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Dr Jawwad Haider Hashmi | Rasool Allah Nuqta-e-Wehdat
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Record date: 24 October 2021 - رسول اکرم نقطہ وحدت
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2021 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:00]झाल कि पुलिस मिला है वह माघ्यम राधे अल हमदुलिल्ला ही रब्बुल
[0:22]आलमीन अ कि तुम अस्सलातो वस्सलाम वाला हाफिज अल्लाह इन थे मैं
[0:30]पागल ही बेनिफिशियल मासूमीन बुलाना जुलाहा आधा ही माइन हम्माबाद पाला तबारक
[0:39]व ताला कि महकमे किताब ही मजबूत वह शख्स मिला है रहमान
[0:44]ए रहीम ए लुक अट मनौवर आलम मोमिन इस बार सखी हम
[0:47]रसूल अमीन फहीम अतुल वाले हिमायती ही व्यक्ति हम वाले मोहन लाल
[0:54]किताब उल हक मार्जिन का नुस्खा बे रख यह वाला रिमूव्ड इन
[0:58]बर मोहम्मद वाले मोहम्मद सौरभ 100 ग्राम म म म कि आज
[1:11]117 बिलावल की तारीफ है में इस्लामिक कैलेंडर के ऐतबार से इंतिहाम
[1:19]दिन है और दो इंतिहाई पाकीज़ा और मुबारक मुसिबतें आज की तारीख
[1:26]में पाई जाती हैं कि रसूले खुदा सल्लल्लाहू अलैही वा आलेही व
[1:33]सल्लम के वाहन अश्व खम्मा घ्नी को मिला देते भाषागत का दिन
[1:44]भी आज की तारीख पर है और हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम
[1:48]हलवा शुभे कि की विलादत यह बात शायद की तारीफ भी आज
[1:57]की ही तारीफ है तो सबसे पहले इस मुबारक मौके पर आप
[2:03]तमाम मॉर्निंग किस्मत में हल्दी है तब रिक्वेस्ट करता हूं और दो
[2:07]आंखों के अल्लाह ताला हमें तौफीक अता फरमाए कि हम रसूले खुदा
[2:14]और इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की सीरत को पढ़ें और फिर उनके ऊपर
[2:18]अमल करने की हमें तो ही हासिल हो अ कि आज जिस
[2:25]मौजूद के ऊपर मुझे भूतों करनी है वह ऐप रसूले खुदा चोला
[2:32]देवासी असलम 9th इतिहात इंतिहा यह मौजूद है और विलादत का दिन
[2:36]भी है तो इसमें इस बात से आप सलाह देवा देवम का
[2:41]मुबारक तस्करा भी होगा और मौजूदा हालात के चनाचूर में स्थिति हवा
[2:46]जैसे विशाल अ यह बात होगी क्योंकि यह को प्रश्रय उदास व्लादिवस्तोक
[2:53]की विलादत या वाले से हमारे सामने कई तारीफ है पाई जाती
[2:57]हैं 12 रबी उल अव्वल की तारीख में मिलती है नो रविलावल
[3:00]की तारीफ मिलती है ₹10 अलावा की तारीफ मिलती हैं 12 रबी
[3:06]उल अव्वल की तारीफ मिलती है और इसी तरह 17 बिलावल की
[3:12]तारीख में निवासी आपके अंदर मौजूद हैं और आम तौर पर मुसलमानों
[3:15]के दिन या नुकीले पकाते फिर के दरमियान 12 और 17वीं रावल
[3:23]राखी मारूफ है तो यह तारीख की खिलाफत हैं तारीख की स्थल
[3:26]आफत का किसने कोई अहमियत नहीं होती कि जिसको बुनियाद बनाकर हम
[3:33]इन मसाइल के अंदर उलझे रहें और आपका तस्करा छोड़ दें और
[3:36]है तो हज़रत इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह आले नए कि इस पूरे हफ्ते
[3:44]को हफ्ते इबादत के तौर पर मनाने का हुक्म दिया और फ़रमाया
[3:49]के बजाय इसके कि आप तारीख के खिलाफ आपने पड़े रहें पूरे
[3:51]हफ्ते में रसूले अकरम स लेवल असम का तज़किरा करें जो नोक्ता
[3:57]इतिहास है मार्किट से मदद हैं तमाम मुसलमानों की मां बहन तुम्हें
[4:01]अल्लाह ताला ने जो अधीन भेजा वह अंबियाए किराम के जरिए भेजा
[4:06]है और हज़रत आदम अलैहिस्सलाम से लेकर हज़रत हूद हैं और उनमें
[4:13]आखिरी जो शरीयत है वह बुरे कर्म सल्लल्लाहु अलैहि वालही वसल्लम लेकर
[4:17]आए अब हम इस पर या मुहम्मद गौरी नमः जय हो जाऊंगा
[4:22]है जैसे आप शरीयत-ए-मोहम्मदी कहते हैं जो कल कयामत तक रहने वाले
[4:28]शरीयत है है तो अल्लाह ताला के पैगाम को अंबियाए किराम इन
[4:32]सालों तक पहुंचाते हैं और आखिरी नबी बनकर हुजूरे अकरम सल्लल्लाहो वाले
[4:40]वसल्लम इंसानों के बारे में तशरीफ लाए तो आखिरी नबी का मतलब
[4:42]यह है कि कल कयामत तक कोई और न भी आने वाले
[4:47]नहीं हैं अब आंख्यों है न भी जो तालीमात लेकर आएंगे वह
[4:50]कल कयामत तक तमाम इंसानों के दरवाजे अमल है है और आखिरी
[4:58]नबी जो किताब लेकर आएंगे वह कल कयामत तक के तमाम इंसानों
[5:02]के लिए किताब हिदायत है और आखिरी का मतलब यह है क्या
[5:08]आसमान से कोई और किताबी मौजूद होने वाली नहीं है कोई और
[5:10]नहीं शरीयत आने वाली नहीं है कोई और नए नबी या रसूल
[5:16]आने वाले नहीं है तो अल्लाह ताला ने भी क़ुरआने करीम के
[5:22]अंदर जायजा रसूले खुदा चलाने वाले समय के ऊपर विमान की दावत
[5:24]दी है हम मोहम्मद सल्ले अला मोहम्मद वली मोहम्मद जुबेर ए फार्म
[5:29]इन उबला हुआ रसूल अल्लाह के ऊपर विमान लव और अल्लाह के
[5:34]रसूल के ऊपर हिमालव इसी तरह इतिहास के बारे में भी अल्लाह
[5:37]ताला ने अपने हित के साथ-साथ नबी करीम किताब का हुक्म दिया
[5:43]है अति ऑल हाथियों और रसूल अल्लाह की हिदायात करो और अल्लाह
[5:50]के रसूल की तरह का रोग मायोत्ते और रसूल रखता है अल्लाह
[5:52]जिसने रसूल की हित की उसने गया के अल्लाह की हिदायात रसूले
[5:57]अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम की इताअत अल्लाह के इतिहास से जुड़ी हुई
[6:03]है रसूले अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम के ऊपर विमान अल्लाह रब्बुल इज्जत
[6:07]के यह ऊपर से मांस है वह बसता है तो यह झाला
[6:15]ए आर रहमान के रसूल वह लगता है के हर वह शख्स
[6:20]अजहर वह इंसान की जो दायरे इस्लाम में है कि वह इस
[6:24]लौटते के ऊपर क्या है शरीर हैं सब होता है अल्लाह रब्बुल
[6:29]इज़्ज़त के बाद नबी करीम चलाने वाले समय की मजबूत और रिसालत
[6:31]के ऊपर पूरी दुनिया के अंदर रहने वाले सारे इंसान कि उनकी
