Volgende
7 Bekeken · 25/06/05
8 Bekeken · 14/03/09
7 Bekeken · 15/01/30
12 Bekeken · 15/05/11
9 Bekeken · 15/05/19
24 Bekeken · 24/08/10
Falsafa e Ebadat Aur Ham | H.I. Dr aqeel Mussa
0
0
53 Bekeken·
24/07/29
In
anders
Record date: 17 Mar 2024 - فلسفہ عبادت اور ہم
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
For more details visit:
📡 www.almehdies.com
🖥 www.facebook.com/aLmehdies313
🎥 www.youtube.com/aLmehdies
🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
Laat meer zien
Transcript
[0:16]बारे दिगर सवात अजु बिल्ला मिन शैतान रजी बिस्मिल्ला रहमान रहीम अल
[0:32]हमदुलिल्ला रब्बिल आलमीन वस् सलातो वस्सलाम अला अशरफ अनबिया वल मुरसलीन अबील
[0:40]कासम मोहम्मद व सलातो सलाम अलाले बबीन तारीन मासूमीन अलला रा माहे
[1:07]मुबारक रमजान के शब रोज गुजर रहे हैं और हम इस माहे
[1:15]बरकत और माहे रहमत और माहे मगफिरत की तमाम तर नाइयों को
[1:23]हासिल कर रहे हैं इसकी मानवीय को हासिल कर रहे हैं खुतबा
[1:32]शाबा निया जो कि आप रमजान से पहले सुनते हैं वह एक
[1:39]बेहतरीन ताफ नामा है माहे मुबारक रमजान का जिसमें इस महीने की
[1:47]फजीलत भी बयान की गई है और उसमें उसके बेहतरीन आमाल की
[1:55]तरफ भी तफसील से रसूल खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम ने शाबान
[2:05]के आखरी आयाम में यह खुतबा इरशाद फरमाया था आप तमाम लोगों
[2:12]से गुजारिश है कि मफा जनान में यह खुतबा मौजूद है इसको
[2:19]जरूर ब जरूर पढ़े और एक दफा नहीं मुकर पढ़े ताकि आपको
[2:22]अंदाजा हो कि यह मा कौन सा महीना है इसकी अहमियत कितनी
[2:29]है इसकी फजीलत कितनी है और इस महीने में हम लोगों को
[2:31]क्या कुछ करना चाहिए इस महीने को समझाने के लिए जैसे एक
[2:47]मरीज होता है और उस मरीज को पहले डॉक्टर अपने क्लिनिक पर
[2:55]इलाज करते हैं जब वो ठीक नहीं होता है तो उसको कहां
[2:57]भेज दिया जाता है कहां हॉस्पिटल में भेज दिया जाता है हॉस्पिटल
[3:06]का अपना एक साफ सुथरा माहौल होता है जरासी से पाक और
[3:14]वहां पर वह डॉक्टर्स जो कि आम जगहो पर मसर नहीं होते
[3:16]और एक फील्ड के नहीं कई फील्ड के मसर होते हैं और
[3:22]उनको एक कॉल पर बुला लिया जाता है और फिर उसी वक्त
[3:27]वहां पर उनके सारे टेस्ट हो जाते हैं पता चल जाता है
[3:33]का मसला क्या है इसी तरीके से माहे मुबारक रमजान हमारी मानवीय
[3:37]का हमारी रूहों को सही करने का हॉस्पिटल है अगर हम इससे
[3:50]इलाज करवाना चाहे तो इससे सही होना चाहे तो जैसे हॉस्पिटल में
[3:59]जरासी का बहुत मुश्किल होता है वहा पर सफाई सुधराई का इतना
[4:04]माहौल बेहतरीन माहौल होता है इसी तरीके से इस माह में शैतान
[4:13]इब्लीस को मुक फल कर दिया गया है कैद बंद में डाल
[4:16]दिया गया इसी तरीके से इस माह को कहा गया है इसके
[4:28]दिन बेहतरीन दिन है इसकी रातें बेहतरीन रातें हैं इसमें अनफा सकम
[4:33]तस्बी आपका सांस लेना भी खुदा की तस्बीह करना है सांस ले
[4:43]रहे हैं नौ मकल इबाद जागना तो इबादत है ही है जागना
[4:45]तो है ही इबादत सोना भी इबादत है इसका यह मतलब नहीं
[4:53]है इंसान जदा ज्यादा सोए मा इसका मतलब य कि सोना जब
[4:59]इबादत है तो जागना क्या होगा आमाल कु मकबूल इसमें आपके छोटे
[5:08]छोटा अमल भी शायद आम दिनों में उसको रद कर दिया जाए
[5:11]नमाज को रद कर दिया जाए इबाद तों को रद कर दिया
[5:15]जाए इस महीने में खुदा ने क्योंकि बरकत का रहमत का दरवाजा
[5:22]खोला है जन्नत के दरवाजे खुल चुके हैं जहन्नम के दरवाजे बंद
[5:26]हो चुके हैं फरिश्ते नाजिल हो रहे हैं इस महीने में तो
[5:33]इसलिए खुदा जो है हर अमल को कबूल करने बैठा दोआक मुस्तजाब
[5:41]शायद आम दिनों में हमारी दुआए कबूल ना हो स लेकिन इस
[5:48]महीने में खुदा खुद फरमा रहा है कि तुम्हारी दुआओं को मैं
[5:51]कबूल करने बैठ फरमाया गया बदबख्त तरीन है वो शख्स जो इस
[6:01]महीने में अपने गुनाहों को ना बकवा सके बहुत अजीब जमला यानी
[6:13]अगर इस महीने में हमने अपने गुनाहों से अपने आपको को अपनी
[6:19]रूहो को डिस इफेक्ट नहीं किया जैसे जिस्म को इंफेक्शन हो जाता
[6:23]है तो एंटीबायोटिक द सही करते हैं हॉस्पिटल में एडमिट करके इसी
[6:31]तरीके से हमारी रूहे भी बीमार हो जाती हैं मरीज हो जाती
[6:35]हैं इसकी इसकी बीमार दारी के लिए यह माहे मुबारक रमजान है
[6:43]खुदा खुद कह रहा है कोई अपने गुनाहों को बख्शने वाला आए
[6:49]और जब खुदा की जात इस बात का तरा कर ले तो
[6:54]फिर जो है फरमाया गया है इस महीने पूरा खुतबा है मैं
[7:02]कहूंगा तो फिर हमारा दर्स जो है वो एक ना मुकम्मल सा
[7:08]रह जाएगा लेकिन यह कि कहा गया है कि इस महीने में
[7:13]तुलानी सजदे करो तुलानी सजदे फकत सजदे नहीं क लंबे सजदे करो
[7:23]ताकि ये जो कमर गुनाहों के बोझ से झुक गई है वो
[7:28]गुनाह माफ हो जाए थोड़ा सा वक्त निकाले इन चीजों माहे मुबारक
[7:36]रमजान सिर्फ सुबह से मगरिब तक रोजा रखना ही नहीं है बहुत
[7:44]कुछ है बहुत कुछ है वो खुतबा शाबान में इंशाल्लाह आप लोग
[7:52]पढ़ेंगे के इस्तग फार का महीना है ये जो हमारी गर्दन गुनाहों
[8:02]के कुफल गुनाहों की जंजीरों में जकड़ दी गई है इसको आजाद
[8:07]कराने का महीना है तो यह महीना रोजे से बहुत कुछ बढ़कर
[8:16]है इस्तफा का महीना है तौबा का महीना है अमल का महीना
[8:21]है बरकत और रहमत और मगफिरत का महीना है एक वाकया जो
[8:29]है वो हजरत मूसा अल सलाम से मंसूब है कि एक दफा
[8:35]आप कोहेतूर पर जा रहे थे तो एक शख्स सुना होगा काफी
[8:40]मशहूर वाकया है इसको मैंने सरनामा कलाम बनाया है ताकि हम अपने
