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Eid Ul Fitr Message | By Ayatullah Mujtaba Khamenei | Supreme Leader of Iran
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Eid Ul Fitr Message | By Ayatullah Mujtaba Khamenei | Supreme Leader of Iran
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[0:00]बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम या मुलब कुलबसार या मुबल वार या मुह ह वल हलना
[0:14]इला अहस हाल इस साल बहार रूहानियत और बहार फितरत यानी ईद
[0:21]सईद फितर और रिवायती ईद नौ रोज़ की एक साथ आमद हुई
[0:27]है। इन दो मजहबी और मिल्ली ईदों की कौम के हर फर्द
[0:32]को मुबारकबाद पेश करता हूं। और खासतौर पर ईदे फितर की मुबारकबाद
[0:36]दुनिया के तमाम मुसलमानों को पेश करता हूं। साथ ही यह भी
[0:39]जरूरी है कि मुजाहदीन इस्लाम की वाज़ कामयाबियों की सबको मुबारकबाद पेश
[0:48]करूं। और दूसरी मुसल्लत करदा जंग जनवरी के महीने की बगावत और
[0:52]तीसरी मुसल्लत करदा जंग के शहीदों और अमनो सलामती के शोबे और
[0:58]बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के शहीदों और शहीद गुमनाम सिपाहियों यानी इंटेलिजेंस से
[1:02]वाबस्ता अफराद के अहलेखाना इंटेलिजेंस से वाबस्ता अफराद के अहलेखाना और पसमांदगान
[1:09]को ताजियत पेश करता हूं और उनसे इजहार हमदर्दी करता हूं। सन
[1:19]1405 हिजरी शमसी मुताबिक 20 मार्च सन 2026 इला 20 मार्च 2027
[1:24]की आमद की मुनासबत से कुछ बातें हैं जो पेश कर रहा
[1:30]हूं। पहले गुजरे साल के बाज अहम वाकयात पर एक सरसरी नजर
[1:36]डालूंगा। बीते साल में हमारे अजीज आवाम को दो जंगों और एक
[1:39]सिक्योरिटी जंग का सामना करना पड़ा। पहली जंग माहे जून की जंग
[1:46]थी जिसमें सेहूनी दुश्मन ने अमेरिका के तावुन से ऐन मुजाकरात के
[1:49]दरमियान बुजदिलाना हमला करके मुल्क के बाज बेहतरीन और नुमाया कमांडरों और
[1:55]साइंसदानों को और उसके बाद हमारे तकरीबन 1000 हम वतनों को शहीद
[2:02]कर दिया। अंदाजे की शदीद गलती की बुनियाद पर दुश्मन ख्याल कर
[2:05]रहा था कि एकद दिन के अंदर खुद आवाम आगे बढ़कर इस्लामी
[2:10]निजाम को सरनगू कर देंगे। लेकिन आप आवाम की बेदारी और मुजाहदीन
[2:15]इस्लाम की शजातों बेपनाह कुर्बानियों के नतीजे में बहुत जल्द दुश्मन की
[2:21]बेबसी और बेचारगी जाहिर हो गई और उसने दूसरों को वास्ता बनाकर
[2:29]और हमले रोक कर खुद को सुकूत के दहाने से निजात दिलाई।
[2:32]दूसरी जंग जनवरी के महीने की बगावत थी जिसमें अमेरिका और सेहूनी
[2:39]निजाम ने इस तसव्वुर के साथ के मुसल्लत करदा इख्तेसादी मुश्किलात के
[2:43]सबब ईरान के आवाम दुश्मन की सोच को जामे अमल पहनाएंगे। अपने