[6:37]उनके ऊपर विमान रखते हैं उनकी तबियत को मानते हैं उनके विशाल
[6:43]आपको मानते हैं मैं अपने ग्रुप को आपके सामने दो तीन हिस्सों
[6:45]में पेश करूंगा एक तो रसूले अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम वह हंसती
[6:52]हैं कि जिनके ऊपर विमान तमाम मुसलमान रखते हैं तो यह हम
[6:59]यह देखेंगे कि आप किस जिम्मेदारी इलाही जिम्मेदारी क्या थी और उन
[7:04]फरमाइश की तरफ मंत्री ने कैसे इशारा फरमाया है हैं उसके बारे
[7:10]में बॉक्सर इशारा कर लूंगा और उसके बाद पैग़ंबरे अकरम सल्लल्लाहो वाले
[7:14]वसल्लम ने खुद इस्लामी उम्मा श्राद्ध स्केल देने के बाद उम्मत को
[7:20]जोड़ने के खातिर उम्मत के दरमियान इतिहास तो इत्तेफाक काम करने के
[7:25]खातिर जो अम्लीयत दामाद अंजाम दिए वह क्या थे है कि इस
[7:31]की तरफ इशारा कर लूंगा दो और तीसरे मामले में इंशाल्लाह आप
[7:33]चलाने वाले असम के कुछ हरामिन कुछ और कुछ इरशाद आदि के
[7:40]इतिहास और इत्तेफाक के हवाले से और इसकी हत्या वाले से आपके
[7:43]सामने पेश करूंगा ऑफिस के साथ-साथ आखिर में छाला यह मुद्दा भी
[7:49]कि पैग़ंबरे अकरम चलाने वाले यश हमने अपने बाइक हेयर उम्मत को
[7:52]एक तरफ से बचाने के लिए क्या नुस्खा पेज पर माया है
[7:56]है तो यह इंशाल्लाह वह तो कोई चंद्र राशि में आपके सामने
[7:59]पेश करूंगा मैंने शुरू में आपके सामने की सूरह आल इमरान की
[8:05]आयते करीमा की तिलावत की है लग्न मल्लाह बालों में ने इस
[8:11]बार सभी हम रसूल अमीन खुश हम यह वाले हिमायत युद्ध की
[8:14]हिम्मत वाले मोहम्मद किताब उल हक में इनका उनका व्यक्तित्व लाल मूवी
[8:21]या अल्लाह का एहसान है मोमिन के ऊपर आ है अल्लाह ताला
[8:23]का एहसान है मर्लिन के पर क्या एहसान है कि उसने अल्लाह
[8:29]ने इंसानों के दरमियान में सेव उन्हीं लोगों के दरमियान में से
[8:34]एक शख्स को मधु सप्रे शाला पर माया नवी बनाकर उनके दरमियां
[8:38]भेजा है कि यह इसको अल्लाह ताला ने एहसान करार दिया कि
[8:43]इंसानों के ऊपर नबी करीम की नबूवत एक एहसान है में अच्छे
[8:49]यह एहसान क्यों है इस आयत या फिर से आपको अंदाजा हो
[8:54]जाएगा और दरमियान अल्लाह ताला ने उस नदी के बजाय इसको बयान
[8:56]फ़रमाया कि है कि नबी क्या खरीदा अंजाम देते हैं फरमाया कि
[9:02]अतुल वाले हिमायती नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम का इंतिहान काम
[9:08]यह है कि वे लोगों के सामने अल्लाह ताला की आयत की
[9:13]तिलावत फरमाते हैं का जो आया तिलापिया है वह लोगों के सामने
[9:16]सुनाते हैं अब यहां पर दो तरह क्या याद हो सकती हैं
[9:20]एक तो क़ुरआने करीम लोगों के सामने पेश करना और आयात को
[9:26]उसके वर्षीय फोन में अगर आप देखें तो अल्लाह रब्बुल इज्जत की
[9:30]निशानियों से लोगों को आगाह करना एक नदी का फ़रीज़ा यह ताकि
[9:37]लोग अल्लाह ताला की तरफ आ जाए तो नबी करीम यह फ्रिज
[9:38]अंजाम देते हैं वह यूजर कि हम दूसरे नंबर पर उनका तकिया
[9:45]करते हैं उनको पाकीज़ा करते हैं किस चीज से पाठ करते हैं
[9:49]मैं बुत परस्ती से नजासत से अखिला की गिरावट से और फिक्री
[9:58]गिरावट से पिछडी तौर पर जो लोग पशुओं का शिकार है नैतिक
[10:04]आधी तौर पर जो लोग पशुओं का शिकार हैं उन्हें बस किया
[10:06]करते हैं उनसे पास को पार क्यों क्योंकि तो ही का मतलब
[10:11]यह है कि आप सारी बुराइयों को छोड़ेंगे और अल्लाह रब्बुल इज्जत
[10:14]के सामने सर झुका आएंगे हुए नेपाल ने कहा कि यह एक
[10:20]Services इसे तू गिरा समझता है हजार सिरों से देता है आदमी
[10:26]को मजबूत इंसान अगर इस डर से रुख मोड़ने तो हर एक
[10:27]के सामने इंसान को जगना पड़ता है कभी किसी के सामने झुकता
[10:31]है कभी किसी और के सामने झुक रहा है बीती से आदमी
[10:36]के सामने जो लेकिन जो लोग जो शख्स अल्लाह के सामने झुक
[10:38]जाए फिर उसे किसी और के सामने झुकने की जरूरत नहीं पड़ती
[10:42]तू नबी करीम सल्लल्लाहू अलैही वा सल्लम लोगों को दर-दर पर दुकानें
[10:46]सजा दिलाने वाले हैं वह व्यक्ति हम वही मोहम्मद मां मां और
[10:54]इन किताब और हिकमत की तालीम देते हैं किताब की तालीम देते
[10:57]हैं पुराने मस्जिद को के परिणाम को पहुंचाने वाले सबसे पहले कुदरी
[11:01]करीम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम हुए अदाकारा शर्मा बांसल ना सिलाई कर देख
[11:08]ली सुबह यह दरिंदा आसमान उजले यह हमने इस जगह को आपके
[11:10]ऊपर नाज़िल किया ताकि आप लोगों के लिए बयान करें जो क्वेश्चन
[11:16]कि तरफ डुबा है जो क्वेश्चन के लिए नजर हुआ उसको आप
[11:21]बयान फ़रमाए यानि पैग़ंबरे अकरम सल्लल्लाहू अलैहि व सल्लम हमारे सामने पुराने
[11:26]क्रीम केक मफिंस को खोलकर बयान फरमाएंगे यदि आपने अपने अखबार के
[11:29]जरिए से भी अपने किरदार और अमल के जरिए से भी खोलकर
[11:34]बयान फ़रमाया है तो किताब की तालीम देते हैं नवी करीम चलाने
[11:36]वाले शब्द और इसी तरह ही किस्मत की तालीम देते हैं एक
[11:40]टेक्स मत या नहीं आएगा ही ठेकमा ध्यान शूद्र चोर की तरह
[11:45]ने दावत देना आएगा ही कि उन्हें दावत दे देना तक तो
[11:50]इंसान इंसानों को अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की तरफ विदावत दे देना किताब
[11:54]की तरफ दावत दे देना और इसी तरह ऑन बुरे प्रकार से
[11:59]उनको बचाना की जिनमें लोग गिरफ्तार थे रसूले करीम सल्लल्लाहो देवास हम
[12:03]यह हर एग्जाम दे रहे हैं मैं इनका उन्होंने कबूल की दलाली
[12:06]मोबीन और अलार्म यह फरमाएंगे एहसान है तुम्हारे ऊपर लोगों के ऊपर
[12:13]एहसान करार दिया अब एवं रकम की पेशकश को यहां पर विश्वास
[12:15]है कि वह इन कारों में कबूल की दुल्हनिया मूवी इन आपके
[12:19]तस्वीर लाने से पहले लोग खुली गुमराह में मुख्य लाते ज़लालत में
