चा रहबर है तो दीन जिंदा किया
[16:24]आने दीन जिंदा किया अब मेरे सामने में मेरे वालिदा बीमार है
[16:27]मैं जो है इस पोजीशन में नहीं हूं ज्यादा जो है आप
[16:31]लोगों की गुफ्तगू मुझे थोड़ा सा अभी हजरत की विलादत पर जो
[16:37]है कुछ हौसला आया जनाब मासूमा सलामुला अलहा और इमाम रजा अ
[16:41]सलाम के ईरान के हर गली खुदा अमा मासूमीन के निजाम से
[16:51]वाबस्ता है आप किसी चौक पर जाए चौक का नाम किसके नाम
[16:57]से मंसूर मसलन और जो हैया बाने अली बने अबी तालिब खबा
[17:09]इमाम रजा खबा इमाम तकी जवाद अमा और चौक का नाम जो
[17:11]है शोहदा से मंसूब अ तारीन से मंसूब हर निजाम वहां जिंदा
[17:18]हो गया है अया दन हो गया है निमाज दुआए तवस्सूल इंसाफ
[17:23]से कहे दुआए तवस्सूल का अभी हमें जो है एक शुर आया
[17:29]है दुआ तवस्सूल इजतिमा तौर पर पढ़ी जा रही है दुआए कुमेल
[17:34]इजतेमा तौर पर पढ़ी जा रही है जियारत आशूरा इजतेमा तौर पर
[17:37]दुआए आरफा इजतेमा तौर पर यह इंकलाब के बाद से इसे फरोग
[17:43]मिला मैं यह नहीं कहता हूं कि इंकलाब ने ईजाद किया है
[17:49]पहले था इसे जो है इंकलाब की बरकत से फरोग मिल गया
[17:50]लाखों इंसान जो है दुआओं में मारफ के साथ बसीरत के साथ
[17:57]शिरकत करते हैं कुछ हासिल करते हैं खुदा से राबता कायम करते
[18:03]हैं उस खुदा से अपना राबता कायम करते हैं इमाम खुमैनी ने
[18:09]इरशाद फरमाया दुनिया तिसने मानवीय है रूहानियत की जो है तलाश में
[18:14]है आज यूरोप में देखे ना यूरोप में जिसको हम जो है
[18:20]नंगे लोग फिरने वाले शुमार करते थे वह फिलिस्तीन का चपिया डाल
[18:28]के गज्ज के मजलूम के लिए जो है वो अपनी इसार और
[18:30]सखियां बर्दाश्त करके एहतेजाज कर रहा है यह क्या चीज है यह
[18:39]सब वह इंसानी फितरत की तकाज हैं जिसकी बिना पर वह बेदार
[18:43]हो गए हम सो गए हम सो गए हैं वो बेदार हो
[18:49]गए वह अपने जो है कैदी बनने को शरफ समझते हैं एक
[18:51]मजलूम के खातिर आवाज बुलंद करने की वजह से डंडे लग जाए
[18:57]व अपने लिए इज्जत और शरफ समझते हैं पेश कर रहा है
[19:03]व अंग्रेज नंगे फिरने आज वह मुसलमान हो गए हम हो गए
[19:08]नाम के मुसलमान नाम निहाद मुसलमान तो अर्ज करने का मकसद यह
[19:12]है इमाम खुमैनी के इंकलाब से आगा ने अया दन किया दन
[19:20]को जिंदा किया और जब दीन जिंदा हो गया वहां से जो
[19:28]आजान आ रहा है वहां से जो न्यूज खबरें जो है पढ़ते
[19:38]वक्त बिस्मिल्लाह के बाद मोहम्मद आल मोहम्मद पर दुरूद भेजे बगैर वह
[19:43]खबर नहीं सुनाते हैं एक मुल्क का निजाम है जिसमें मोहम्मद आल
[19:47]मोहम्मद पर दुरूद भेजते हैं फिर खबरें सुनाते हैं क्या यह काबिल
[19:53]गौर नहीं है यह काबिले तहसीन नहीं है हर दिन को हर
[20:01]हफ को हर 10 दिन को आइमा से मंसूब किया है मैं
[20:09]आपको अर्ज करूं के 15 शाबान को इमाम खुमैनी ने दुनिया के
[20:14]मुस्तजब और कमजोर कमों से मंसूब किया क्यों किया इसलिए हर कमजोर
