Up next
7 Views · 24/11/14
8 Views · 23/01/17
Allah Se Na Umeedi | Mayoosi | How to Deal with Hopelessness? | Maulana Najib ul Hasan Zaidi
0
0
31 Views·
24/07/29
In
Other
#NaUmeedi #Mayoosi #Hopelessness #Media_Sabeel #YouthVibe
Allah Se Na Umeedi | Mayoosi | How to Deal with Hopelessness? | Maulana Najib ul Hasan Zaidi
Want to Support us.
Donate us now...
Contact on WhatsApp
+918928514110
Show more
Transcript
[0:03]किसकी बात को सुने अल्लाह की बात को माने या फिर शैतान
[0:08]की बात को माने अभी तुम इंजॉय करो वक्त आएगा तो इबादत
[0:11]भी कर लेना शैतान किस तरह से इंसान को फरेब देता है
[0:13]ये जमाना तो एंजॉय करने का है अभी तो तुम्हारी शादी भी
[0:16]नहीं हुई है 20 25 के हो ये कोई एज नहीं होती
[0:20]है 40 के बाद ठीक है तुम नमाज पढ़ लेना बस ये
[0:23]आखरी सवाल है कि इंसान किस तरह से मायूसी को खत्म करें
[0:27]वो जो आ रहा है वो दुनिया में उम्मीद जगाने के लिए
[0:28]आ रहा है वो दुनिया की उम्मीद है वो जुल्म सितम की
[0:32]चक्की में पिसती हुई इंसानियत की उम्मीद है मौलाना साहब प्रोग्राम को
[0:39]शुरू करने से पहले आपसे गुजारिश है कि एक शॉर्ट इंट्रोडक्शन अपने
[0:42]बारे में नाजरीन के लिए बयान कर दें बिस्मिल्लाह रहमान रहीम जी
[0:45]मेरा नाम नजीबुल हसन जैदी है और मेरा ताल्लुक हिंदुस्तान से है
[0:50]इस वक्त में मस्जिद ईरानिया मुंबई में इमाम जमात की खिदमत को
[0:54]अंजाम दे रहा हूं और मेरी तालीम हौज इलमिया कुम से हो
[0:57]मौलाना साहब सबसे पहला सवाल यह है कि इंसान के लिए सबसे
[0:59]बड़ा गुनाह क्या है और वो गुनाह कौन सा है देखिए कुछ
[1:03]ऐसे गुनाह हैं जिसे कुरान करीम ने बयान किया है कि परवरदिगार
[1:08]उनको माफ नहीं करेगा उनमें से एक बड़ा बड़ा गुनाह शिर्क है
[1:10]शिर्क के बाद जुल्म को एक बड़े गुनाह के तौर पर पेश
[1:15]किया है इसी के जमरे में आता है इंसान का अल्लाह से
[1:19]मायूस हो जाना मायूसी एक बहुत बड़ा गुनाह है ऐसा गुनाह है
[1:22]कि जिस पर गोया आप खुदा की रहमत को जेरे सवाल लेकर
[1:27]जा रहे हैं अब कुरान करीम में आप देखें परवरदिगार ने वाज
[1:32]किया है अल्लाह ऐलान कर रहा है ये बहुत काबिले गौर मरहला
[1:34]है हम इस बात के कायल हैं कि वो जो कुछ कहता
[1:38]है वो करता है और वह सादिक है साद वाद है तो
[1:42]एक तरफ उसका वाज ऐलान है दूसरी तरफ उसके मुकाबले पर मायूसी
[1:47]है तो यह इसका मतलब यह है कि ईमान के दर्जे में
[1:48]हम मुकम्मल नहीं है कुरान करीम में सूर जुमर में 53 नंबर
[1:53]की आयत है इरशाद होता है कुल बाद असर लात रला इल्ला
[2:01]ऐ मेरे हबीब उन लोगों से कह दीजिए के जो गुनहगार हैं