[12:23]मुब्तिला स्थित है है इसलिए मुसलमानों को आप क्या कहते ज़माने चाहिए
[12:27]कहते हैं यानी जाहिलियत की दौड़ में जिंदगी गुजार रहे थे जाहिलियत
[12:34]से अगर निकाला तो आप चलाने वाले वसल्लम ने निकाला पैग़ंबरे अकरम
[12:37]सोनल आने वाले समय लोगों को जहां अलग से और जाए नीयत
[12:42]से नजात अता फरमाए इससे पहले लोग जाएगा और जिंदगी गुजार रहे
[12:45]थे पुराने करें कि कई आया कि हमें अल्लाह ताला ने इस
[12:48]की तरफ इशारा फरमाया है हां यार ऐसा नहीं किशोर उस ज़माने
[12:54]को जमाने जाहिलियत कहते हैं यह किसी इमारत की के कहने की
[12:56]वजह से ही बता रही थी मायावती व जिसने क़ुरआने करीम के
[13:00]अंदर भी ऐसा ही है यह शहर वह सूरह अहज़ाब के अंदर
[13:04]अल्लाह ताला ने आवाज को हटाकर के साथ शर्मा यह वाला तब
[13:07]रचना तब हर रोज भाग्य तुगलक कि उस तरह बनाव-सिंगार करके बाहर
[13:15]न फिरा करें जिस तरह ज़माने जाहिलियत ख्वातीन बनाव सिंगार करके बाहर
[13:19]निकलती थी दोस्त को लंबे अल्लाह ताला ने क्या करार दिया जमाने
[13:21]जाहिलियत जाहिलियत इसी तरह हम यदि हम यह तक जाए नहीं आ
[13:28]जाए रिया जाहिलाना तास उपर से अल्लाह ताला ने मन आप तो
[13:34]कई यात्रियों के अंदर उस जमाने को उस जमाने की आदतों को
[13:35]उस जमाने के पास उसको उस जमाने के रस्मों-रिवाज को अल्लाह ताला
[13:41]ने जाहिलियत से ताबीर समय हुजूर-ए-अकरम तस्वीर लाए और उस जायजा लिया
[13:45]से इंसानों को न जाता वर्मा अब यहां तक यह जो तालीमात
[13:51]है अल्लाह के बाद रसूले अकरम के ऊपर विमान का पहाड़ा और
[13:53]पैग़ंबरे अकरम स लाल एवं की तालिमात ठीक है जिसमें यह चीजें
[13:58]शामिल हैं इन पर तमाम मुसलमान मुताबिक हैं अ कि तमाम मुसलमानों
[14:03]का चाहे वह जिस मसलक से जिस वक्त फिर से ताल्लुक रखता
[14:08]हो तो यह इस के हवाले से किसी को कोई तकलीफ नहीं
[14:13]है अब इसे जरा आगे बढ़े और देखें कि पैग़ंबरे अकरम सलाद
[14:16]एल्वा एडिसन ने अपनी दबी जिंदगी में अपनी हां तक बाहों में
[14:21]हो कि इतिहास के हवाले से क्या फैमिली और दामाद अंजाम दिए
[14:23]तो हमें कई तरह के दामाद नजर आते हैं है यानी पैग़ंबरे
[14:29]अकरम शैल आने वाले समय यह चाहते थे कि लोग इतिहास तो
[14:34]इत्तेफाक के साथ जिंदगी गुजार हैं इतिहास इत्तेफाक कि Bigg Boss प्रेम
[14:38]विवाह प्रॉब्लम है एक मुद्दत से पहनाया तो यारों चलो अपने साथ
[14:43]के ऊपर रख लेते हैं तो फिर सवाल पढ़ लीजिए जो कि
[14:50]मैं मोहम्मद 567 है तो सूर्य कंसल आने वाले शरद ने मुसलमानों
[14:56]के मां बेन बल्कि इंसानों के मां बेन इतिहास दो इत्तेफाक के
[15:03]हवाले से कई का विषय अंजाम दी में सोचेगा आपके सामने पेश
[15:06]करूंगा वक्त तिहाई कम है इसलिए उस व्यक्ति साथ के साथ आपके
[15:10]सामने चीजें पेश कर रहा हूं को देखें आप जानते हैं कि
[15:16]मक्कए मुकर्रमा में हुजूर-ए-अकरम चलाने वाले समय 40 साल के बाद अलार्म
[15:19]हुए फरमाया और उसके बाद लोगों की जानिब से प्रेस की जो
[15:24]नसें मुसाफिरों का सिलसिला शुरू हुआ दुश्मनी मोल ले बुरे कर्म चलाने
[15:29]वाले वसल्लम मक्के में जब थे मक्कए मुकर्रमा में जब थे तो
[15:32]आपने [प्रशंसा] कि इतिहास के दायरे में लाने की खातिर कि जो
[15:39]दे रही इस्लाम के अंदर आ चुके थे मुसलमान हो चुके हैं
[15:43]है लेकिन इस्लामी दायरे में आने के बाद उनको दायरे इतिहास में
[15:50]लाने के खातिर एक फैमिली अब आप अंजाम देते हैं वह क्या
[15:55]है वह यह है कि हुजूरे अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम उन्हें गुप्त
[15:59]दायित्व पर मुसलमान होने वाले सहाबा इकराम के दरमियां सतगुरु तीजा शर्माते
[16:06]हैं कि उक्त का रिश्ता तय फरमाते हैं इस महीने के बाद
[16:10]अभी नहीं और बीमारियां जैसे मैं उसका रहा हूं मक्कए मुकर्रमा में
[16:12]पैग़ंबरे अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम मुसलमानों के मां बेवकूफ मत का रिश्ता
[16:16]खाएं फरमाते हुए का मतलब क्या बहादुरी है कि उक्त का मतलब
[16:22]भाईचारगी ज्यादा खून नहीं रिश्ता अगर न भी हो तो इस्लामी रिश्ते
[16:28]के अंदर उन लोगों को प्रो रहे हैं कि तुम अब एग्जाम
[16:29]के अंदर आ गए हो तो हो सकता है कि तुम्हारा कबीरा
[16:33]कुच और तुम्हारा कब मिला कुछ और तुम किसी और कबीले से
[16:38]ताल्लुक रखते हो लेकर इतिहास का जो मरकज है इतिहास का जोन
[16:40]रोकता है वह इस्लाम है जब इस्लाम के दायरे में आ गए
[16:45]अब तुम सब मुसलमान बाय-बाय हूं कि हम रकम ने उनकी बिरादरी
[16:50]का ऐलान फ़रमाया उनको एक दूसरे का भाई करार दे दिया यह
[16:52]एक अमली तौर पर हुजूरे अकरम ने उन्हें एक-दूसरे का बाय कर
[16:58]आगे फिर इसके बाद यहां से आप इज्जत पर माय यहां पर
[17:00]हालात स्वीकार नहीं थे मक्के के अंदर दुश्मनियां ज्यादा थी दुश्मन ज्यादा
[17:07]है में कुल कर्तव्य करने का मौका नहीं देते थे तो हुजूरे
[17:11]अकरम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के जैन संजय शर्मा के
[17:14]तस्वीर ले जाते हैं मदीने मुबारक को तो आप जानते कि महीने
[17:19]के लोगों ने इससे बाल किया मदीने के लोगों ने साथ देने
[17:23]का एलान किया हम यहां के लोग मुख्य अतिथि मक्के वालों ने
[17:26]मदीने वालों ने खुलकर साथ देने का ऐलान किया है अगरचे अभी
[17:30]भी बहुत सारे लोगों को जोरदार हिसाब से बाहर हैं लेकिन ज्यादातर
[17:32]अपराध ऐसे है कि जो देर इस्लाम में आ चुके हैं तो
[17:37]यह जो अक्सर आप सुनते इस्लामी रियासत रियासतें मदीना आजकल बाद सियासी
[17:42]लेटर्स भी बार-बार रियासत मदीना के नारे लगाते तो रियासत मदीना के
[17:46]हवाले से जो तारीख की तौर पर आप पढ़ते हैं उसकी व्याख्या
[17:50]के बाद पड़ी हां यार यह जरूरत के बाद इज्जत के पहनने
