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Hazrat Zainab Mohafiza Nehzaty Hussaini | H.I Rajab Ali Bangash
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24/11/05
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Lectures
Record date: 03 Nov 2024 - حضرت زینب محافظہ نہضت حسینی AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:16]लिल्ला लदी कमा हुवा अहलो अल हमदुलिल्ला लदी जालना मिनल मतम सकीना
[0:27]विलायत अलीना अबी तालिब म सलातो वस्सलाम अलाल बदल माद रसूल मुसद
[0:38]दद अल मुस्तफा अल अमजद हबीब ना व हबीब लाल आलमीन अल्ल
[0:47]सुमिया फ समा अहमद फल अबील कासम मोहम्मद अल्लाला मुहम्मद [संगीत] वाला
[1:04]आली तबन रीनल मासन मुकर मीनल मुंतज बनल मुंत बनल मजमीन बयान
[1:15]रहमतुल्ला व बरकात आला शया वताब लालाला आनक फले व मिनल आना
[1:36]इला कियाम यन अम्मा बाद फ काल अल्लाह तबारक ताला फ महकम
[1:43]किताब हकीम फर कानल मजीद लल ह वहु सान बिस्मिल्लाह रहमान रहीम
[1:53]इन्ना अलना लल हुदा लखर तो वल उला सलवाद बीजिए मोहम्मद वाले
[2:05]मोहम्मद पर अल्ला सला मोहम्मद माशाल्लाह ला हला ला कुवता इल्ला बिल्लाह
[2:13]अलाली अजम आए मजीदा जिसकी तिलावत का मैंने शरफ हासिल किया परवरदिगार
[2:25]इरशाद फरमाते नानाल हुदा हिदायत हमारी जिम्मेदारी है हिदायत करना हमारा काम
[2:35]है वलन आखर तो लला और दुनिया आखिरत का निजाम भी हमारे
[2:40]दस्ते कुदरत में अल्लाह ने हिदायत का निजाम अपने हाथ में रखा
[2:48]है लेकिन याद रखिए खुदा जब हिदायत करता है तो नबी के
[2:56]जरिए करता है इमाम के जरिए करता है बाज अजीम हस्तियों के
[3:07]जरिए करता है कभी खुद जमीन पर आकर किसीसी की हिदायत नहीं
[3:12]करता वसीले के जरिए करता है अंबिया आइमा अल्लाह की जानिब से
[3:26]हादी है इसी तरीके से अल्लाह ने उनकी सीरत को हमारे लिए
[3:29]मुकम्मल नना अमल आया पैगंबर के लिए इशाद फरमाते हैं लक कालक
[3:37]फ रसूला उसव हसना पैगंबर की सीरत तुम्हारे लिए मुकम्मल नमूना अमल
[3:42]है और यही सूरते हाल क्योंकि पैगंबर कुछ भी हो मर्द है
[3:52]और मर्द की सीरत खवातीन के लिए मुकम्मल नमूने अमल नहीं हो
[3:57]सकती मसाइल खवातीन के कुछ और हैं मर्दों के कुछ और हैं
[4:01]मर्दों के पर्दे के अकाम कुछ और है खवातीन के पर्दे के
[4:07]अकाम कुछ और है मेरास दोनों के हह कामात में फर्क है
[4:13]तो लिहाजा पैगंबर की सात कुछ भी हो जाए मर्दों के लिए
[4:19]मुकम्मल नमूना अमल है लेकिन खवातीन के लिए अल्ला ने खवातीन के
[4:26]लिए फिर ऐसी पाक दामन और इजत और अजीम मंजिल और शरफ
[4:36]वाली खवातीन को बेजा अगर आदम को मर्दों की हिदायत के लिए
[4:39]भेजा है तो बीबी हवा को खवातीन की हिदायत के लिए भेजा
[4:45]है अगर इब्राहिम अल सलाम को मर्दों की हिदायत के लिए भेजा
[4:53]तो बीबी सारा बीबी हाजरा को खवातीन की हिदायत के लिए भीज
[4:57]जाए अगर ईसा सलाम मर्दों की हिदायत के लिए तो बीबी मरियम
[5:00]खवातीन की हिदायत के लिए अगर पैगंबर मर्दों की हिदायत के लिए
[5:07]तो बीबी खदीजातुल कुबरा खवातीन की हिदायत के लिए अगर मौला कायनात
[5:11]मर्दों की हिदायत के लिए तो बीबी सैयदा खवातीन की हिदायत के
[5:19]लिए अगर मौला हुसैन मर्दों की हिदायत के लिए तो सानि जहरा
[5:23]कर्बला में खवातीन की हिदायत के लिए उनको अपना मजहबी फरीजा समझाने
[5:32]के लिए बताने के लिए कि अगर हालात ऐसे हो जैसे कर्बला
[5:35]के हैं तो व खवातीन की क्या जिम्मेदारी है उसने कैसी जिंदगी
[5:42]गुजारनी क्या करना है क्या नहीं करना तो अल्लाह ने खवातीन की
[5:49]हिदायत के लिए भी बाज मुकद्दस मोहतरम खवातीन को भेजा ताकि खवातीन
[5:55]उनकी सीरत उनके किरदार को देखें और उसके मुताबिक जिंदगी गुजार याद
[6:02]रखिए यह जो अल्लाह के बेज हुए नुमाइंदे होते हैं चाहे नबी
[6:07]और इमाम की सूरत में हो या मुकद्दस खवातीन की सूरत में
[6:11]हो इनकी हर हरकत में उम्मत के लिए हिदायत है इन मुकद्दस
[6:22]खवातीन के हर अमल में तमाम खवातीन के लिए हिदायत है इनकी
[6:29]जिंदगी के आमाल इनकी इबादत हिदायत इबादत कैसे करनी चाहि पर्दा कैसा
[6:37]होना चाहिए तात अगर बेटी है तो माबाप की तात कैसे होनी
[6:39]चाहिए अगर जौजा है तो शौहर की तात कैसे होनी चाहि अगर
[6:45]मां है तो बच्चों की तरबियत कैसे होनी चाहिए यह खवातीन यह
[6:53]मुकद्दस खवातीन तमाम आलम इस्लाम के खवातीन के लिए नमूना अमल है
[6:58]इनको देखकर यह उम्मत मुस्लिमा की खवातीन जब जिंदगी गुजारेंगा शहीद की
[7:22]मां बन जाती है कोई हसन नसरुल्ला की मां बन जाती है
[7:29]तो यह जितने भी ऐसे अफराद दुनिया में आते हैं जो दुनिया
[7:34]में एक इंकलाब बरपा कर देते हैं जो लोगों की सोच और
[7:38]फिक्र को बदल देते हैं जो लोगों की जो जहन में एक
[7:45]मंसूबा होता है कि इस तरह हो सकता है उसको बदल देते