[20:24]मजलूम इंसान किसी नजात देने वाले के इंतजार में है वह नजात
[20:28]देने वाला जो है जमाना अ सलातो सलाम है 15 शाबान को
[20:40]यम मुस्त के मंसूब किया मुस्तजब और कमजोर हम जैसे कमजोर मजलूम
[20:45]नहते इंसान जो है वह किसी नजात देने वाले किसी जालिम को
[20:52]ठिकाने लगाने वाले मजलूम की दादरसी करने वाले के इंतजार में है
[20:59]वह दिन जो है 15 शाबान को इमाम जमाना की जो यम
[21:01]विलादत है यम मुस्तजब के नाम से मशहूर हो गया जनाब फातिमा
[21:08]जहरा सलाम उल्ला अलहा की रोज विलादत 20 जमाद सानी यम खवातीन
[21:16]मांओं का दिन से मंसूब किया और इसी तरीके से जब लाइन
[21:18]दिया तो इंकलाब की जो है जो निजाम है उसमें 13 रजब
[21:24]को बाप का दिन मनाते हैं अब देखिए इसी एक मनाने में
[21:33]हमारी तरबियत है अपने मौला की जो है यौमे विलादत पर बच्चों
[21:37]के लिए बाप की कदरदान और बाप क्या चीज होती है इस्लाम
[21:43]के नजर में उसकी मकाम और मंजिल क्या है वो जो है
[21:48]उसके जहन में बिठाकर उसे तरबियत करते हैं एक नस्ल की तरबियत
[21:54]इसी में और इसी तरीके से दिनों में दिनों को अ आम
[22:00]तारीन मसल जनाब अली अकबर की विलादत पर नौजवानों का दिन मनाया
[22:08]नौजवानों का दिन अया में आजा आशूरा के आयाम में एक सिलसिला
[22:11]अभी शुरू हो गया खुदा की कसम आंसू बहा बहा कर जो
[22:16]है माए अपने बच्चों को तैयार कर रहा है अभी यम अली
[22:22]असगर मनाते हैं यम अली असगर की क्या एक अजीब सी जो
[22:27]है वो एक मंजर कशी है है कर्बला की माहे माहे मुहर्रम
[22:34]की पहली शबे जुमा को पहली जुमा को यम अली असगर दुनिया
[22:42]भर में मनाते हैं खुद ईरान में वो बाबा सरन माए अपनी
[22:44]छोटी छोटे बच्चों को जो जो अभी दूध पीने की जो है
[22:51]उस पोजीशन में है यम अली असगर पर सजा कर अली असगर
[22:56]की याद में अली असगर की राह में जान का नजराना देने
[22:58]के लिए माए उसको बच्चे को सवार के उसको तैयार करके अपने
[23:07]आगोश में लेकर इमाम वक्त को इतका करती है यह माए या
[23:15]ना फातिमा जहरा फरजंद फातिमा इमाम जमान आप फिर से कर्बला सजाए
[23:18]तो यह मेरे बच्चा कबूल कीजिए आप यह मसलन यम आले अजगर
[23:26]मनाते हैं तवज्जो दिलाए यहां भी जो है वो उनके इदा में
[23:31]हमारे मांओं को भी तरबियत करें तो अहमियत दे इन चीजों को
[23:34]इसमें हमें जो है दन मिलता है इसमें हमें जो है पैगाम
[23:40]मिलता है जीने का तरीका मिलता है तो अर्ज करने का मकसद
[23:45]यह है कि बहुत लंबा हो गया कि दिनों को भी अ
[23:46]तारीन से मंसूब किया फिर जो है हफ्ता हफ्ते वहदत मुसलमानों की
[23:56]जो है इतहाद का हफ्ता ह ह वादत 12 रबील अव्वल से
[24:04]17 रबील अव्वल तक हफ्ते वहदत फिर दहा दहा यानी च मे
[24:06]मेरे अजीज बच्चों 10 दिन 10 दिन यं मनाते हैं क्या मनाते
[24:13]हैं उसी को कहते हैं दहा दहा फतिम अया में फतिम को
[24:19]दहा फतिम कहते हैं 10 दिन जनाब फातिमा जहरा की शहादत पर
