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Ahkam | H.I. Rajab Ali Bangash
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Record date: 10 Dec 2023 - احکام الہی
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
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Transcript
[0:12]अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन अल्हम्दुलिल्लाह लजी कमा हुआ अहलो अल्हम्दुलिल्लाह लदी जालना मिनल
[0:29]मतम सकीना विलायत अलीना अबी तालिब सलातो वसलाम अलल बदल माद रसूल
[0:38]मुसद दद अल मुस्तफा अल अमजद हबीब ना व हबीब इलाह आलमीन
[0:47]अल्जी सुमिया फ समा ब अहमद फल अल कासम [संगीत] मोहम्मद [संगीत]
[1:04]वाला आ तबन रीनल मासूमीन अल मुकर मीनल मुंत जबीन अल मुंत
[1:12]बनल मजल मीनल मया मन रहमतुल्लाही व बरकातहू आला शया व मुहि
[1:22]वताब वलाला आला मुनक फ रासक मिनल आना इला कियाम य मदीन
[1:41]अम्मा बाद फ काल अल्लाह तबारक ताला फ महकम किताब हकीम व
[1:46]फरका मजीद लहु साद बिस्मिल्ला रहमान रहीम इनदीना ल्लाल इस्लाम व काल
[1:57]अल्लाह तबारक ताला मकाम आखर फतला दन फय बला मिन हु फखर
[2:07]मिनल रीन सलवाद बज मोहम्मद वाल मोहम्मद पर माशाल्लाह ला हला ला
[2:20]कुवता इल्ला बिल्लाह अलाली अजम परवरदिगार आलम अपनी ला रब और बेब
[2:27]किताब कुरान मजीद फुरकान हमीद में इरशाद फरमाता है इन दना इंदल्लाह
[2:36]इस्लाम बेशक खुदा का पसंदीदा दीन अगर कोई है तो वह इस्लाम
[2:46]है अयतल इस्लाम दीनान सस जो इस्लाम को छोड़कर किसी और दिन
[2:53]पर अमल करेगा किसी और दिन के हवाले से आमाल पेश करेगा
[2:59]फलक बल में हरगिज हरगिज उसे वह कबूल नहीं किया जाएंगे वहु
[3:03]फखर मरीन और आखरत में व ख सारा उठाने वालों में से
[3:09]होगा परवरदिगार इस आय मजीदा में दीन की पसंदी दगी का इजहार
[3:15]करता है कि खुदा के नजदीक खुदा का पसंदीदा मुंतखाब किया हुआ
[3:21]कोई दीन है तो वह इस्लाम है देखिए हम भी बा चीज
[3:30]पसंद करते हैं घर पसंद करते हैं गाड़ी खरीदनी तो गाड़ी का
[3:37]इंतखाब करते हैं पसंद करते हैं अपनी गुंजाइश को देखकर और अपनी
[3:40]ख्वाहिश को देखकर अपनी जरूरत को देखकर घर भी हम ऐसे ही
[3:45]पसंद करते हैं अपनी गुंजाइश अपनी ख्वाहिश अपनी जरूरत को देखते हुए
[3:50]फिर इलाका देखकर यही सूरते हाल रिश्तों में है रिश्ते का भी
[3:58]इंतखाब करते हैं ढूंढते हैं हम इन चीजों का इंतखाब करते उनको
[4:07]पसंद करते हैं फिर उसको खरीदते हैं परवरदिगार कुरान में इरशाद फरमाता
[4:15]है कि इन दन बेशक दन अगर है इंदल्लाह अल्ला के निज
[4:18]अल इस्लाम इस्लाम है यानी खुदा ने दीन को अगर पसंद किया
[4:25]तो वह इस्लाम है सवाल यह है कि अल्लाह ने जो दीन
[4:32]पसंद किया है इस्लाम क्या खुदा दीन का मोहताज है भाई हम
[4:35]पसंद करते हैं क्योंकि हमें तो जरूरत है उसकी घर हो गाड़ी
[4:42]हो रिश्ता हो जमीन हो हमें तो जरूरत इसकी क्या खुदा को
[4:46]दीन की जरूरत है क्या खुदा दीन का मोहताज है अल्लाह समद
[4:52]आप सूर तौहीद में अल्लाह बे नियाज है अल्लाह को किसी चीज
[4:59]की जरूरत नहीं है ना किसी का मोहताज है उसे दन की
[5:00]जरूरत नहीं है खुदा दीन का मोहताज ही नहीं है तो फिर
[5:07]खुदा ने दन क्यों पसंद किया जवाब आप बाजार में जाते हैं
[5:15]कभी आप चीज पसंद करते हैं लेकिन अपने लिए पसंद करते हैं
[5:19]मर्दाना कपड़े हो मर्दाना जूते हो अपने लिए पसंद करते हैं लेकिन
[5:26]कभी कभार आप बाजार में जाते हैं तो जनाना कपड़े का इंतखाब
[5:29]करते हैं जो खवातीन चाद रोड़ती उसका इंतखाब करते हैं जनाना चप्पलों
[5:37]का इंतखाब करते क्यों क्या आपको इसकी जरूरत है जरूरत आपकी नहीं
[5:41]है जरूरत घर में बैठी हुई जौजा की या बेटी की या
[5:48]मां की है पसंद आप कर रहे हैं लेकिन अपने लिए नहीं
[5:51]किसी के लिए तो खुदा ने दीन इस्लाम का जो इंतखाब किया
[5:57]इसलिए नहीं कि खुदा को इसकी जरूरत है खुदा के ब ब
[6:01]को जरूरत है अल्लाह ने इस दिन को अगर पसंद किया तो
[6:03]बंदों के लिए पसंद किया क्या बंदे अपने लिए दीन का इंतखाब
[6:10]नहीं कर सकते क्या इनम इतनी सेंस नहीं है बिल्कुल नहीं है
[6:21]अगर इतनी सेंस इतनी अकल होती कि अपने दन का इंतखाब कर
[6:27]सकते होते आज इतना इलाफ ना होता आज इतना साहिबे अकल इंसान
[6:35]होकर इतना वहशी ना बनता इसराइल आपके सामने आज इतना साहिबे अकल
[6:42]साहिब शर इंसान होकर इतना जालिम ना बनता नमरूद फिरन शद्दाद की
[6:46]तरह खुदाई का दावा ना कर बैठता जानते बुझते पता भी के
[6:54]गलत है फिर भी कितने इंसान है जो गलत काम करते हैं