[2:07]उनसे कुराने करीम उनको एक उम्मीद दिला रहे हैं उनसे कह दीजिए
[2:11]के जिन लोगों ने उन्होंने राफ किया ज्यादती की अपने नफ्स के
[2:14]साथ में ज्यादती की और इस बुनियाद के ऊपर वह गुनाह के
[2:18]दलदल में धस चले गए उनसे कह दीजिए लालाला कि हरगिज अल्लाह
[2:23]की रहमत से मायूस ना हो इसलिए कि परवरदिगार तमाम गुनाहों को
[2:26]बख्शने वाला है तो एक तरफ परवरदिगार लान कर रहा है कि
[2:29]हम तमाम गुनाहों को बख्शने वाले उसके बाद भी अगर इंसान मायूस
[2:32]हो जा रहा है इसका मतलब उसे अल्लाह के वादे के ऊपर
[2:34]यकीन नहीं है तबार नहीं है यह वह मरहला है कि जो
[2:39]मायूसी का मरहला है यह एक बड़ा गुनाह है और परवरदिगार के
[2:45]हुजूर गोया एक तरह की जसारत है कि जहां पर हम गुनाह
[2:47]करने के बाद ये सोचे कि परवरदिगार इसे माफ नहीं करेगा उसके
[2:52]अलावा फिर इसके अपनी अमली जिंदगी में असरात होते हैं खुदा ने
[2:56]कहा है कि हम हर गुनाह को तुम्हारे बख्श देंगे इसका मतलब
[2:58]यह है कि उम्मीद तुम लगाए रखो परवरदिगार से उम्मीद के ऊपर
[3:03]ही दुनिया कायम है मुस्तकबिल के खतूमदा से क्या है कि शैतान
[3:19]इंसान को बार-बार आके मायूसी के दलदल में धंसा चाहता है कि
[3:25]जहां पर आने के बाद अब इंसान सोचे कि अब कुछ भी
[3:25]नहीं हो सकता है जबकि परवरदिगार ने कहा है कि अगर तुम
[3:29]मेरी तरफ दो कदम बढ़ाओ ग मैं तुम्हारी तरफ मफू रिवायत यह
[3:33]है कि 10 कदम बढ़ाऊ तुम मेरी तरफ चल कर आओगे मैं
[3:35]तुम्हारी तरफ दौड़ कर आऊंगा तो जो परवरदिगार इस तरह अपने बंदों
[3:40]को अपनी तरफ मुतजेंस [संगीत] के यह जो मुझे पीठ दिखाकर मुझसे
[3:54]मुंह मोड़ लेने वाले अफराद जो मेरे दरवाजे से वापस पलट के
[3:56]जा रहे हैं और मेरी तरफ नहीं देख रहे हैं काश यह
[4:00]पीठ दिखाने वाले जानले कि मैं उनकी तरफ कितना मुश्ताक हूं लमा
[4:05]त शौका तो शौक मुलाकात में दम तोड़ देते इसका मतलब यह
[4:08]है कि रहमत परवरदिगार जो है वह इंसान को मुतजेंस गुनाह किया
[4:17]वो बहुत छोटा है रहमत परवरदिगार बहुत वसी है मिसाल ऐसी है
[4:22]कि एक कतरा तमाम इंसान के जितने भी गुनाह है एक कतरे
[4:24]की तरह है एक समंदर के मुकाबले पर परवरदिगार की रहमत समंदर
[4:28]की तरह है और रहमत के सिलस ले से है कि उसकी
[4:32]रहमत उसके गजब पर गालिब है मौलाना साहब अब यहां पर एक
[4:34]ये सवाल पैदा होता है कि इंसान जब ये चीजों से गुजरता
[4:38]है तो उसके अंदर एक सवाल पैदा होता है कि अब वो
[4:42]किसकी बात को सुने अल्लाह की बात को माने या फिर शैतान
[4:46]की बात को माने बिल्कुल ऐसा अक्सर होता है कि जब इंसान
[4:48]गुनाह करता है तो गुनाह करते करते उसके वजूद के अंदर एक