[8:44]मौजू पर आ सके वह जा रहे होते हैं कोहेतूर एक शख्स
[8:47]कहता है कि मूसा कहां जा रहे हैं कहने मैं अल्लाह से
[8:53]बातें करने जा रहा हूं अल्लाह से मुलाकात के लिए जा रहा
[9:00]हूं तो व कहता है कि मेरी एक बात उस खुदा तक
[9:05]पहुंचा देना तो कहते हैं क्या बात है कहते कि मुझे नहीं
[9:12]समझ आया कि खुदा कहां है मैं तो इतने गुनाह कर रहा
[9:21]हूं मैं तो गुनाह पर गुनाह करे जा रहा हूं मा सियत
[9:26]प मासि करे जा रहा हूं ठीक है मुझ पर तो कोई
[9:31]अजाब नाल नहीं हुआ अगर खुदा होता तो अजब नाजिल करता तो
[9:37]कहां है खुदा हजरत मूसा को शर्म आती है हया आती है
[9:44]कि खुदा के सामने ऐसे कैसे कहा जाए क है खुदा पहले
[9:48]दिन वह हया के हया भी एक एक बहुत अहम टॉपिक है
[9:56]इंशाल्लाह फिर कभी आपके यह हया सिर्फ हया खवातीन के लिए ही
[9:59]नहीं है किसी बड़े के हुजूर में कुछ बयान करना ठीक है
[10:06]ना यह भी एक हया होती है अदब के साथ बयान किया
[10:13]जाता र वह पहले दिन बयान नहीं करते दूसरे दिन जाते दूसरे
[10:16]दिन में वही शख्स मुलाकात करता है तीसरे दिन दूसरे दिन भी
[10:22]बयान नहीं करते तीसरे दिन भी अब तो हज मूसा कहते हैं
[10:26]अब कहना पड़ेगा ल की बार तो वो कहते हैं खुदा बहुत
[10:37]मजरत के साथ बहुत मजरत के साथ एक ऐसा शकी श है
[10:39]जो कहता है मैं तो गुना कर रहा हूं है खुदा है
[10:47]उसका अजाब ठीक है व होता तो उस पर अजाब करता तो
[10:52]खुदा जवाब देता खुदा मूसा उस बंदे को कह देना कि मैंने
[11:00]उस पर अप अपना बदतर अजाब नाजिल कर दिया है अपना बदतर
[11:07]अजाब नाजिल कर दिया है और वो इस वक्त इसका हर एक
[11:14]एक लम्हा अजाब में है लेकिन उसे एहसास नहीं है और वो
[11:20]बदतर अजाब क्या है वो बद तरीन अजाब यह है कि मैंने
[11:26]उससे उसकी इबाद तों की लज्जत छीन अब उसका इबादत में दिल
[11:42]नहीं लगता उ काहट होती है इबादत से की लज्जत मैंने उससे
[11:52]छीन ली आज का हमारा मौजू जो है वह यह है फलसफा
[11:54]इबादत में लज्जत इबादत ही सबसे सबसे बुनियादी तरीन मस के आज
[12:01]हम इस मुक्तसर सी महफिल में दर्स में य समझने की कोशिश
[12:08]करते य क्या चीज होती है लत इबादत क्या होती है और
[12:12]यह कैसे हासिल की जा सकती है इस वाक से तो पता
[12:18]चल गया कि गुनाह जो है लज्जत को सलब कर लेते हैं
[12:24]यह एक ऐसा ऐसी लज्जत है जो कमो बेश आप मजद में
[12:30]आने वाले लोगों ने इसको एहसास किया है इसको अल्फाजों में बयान
[12:37]नहीं हो सकता जो लोग जियार तो पर जाते हैं जो लोग
[12:38]हज पर जाते हैं उसकी एक मानवी लज्जत होती है जैसे हम
[12:46]मजलिस में जाते हैं मातम करते हैं उसकी एक सुकून मिलता है
[12:52]हमको इसलिए हम उसके बगैर नहीं रह सकते इसी तरह नमाज का
[12:54]एक सुकून होता है मस्जिद में आने का एक करार होता है
[12:59]जो घर में नमाज पढ़ने का व करार नहीं इसलिए मस्जिद को
[13:03]ज्यादा अहमियत दी गई है तो यह लज्जत इबादत क्या चीज है
[13:11]कैसे हासिल होती है क्या करें हम कि हमसे ये लज्जत इबादत
[13:19]ना छिन जाए यह आज का हमारा मौजू है एक सवात पढ़े
[13:25]मोहम्मद वाले मोहम्मद सला मोहम्मद सबसे पहले हमें लज्जत और इबादत लज्जत
[13:38]किसको कहते हैं और इबादत किसको कहते हैं इसको समझने की जरूरत
[13:42]है तब जाकर हम लत इबादत को समझे इबादत इबादत अब से
[13:51]निकला है कहते अरबी लगत में जिस जैसे नर्म गिल मिट्टी वाली
[13:59]जमीन होती है जिस पर बहुत लोग चले उसको कुछ गया हो
[14:03]उसको कहते हैं आप यानी जो इतना अपने आप को गिरा दे
[14:16]इतना मुत वाज हो जाए ठीक है कहां पर अपने मौला की
[14:18]बारगाह में इबादत की डेफिनेशन क्या है तवाजो इनकेस सी झुक जाना
[14:32]तसलीम खम हो जाना जिसको वह अपना माबूद समझता है हमने अपने
[14:41]अपने माबूद बनाए हुए हैं य जैसे हम तात करते हैं ना
[14:47]बाज लोगों की मन अन हम तात करते हैं उसके पीछे चलते
[14:56]हैं वो एक तरह के हमारे सामरी है जो व कहते हैं
[15:00]उसके के मुताबिक हम चलने लगते हैं तो इबादत की तारीफ क्या
[15:06]है मुत वाजे तवाजो झुक जाना माबूद की बारगाह में कभी यह
[15:19]माबूद इलाह होता है अल्लाह होता है और कभी यह माबूद कोई
[15:22]और होता है जमाना होता है माश होता है देखिए ना माश
[15:28]कहता है कि अब खुश खुशी में क्या यह पर्दा क्या यह
[15:35]म्यूजिक नहीं होना चाहिए भाई ढोल टप्पा होना चाहिए शादी बयाह में
[15:43]भाई मिक्स गैदरिंग होनी चाहिए क्या हिजाब क्या चीज होती है यानी
[15:49]हम यानी माशे के को हमने इलाह बना लिया है उसके मुताबिक
[15:56]चलते हैं उसके आगे सारे तसलीम खम कर दिया है तो इसको
[16:03]कहते हैं इबादत तो इबादत का एक वसी मफू है आप लोग
[16:10]के जहन में जैसे मैं कहता हूं इबादत आपके जहन में आता
[16:15]है नमाज रोजा सिर्फ नमाज रोजा इबादत नहीं है बल्कि हर वह
[16:24]काम जो खुदा के लिए किया जाए वो इबादत किसी पर गुस्सा
[16:33]आ रहा है हम खुदा के लिए खामोश हो जाए और उससे
[16:40]कलाम ना करें खुदा ने कहा किसी से बदला ले सकते हैं
[16:48]ठीक है लेकिन खुदा के लिए उसको माफ कर दे य क्या
[16:49]है यह भी इबादत है तो सिर्फ इबादत व कहते रिचुअल्स का
[16:56]नाम नहीं है रसू मात का नाम नहीं है बल्कि से बढ़
[17:01]कर सूर हज की आयत 77 में इरशाद रब्बुल इज्जत होता है
[17:12]हम अरबी नहीं पढ़ते ताकि कम वक्त में ज्यादा इस्तफा कर सके
[17:16]याना आमन ईमान वालों रुकू करो और सिजदा करो ठीक है रुकू
[17:25]किसम करते हैं सजदा किसम करते हैं नमाज में करते बस पहली
[17:29]ची नमाज बयान हो रही है और अपने रब की इबादत करो