[24:22]य शहादत मना के आशूरा मनाते हैं 10 दिन आशूरा फतिम फातिमा
[24:30]जहरा के आशूरा मजलिस बरपा करते हैं जनाब फातिमा जहरा से मुत
[24:35]वसल होते हैं तो दहा फजर दहा फजर यानी इंकलाब इस्लामी की
[24:44]कामयाबी का दिन 11 फरवरी से ता एक 10 दिन जो है
[24:51]दहा फजर मारूफ है इंकलाब इस्लामी की कामयाबी का दिन मनाते हैं
[24:58]वल फजर वलयार ये जो है इस दिन को दहा फजर करार
[25:01]दिया फजर की जो है का 10 दिन खुशी मनाते उसमें से
[25:10]एक दहाई करामत मैंने इब्तिदा में अर्ज किया था दहाई करामत यह
[25:16]यकम ज कात से 11 जकात तक जनाब यकम जकात को हजरत
[25:24]फातिमा मासूमा सलामुला अलहा की विलादत से लेकर आठवे इमाम की विलादत
[25:32]हजरत इमाम रज सलाम की विलादत तक दहा करामत है द करामत
[25:40]जनाब मासूमा सलामुला अलहा के रोज अदसकर इंकलाब इस्लामी का आगाज इसी
[25:56]कम से किया हजारों की तादाद में लोगों ने जान का नजराना
[26:04]दिया कुर्बानी दिया आज आलम इस्लाम की हिदायत का मरकज कुम हो
[26:14]गया है जक जकी तशरीफ लाते हैं वह हिदायत पा जाता है
[26:22]अफ्रीका में ढाई करोड़ से ज्यादा जो लोगों को मुसल शिया मुसलमान
[26:29]बनाते हैं व थाईलैंड से उठकर आते हैं प पढ़ते हैं दुनिया
[26:37]की सबसे जो है बदनाम तरीन जगहों को ऐसा जो है अ
[26:41]इस्लाम का पैगाम फैलाकर महजब इंसान बना देता है इंडोनेशिया से सिंगापुर
[26:51]से बैंकॉक से सब गंदे बदनाम जमाना जगहों से उठकर तालिब ल्म
[26:55]आते हैं कुम में पढ़ते हैं तबलीग दीन किया आज दुनिया में
[27:01]इस्लाम फेल गया है मैं इन आयाम में जब गज्जा का मसला
[27:02]हो गया तो मैं गौर कर रहा था मेरे रहबर सैद अली
[27:07]खाम जो है जज्बाती तकरीर फरमाएंगे हसन नसरुल्ला उधर से तकरीर करेंगे
[27:13]जिस तरह हम जो है बड़ कियां मारते हैं हमारे मुल्ला जो
[27:16]है क्या बड़ कियां मारते रहते थे आज मरक बार जो है
[27:22]खामोशी बरा नाम दो झंड लेकर जो है जाते हैं मगर गजा
[27:27]के लिए कुछ भी नहीं है वो चकि उसका जो है बिन
[27:28]सलमान जो है म मरा हुआ है इसलिए यहां भी जो है
[27:34]खामोशी इख्तियार किया हुआ है लेकिन रहबर की जो है फरमाइश पर
[27:40]मैंने तकरीर किया कोई जज्बाती तकरीर नहीं दो जुमला बड़े सुकून से
[27:44]फरमाया आगा इन आयाम में आप क्या फरमाएंगे कहा कुछ भी नहीं
[27:51]खुदा के वादे पर ईमान रखता हूं खुदा के वादा पर ईमान
[27:56]रखता हूं वादा क्या है खुदा का वादा है कुरान शरीफ में
[28:00]है कि दीन इस्लाम आखर जमान में पूरे आलम में फैल जाएगा
[28:04]अगर च मुशरिकीन राजी ना हो क फार राजी ना हो हम
[28:11]पूरे इस्लाम को दुनिया म भर में फैला देंगे दुनिया में बर
[28:16]में फैल रहा है अमेरिकी यूनिवर्सिटीज और कॉलेजेस में वह पढ़ने वाले
[28:23]स्टूडेंट जो है मजलूम के हक में निकल रहा है यह इस्लाम
[28:28]नहीं है तो क्या चीज है तो लिहाजा आगा ने फरमाया खुदा
[28:36]के वादे पर यकीन रखता हूं बाकी जो हमारी अपनी फरीजा जो