[2:49]मोहरों को इस्तेमाल करते हुए बहुत सारे शर्मनाक इदामात अंजाम दिए और
[2:54]पिछली जंग से ज्यादा तादाद में हमारे अजीज हम वतनों को शहीद
[3:01]कर दिया और भारी नुकसानात पहुंचाए। तीसरी जंग वो जंग है जो
[3:04]इस वक्त जारी है। जिसके पहले दिन हमने उम्मत के पदरे मेहरबान
[3:11]रहबरे अजीमुल कदर आल्लाह मकामहु शरीफ को ऐसे आलम में कि वो
[3:15]शहीदों के काफिले की कयादत करते हुए आसमानी सफर में उस मकाम
[3:21]की जानिब बढ़े जो उनके लिए रहमत इलाही के ज़रे साया अनवार
[3:23]तैबा के जवार में और सिद्दीकीनो शोहदा की सफ में मुयन किया
[3:30]गया था। अश्क बार आंखों और शिकस्ता और महजून कुलूब के साथ
[3:37]रुखसत किया। इसी तरह उसी दिन और बाद के अयाम में बतदरीज
[3:39]इस जंग के दीगर शोहदा मिन जुमला मीनाब के शजरे तबा स्कूल
[3:47]के नौनिहालों दिना डिस्ट्रयर के दलीर और मजलूम सितारों सिपाहिए पासदारान फौज
[3:53]पुलिस फोर्स बसीज गुमनाम सिपाहियों और सरहदी हिफाजती फोर्स के शहीद जवानों
[3:59]और कमांडरों कौम के दीगर अफराद को बशूल कमसिन बच्चों और सिन
[4:06]रसीदा अफराद के जो नूर के कारवान की शक्ल में हमारी आंखों
[4:09]के सामने से गुजरे हसरत के साथ अलविदा कहा। दुश्मन ने यह
[4:15]जंग आवाम की तरफ से अपने मफाद में कोई बड़ी कारवाई अंजाम
[4:18]दिए जाने की बाबत मायूस हो जाने के बाद और इस वहम
[4:23]की बुनियाद पर शुरू की कि अगर निजाम के सरबराह और कुछ
[4:28]मुअसिर अफराद को शहीद कर दिया जाए तो आप अजीज आवाम में
[4:29]खौफो मायूसी पैदा होगी और आप मैदान [संगीत] तर्क कर देंगे और
[4:35]इस तरह वो ईरान पर गलबा पाने और उसकी तकसीम का ख्वाब
[4:41]पूरा कर लेगा। लेकिन इस मुबारक महीने में आपने रोजे को जिहाद
[4:44]से मुत्तसिल [संगीत] कर दिया और मुल्कगीर सतह पर वसी दफाई लाइन
[4:50]और चौराहों महलों और मसाजिद की तादाद में मोहकम महाज तशकील देकर
[4:55]दुश्मन पर ऐसा सरासेमा कर देने वाला वार किया कि वो मुतजाद
[4:59]बातें करने और मोहम्मल बयानी पर मजबूर हो गया जो उसकी बदहवासी
[5:07]और इदराक की नातबानी की अलामत है। आपने इससे पहले 12 जनवरी
[5:10]के दिन बगावत को कुचला और 11 फरवरी को एक बार फिर
[5:17]आलमी इस्तकबाबार से अपनी बेजारी और अपनी इस्तकामत का मुजायरा किया। जबकि
[5:21]13 मार्च को यौमे कुद्स पर अपनी जर्ब से उसे समझा दिया
[5:27]कि उसका वास्ता सिर्फ मिसाइल, ड्रोन, तारपेडो और फौजी उमूर से नहीं
[5:32]है बल्कि ईरान की फ्रंट लाइन दुश्मन की हकीर और छोटी ज़हनियत
[5:38]से कहीं वसीतर है। मुनासिब है कि यहीं मैं अजीज कौम के
[5:44]हर फर्द का इस अजीम कारनामे की अंजामदेही पर शुक्रिया अदा करूं।
[5:48]इसी तरह शुजा सादिक और आवाम दोस्त सदर ममलिकत और दीगर ओदेदारान
