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7- وجود خالق اور صانع کا اثبات (برہان نظم) - حجة الاسلام شيخ محمود حسين حيدري
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محاضرات
دنیا کے سارے سائنٹهے اس بات پر متفق هیں که یه کائنات اربوں سال سے منظم انداز میں حرکت کررهی هے. یه نظم خودبخود وجود میں نهیں آتی , پس یقینا کسی نے اسے نظم بخشی هے... حجة الاسلام شيخ محمود حسين حيدري
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Transcript
[0:16]माइल हुस्ना या ना गुत बिल्ला मनता रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह
[0:43]रब्बिल आलमीन व सल्लल्लाह अला सदना मोहम्मद ीरी समा बकला फ अरन
[0:56]लाला अजमा उसूल अकाद के नवान के तहत गुफ्तगू हो रही थी
[1:15]और इस सिलसिले में खुदा के वुजूद के इस बात के दलाल
[1:29]के नवान से गुफ्तगू हो रही थी और इस स में अरज
[1:31]हुआ कि खुदा परस्त ने और खुदा परस्त और खुदा पर अकीदा
[1:42]रखने वाले और खुदा पर ईमान रखने वालो के लिए खुदा और
[1:51]खालिक के वजूद पर दलील खुद जात परवरदिगार है इस हवाले से
[2:00]दो हदीस दो तीन हदीस कल के दरस में और सबक में
[2:11]हमने पेश की उनमें से एक जुमला यह था कि अमीर मोम
[2:12]तालिब अ सलातो सलाम ने फरमाया या मन दलाला जाती ब जाती
[2:21]वह जात जो अपनी जात की खुद ही दलील है बिक कावा
[2:32]दल माबूद मैंने तुझे तेरे वसीले से ही तुझे पहचाना है हाज
[2:38]और इमाम हुसैन अले सलातो सलाम ने दुआ आरफा में मुता जुमला
[2:45]है उनमें से एक जुमला यह था माबूद के फले माबूद जोले
[2:56]का बमा हु फजू माबू जो चीज अपने वजूद में तेरी तरफ
[3:05]मोहताज है उनके जरिए उनसे तेरे वजूद पर कैसे इस्ते दलाल किया
[3:16]जा सकता है मसलन आसमान जमीन के जरिए तेरे वजूद आसमान और
[3:22]जमीन से तेरे वजूद पर कैसे इस्ते दलाल किया जा सकता जबकि
[3:29]यह खुद तेरी वजूद में आने के लिए इंसान के वजूद के
[3:34]जरिए तुझ पर कैसे इलाल किया जा सकता है जबक इंसान खद
[3:40]फकीर मज व अपने वजूद के लिए तेरी तरफ मोहताज अयक कफद
[3:55]बमा फजू माबूद जो चीज अपने वजूद में मस आसमान जमीन इंसान
[4:01]है वाना न बाता जमादा कायनात का जर जरा अपने वजूद में
[4:09]तेरी तरफ मोहताज है उसके जरिए किस तरह तेरे वजूद पर इस्ते
[4:12]दलाल किया जा सकता है और क्योंकर तेरे वजूद पर इनके जरि
[4:18]तलाल किया जा सकता है म माले सल हता यक हुल मुरल
[4:32]क्या किसी के लिए इतना जुहूर है जो तेरे लिए है ताकि
[4:37]उनके जुहूर के जरिए तेरे वजूद पर इलाल किया जा सके या
[4:47]तेरे वजूद ताकि तेरे वजूद पर उनके वजूद के जरि इलाल किया
[4:55]जा सके क्या यह मुमकिन है नहीं तुझसे ज्यादा जाहिर शय इस
[5:04]कायनात में कोई नहीं तुझसे ज्यादा जाहिर शय इस रोए जमीन इस
[5:12]पूरी कायनात में कोई नहीं है लिहाजा फकीर और मोहताज और नियाज
[5:19]मंद मखलूक के जरिए तेरे वजूद पर इस्तल नहीं किया जा सकता