[28:40]हम समझे उसे अदा करूंगा वस्सलाम जो बाकी फरजा आप भी यह
[28:53]जुमला मोत रिजा आ गया तो इंकलाब का मरकज जनाब मासूमा की
[29:02]जो है रोज अकदर से आगाज हो गया और इतना बाबकॉक दुनिया
[29:31]भर में परचम तौहीद है यह मजलूम के हक करने वाले वह
[29:35]आवाज जो है तौहीद आवाज है आज दुनिया में जो है इस्लाम
[29:41]का परचम बुलंद बाला हो गया है वो फिलिस्तीनिज्म [संगीत] नहीं कर
[29:52]रहा तो अर्ज करने का मकसद यह है कि जनाब मासूमा की
[30:01]अ अजमत पर थोड़ा सा जनाब मासूमा जनाब मासूमा की रोज अकदास
[30:07]इंकलाब का आगाज हो गया व बीवी इतनी अजीम बीवी इमाम मसा
[30:15]बने जाफर की बेटी है इमाम रजा अल सलाम की बहन है
[30:16]जनाबे इमाम रजा अल सलाम की बहन है और जनाबे सातव इमाम
[30:25]की बेटी है यह आलिम है यह महद सा है और इतनी
[30:31]बा अजमत एक वाकया सुनाता हूं दरूद पढ़ मोहम्मद ले मोहम्मद आयतुल्लाह
[30:45][संगीत] अला आयतुल्लाह मुस्त ने अपनी किताब में बयान किया है कि
[30:58]कुछ शिया जो है हजरत इमाम मसा बने जाफर की दीदार के
[31:04]लिए गए इमाम सफर में था और मुलाकात नहीं हो सका कुछ
[31:12]सवालात तैयार करके लेकर गए थे शरी सवालात पूछने के लिए तो
[31:17]पर्दे से वह सवालात तलब किए इमाम सफर में है इमाम की
[31:29]साहिबजादे छोटी उम्र में वो सवालात ले लिए लेकर उस सवाल का
[31:32]जवाब हजरत मासूमा सातव इमाम की बेटी कमसिन है उन तमाम सवालात
[31:38]का जवाब लिखकर वापस दे दिए जब यह शिया इमाम का शिया
[31:44]जो है अपने वतन को जाते हुए रास्ते में इमाम से मुलाकात
[31:47]हो गया और इमाम की खिदमत में अपने वालि हाना अकीदत का
[31:54]जहर करने के बाद अपनी जो है रोई दत सुनाया तो इमाम
[32:00]ने फर फ माया वो जो मेरी बेटी ने तुम्हें उसका जवाब
[32:02]लिख कर दिया है वह जरा मुझे दे दे इमाम की खिदमत
[32:08]में पेश किया फिर इमाम की रिवायत में लिखा है कि इमाम
[32:17]के मुबारक जबान से तीन मर्तबा यह जुमला बे इख्तियार निकले फदास
[32:27]बाप फिदा हो जाए बेटी पर बाप फिदा हो जाए बेटी पर
[32:33]बाप फिदा हो जाए इमाम आइमा मुबा नहीं करते हम जैसे जज्बाती
[32:40]नहीं है कहीं कोई हसास और बहुत ही मुहिम बात आ जाए
[32:45]तो उनकी मुबारिक जबान पर अपनी बेटी पर फिदा होने की जो
[32:48]है वह जज्बात पेश करते हैं नारा हैदरी या खानदान रिसालत की
[33:03]एक कमसिन बच्ची की यह शान है कमसिन बच्ची की शान है
[33:06]एक वाकया सुना के जो है आप लोग का जहमत तमाम करूंगा
[33:13]हजरत आयतुल्लाह उजमा सैद शहाबुद्दीन मराश नजफी इमाम खुमैनी के हमसर मुस्तैद
[33:22]कुम में आगा साहब नमाज पढ़ाते थे और उनकी जो है मरकत
[33:29]जवार हजरत मासूमा सलाम उल्ला अलहा में आगा की जवानी में आयतुल्लाह
[33:39]सद शहाबुद्दीन मराश उन्होंने एक बैनल अकवाले बल पर जो है एक
[33:43]लाइब्रेरी कुम में कायम किया है यह कैसा कायम किया पता है
[33:47]आपको निमाज रोजा उजरत पर लोगों की निमाज रोजा जो है के