[7:50]हैं य ऐसे नहीं होता है इसमें बाज खवातीन का किरदार होता
[7:58]है आज से कोई 25 साल पहले पहला हाफिज कुरान पा साल
[8:11]का मोहम्मद हुसैन जब उसकी बड़ी पब्लिसिटी हुई थी तो मोहम्मद हुसैन
[8:15]का इतना कमाल नहीं था उसके मां बाप का कमाल था खुसूस
[8:19]उसकी मां का कमाल था इसलिए कि जब से उसका वजूद बंद
[8:31]लगा था बतन मुबारक में तब से उसकी मां कुरान के हिज
[8:38]पर लगी हुई थी जब दुनिया में आया तब भी उसकी माए
[8:41]कुरान को हिज भी करती थी और बच्चे को खाना खिलाना और
[8:45]यहां तक कि उसका नतीजा ये हुआ कि जब 5 साल का
[8:49]हुआ तो यह बच्चा हाफिज कुरान बन चुका था दो उलमा सैयद
[9:00]रजी सैयद मुर्तजा सदर आप जो नहजुल बला आपके हाथों में इसके
[9:07]खुतबा जनाब सद रजी इसके नाल है नकल करने वाले रावी यह
[9:13]यह खबा इन्होने जमा किए सद रज ने रावी नहीं है जमा
[9:20]किए मौला कायनात के जितने खुतबा थे उनको सैयद रजी ने जमा
[9:25]किया है कक तीन कैटेगरी परल एक एक लेटर्स है जो मौला
[9:33]कायनात ने खत लिखे थे और एक अवाल है इमाम के तो
[9:37]सैयद रजी ने क्या किया कि इन सारे तबात को जमा किया
[9:44]तो यह सैयद रजी सैयद मुर्तजा ऐसे ही नहीं बने मां का
[9:55]किरदार था तारीख में मिलता कि शेख मुफीद अल रहमा एक बुलंद
[10:05]पाया आलिम मुस्तैद नजफ में दर्स देते थे एक दिन ख्वाब में
[10:11]देखते हैं के बीवी सैयदा आती है एक हाथ से मौला हसन
[10:17]को पकड़ा है दूसरे हाथ से मौला हुसैन को यह दर्स दे
[10:24]रहे हैं मस्जिद में अपनी दर्स में बैठे हुए हैं इतने में
[10:27]देखा बाहर से खात ख्वाब देख रहे हैं पर्दे में आके सलाम
[10:36]करती है सलाम करने के बाद कहती शेख मेरे इन दो बच्चों
[10:44]को आलिम बना दो शेख मुफीद की आंख खुल जाती हैरान परेशान
[10:48]भला मैं हसन हुसैन को आलिम बनाऊंगा कहां हमारा कहा उनका इम
[10:58]हमारा इम उनके इम के मुकाबले ऐसे जैसे एक समंदर के मुकाबले
[11:03]में कतरा मैं कहां उ आलिम बना सकता हूं हैरान और परेशान
[11:08]इस खवाब का मकसद क्या था दूसरे दिन सुबह जब दर्स गाह
[11:14]में बैठे थे दर्स देने के बाद हैरान और परेशान थे क्या
[11:16]आखिर इस ख्वाब का की ताबीर क्या है अभी सोच ही रहे
[11:23]थे क्या देखा कि बिल्कुल वही मंजर जो ख्वाब में देखा था
[11:28]नजर आने लगा बाहर से एक पर्दा पछ बब वही पर्दा उसी
[11:30]तरह दो बच्चों को पकड़े हुए लेकर आ रही है करीब आई
[11:34]सलाम किया सलाम का अंदाज भी वही था जो ख्वाब में था
[11:38]और कहा शे मेरे इन दो बच्चों को आलिम बना दो एक
[11:44]मर्तबा शेख मुफीद अले रहम कहते हैं कि जरूर क्यों नहीं शेख
[11:51]मुफीद को अपने खवाब की ताबीर मिल गई एक मर्तबा कहते हैं
[11:54]कि बीबी आपके यह बच्चे क्या मकाम का कहा क्यों आपके बच्चों
[12:03]की सिफारिश के लिए रात को ख्वाब में मुझे बीबी सैयदा नजर
[12:08]आएंगे यह ख्वाब क्या था यानी बीवी की एक सिफारिश थी कि
[12:13]उनको आलिम बनाओ तो एक मर्तबा मुझे ताज्जुब है आपके बच्चों के
[12:20]लिए बीवी सिफारिश के लिए आ रही है तो शेख मुफीद को
[12:26]यह सद रजी सद मुर्तजा की वालिदा कहते है कि शेख अगर
[12:31]बीवी तुझे ख्वाब में ना आती मैं फिर ताज्जुब करती मुझे इस
[12:36]पर ताज्जुब नहीं है कि वो नहीं वो आई है ख्वाब में
[12:37]आपको कहा पता है कितनी बड़ी बात करर कहा हां कहा मुझे
[12:43]इतना यकीन है अपने तरबियत पर क शेख सुनो यह दो बच्चे
[12:52]जब से अल्लाह ने मुझे दिए मैं हर वक्त बा वजू रहती
[12:59]हूं इनको खाना खिला पकाती हूं वजू होकर इनके लिए रोटी बनाना
[13:02]इनके लिए सालन बनाना फिर इनको खिलाती ह तो बा वजू होकर
[13:08]और जिक्र परवरदिगार करते हुए तो जब मैं इतना इसकी तरबियत का
[13:18]ख्याल रख रही हूं तो भला मेरी जद्दे माजदा मेरे बच्चों की
[13:21]सिफारिश के लिए क्यों नहीं आएंगी और वही सद रजी सैद मुर्तजा
[13:29]सद मुर्तजा अलमल हुदा हिदायत क्या आलम हिदायत की निशानी जिनका लकब
[13:34]था और सद रजी जिन्होंने नजल बला का और ये दीगर इसके
[13:39]अलावा भी खिदमा है लेकिन जो बड़ी खिदमत है तो ऐसे ही
[13:44]नहीं होता ये मेहनत करना पड़ती है अगर चाहते हैं वाकया खानदान
[13:51]में कोई ऐसा बच्चा आए जो कि खानदान का भी नाम रोशन
[13:59]करे दन की खिदमत और दन के काम आए तो उसके लिए
[14:03]मेहनत करना पड़ती है तरबियत के लिहाज से खलाक के लिहाज से
[14:04]किरदार के लिहाज से रिजक हलाल के लिहाज से हराम जो रिजक
[14:12]है इमाम हुसैन अल सलाम का वो जुमला कि जब इमाम हुसैन
[14:20]सलाम इने साद के लश्कर को मुखातिब करके कहते हैं कि मुझे
[14:23]पता है मेरी बात का तुम लोगों पर असर नहीं होगा कौन
[14:28]कह रहे हैं इमाम कर्बला में इब्ने साद उसके लश्कर को कह
[14:32]रहे हैं मुझे पता है मेरी बात का तुम पर असर नहीं
[14:36]होगा क्योंकि तुम्हारे पेट में रिस्क हराम है या अगर पेट में