[5:23]मुख्तसर यह हुआ कि खुदा पस्तु के लिए खुदा के वजूद पर
[5:32]दली ख जात परवरदिगार पिछले दरस में और पिछले सबक में माद
[5:38]परस्त और मुनक खुदा के लिए खुदा परस्त और खुदा पर ईमान
[5:47]और अकीदा रखने वालो ने जो दलीले पेश की है मुता दलीले
[5:52]पेश की है उनमें से एक दलील बुरहान यत है जिस पर
[5:57]हमने कल के में गुफ्तगू की बुरहान यत है और इस सिलसिले
[6:09]में दो चार जुमले आज के इस दरस में जिक्र करना जरूरी
[6:17]समझता हूं और वो यह है कि एक हदीस अबू शाकिर देसानी
[6:22]नामी मादा परस्त और मायत परस्ती में मुब्तला एक शख्स ने मारूफ
[6:40]था शकिर देसानी वह मुख्तलिफ किस्म के मुनाजरा करते थे इमाम जाफर
[6:45]साद सला सलाम के साब के साथ वहदा नियत तौहीद और खुदा
[6:51]के वजूद के हवाले से यानी व खुदा के वजूद का मुनकर
[6:58]था हकीकत में और एक दफा व इमाम जाफर सादिक सलातो वसलाम
[7:01]की खिदमत में आया और सवाल किया कि इस बात पर क्या
[7:11]दलील है कि आपका कोई पैदा करने वाला है या आप कैसे
[7:14]कह सकते हैं कि आप खुद बखत वुजूद में नहीं आया है
[7:19]बल्कि किसी खालिक ने बल्कि किसी पैदा करने वाले ने आपको पैदा
[7:26]किया है इस पर आपके पास क्या दलील है तो इमाम जाफर
[7:31]साद सला सलाम ने बुरहान यत के जरिए अबू शाकिर देसानी को
[7:42]समझाया कि खुदा के वजूद पर बेहतरीन दलील बुरहान यत है और
[7:51]वह यह है कि दुनिया की कोई चीज किसी सबब या लत
[7:57]के बगर वजूद में नहीं आता और तुमने सवाल किया है मेरी
[8:04]जात से मुतालिक कहा आपके पास क्या दलील है कि आपका कोई
[8:07]पैदा करने वाला है तो इमाम अल सलातो सलाम दुनिया के अश्या
[8:12]के हवाले से गुफ्तगू नहीं करते बल्कि चुकी खुद इमाम की जात
[8:18]से सवाल हुआ है इमाम की जात के बारे में और जात
[8:23]के जरिए बुरहान यत को अबू शाकिर दे सानी के लिए इमाम
[8:26]साबित करना चाह रहे हैं मुझे कोई वजूद बसने वाला और वजूद
[8:32]अता करने वाला है मैं खुद से वजूद में नहीं आ सकता
[8:39]और उसकी वजह यह है कि मैंने अपनी नफ्स में अपनी जात
[8:42]में गौर फिक्र किया तो मैं अपनी जात को मैंने अपनी जात
[8:49]में दो सूरत देखी पहली सूरत यह है कि मैंने अपने नफ्स
[8:53]को और अपनी जात को दो सरतो में पाया वज मैंने अपने
[9:03]नफ्स को अपनी जात को और अपनी जात को दो सरतो में
[9:08]पाया इन दो सरतो से मेरा वजूद खाली नहीं है इमान सनान
[9:14]मौजूदा या मैंने अपनी नफ्स को मैंने खुद पैदा किया है मेरी
[9:22]जात को मैंने खुद वजूद अता किया सरत और इस सूरत के
[9:29]भी या कि मेरे गैर ने किसी और ने मुझे पैदा किया
[9:36]है यह दूसरी सूरत है पहली सूरत में अगर मैंने अपने आप
[9:38]को वजूद बख्शा है तो इसकी दो सरत हैं मैं अपने आप
[9:45]को वजूद बसते वक्त अपने आप को वजूद में लाते वक्त या
[9:53]मैं मौजूद था कि मैं मौजूद था मैंने अपने आप को पैदा
[9:55]किया है एक सूरत है यह महाल है इसलिए एक चीज जो
