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Batil Aqeedo K Khilaf Imam Hadi Ki Hikmat Amali | H.I. Mujahid Hussain Damani
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Record date: 30 Jan 2022 - باطل قوتوں کے خلاف امام ہادی کی حکمت عملی
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2022 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:00]झाल हेलो हाउ टो ब्लर हिस्सा मीनल वाली मेन अशिक्षित और लूज
[0:21]सुने हैं कि बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम मीडियम अलहम दो लिललाह है रब्बुल आलमीन [संगीत]
[0:35]अलहम दो लिललाह अल्लाह सीईए लहतो देवी को अब नार्मल हुआ यह
[0:46]बिलकुल अब स्कूल अल्लादीन धुमिल लुट निशान अध्यक्ष अनिल धूपर धीमा सिलेंडर
[1:12]महिमा है आप सल्लल्लाहू अलैही वाला रिबन तहत विभिन्न अतः रीनल मासूम
[1:23]मिनल मजलूमीन अली मुर्तजा बिन अल मुस्तफा बिन अल अमीन अल मदीना
[1:29]अल्लाह हो ओम मां से मिलने वाले सीमा वक्रीय तिल आईएफ ई
[1:49]लव धुंध रूह विवाह होना होल पैदा अल्लाहुम्मा लेवल यह खजूर हिस्सा
[2:04]लिया बदल लें अथवा सकता हुं कि वह तो मत याह तू
[2:17]पी हॉट नवेल ओं 9 मार्क्स अलार्म हम माझा लिए के मोहम्मद
[2:26]व लाइन अधीन अभियुक्त तमिल अम्मा कॉल अल्लाह तबारक यॉजिक बिस्मिल्लाहिर रहमानिर
[2:58]रहीम अधीन नियुक्त लुटला लुटला लुटला लुटला लुटला लुटला लुटला में का
[3:16]होमो लल बॉब स्वाद विश्वविद्यालय महानुभाव वाले महान है मैं ऑफिस जाने
[3:29]के स्वामी कौन सा महीने के वह आम कि मुझे गाने मोहतरम
[3:35]की इजाजत से अ कि गुफ्तगु का मौजूद है की बातें दिल
[3:42]हकीमों के खिलाफ बातें तिलक हित के खिलाफ हुआ है कि इमाम
[3:50]में हाथ दिमाग में अली नक़ी अलैहिस्सलाम तो अस्सलाम मां विश्वविद्यालय मोहम्मद
[3:59]वाले के भविष्य और उनकी हिकमतें फैमिली है कि इस मौजूद को
[4:08]समझने से पहले 220 मौज़ू का मुकम्मल विधवा करने के लिए कि
[4:12]हम तीन चीजों का मुशाहिदा करेंगे कि सबसे पहले तो यह देखेंगे
[4:19]कि खुदा खरीदने की क्या अहमियत है तब जाकर यह समझे कि
[4:22]बात है ल खरीदा क्या है कि दूसरे मोहल्ले में हम यह
[4:31]समझेंगे कि के बातें लिखी गई की बात तेल आकाश की स्थिति
[4:33]लाभ कि वुजू हाथ क्या है वह क्या अस्बाब है जिनकी वजह
[4:38]से इंसान का अकेला खड़ा हो जाता है और तीसरे माले के
[4:44]अंदर खुद दिमाग में हल्दी कि क्या सर्विस थी क्या एक मत
[4:50]यह मिली थी है जिसके जरिए से इन्होंने मार्श हुए दो बातें
[4:53]लाल किले के विवाद को रोका को देखें रसूले अकरम मोहम्मद मुस्तफ़ा
[4:58]सल्लल लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम घुमाएं यह लवर महंमद वाले
[5:06]मोहम्मद कि कि इस दुनिया से गहलोत के बाद के मुख़्तलिफ़ जगहों
[5:17]पर मुख़्तलिफ़ मुक़ामात पर ए रसूल की गहलोत के बाद से ही
[5:25]वसूल की आंख बंद होते ही मैं जाली व्यक्त की एक फैक्ट्री
[5:30]खुल गई थी कारखाना खुल गया था हत्या रसूल की बेटी के
[5:37]सामने भी ज्यादा व्यस्त पेश की गई थी है इसके इलावा भी
[5:42]में वसूल सल्लल्लाहू अलैही वा आलेही व सल्लम की सच्ची याददाश्त को
[5:48]बयान करने से रोक दिया गया जिस जमाने को हम कहते हैं
[5:53]यह देश मंे हदीस है कि हदीस को बयान करने से मना
[5:59]कर दिया क्या अज़ाब पाबंदी लगा दी गई के हदीस को बयान
[6:02]न किया जाए जिसका फायदा किसने उठाया तो दूसरे जो पहले के
[6:09]तार थे कि यहूदी और नसरानी उन्होंने मौके से फायदा उठाया और
[6:17]लोगों के दरमियान अपनी तहरीर सुविधा किताबों से यह वाख्या गौतम भैया
[6:22]के किस्से मनघड़ंत बातें है जैसे यह सदैव उनके बारे में कि
[6:29]क्या सदैव नॉलेज नॉलेज महिला किसी के इश्क में गिरफ्तार हो गए
[6:35]थे यह इस्लाम की किताबों के अंदर आपको जो मेघनाद नजर आती
[6:38]हैं उन उबला मनसुख ज्योति है जब दाउद से वह कहां से