[14:44]रिस्क हराम हो तो इमाम की बात का भी उस पर असर
[14:47]नी रिजक हराम इतनी नुकसान दे शय है इतना मुजर है के
[14:54]इमाम के कलाम का भी जबकि इमाम का कलाम तो ऐसा है
[14:59]कि अगर पत्थर को कहे पत्थर अपनी जगह छोड़ दे कहने की
[15:04]जरूरत नहीं सिर्फ इशारा करें मौला ने इशारा ही तो किया था
[15:10]चांद दो टुकड़े हो गया था पैगंबर ने सूरज पलट आया था
[15:15]इशारा ही तो किया था तो जिसके इशारे में इतना असर है
[15:21]उसकी जबान में कितना असर होगा लेकिन अगर रिस्क हराम मौजूद है
[15:25]तो फिर इमाम कहते हैं कि मुझे पता है मेरी बात का
[15:31]तुम पर असर नहीं होगा और जिसके पेट में रिस्के हराम मौजूद
[15:35]से हदीस सुनाए कुरान की आयत सुनाए उसम कोई असर नहीं होगा
[15:43]अब व जिसके ऊपर कुरान और हदीस का असर नहीं हो तो
[15:48]व मां बाप की बात क्या [संगीत] मानेगा फिर वो गिला ना
[15:56]करे हमारी औलाद हमारी बात नहीं मानती आपने क रि रिस्क हराम
[15:59]खिलाया औलाद को तो फिर तोव इता गुजार होना बहुत मुश्किल है
[16:05]सलात भजिए मोहम्मद वाले मोहम्मद पर अला बने मोहतरम परवरदिगार ने हिदायत
[16:17]का काम लिया और उसके लिए बाज खवातीन का इंतखाब किया क्योंकि
[16:21]खुदा यह काम हर एक से नहीं लेता खुदा ऐ काम के
[16:26]लिए अफराद का इंतखाब करता है खुसूस जितने भी मजहबी और दीनी
[16:35]काम होते हैं कभी कभार हमारा जवान बेचारा थोड़ा सा दामा डोल
[16:39]हो जाता है कब जब वह दन की खिदमत करता है दर्स
[16:46]का तमाम करता है जुलूस का तमाम करता है सबील लगाता है
[16:52]कुछ और मदरसा के तमाम करता है मदरसा चलाता है तो उसे
[16:55]मुखालफत का सामना करना पड़ता है कोई कुछ कहता कोई कुछ अरे
[17:01]मया किन चीजों में लग गए जाओ अपनी तालीम अपने नौकरी करो
[17:04]पैसा कमाओ कारोबार करो तो ऐसे जवान का दिल टूट जाता है
[17:12]लेकिन याद रखिए इस जवान को दिल नहीं तोड़ना चाहिए खुदा ऐसे
[17:15]काम हर एक से नहीं लेता खुदा इंतखाब करता है कौन इस
[17:20]लायक है जो यह काम करे अगर कोई खुदा आपसे नेक काम
[17:27]ले रहा है सजदा शुक्र कीजिए खुदा ने आपको काबिल समझा है
[17:30]कि खुदा यह नेक काम आपके जरिए करा रहा है वरना तो
[17:34]खुदा किसी से भी करा सकता था लेकिन अगर आपके जरिए हो
[17:39]रहा है तो अपनी खुशनसीबी समझिए खुदा ने इस लायक समझा इस
[17:42]काबिल समझा बने मोहतरम तो यह खुदा का इंतखाब होता है खुदा
[17:50]ने खवातीन के जरिए हिदायत की तो हर खातून इस काबिल नहीं
[17:56]बनी खुदा ने इसके लिए बीवी हवा का इंतखाब किया बीवी सारा
[18:00]हाजरा इंतखाब किया फिरौन की जौजा उसका इंतखाब किया इसी तरीके से
[18:10]दीगर मुकद्दस खवातीन जितनी भी आई है बीबी मरियम है बीबी दीजल
[18:13]कुबरा सलाम बी सदा सलाम उला खुदा ने इंतखाब किया है इनके
[18:20]जरिए खुदा तमाम कायनात के खवातीन की हिदायत करता है तारीख में
[18:28]मिलता है कि दो मला कायनात काद हुआ बीबी सैयदा के साथ
[18:32]तीन हिजरी में मौला हसन की दुनिया में आमद और चार हिजरी
[18:38]में मौला हुसैन की और मौला हुसैन की आमद के दो साल
[18:45]बाद हिजरी में बीबी सानि जहरा बीवी जैनब सलाला की आमद हुई
[18:48]और उसके बाद बीवी कुलसूम एक दो साल के बाद उनकी दुनिया
[18:53]में आमद रिवायत में मिलता है कि देखिए सा बीबी जन सलाला
[19:05]अलहा जिनका नाम मौला कायनात ने जैनब रखा था जैनब दो लज
[19:10]का मजमुआ है जैन अब जैन यानी जीनत अब यानी बाप बाप
[19:19]की जीनत मौला ने अपनी बेटी का नाम अपने बाबा की जीनत
[19:25]रखा बीवी की केल काबा शरीक हुसैन इसी तरीके से उमल मसाब
[19:40]यह बीवी के अल्का बात है बीवी की जो कुलम मुबारक तकरीबन
[19:53]कोई मेरे ख्याल में कोई 55 साल ऐसी कुछ उम्र मुबारक बनती
[20:04]है या 57 साल इसलिए कि छ हिजरी में आमद हुई और
[20:13]फिर 61 हिजरी में कर्बला कर्बला में एक साल कैद खाना फिर
[20:21]वापस मदीना और मदीने से फिर मदीना बदर करके बीवी वापस शाम
[20:30]गई तो भाई 63 या 64 हिजरी में बीवी की रहल होथ
[20:37]लेकिन एक रिवायत के मुताबिक शहादत हुई कि वहा किसी दुश्मन अहले
[20:43]बैत ने बीवी के ऊपर वार किया था और उसे बीवी जखमी
[20:45]हो गई थी और शहीद हो गई बीवी जन सलाला की जब
[20:54]आवाद हुई तारीख में मिलता है के बीब सलाम रो रही थी
[21:01]जब दुनिया में आई बच्चे रोते लेकिन जैसे मौला हुसैन की गोद
[21:08]में आई खिलखिला लगी मुस्कुराने लगी रोना बंद कर दिया और जैसे
[21:12]मला हुसैन से जुदा हो जाती थ फिर रोती थी रफता रफता
[21:19]जमाना गुजरता गया य तक कि कुछ बड़ी हुई मौला हुसैन आगे
[21:22]होते थे और य बीवी उनके पीछे पीछे चलती थी अपने भाई
[21:30]से दुनिया में आने के बाद से ही इस भाई और बहन
[21:34]की जो मोहब्बत थी व उरूज पर थी बत मोहब्बत यहां तक
[21:41]के अभी चंद साल के थे के नाना रसूला की रहल मां