[17:54]साल इज्जत के पहले सानू है कम सोने वाले प्रेमचंद इंतिहाई बेहतरीन
[18:01]काम अंजाम दिया उनमें से एक यह है कि मुसलमानों के लिए
[18:06]एक ऐसा मरकजी की जगह आपने वॉल्यूम फरमाया कि जहां पर लोग
[18:10]मिल बैठ सकें जहां पर एक साथ मिलकर है बहुत मजा ला
[18:14]सकें जहां पर मुलाकातें हो सके जहां पर अपने कामों को आगे
[18:19]बढ़ा सके और वह मस्जिद-ए-नबी मस्जिद-ए-नबवी की दुनियां सूर्यकिरण पहले साल रखी
[18:26]है ए बिगर दामाद के साथ-साथ यहां तहसील आने के बाद पहले
[18:29]साल के दाम आपने हुजूरे अकरम ने इतिहास और वह आदत टाइम
[18:35]करने के खातिर थी और काम अंजाम दिए एक तो और मस्जिद
[18:41]नबवी को भी आप एक हाथ से फैमिली तौर पर एक मरकजी
[18:43]एक ऐसी जगह करार दे सकते हैं जहां पर सारे इस्लामी का
[18:50]इस्लामी दायरे के अंदर आने वाले मुसलमान एक जगह जमा हो सकते
[18:58]हैं उसको एक मरकजी वह आप जाएगा करा दे सकते हैं उसके
[19:01]अलावा सूर्य को उन्नति इंतिहाम काम अंजाम दिया तो हुजूरे अकरम ने
[19:07]मदीना तहसील आने के बाद मुसलमानों के मां-बहन दोबारा रखते हुए के
[19:12]फ़रमाया कि की बराबरी का रिश्ता खाएं फ़रमाया ऐ है लेकिन कौन
[19:16]से मुसलमानों के धर्म याद फोन मुसलमानों के दरमियान की जो मक्खियों
[19:19]से इज्जत करके यहां तस्वीर विलायत है उनमें और जो मदीने के
[19:25]अंदर मौजूद यह मुसलमान थे अ में मक्के से आने वाले मुसलमान
[19:32]मुहाजिर साहब एक राम मदीने के अंदर मौजूद मुसलमान जिनको उनकी खिदमत
[19:35]और उनके नुसरत की वजह से अनुसार का लाभ मिला अनुसार नासिर
[19:41]की जड़ यानी नुसरत करने वाले मदद करने वाले किन लोगों की
[19:44]मदद की कौन सा बाइक राम की मदद की जो इज्जत करके
[19:48]यहां तशरीफ लाए थे तो हुजूर-ए-अकरम चलाने वाले सामने हजरत अनस बिन
[19:52]मालिक के घर में हजरत अनस बिन मालिक के घर में मुहाजिर
[19:57]सहाबा इकराम और अनुसार सहाबा इकराम को जन्म फ़रमाया और उनके दरमियां
[20:00]को खुद का रिश्ता खाएं वर्मा पकरी दोस्तों के करीब सवारी कराते
[20:07]हैं की तारीख अंदर नाम भी मौजूद है कि अलार्म को फरार
[20:09]का बाइक करार दे दिया प्लान को फरार कार्रवाई करार दे दिया
[20:13]और हुजूरे अकरम ने अपना भाई अमीरुल मोमेनिन हजराते अली इब्ने अबी
[20:17]तालिब वाले शाम को करार दिया भगवान शिव व एक पाठ 11
[20:24]हमारी एग्जाम है मुसलमानों के दरमियां इतिहास कायम करने का एक हमारी
[20:27]मुशायरा है के जब आप दायरे इस्लाम में आ गए अल्लाह और
[20:33]उसके रसूल के ऊपर हिमालिया चुके हैं तो आप तुम आ इशारों
[20:39]की तरह नहीं हो तुम आपस में भाई-भाई हो इस्लाम वह अधीन
[20:40]है कि जो इंसानों के मां बेर खून के रिश्ते से हटकर
[20:47]एक हिमानी रिश्ता ग्रह तारे फ़रमाता है कि यह किसी और तहसील
[20:53]बता दूं कि अगर आपको नहीं मिलेगा देश आक्रोशित पैसे हैं कि
[20:56]खूनी रिश्ता हर कमी लहरुं कबीले के अंदर होता है एक मां
[21:01]बाप की औलाद हो वह आपस में भाई-भाई हैं लेकिन और अल्लाह
[21:06]ताला ने अल्लाह के नबी ने इंसानों के बाद में मुसलमानों के
[21:11]बाद मेरा खून के रिश्ते से हटकर इस्लामी रिश्ते की बुनियाद पर
[21:14]बराबरी का रिश्ता तय फरमाया है कि तुम्हारे दरमियान कोई रिश्तेदारी नहीं
[21:18]सूंघते बार से यह लॉक मक्खियों के हैं और आप क्या है
[21:25]मदीने वाले लेकिन क्योंकि वह भी मुसलमान आपने मुसलमान तो दोनों मुसलमान
[21:28]होने की बुनियाद पर एक दूसरे के भाई भाई हम यहां पर
[21:32]हम अरे पोते हमारा कंट्रोल उक्त फर्म इन के अंदर भी हमेशा
[21:38]वाले से ताकि फील हवाएं हवाएं तुम अल्लाह एक दूसरे के बन
[21:46]जाओ का यह पहला कदम है तो अब एक तो सवाल यहां
[21:52]पर यह है कि जब उस ज़माने में फिर कहें तो थे
[21:56]नहीं मसाले तो थे नहीं तो यहां पर इतिहास की दावत देने
[21:58]का क्या मतलब है यहां पर दोबारा बरादरी के अ का रिश्ता
[22:03]कायम करने का मतलब क्या है तु देखें फिरते नहीं थे मसाले
[22:09]ठीक नहीं थे लेकिन मुख्तलिफ कमाई से ताल्लुक रखते थे कि मुस्लिम
[22:13]इलाकों से ताल्लुक रखते थे यानी इंसानों के मां बेन कभी-कभी कि
[22:19]इंसान अगर अ मैं अपने बुला दादा आपको पेश नजर ना रखें
[22:23]तो बास मामूली छोटी-छोटी चीजें इंसान के सलाह का सबब बन जाती
[22:33]हैं हैं उनमें से क्या है निशान है जवान आपके सिवा कुच
[22:35]और है मेरे दिमाग में कुछ और है हम इस जवान को
[22:37]बुनियाद बनाकर एक दूसरे के मुकाबले में आ जाएंगे एक दूसरे से
[22:42]लड़ना शुरू कर दी इसी तरह आपके इलाका कुच और है मेरे
[22:43]अलावा कुछ और है इलाका आयत की बुनियाद निशान की व्याख्या पैदा
[22:49]हो सकता है आप किसी और कभी ने खानदान से ताल्लुक रखते
[22:51]हैं मैं किसी और कभी लिखा दाद पाई लिखावट की बुनियाद पर
[22:56]एक दूसरे के सामने तो उस वक्त अगर चीज मतलब यह मसाले
[23:01]कि नहीं थे अगर चिपके नहीं थे लेकिन को मोबाइल तो थे
[23:03]इलाका यह तो थी तो हुजूर-ए-अकरम सोनौली बारिश हमने कि इन जरा
[23:11]यह सेबी पैदा होने वाले खतरे शक्ति जो मुमकिन थे उनसे पर
[23:15]हमारा कंट्रोल आने वाला समय ने रोकना चाहा तो आपने उनके दरमियां
[23:21]कुदरत का रिश्ता एक फरमाया तो मदीने के हो तो मक्के के
[23:26]हो तुम और खर्च से ताल्लुक रखते हो और तुम क्या हो
[23:28]वहां पर पूरे से ताल्लुक रखते हो कब आए तुम्हारे मुंह तरफ
[23:33]हैं दिन तुम्हारा एक है इस्लाम है लेकिन कब ऑयल की बुनियाद
[23:38]पर भी हो सकता है कि कभी यह चिंगारी उठ जाए और
[23:39]यह पुरुष एकल में उनके दरमियां देखो मकान फरमान दोस्तों यहां पर
[23:45]मौजूद जो और कसरत के जो लोग तेल मदीने के अंदर आप
[23:50]जानते हैं के अनुसार ज्यादातर को सोख अस्पतालों करते थे दो कप