[33:53]पैसा लेकर वह निमाज उजरत में पढ़ के रोजा उजरत में रख
[33:59]के उस पैसे से जो है आल मोहम्मद और मकतब आल मोहम्मद
[34:05]के लिए एक लाइब्रेरी बना दिया है यह मुस्तैद माल इमाम आने
[34:11]पर उसी को खर्च कर सकता था मगर क्या शान है रोजा
[34:17]रख के रोजा रख के खाली पेट हां खुदा की बंदगी कर
[34:22]कर के उजरत लेकर उसी के पैसे से किताबें खरीद कर एक
[34:25]लाइब्रेरी बनाया है कुम में ब्रेरी बनाया है यह हम सबके लिए
[34:31]मिसाल है हमारे घरों में जब किताब हो तो यह फालतू समझकर
[34:34]वो शहीद की उसमें डाल दो हा यह मस्जिद में किताब घर
[34:41]में रखो य किताब घर की जीनत है ये घर की जीनत
[34:48]है आयतुल मराश जो है पेट प वो जैसे पत्थर बांध के
[34:55]किताब खरीदने के लिए जो है उजरत पर रोजा रखते हैं तो
[34:59]आयतुल्लाह मशी की जवानी में बेटी जवान हो गई परेशान है पैसा
[35:06]नहीं है जही नहीं है देने को परेशान है कहते हैं कि
[35:11]जनाब मासूमा बीवी की रोजा पर आए या सती या मला मेरे
[35:18]सैदा सरदार मेरे जी सैदा व सरदार बेटी को शादी करने के
[35:31]लिए कुछ नहीं है आप मदद फरमाए शिकवा एक शिकवा किया मैं
[35:41]इस आलम में कैसे बेटी को जो है मसलन उसकी शादी करलू
[35:43]कहते हैं कि जब घर तशरीफ लाए ख्वाब नींद में ख्वाब में
[35:51]देखता है कि सैयद शहाबुद्दीन शहाबुद्दीन शहाबुद्दीन हम हमने कब जो है
[36:01]तुमको तन्हा रखा जब तुम कुम में आए तो हमने तुम्हारा ख्याल
[36:04]रखा और हर लमहा जो है तुम्हारी मदद की है हमने तुम्हें
[36:13]कब तन्हा छोड़ दिया बस यही ख्वाब देखना था आयतुल्लाह मराश अपने
[36:17]ख्वाब की जो है कैफियत बयान करते हैं मैंने अपने मादर गिरामी
[36:25]फातिमा तु जहरा की अ को तीन मर्तबा ख्वाब में जियारत किया
[36:28]मुझे जियारत बख्शी तीन मर्तबा मेरी मां ने मुझे जियारत बख्शी मेरे
[36:35]महरम है ना सैयद सैयद है औलाद जहरा है उनको जनाबे शहजादी
[36:39]फातिमा जहरा की जियारत नसीब हो गई आ कहते हैं कि मेरे
[36:45]मादर गिरामी की चेहरा आधार की तरह बीवी मासूमा के जो है
[36:51]चेहरे मुबारक था और मुझसे फरमाया शहाबुद्दीन हमने जब तुमम आए तो
[36:56]क्या तुम हमने तन्हा छोड़ा और फलान हर मरहले में तुम्हारे जो
[37:03]है हिमायत की हमने कब तुमको जो है तन्हा छोड़ दिया है
[37:06]शिकायत क्यों करते हैं बस कहते हैं कि एक बुजुर्ग वार जो
[37:16]है खवाब में आए और कहा कि आ सद शहाबुद्दीन बीवी मासूमा
[37:19]आपको जो है तलब कर रही आपको बुला रही है कहते हैं
[37:24]कि ऐसे में आंख खुल गए आंख खुलने के बाद बाजू होकर
[37:31]तेजी के साथ जनाब मासूमा के रोज अकदर गए और जनाब रोज
[37:33]मासूमा में जब गए तो किसी बुजुर्ग वार ने उनकी मुश्किल गसाई
[37:40]किया वह जो है जो उनकी जरूरियत की चीजें है जनाब मासूमा
[37:47]की रोज अकदास पर उसे हासिल हो गया अल्ला जनाब मासूमा के
[37:58]रोजा अकदास से दुनिया इज्जत जो है इस वास्ता फेज इलाही से