[6:57]हालांकि अकल श उसे पता है कि यह गलत है मस एक
[7:02]चोर चोरी करता है क्या वह नहीं समझता कि यह गलत है
[7:07]उसे मालूम है एक डाकू डाका मारता है जमीन किसी से छीन
[7:13]है गस करता है कोई चीज मालूम है उसे यह गलत है
[7:18]फिर भी कर रहा है तो ऐसे साहिब कल साब शरो ने
[7:25]क फायदा क्या है अभी तो अल्लाह ने हमारे लिए दीन का
[7:30]इंतखाब किया उसके बावजूद भी इंसान इतना गुमराह हो जाता है अगर
[7:39]खुदा इंसान को आजाद छोड़ दे तो अपने लिए जो दिन पसंद
[7:42]करना चाहो पता नहीं इंसान का क्या आलम होता मासरे का क्या
[7:48]रंग होता फिर तो शायद कोई चीज महफूज भी ना होती ना
[7:53]किसी का माल महफूज होता ना किसी की जान महफूज होती ना
[7:55]किसी की इज्जत महफूज होती यह तो अभी अल्लाह ने फिर भी
[7:59]एक दिन का इब किया है तो अल्लाह ने इस दन का
[8:04]अगर इंतखाब किया तो अपने लिए नहीं अपने बंदों के लिए किया
[8:06]है फिर अल्लाह ने इस दीन को अपने बंदों तक पहुंचाने के
[8:14]लिए बीच में कुछ अफराद को रखा जिसको हम मासूम कहते हैं
[8:16]मासूम या नबी होता है या इमाम होता है जो कि खालिक
[8:21]और मखलूक के दरमियान रबत का काम देता है कनेक्टर है मखलूक
[8:29]को खालिक के लिए और खालिक अपने ए कामात इनके जरिए मखलूक
[8:36]तक पहुंचाते हैं और य उसूल दुनिया का भी आप देखि बड़ी
[8:38]बड़ी कंपनिया बड़ी बड़ी फैक्ट्रियां है बड़े बड़े इदार तो जो ऊपर
[8:45]के अफराद होते हैं वह नीचे लेबर के साथ बात बात नहीं
[8:47]करते हैं किस किस की बात में किस किस की सुनेंगे किसके
[8:51]मसाइल बल्कि बीच में कुछ अफराद होते हैं जो नीचे वालों के
[8:56]मसाइल ऊपर पेश करते हैं ऊपर वाले अपने अह कामात उनके जरिए
[8:58]नीचे डिलीवर करते हैं तो यह एक रूल है एक उसूल है
[9:04]अल्लाह ने भी इसी को अपनाया है अपने अ कामात को बंदों
[9:09]तक डिलीवर करने के लिए नबूवत और इमामत को बीच में रखा
[9:11]है और बंदों के मसाइल इनके सदके में खुदा पूरे करता रहता
[9:17]है तो दीन को अल्लाह ने मुंतखाब किया और उस दीन को
[9:23]जब दुनिया में भेजा नबूवत और इमामत के जरिए नबूवत के जरिए
[9:25]दीन को भेजा इमामत के जरिए दीन की हिफाजत की और ता
[9:31]कयाम कयामत इसके जरिए दन की हिफाजत करता रहेगा दन क्या है
[9:35]दन है निजाम जिंदगी द सिस्टम ऑफ लाइफ यह मैं जिंदगी कैसे
[9:41]गुजार इस दुनिया में आने के बाद मैं जिंदगी कैसे गुजार उसके
[9:47]लिए कुछ कवानी चाहिए कुछ उसूल जवाबत होने चाहिए मसलन आप कोई
[9:56]मशीनरी खरीदते हैं चाहे जनरेटर हो चाहे गाड़ी हो चाहे ट्रेसर की
[10:01]मशीन हो चाहे वह प्लास्टिक के बर्तन बनाने वाली मशीन हो चाहे
[10:08]प्रिंटिंग प्रेस की कोई मशीन हो मुख्तलिफ मशीने मुख्तलिफ किस्में आपने मार्केट
[10:19]से खरीदा आप उसे अपनी मर्जी से चला सकते हैं मस आपने
[10:26]गाड़ी खरीदी गाड़ी आपने खरीद ली आपकी मिलकियत हो गई क्या आप
[10:30]उसे अपनी मर्जी से चला सकते हैं आप कह कि जनाब मैं
[10:36]गाड़ी को एक्सलेटर के जरिए रोकूंगा मैंने गाड़ी को रोकने के लिए
[10:42]ब्रेक नहीं दबाना एक्सलेटर रोक मेरी गाड़ी है मेरी मर्जी मैंने गाड़ी
[10:48]को आगे बढ़ाना है तो मैं ब्रेक के जरिए आगे बढ़ाऊ एक्सलेटर
[10:54]के जरिए नहीं इज इट पॉसिबल मुमकिन नहीं है आप गाड़ी के
[11:00]मालिक जरूर आपको उसी उसूल के मुताबिक चलाना पड़ेगा जो उसूल जो
[11:06]कवानी कंपनी ने इस मशीन के लिए वजा किए उस उसूल के
[11:12]मुताबिक जब आप गाड़ी को चलाएंगे या उस मशीनरी को चलाएंगे चाहे
[11:17]व जनरेटर हो चाहे ेसर की मशीन हो प्रिंटिंग प्रेस की कोई
[11:20]मशीन हो तो वह मशीनरी सही चलेगी अगर आपने अपनी उस्ताद उसमें
[11:26]दिखाना शुरू कर दी तो उस मशीन का भी बेड़ा गर्ग होगा
[11:34]और हो सकता है कि साथ साथ में आपका भी काम हो
[11:35]जाए इसी तरीके से परवरदिगार ने जो बदन की मशीनरी हमें दी
[11:41]है यह एक मशीन है लेकिन यह गोश्त की है यह लोहे
[11:47]की नहीं है यह जो अल्लाह ने इस बदन जैसी एक मशीनरी
[11:51]अता की है अब इसको हम अपनी मर्जी से नहीं इस्तेमाल कर
[11:57]सकते अल्लाह ने इसके भी कुछ रूल्स रेगुलेशन बनाए कुछ रूल्स बनाए
[12:04]कुछ उसूल बनाए यह तुम्हारे हवाले बदन कर रहा हूं इसके कुछ
[12:09]उसूल है ऐसा नहीं है कि आप मोटरसाइकिल में पेट्रोल की जगह
[12:12]डीजल डाल चाहे कि में डीजल से चलाओ नहीं चलेगी इसी तरीके
[12:16]से यह अल्लाह ने बदन दिया है अब इसके अंदर कौन सा
[12:23]फ्यूल जाना चाहिए कौन सी चीज जिसके लिए सही है अल्लाह ने
[12:27]जो चीज इसके लिए सही है उसको हलाल करार दिया और जो