[21:48]जहरा की शहादत मला कायनात ने अपने बच्चों को पाला पोसा बड़ा
[21:52]किया जवानी के आलम में जब रिश्ते का मौका आया रिश्ते आते
[22:01]रहे बीवी टकराती रही रिश्ते आते रहे बीवी टकराती रही जनाब अब्दुल्ला
[22:08]बिन जाफर का रिश्ता आया बीवी ने इंकार कर दिया अब्दुल्ला बिन
[22:12]जाफर मला कायनात के भतीजे जब रि ठुकरा दिया एक मर्तबा मला
[22:20]कानात आए क बेटी जैनब रिश्ता क्यों टकराया अगरचे यह बातें तुम्हारी
[22:28]मां तुम से करती मुझे करने का हक नहीं था लेकिन चक
[22:35]तुम्हारी मां नहीं है इसलिए मुझे करना पड़ रही है अब्दुला का
[22:42]रिश्ता जो भी रिश्ता आता है तुम टकराती जाती हो बाबा मुझे
[22:48]शादी नहीं करनी मेरी बेटी जैनब यह तुम्हारे नाना की दीन है
[22:57]एक सुन्नत है शरीयत हैय क बाबा मुझे नहीं करनी श कहा
[23:03]क्यों बीवी ने कहा के बाबा शादी के बाद मुझे घर छोड़ना
[23:14]पड़ेगा कहा बाबा मुझे शादी नहीं करनी कहा क्यों कवा मैं अपने
[23:17]भाई हुसैन की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर सकती क बेटी तुम्हारे नाना
[23:26]की सुन्नत है कच्छ बाबा फिर ठीक है आप अगर मजबूर करते
[23:29]हैं तो अब्दुल्ला से कहिए मेरी दो शर्त हैं के मैं जब
[23:42]भी चाहूं अपने भाई हुसैन की जियारत के लिए दिन हो या
[23:46]रात अब्दुल्ला मुझे मना नहीं करेंगे दूसरी शर्त अगर मेरा भाई हुसैन
[23:54]कभी सफर पर जाना चाहे और मैं उसके साथ जाना चाहूं अब्दुल्ला
[23:57]मुझे रोकेंगे नहीं यह दो शर्त मेरी अब्दुल्ला के सामने रख दीजिए
[24:02]अगर वह मानते तो ठीक है मौला कायनात ने दोनों शर्त जनाब
[24:07]अब्दुल्ला बने जाफर के सामने रखी जनाबे अब्दुल्ला कहा मौला जो बीवी
[24:15]कहती है मुझे मंजूर है और य य आद हो गया आद
[24:20]होने के बाद अल्लाह ने दो बेटे दिया न मोहम्मद जो कि
[24:27]कर्बला में शहीद हुए और बा में चार बेटे दो इनके पास
[24:32]थे अब्दुल्लाह के पास मदीना में और दो बीवी के साथ कर्बला
[24:34]में गए थे जो शहीद हुए थे बहरहाल ये लाफ रिवायत है
[24:42]अद हुआ जिंदगी गुजरती रही लेकिन यह बीवी कभी कभार रात को
[24:49]भी जैसे ही मौला हुसैन की याद आती थी एक मर्तबा घर
[24:54]आती थी मौला हुसैन की जियारत के लिए कभी दिन के वक्त
[24:58]कभी शाम के वक्त जिंदगी गुजरती रही मसाब को देखती रही कभी
[25:07]नाना का जनाजा कभी मां का जनाजा कभी बाबा अली का जनाजा
[25:10]और यहां तक के बाबा अली के दौर में जब मौला कायनात
[25:18]ने मदीना से कूफा आए तो कूफा में सिर्फ हुकूमत नहीं संभाली
[25:23]मौला कायनात के इन बच्चों ने दर्स तदरी का सिलसिला शुरू किया
[25:29]और यहां तक के मौला कायनात के बेटे वहां के जवानों को
[25:35]दर्श देते थे और मौला कायनात की बेटियां वहां की खवातीन को
[25:40]दर्श दिया करती थी और यही वजह है कि कुफा के लोग
[25:48]मौला कायनात के बेटे और बेटियों को जानते थे पहचानते थे उनसे
[25:55]आशना थे यही तो सबब था कि जब मौला कायनात की शहादत
[25:58]के बाद मौला हसन अल सलाम ने कूफा को छोड़ा तो कूफा
[26:04]वाले आए कहा आप ना जाए बीवी आप यही ठहर जाए कहा
[26:10]नहीं हमें जाना है क ठीक है वादा करें कि फिर आप
[26:15]आएंगी क मैं वादा करती हूं कूफा आऊंगी लेकिन तुम भी वादा
[26:17]करना कि जब आओ तो मुझे पहचान लेना तो यही बीवी कूफा
[26:28]से गई और मौला हसन के दौरे इमामत में इन्होने कूफा छोड़ा
[26:32]4 मला की शहादत हुई कर्बला के आके से 20 साल पहले
[26:38]और वापस मदीना आए ठीक 10 साल बाद मौला कायनात की शहादत
[26:47]के मौला हसन शहीद कर दिए गए और ठीक 10 साल बाद
[26:56]मौला हसन की शहादत के कर्बला का आगाज हो गया यह बीवी
[27:01]जिंदगी गुजारती है बाबा के दौर में भी इस बीवी ने बाबा
[27:09]को तलिया देती थी अपने भाई हसन को तसल्ली देती थी उनका
[27:12]हौसला बढ़ाया करती थी अपने भाई हुसैन को और य तक के
[27:21]यह बीवी कर्बला तक आ पहुंची और जब इमाम जाने लगे तो
[27:30]बीबी जैनब सलाम उल्ला अलहा घर पर आई अब्दुल्लाह तखत पर बैठे
[27:39]थे बीबी जमीन पर बैठ गए जैसे अब्दुल्ला ने देखा एक मर्तबा
[27:42]जल्दी से उतरे और बीबी जैन सलाम को बाज से पकड़ कर
[27:47]उठाया कहा आप ऊपर बैठे नीचे क्यों बैठ गई आप अलि बत
[27:53]की बेटी है कहा नहीं अब्दुल्ला मैं यही सेही हूं क नहीं
[27:56]आप ऊपर आए कहा क्या बात है अब्दुल्ला वादा करो इंकार नहीं
[28:02]करोगे क बं बत अब कहे तो सही बात क्या है कहा
[28:09]मेरा भाई हुसैन जा रहा है मदीना छोड़कर कहा फिर मैं भी
[28:14]जाना चाहती हं मुझे इजाजत चाहिए जनाब अब्दुल्ला ने कहा कि बीबी
[28:22]यह शर्त तो मैं निकाह के वकत कबूल कर चुका था कहा
[28:24]नहीं ठीक है शायद कबूल कर चुके थे लेकिन चकि आप शौहर
[28:30]है आपका हक है जनाब अब्दुल्ला ने इजाजत दे दी और यूं
[28:36]यह काफला रवाना हुआ काफला जब रवाना हुआ जनाबे अब्दुल्ला ने क्या