[10:01]पहले से मौजूद है उसको दोबारा वजूद में लाना माना नहीं रखता
[10:07]ल हासिल है यह अकल इस बात को कबूल नहीं करती एक
[10:13]चीज पहले से मौजूद हो फिर कहे इसको इसी मौजूद ने दोबारा
[10:16]वजूद बख है यह महाल नामुमकिन है दूसरी सूरत य है कि
[10:25]मैंने अपने आप को वजूद बख्शने से पहले मैं मालूम था मेरा
[10:32]वजूद नहीं था मैं अदम की हालत में था मैं मालूम श
[10:40]थी और मालूम की हालत में मैंने अपने आपको को वजूद बख
[10:46]है और मैंने अपने आप को वजूद अता किया कते यह भी
[10:52]महाल है इसलिए कि एक मालूम श जिस कोई है ही नहीं
[10:54]या से कोई शय है ही नहीं श उस पर तबक नहीं
[10:59]हो होता शे उस पर लागू नहीं होता शे उसके लिए माना
[11:05]नहीं रखता एक मालूम चीज एक मौजूद का के लिए इल्लत और
[11:11]सबब नहीं बन सकता लिहाजा मुझे यकीन हासिल हुआ कि मैंने अपने
[11:17]आप को पैदा नहीं किया है यानी मैंने अपने आप को वुजूद
[11:24]नहीं बख्शा है पस यकीनन किसी और ने मुझे वजूद अता किया
[11:32]है किसी और मौजूद ने मुझे पैदा किया है अब उस वह
[11:34]मौजूद भी जिसने मुझे वजूद बख्शा है मुझे पैदा किया है वह
[11:42]भी दो सरतो से खाली नहीं है या यह कि वह मौजूद
[11:47]जिस वक्त मुझे वुजूद अता कर रहा था उस वक्त वह मौजूद
[11:57]खुद मौजूद था इस दुनिया में मौजूद था तो यह सवाल पेश
[11:59]आता है उसको उस मौजूद को किसने पैदा किया यह सिलसिला आगे
[12:06]बढ़ता है ता एक लत लल तक जाकर रुकना पड़ेगा किसी एक
[12:13]जात को सबकी इल्लत मानना पड़ेगा सबके वजूद का सबब मानना पड़ेगा
[12:18]ला यह सवाल दोरा बारबार य सवाल तकरार होता रहता है तस
[12:26]लाजिम आता है और तुल लल पर जाकर रुकना पड़ेगा अब उस
[12:28]वजूद के बारे में जिसने मुझे वजूद अता किया है क्योंकि किसी
[12:34]सबब और लत के बगैर कोई भी चीज इस दुनिया में वजूद
[12:39]में नहीं आता पैदा नहीं होता यह ते है इससे कोई इंकार
[12:42]नहीं कर सकता लिहाजा दूसरी सूरत यह है कि सादिक आल मोहम्मद
[12:49]को किसी और मखलूक ने वजूद अता किया है अब इस फरज
[12:54]को हम कबूल करते हैं मुझे किसी और ने वजूद अता किया
[12:56]है तो उस वजूद अता करने वाला भी दो सरतो से खाली
[13:02]नहीं है या वह पहले से मौजूद था साद मोहम्मद को वजूद
[13:08]बख है तो इस सूरत में सवाल यह उठता है कि उसको
[13:14]किसने वजूद बख्शा है उसको किसने वजूद अता किया है व खुद
[13:16]अपने आप को वजूद में नहीं ला सकता पहली फरज में इसको
[13:21]रद कर दिया है लिहाज मानना पड़ेगा उसको वजूद देने वाला और
[13:28]उसको वजूद बक्शने वाला कोई हस्ती कोई जात ऐसी है जो हरब
[13:31]नक्से पाक पाकीजा है अलीम है दाना है हकीम है अदी और
[13:39]सरमदी है किसी की तरफ मोहताज ना हो किसी ऐसी जात की
[13:46]जरूरत है और उसी का नाम खुदा है दूसरी सूरत यह है
[13:48]दूसरा मौजूद जिसने मुझे वजूद अता किया है मुझे वजूद और मुझे
[13:55]पैदा करते वक्त वो खुद मालूम था यकल महाल पहली श में