[4:53]सियाह दायरा बनता जाता है एक मंजिल वो होती है कि उसका
[4:54]पूरा दिल स्याह हो जाता है और यह वो मंजिल होती है
[4:57]जब इंसान का दिल मुर्दा हो जाता है तो इंसान को कोशिश
[5:00]ये करना चाहिए कि उसका दिल मुर्दा ना हो जैसे ही दिल
[5:03]मुर्दा हुआ शैतान उसके ऊपर हावी हो जाता है अब शैतान किस
[5:05]तरह से दिल की मौत की तरफ लेकर जाता है वो देखें
[5:09]कि अभी तो तुम्हारी कोई जिंदगी का आगाज ही नहीं हुआ है
[5:13]अभी तो जवानी है तुम्हारी अभी तुम इंजॉय करो वक्त आएगा तो
[5:16]इबादत भी कर लेना यानी इस तरह से अगर वो शैतान इंसान
[5:20]को यूं कहे कि अल्लाह की राह से बिल्कुल हट जाओ तो
[5:24]इंसान बहरहाल किसी तरह से आ जाएगा उसके अकल शूर और उसकी
[5:26]फिक्र में अगर उस हिदायत का नूर जरा भी चमकेगा तो वो
[5:29]शैतान के रास्ते से हट जाएगा लेकिन शैतान किस तरह से कहता
[5:33]है कि यह तो तुम्हारा अभी खेलकूद का मौका है यह जमाना
[5:35]तो एंजॉय करने का है अभी तो तुम्हारी शादी भी नहीं हुई
[5:39]है तुम 20 25 के हो ये कोई एज नहीं होती है
[5:42]40 के बाद ठीक है तुम नमाज पढ़ लेना मस्जिद में देखना
[5:45]बहुत सारे लोग हैं मस्जिद में उनको देखो ये बहका का अंदाज
[5:47]है उसके कहां जवान लोग दिखते हैं जवान लोग कहां है मार्केट
[5:51]में है इधर हैं उधर हैं क्लबों में है खेलकूद कर रहे
[5:55]हैं एंजॉय कर रहे हैं तुम भी उसके बाद जब तुम्हारी एज
[5:56]आएगी तो तुम भी आ जाना यही चीज शैतान जब डालता है
[6:00]है तो आहिस्ता आहिस्ता आहिस्ता इंसान उस मंजिल पर पहुंचता है कि
[6:03]वो शैतान की राह पर कदम रख देता है और गमज हो
[6:06]जाता है फिर वो शैतान उसके ऊपर जब हावी हो जाता है
[6:09]तो फिर उसे अपने साथ ले जाता है फिर उसे तौबा की
[6:10]तौफीक भी फिर नहीं मिल पाती और फिर उस मंजिल पर इंसान
[6:13]पहुंचता है कि फिर सोचता है कि अब तो सब कुछ हमारे
[6:16]हाथ से चला गया और शैतान का अपना काम हो जाता है
[6:20]लिहाजा इंसान को देखना ये चाहिए कि एक तरफ शैतान उसको दावत
[6:21]दे रहा है एक तरफ परवरदिगार उसे बुला रहा है परवरदिगार उसे
[6:25]बुला रहा है और इसीलिए रिवायत में है कि वो इबादत जो
[6:28]एक इंसान जवानी के आलम में करता है परवरदिगार को महबूब है
[6:30]ता सलाम ने खुद पैगंबर इस्लाम सला वसल्लम ने जवानों के सिलसिले
[6:36]से फरमाया मुझे वो जवान ज्यादा महबूब है कि जो अपने अहलो
[6:39]अयाल के लिए हलाल कमाई की तरफ बढ़ रहा है यानी उसे
[6:44]पैगंबर ने इबादत के उनवान से पेश किया है अलकाया मुजाहि सबीला
[6:48]इसी तरफ लाने की कोशिश की है कि एक जवान एक जद्दोजहद
[6:52]करे एक कोशिश करे और एक जवान को जिम्मेदार होना चाहिए तो