[12:29]चीज नुकसान है इस बदन के लिए अल्लाह ने उसको हराम करार
[12:34]दिया हो सकता है तुम्ह वो अच्छी लगती हो लेकिन व इसके
[12:38]लिए नुकसान दे अल्लाह ने उन चीजों को हराम करार दिया यह
[12:43]बदन की मशीनरी के लिए व चीज सही नहीं है शराब हो
[12:49]या हराम गोश जानवरों का गोश हो यह सारी चीजें हो सकता
[12:57]है आपको अच्छी लग रही हो किसी को लेकिन इस बदन के
[13:02]बारे में हम और आप ज्यादा नहीं जानते हैं इसके बारे में
[13:07]वही ज्यादा जानते जिसने इसको पैदा किया है जैसे एक मशीनरी आप
[13:12]लेते तो उस मशीनरी आपने खरीदी आपकी मिल्कियत हो गई जैसे यह
[13:15]बदन आपकी मिलकियत में अल्लाह ने दिया है लेकिन उस मशीनरी के
[13:19]बारे में आप ज्यादा नहीं जानते जिस फैक्ट्री ने जिस कंपनी ने
[13:21]मशीनरी बनाई है वो उसके बारे में ज्यादा जानता है वो उसके
[13:27]रूल लेशन आपको पेपर में देता है कि भा इसके उसूल है
[13:32]इस मशीनरी को यह जो बदन है अल्लाह ने इसको बनाया है
[13:36]हम इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं वो उसके बारे में
[13:39]ज्यादा जानता है इसीलिए उसने इस बदन को इस दुनिया में सही
[13:44]तरीके से चलाने के लिए कुछ रूल्स और रेगुलेशन का इंतखाब किया
[13:46]है कुछ उसूल जवाबत कवानी रखे हैं और उन कवानी को हम
[13:52]अकाम कहते हैं और यही अकाम इस दिन की शक्ल सूरत है
[13:56]निजाम हयात है मैंने इस दुनिया में इस बदन को कैसे च
[14:03]कैसे जिंदगी गुजारनी है और सिर्फ बदन ही नहीं मेरे इर्दगिर्द बहुत
[14:09]सी चीजें हैं एक तरफ खालिक है एक तरफ मखलूक है इनको
[14:14]भी देखना है जैसे आप गाड़ी आपकी है आप चलाते हैं लेकिन
[14:19]जब आप चलाते हैं तो रोड प आपने दूसरों को भी देखना
[14:23]है इर्दगिर्द जो आपके दूसरे लोग चल रहे हैं गाड़ियां चल रही
[14:28]हैं उनको भी देख के आपने चलना है तो अल्लाह ने यह
[14:30]बदन हमारी मिलकियत में दिया है कुछ इस हवाले से कुछ इर्ग
[14:35]रहने वाले इस हवाले से कुछ कवानी है इन कवानी को अल्लाह
[14:43]ने अकाम शरीयत का नाम दिया है जो कि न इस्लाम है
[14:48]जो कि दन है जो चीजें जरूरी थी अल्लाह ने उनको वाजिब
[14:52]करार दिया जो चीजें जरूरी तो नहीं थी बेहतर है अल्लाह ने
[14:58]उनको मुस्त करार दिया जो चीज नुकसान दे है उनको अल्लाह ने
[15:05]हराम करार दिया और जो चीजें नुकसान दे लेकिन कम नुकसान दे
[15:11]हैं अल्लाह ने उनको मकरूह करार दिया और जो ना पैदा मन
[15:14]ना नुकसान दे अल्लाह ने उसको मुबा करार दिया और यूं दीन
[15:19]के अकाम की पांच किस्में हो गई वाजिब मुस्ताहब हराम मकरूह और
[15:24]मुबा जिसे अकाम खमसा कहते पांच अकाम दन के तोय अल्लाह ने
[15:30]हमें जब यह हह कामात अल्लाह ने हमारे लिए लागू किए हैं
[15:35]तो इसलिए क्योंकि वह इसके बारे में इस बदन के बारे में
[15:37]ज्यादा बेहतर जानता है ना कि मैं और आप इसके बारे में
[15:43]ज्यादा जानते हैं अच्छा यह तो इस बदन के खाने पने के
[15:48]लहा से दूसरे लाहा से देखिए हम हमारा वजूद सिर्फ यह बदन
[15:52]नहीं है सिर्फ यह बदन हमारा वजूद नहीं है और हकीकत में
[15:55]देखा जाए तो हमारी हकीकत यह बदन नहीं है मैं जो आपको
[15:59]नजर आ रहा हूं मैं यह मैं नहीं हूं मैं इसके अंदर
[16:03]हूं आप जो मुझे नजर आ रहे हैं आप नहीं है य
[16:09]आपका बदन है आप नहीं है आप बदन के अंदर है आप
[16:15]क्या कहते हैं मेरा बदन मेरा लज मेरा कहां इस्तेमाल होता है
[16:22]मेरा घर मेरी गाड़ी इसका मतलब है घर अलग है आप आप
[16:31]घर नहीं है मेरी गाड़ी आप गाड़ी में बैठे हैं लेकिन आप
[16:38]गाड़ी नहीं है गाड़ी अलग है आप अलग इसी तरह मेरा बदन
[16:41]इसका मतलब बदन मैं नहीं हूं मैं इससे अलग हू यह बदन
[16:48]मेरी मिलकियत जरूर है लेकिन मैं नहीं हूं यह मैं इसके अंदर
[16:53]हूं जिसको हम रूह कहते हैं मैं वो हूं यह बदन तो
[17:02]मेरी पहचान है इसके जरिए पहचाना चाहता हूं ला मैं बदन नहीं
[17:07]हूं यही वजह है कि क्या कोई बाप अपने बेटे को जमीन
[17:13]में दफन करेगा कोई बेटा बाप को जमीन में दफन कर गा
[17:15]नहीं लेकिन क्यों दफन करता है इसलिए कि अब उसे पता है
[17:21]कि बाप का इंतकाल हो गया यह बदन बाप नहीं है बाप
[17:25]का है अब चकि बाप निकल चुका अब इस बदन को इज्जत
[17:32]एतराम से गुसल कफन देकर कब्र में दफना देते हैं इसी तरह
[17:36]बेटा यह बदन बेटे का है बेटा नहीं है बेटा इससे निकल
[17:42]चुका है तो असल हकीकत हमारी रूह है हमारी जो हकीकत है
[17:48]वह रूह है मैं रूह हूं मैं बदन नहीं हूं बदन मेरा
[17:55]है लेकिन मैं बदन नहीं हूं मैं इस बदन के अंदर हूं