[14:03]बयान हो चुका है इसलिए कि मालूम वजूद की लत मालूम वजूद
[14:09]का सबब नहीं बन सकता कोई आकल इस बात को कबूल करने
[14:15]के लिए तैयार नहीं है पस तीसरा माना साबित होता है और
[14:26]अकल य हुकम करती है और अकल यह कहती है कि जो
[14:31]चीज नहीं थी और वजूद में आ गई है उसका कोई साने
[14:33]और कोई खालिक और कोई वजूद में लाने वाला कोई ऐसा कुदरत
[14:43]मंद मौजूद है जिस पर आदम तारी नहीं हो सकता जिस पर
[14:46]आदम तारी नहीं हो सकता फरमाते हैं अल्लाह रब्बिल आलमीन और वो
[14:56]आलमीन का परवरदिगार खुदा की जात है और उसी का नाम खुदा
[15:01]है पस पहली दलील खुदा परस्त के मुनक माददा परस्त और खुदा
[15:11]के वजूद के मुनकीन के लिए खुदा के इस बात पर पहली
[15:19]दलील बुरहान यत है बुरहान यत का खुलासा यह हुआ जब इंसान
[15:26]अपने वजूद में अपनी जात में अपनी नफ्स में और इसके गिर्द
[15:30]नवा में जो चीजें हैं कायनात के मौजूदा आलम में और कायनात
[15:36]में इंसान जब तवज्जो करता है तो उसे मालूम होता है कि
[15:45]कोई भी चीज इस दुनिया में बगैर सबब और इल्लत के वजूद
[15:52]में नहीं आती तो इंसान को यकीन हासिल हो जाता है इंसान
[15:56]की अकल यह कहती है कि कायना और इंसान का कोई पैदा
[16:05]करने वाला जरूर है और इंसान को वजूद बसने वाला जरूर है
[16:12]और वजूद बने वाला या तो खुद इंसान है यह महाल है
[16:21]जिसकी तफसील गुजर गई या कोई और मखलूक है खुद इंसान की
[16:24]तरह कोई और मखलूक है यह भी महाल या किसी दूसरे मखलूक
[16:29]ने उसे उत ब है यह भी महाल है इसलिए कि अर्ज
[16:33]हुआ ये दो सरतो से खाली नहीं है नहीं है या व
[16:39]पहले से मौजूद था और मुझे वजूद अता किया है तो सवाल
[16:43]यह पैदा होता है उसको किसने वजूद बख्शा या वोह मालूम था
[16:49]वो इंसान वो मौजूद मालूम मौजूद की अल्लत नहीं हो सकता लिहाजा
[16:57]इंसान को मानना पड़ेगा उसका कोई खालिक और वजूद में लाने वाला
[17:08]कोई ऐसा कुदरत मंद मौजूद है कुदरत मंद जात मौजूद है जिस
[17:12]पर आदम तारी नहीं हो सकता और उसी का नाम आलमीन का
[17:21]परवरदिगार और वही आलमीन का परवरदिगार और कायनात का खालिक वह खुदा
[17:27]की जात है और उसी का नाम खुदा है पस पहली दलील
[17:33]बुरहान यत दूसरी दलील खुदा परस्त की तरफ से खुदा के वजूद
[17:43]पर मुनक के लिए खुदा परस्त की दूसरी दलील बुरहान नजम नजम
[17:49]का माना रोशन है नजम याने मुख्तलिफ अजजा के इस तरह एक
[17:59]जगह जमा होना कि उनका हमा हंग तावुन या सब एक मुख्तलिफ
[18:03]म इंसान के जिस्म के मुख्तलिफ अजजा है कितने अ मुता है
[18:11]उन सबका इस छ फुट के जिस्म में जमा होना इंसान के
[18:13]नाम से जो चल पहल कर रहा है जो टहल रहा है
[18:17]जो चल रहा है इंसान के नाम से मुख्तलिफ अजजा का इस
[18:22]6 फीट के जिस्म में जमा होना और इन आजा में जो
[18:30]हमा हंगी पाई जाती है इन आजा का हमांग तावून एक हकीकी