[17:36]तो दूसरा मफू यानी सिर्फ इबादत नमाज नहीं है नमाज से बढ़कर
[17:44]और चीजें भी इबादत है आगे क्या बयान हो रहा है वल
[17:57]रा लकम तीसरी चीज बयान हो रही है और नेक अमल अंजाम
[18:01]दो तो नेक अमल अंजाम देना भी इबादत है बस सिर्फ रसू
[18:09]मात इबादत नहीं है अल्लाह के लिए हर फेल का अंजाम देना
[18:16]इबादत है और कार खैर यह जो हम किसी की मदद करते
[18:21]हैं लेकिन अगर इसमें खुदा हो तो यह इबादत है यह जो
[18:23]माहे मुबारक में हम सबको इफ्तार बांटते हैं हम गरीबों की मदद
[18:28]करते हैं हम सदका देते हैं ठीक है इसमें अगर खुदा की
[18:33]नियत है तो यह भी इबादत है तो इबादत एक कहा गया
[18:38]है ना कि तुम्हारा सांस लेना भी तस्बी है तस्बी इबादत तो
[18:46]फकत हत्ता के फकत अमल करना नहीं कस्त करना हमने एक नियत
[18:54]की कि हम कार खैर करेंगे फिर मौका नहीं मिल सका हां
[18:59]वह भी काउंट होगा इबादत के तौर पर तो इबादत सिर्फ अमल
[19:07]का नाम नहीं है कस और नियत का भी नाम है कजद
[19:12]और नियत भी नहीं सिर्फ हमने फिक्र किया सोचा अपने जहन में
[19:18]सोचा यह भी इबादत है किसी के साथ मैं अच्छा काम उसको
[19:27]मैं माफ कर दूंगा यह आपने फिक्र की तो अच्छी फिक्र अल्लाह
[19:33]के लिए फिक्र अल्लाह के लिए नियत और अल्लाह के लिए आमाल
[19:37]वक्त नहीं है वरना हमारे यहां पर एक अकल है एक कल्ब
[19:44]है और एक हमारा जिस्म है जिस्म आमाल अंजाम देता है अकल
[19:52]फिक्र करती है और जितने इरादे हम जो करते हैं ठीक है
[19:54]ना वो हमारा रूह और कल्ब करता है ठीक है तो यह
[20:01]तीनों चीजें बाहम मिलकर एक इबादत के वसी तरीन मफू को समझाते
[20:07]हैं हमको तो फकत अमल का नाम नहीं है फकत इरादे का
[20:15]नाम नहीं है फकत आजाना जज्बात का नाम नहीं है तात को
[20:22]भी इबादत कहते हैं सर तसलीम में खम होना भी इबादत तो
[20:28]कहते हैं हो एक सवात पढ़े मोहम्मद ले मोहम्मद टाइम बता कितने
[20:40]बजे आप लोग सुन रहे हैं ना सुनते जाएंगे क्योंकि चीजें जरा
[20:48]थोड़ी सी मुश्किल है फिर इंशाल्लाह उसको आगे कर अब इबाद तों
[20:52]के से हासिल क्या होता है हम समझते हैं कि यह भी
[20:59]एक पूरा चैप्टर है कि इबादत से इंसान को हासिल क्या होता
[21:05]है इबादत से इंसान को वह बुनियादी तरीन चीज हासिल होती है
[21:13]जो सबसे ज्यादा हमें जरूरत है और उसका नाम है तकवा यह
[21:20]तकवा क्या चीज है तकवा सिर्फ गुनाहों से बचने को तकवा नहीं
[21:25]कहते ये जो हमारे जनों में कांसेप्ट है तर्जुमे में भी यही
[21:32]कर किया जाता है तकवा यानी बचाओ अरबी में बचाव को कहते
[21:37]हैं तकवा यानी शील्ड जैसे एक शील्ड होती है कोई हम पर
[21:43]हमला करता है तो हम व शील्ड सामने रख देते तो तकवा
[21:47]क्या है शी है भल शही मुता तकवा कहते हैं उस ताकत
[21:55]को उस पावर को जो हमारी रूह में हासिल हो जाता है
[21:59]गुनाहों के खिलाफ जैसे हॉस्पिटल में नहीं इनाइ जशन कर देते हैं
[22:06]जराम अटैक नहीं करते जब टीके लगा देते हैं ठीक है तो
[22:14]व जरासी आते हैं लेकिन अमल नहीं सराय नहीं कर पाते इस
[22:19]तरह तकवा अगर होगा तो गुनाह हमारी तरफ आएगा शैतान हम पर
[22:26]हमला करेगा सही है लेकिन उस तकवा की बिना पर पर हमें
[22:34]क्या है एक हिफाजत शील्ड हासिल है ना महरम पर निगाह पड़ेगी
[22:37]दिल चाएगा ना महरम को देखे लेकिन जो हमारे अंदर तकवा हासिल
[22:46]हो चुका है व आपको मजबूर करेगा नहीं नो इस गुना की
[22:50]तरफ नहीं जा हराम रोजी कमा सकते हैं ठीक बहुत आसान है
[22:59]हराम रो कमाना बहुत आसान है ठीक है लेकिन तकवा हमारा जो
[23:05]अंदर की जो पावर है जो कि गुनाहों के खिलाफ आ गई
[23:07]है वह तकवा की पावर जो है वह हमें बताती है के
[23:15]नहीं और शायद हमें एहसास नहीं है कि यह तकवा किस कदर
[23:26]जरूरी है भाई हमसे बारबार गुना सरज हो जाते हैं क्यों सरद
[23:30]हो जाते है इसलिए कि तकवा की पावर हमारी रूह में मौजूद
[23:36]नहीं है जैसे एक बीमार जिस्म होता है ना लागर शख्स होता
[23:42]है उसको बार-बार जरासी अटैक कर देते हैं बार-बार वो मरीज हो
[23:46]जाता है लेकिन एक की इम्युनिटी डेवलप हुई हुई है ठीक है
[23:54]तो उसको जरासी हमला नहीं कर पाते तो ये तकवा इतना अहम
[23:57]तरीन चीज है कि जो हम बारबार खुदा की बारगाह में जाते
[24:03]हैं जिल्लत खारी के साथ खुदा फिर गुनाह हो गया हमसे 10
[24:09]दफा इरादे करते हैं अब मैं यह गुनाह नहीं करूंगा लेकिन फिर
[24:13]हो जाता फिर हो जाता 10 दफा इरादा करते हैं फजर की
[24:20]नमाज कभी कजा नहीं होगी 10 दफा इरादा करते हैं नमाज शब
[24:23]पढ़ेंगे नहीं पढ़ पाते नमाज कजा हो जाती है क्यों क्योंकि तकवा
[24:33]नहीं है और तकवा कैसे हासिल होता है तकवा हासिल होता है
[24:40]इबाद तों से सूर बकरा की 21वी आयत ऐ लोगों अपने रब
[24:50]की इबादत करो जिसने तुम्हें और तुमसे पहले वाले लोगों को पैदा
[24:54]किया क्यों इबादत करो क्योंकि वह हमारा खालिक है ना फकत हमारा
[25:01]खालिक है हमारे वालदैन का भी खालिक है उनसे पहले वालों का
[25:08]भी खालिक है ठीक है ताकि लालक ततक तर्जुमा किया ताकि तुम
[25:15]खतरा से बचाओ करो यह खतरा क्या है गुनाह वाले तरा पस
[25:20]इबादत करो ताकि तुम तकवा इयार करो रोजे की आयत में भी
[25:31]है ना ठीक है तो रोजा रखो शायद के तुम तकवा इयार
[25:33]कर तो इबादत का आउटकम इबादत का नतीजा क्या है तकवा इसी
[25:42]तरह क्या है यकीन एक इबादत का नतीजा जो है हमें अल्लाह
[25:52]पर अल्लाह की ताकतों पर अल्लाह के फैसलों पर मजीद यकीन आ
[25:58]जाता है य माहे मुबारक रमजान इसीलिए इबादत हम आसानी से इबादत