[23:53]चाय के लोग हैं इनके दरमियां पुरानी दुश्मनी चली आ रही थी
[23:58]सौ साल से इनके दरमियां दुश्मनी थी कि सूर्य कंसोल आने वाले
[24:01]समय के सदके यह एक दूसरे के भाई भाई बन गए वहीं
[24:06]क्लार्क ने चंदा तारा संघ का सफर रखो अल्लाह ताला की रस्सी
[24:11]को मजबूती से थाम और अफ्रीका में ना पड़ो वर्क फोर्स के
[24:15]बाद कुछ अल्लाह ताला ने इरशाद फरमाया व कुरु कुरु तुम आधार
[24:22]पाना पहले फूलों के पास बास तु ही किनारा और उसको याद
[24:24]करो जब तुम एक दूसरे के दुश्मन थे मैं तुम्हें एक दूसरे
[24:30]के दुश्मन थे लेकिन तुम अल्लाह रब्बुल इज्जत के अधीन के अंदर
[24:33]जब तुम आ गए पास बहुत मिनिमम आती है यह हमारा से
[24:37]सहमत की वजह से तुम एक दूसरे के बाय-बाय कर पाए गए
[24:42]िबरादरी का रिश्ता तुम्हारे अंदर का टाइम हो गया ठीक है और
[24:44]उसके बाद अल्लाह ताला और फिर आगे यहां पर यह साथ फरमाया
[24:47]कि तुम आंख के किनारे खड़े थे तो ए फिक्स ब्रोकन तो
[24:53]आंवला छपा व्रत में नाद तुम आंख के किनारे खड़े थे लेकिन
[25:00]अल्लाह ताला ने उससे तुम्हें मजा अता फरमाए तो कि अल्लाह ताला
[25:02]ने उसे तुम्हें मजा अता फरमाए और तुम एक दूसरे के भाई
[25:07]वाइट बन गए यह पहला कि मुसलमानों के मां-बहन आपने वह वक्त
[25:09]का रिश्ता इन फ़रमाया और क़ुरआने करीम में बह लेकिन उन्होंने लिखवा
[25:15]पास यह बहना का भाइयों को हमने आपस में भाई-भाई हैं तो
[25:18]अपने भाइयों के दरमियां सुलह कराने की कोशिश कर लें और तरह
[25:23]का हो जाता है तो पूरा कराने के लिए अपना किरदार अदा
[25:27]कर लें कि इसके बाद दूसरा जो अहम काम अंजाम दिया हुजूरे
[25:29]अकरम ने इतिहास इतिहास के हवाले से उसी पहले साथ इज्जत के
[25:34]पहले साल उसमें यह है कि मुसलमान उसे हटके खून मदीने वालों
[25:37]के दरमियां एक हुआ है दाऊद ने फ़रमाया मदीने वालों के दरमियां
[25:43]के दिन में 200 वर्ड्स वाले हैं मुसलमान भी है और उसके
[25:46]साथ-साथ वह मुझे यकीन है कि जो अभी तक 11 साल में
[25:51]नहीं आए तो कि वह भी उस परिस्थिति के दिन के ऊपर
[25:56]मजहब के ऊपर बाकी थे उनके मावेन हुजूरे अकरम ने एक और
[25:59]मौजूदा फरमाया यह दूसरा मुद्दा है कि इसके मुताबिक हम सब मदीने
[26:06]से ताल्लुक रखते हैं यस से ताल्लुक रखते हैं तो यह जो
[26:09]हमारा इलाका एक है यानी एक नुक्ते इतिहास हुज़ूरे अकरम ने पैदा
[26:16]फरमाया उसी नुक्ते के ऊपर लोगों को इकट्ठा होने की दावत दे
[26:18]रहे हैं कि चलो कुछ लोग मुसलमान है इस दायरे के अंदर
[26:23]लेकिन कुछ लोग अभी भी काफ़िर हैं कुछ लोग अभी भी मुझसे
[26:28]हैं लेकर में शरीक होने के बावजूद का फिर होने के बावजूद
[26:34]एक मुक्ता एक हफ्ते इतिहास उनके साथ फिर भी था वह क्या
[26:35]था एक ही बटन से ताल्लुक रखते थे में एक ही बटन
[26:41]से ताल्लुक रखते थे वह कौन मदीना तुम भी मत नहीं हम
[26:44]भी मदनी पास इसी हफ्ते के पर पुस्तक पुस्तक हो जाए तो
[26:50]है तो इससे एक पैर आराम मिलता है आपका किसी के साथ
[26:52]अगर एक तरफ अगर हो मजहबी है सलाफी क्यों रहो फिर भी
[26:57]अगर कुछ मुलाकात आप लोगों दोनों के दरमियान नगर इत्तेफाक ही पाए
[27:00]जाते हैं सुन्नत अनुभव यह है कि उसी के ऊपर पुस्तक खोज
[27:05]में आप कि इस तरह की इजाजत ही नहीं है इस्लाम के
[27:07]अंदर इस तरह के तो किसी लिहाज से इजाजत ही नहीं है
[27:11]आप उसी एक हफ्ते इतिहास के ऊपर जमा हो जाए वहीं आप
[27:16]दोनों के दिल में अधिकतर का मुद्दा हो जाए तो यह दोनों
[27:19]हद हो गए तीसरा वायदा जो मशहूर है कंसोलिडेशन ने फ़रमाया पहले
[27:24]साल मदीना इज्जत फरमाने के पहले साथ वह मिश्रा के मदीना के
[27:30]लाता है बड़ा मशहूर कि जिसमें मैं मदीने के अंदर रहने वाले
[27:36]सारे लोग हैं और मदीने के छात्रावास में रहने वाले मदीने के
[27:39]आसपास रहने वाले यहूदी कबीले के लोग भी हैं कि यहूदियों के
[27:45]तीन बड़े कबीर के लोग रहते थे कभी 11वां कंता कबीले बन्नू
[27:50]नजर और कबीले बनू कुरेजा आ कि इन तीन कप वालों के
[27:56]लिए यह दिए हैं पुत्र एवं 16 आने वाले सुनने इस मुआहिदे
[27:58]में ठीक है इस मुद्दे के अंदर उनको भी शामिल फ़रमाया ऐ
[28:03]कि के वतन के दायरे को अगर इससे आप सौंठ और बढ़ा
[28:08]देंगे तो उसमें वह भी आ जाते थे उनका स्कूल के लोग
[28:12]पूरे करने उनके साथ इतिहास पर माया उनके साथ भी मोहित वर्मा
[28:14]अब उन्हें कि उक्त को जरा आप देख लीजिए अब हैरान रह
[28:20]जाएंगे अ हैं इनमें हुजूर-ए-अकरम हुकुम अभी आजादी दे देते हैं है
[28:24]हालांकि ये लोग अंधेरे इस्लाम में ही रही है पुत्र रेशम के
[28:30]नवरात्रों पर विमान ही नहीं सकते लेकिन हुजूर-ए-अकरम सलाह एवं फिर भी
[28:33]उनको मजहब या जाति देते हैं तो ठीक है तुम अपने दिन
[28:37]के प्रवास कर लो लो कि उन्हें इजाजत दी जाते हैं तो
[28:42]उसके साथ-साथ एक और हम यहां पर यह क्या अगर मदीने के
[28:44]ऊपर कभी कोई दुश्मन हमला कर दो Quikr मुश्तरका तौर पर अपने
[28:50]वतन का दावा करेंगे अपने मूल का डिब्बा करेंगे चाहे वो मुसलमान
[28:54]हो चाहे हल्दी हूं अच्छा ठीक मुव्वा नहीं देखा जाएगा कि किसके
[29:00]ऊपर हमला हो रहा है में बहुत कि हुजूर के पर हमला
[29:05]करने वाले हूं सब मिलकर दीपा करेंगे हो सकता है कि मुसलमानों
[29:07]के पर हमला करने वाले हम सब मिलकर अपने-अपने वार्डों का दौरा
[29:13]करेंगे हुजूरे अकरम ने रोकते इतिहास को पा लिया और उसके बाद
[29:16]उसी लिंक के को बुनियाद बनाकर उनके धन वायदा के फ़रमाया कि
[29:20]है और इसके साथ-साथ यह भी है कि जंग के ऊपर हर्ष
[29:24]भी करना पड़ता है जो उनके ऊपर महाराज होते हैं तो जंग
[29:29]के जो चकरा जाते हैं वह सब मिलकर मुश्तरका तौर पर अदा