[6:54]शैतान बार-बार उसको दूसरे अंदाज से लेकर जाता है लेकिन अगर हम
[6:57]परवरदिगार की जानिब वज्जे रहे और रहमान और शैतान के रास्तों के
[7:03]दरमियान के फर्क को महसूस करें तो हम खुदा की बात को
[7:07]सुनेंगे कि परवरदिगार आवाज देता है कि तुमने अगर गुनाह कर भी
[7:09]लिया है तो कोई बात नहीं मायूस ना हो हमारी तरफ आगे
[7:12]बढ़ो शैतान कहता है कि नहीं अभी तुम्हारे पास वक्त है फिर
[7:13]आगे का फिर इंसान के पास वक्त नहीं रहता है तो ऐसी
[7:17]सूरत में कंफ्यूज नहीं होना चाहिए देखना ये चाहिए कि परवरदिगार उसे
[7:19]किस तरफ दावत दे रहा है जजाकल्लाह मौलाना साहब अब यहां पर
[7:24]एक सवाल ये पैदा होता है कि मसल हम समझ गए कि
[7:27]खुदा किस तरह से इंसान को हिदायत देता है और शैतान किस
[7:28]तरह से इंसान को फरेब देता है लेकिन वो सबसे बड़ा हरबा
[7:33]जो शैतान का है वो क्या है कि जिससे इंसान को वो
[7:37]मायूसी में डालता है शैतान खुद इंसान के जो गुनाह हैं उन
[7:40]गुनाहों को बार-बार उसकी आंखों के सामने लेके आता है अब क्या
[7:44]होगा तुमने तो नमाज भी नहीं पढ़ी तुमने तो रोजा भी नहीं
[7:47]रखा तुमने तो अल्लाह की इतनी सारी नाफरमानी की है इतने गुनाह
[7:49]किए हैं तुमसे झूठ नहीं छूटा है गीबत तुमने गीबत की है
[7:53]तोहमत तुमने लगाई हैं इल्जाम तराश आं तुमने की हैं अल्लाह की
[7:54]राह से हटकर तुम चले हो तुमने फला जगह पे जुल्म किया
[7:58]वो बार-बार बार-बार उसके जहन में लेके आता है तुम ये गुनाह
[7:59]करते रहे हो इस गुनाह के बाद भी तुम सोच रहे हो
[8:02]कि कुछ हो जाएगा तुम्हारा कुछ भी नहीं हो सकता है तो
[8:05]वो इसकी तरफ मायूसी की तरफ इसलिए लेके आता है कि फिर
[8:08]इंसान हाथ पैर डाल दें आप फर्ज करें कि एक शख्स है
[8:09]कि जो मिसाल के तौर पर दरिया में डूब रहा है हाथ
[8:12]पैर नहीं मारेगा तो नीचे चलता ही चला जाएगा और वो दरिया
[8:16]में गर्क हो जाएगा लेकिन एक शख्स वो है कि जो दूर-दूर
[8:18]तक उसे कोई नजर नहीं आ रहा लेकिन हाथ पैर मार रहा
[8:20]है हो सकता है कोई दूर से हाथ पैर मारते हुए उसे
[8:23]देख ले सहारा दे दे शैतान क्या चाहता है कि गुनाहों के
[8:27]दरिया में इंसान को इस तरह से ले आके गर्क कर दे
[8:30]कि वो सोचे कि हमारा नहीं हो सकता है और वो उम्मीद
[8:31]कि जो इंसान खुदा से लगाकर कामयाबी तक पहुंच सकता है उम्मीद
[8:36]इंसान से छीन लेता है शैतान अब इंसान के जहन में आता
[8:39]है कि इतने गुनाह हमने कर ही लिए हैं अब क्या फायदा
[8:40]जहन्नम में तो जाना ही है हमें जलना तो है ही है
[8:43]हमें तो अब हम मजे से एंजॉय करें जो चाहे करना है