[26:04]कर पाते हैं इतने मामूल नहीं आ पाते मस्जिद में जमात की
[26:09]नमाज में नहीं आ पाते लेकिन यह माहे मुबारक रमजान की बरकत
[26:12]जो हमें इबाद तों की तरफ खेच लाती है तो खुदा चाह
[26:18]रहा है इस इबादत के नतीजे में इस रोजे के नतीजे में
[26:24]तुम्हें यकीन दे सके क्योंकि इंसान जो फैसले करता है क्योंकि उसका
[26:30]मान नहीं होता इसलिए जो है वह खुदा की मुखालफत करता है
[26:35]अगर हमें यकीन हो जाए इमाम खमनी के के हम सब मादर
[26:42]महजर खुदा हस्ती यानी खुदा हर वक्त हर लहजे हमें देख रहा
[26:48]है हम एक छोटे बच्चे की मौजूदगी में गुनाह नहीं करते वो
[26:55]बच्चा क्या कहे ऐसे अगर फॉर एग्जांपल खुदा ना करे खुदा हम
[27:07]अगर गाने सुनते हैं तो कोई और आएगा तो बंद कर द
[27:09]मोबाइल की बहुत सारी ना मशरू चीज जो हमें नहीं देखनी चाहिए
[27:17]देख लेते हैं अगर यकीन हो जाए कि इस वक्त खुदा देख
[27:25]रहा है हमारी शहर से ज्यादा नजदीक है क्यक यकीन नहीं है
[27:28]इसीलिए तो गुनाह हो पाते हैं तो यह भी एक आउटकम है
[27:36]इबादत का के इंसान यकीन की मंजिल तक पहुंच जाता है कि
[27:39]वाकया यह ताकत हैं खुदा है हम हर वक्त खुदा के महजर
[27:46]में है खुदा से बचकर कहते ना अगर गुनाह करना है तो
[27:50]व इमाम ने कहा कि ऐसी जगह जाओ किसी ने कहा कि
[27:54]मुझे ऐसा बताए कि मैं गुनाह ना करू तो इमाम ने कहा
[27:59]ऐसी जगह ले जाओ जा खुदा ना हो वहा कर लेना गुना
[28:02]स ऐसी कोई जगह नहीं हर खलत में हर जलवत में हर
[28:10]जगह हर हर जगह खुदा है तो यह भी एक नतीजा है
[28:16]इबादत का कुब खुदा हम खुदा को महसूस कर पाते हैं लम्स
[28:18]कर पाते हैं पास टाइम नहीं है वरना सिर्फ इस पर ही
[28:23]य दर्स जोना पूरा दिया जा सकता है मगफिरत गुना से पाको
[28:31]पाकीजा हो जाता है जब इंसान इबादत करता है तो उसके गुनाह
[28:36]बख दिए जाते हैं खुदा छोटे मोटे गुनाह बख देता है इसलिए
[28:41]इबाद तों से अपने आप को जोड़ना इबाद तों में लगाना अभी
[28:50]मैं वाजिब और मुस्ताहब इबाद तों का इंशाल्लाह फर्क बताऊंगा इंसान तहा
[28:57]जाहिरी तहर का हामिड पाक हो जाती है जैसे एंटीबायोटिक्स काम कर
[29:05]रही होती हैं हमारे जरासी को मार रही होती है इसी तरीके
[29:11]से हमारी रूह के जराम को इबादत मार रही होती य जो
[29:17]आप बारबार अपने आप को इबादत में लगाते हैं य इबादत कोई
[29:21]एक चंद देर कुछ देर अल्लाह की इता में रहने का नाम
[29:29]नहीं है पूरी जिंदगी व जो हजरत इब्राहिम की दुआ है ना
[29:37]के मेरे जो है आमाल मेरी इबादत मेरा जीना और मेरा मरना
[29:45]लिल्ला रब्बिल आलमीन फकत और फकत खुदा के लिए है तो हमारा
[29:52]सुबह से शाम तक इबादत करनी है य बाद सिर्फ नमाज पढ़ने
[29:55]का नाम नहीं है यह जो हम निकल हैं पढ़ने के लिए
[30:01]स्कूल कॉलेज यह जो हम निकलते हैं रोजी कमाने के लिए यह
[30:08]भी इबादत है वापस घर आते हैं घर में आना अपने बच्चों
[30:11]के साथ वक्त गुजारना यह भी इबादत है आदाब सुफ्र के साथ
[30:20]खाना खाना यह भी इबादत है नमक से रोजे खाने का जो
[30:28]आगाज करना इबादत है लहजा लहजा इबादत है इबादत जो है सिर्फ
[30:39]नमाज पढ़ लेना इबादत नहीं है रोजा रख लेना इबादत नहीं है
[30:43]यादे खुदा बहुत सारी चीजें हैं अभी हम इसको मुख्तसर करते हैं
[30:49]सतला अल्लाह का रंग यह क्या होता है कुरान में कहा गया
[30:59]सूर बकरा 138 सतला व मनसन मिन अल्ला ही सका खुदाई रंग
[31:13]तियार करो अल्लाह के रंग से अच्छा और किसका रंग हो सकता
[31:20]है वनल आद और हम तो सिर्फ उसी की की उसी के
[31:34]इबादत गुजार है यह रमजान में हीय बरकत होती है कि हमको
[31:36]ये चीजें समझ में आती है अगर सुबह से शाम तक एक
[31:43]शख्स इबादत गुजार रहा उसका रोजी कमाना उसका बातचीत करना उसकी दोस्ती
[31:48]उसकी दुश्मनी ठीक है ना हर चीज में खुदा से मुतालिक है
[31:54]किस महफिल में जाना है किस महफिल में नहीं जाना है बात
[32:00]करनी है किससे बात किससे ताल्लुक रखना है किससे ताल्लुक नहीं रखना
[32:04]है यह सब अगर अल्लाह के मुताबिक होगा तो खुदा उसको अपने
[32:10]रंग में रंग देगा उस पर सतला उस पर अल्लाह का रंग
[32:20]चढ़ जाएगा हमने होमिया कुम में ऐसी श यात देखी है कि
[32:30]जिनको सिर्फ आप देखें तो आपको याद खुदा आ शहीद आरिफ हुसैन
[32:39]हुसैनी ऐसी शख्सियत थी कि जिन जो हम एक कमरे में बैठे
[32:44]होते थे तो कभी वो बात नहीं करते थे खामोशी से ऐसे
[32:46]नीचे देख रहे होते थे और हम आप आप लोग के जितने
[32:50]थे शायद ना 10थ में का तो मैं उनके पास बैठता था
[32:56]तो मेरे अंदर एक तल हो रहा होता था एक अंदर मेरे
[33:05]तूफान उठ रहा होता था शहीद कोई बात नहीं कर रहे कह
[33:12]नहीं रहे के मेरी तरह दर्स नहीं दे रहे हो खामोश बैठे
[33:14]हुए वह खामोश बैठे हुए भी दर्स दे रहे के उठो इस
[33:23]दीन के लिए कुछ करना है क्योंकि वो इतने हो गए दन
[33:31]की खिदमत करने के लिए अल्लाह की तात में इबाद तों में
[33:33]इतने गरक हो गए यही सबसे बड़ी इबादत है कि मासरे को
[33:40]शैतान से पाक किया जाए ता गूत से पाक किया जाए पूरे
[33:47]माशे को इलाही मशरा कुरानी मशरा दीनी मशरा बनाया जाए यह सबसे
[33:53]बड़ी इबादत है तो सतला उनमें उनको सिफ आपको देखने से अल्लाह
[34:01]की याद आती है यह शायद अल्फाज में नहीं बयान कर सकता
[34:06]आपको इबादत करने का दिल चाहेगा उन हस्तियों को देखकर अग बजत
[34:13]को देखकर आप में एक अंदर एक तब्दीली आएगी वह क्या चीज
[34:19]है व उन पर सतला आ चुका है उन पर अल्लाह का
[34:21]रंग चढ़ चुका है और ऐसे ही बरक्स भी होता है शैतान
[34:28]का रंग चढ़ जाता बाज लोगों को देखकर बस शैतान से नजदीक