[18:38]मकसद को पूरा करें उसे नजम या निजाम कहा जाता है और
[18:42]खुदा परस्त ने और खुदा पर ईमान और अकीदा रखने वालो ने
[18:47]खुदा के वजूद पर इस बात के लिए जो दलीले पेश की
[18:51]है उनमें से एक दलील बुरहान नजम वाक अगर इंसान अपने वजूद
[18:58]और सी तरह अपने अतरा में जिस तरह बुरहान यत के मुकदमे
[19:02]में हमने बयान किया इंसान अपने अपने वजूद में अपनी जात में
[19:07]और इसी तरह अपने अतरा में मौजूद अया की तरफ तवज्जो करें
[19:13]तो देखता है कि इस कायनात में इस बड़ी कायनात के अंदर
[19:19]एक मोहकम निजाम हाकिम एक मोहकम निजाम है और दुनिया की हर
[19:30]चीज एक हर चीज में एक खास निजाम पाया जाता है और
[19:34]दुनिया की हर चीज पर एक खास कानून की हुक्मरान दिक्कत करें
[19:42]तो यकीन इंसान इस नतीजे पर पहुंचता है और कोई आकिल इंसान
[19:50]वाक आकल रखता हो कोई आकल इंसान मौजूदा आलम में पाए जाने
[20:01]वाले नजम नसक का इंकार नहीं कर सकता कोई आक इसका इंकार
[20:08]नहीं कर सकता कायनात के मादी जरत में जरत में जैसे कि
[20:13]आप बेहतर जानते हैं कायनात के मादी जरत में सबसे छोटी से
[20:25]एटम है सबसे छोटी से जिसे एटम कहा जाता है और सबसे
[20:28]छोटी से तम है और सबसे बड़ी से कहकशा है हर चीज
[20:39]में एक खास नजम पाया जाता है और दक हिसाब किताब के
[20:46]तहत गर्दिश करता है कायनात के हर चीज के कनों को देखे
[20:53]सितारे देखे आसमान देखे आफताब माहताब देखता हैवान देखें जमादा देखें और
[20:58]परे देखे चरण देखे इंसान को देखें हर चीज में एक खास
[21:04]नजम नसक पाया जाता है और दक हिसाब के तहत गर्दिश करता
[21:13]है मशान आफताब माताब सितारे मुख्तलिफ सैयारे एक खास हिसाब किताब के
[21:20]तहत गर्दिश करता है मसर हुआ इंसान हैवान नबा जमादा आफताब माहताब
[21:29]चांद सितारे और जमीन और आसमान की दूसरी तमाम मौजूदा पर एक
[21:37]खास कानून और एक खास निजाम हाकम जो इनकी हिदायत कर रहा
[21:46]है वह खास निजाम उस खास कानून इन तमाम मौजूदा आलम की
[21:51]हिदायत कर रहा है और जैसा कि अर हु यह बात मुसल्लम
[21:57]है कि अगर दुनिया पर नजम नसक की हुक्मरान ना हो य
[22:07]वाज सी बात है अगर इस दुनिया पर इस कायनात पर इस
[22:09]रोए जमीन पर नजम नसक की हुक्मरान ना हो तो इस दुनिया
[22:17]के बारे में मालूमात भी इंसान को हासिल नहीं होती इसी नजम
[22:24]नसक की वजह से कायनात के बारे में जमीन के बारे में
[22:31]आसमान के बारे में कहकशा के बारे में हैवान के बारे में
[22:33]इंसानों के बारे में इंसान को मालूमात हासिल हुई है अगर यह
[22:41]नजम और इस दुनिया पर यह नजम हाकिम ना होता और इस
[22:52]नजम नसक की हुक्मरान ना होती तो दुनिया के बारे में इंसान
[22:55]मालूमात भी हासिल नहीं कर सकता इंसान को मालूमात भी हासिल ना
[23:04]होती क्योंकि मम का माना ही यही हैम हम कहते इम इम
[23:11]का माना ही यही है कि इन उन उमू कवानी और निजाम
[23:17]और नजम नसक की मालूमात जो दुनिया पर इल्म का माना यही