[29:31]करेंगे ए वतन के दीपा के लिए मदीने के दीपा के लिए
[29:37]सारे लोग मिलकर एक राजा करेंगे ऐसा नहीं कि हर मुसलमान नखरा
[29:43]जांच करने और बाकी ना कर लें ऐसा नहीं कि सभी यात्रियों
[29:44]से पैसे लिए जाए और वापिस नहीं सबका मुश्तरका बता है तो
[29:49]सब मिलकर क्या करेंगे अपने वतन का त्याग करने में हाथ एक
[29:53]दूसरे का साथ देंगे और रख राजावत ने भी एक-दूसरे का हाथ
[29:58]बटाएंगे तो इससे मालूम यह होता है कि हुजूर एक कंट्रोलर लेवल
[30:00]हम इंसानों के मां बैंक के इतिहास को तलाश शर्माते थे कि
[30:06]आपका दिन कुछ और भी अगर है फिर भी आप इस सरज़मीन
[30:11]के अंदर जब रहते हैं तो आप और हम एक ही सरज़मीन
[30:15]के रहने वाले हैं हुजूर एक कमर्शियल एवं के ऊपर विमान का
[30:18]मिनट्स के शुरू में सब का दावा है सारे मसाले के लोग
[30:23]सारे मुखातिब करके लोग दायरे ये शाम के अंदर मौजूद सब लोग
[30:25]आपके ऊपर विमान रखते हैं तो आप चला है हम किसी व्यक्ति
[30:29]पर भी फिर कर लें अ कि ट्यूमर है कॉर्न फ्लॉर लिया
[30:34]समिति हादसों इत्तेफाक और मुसलमानों के दरमियान और इंसानों के मावेन वह
[30:37]दत्त के हवाले से जो हमारी अ दामाद करने उनमें भी हम
[30:41]पैरों में रक्त के प्रवाह पर पढ़ने में है तो यह चंद
[30:44]एक दामाद बहुत है जो इज्जत के पहले साल आप एग्जाम दे
[30:49]दिए इससे जरा आगे बढ़े इसे जरा आगे बढ़ो सकते हैं कि
[30:50]किसी के साथ नहीं आ जाए कि यह तो इतना यह साल
[30:54]के इज्जत के बाद इतना ही साल के बाद के हाथ में
[30:59]है और इस तरह इस साल में हुजूर-ए-अकरम चलाने वाले श्रम अभी
[31:04]आरती पूजन इतनी मजबूत नहीं थी तो उसका हो सकते हैं कि
[31:06]आप यह आमतौर पर फूफा फैमिली अब दाम अंजाम दे रहे हैं
[31:10]लेकिन क्या बात ने भी ऐसा ही किया तो उसका जवाब ही
[31:14]कीजिए बिलकुल ऐसा किया है कि आप जानते हैं न सारे नजरान
[31:20]के साथ सूर्य कमज़ोर लहसुन का जो मकान में हुआ नजर आई
[31:23]नजरान के साथ यह तो शायद बुरे कर्म की जिंदगी के आखिरी
[31:27]साल का बकाया है हमारे यहां बच्चे बच्चे को यह बात है
[31:33]मालूम है मुबाहिला के हवाले से के जो मोहल्ला मुसलमानों और हुजूरे
[31:37]अकरम और उन पर नजर आई नजरान के लोगों के दरमियान होने
[31:43]वाला था कि पैग़ंबरे अकरम 16 लुटाए थे प्रमेय कंडीशन में फतेह
[31:46]मक्का के बाद आप जानते हैं कि उसका अगला जो साले नोइजी
[31:51]वह आम रूप चलाता है वह कदम उठाते थे नंबर कम खत्म
[31:53]दौरा कर इस्लाम कबूल करते थे और कुछ लोग ऐसे भी थे
[31:58]जो आते थे लेकिन इस्लाम कबूल नहीं करते थे अपने अधीन पर
[32:03]बाकी रहने का ऐलान करके चले जाते थे है तो नजरान के
[32:05]इसाई आए और आने के बाद हुजूर-ए-अकरम 16 असम के साथ उनकी
[32:10]मुलाकात हो जाती है उनकी मुलाकात होते हैं कि हमारे का उन्हें
[32:14]भी दावत देते हैं और आप जानते हैं कि वह ज्योतिषालय शाम
[32:17]अल्लाह ताला का बेटा करार देते हैं और तस्वीर के कायल है
[32:23]सूर्य कंट्रोलर यह हमने उन्हें दलाल के जरिए समझाने के कोशिश की
[32:26]लेकिन वह नहीं समझे या समझने के बावजूद मानने के लिए तैयार
[32:33]नहीं हुए तो आखिर में क़ुरआने करीम के उच्च ऐलान के मुताबिक
[32:36]पक्ष के वकील तालिब उन्नत को आंवला वह अपना कुमार निशाना बने
[32:43]सा कुंभ राशि अनुसार कौन सुमन अप्रैल पंख अल्लाह तआला हल्का अश्विन
[32:46]क्या अपनों को बुलाएं हमने अपनों को मिलाएं और उसके बाद देखै
[32:49]झूठों के पर लानत देते हैं हुजूर-ए-अकरम पंजतन पाक के साथ तस्वीर
[32:57]ले गए और फिर बाद में मुबाहिला नहीं हुआ अब मोबाइल क्यों
[32:59]नहीं हुआ यह बाद विश्वास है आज के नज़्ज़ारे नजरान के लोगों
[33:05]ने एतराज किया इस बात का ऐतराज किया क्या कर यह लोग
[33:06]हमारे हक में बद्दुआ अगर करेंगे तो हमारी नस्ले खत्म हो जाएंगे
[33:12]हम सफाई से मिट जाएंगे इसके बदले में कि इनकी सदाकत की
[33:15]गवाही दी लेकिन इसके बावजूद ईमान नहीं लाये बीमार नहीं लाए और
[33:22]वह अपने अधीन के ऊपर बाकी रहने का पर मुझसे रहे यह
[33:28]को समझने के बावजूद अपने अधीन के ऊपर बाकी रहने के ऊपर
[33:30]वह लोग शहद पुत्र विक्रम ने में कोई जोर जबरदस्ती नहीं कि
[33:35]विषय के लायक रहें दिन दिन के अंदर तो कोई जोर-जबरदस्ती है
[33:37]यह नहीं कि हम ब्रेकर में उन्हें जबरदस्ती दिया है इस्लाम में
[33:42]शामिल करने की कोशिश नहीं पर मार्क अब इसके बाद आप यह
[33:45]उठता देख लीजिए के पुत्र विक्रम सोलुशन उनके साथ वायदा फरमाया किसके
[33:50]साथ नशाहरा नजरान के साथ हैं बिजनस राम के यह लोग तो
[33:57]अभी इस आई हैं कि मुबाहिला के मैदान में और दलाल के
[33:59]मैदान में को शिकस्त हुई है इसके बावजूद मेरे सामने नहीं आया
[34:06]है हैं लेकिन फिर वह इस्लाम इस वक्त जब इनके साथ यह
[34:08]बातचीत चल रही है तो मेरा काम किया जैसा कि हुजूर है
[34:12]कि हम जिंदगी के आखिरी सालों में है तो इस पर इस्लाम
[34:16]पूरे सरजमीन यादवेंद्र फैल चुका है ए पप्पु मुसलमानों की पॉजिशन इंतिहाई
[34:20]मजबूत है किसी से कोई हार्ट खतरा नहीं है यहां तक कि
[34:24]वह फ्रेश वह लोग जो हर साल कोई न कोई जंग सेलेक्ट
[34:28]करते थे मुसलमानों के खराब अधिकारी के खिलाफ वह भी मुसलमान हो
[34:30]चुके हैं बताया वहीं देर शाम के अंदर आ चुके हैं उन्होंने
[34:34]भी अपने इस्लाम का ऐलान किया हुआ है तो यहां से आप
[34:38]कोई खतरा नहीं है किसी तरह से कोई खतरा नहीं है लेकिन
[34:39]फिर भी जब उन लोगों ने यह ऐलान किया क्या मुसलमान नहीं
[34:44]होंगे हम इस आई रहेंगे Tubelight नहीं जा सकते दी हुजूर एक
[34:47]कमर्शियल अहम नहीं जा सकती कि चलो ठीक है तुम अपने अधीन
[34:51]के पर अगर बात ही रहना चाहते हो बाकी रहे हों को