[34:37]होने को दे होता है तो यह है नतीजा आउटकम इबादत यह
[34:45]है इबादत तो अब हमने इबादत हमें समझ में आ गई बहुत
[34:51]सारी और चीजें थी लेकिन मैंने उसको छोड़ दिया है इंशाल्लाह फिर
[34:54]कभी आपकी खिदमत में हाजिर होंगे अब को समझने की जरूरत है
[35:01]लज्जत क्या चीज है ठीक है लत जो है वह एक सवात
[35:08]पढ़े मोहम्मद वाले मोहम्मद एक मिसाल से आपको समझाता हूं जैसे एक
[35:20]कोई स्पोर्ट्समैन होता है ठीक है वो स्पोर्ट्स में सारे बच्चे खेल
[35:29]खेलते हैं लेकिन कुछ लोग है ना वह बहुत ज्यादा प्रैक्टिस करते
[35:31]हैं अपने ऊपर सख्ती करते हैं अपना जिस्म बनाते हैं स्ट्रंग करते
[35:38]हैं अपने आप को फिर दूसरे बच्चे दूसरे काम भी करते हैं
[35:43]वह सिर्फ अपने स्पोर्ट्स की तरफ तवज्जो दे रहा होता है हर
[35:47]चीज उसकी इस मेहर पर घूम रही होती है कि मुझे क्रिकेटर
[35:54]बनना है मसला ठीक है तो वो उस अकेडमी को जवाइन करेगा
[35:58]ट्रेनिंग लेगा और सारी अपनी तफरी चीजें छोड़ देगा बस स्पोर्ट्समैन जो
[36:04]है व अपने नफ्स पर सख्ती करेगा ठीक है एक्सरसाइजस करेगा ज्यादा
[36:14]वजन उठाएगा जो है ना वो पसीने में शराब बोर हो रहा
[36:21]होगा खाने की डाइट में यह चीज नहीं खाएगा वो चीज खाएगा
[36:23]ये सब जहमत करेगा और दुनिया को भी तर्क कर देगा ठीक
[36:30]है महफिले दोस्तिगिरी क्या होगा उसको एक कमाल हासिल होगा उसको एक
[36:44]जो है वह किसी एक एक्टिविटी में वह महारत हासिल हो जाएगी
[36:51]उसको ठीक है उसकी जैसी बॉलिंग दूसरे लोग नहीं करा सकेंगे उसकी
[36:55]जैसी बैटिंग नहीं कर सकेंगे तो क्या हुआ उसने अपने ऊपर सख्ती
[37:01]की अपने नफ्स को मारा अपनी दुनिया को तर्क किया तो उसको
[37:08]एक मादी कमाल हासिल हो गया कि वह एक कामयाब स्पोर्ट्समैन बन
[37:12]गया जब कामयाब स्पोर्ट्समैन बन गया अब लोग उसको देखते हैं अ
[37:17]क्या बॉलिंग करता है भाई क्या खेलता है क्योंकि लोग कमाल से
[37:26]मोहब्बत करते हैं ठीक है तो अब अब लोग लोगों की मेहवा
[37:32]बन गया नजरों का मरकज बन गया कोई एक्टर है वो एक्टर
[37:40]ऐसे एक्टर नहीं वोह बहुत मेहनत करते हैं अपनी फील्ड में हम
[37:44]जो है ड्रामों में देखते हैं यार क्या इसने एक्टिंग जब वो
[37:52]इस दर्जे तक पहुंचता है कि लोग उसकी तारीफ करते हैं अब
[37:57]उसको अपने खेल में स्पोर्ट्स में मजा आने लगता है यह है
[38:03]लज अब अब जो है कहता लोग देखेंगे मैं कैसी बलिंग कर
[38:09]उससे भी अच्छी ब उससे भी अच्छी तो यह होते हैं स्टेप्स
[38:15]जब व इस दर्जे तक पहुंच जाता फिर कभी तर्क नहीं करता
[38:20]उसकी रघु में क्रिकेट आ जाता है कह मुझे और कुछ आता
[38:26]ही नहीं है मुझे तो क्रिकेट ही आता है क्योंकि इतनी लज्जत
[38:30]आ गई है यही मराल यही चीजें मानवी लतों में इबाद तों
[38:43]में भी है जब हम इबादत करते हैं अपने नफ्स को मारते
[38:49]हैं अगर हम मुसलसल अपने नफ्स पर जब्र करते जाएं अलबत्ता मुस्ताहब
[38:58]बात में इंशाल्लाह अभी बताता हूं वाज बात में सॉरी वाज बात
[39:01]में ठीक है सुबह फजर की नमाज में मुसलसल अपने नफ्स को
[39:06]हम मारते जाए तके दुनिया दूसरी चीज क्या दुनिया से दूरी मामूल
[39:15]हमारी नमाज फजर इसलिए कजा होती है कि रात को देर से
[39:20]सोते हैं जिस दिन आप जल्दी सोए खुद बखुदा आप क्योंकि नींद
[39:23]पूरी हो जाती है हमारी जो आंख नहीं खुलती है हम बजे
[39:29]सोते हैं दो बजे सोते हैं तो दुनिया में लगे हुए होते
[39:32]हैं तो जिस तरीके से स्पोर्ट्समैन करता है अगर हम इबाद तों
[39:39]में अपने नफ्स पर सख्ती करें और दुनियादारी को तर्क करें तो
[39:48]क्या होगा हमें भी एक कमाल हासिल होगा जैसे उसको मादी कमाल
[39:54]हासिल हुआ था यह हमको मानवी कमाल रूहानी कमा हासिल होगा और
[40:02]फिर जब रूहानी कमाल हासिल होगा लोग आपसे नजदीक होंगे अट्रैक्ट होंगे
[40:10]आपसे जैसे उससे अट्रैक्ट होते तो जिस तरह मादी चीजों में लज्जत
[40:18]है मानवी चीजों में भी लज्जत है वो एक अलग लज्जत है
[40:28]यह एक अलग त मादी लज्जत क्या है खाने की लज्जत खाना
[40:33]खाने की लज्जत ठीक है सोने की लज्जत सोना हमें अच्छा लगता
[40:41]है कपड़े पहनने की लज्जत शादी में जाते हैं सूटेड फटे हमें
[40:44]अच्छा लगता है अच्छा लगता है ना अच्छे कपड़े पहनना अच्छा लगता
[40:50]है यह भी मादी लज्जत है खाने की त और इस तरह
[40:53]दल सही दीन इस्लाम आया है यह आपको बताने के लिए और
[41:03]खुसूस माहे मुबारक रमजान में आपको बताने के लिए कि कुछ लज्जत
[41:08]इससे बाला तर है खाना खाने की लज्जत है ना मैं आया
[41:20]हूं तुमको बताने के लिए कि भूखे रहने में भी एक लज्जत
[41:23]है वो रोजा रख के हासिल होगी जो जो लोग रोजा नहीं
[41:33]रखते ना वह ताज्जुब करते हैं हमें कोई कितने करोड़ रुपए भी
[41:39]दे दे तो हम एक रोजा नहीं छोड़ सकते सवाल पैदा नहीं
[41:42]होता क्यों क्योंकि हमें उस रोजे की लज्जत हासिल हो गई अब
[41:49]हम उसको छोड़ेंगे नहीं उस स्पोर्ट्समैन की तरह सही है तो इंसान
[41:55]को यानी एक है खाना खाने की लज्जत एक है खाने से
[42:05]रुकने की लज्जत सही एक क्या लिबास पहनने की लज्जत हम शादी
[42:10]के बहुत न्यू ब्रांड ईद आएगी हम बेहतरीन लिबास पहनेंगे हमें मजा
[42:14]आएगा लज्जत मिलेगी लेकिन खुदा कहता है कि यही लिबास कुरान में
[42:22]है ना कि वह चीज जिसको तुम चाहते हो इंफाक करो हम
[42:30]क्या करते हैं जो चीज हमारी रफ हो जाती है अब हम
[42:35]नहीं पहनते वह लिबास अल्लाह की बारगाह में सदका करते हैं नहीं
[42:41]ईद वाला लिबास जो आपने आपको सबसे ज्यादा पसंद है आप अपने