[17:56]तो दन इस्लाम हमारी दोनों चीजों को देखता है दिन वही कामयाब
[18:04]है जो दोनों को देखे अगर कोई दिन इंसान के बदन का
[18:10]ख्याल रखे रूह का नहीं नाकाम दीन है कि जो मर्जी आए
[18:14]खाओ जो मर्जी आए पियो जो मर्जी आए करो बस तुम्हारा बदन
[18:21]खुश होना चाहिए जिसमें तुम्हारे बदन को मजा आए वो करो यह
[18:24]नाकाम दिन है अगर कोई दिन ऐसा है जिसमें रूह का ख्याल
[18:30]रखा जाए बदन का ख्याल ना रखा जाए के रोहनियत तियार कर
[18:35]लो जैसे बाज अदियार में रोह बानि त है वहां शादियां व
[18:45]नहीं करते जब शादिया नहीं करते तो फिर किसी और तरफ निकल
[18:51]जाते हैं वहां पे दूसरे आम अफराद जैसे वैसे जिंदगी नहीं गुजारते
[19:00]इनी नेमतों से इस्ते फादास अच्छी चीज खा सकते नहीं खाते अच्छी
[19:08]जिंदगी गुजार सकते नहीं गुजार सकते इधर उधर घूम फिर सकते हैं
[19:16]लेकिन नहीं घूमते फिरते रहबा नियत इख्तियार किए सिर्फ रूह ना अगर
[19:22]कोई दन सिर्फ रूह की बात करे बदन का ख्याल ना रखे
[19:27]वो भी नाकाम दन है दीन इस्लाम बदन और रू दोनों का
[19:35]ख्याल रखता है कुछ कामात बदन के लिहाज से जैसे खाने पने
[19:38]की चीजें यह हराम है य हलाल है यह जायज है या
[19:42]नाजायज है और कुछ चीज रूहानियत के लि से ताल्लुक रखती है
[19:48]जैसे इबादत नमाज नमाज से बदन का वह नहीं है नमाज हमारी
[19:53]हकीकत को फायदा देती है यानी रूह को फायदा देती है रोजा
[20:00]बजहर बदन को तकलीफ है लेकिन रूह को फायदा मिल रहा है
[20:09]हज बजहर बदन को तकलीफ है जाना पड़ता है आना पड़ता है
[20:14]एक उमरा करने के लिए भी तकरीबन तीन किलोमीटर 4 किलोमीटर चलना
[20:18]पड़ता है लेकिन रूह के लिए फायदा मंद है तो दिन वही
[20:26]कामयाब है जिसमें बदन का भी रखा गया हो जिसमें का भी
[20:33]ख्याल रखा गया हो और याद रखिए यह यह यह जो सुकून
[20:40]हम कहते ना के सुकून मिल जाना हमें इस का में बड़ा
[20:48]सुकून मिलता है यह सुकून कभी कभार क्या होता है के बदन
[20:51]तकलीफ में होता है लेकिन उस तकलीफ में हमें सुकून मिलता है
[20:57]राहत मिलती है मसलन आप जुलूस में जा रहे हैं अब जुलूस
[21:01]में आप निश्तर पार्क से निकले वो ईरानियन हाल तकरीबन 9 10
[21:05]किलोमीटर आप पैदल चले बदन तकलीफ में थकावट लेकिन जब घर आते
[21:12]हैं दिल को एक सुकून मिलता है मैं मैं अहले बैत की
[21:17]मोहब्बत में उनके जुलूस में उनकी याद ताजा करने के लिए जुलूस
[21:20]में गया तहज्जुद की नमाज अजान फजर से उठ रहे हैं सर्दी
[21:25]का मौसम है दिल नहीं चाह रहा गर हम बिस्तर छोड़ दें
[21:29]तकलीफ जहमत है बदन तकलीफ में है नींद खराब कर रहे हैं
[21:34]रात को वैसे ही पाक कराची वाले देर से सोते हैं कभी
[21:38]कभार घंटी लगाते हैं घंटी मोबाइल घंटी बजा बजा के थक जाता
[21:45]है हम नहीं उठ पाते अब यह उठना अजान फजर से एक
[21:51]घंटा पहले तहज्जुद के लिए तकलीफ है लेकिन इस तकलीफ में भी
[21:58]सुकून मिलता है कुछ चीजें ऐसी हैं जो सुकून सुकून का ताल्लुक
[22:00]बदन से नहीं है बदन हो सकता है तकलीफ में हो दिल
[22:05]को सुकून मिलता हो राहत मिलती हो और यकीनन जो रूहानी चीज
[22:15]को जिस चीज से सुकून मिलता है उसमें खुदा की खुशनूर होती
[22:21]है उसमें खुदा की रिजा होती है आप किसी की मदद करते
[22:25]हैं किसी को बचा रहे हैं उसके लिए आपको तकलीफ करना पड़
[22:31]रही है कोई बीमार हो आपने जल्दी जल्दी उठाकर हॉस्पिटल लेकर गए
[22:36]आपको तकलीफ हुई पैसे से मदद की आपका पैसा गया लेकिन दिल
[22:42]को सुकून मिल जाता है यानी पैसा आना यह सुकून का बायस
[22:50]नहीं होता बल्कि अल्लाह की राह में पैसा देने से दिल को
[22:56]सुकून मिलता है तो दीन इस्लाम सिर्फ आपके बदन को नहीं देखता
[22:59]व आपकी हकीकत आपकी रूह को देखता है और इस्लाम यह नहीं
[23:04]चाहता कि हम अपना बदन मनाए संवारे अगर इस्लाम बदन को संवारना
[23:11]चाहता होता तो इस्लाम फेशल का हुकम देता कि फेशल किया करो
[23:16]ताकि अच्छे नजर आओ इस्लाम अच्छी गिजा खाने और जनाब बीश को
[23:22]खाते रहो यह करते रहो आराम करते रहो ना इस्लाम आपकी हकीकत
[23:29]को उजागर करना चाहते हैं इस्लाम चाहता है कि आप तरक्की करें
[23:32]बदन नहीं बदन तो एक दिन खत्म हो जाएगा इसके जरिए आपने
[23:40]तरक्की करनी है और उस तरक्की के मनाजिल को तय करने के
[23:42]लिए अल्लाह ने दन इस्लाम को भेजा है कि इस दन पर
[23:47]तुम अमल करोगे दुनिया में तो तुम कामयाब होगे तुम्हारे मराती बुलंद
[23:55]होंगे और इस दन को हम कहां से ले दीन कहां है
[24:00]अल्लाह ने नबियों के जरिए भेजा हम आखरी नबी की उम्मत है