[28:49]किया अपने दोनों बेटों को न मोहम्मद को हाथों से पकड़ा और
[28:53]मां के हवाले किया कने अपने साथ ले जाओ अगर कहीं कुर्बानी
[29:01]की जरूरत पड़ जाए आका हुसैन पर एक अपनी जानिब से कुर्बान
[29:08]कर देना एक को मेरी जानिब से कुर्बान कर देना और य
[29:12]यह काफिला रवाना हुआ अच्छा इमाम एक ऐसी जात है कि उसे
[29:24]कोई भी काम करना हो इमाम फुल अथॉरिटी है व जो कहे
[29:30]करना है बस उसे किसी से मशवरा लेने की जरूरत नहीं है
[29:34]देखिए हर इदार का जो बड़ा होता है उसकी एक टीम होती
[29:38]है उनसे मशवरा करता है भाई इस इदार के लिए क्या करना
[29:44]है क्या नहीं करना अपनी तरफ से हर मर्तबा कोई ऑर्डर इशू
[29:46]नहीं करता वजीर आजम हो सदर हो कोई कानून पास नहीं कर
[29:54]सकते मशवरा होता है असेंबली में सेनेट में फिर उसके बाद एक
[29:59]कानून कहीं जाके पास हो जाता है यही सूरत हाल रहबर की
[30:08]रहबर ऐसा नहीं है कि कोई भी स्टैंड लेते तो बस जो
[30:14]आया दिल में ना बाकायदा उलमा की कमेटी है सब मिलक मशवरा
[30:25]करके उसके बाद फिर रहबर एक कदम आगे बढ़ते हैं सबके मशवरे
[30:30]के साथ जो भी मामला तो से आगे पीछे देखने के बाद
[30:36]क्या करना चाहिए हर एक से मशवरा होने के बाद जो जितने
[30:40]भी बड़े बड़े उलमा वगैरा होते उस तो हर एक मश लेकिन
[30:46]इमाम इमाम किसी मशवरे के मोहताज नहीं है व कुले तियार है
[30:53]जो हुकम दे जो ना दे लेकिन सा जहरा का मकाम ऐसा
[31:00]है इमाम हुसैन अल सलाम है तब भी आके अपनी बहन जहरा
[31:05]सानि जहरा से मशवरा करते हैं इमाम सज्जाद अ सलाम है कोई
[31:13]मौका और महल होता है तो अपनी फी अम्मा से मशवरा करते
[31:15]हैं यह मकाम है बीबी जैन सलाम इमाम नहीं है इमामत नहीं
[31:22]मिली बीबी जनब सलाला अलहा को लेकिन मकाम इतना बुलंद कि वक्त
[31:27]का इमाम भी अपनी इस बहन के साथ मशवरा करता है अन
[31:35]मोहतरम कर्बला हुई शहादत हो गई इन शहादत के बाद इमाम सज्जाद
[31:45]22 साल के एक 22 साल का जवान न जवानी की उम्र
[31:48]में होता है असीर करके कर्बला से ले जाए जाने लगे लेकिन
[31:54]मैं कहूं अगर बीवी जैनब सलाम उल्ला अ की जात ना होती
[31:59]ना इमाम सज्जाद भी दिल बर्दाश्त हो जाते मसाब इतने सखत है
[32:09]कभी तसर कीजिए अपने आप को कर्बला में रख कर देखिए आपके
[32:17]साथ ऐसा हो जाए बर्दाश्त कर लेंगे आप इतने लाशों को उठा
[32:23]उठा के वहीं पर मर जाएंगे नहीं बर्दाश्त कर सकते इतनी बड़ी
[32:27]मु खुदा उसके लिए उतना हौसला देता है और इतना हौसला सिवाय
[32:34]इमाम के किसी के पास नहीं है अपने बच्चों को खुद ही
[32:40]मैदान में ले जाना और फिर लाशों को उठा के लाना यह
[32:43]अपनी आंखों से देखें कितने जवान बेटों के जनाज पर बाप का
[32:50]क्या हाल होता है मां की क्या कैफियत होती है माए दीवानी
[32:54]हो जाती है बाप जन काम करना छोड़ देता है वो गम
[33:01]की शिद्दत की वजह से हम और आप इतना इतना बड़ा हम
[33:07]बर्दाश्त नहीं कर सकते इसलिए खुदा ऐसे बड़े तिहान हमसे लेता भी
[33:12]नहीं है इब्राहिम अल सलाम इस्माइल को जिबा कर रहे हैं कर
[33:19]सकता है कोई हौसला है और बेटा भी एक हो नहीं हो
[33:24]सकता हम इतना हौसला नहीं है अल्लाह हुकम दे रहा इम को
[33:34]जाओ अपनी जौजा सारा को सहरा में छोड़ के आओ जवान बीवी
[33:37]अल्लाह हुकम दे जा अपनी बीवी को थर के सहरा में छोड़
[33:42]के आ जाओ दूर दूर तक किसी आबादी का किसी इंसान तो
[33:46]क्या जानवर का नामो निशान तक ना हो नहीं कर सकते हम
[33:51]लोग ऐसा हुकम अगर खुदा हमें दे बड़ी मजरत के साथ हमें
[33:57]इतना हौसला नहीं है हम यह अंजाम दे सके इसलिए खुदा ऐसे
[34:04]सख्त इम्तिहान हमसे लेता नहीं है इसलिए कि हम काबिल नहीं है
[34:07]हमें वह काबिलियत नहीं है कि इतना सख्त इम्तिहान दे सके ऐसे
[34:10]इम्तिहान खुदा अपने खास बंदों से लेता है जिसको अल्लाह ने यह
[34:17]सलाहियत दी होती है और यह उसूल है कि जिससे जो इम्तिहान
[34:21]लिया जा रहा है उसकी काबिलियत के मुताबिक लिया जा रहा है
[34:23]हमारे यहां अभी कोई मास्टर का इम्तिहान कोई प्राइमरी के बच्चे से
[34:28]नहीं ले प्राइमरी के बच्चे से प्राइमरी का तिहान ले सेकेंडरी वाले
[34:32]से सेकेंडरी का मैट्रिक वाले से मैट्रिक का तिहान लिया जाता है
[34:35]उसे मास्टर का इम्तहान नहीं लिया जाता मास्टर का इम्तिहान उसी से
[34:41]लिया जाता है जो काबिल होता है अने मोहतरम य इहाना हम
[34:49]और आप नहीं दे सकते इमाम जैसी जात चौथे इमाम रिवायत में
[34:54]मिलता है कि जब कर्बला से रवाना हुआ ना का चौथे इमाम
[34:59]अपने बाबा की लाश पर कमर ताम के खड़े हो गए और
[35:05]एक मर्तबा चेहरे का रंग बदलने लगा शिद्दत गम से करीब तक
[35:11]इमाम को मौत आ जाती रिवायत में मिलता है कि इतने में
[35:15]बीबी जैनब सलाम उल्ला अलहा ने इमाम सज्जाद अल सलाम की तवज्जो