[42:45]कबड खोले अलमारी जिसमें सबसे बेहतरीन लिबास जो आपको पसंद है उसको
[42:52]निकाल के किसी गरीब को दे उसकी जो लज्जत है ना वह
[42:57]लिबास पहनने से भी ज्यादा की लत समझ आ रही बस कुछ
[43:03]लज्जत मानवी लज्जत है एक है लिबास पहनने की लज्जत एक है
[43:10]उस लिबास को अल्लाह की राह में देने की लज्जत एक है
[43:17]इल्म की लज्जत जैसे आप लोग में आपको आयत सुना रहा हूं
[43:22]दर्स दे रहा हूं आपको अच्छा लग रहा है मजा आ रहा
[43:27]है ठीक है कोई भी चीज जानता है ना इ य इंसान
[43:28]हैवान से कुछ चीज फर्क है एक है इल्म हासिल करने की
[43:36]लज्जत ठीक है हम पढ़ते हैं नई चीजें जानते हैं कुरान आजकल
[43:40]पढ़ते हैं तो नई नए वाकया नई नई चीज नए मता जानने
[43:44]को मिलते हैं तो इंसान को अच्छा लगता है इल्म हासिल करने
[43:53]से भी एक बड़ी लज्जत है और वह है इल्म दूसरों को
[44:01]देना एक दफा हम मैट्रिक करते हैं हम इंटर करते हैं उसमें
[44:03]अच्छे नंबर लाते हैं क्या होता है हमें अच्छा लगता है भाई
[44:08]मैं क्लास में फर्स्ट आया हूं सेकंड आया हूं ठीक है इसकी
[44:13]एक लज्जत है बिल्कुल है लोग सरते हैं भाई यह बहुत अच्छा
[44:20]पढ़ने वाला है फिर मैं एक दर्जे तक ऐसे पहुंच जाता हूं
[44:22]मैं कहता हूं मैं बच्चों को पढ़ाऊंगा बच्चों को मैट्रिक पढ़ाऊंगा एंटर
[44:32]कराऊंगा उसकी लज्जत वो पढ़ने से ज्यादा है इसको कहते हैं मानवी
[44:37]लज्जत पस आम जिंदगी में हमें मादी लज्जत का तो खुद ही
[44:46]जैसे जैसे इंसान बड़ा होता है ठीक है ना इन लज्जत से
[44:49]आशना होता रहता है अच्छे से अच्छे खाने ठीक है अच्छे से
[44:55]अच्छा लिबास सोना ठीक है शोहरत यह सब मादी लज्जत है लेकिन
[45:04]दीन आया है बताने के लिए यह बहुत थोड़ी देर की लज्जत
[45:07]हैं खाना खाओगे खाने के बाद खत्म लेकिन वही खाना अगर रोजे
[45:19]की सूरत में तर्क करोगे उसकी लज्जत बरकरार रहेगी जैसे हम माहे
[45:26]मुबारक को याद करते रहते हैं हम अपने नेक आमाल को मिस
[45:33]करते हैं मादी चीजों से ज्यादा मिस करते हैं अगर हमने जिसे
[45:36]किसी ने हज किया है किसी ने जो है जियारत की है
[45:42]कर्बला गया है व उसको उसके मंजर उसकी आंखों से जाता नहीं
[45:46]है उसकी एक लज्जत है जो वो हासिल कर चुका है तो
[45:52]इबादत दीन हमें कौन सी लज्जत बताने आया है यह वाली लत
[45:59]इस लज्जत की कुछ खुसूसियत है अपने नफ्स को मारना है नफ्स
[46:08]को कंट्रोल करना है तब जाके आपको यह वाली लज्जत हासिल होंगी
[46:21]अब बेहतरीन लिबास है हमारा उसम दिल लगा हुआ है अ हम
[46:25]तालिब इम में उलमा में किताबों से भी मोहब्बत होती है भाई
[46:31]यह किताब इसमें सारे मेरे हाशिए हैं यह किताब मैं किसी को
[46:33]नहीं दूंगा लेकिन अगर आप खुदा के लिए अपनी बेहतरीन चीज दे
[46:43]तो फिर व इमाम हुसैन वाला यह रास्ता इमाम हुसैन वाला इमाम
[46:49]हुसैन जो है ना मेराज पर पहुंचे हुए ठीक है के खुदा
[46:56]जिसने तुझे खोकर सब कुछ पा लिया किसी के पास दुनिया हर
[47:02]चीज है हेलीकॉप्टर का तो हेलीकॉप्टर आ जाएगा सब कुछ है लेकिन
[47:10]अगर खुदा नहीं है तो उसके पास क्या और अगर इंसान इमाम
[47:17]हुसैन फरमाते हैं अगर खुदा है और उसके पास कुछ नहीं है
[47:20]सिवाय ख इमाम हुसैन के पास क्या था कोई चीज नहीं है
[47:31]सिर्फ खुदा की रजा हासिल है तो उसके पास क्या नहीं हैय
[47:42]माहे मुबारक यह समझाने आया जब इंसान इस दर्जे तक इबादत कर
[47:56]कर पहुंचता है उसको कहा जाता है मकाम अबद इबादत करने वाले
[48:03]का मकाम ये जो सब मैंने नतीजे बताए थे ना सिफला यकीन
[48:07]और जहद तकवा तहा यादे खुदा यह सब जब उसको हासिल हो
[48:16]जाता है उसको कहा जाता है मकामे अबू दियत और यह इंसान
[48:24]का आला तरीन मकाम है से बुलंद आला अल्फा मकाम नहीं है
[48:35]हम रसूलल्लाह के लिए कलमे में क्या क्या पढ़ते हैं तशदूद है
[48:53]और रसूल रसूल का जिक्र भी बाद में आ रहा है अबद
[49:00]का वो सूर बनी इसराइल की जो पहली आयत है जो कि
[49:08]मेराज सुभान अलजी असरा ब अबद ही मैंने उसने अपने अब्द को
[49:16]ये नहीं क रसूल ही अपने रसूल को अपने मोहम्मद को ठीक
[49:19]है यह नहीं कहा अपने नबी को यह नहीं कहा कहा अपने
[49:26]अब्द को मैंने सफर कराया ललन एक रात में मस्जिद हराम से
[49:34]मस्जिद इसका मतलब क्या है मकाम अबू दियत रिसालत से भी बुलंद
[49:42]है बल्कि रिसालत हासिल होती है उसकी वजह से ठीक है तो
[49:48]जब जब हम यह लज्जत लेने लग जाएंगे तो मकाम अबू दियत
[49:57]हासिल हो जाएगा एक सवात पढ़े मोहम्मद वाले मोहम्मद अब यह है
[50:10]फलसफे इबादत जहां तक मैं आपको लाना चाहता था ठीक है फलसफा
[50:16]इबादत आपको अपने नफ्स से अमारा से कट ऑफ करना है इबादत
[50:29]कहते हैं आपको जो हम सुबह से शाम तक जिंदगी गुजारते हैं
[50:35]ना तो हम इन मादत में घुस कैद होते चले जाते हैं
[50:43]माददा परस्ती हम पर हावी होने लगती है तो यह इबादत इसलिए
[50:52]हैं यह माहे मुबारक रमजान इसलिए है कि आपको अपने नसानी हिशा
[50:57]से कट ऑफ करें उसको हमारी जबान में अरबी में कहते हैं
[51:03]इनता इलाही हबली कमाल इता इ द अब हमजा समाली खुदा मुझे
[51:16]इनता का कमाल अता कर इनता क्या है अपने नफ्स से छुटकारा
[51:23]दो चीज नफ से छुटकारा नी ख्वाहिशों से छुटकारा और दुनिया से
[51:31]छुटकारा दुनिया से छुटकारा ये जो आप अभी मस्जिद में बैठे हुए
[51:37]हैं जब आ रहे होंगे नफ्स कह रहा छोड़ो रोजा है आज
[51:43]तो गर्मी बहुत है नहीं जाते आज कल चले जाएंगे तो इसमें
[51:48]तीन चीजें हैं एक हमारा नफ्स है जो हमें आराम की तरफ
[51:55]लाता है सखियों से दूर भगाता है कौन उठता कौन जाता है