[24:06]हम दन कहां से ले पैगंबर की हदीस मैं तुम्हारे दरमियान दो
[24:12]कीमती चीजें छोड़े जा रहा हूं एक अल्लाह की किताब कुरान और
[24:16]एक मेरी इतर अहले बैत यह कभी जुदा नहीं होंगे हत्ता के
[24:23]य हज कौसर पर मुझ से आके मिलेंगे तो दन हमने लेना
[24:25]है पैगंबर से पैगंबर हमें दो मदर बता रहे दन के लिए
[24:34]एक कुरान है और एक अहले बैत है कुरान है अहले बैत
[24:38]अमल है कुरान अल्फाज है अहले बैत अमल है कुरान थ्योरी है
[24:48]अहले बैत प्रैक्टिकल है यानी अगर दन को लफ्जों में देखना तो
[24:52]कुरान को देखिए और अगर दन को मुजस्सम देखना है तो अहले
[25:00]बैत को देखिए यहां से आपको दीन समझ आएगा कि दीन क्या
[25:05]है इसलिए कि बहुत सी चीजें अल्फाज से नहीं समझी जा सकती
[25:09]एसासा एसासा अल्फाज से आप नहीं समझा सकते हैं हमदर्दी गम का
[25:22]एहसास करना किसी की मुश्किल का एहसास करना यह लफ्जों से नहीं
[25:29]समझा सकता है इसके लिए अमल की जरूरत है और वह अहले
[25:30]बैत ने करके दिखाया है अहले बैत अल सलाम दीन की अमली
[25:42]शक्लो सूरत उन्होंने हमें बताया कि कुरान अगर सिर्फ अकेला कुरान अकेला
[25:47]कुरान काफी नहीं है कुरान में नमाज का हुकम है नमाज का
[25:49]तरीका नहीं लिखा कि कैसे नमाज पढ़नी है कुरान में रोजे का
[25:56]हुकम तो है लेकिन रोजा रख का तरीका नहीं बताया है हज
[26:01]का हुकम है हज का तरीका नहीं बताया है जकात खुम्स का
[26:03]हुकम है तरीका नहीं बताया है कहां जाए इनके तरीके देखने के
[26:11]लिए मालूम करने के लिए अहले बैत इसलिए कुरान में सजदे का
[26:15]हुकम तो दे सकता है सजदा करके दिखा नहीं सकता और फिर
[26:23]सजदा करके दिखाना भी कोई भी दिखा ले लेकिन उस सजद में
[26:27]कैफियत क्या होनी चाहिए यह सिवाय अहले बैत के कोई नहीं बता
[26:32]सकता कि खुदा के य जब सजदा करें तो हमारी कैफियत क्या
[26:37]होनी चाहिए हमारी सोच क्या होनी चाहिए फिक्र क्या होनी चाहिए नमाज
[26:42]अदीस में है लेकिन नमाज में प्रैक्टिकल कैफियत क्या होनी चाहिए यह
[26:49]अहले बैत हमें बताते हैं मौला कानात के पांव में तीर लगा
[26:56]था मौला बर्दाश्त नहीं कर पाते थे जरा स हरकत करता उस
[26:59]दर्द को मौला बर्दाश्त नहीं कर पाते थे पैगंबर क या रसूलल्लाह
[27:04]क्या करें कहा जब अली नमाज पढ़ो तीर निकाल लो मौला कायनात
[27:08]नमाज पढ़ रहे तीर निकाल लिया गया अली को पता भी ना
[27:13]चला यह यह वो कैफियत थी नमाज की कहा कि आपको पता
[27:19]ना चला क्या मैं रब के साथ मसरूफ था गुफ्तगू करने में
[27:23]कलाम करने में मैं अल्लाह की इबादत में मसरूफ था मेरी पूरी
[27:26]तवज्जो अल्लाह की जानिब थी कभी कभार होता है आप खुद भी
[27:34]एक तरफ मुतजेंस की तरफ तवज्जो नहीं होती मस अभी आप यहां
[27:45]बैठे मुख्तलिफ आवाजें भी आती है बाहर से लेकिन आपकी तवज्जो मेरी
[27:50]जानिब है इसलिए आप दूसरी आवाजों आपको सुनाई नहीं दे रही हालांकि
[27:55]दूसरी आवाजें भी कभी गाड़ी गुजरती कभी हारान होता है कभी कुछ
[28:00]कभी कुछ कभी बच्चे वगैरा शरारत कर लेते कभी कोई बच्चे बातें
[28:03]कर लेते आवाज यह भी आती है लेकिन आप वह सुनाई नहीं
[28:07]दे रही क्योंकि आपकी तवज्जो मेरी जानिब है नमाज में तवज्जो अल्लाह
[28:14]की जानिब हो इतनी तवज्जो इतनी तवज्जो के दुनिया से हम बेपरवाह
[28:23]हो जाए और यह अहले बैत अल सलाम ने हमें बताया उन्होंने
[28:26]हमें सिखाया कि किस तरीके से की जाती है कैसे इबादत की
[28:31]जाती है अल्लाह ने हम पर जो इबादत वाजिब की है इबादत
[28:42]तीन तरह की हो सकती है एक इबादत व के वक्त ज्यादा
[28:47]हो इबादत थोड़ी हो या अल्ला इबादत के लिए वक्त ज्यादा दे
[28:50]टाइम पीरियड और इबादत थोड़ी हो म इबादत के लिए तीन घंटे
[28:57]दे जब इबादत के लिए जो वक्त दरकार है वह 10 15
[29:03]मिनट हो इट्स पॉसिबल यह मुमकिन है दूसरा जितना वक्त उतनी इबादत
[29:08]इस टाइम में इबादत करनी है और यह पूरा टाइम इबादत है
[29:13]यह नहीं है कि थोड़ा इबादत थोड़ी है और टाइम ज्यादा नहीं
[29:19]जितना टाइम उतनी इबादत तीसरा इबादत ज्यादा हो टाइम अल्लाह ने कम
[29:24]रखा हो मसल खुदा कोई ऐसी इबादत वाजिब कर दे कि वो
[29:29]इबादत अदा करने के लिए हमें तीन घंटे चाहिए हो और जबकि
[29:33]अल्लाह हमें एक घंटा दे दे तो जो तीसरी किस्म की इबादत
[29:40]है यह नामुमकिन है इसलिए अल्लाह ने ऐसी कोई इबादत वाजिब नहीं
[29:43]की के टाइम कम हो और इबादत को जितना टाइम दरकार हो
[29:52]वह ज्यादा हो इबादत तीन घंटे पर हो मुश्त मिल हो जबकि
[29:55]वो अल्लाह उसके लिए टाइम एक घंटा दे नामुमकिन है इसलिए अल्लाह