[34:54]देखकर हुजूर है कारण एक हफ्ते की तरह ने बुलाया फिर भी
[35:00]बुलाया है कि उन्हें आजादी दी इस बात की कि वह अपने
[35:01]मजहब के पर अमल कर लें वह आए थे वहां पर ले
[35:04]रहा है मजाक के साथ जो हुआ है उसमें उद्यानों में सभी
[35:09]आजादी भी दिए अभी आजादी का मतलब यह है कि वह अपने
[35:13]अधीन के तालीमात के मुताबिक जो भी है हमारी निगाह में तो
[35:14]बातिल लेकिन फिर भी जब तक वह समझ अपने है वह अपने
[35:19]दीन की तालीम के मुताबिक़ अमल कर सकते हैं हुजूरे अकरम के
[35:23]उस समय के अंदर यह बेक उनके किसी चीज को गिराया नहीं
[35:25]जाएगा उनके किसी राजीव को उसके बाद इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
[35:31]यह सब समय के अंदर शामिल है ठीक और उस लेकिन एक
[35:37]मुद्दे की तरफ में फिर भी दावत दीप वह क्या है कि
[35:39]के उपयोक्ता तालाब इलाके में तीन सवारियां भी आप लोगों को दावत
[35:49]दे ताकि दोनों एक हफ्ते के में मिल बैठकर काम को आगे
[35:58]बढ़ाते हैं इसके कर लेते हैं जो हमारे और तुम्हारे मुश्तरका है
[36:06]जिसके ऊपर हम बीमार रहते हो क्या है अल्लाह अल्लाह कि अल्लाह
[36:13]तआला के अल्लाह ताला के साथ किसी को शर्करा नहीं अल्लाह ताला
[36:19]के साथ किसी को इबादत में शर्करा नहीं देंगे उसके सिवा किसी
[36:22]की इबादत नहीं करेंगे वह तो क्या फिर हैं वह तो एहसान
[36:26]से बाहर है वह इस आई हैं एक मशहूर है क्रम उन्हें
[36:28]साथियों को इतिहास की दावत दे रहे हैं किस व्यक्ति के ऊपर
[36:34]उस नुस्खे के ऊपर जिस पर यह दोनों पुस्तक है वह शुरुआत
[36:40]नहीं हो सकती इसे एक नमूना तो मानते ही नहीं है कि
[36:41]हमारा कंटिन्यू अगर वे लोग मान लेते तो फिर तरह भी खत्म
[36:46]हो जाता तो इलावा को नहीं मारे लेकिन अल्लाह को मानते हैं
[36:50]तो उसी तो ही क्यों पर अपने दावत दे रहे हैं तार
[36:51]बिल्कुल मत इंशाह अल्लाह ही अल्लाह अल्लाह कि अल्लाह ताला के अलावा
[37:00]हर किसी के बाद अत नहीं करेंगे और फिर उसके बाद हैं
[37:04]हुजूर हल्का-हल्का तरह प्रशांत शर्मा आते हैं कि किसी के मध्य संवाद
[37:08]पर लीजिए जो अलार्म सुंधा की मेज़ न्यूयॉर्क वाला व्यक्ति या उसके
[37:20]साथ किसी चीज को शर्करा नहीं देंगे अब कि बशीर के तो
[37:25]आप भोपाली पर हम भी मुखालिफ हैं अल्लाह ताला के इबादत या
[37:30]आपके कार्यालय अंबिकापुर है आगे इसी हफ्ते के प्रमुख तत्व जाते हैं
[37:33]तो यही एक हफ्ता इतिहास हमारे आपके दरमियां इसी के ऊपर आ
[37:36]जाए और फिर भला है यहां तक कि जब भावना धन और
[37:39]बाबा विंदू ने लव अल्लाह को छोड़कर हम एक दूसरे को हममें
[37:45]से बॉस्को जो है अल्लाह को छोड़कर रब नहीं बनाएंगे पर रौब
[37:51]करार नहीं देंगे व्रत कौन है अलार्म व्यक्ति साथ है तो अल्लाह
[37:54]ताला को छोड़कर हम एक दूसरे को या अपने पैसे वापस लोगों
[37:58]को जहर रब करार नहीं देगी इसके ऊपर आज हम तक पहुंच
[38:00]जाए तो इसका मतलब क्या है हुजूरे अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम एक
[38:05]हफ्ते के ऊपर उन्हें भी दावत दे रहे तो पैग़ंबरे अकरम ने
[38:08]अमली तौर पर यह दामाद अंजाम दिए हैं कि के दाएं इज्जत
[38:13]में आप जहर मुसलमानों के मां हैं अब देखो बताएं फरमाते हैं
[38:17]मदीने वालों के बाद में आप और उसके बाद जो यह दोनों
[38:21]को भी शामिल करके और आकर मैं यहां पर अब इसके बाद
[38:25]जरा आगे बढ़े हुजूरे अकरम के इतिहास इतिहास के हवाले से जो
[38:28]फर्म दांत हैं कि आप शोल्डर हम कि दादी से देखें सूर्यकांत
[38:33]ने इतिहास के हवाले से इत्तेफाक के हवाले से काफी ज्यादा जोर
[38:39]दिया है पैग़ंबरे अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने इरशाद फरमाया क िलए
[38:43]मुस्लिम ऑल मुस्लिम मुसलमान मुसलमान का भाई है है उस माह को
[38:47]सब्सक्राइब करें कि आयत में भी इन हमलों में इन्होंने एक बार
[38:52]ख्याल रखा जाए कि मोमिन आपस में क्या है बाय हैं इनके
[38:53]धनिया की ओर रिश्ता है वह बराबरी का है सूर्य कंफर्म है
[38:58]अल्म्स फ्रॉम मुस्लिम इसी तरह जुड़े कम समय लहसुन का यह फरमान
[39:01]है ऑल मुस्लिम मन कि मुसलमान व है कि जिसके हाथ और
[39:09]उसकी जुबान से दूसरे मुसलमान ने पूछ रहे तो इसका मतलब यह
[39:11]क्या करना है पूछना हो तो मुसलमान नहीं है मैं इसी तरह
[39:15]आप सुनो लहसुन का यह भी दर्शाता है कि तुममें से कोई
[39:19]शख्स उस वक्त तक मोमिन नहीं हो सकता जब तक अपने मुसलमान
[39:21]भाई के लिए उसी चीज को पसंद ना करो जो तुम अपने
[39:25]लिए पसंद करते हो है इसका मतलब है कि अगर आप इसके
[39:30]खिलाफ और दूसरा मुसलमानों के लिए किसी चीज को पसंद कर लें
[39:32]तो धार एस नाम में धीरे विमान में हम नहीं रहेंगे हुजूर-ए-अकरम
[39:38]सवाल यह संघ यह भी ऐसा फरमाया कि मुसलमान एक जिस्म की
[39:41]मान है यह जिस्म के किसी एक हिस्से में अगर दर्द हो
[39:45]जाए तो पूरा जिस्म बेचैन हो जाता है पूरे जिस्म में बुखार
[39:50]की के पैदा हो जाती है ठीक है और पूरे जिस्म को
[39:54]सुकून नहीं मिलता मुसलमान आपस में प्यार और मोहब्बत और हम धीमी
[39:57]में एक जिस्म की माने तो यह अगर कहीं किसी मुसलमान को
[40:02]तकलीफ में देखें तो उसकी तकलीफ तो यह भी महसूस कर लें
[40:04]तो इसका मतलब यह है कि अगर हम इस तरह एक दूसरे
[40:08]के दुख दूर और एक दूसरे की तकलीफ को महसूस न करें
[40:12]तो इसका मतलब है कि हम फांसी दे रही मार्ग में नहीं
[40:16]है जवानी तो प्रथम ऐलान करते हैं लेकिन अतिथि के तौर पर
[40:19]हम एवरेज मान के अंदर नहीं है कि जुड़े कंसोलिडेशन यह भी
[40:24]साथ पर माकपा के रास्ते में मौजूद यह रुकावटें रास्ते में पड़े
[40:31]हुए पड़े हुए घंटे उनको हटा लेना यह सकता है इसका मतलब