[35:20]हटाने के लिए अपने आप को ंट से नीचे गिरा दिया कहा
[35:25]बेटा सज्जाद में गिर गई हूं इमाम एक मर्तबा फी अम्मा की
[35:32]तर दौड़ते हुए आया अम्मा यह क्या हो गया क बेटा सज्जाद
[35:38]सबर करो अगर बीवी जैनब सलाम उल्ला अलहा कर्बला में ना होती
[35:43]इमाम सज्जाद जैसा साब इमाम भी शायद सबर ना कर पाता यह
[35:49]कर्बला से कूफा कूफा से शाम तक अगर इमाम सज्जाद को हौसला
[35:52]भी मिला है बीबी जैनब सलामुला से मिला है उनको हौसला देती
[36:01]रही तसल्ली देती रही जबी तो इतना बड़ा इम्तिहान तो यह कोई
[36:09]मामूली बीवी नहीं है सिर्फ इमाम सज्जाद को ही नहीं संभाला तमाम
[36:13]बीवियों को और बच्चों को इन्होने संभाला इसलिए कि बड़ी थी सब
[36:18]में तो कोई मामूली खिदमत नहीं है यही वजह है कि आज
[36:24]जब अजादारी होती है ना तो जहा मौला हुसैन का नाम लिया
[36:28]जाता है वही बीबी जैनब सलाम उल्ला अलहा का नाम लिया जाता
[36:34]है सलावत भेजिए मोहम्मद वाले मोहम्मद पर और अगर और अगर बीबी
[36:43]जैनब सलामुला लेहा ना होती कर्बला कब के बुला चुके होते कितने
[36:51]वाकत हुए हिटलर ने कितने अफराद को कत्ल किया चंगेज खान के
[36:57]दौर में कितने कत्ल हुए उठाइए तारीख 1446 हिजरी चल रहा है
[37:06]1446 साल हो गए पैगंबर को मक्का से मदीना हिजरत किए हुए
[37:10]और अगर इसमें से 61 हिजरी को माइनस कर दे तो कोई
[37:15]1300 कोई 90 96 साल या कुछ ऐसे समथिंग बनते हैं 80
[37:20]साल या 75 साल बन के 1375 इन 1375 सालों में कर्बला
[37:31]कब के लोग भुला देते हिटलर ने कितना कत्लेआम किया चंगेज खान
[37:38]ने कितना कत्लेआम किया दीगर इलाकों में कितने कत्लेआम एटम बम गिरा
[37:44]दिया गया हिरोशिमा पर कितना कत्ल हुआ किसी को याद है नहीं
[37:51]है कोई उसकी याद मनाता है नहीं मनाता चंद अफराद होंगे लेकिन
[38:01]और हाल कोई खास याद नहीं मनाई जाती और हाल लोगों को
[38:04]ज्यादा उनके बारे में पता भी नहीं होगा कर्बला आज देखिए एक
[38:16]मशी में दुनिया के गोशो किनार से मुख्तलिफ मजहिया के अफराद आते
[38:23]हैं शिरकत करते हैं क्यों यहां तो ज्यादा से ज्यादा 72 लाश
[38:27]गिरी है ना बस जबक दिगर वाकत में कितने लाश गिरी है
[38:38]हिटलर जंगे अजीम अव्वल जंग अजम दोम चके खान यसे पहले कितने
[38:48]अदर कितने अजमान गुजरे कि उन जमान में कितने कत्लेआम हुए मतवल
[38:57]दसव इमाम के दौर में कितना कतलम के शियों का के सरों
[39:05]से जिबा करते थे खून से घरा बनाते थे और सर को
[39:11]दीगर सर से उस मिट्ठी का रा बनाकर जोड़ दिया करते थे
[39:16]और सरों की दीवारें बन गई थी बगदाद में जिसमें सादाद के
[39:21]सर और अहले बैत के चाहने वालो के सर कत्ल होने के
[39:27]लिए बहाना क्या था सैयद है कत्ल कर देते थे कतल होने
[39:32]के लिए बहाना क्या है सैयद तो नहीं है इमाम का चाहने
[39:34]वाला है कत्ल कर देते थे कितने जुल्म हुए यानी इतने मजलि
[39:45]होने के बावजूद सलवाद भेजिए मोहम्मद वाले मोहम्मद परह [संगीत] [प्रशंसा] कर्बला
[40:06]72 शोहदा लेकिन आज तक जो चर्चा कर्बला का है किसी वाक
[40:13]का नहीं है वजह नंबर एक दूसरे जो कत्लेआम हुए सियासी है
[40:24]मुल्की है जमीन के तनाज आत हैं यही है ना य इसके
[40:32]अलावा कुछ है कर्बला खालिस अल्लाह के लिए कुर्बानी दी जमीन का
[40:41]लांज नहीं था सियासी कोई पार्टियों का लांज नहीं था कोई कम
[40:47]या कोई मसला और नहीं था सिर्फ अल्लाह के लिए यही वजह
[40:54]है इंतला यकर कोम अगर तुम अल्लाह का जिक्र करोगे अल्लाह को
[41:00]याद करोगे खुदा तुम्हारे जिक्र को बाकी रखेगा कर्बला वालों ने खुदा
[41:07]के जिक्र को बाकी रखा खुदा के दीन को बाकी रखा अल्लाह
[41:10]ने अपने दीन के साथ-साथ हुसैन को बाकी रखा है इसलिए कि
[41:16]कुर्बानी इस दीन के लिए दी है उन्होंने अल्लाह की रिजा के
[41:20]लिए दीन को बचाने के लिए द है तोय बीवी अगर ना
[41:28]होती कर्बला में इमाम सज्जाद अले सलाम नहीं बर्दाश्त कर सकते थे
[41:34]उनको जो हौसला दिया तो बीवी ने दिया तसल्ली दिया करती थी
[41:42]हालाकि वह इमाम है इसलिए इस बीवी का एक लकब उमल मसाब
[41:52]मसाइल है अगरचे इमामत नहीं मिली लेकिन इमामत की मददगार इमामत का
[42:09]दिफाई कर्बला कर्बला से कूफा कूफा से शाम और वह खुदे कभी
[42:16]कूफा के बाजारों में कभी दरबारों में कभी शाम के बाजारों में
[42:20]कभी शाम के दरबार में वो बीवी के खुदबुदा [संगीत] के अल्फाज
[42:29]नहीं किए जब कूफा में खुतबा देते हैं ना तो बीवी के
[42:36]अल्फाज क्या है मक्कार धोखा देने वालों मक्कारी के आंसू बहाने वालों
[42:40]और जब शाम में खुतबा देती है शाम वालों हमें पहचानो हम
[42:48]तुम्हारी पैगंबर की इत हैं हम आले रसूल है अंदाज ही अलग
[42:59]अलग है क्यों इसलिए कि शाम वालों को अहले बैत के बारे
[43:03]में नहीं मालूम था लेकिन कूफा वाले जानते थे कफा वाले अली