[30:01]ने ऐसी कोई इबादत वाजिब नहीं की बाकी दो किस्में हैं के
[30:05]जितना जितना टाइम उतनी इबादत दूसरा टाइम से ज्यादा इबादत कम हो
[30:11]टाइम से ज्यादा इबादत कम जैसे नमाज जोरेन का जवाल से शुरू
[30:16]होता है मगर बन तक यह जोहर असर की नमाज का टाइम
[30:21]है टाइम बहुत है लेकिन इबादत कितनी है कोई 15 मिनट में
[30:25]अदा हो जाती है 15 16 मिनट में अब ये 151 मिनट
[30:29]की इबादत के लिए टाइम बहुत ज्यादा दे लेकिन इबादत का टाइम
[30:31]कम है इबादत थोड़ी है वो इबादत की जितना टाइम उतनी इबादत
[30:37]वह कौन सी जैसे रोजा रोजा फजर की तुलू से मगरिब तक
[30:46]यह टाइम है और यह पूरा टाइम में इबादत और वह क्या
[30:49]है रोजा है जितना टाइम उतनी इबादत यानी ये नहीं कि इबादत
[30:57]थोड़ी और टाइम ज्यादा नहीं बल्कि जितना टाइम सूरज वो फजर फजर
[31:01]तुलू होने से लेकर मगरिब तक यह पूरा टाइम है और यह
[31:07]पूरा टाइम रोजा रखना है जितना टाइम उतनी इबादत तो यह दो
[31:09]किस्म की इबादत अल्लाह ने हम पर वाजिब की है और फिर
[31:14]देखिए के नमाज रोजा हज जकात यह वही बातें थ जो इंसान
[31:23]डायरेक्ट खुदा की करता है य वो इबादत जो अल्लाह इंसान डायरेक्ट
[31:27]अल्लाह की करता है कुछ चीज ऐसी जो इंसान अल्लाह के लिए
[31:37]नहीं करता अपने बंदों के साथ होता है लेकिन वह भी अल्लाह
[31:43]ने इबादत करार द अजर उसका अल्लाह देता है जैसे नमाज का
[31:48]अजर अल्ला देता है रोजे का अजर अल्ला देता है लेकिन नमाज
[31:49]अल्लाह के लिए रोजा अल्लाह के लिए हज अल्लाह की डायरेक इबादत
[31:56]है कुछ ऐसे अफल आमाल है कि हम करते आम इंसानों से
[31:58]लेकिन अल्लाह ने उसको भी इबादत करार दिया जैसे कोई मोहल्ले में
[32:06]मरीज है आप उसकी अयादत के लिए जाते हैं अब आप मरीज
[32:12]की अयादत कर रहे हैं अयादत इबादत नहीं आप अयादत कर रहे
[32:16]हैं इबादत नहीं कर रहे लेकिन इस अयादत को अल्लाह ने इबादत
[32:19]करार दिया महल्ले में किसी का इंतकाल हो गया आप जनाजे में
[32:27]जा रहे शत कर रहे हैं ताजि पेश कर रहे हैं अब
[32:30]यह आप उनको ताजि पेश कर रहे हैं उनकी इबादत नहीं कर
[32:35]रहे लेकिन इस ताजि को अल्लाह ने इबादत करार दिया है देखिए
[32:39]इबादत सिर्फ खुदा की है खुदा के अलावा किसी की इबादत आप
[32:43]नहीं कर सकते ना नबी की ना इमाम की ना किसी की
[32:47]नबी और इमाम का एहतराम है इबादत अल्ला की है नबी और
[32:54]इमाम का एहतराम है अलबत्ता अलबत्ता नबी और इमाम के एहतराम को
[33:01]अल्लाह ने इबादत करार दिया है नबी इमाम से मोहब्बत रखने को
[33:07]अल्लाह ने इबादत करार दिया है उनके जिक्र को अल्लाह ने अपना
[33:10]जिक्र करार दिया है जिक्र अहले बैत का है लेकिन इबादत परवरदिगार
[33:16]की है मजलिस अहले बैत की है इबादत परवरदिगार की बिल्कुल ऐसी
[33:21]ही जैसे आप किसी के मरीज की अयादत करते हैं अयादत मरीज
[33:24]की है लेकिन इबादत खुदा की है अहले बैत को अल्लाह ने
[33:30]यह मकाम दिया है कि जिक्र उनका होता है लेकिन य इबादत
[33:34]परवरदिगार की हो रही है खुदा इस पर अजर सवाब देता है
[33:38]खुदा को पसंद है कि हम उनका जिक्र करें क्यों इसलिए के
[33:47]यही वह हस्तिया है जिन्होंने अपने बंदों अल्लाह के बंदों तक खुदा
[33:57]की मारफ पहुंचाई है लोगों को की तरफ मुत कराया है जिनके
[34:01]जरिए लोगों ने खुदा को पहचाना है लिहाज खुदा ने इनका एक
[34:07]मकाम रखा है कि इनके जरिए लोग अल्लाह को पहचानते हैं इनके
[34:10]जरिए लोग मफत हासिल करते हैं दरजत बुलंद होते हैं इसलिए अल्लाह
[34:16]ने इनको यह मकाम मर्तबा दिया है सलात भेजिए मोहम्मद वाले मोहम्मद
[34:21]पर [संगीत] अला और अल्लाह ने अपने और मखलूक के दरमियान जिन
[34:32]हस्तियों को रखा उनको हम नबी कहते हैं या इमाम कहते हैं
[34:38]अंबिया 12000 आए और जब नबूवत का बाब बंद हुआ तो अल्लाह
[34:45]ने इमामत का बाब खोल दिया यह खालिक और मखलूक के दरमियान
[34:53]कनेक्टर है ये दोनों को मिलाते हैं खालिक की अ कामात खालिक
[34:59]की रिजा क्या है वह यह बताते हैं मखलूक के मसाइल परवरदिगार
[35:06]के बारगाह में यह पेश करते हैं इसलिए अल्लाह ने इनका मकाम
[35:13]बुलंद रखा है और हमारा अकीदा है कि खुदा के बाद सबसे
[35:14]अफजल तरीन जात पैगंबर रसूल खुदा की है उसके बाद अगर किसी
[35:21]का मकाम है तो वो मौला काना तो बीबी सैयदा का है
[35:26]और उसके बाद दीगर इमाम अब फिर अंबिया वगैरा ये देखिए अल्लाह
[35:36]ने 12000 अंबिया [संगीत] भेजे इनमें सबसे तवील उम्र किसकी है हजरत
[35:47]नूह अल सलाम हजरत नूह अल सलाम की कितनी उम्र है एक