[23:26]है इम याने इल्म याने दुनिया पर हाकिम नजम नसक और उमू
[23:33]कवानी की मालूमात इसका नाम इल्म अलबत्ता मुरजा लूम की बात कर
[23:38]र है उलूम इलाही की बात नहीं कर रहा हूं साइंस टेक्नोलॉजी
[23:47]मसलन इंजीनियरिंग डॉक्टरी मसलन दूसरे उलूम सियासी इति सादी समाजी सकाफत और
[23:55]इस किस्म के उलूम दुनिया पर हाकिम कायनात पर हाकिम उमू कवानी
[24:02]और नजम के मजम मालूमात को इल्म कहा जाता है इसके अलावा
[24:09]कोई और चीज है इल्म का माना यही है लिहाजा अगर इस
[24:14]दुनिया पर इस कायनात पर कोई निजाम हाकिम ना होता किसी निजाम
[24:23]की हुक्मरान ना होती तो यह उलूम भी और यह मालूमात भी
[24:26]इंसान को हासिल कायनात के बारे में और कायनात के मौजूदा के
[24:32]बारे में हासिल ना होती य और आ सु दु इसीलिए दुनिया
[24:44]पर हाकिम नजम नसक के बारे में मालूमात के मजम का नाम
[24:49]मिसाल के तौर पर अगर इंसान अगर जिसम इंसान के लिए की
[24:58]नकल हरकत और जिस्मानी नजम नसक की रदद बदल में एक खास
[25:07]राह रविश और तरीका यह रद्द बदल एक खास राह रविश और
[25:10]तरीका पर मुश्त मिल ना होती तो इल्म तिब कैसे वजूद में
[25:18]आता इसम इल्म तिब माना नहीं रखता था इंसान के जिस्म के
[25:26]लिए की नकल हर हरकत पर जो निजाम हाकिम है उसके वजह
[25:29]से वजूद में आया है या आप लोग के इस्लाह में क्या
[25:35]कहा जाए फेजी वजूद में आया है ला माना नहीं रखता था
[25:41]हर इंसान के जिस्म के बदर मुख्तलिफ होता आज कुछ होता कल
[25:49]कुछ और कैफियत होती तो किस तरह आप डॉक्टरी और और फिजियोलॉजी
[25:53]और के कवानी वज करते नहीं कर सकते थे नजम के नतीजे
[26:01]में वजूद में आया और इसी तरह अगर सैयारा और सितारे एक
[26:08]खास नजम और निजाम और कानून के तहत गर्दिश ना करते और
[26:16]उन पर एक खास निजाम हुकम फरमा ना होते तोम नजूम किस
[26:20]तरह वजूद में आता माना नहीं रखता थाज चकि नजम है हम
[26:29]खास कानून के तहत हरकत में इनमें हरकत पैदा होता है इसी
[26:36]नजम की वजह से में नुजूम वजूद में आया अगर उनमें खास
[26:41]नजम जबत और नसक ना होता तो सितारा शनास और नजूमी हजरात
[26:50]मिसाल के तौर पर चांद गुहान सूरज गुहान को कैसे मयन कर
[26:56]सकते थे चकि नजम है इस नजम की बुनियाद पर पर वह
[26:58]चांद गुन और सूरज गुहान को एक खास जमाने में खास मकान
[27:05]के लिए मयन और मुस कर सकता है यह सब क्या है
[27:09]इस कायनात पर जो नजम की हुक्मरान है जो खास कानून की
[27:17]हुक्मरान है उसकी वजह से लाम नजूम ल्म फिजियोलॉजी इल्म सितारा शनास
[27:21]इल्म हैवान इल्म कीमिया फलान इल्म फलान जितने भी उलूम है इंसानी
[27:31]माना नहीं रखता था इसी नजम की वजह से मुख्तलिफ उलूम जो
[27:37]है वो दुनिया में वजूद में आया है जैसा क्यार सु सितारा
[27:40]शनास हजरात अगर सैयारा और सितारे में खास नजम और जबत ना
[27:50]होता तो सितारा शिनास हजरात और नजूमी हजरात चांद गुन सूरज गुन