[43:10]को भी जानते थे अली के बेटों को भी अली की बेटियों
[43:15]को भी जानते थे उनका किरदार देख चुके थे उनका खलाक उनके
[43:19]खुबे उनके [संगीत] दुरुस इसलिए कुफा जानते थे यही तो जब बीवी
[43:29]आई और एक मर्तबा कूफा वाले जब वह रोने लगे कुछ बमान
[43:39]थे कुछ बेबस थे क्योंकि जो उन्होंने इब्ने साद के चक्कर में
[43:44]आ गए इब्ने जियाद के चक्कर में आ गए जुर्रत का मुजहरा
[43:52]ना कर सके बने जियाद के मुकाबले में तो अब वो सवाय
[43:58]रोने के और क्या काम था लिहाजा पशेमानी थे तो ऐसी सूरत
[44:05]में रोने लगे जब रोने लगे तो बीवी के जुमले थे के
[44:09]मक्कार मक्कारी के आंसू बहाने वालों दुख देने वालों इसलिए कि तुम
[44:18]जानते हो अहले बैत कौन है तुम हसन को जानते तुम हुसैन
[44:23]को जानते हो वो य दर्स दे चुके हैं अली की बेटियों
[44:24]को जानते हो वो तुम्हारी खवातीन को दर्स दे चुकी थी उसके
[44:30]बावजूद तुमने इनका साथ दिया लेकिन शाम वाले उ नहीं पता था
[44:40]अले बैत क्या है हता के शाम में तो इतना प्रोपेगेंडा किया
[44:44]था हाकिम शाम यजीद के बाप ने के जब मला कानात शहीद
[44:51]हुए मस्जिद कूफा में तो शाम वाले कहने लगे अली मस्जिद में
[44:54]क्या कर रहे थे यानी मौला कायनात को शाम में इस तरीके
[44:58]से पेश किया गया था कि अली का मस्जिद से ताल्लुक ही
[45:04]क्या है य एक प्रोपेगेंडा किया गया था जैसे आज तयो के
[45:07]खिलाफ कितने प्रोपेगैंडिस्ट कर किसके खिलाफ जिहाद कर रहे हैं त के
[45:34]खिलाफ और वही तयो आज फलस्तीन में उनका दिफाई है फलस्तीन में
[45:44]कौन है क्या शिया एक भी शिया का घर नहीं है लेन
[45:47]उसका दफा कौन कर रहा है एक कर्बला का मानने वाला अहले
[45:53]बैत का मानने वाला आज कहां गई तालेबान ग अलकायदा कहां गई
[46:00]दाश कहां गया उनका जिहाद य से अपनी खवातीन को जिहाद बिन
[46:06]निगाह के लिए बेजने वाले कहां है कहां करे आज आज फलस्तीन
[46:13]के लिए सबके मुह पर ताले लगे हुए हैं अगर उनकी मदद
[46:19]कर रहा है तो वह जिनका ताल्लुक कर्बला से है वही उसका
[46:27]बजाने मोहतरम सानिया जहरा लिया मुकर्रमा उनका हौसला था कि उन्होंने कूफा
[46:37]कूफा से शाम शाम के जिंदा में एक साल उसके बाद जब
[46:44]रिहाई मिल रही है तो भी जब यजद इमाम को बुलाता है
[46:46]इमाम सज्जाद हम आपको रिहा करना चाहते हैं तो इमाम सज्जाद कहते
[46:51]मैं अपनी फूपी अम्मा से पूछ लूं भाई इमाम है इमाम को
[46:54]किसी से पूछने की क्या जरूरत है लेकिन इस बीवी का मकाम
[47:01]इतना बुलंद है कि वक्त का इमाम भी एक कदम आगे नहीं
[47:05]चलता जब तक बीवी से इजाजत ना ले ले इतना बुलंद मकाम
[47:10]है इमाम फी अम्मा के पास आते हैं ी जैन सलाला कहती
[47:16]है हां पहले तो एक मकान खाली किया जाए ताकि हम मातम
[47:21]कर ले फिर हम यहां से कर्बला जाएंगे एक तो चकि व
[47:27]मुबारक आए हुए थे उन सरहा मुबारक को वापस उनकी लाशों के
[47:31]साथ दफनाना था दूसरा हम उनका वहां पर गम करेंगे और उसके
[47:36]बाद मदीना जाएंगे और यूं यह काफला रया हुआ कर्बला आए कर्बला
[47:44]में उन सरहा मुबारक को दफन किया उनकी कब्रों में इमाम इल्म
[47:48]इमामत से निशान यह कब्र खोलो यह अली अकबर की खबर है
[47:52]यह बाबा हुसैन की खबर है य अब्बास अलमदार की कबर है
[47:56]इल्म इमत से वरना किस को क्या पता किसकी कबर कहां है
[47:59]लिज इमाम इल्म इमामत से निशानदेही करते कबर खोलते थे सर को
[48:06]उनके जिस्म के साथ रख दिया जाता था और इसी वजह से
[48:10]यही वजह है चहल हमारे य बिल्कुल आशूर की तरह मनाया जाता
[48:12]है क्यों उसकी वजह यह है कि या तो इन जख्मी लाशों
[48:17]को इन बीवियों ने आशूर के दिन देखा था या चलम के
[48:25]दिन देखा था इस वजह से इस चलम को बक आशूर की
[48:30]तरह मनाया जाता है और वहां पे लाशों की तफन के बाद
[48:34]यह काफिला मदीना आया जब मदीना आया तो मदीना में बीबी जैनब
[48:40]सलाम अल्ला अल के खुतला के खुतला में क्या हुआ है सब
[48:51]खबर थी लेकिन हुकूमत के खिलाफ कोई नहीं निकल रहा था जुर्रत
[48:59]नहीं आ रही थी लेकिन जैसे इमाम और बीवी कर्बला में आए
[49:04]हैं इमाम के खुबे और फिर बीवी के खुबे खवातीन में वह
[49:10]बीवी के खुब का ऐसा असर था कि उन खवातीन ने अपने
[49:11]घरों में वावाला शुरू कर दी अपने मर्दों को खसने लगे तुम
[49:18]लोग कैसे मर्द हो तुम्हारे होते हुए फरजंद रसूल मारा गया एक
[49:24]साल असीरी गुजारी इन्होने मजबूरन उनको गैरत दिलाई यह बीवी के खुतुब
[49:31]का असर था कि उन खवातीन में एक इंकलाब बरपा कर दिया
[49:33]उन्होंने अपने मर्दों को मजबूर किया और यहां तक के मदीना में
[49:38]इंकलाब बरपा हो गया और मदीना ने यजीद की हुकूमत के खिलाफ
[49:40]बगावत कर दी उसके बनाए हुए गवर्नर को उठाकर बाहर फेंक दिया
[49:46]फिर मुस्लिम बिन अकबा की सरब में यजीद ने 10000 का लश्कर