[40:36]यह है कि अगर आप किसी के लिए रुकावट इज्जत कर लेते
[40:40]हैं तो इसका मतलब कि तालीमात है नाभि से सुन्नत नव्या से
[40:43]हम दूर से पूरे करें यह चाहते हैं कि सारे मुसलमान एक
[40:47]जैसे हैं ठीक है मुसलमान आपस में इतिहास इत्तेफाक के साथ जिंदगी
[40:50]गुजार हैं तो यह चंद बरमूडा सुलेखन के अब इसके बाद आखिर
[40:56]में आपके सामने एक हफ्ता और पेश करूं वह यह है कि
[41:00]खुर्रम के बाद हम जिंदगी गुजार रहे हैं है तो क्या ऐसा
[41:05]है कि हुजूर-ए-अकरम सुनाने वाला समय अपने बाप और उम्मत को एक्स्ट्रा
[41:08]से बचाने के खातिर कोई नुस्खा दिया कोई फॉर्मूला दिया कोई हिदायत
[41:16]का कोई मुद्दा बयान फ़रमाया तो आप देख लीजिए उस के पुत्र
[41:19]एवं 16 बाद सामने आपने बात तमाम मुसलमानों के लिए गुमराही से
[41:27]बचने का ज़लालत से बचने का एक नुस्खा बयान फ़रमाया है ए
[41:31]ब्वॉय तिहाई मारुति कि इन नेताओं कुंती को मुस्तकिल हैं यह किताब
[41:38]अल्लाह इतरत यादव बहती है और सुनाओ झाला को आदर्श शर्मा थे
[41:53]कि मैं तुम्हारे दरमियां दो ग्राहक चीजें छोड़े जा रहा हूं एक
[41:56]अल्लाह की किताब और एक मेरे अतः लव एंड माइन तब तक
[42:01]तुम भी मामलों तक जिंदा दिया बताओ जब तक तुम इन दोनों
[42:06]के साथ तमाम रुख अख्तियार किए हुए रहोगे हरगिस गुमराह नहीं होगे
[42:09]को फतेह रियल हाउस यहां तक कि मेरे पास हो से को
[42:14]सर पर पहुंच जाओ तो पैग़ंबरे अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने अपने
[42:20]बात गुमराही से बचने के लिए दो चीज़ें छोड़ी हैं एकता फैला
[42:24]ही क़ुरआने मजीद है और है वे यथार्थ ले मुसलाम है तो
[42:30]अगर बाद रसूल मुसलमान गडरिए चाहते हैं किस अलार्म से बचें गुमराही
[42:34]से बचें तरीके से बचें इंतजार से बचें और पैग़ंबरे अकरम चलाने
[42:38]वाले समझो अधीन लेकर आए हैं जो हिदायत लेकर आए हैं उस
[42:43]हिदायत और दीन के ऊपर बाकी रहे तो उनके पास सिवाय इसके
[42:48]कोई चारा नहीं है क्यों और आल्वेज का दामन थामने या घर
[42:51]पर और हरी मिर्च का दामन थामेंगे तो कयामत तक के लिए
[42:55]ट्यूमर अगले में गारंटी दी है कि वह जो एक व्हाट्सएप पर
[42:58]मेरे पास पहुंच जाएंगे वैज्ञानिक मासूमों भगवान जहाज चंपा हैं तो फादर
[43:07]असुर बुमराह से बचने का यह जरिया और आखिर में एक बात
[43:11]आपके सनम यह भी यूज कर लूं कि इतिहास का मतलब यह
[43:15]हरगिज नहीं है कि हम अपने अपने अधीन को छोड़ दें इतिहास
[43:21]का मतलब यह हरगिज नहीं है कि आपने अपने आप कार और
[43:23]नजरिया आपको छोड़ दें इतिहास का मतलब जैसे कि मैंने हमारी हुजूरे
[43:28]अकरम की फैमिली एक दामाद के हवाले से आपके सामने बयान कर
[43:30]लिया उससे यही नतीजा निकलता है इतिहास का मतलब यह है कि
[43:35]मुझे इस तरह का अनुपात के ऊपर रख सकते हो जाएं मुश्तरका
[43:37]रुका के ऊपर खेलोला आप वह ऐसी अतिथि मुसलमान अल्लाह के ऊपर
[43:44]विमान रखते हैं पैसे तो मुसलमान अल्लाह के नबी के पर ईमान
[43:47]रखते हैं हृदय के अजमत और जलालत कि आपका आए हैं कयामत
[43:52]के ऊपर आप विमान रखते हैं नमाज़ रोज़ा हज जकात और अमरुद
[43:57]मार उतना ही अनिल मुनकर इन सारी चीजों के पर आप यकीन
[43:59]रखते हैं और इनका बजा लेते हैं कि इतिहास का मतलब यह
[44:04]है कि मुश्तरका के पर मुसलमान खट्टे हो जाए यहां तक ट्रैफिक
[44:06]की बात है जहां तक टिक रिएक्ट लाश की बात है वह
[44:11]तो पाए जाते हैं वहीं एक तरफ को हवा देने के इंसान
[44:15]कोशिश ना करें सूर्य कंसल एल्वा एडिसन हमारे ने अमरीका से इतिहास
[44:21]है हमारे लिए मरकज से रोकते इतिहास है आपने अपने अमल के
[44:24]जरिए से आपने अपनी सुन्नत के जरिए से जो चीज हमारे सामने
[44:30]छोड़ दी हैं उनके ऊपर अगर में खट्टे हो जाएंगे और अपने-अपने
[44:32]इख़्तिलाफ़ आपको अपनी अपनी हद तक रखेंगे और उस तरह का आपको
[44:38]इस तिमाही बस वह मिलाद के अंदर बयान करेंगे तो इसका मतलब
[44:40]है कि हम एक तरफ से बचे रहेंगे पर न दो आदमी
[44:44]भी आपको ऐसे नहीं मिलेंगे कि जिन के दरमियान किसी ने किसी
[44:49]लिया से कोई सलाह में पाया जाता हूं लेकिन यह तरफ को
[44:54]हवा देना उनको उछालना और मुसलमानों के दरमियान है इस तरह की
[44:57]कोशिश करना यह न तो अल्लाह रब्बुल इज्जत यह पसंदीदा है और
[45:03]नहीं स्क्रीन सोलन आने वाले समय हां यह पसंदीदा है तो अल्लाह
[45:06]ताला ने इंसानों को साहित्य कल बनाया है साहेब मशहूर बनाया है
[45:12]सोचने समझने की सलाहियत और फरमाइए तुझे बाहर इंसान सोचने समझने की
[45:15]सलाहियत रखता है तो बाद मामला के अंदर फिटकरी तौर पर इस
[45:20]तरह बात का पैदा होना एक सीधी सी बात है तो यह
[45:21]उनको लेकर इंसान एक दूसरे से दूर रहे और मुसलमानों के मावेन
[45:27]दूरियां इज्जत हो यह किसी भी लिहाज से अपन मंदिर का ताजा
[45:34]नहीं है और अल्लाह ताला अल्लाह के नबी के ऊपर सबका विमान
[45:36]है तो उनके ऊपर इंसाफ वह तक पहुंच जाएं उन्हें के ताले
[45:41]मास्क को लेने की कोशिश करने और अगर यही करते हैं तो
[45:42]दुनिया और आखिरत दोनों में छाला कामयाब और कामरान होंगे दुआ है
[45:48]कि परवरदिगार व्यक्ति मोहम्मद वाले मोहम्मद हमें पढ़ाने मस्जिद की तालीम आपके
[45:51]पर अमल करने की तौफीक अता फरमा आप परवरदिगार हमें रसूले अकरम
[45:54]सल्लल्लाहो निवेश हम किसी रात को समझने और के ऊपर अमल करने
[45:59]की तौफीक अता फरमा परवरदिगार मुसलमानों के माध्यम तमाम अहले हदीस अबे
[46:02]इतिहास में यह कैंप वर्मा और उनको इंतजार से महसूस वर्मा इमामे
[46:10]ज़माना किशोर नेताजी फरमा अमीन के अनुसार में शक्कर और देखकर मोहम्मद
[46:14]वाले मोहम्मद सौरभ कालिया बन
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