[5:52]का शुक्रिया अदा करूं जो इस प्रोग्राम में किसी भी प्रोटोकॉल के
[5:58]बगैर आवाम के दरमियान हाजिर रहे। इस अंदाज से काम करना और
[6:02]इसका ऐलान अपने आप में बहुत मुस्तहसन अम्र और मिल्लत और हुकूमती
[6:09]अमायदीन के दरमियान इत्तहादो यकजहती की तकवियत का सबब है। इस वक्त
[6:14]अलग-अलग मजहबी फिक्री सियासी और सकाफती रुझान रखने वाले आप हम वतनों
[6:21]के दरमियान हैरतंगेज इत्तहाद मुतजल्ली होने के नतीजे में दुश्मन शिकस्तो रेख्त
[6:28]से दोचार हो गया है। इसे हजरत हक ताला की नेमते खास
[6:31]जानना चाहिए और इस पर जबानो दिल से और मकाम अमल में
[6:37]भी शुक्र बेकरार बजा लाना चाहिए। एक अटल कायदा यह है कि
[6:42]जब किसी नेमत का शुक्र अदा किया जाता है तो शुक्रगुजारी के
[6:45]तनासुब में नेमत की जड़े ज्यादा मुस्तहकम होती हैं और उसमें इरतका
[6:50]पैदा होता है और शुक्रगुजार फर्द को मजीद इनायात मयस्र आती हैं।
[6:59]अमली शुक्रगुजारी के तौर पर इस वक्त जो चीज जरूरी है वह
[7:04]यह कि इस नेमते उज्मा को हम सिर्फ और सिर्फ हजरत हक
[7:06]ताला की रहमत माने और जहां तक मुमकिन हो इससे खूब इस्तफादा
[7:13]करें। इस तरह यकीनन यह इत्तेहाद मजीद मुस्तहकम और फौलादी होगा और
[7:19]आपके दुश्मन खारो रुसवा होंगे। यह 1404 हिजरी शमसी के वाक्यात पर
[7:24]एक सरसरी निगाह थी। अब जब के हम 1405 हिजरी शमसी की
[7:31]दहलीज पर खड़े हैं तो हमारे सामने चंद अहम चीजें हैं। एक
[7:37]तो यह कि हम अपने अजीज मेहमान माहे मुबारक रमजान सन 1447
[7:41]को हमेशा के लिए अलविदा कहेंगे। वो महीना जिसकी शबे कद्र में
[7:49]आपके कुलूब आलम मलकूत की जानिब मरकूज हुए और खुदा-ए मेहरबान को
[7:53]आवाज दी और हजरत हक ताला ने आप पर अपनी निगाहे करम
[8:00]फरमाई। आपने हम सबके सरवरो आका अजल्लाहो ताला फरजहु शरीफ और उनके
[8:05]परवरदिगार से फतहो कामरानी आयत और नेमतें मांगी और यकीनन इस निजाम
[8:13]और इस कौम पर साबिका इनायात के मद्देनजर इंशा्लाह वो सब जो
[8:17]आपकी दिली आरजू थी या उससे बेहतर आपको हासिल होगा। [संगीत] इस
[8:24]अलविदा के साथ जो इंसानों की मारफत की गहराई के मुताबिक तल्ख
[8:27]और गमंगेज होगा। हम शव्वाल उल मुकर्रम के मुबारक हिलाल को अपनी
[8:35]आगोश में ले रहे हैं और खौफो रजा के साथ हजरत हक
[8:37]ताला की ईदी के मुंतजिर हैं। मैं उम्मीद करता हूं रातों और
[8:44]दिनों में आपकी इस फर्ज शनासाना मौजूदगी और यौमे कुद्स के कारनामे
[8:48]के एवज़ परवरदिगार हमारे साथ सिर्फ करमो हिल्म और अफो लुत्फ अमीन
[8:57]का बर्ताव फरमाए जिसके हम आदि हैं। खासतौर पर उम्मीद करता हूं
[9:01]कि हमारे सरवरो आका हजरत वली उल्लाहिल आज़म के ज़हूर के अम्र
[9:07]में उमूमी गुसाइश की बशारत हजरत के कलबे मुबारक को मुसर्रतों से