[49:51]भेजा यह 62 हिजरी की बात है 61 हिजरी कर्बला 62 हिजरी
[49:56]में रा मिली और 20 सफर यानी चलम को कर्बला वापस फिर
[50:03]मदीना आते-आते रबील अव्वल का महीना हुआ और फिर उसके बाद यह
[50:07]वाकत होने लगे इसी 62 हिजरी में जब उसम अकबा के लश्कर
[50:14]को भेजा तो उसको कहा जितना मदीना को लूट सकते हो लूटो
[50:17]लेकिन मोहल्ला बनी हाशिम के करीब ना जाना कहीं दूसरी कर्बला ना
[50:26]बन जाए यह 10000 का लश्कर जब आया क्या किया इसने मदीना
[50:29]को ताराज कर दिया मस्जिद नबवी को अस्तबल बनाया घोड़े बांधे वहां
[50:35]अस्तबल जहां घोड़े बांधे जाते हैं वो मेंबर चश पर पैगंबर खुतबा
[50:39]दिया करते थे वहां बंदरों को बिठाया क्यों ये यजद और इसके
[50:45]पैरोकार बंदरों के बड़े शौकीन थे खुद भी बंदर नुमा और शौकीन
[50:47]भी बंदरों के होते थे तो मेंबरों पे तारीख में है बाकायदा
[50:56]इस वाक वाक रा के नाम से याद करते हैं आज आपको
[50:57]रबील अव्वल का महीना जब आता है ना मदीना मदीना मदीना मदीना
[51:02]की गलियां मदीना के बाजार मदीना कभी मदीना के बारे में बताए
[51:05]तो सही ना मदीना के साथ हुआ क्या है वाक रा के
[51:11]बारे में क्यों नहीं बताते कोई नहीं बयान करेगा रबी अवल में
[51:17]के वाक रा मदीना के साथ ऐसा जुल्म हुआ मदीना को ताराज
[51:19]किया गया मदीना की गलियों में खून बहाया गया लूट लिया गया
[51:27]आ खवातीन इमाम सज्जाद के घर पर आकर अपनी इज्जत बचाई तारीख
[51:36]में मिलता है कि इस वाक हेरा के बाद 1000 नाजायज बच्चे
[51:41]पैदा हो गए थे 1000 य गुनाह का अमल भी होता रहा
[51:49]कहां मदीना में कभी नहीं बताएंगे रबी अवल के महीने में मदीना
[51:54]वालो के साथ क्या हुआ 800 तीन इमाम के र पर आकर
[51:59]अपनी इज्जत बचा गई इसको वाक रा कहते हैं और इसके बाद
[52:08]अपना गवर्नर बिठाया और फिर बाकायदा यजीद की जानिब से हुकम हुआ
[52:11]कि अब बीबी जैनब सलाम मदीना नहीं रहेंगी इसलिए कि उनके खुद
[52:18]की वजह से बगावत उठ रही है जब बीवी को पता चला
[52:23]जलाल में आए किसकी जुरत है जो मुझे मदीना से निकाले इमाम
[52:27]सज्जाद अले सलाम ने कहा अम्मा रिजा परवरदिगार इसमें है कि आप
[52:32]मदीना छोड़ दे फिर तारीख में मिलता है किमाम सज्जाद अमा के
[52:39]साथ वहां से तस और मिस्र से होते हुए इस तरीके से
[52:44]शाम गई और आज जो तीस और मिसर में अगर वहां कोई
[52:50]तश्य की रमक नजर आती है ना व इस बीवी के खुद
[52:53]बे थे जो मदीना से तीन मिसर के रास्ते होते हुए शाम
[52:58]में आई है और शाम में रहने लगी क्यों इसलिए कि शाम
[53:04]में जनाबे अब्दुल्ला बिन जाफर बीबी जैनब सलाम के शौहर इनकी जायदाद
[53:09]थी अल्लाह ने इनको जायदाद दी हुई थी तो फिर य आके
[53:14]वहीं पर रहने लगी और यह आज जो बीवी का आपको रोजा
[53:18]नजर आ रहा है ना यह उसी जायदाद में है जनाबे अब्दुल्ला
[53:24]की 2016 में जब पहली पहली मर्तबा शाम खुला दाश और इनके
[53:27]हमलो के बाद तो हमारा तीसरा काफिला था जब हम गए थे
[53:32]खुला ने खुशनसीबी दी तीन दिन से ज्यादा इजाजत नहीं थी शाम
[53:36]में रहने की जब मैं वहां गया तो वहां पर एक और
[53:41]बात का इफ हुआ कहा कि यह जो अब्दुल्ला की जमीन थी
[53:42]सिर्फ य जियारत नहीं है बल्कि इस इर्दगिर्द तकरीबन एक एक दो
[53:49]दो किलोमीटर की पूरी जमीन जनाबे अब्दुल्ला की है और आज भी
[53:54]जब कोई अपना मकान अपनी जगह बेचता है तो बाकायदा काज में
[53:57]सेल एग्रीमेंट में लिखता है कि जमीन का असल मालिक अब्दुल्ला बिन
[54:02]जाफर है जमाने के मुरूर के साथ इस छोटे से टुकड़े का
[54:05]मैं मालिक बनाऊ जिसे मैं इतने में फला के हाथों बेच रहा
[54:10]हूं तो आज भी बाकायदा सेल एग्रीमेंट में लिखा जाता है इसका
[54:16]असल मालिक अब्दुल्ला बिन जाफर है और फिर बीवी सानि जहरा वही
[54:20]कयाम पजीर हुई वही रहने लगी और फिर कुछ अरसे के बाद
[54:28]साल दो साल के बाद तकरीबन 64 हिजरी या 65 हिजरी में
[54:34]बीवी की शहादत होती है वह भी बात में के रहल होती
[54:36]है बाज रिवायत में कि नहीं एक शामी आता है और बीवी
[54:41]के ऊपर बीवी को बेल से से मारता है और बीवी उसकी
[54:46]वजह से जख्मी हो जाती और शहीद हो जाती है और फिर
[54:52]वहीं पर इस बीवी का रोजा बनता है बहरहाल इस बीवी के
[54:58]खिदमा दीन की जड़ों में इस बीवी की मेहनत है कर्बला मौला
[55:05]हुसैन की कुर्बानी अपनी जगह लेकिन अगर साने जहरा ना होती तो
[55:12]शायद कर्बला इस तरफ ना पहल कर्बला का असर इस तरह ना
[55:19]होता जैसे आज है कर्बला इतनी ताकतवर ना होती जितनी आज कर्बला
[55:25]ताकतवर है खुदा से दुआ है मेरे मालिक इस दर्स के सदके
[55:33]में हमें बीवी के रोजे की जियारत नसीब फरमा किसी ने कुछ
[55:40]पूछना है तो बिस्मिल्लाह मैंने वक्त शायद थोड़ा ज्यादा ले लिया बहरहाल
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