[35:52]रिवायत में कि ाज साल ाज साल न 900 साल की उम्र
[36:01]में नबूवत का ऐलान किया सोचिए ाज साल कितनी तवील उम्र है
[36:07]बीवी सैयदा का मकाम कितना बुलंद है पैगंबर के बाद अफजल तरीन
[36:17]जात मौला कानात बीबी सैयदा है उम्र कितनी है बीवी सैयदा की
[36:25]18 साल कहां ईज साल कहां 18 साल 18 साल कोई उम्र
[36:35]है हमारा जवान 18 साल में मुश्किल से मैट्रिक करता है बहुत
[36:42]ज्यादा तीर मार ले तो इन इंटर कर लेगा इससे आगे इंपॉसिबल
[36:49]है 18 साल में मैट्रिक एंटर करेगा 18 साल में अपने आप
[36:58]को नहीं संभाल पाता इसीलिए अदीस रिवायत में कि 16 से लेकर
[37:01]20 तक यह उम्र इंतिहा खतरनाक होती है इंतहा खतरनाक उमर है
[37:09]16 से लेकर शैतान 16 से 20 के दरमियान शदीद तरीन हमले
[37:17]करता है इस बच्चे को गुमराह करने के लिए इसकी आदत बिगाड़ने
[37:21]के लिए हत्ता कि रिवायत में बाज रिवायत में मिलता है कि
[37:26]इस उम्र में जब कोई गुनाह भी करता है तो खुदा उसका
[37:30]गुनाह आधा लिखता है उस शैतान की शिद्दत की वजह से 16
[37:36]से 20 य चार साल बड़े खतरनाक है ज 20 साल का
[37:42]हो जाता है उसको कुछ शर डेवलप हो चुका होता है अब
[37:47]वह बहुत सी चीजों को समझने लगता है अच्छा वो जो मैं
[37:52]इस तरह के हरकत कर रहा था इस तरह के बिहेव मेरा
[37:57]था रवैया जो था मेरा वो मैं ही गलत था अब उसे
[37:57]समझ आना शुरू हो जाती है तो 16 से 20 खतरनाक उम्र
[38:06]है इसमें यह जवान अपने आप को नहीं संभाल सकता व अपने
[38:09]घर को क्या संभालेगा खानदान को क्या संभालेगा अपने मुल्क के लिए
[38:15]क्या खाक करेगा अपने दन के लिए क्या करेगा जो अपने आप
[38:18]को नहीं संभाल सकता 16 से 20 के दरमियान इंतहा खतरनाक उम्र
[38:23]है इंसान बिगड़ता है तो इसी चार सालों में सुधरता है चार
[38:30]सालों में य इतहा खतरनाक जज होती है बच्चों की इसमें उनके
[38:35]बड़ी ख्याल रखना पड़ता है उसको देखना पड़ता है कहां जा रहा
[38:41]है कहां नहीं जा रहा किनके साथ मिल रहा है दोस्त कौन
[38:44]है कैसे चेक एंड बैलेंस होना चाहिए मोबाइल है तो उसका चेक
[38:49]होना चाहिए मोबाइल के जरि आदत ना खराब हो जाए बड़ी खतरनाक
[38:55]जज होती है ये तो एक 18 साल में हमारा एक जवान
[38:59]अपने आप को नहीं संभाल पाता वह दीन को क्या संभालेगा बीबी
[39:04]सैयदा 18 साल नूह अल सलाम ाज साल ईज साल दीन की
[39:14]खिदमत की दीन की हिफाजत की नबियों में तीन कैटेगरी है नबी
[39:21]उससे ऊपर की कैटेगरी रसूल 12000 पैगंबर नबियों में 313 रसूल जिनकी
[39:32]कैटेगरी ऊंची है हाई उनका लेवल बुलंद है फिर रसूलो में पांच
[39:35]उजम है जिनका लेवल उनसे भी ऊपर है जो आप जियारत वारसा
[39:40]में पढ़ते हैं पांच उजम नबी अस्सलाम वालेक वारिसा आदमा सिफला सलाम
[39:47]अले का वारिसा नूह नबी अल्ला सलाम अले का वारिसा इब्राहिमा खलीला
[39:53]सलाम अलेका वारसा मूसा कमलाला का वा ईसा य ये िया इनका
[40:01]अपना कलमा था अल्लाह नेनको शरीयत किताब देकर भेजा ता तो नबियों
[40:08]की तीन कैटेगरी में ाज साल नूह अल सलाम ने दीन की
[40:15]खिदमत की हिफाजत की नबी से रसूल रसूल सेम बस स्टॉप आगे
[40:22]नहीं बढ़ सके हमारे यहां भी बाज इदार में लोग काम करते
[40:25]हैं क्लर्क से ऊपर ऊपर जाते जाते आखिर एमडी बन जाते डीजी
[40:30]बन जाते उससे ऊपर नहीं है खत्म उसके बाद रिटायरमेंट नूह अल
[40:37]सलाम ाज साल खिदमत करने के बावजूद जब के बीबी सैयदा 18
[40:45]साल लेकिन बीबी सैयदा का मकाम बुलंद है आखरी नबी अफजल है
[40:53]उसके बाद सबसे फजीलत पर अगर है तो मौला कनात तो बीबी
[40:55]सैयदा ये हमारा अकीदा है देखिए खुदा किसी को मकाम मर्तबा देता
[41:02]है तो खुदा यह पाकिस्तान नहीं यहां पर हद मिलते हैं कभी
[41:09]सिफारिश पर कभी पैसों पर कभी रिश्तेदार निभाई जाती है दोस्ती पार्टिया
[41:13]निभाई जाती है हदे मिलते हैं पार्टियों की बेस पर रिश्तेदार के
[41:19]दोस्ती की बेस पर खुदा जब किसी को मकाम मर्तबा देता है
[41:22]ना ऐसे नहीं देता जब तक उसमें काबिलियत ना हो खुदा उसी
[41:28]को अहदा और मकाम मर्तबा देता है जिसमें काबिलियत खुदा रिश्तेदारी नहीं
[41:31]निभाता दोस्ती नहीं निभाता खुदा काबिलियत की बेस पर ओहदा देता है
[41:40]मकाम मर्तबा देता है बीब सैयदा 18 साल मकाम कितना बुलंद नू
[41:50]अल सलाम ाज साल लेकिन मकाम बीबी सदा से कम है इसका
[41:55]मतलब है कि नूह अल सलाम ढाई हजार साला जिंदगी में दीन
[42:01]इस्लाम की वह खिदमत ना कर सके जो बीबी सैयदा 18 साल
[42:07]में कर गई है इसी वजह से अल्लाह ने बीबी सैयदा का
[42:10]मकाम बुलंद रखा है आदम से लेकर ईसा तक हर नबी से