[9:11]भर दे जिससे अहले दुनिया पर उसके लुत्फो करम के तफैल गुनाग
[9:20]बरकतें नाज़िल होंगी। दूसरी चीज जो हमारे रूबरू है वो रिवायती ईद
[9:23]नौरोस है। वो ईद जो अपने हमरा फितरत की ताजगी और तरावत
[9:30]और हयात नौ की सौगात लेकर आती है और निशातो शादमानी से
[9:33]मुकम्मल निस्बत रखती है। दूसरी तरफ आवाम के लिए यह पहला साल
[9:40]है कि जब हमारे शहीद रहबर और दीगर आला मकाम शोहदा हमारे
[9:43]दरमियान नहीं है। खासतौर पर शहीदों के खानदानों और पसमांदगान के कुलूब
[9:52]अपने अजीजों के लिए सोगवार हैं। ताहम मैं अपनी तरफ से एक
[9:55]आम शहरी के तौर पर जिसके करीबियों में चंद शोहदा हैं। यह
[10:02]सोचता हूं कि जहां हमारे जिस्म पर लिबास अजा है और शहीदों
[10:04]के लिए हमारे दिलों में गमो अंदोह का बसेरा है। वहीं हमें
[10:10]इस बात की खुशी होगी कि इन अयाम में नए दूल्हा दुल्हन
[10:13]अपने घर बसाएं और इंशाल्लाह हमारे रहबर शहीद और इस जंग के
[10:21]दीगर शोहदा की दुआएं उनकी हमराही करें। मैं आवामस से गुजारिश करूंगा
[10:25]कि इन अयाम की रायज मुलाकातें और आमदो रफ्त अंजाम दें। अलबत्ता
[10:33]शोहदा के पसमांदगान के एहतराम और उनकी सूरत हाल का ख्याल रखें।
[10:37]यह भी मुमकिन है कि हर मोहल्ले के लोग अगर हमाहंगी हो
[10:44]जाए और मुमकिन हो तो साल नौ की मुलाकातों का आगाज उस
[10:46]मोहल्ले के शहीदों की ताज़म से करें। अलबत्ता मोहतरम हुकूमत ने हमारे
[10:54]अजीज रहबर शहीद के शोक के लिए जो मुद्दत मुयन की है
[10:56]वह अपनी जगह बाकी है और उसका पासो लिहाज इस निजाम और
[11:02]मुल्क की अजमत का एक पहलू है। इन नुकात के बाद कुछ
[11:07]और मुख्तसर बातें हैं जो अर्ज करता हूं। सबसे पहले मैं उन
[11:12]अफराद का खासतौर पर शुक्रिया अदा करूंगा जो इन दिनों, चौराहों, महलों
[11:16]और मस्जिदों में पहुंचकर दुगनी मेहनत करके अपना समाजी किरदार बतौरे नुमाया
[11:21]अदा कर रहे हैं। बिन जुमला बाज प्रोडक्शन यूनिट्स जिनमें हुकूमती और
[11:27]प्राइवेट सेक्टर दोनों शामिल हैं और खिदमत रसानी के इदारे खासतौर पर
[11:34]वो अफराद जो इस महकमे से वाबस्ता ना होने के बावजूद मुख्तलिफ
[11:37]मुफीद खिदमात मुफ्त अंजाम दे रहे हैं और अल्हम्दुलिल्लाह उनकी तादाद काफी
[11:43]ज्यादा है। दूसरी बात दुश्मन का एक तरीका उसका मीडिया कैंपेन है
[11:49]जो इन अयाम में खासतौर पर आवाम के जहनो नफसियात को निशाना
[11:53]बनाते हुए कौमी वैदत और उसके बाद कौमी सलामती में रखना पैदा
[11:59]करने पर मरकूस है। हमें बहुत मोहतात रहना चाहिए कि कहीं तसाहुली
[12:03]के सबब खुद हमारे हाथों इस मनहूस इरादे की तकमील ना हो।
[12:10]बिना बरी मुल्क के मुख्तलिफ फिक्री सियासी और सकाफती रुझान रखने वाले