[8:46]करें जबकि इंसान भूल जाता है कि इस मंजिल पर तौबा है
[8:49]और हर एक मंजिल पर हर गुनाह के बाद परवरदिगार ने तौबा
[8:50]का दरवाजा कहीं बंद नहीं किया है वो इंतजार कर रहा है
[8:54]कि बंदा वापस पलट आए तो हमारे लिए जरूरी है कि हम
[8:57]समझे कि मायूसी कितना बड़ा गुनाह है और परवरदिगार से उम्मीद का
[9:00]दामन कभी ना छोड़े मौलाना साहब बस ये आखरी सवाल है कि
[9:05]इंसान किस तरह से मायूसी को खत्म करे देखिए मायूसी को हरकत
[9:08]के जरिए से उम्मीद के जरिए से खत्म किया जा सकता है
[9:12]हम जिस दौर में जी रहे हैं यह असर असरे इंतजार है
[9:17]हम एक मुंजी बशियन साफ को कायम करेगा यमला कमाम जलरा जब
[9:24]हम उसका इंतजार कर रहे हैं कि वह इस जुल्म सितम से
[9:29]पटी हुई दुनिया को निजात दिलाएगा परचम अदालत दुनिया में लहराएगा और
[9:32]हम चाहते हैं कि हम उसकी फौज का एक हिस्सा हो तो
[9:36]इस असरे इंतजार में अब हमारे लिए जरूरी है कि उम्मीद का
[9:38]दामन हाथ से ना छोड़े इसलिए कि हम उस लश्कर का हिस्सा
[9:42]हैं जो लश्कर इमाम जमान है और वो जो आ रहा है
[9:45]मुंजी बशरी जो हमारा इमाम है जो हुज्जत खुदा है हम उसके
[9:46]लिए दुआ कर रहे हैं तो वो जो आ रहा है वो
[9:48]दुनिया में उम्मीद जगाने के लिए आ रहा है वो दुनिया की
[9:53]उम्मीद है वो जुल्म और सितम की चक्की में पिसती हुई इंसानियत
[9:59]की उम्मीद है तो यह अजीब सी बात हो जाएगी ना एक
[10:00]ताजाद हो जाएगा कि हम उसके मानने वाले और उसके पैरो हैं
[10:04]जो दुनिया में शम उम्मीद जलाने के लिए आ रहा है और
[10:08]हम खुद ना उम्मीद हो गए हम खुद मायूस हो गए तो
[10:11]इसलिए जरूरी है हमारे लिए जरूरी है कि अपने उम्मीदों के चिरागों
[10:14]को गुल ना होने दें और पेशे नजर रखें अपने कि नुसरत
[10:18]खुदा है और सबसे बड़ी बात ये कि हमारे लिए परवरदिगार ने
[10:21]तौबे के दरवाजे को बंद नहीं किया है तौबा का दरवाजा खुला
[10:25]हुआ है और हर एक मंजिल पर हर एक गुनाह के बाद
[10:28]अगर इंसान खुद पशेमानी उसके वजूद का हिस्सा बन जा जाती तो
[10:30]यही तौबा है अदम तबन यही नदा मत जो है वो तौबा
[10:33]है अब ये कोशिश ये करना चाहिए कि बस एक रस्मी चीज
[10:35]ना हो जाए कि ब थोड़ी सी पशेमानी हुई और फिर यानी
[10:38]वाक दिल से अगर इंसान एक बार पशेमानी हो गया तो उसके
[10:40]सामने फिर उम्मीदों के चिराग रोशन है और हमारे पेश नजर फिर
[10:44]ये भी होना चाहिए कि हमारे अम ताहिरी मुस्लाम उनसे तवस्सूल ये
[10:46]बहुत अहम है तव्स बहुत बड़ी चीज है जो उम्मीद के जगाने
[10:50]का सबब है हम मजरात मुकद्दसा पर हम जाते हैं मकामा मुकद्दसा
[10:53]में हम खास तौर पर सैद शोहदा अ सलातो सलाम के हरम