[42:17]अ मौला हसन से लेकर आखरी इमाम तक बीबी सैयदा हर इमाम
[42:24]से अफजल हालाकि बीबी स को नबूवत मिली ना इमामत अभी नबूवत
[42:31]इमामत नहीं मिली तो यह मकाम है अगर नबूवत इमामत मिल जाती
[42:37]सैयदा जहरा का मकाम क्या होता बन मोहतरम यह हस्तियां वह है
[42:42]जिन्होंने हमें दीन बताया और सिर्फ बताया नहीं दीन समझाया अमली तौर
[42:52]पर समझाया नमाज पढ़नी है तरीका नहीं बताया कि नमाज कैसे पढ़नी
[42:56]है नमाज में कैफियत क्या होनी चाहिए एहसास क्या होने चाहिए अहले
[43:01]बैत ने बताए हैं इसलिए कि इबादत सिर्फ ये नहीं कि उठना
[43:06]बैठना है रुकू और सजदा करना है ना आपकी सोच क्या है
[43:11]किस सोच के लिहाज से आप पढ़ रहे हैं आपकी फिक्र क्या
[43:16]है आपके एहसास क्या है नमाज में खड़े हैं सोचे आपकी अगर
[43:19]दुनियावी उमर में फंसी हुई है फलां से इतना कर्जा लेना है
[43:23]फला ने कर्जा लिया था वो वापस नहीं कि वो उससे लेना
[43:28]है वो फला काम करना है यह करना है खड़े नमाज में
[43:30]क्या एहसास है किस एहसास की बुनियाद पर आप नमाज पढ़ रहे
[43:35]हैं नमाज खुदा के सामने खड़ा उससे कलाम करना है मौला कहते
[43:41]ऐसे जैसे हम खुदा से कलाम कर रहे हो क्या खुदा से
[43:45]ऐसे कलाम किया जाता है कि सोच या खड़े यहां सोच कहीं
[43:51]और है व एहसास क्या होना चाहिए यह अहले बैत ने बताया
[43:57]कि नमाज पढ़े तो ऐसी पढ़े क्या आपकी पूरी तवज्जो परवरदिगार की
[44:04]जानिब हो आपकी सोच आपकी फिक्र कहीं और ना जा रही हो
[44:09]नमाज में है तो आपकी सोच फिक्र अल्लाह की जानिब होनी चाहिए
[44:11]दुनियावी उमू की तरफ नहीं हो खानदानी मसाइल की तरफ नहीं हो
[44:18]मुल्की सियासी मसाइल की तरफ आपकी सोच फिक्र नहीं जानी चाहिए नमाज
[44:21]में सिर्फ खुदा की जानिब सोच फिक्र होनी चाहिए के उस नमाज
[44:27]का फिर हमारे ऊ परर एक असर भी होता है हमारे बातिन
[44:33]पर हमारी रूह पर असर होता है उसी से उसी के जरिए
[44:38]तकवा में इजाफा होता है रूह को तकविम से पूछा कि मौला
[44:50]गुनाहों से कैसे बचू का नमाज पढ़ो क्यों इसलिए कि कुरान कहते
[44:55]है कि इ सला नमाज लोगों को गुनाह से फह से रोकती
[45:01]है अगर मैं नमाज पढ़ रहा गुनाहों से नहीं रोक पा रहा
[45:06]इसका मतलब मैं वह नमाज नहीं पढ़ रहा जो नमाज मुझे बुराइयों
[45:12]से रोके मेरी नमाज में कोई नुक्स है कोई कमी है कि
[45:18]यह नमाज मुझे बुराइयों से नहीं रोक पा रही है किसी ने
[45:24]मासूम से पूछा मौला मुझे कैसे पता चले मेरी नमाज कबूल हो
[45:33]गई या नहीं फार्मूला दिया इमाम ने बड़ा बेहतरीन कहा देखो नमाज
[45:37]के लिए कुरान कहता है कि यह बुराई से और फास से
[45:43]इंसान को रोकती है गुनाह से इंसान को रोकती है अगर जोहरे
[45:45]की नमाज पढ़ने के बाद मगरिब की नमाज तक तुमने कोई गुनाह
[45:52]कोई गलती नहीं की इसका मतलब है तुम्हारी जोहरे की नमाज कबूल
[45:56]हो गई है और अगर कोई खुदा नखता कोई गुनाह कोई गलती
[45:59]हो [संगीत] गई जिसका मतलब उस नमाज ने तुम्हें गुनाह से नहीं
[46:05]रोक पाया ना रोक सका इसका मतलब व नमाज कबूल नहीं हुई
[46:16]बसन मोहतरम इबादत ऐसी करें ऐसी इबादत हमें करनी चाहिए जैसी इबादत
[46:22]अहले बैत ने की वही उसी एहसास के साथ उसी सोच फिक्र
[46:28]के साथ कि जिस सोच और फिक्र के साथ और जिस एहसास
[46:30]के साथ अहले बैत अल सलाम ने नमाज पढ़ी है खुदा की
[46:35]बारगाह में दुआ करते हैं मेरे मालिक हमारी इस कलील सी इबादत
[46:40]को अपनी बारगाह में कबूल मंजूर फरमा हम सब पर रहम और
[46:42]करम की निगाह फरमा हमें दीन इस्लाम समझने और उस पर अमल
[46:48]करने की तौफीक अता फरमा हमें इबादत की लज्जत अता फरमा खुलूस
[46:51]इनायत फरमा हम सबकी तौफीक में इजाफा फरमा खुदा बंदा हम सबके
[46:58]मरहन की मगफिरत फरमा जो उन्होने नेक आमाल इबादत की उनकोन काजरे
[47:02]अजम इनायत फरमा मेरे मालिक जब से दुनिया में आप तक जितनी
[47:09]खता गलतियां हु उनसे दरगुजार फरमा जो इबादत नेक आमाल की खुदा
[47:12]अंदा उन्हें अपनी बारगाह में कबूल मंजूर फरमा मेरे मालिक हम सबके
[47:20]मरहन की मगफिरत फरमा शोहदा के दरजा बुलंद फरमा जो बिरादर बुजुर्गा
[47:23]या तान करते हैं इस दर्स में उनकी हाज तों को पूरा
[47:29]फरमा के रिस्क में इजाफा फरमा उ दुनिया में किसी का मोहताज
[47:31]ना फरमा दुनिया आखिरत में कामयाबी अता फरमा अपनी आखरी हुज्जत इमाम
[47:38]जमान के जुहूर में ताजल फरमा हम सबको उनके आवान अनसार में
[47:42]से शुमार फरमा रबना तकल म समली मुहम्मदी हिरी
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