[12:15]मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए मेरी सिफारिश यह है कि कमजोरी पैदा करने
[12:19]वाली बातों में पड़ने से संजीदगी के साथ इज्तब करें। वरना दूसरी
[12:25]सूरत में दुश्मन की उसके मकसूद तक रसाई का खदशा है। तीसरी
[12:29]बात दुश्मन की उम्मीद का एक दरीचा इख्तेसादी और इंतजामी कमजोरियों का
[12:36]फायदा उठाना है जो एक मुद्दत से वजूद में आई है। हमारे
[12:38]रहबर शहीद आलल्लाहो मकामहू ने मुख्तलिफ बरसों में साल का नारा इसाद
[12:47]के महवर पर इंतखाब किया। इस हकीर की नाकिस राय में भी
[12:49]आवाम की मशत को बेहतर करना, रोजमर्रा की जिंदगी की बुनियादों का
[12:53]इरतका, रिफा और आवाम के लिए सर्वत की पैदावार कीदी नुक्ता और
[13:00]दुश्मन के जरिए शुरू की गई इख्तादी जंग के मुकाबले में एक
[13:03]तरह का दफा बल्कि पेशरफ्त का जरिया है। हकीर को गुनाग समाजी
[13:10]तबकात के अफराद की बातें सुनने की तौफीक रही है। मिन जुमला
[13:13]एक मुद्दत तक नाशनाख्ता टीम के साथ टैक्सी में जो मेरी दरख्वास्त
[13:19]पर फराहम की गई थी। तेहरान की सड़कों पर मैं आपका हमसफर
[13:25]बनता रहा और आपकी बातें सुनता रहा। मैं इस अंदाज से नमूने
[13:28]जमा किए जाने को दीगर रविशों से ज्यादा बेहतर समझता हूं। बहुत
[13:32]से मसाइल में खुद मेरी सोच आपकी बातों से मेल खाती है
[13:38]जो आप इख्तसादी और इंतजामी मामलात में तनकीद के तौर पर बयान
[13:45]करते हैं। इस सिलसिले में मैंने बहुत सी चीजें आपसे सीखी और
[13:48]मजीद नई चीजें सीखने के लिए कोशा हूं। मिन जुमला 19 रमजान
[13:54]उ मुबारक से पहले और बाद के दिनों में भी आप लोगों
[13:59]से जो चौराहों पर मौजूद थे कुछ चीजें मैंने सीखी। उम्मीद करता
[14:02]हूं कि इस नेमत से आइंदा भी महरूम ना रहूं। यह बातें
[14:09]सुनने और सीखने और दूसरे मुतालात के बाद कोशिश की गई कि
[14:12]माहिरीन की राय के मुताबिक एक कारसाज नुस्खा मुद्वन किया जाए जो
[14:19]हत्त मकदूर जामे राहे हल पेश करें। बहमद्लाह काबिल कबूल हद तक
[14:23]यह काम अंजाम पाया है और जल्द ही बुलंद हौसला ओदेदारान के
[14:29]जरिए और आवाम के तावुन से अमली जामा पहनाए जाने के लिए
[14:31]वो इंशा्लाह आमादा होगा। इस हिस्से के आखिर में मैं शहीद रहबर
[14:39]मुअज्जम की पैरवी करते हुए कौमी इत्तेहादो कौमी सलामती के साए में
[14:43]मुजाहमती मशत को इस साल का नारा मुयन करता हूं। चौथी और
[14:49]आखिरी बात मैंने पहले बयान में हमसाया मुालिक के सिलसिले में इस्लामी
[14:53]निजाम के नुक्त निगाह और पॉलिसी के ताल्लुक से जो कुछ कहा
[15:00]वो संजीदा और हकीकी नुक्ता है। पड़ोस में वाक होने के अलावा
[15:03]हमारे दरमियान दीगर रूहानी अनासिर भी हैं। जिनमें सर फहरिस्त दीन इस्लाम