[52:01]ठीक कौन जहमत दूसरा क्या है इब्लीस य हमारा कसम खुर्दा दुश्मन
[52:07]है मस्जिद का दुश्मन वह है कोई भी नेकी का इरादा करें
[52:10]आप देखें ऐसी रुकावट आने लगेंगी ऐसी रुकावट आने और तीसरा क्या
[52:25]है दुनियादारी दुनिया से दूर होना हम घर में बैठक आराम से
[52:29]टीवी देख सकते दुनियादारी है अपने बच्चों के साथ वक्त गुजार सकते
[52:38]थे वह अगर खुदा के लिए हो बहुत अच्छा है खुदा से
[52:41]दूरी के लिए बुरा है तो फलसफे इबादत क्या है फलसफा इबादत
[52:51]यह है कि मेरे बंदे तुझे इस दुनिया में भेजा गया है
[52:54]तुझे माया घेर लेंगी तुझे शैतान घेर लेगा दुनिया हु दुनिया तुझे
[53:05]घेर लेगी तू अपने आप को उस से आजाद कर और आजादी
[53:09]का परवाना क्या है इबादत अल्लाह की इबादत अब सारी इबाद तों
[53:19]में देखें इनता है कट ऑफ होना है नमाज नमाज में हम
[53:26]कहते हैं तकबीरत हराम तकबीर एहराम क्यों कहते हैं तकबीर एहराम को
[53:30]तकबीर एहराम इसलिए कहते हैं कि अब हमने कुछ चीजें अपने ऊपर
[53:37]हराम कर दी अब हम बातचीत नहीं कर सकते हर एक से
[53:38]अब हम चल फिर नहीं सकते ठीक है अब हम इधर उधर
[53:42]मुंह नहीं कर सकते डायरेक्शन ठीक है तो कट ऑफ कर दिया
[53:50]हमने अपने आप को दुनिया से मुनकता कर दिया इकता कर दिया
[53:55]रोजा क्या है साल भर खाना खाते रहते हैं जब चाय पानी
[53:58]पीते ठीक है लेकिन रोजे में क्या है इनता कट ऑफ खाने
[54:09]की लज्जत से कटऑफ यह है रोजा हज क्या है हज हम
[54:17]पूरे साल पूरी जिंदगी अपने घर वालों के साथ जिंदगी गुजारते हैं
[54:22]खुदा कहता एक सफर मेरे लिए पैसा खर्च करो क्या है इनता
[54:31]हम जितना भी कमाते हैं अपने अपने घर वालो अपने बच्चों पर
[54:37]खर्च करते हैं लेकिन खुदा कहता है बसवा हिस्सा इनता बसवा हिस्से
[54:42]में अपने ऊपर खर्च नहीं करोगे अपने दन पर खर्च करो तो
[54:50]यह सारी इबादत तकाफ क्या हैका भीता है पूरे महीने माहे मुबारक
[54:57]रमजान के हम रोजा रखते हैं मस्जिद भी आते हैं लेकिन घर
[55:02]वालों से भी मिल रहे होते हैं दोस्त बाब में भी जा
[55:06]रहे होते हैं सारा कुछ कर रहे होते हैं खुदा कहता है
[55:08]तकाफ इकता तीन दिन के लिए इस बाउंड्री वॉल से बाहर नहीं
[55:16]जाओगे तो हर इबादत में खुद से खुदा की जानिब का सफर
[55:24]है सही माशे से अपने आपको को दुनियादारी से हटाना है अपने
[55:34]नफ्स की सरपरस्ती नफ्स परस्ती से अपने आप को दूर करना है
[55:41]शैतान के वसवसे को टकना है और इस इबादत की तरफ आना
[55:49]चाहे वह नमाज हो चाहे वह रोजा हो चाहे व जरत हो
[55:55]चाहे व हज हो चाहे वो तकाफ हो चाहे वह खम्स हो
[55:58]यह सारे वाज बात ठीक है तो फलसफा इबादत क्या है अपने
[56:04]आप को खुद से माशे से निकालकर खुदा की तरफ लाने को
[56:17]इबादत कहते हैं अब सोचे यह कि हमारे पास स बहुत सारी
[56:22]रिवायत हैं बाज लोग रोजा रखते हैं उ सिवाय भूख प्यास के
[56:29]कुछ हासिल नहीं होता य कौन लोग है यह वह लोग हैं
[56:34]जो भूखे प्यासे तो रहे लेकिन अपनी नफ्स परस्ती से नहीं निकल
[56:38]सके दुनिया परस्ती से इकता नहीं किया उन्होंने अपने आप को कट
[56:44]ऑफ नहीं किया तो उनको भूख प्यास से कुछ हासिल नहीं होगा
[56:52]अगर हमारे अंदर रोजा रखकर भी खा की लज्जत मौजूद है तो
[57:00]हम रोजी की असल एसेंस को हासिल नहीं कर सकते नमाज पढ़ने
[57:10]के बावजूद हम किसी और की बात मानते हैं अल्लाह के मुकाबले
[57:18]पर नमाज में भी हम जो हमारे ख्याल औरों की तरफ होते
[57:21]हैं तो वोह नमाज क्या है सिवाय उठक बैठक के कुछ नहीं
[57:28]कुरान पर कुरान पढ़ रहे हैं कुरान की तिलावत कर रहे हैं
[57:34]ठीक है रिवायत में कहा गया है के कुरान जो है वह
[57:40]उन पर लानत करता है जो कुरान की तिलावत कर रहे हैं
[57:46]तो य कौन लोग है यह वो लोग है जिन्होंने दुनिया परस्ती
[57:54]नहीं छोड़ी दुनियादारी नहीं छोड़ी नफ्स परस्ती नहीं छोड़ी तो अब उनको
[58:00]व नमाज वो नमाज नहीं रही रूहे नमाज इनता है रूह रोजा
[58:07]अपने आप लतों से कट ऑफ करना है मादी लतों से ठीक
[58:13]है रूह कुरान क्या है कि अपने आप को कुरान की इता
[58:18]में डालना है कुरान ने जो कह दिया फाइनल अब कोई मुझे
[58:25]हिला नहीं सकता सही तो फलसफा इबादत क्या हुआ फलसफा इबादत यह
[58:32]हुआ कि हमें हमारे अंदर जो नफ्स की मोहब्बत है हमारे अंदर
[58:40]जो दुनिया की मोहब्बत है हमारे अंदर जो इब्लीस शैतान की तरफ
[58:51]जाने के का रुझान है वह जीरो कर दिया जाए तो हमें
[58:56]कट ऑफ हासिल होगा और यही कट ऑफ लज्जत मानवी की चाबी
[59:03]है हमें क्यों नमाज में मजा नहीं आता हमें क्यों रोजों में
[59:12]मजा नहीं आता एक रिवायत है इंशाल्लाह आपके सामने पढ़ते हैं बहुत
[59:16]ही बेहतरीन है देखें यह लोग हैं काल रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वा
[59:26]वसल्लम अल्लाहु सल्ले अला मह अल नास मन अलबादा सबसे बेहतरीन इंसान
[59:39]सबसे अफजल तरीन सुपरलेटिव डिग्री इंसानों की कौन से हैं मन अशक
[59:51]इ बादा जो आशिक है इबाद तों के येय कौन लोग हैं
[59:58]आगे बताया जाता है वह मैं तर्जुमा करता हूं ताकि जो है
[60:06]ना आसानी से आपको समझा सक वह उस इबादत से गले मिलते
[60:14]हैं मानेका करते वह बहा ब कलही दिल से इबादत को चाहते
[60:29]हैं दिल से उसको चाहते हैं वा बाशा रहा बे जस देही
[60:40]और अपने जिस्मों से उस इबादत को लम्स करते छूते हैं वत
[60:48]फरर लहा और अपने आप वक्त निकालते फारिक करते हैं उस इबादत
[60:58]के लिए पस अफजल तरीन इंसान कौन है जो इबादत के आशिक
[61:07]होते हैं वह उससे मानेका करते हैं जैसे गले मिलते हैं वह