[38:01]खुदा लोगों को इज्जत देता है लोगों को माल और दौलत देता
[38:07]है इल्म चाहते हैं इल्म देता है आज दुनिया के कितने आलिम
[38:13]दीन हैं जो इमाम जनाबे फ फातिमा मासूमा के रोज अकदर पर
[38:17]इल्म हासिल करके दुनिया में इल्म को फैला रहा है एक आयतुल्लाह
[38:25]अकील उल गरबी कुम में पढ़ के जनाबे हज इस्लाम जकी साब
[38:27]कुम में या आपके उलमा यह दुनिया भर के उलमा जो है
[38:33]कुम में जर तालीम जनाब इमाम जनाब मासूमा की जो है पनाह
[38:40]में इल्म हासिल कर रहा है यह म अभी आगए अकल गरवी
[38:44]साहब की इल्मी कमाल आप देख ले इल्मी कमाल देख लीजिए खुद
[38:47]आ साब खिताब फरमा रहे थे अली मुत जाफरी साहब के यहां
[38:54]खिताब फरमा रहे थे कि एक हदीस है मन अरफ नसा फकत
[38:59]अराफा रब्बा जिसने अपने नफ्स को पहचाना उसने अपने परवरदिगार को पहचाना
[39:03]उस्ताद आगा गरवी साहब फरमाते हैं कि उस्ताद ने हमें होमवर्क दिया
[39:11]आयतुल्लाह हसन जादा आमली जो हमारा उस्ताद था आ गरबी फरमाते हैं
[39:14]कि हमें होमवर्क दिया तो इस पर काम करके इसकी मुख्तलिफ जो
[39:19]है उससे जो कुछ हासिल होता है लेकर आओ बना कर ले
[39:25]आओ आ गरीबी साहब फरमाते हैं मैं रात भर जागता रहा इस
[39:28]हदीस की जो है से कुछ लेने के लिए मुश्किल से मैंने
[39:35]12 चीजें जो है 12 उससे कुछ मिलने वाली जो है नुका
[39:42]बनाए 12 नुका मैंने बनाए खुश हो गया अब मैं उस्ताद मोहतरम
[39:51]की खिदमत में जाकर यह पेश कर दूंगा सुबह 8 बजे से
[39:54]पहले आ दर्स के लिए निकलते थे जल्दी से जाकर आयतुल्लाह हसन
[40:00]जादा आमली के दरवाजे पर गया अंदर ही अंदर एक खुशी की
[40:06]जो है कैफियत है मैंने जा जैसे ही मैं पहुंचा आयतुल्लाह हसन
[40:09]जादा ने मुझसे खिताब करके फरमाया आग गरवी कल के हदीस से
[40:16]मैंने 80 नुक्ते बना दिए कल की जो एक हदीस है उससे
[40:24]मैंने 80 नुक्ते बना दिए हैं आयतुल्लाह गरवी दुनिया को जो है
[40:27]अंगू बना नदान करने वाले इल्मी शख्सियत सबके मुंह बंद करने वाला
[40:33]इल्मी जो कमाला दुनिया में जाहिर करने वाला हस्ती अपने उस्ताद की
[40:36]शान बता रहा है मैंने 12 आ अरब फरमाते हैं मैंने 12
[40:41]नुक्ते बनाए मेरे उस्ताद मोहतरम ने 80 नुक्ते बना दिए तो यह
[40:45]कहां से ये जनाबे मासूमा की जो है रोजा अकदर की फैजान
[40:52]है फातिमा तो फातिमा असमा के रोज अकदर की बजान है खुदाया
[40:55]हम सबको अपने मांओं के अपनी बेटियों की जो है कदर दनी
[41:01]करने की तौफीक इनायत फरमा सबसे ज्यादा हमें उलो में आल मोहम्मद
[41:05]से मतमस होकर और एकएक मोतियां एकएक जो है गोहर को लेकर
[41:11]अपने सीनों में समेटने की तौफीक इनायत फरमा इमाम जमाना अल सलाम
[41:20]को जुहूर अता फरमा तमाम बीमारों को खुसूस कला मौलाना कु साहब
[41:24]वालिद गिरामी को शिफा कामिल जलेना फरमा हमारी आत बखैर फरमा पर
[41:34]मोहम्मद ल मोहम्मद सवात
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