[27:56]को मायन नहीं कर सकते और सूरज के तुल और गुरूब को
[28:05]हमेशा मायन नहीं कर सकते थे न चक व नज को बुनियाद
[28:06]बनाकर वह पूरे साल के लिए बल्कि 10 साल के लिए 20
[28:11]साल के लिए 20 साल पहले से मशस करता है कि फलान
[28:17]मुल्क में फलान टे प गुरूब होगा सूरज फला टे प तुलू
[28:25]होगा और इस तरह इल्म नजू वजूद खुलासा यह है कि निजाम
[28:28]और नजम अश्या और मौजूदा का मुफस्सिर है और इंसानी उलूम उलूम
[28:39]तजब साइंस और टेक्नोलॉजी के मुख्तलिफ शोबा और इंसानी उलूम तमाम इंसानी
[28:46]उलूम उसी नजम का मरह मिन्नत है अगर दुनिया पर एक खास
[28:55]कानून और नजम नसक की हु कमरानी ना होती तो इंसान दुनिया
[29:04]और कायनात के बारे में इंसान को मालूमात भी हासिल ना होती
[29:11]लिहाजा सबको कबूल करना पड़ेगा यह उलूम इंसानी उलूम इल्म साइंस टेक्नोलॉजी
[29:20]इंजीनियरिंग फिजियोलॉजी एलम तिब और इल्म नुजूम और मुख्तलिफ दूसरे उलूम उसी
[29:32]नजम के नतीजे में इंसान को हासिल हुआ है और उन्हीं नजम
[29:36]के जरिए इंसान को कायनात के बारे में जो मालूमात हासिल हुई
[29:43]है उन्ही मालूमात के मजमुआ का नाम इल्म है लिहाजा कायनात में
[29:51]नजम नसक को बहरहाल सब कबूल करते कोई इससे इंकार नहीं करता
[29:56]कायनात में नजम नसक मौजूद है लेकिन लाफ इस बात में है
[30:06]पस कायनात में नजम नसक मौजूद है इसी नजम नसक के नजम
[30:13]नसक की बुनियाद पर इसी नजम नसक की वजह से इंसान को
[30:17]कायनात के मुख्तलिफ अश्या और कायनात के के मुख्तलिफ मौजूदा के बारे
[30:23]में मालूमात हासिल हुई है और उस मालूमात के नतीजे में मुख्तलिफ
[30:33]इंसानी उलूम दुनिया में वजूद में आया है इस नजम का असर
[30:39]है अगर यह नजम ना होता नजम की हुक्मरान इस कायनात पर
[30:42]ना होती तो इंसान को कायनात इंसान और दूसरे मौजूदा के बारे
[30:51]में मालूमात भी हासिल ना होती और किसी फिजियोलॉजी प नुजूम नामी
[30:56]इल्म का वजूद भी ना होता बहरहाल कायनात में नजम नसक है
[31:05]और इस नजम न सबब को सब कबूल करते हैं लेकिन इख्तिलाफ
[31:12]इस बात में है कि कायनात में यह नजम नसक जो कायनात
[31:16]पर हुक्मरान कर रहा है कायनात में पर जो हाकिम है आय
[31:27]नजम नसक खुद बखुदा इलाफ इस बात में बुरहान नजम के जरिए
[31:31]खुदा पर इस्तल यहीं से शुरू होगा अभी तक बुरहान नजम के
[31:37]की वजाहत के लिए इस मुकदमे का बयान जरूरी था कायनात में
[31:43]नजम है सब इस बात को कबूल करते हैं लेकिन इख्तिलाफ इस
[31:45]बात में है कि कायनात में ये नजम नसक खुद बखुदा दाना
[31:58]हकीम और कुदरत मंद नाजिम ने वजूद बख्शा है नाजिम ने अता
[32:08]किया है इंशा अल्लाह दूसरे सबक में इस सवाल का जवाब हम
[32:17]देंगे और इंशा अल्लाह बुरहान नजम की बहस को हम इंशाल्लाह दूसरे
[32:21]सबक में मुकम्मल करने की कोशिश करेंगे वस्सलाम वालेकुम रहमतुल्ला व बरकात
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