[61:11]उसको दिल से चाहते हैं उनके जिस्म उस इबादत को लम्स करते
[61:20]हैं महसूस करते हैं और वह अपना वक्त निकालते हैं हमारे पास
[61:24]वक्त कहां है हमारे पास मोबाइल के लिए ट के लिए हर
[61:31]फारिक चीज के लिए वक्त है अगर वक्त नहीं है तो इबादत
[61:37]मस्जिद में आने का वक्त नहीं है बस यह रमजान आ गए
[61:42]तो हम आ गए फिर वक्त नहीं है जुमा पढ़ने का वक्त
[61:45]नहीं है नमाज का वक्त नहीं है रात में अल्लाह से मुलाकात
[61:51]का वक्त नहीं है हुला य बाली वो परेशान नहीं होता यह
[62:01]शख्स जो है ना परेशान नहीं होता क्या हदीस है किस चीज
[62:05]से परेशान नहीं होता के उसकी दुनिया आसानी में होती है या
[62:15]मुश्किलात में होती है उसको परवाह नहीं है जितना आप सोचते जाएंगे
[62:29]ना आप मजूज होते जाएंगे ठीक है बस यह अफजल तरीन इंसान
[62:33]की हदीस हमें पहचान बता रही है कि यह वह लोग हैं
[62:40]जो इबादत से इश्क करते हैं इश्क यानी मोहब्बत से भी ऊपर
[62:45]वाली डिग्री और वसे इतने मानूस होते हैं कि उनके जिस्म उसको
[62:50]लम्स करते हैं उनका दिल उनको चाहता है वोह उससे गले मिलते
[62:56]हैं नमाज से गले मिलते हैं रोजे से गले मिलते हैं हज
[63:02]से गले मिलते हैं जि रतो से गले मिलते हैं ठीक है
[63:09]और उनकी आखिरी पहचान क्या है व उनको फारिग एक तो वक्त
[63:13]निकालते हैं इबादत के लिए और परेशान नहीं होते उनको दुनिया में
[63:18]मुश्किलात आती है यह आसाया आती है परेशान नहीं होते हमें इस
[63:26]दर्जे तक अपने आप को ले जाना है यह माहे मुबारक रमजान
[63:32]इसलिए आया है कि हम अपने अंदर इबादत का इश्क पैदा करें
[63:38]जब इश्क आ जाता है ना इश्क की पहचान होती है कि
[63:39]उसके बगैर नहीं रह पाता जैसे हमें इमाम हुसैन से इश्क है
[63:47]दुनिया की कोई भी ताकत हमें जुदा नहीं कर सकती ये इश्क
[63:55]की पहचान होती है ऐसा ही नमाज हो जाए हमारे लिए नमाज
[64:01]फजर हो जाए हमारे लिए सिर्फ रोजे रमजान के लिए नहीं है
[64:09]साल भर भी रोजे रखते जाएं हमें उससे इश्क हो जाए हम
[64:15]दिल से रखेंगे फरार नहीं करेंगे बाज दफा क्या होता है मौलाना
[64:23]साहब अब रमजान आ गया अब तो रोजा रखना पड़ेगा जबरदस्ती सही
[64:27]है तो यह रिवाय तों में कहा गया है कि मुस्ताहब बात
[64:32]और वाज बात वाज बात में अपने नफ्स को मारो सख्ती करो
[64:39]उस पर अगर फजर में नफ्स नहीं उठने दे अपने ऊपर जबरदस्ती
[64:47]करो उठना मुस्त बात में नहीं जब नफ्स आमादा हो तैयार हो
[64:58]दिल से ऐसे लोगों की तरह तब मुस्ताहब बात अंजाम दो वाजिब
[65:02]रोजे के लिए नफ्स को नफ्स नहीं मान रहा है उसको उसको
[65:07]खाना खाना है ठीक है उसको मारो लेकिन वाजिब रोजों के इलावा
[65:16]उस वक्त रोजा रखो जब आपका दिल चाहे अपने नफ्स को वहां
[65:19]तक तो लाना पड़ेगा हम तो बिल्कुल ही जिसको कहते हैं बैक
[65:25]बेंचर स्टूडेंट है हमारा नफ्स तो कभी आता ही नहीं है इस
[65:32]पर कि हम रोजा रखें हम बहुत पीछे रह गए हैं इन
[65:39]अफजल तरीन लोगों के उसमें हम बहुत पीछे रह गए हैं बस
[65:42]मैं खुलासा करता हूं फलसफा इबादत भी हमने समझा कट ऑफ करना
[65:48]है अपने नफ्स से अपनी दुनिया से अब यह हालत हासिल कैसे
[65:51]होती है इंशाल्लाह तफसील से तो हम फिर फिर कभी बयान करेंगे
[65:57]सिर्फ मैं आपको सिर्फ लिस्ट बयान कर दूं अपने नफ सानी ख्वाहिश
[66:01]पर काबू पाना अपने आप को हुब्ब दुनिया से निकालना वसवसे शैतानी
[66:08]से अपने आप को आजाद करना अल्लाह पर ईमान में तकविम खुदा
[66:14]है हर चीज यह जो पिलर है यह पिलर खुद से खड़े
[66:20]हुए नहीं हुए खुदा की वजह से खड़े हुए इतना ईमान हो
[66:26]हमारा ठीक है और लुकमा हराम से अपने आप को परहेज करना
[66:29]लुकमा हराम आपको इबादत की तरफ नहीं आने देगा कहते हैं कि
[66:37]रिस्क के 10 जुज है नौ जो है वह हलाल रोजी कमाना
[66:44]है इबादत के नौ जुज अगर आप हलाल रोजी कमाते हैं तो
[66:50]आपने 10 में से न नंबर हासिल कर लिए यह एक सारी
[66:57]इबादत सारी चीज तो आप देखें यह कितना है और उसी के
[67:04]बाद जो है इंसान को तौफीक इबादत हासिल होती है इमाम अमीर
[67:07]मोमिनीन अली ने अबी तालिब अल सलातो सलाम की हदीस है जब
[67:13]खुदा किसी बंदे को चाहता है यानी उस पर कर्म करना चाहता
[67:20]है हां उस पर उसको कुछ अता करना चाहता है तो इसके
[67:27]दिल पर इबादत की अच्छाई इल्हाम कर देता है फिर हम चाहने
[67:34]लगते हैं खुद इबादत के बगैर वाखर दावा हमदुलिल्ला रब्बिल आलमीन खुदा
[67:39]वंदे मुताल हमारी इस कलील से इबादत को कबूल फरमा इस दर्स
[67:44]में जो जो कुछ हमने इल्म हासिल किया उस पर हमें अमल
[67:49]करने की तौफीक इनायत फरमा खुदा बहुत सारे मरीज है जिन्होंने इतमा
[67:53]से दुआ कहा है इस बाबकॉक उनको जल्द अस जल्द शिफा आजल
[68:00]इनायत फरमा दे बहुत सारे असीर हैं बेगुनाह असीर हैं जिन्हें जो
[68:04]है वह पाबंद सला सल किया गया है उनकी जल्द जल्द रिहाई
[68:10]फरमा ऐ खुदा हमारे मरहन को इस माह में उनकी कब्र में
[68:12]नूर अहले बैत इनायत फरमा इला आमीन ऐ खुदा हमारे गुनाह चाहे
[68:18]छोटे हो बड़े हो यह महीना तूने कहा माफ करने वाला महीना
[68:25]है खुदा हमें गुनाहों से पाक और साफ कर दे खुदा कल्बे
[68:27]नाजनीन इमाम जमाना को हमसे खु शूद राजी फरमा दे उनके जहूर
[68:35]में ताजल फरमा दे वाखर दवाना हमदुलिल्ला रब्बिल आलमीन
0 Comments
sort Sorteer op
- Top Reacties
- Laatste Reacties
Volgende
7 Bekeken · 25/06/05
8 Bekeken · 14/03/09
7 Bekeken · 15/01/30
12 Bekeken · 15/05/11
9 Bekeken · 15/05/19
24 Bekeken · 24/08/10