[15:07]की पैरवी नीज बाज के यहां मुकद्दस मकामात का वाक होना बाज
[15:13]में बड़ी तादाद में ईरानियों का रिहाइश पज़र और कारोबार में मशगूल
[15:17]होना और बाज दीगर में मुश्तका कौमियत या मुश्तका जबान या मुश्तका
[15:22]स्ट्रेटेजिक मफादात बिलखसूस इस्तकबार के महाज से मुकाबला इनमें से हर एक
[15:32]उनसुर अपनी जगह अच्छे रवाबद को मजीद मुस्तहकम बनाने की बुनियाद करार
[15:35]पा सकता है। बिन जुमला अपने मशरिक हमसाइयों को हम अपने बहुत
[15:39]करीब समझते हैं। बहुत पहले से पाकिस्तान के सिलसिले में मैं यह
[15:45]जानता हूं कि यह वो मुल्क है जिससे हमारे शहीद रहबर का
[15:48]खास लगाव था। इसकी मिसाल वहां हमारे हम मसलक अफराद के लिए
[15:55]मुसीबतें पैदा कर देने वाले तबाहकुन सैलाब का नमाज़ जुमा के खुतबों
[15:58]में जिक्र करते हुए आपकी आवाज भरराने की शक्ल में नजर आए।
[16:04]खुद मैं भी मुख्तलिफ वजूहात की बिना पर यही सोच रखता हूं
[16:07]और मुख्तलिफ इजलासों में इसके इजहार से दरेक नहीं करता। यहीं पर
[16:13]मैं तकाजा करता हूं कि हमारे दो बरादर मुल्क यानी अफगानिस्तान और
[16:17]पाकिस्तान रिजा इलाही की खातिर और मुसलमानों के इत्तहाद को टूटने से
[16:22]बचाने के लिए ही सही आपस में बेहतर रवाबित कायम करें और
[16:28]मैं अपने तई लाजमी इदामात के लिए आमादा हूं। इसी तरह मैं
[16:32]तुर्की और ओमान के अंदर हमारे साथ जिनके अच्छे रवाबित हैं। कुछ
[16:37]जगहों पर होने वाले हमलों के बारे में कहना चाहता हूं कि
[16:42]इन हमलों में इस्लामी जम्हूरिया की मुसल्ला फोर्सेस और मुजाहिमती महाज की
[16:47]दीगर फोर्सेस का कोई हाथ नहीं है। यह एक साजिश है जो
[16:50]सेहूननी दुश्मन फॉल्स फ्लैग के हरबे का इस्तेमाल करके इस्लामी जम्हूरिया और
[16:54]हमसाया मुलिक के दरमियान तफरेका पैदा करने के लिए अंजाम दे रहा
[17:01]है। और मुमकिन है कि बाज़ दीगर मुालिक में भी ऐसे वाकयात
[17:06]हो। इस हिस्से से मुतालिक बाकी बातें पहले जिक्र कर चुका हूं।
[17:10]उम्मीद करता हूं कि हमारे सरवरो आका अज्लाह ताला फरज शरीफ की
[17:18]दुआओं और हक ताला की इनायात के तफैल हमारी कौम हमारे हमसाइयों
[17:21]मुस्लिम अकवाम खासतौर पर मुजाहिमती महाज की फर्सेस के लिए यह अच्छा
[17:26]साल कामयाबियों और गुनाग रूहानी और मादी गुसाइशों का साल हो और
[17:35]इस्लाम इंसानियत के दुश्मनों के लिए यह ऐसा साल ना हो वुरीद
[17:37]अन्ना वसीन वनहु व फिर वहाद मा कान यजून सदक्लाहु अली अज़म
[18:02]व सदका रसूल करीम वन अला जालिका शाहदीन व्सलाम अलकुम व रहमतुल्लाह
[18:08]व बरकातहू सैयद मुस्तबा हुसैनी खामिनी 29 इस फंद सन 1404 हिजरी
[18:20]शमसी मुताबिक 20 मार्च सन 2026 20.
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