[10:57]में हरम में हजरत अबुल फजल अब्बास बैनल हरमैन नजफ सामरा ये
[11:01]सारी वो जगह हैं कि जहां पर ये गोया हरम नहीं है
[11:05]ये उम्मीदों के सूरज हैं जो जगमगा रहे हैं करीम अहले बैत
[11:07]का जवार है इमाम रजा अलसलाम का तो यहां पर जाएं परवरदिगार
[11:12]ने खुद कहा है त वसीला उसकी जानिब अगर आप हम जा
[11:15]रहे हैं तो वसीले के जरिए से जाए तो यहां पर जाने
[11:16]के बाद हम इनसे एक अहद पैमान करें कि मौला हम आपकी
[11:20]बारगाह में आए हैं आप परवरदिगार से नजदीक हैं हमने गुनाह किए
[11:24]अब हम इस तरा के साथ आए हैं कि हमसे गुनाह हुआ
[11:25]है लेकिन आगे का रास्ता हम आपकी मदद के बगैर आपके तवस्सूल
[11:29]के बगैर हम तय नहीं कर सकते लिहाजा इनसे अगर हम तवस्सूल
[11:33]करके आगे बढ़ेंगे तो परवरदिगार भी हमारे गुनाहों को माफ कर देगा
[11:37]जैसा कि हमारे पेशे नजर कर्बला है कितना बड़ा गुनाह होर ने
[11:39]किया था जो र ने किया था वो तो हमने नहीं किया
[11:41]है कि खुदान खस्ता लजा में फरस पर हमने हाथ डाल दिया
[11:44]हो मौला को हम कर्बला लेक आ गए हो मजबूर कर दिया
[11:47]हो जिसकी वजह से जनाबे सकीना प्यासी रही जिसके बा वजह से
[11:50]नन्ना शीर खार किस तरीके से दर्दनाक अंदाज में शहीद हुआ तो
[11:54]ये सारी चीजें हैं लेकिन उसके बावजूद भी सैयद शोहदा अगर हुर
[11:56]को सिर्फ इस बुनियाद के ऊपर के हुर के वजूद के अंदर
[12:01]एक जजबा आया था तौबा का आवाज दी ह तौबा तरा किया
[12:04]था उसने अपने गुनाह का इसका मतलब यह है कि अगर एक
[12:05]इंसान एक मंजिल पर अपने गुनाहों का तरा करता है तो इमाम
[12:10]वक्त उसके लिए सहारा बन जाता है यकीनन हमारे सामने भी तारी
[12:13]सलाम है हम अपने गुनाहों के तरा के साथ इनके हुजूर जाए
[12:15]इनके तस्सल के साथ परवरदिगार की बारगाह में हाजिर हूं परवरदिगार यकीनन
[12:18]हमारे गुनाहों को माफ करेगा इसलिए खुद उसने लान किया हैबा जमीया
[12:24]परवरदिगार तुम्हारे तमाम गुनाहों को बख्शने वाला है अल्लाह की रहमत से
[12:27]मायूस ना हो बहुत-बहुत शुक्रिया मौलाना साहब हम खुदा मुताल से यही
[12:31]दुआ करते हैं कि खुदा वंदे मुताल हमें मायूसी जैसे गुनाह से
[12:33]दूर रख और हमें हमेशा हिदायत की राह पर गामजीन साहब आपने
[12:38]अपना वक्त दिया जी इंशाल्लाह आपका भी मैं शुक्र गुजार हूं कि
[12:40]आपने मौका दिया इस प्लेटफार्म से परवरदिगार की बारगाह में दुआ है
[12:45]कि मालिक हम सब की तौफीक में इजाफा फरमाए और हम सब
[12:47]इस उम्मीद के साथ आगे बढ़े कि इमाम जमाना के लश्कर में
[12:52]हम शामिल हो सके इंशा अल्लाह [संगीत]
0 Comments
sort Sort By
- Top Comments
- Latest comments
Up next
7 Views · 24/11/14
8 Views · 23/01/17