[6:42]आई है तो यही इस्राइली याद है कि जो रसूल सल्लल्लाहु अलैहि
[6:49]वालही वसल्लम के जमाने के बाद हदीस को बयान करने पर पाबंदी
[6:52]लगा दी गई तो वह ले किताब कि वह अ शिवानी और
[6:59]वह यहूदी या ईसाई किसी ने मौका मिल गया वहां कर अंबिया
[7:05]के तयशुदा किस्से और के जरिए से मुख्तलिफ हुआ याद को इस्लाम
[7:13]के अंदर पेश करते हुए उक्त कार्य इस बात की गवाह है
[7:15]हफ्ता जो अहले सुन्नत की किताब है सही बुखारी उसके मोहल्ले के
[7:23]कहते हैं है कि मेरे पास मैं 10 लाख यह आदेश का
[7:31]अंबार मौजूद स्थल जिसकी मैंने गोलमाल के जरिए से छाती की सफाई
[7:36]की तब जाकर 2500 या इससे ज्यादा आदेश बचती हैं कि खुद
[7:43]उनके उलेमा इस बात पर परेशान हो गए थे है कि यह
[7:49]लाखों हदीस इतनी आबादी तो कोई आम आदमी भी क़ुबूल नहीं करेगा
[7:55]के वसूल सल्लल्लाहो वाले वसल्लम की 63 साल की जिंदगी में जो
[7:59]भय पूजा अंगों पर मुश्तमिल है और जंगे इतनी ज्यादा थी कि
[8:06]अल्लाह के रसूल के अहादीस मुमकिन नहीं है कि इस कदर ज्यादा
[8:09]हो सके क्यों एक कारखाना है शाम था कारखाने शाम के अंदर
[8:15]हम इसे मुसलसल तरीके से गड़ी जा रही थी और बनाई जाएगी
[8:20]थी जिसका नुकसान खुद मुसलमानों को हवा तो मुसलमानों को एल्बम नहीं
[8:23]था अ काहे न्यायाधीश से बना करते थे को खूब हकीम झाल
[8:30]क्या अकेले को अब लिप्स को हम अपने ऐतबार से आजादी करके
[8:38]हम नहीं मान सकते क्या नहीं इस्लाम इजाजत देता है आप खुद
[8:42]सोचें फ्रीडम देता है थॉट की सोचने की प्रकट की शख्सियत के
[8:50]मामले में कि पुरानी मस्जिद की सुबह बक़रा की आयत है लाइक्रा
[8:54]हफीजुद्दीन कतई ना हो शो में ढल गई आज के दिन के
[9:00]अंदर कोई जवाब नहीं है कोई शक्ति नहीं है अधीन को अपनाने
[9:06]के अंदर अ कि देखो अपनाने के अंदर कोई शक्ति नहीं है
[9:08]कोई खबर नहीं है कल तब यह इशू मिल गई हिदायत तो
[9:13]वहां से हो चुकी है जलालत और घुमाई के मुकाबले में जो
[9:18]पिज्जा सूर्य बकरा की 256 भी आए थे यह तो जहां परवरदिगार
[9:23]ए आलम यह है कि दिन में किसी किस्म का कोई जवाब
[9:28]नहीं है दिन को अपनाने में अकेले के अंदर किसी किस्म का
[9:31]कोई जोड़ नहीं है हां जब पिक में आ जाते हैं तो
[9:35]पिक में जैसा खुदा ने कहा है वैसा ही अमल करना है
[9:39]इंसान एक ऐसी जगह हो जहां पर उसके लिए पानी मयस्सर न
[9:44]हो जाए इस पानी मयस्सर न हो लेकिन उसके पास गैस भी
[9:49]पानी हो गए सभी पानी की पूरी टंकी मौजूद हो उसे कहावत
[9:53]करनी है तो है वह भी हासिल करनी है वह सूर्या गुसल
[9:59]करना है उसके पास हलाल पानी नहीं है गैस भी पानी है
[10:03]अक्ल यह कहती वह अपने आप को ढूंढ है कुछ जाकर इस
[10:08]पानी से धो ले खुदा कहते है नहीं मिट्टी को अपने मुंह
[10:09]पर मारो लो कि गैस भी पानी से शुरू नहीं कर सकते
[10:14]टाइम के वह मट्टी अपने मुंह में माय बजाय है वह यह
[10:19]समझ जाए किस मिट्टी से उसका चेहरा गंदा हो जाएगा लेकिन फाइबर
[10:21]दिखाएगा आलम चाहता है कि खुदा की इताअत के अंदर कौन सा
[10:27]शख्स कितना आगे बढ़ जाता है सलवार पड़े मोहम्मद सालेह मोहम्मद का
[10:31]मांस व मोहम्मद वाले मोहम्मद तुम जब तक इंसान अपने फर्ज में
[10:41]अपने नजरिया में अपने पिछले अंदर सोचता है तो खुदा ने इजाजत
[10:47]दी है अफरीदी के अंदर इंसान अक्ल को इस्तेमाल करें और बुरहान
[10:51]और स्थित लाल से ए लॉजिकल रीजनिंग से अधीन के अमित को
[11:01]अपनाएं है लेकिन जब यही इंसान इजहार पर आता है यही इंसान
[11:04]मैं अपने अकाउंट को पेश करने की मंजिल में आता है तब
[11:11]अल्लाह ताला ने चंद मेंहदी याद रखे हैं चल लिमिटेशंस रखे हैं
[11:13]चंद्रपुर देवी रखें कि देखो मैंने तुम्हें मुकम्मल इजाजत दिए तुम अपने
[11:21]जहन में जो इधर रखना चाहते हो रखो लेकिन जब इजहार की
[11:23]बारी आएगी तो इस्लाम बातें लकवे के खिलाफ मुखालिफत का ऑप्शन वक्त
[11:31]है वह काले फत का तरीका बताता है हमारे बिल मारूफ़ व
[11:37]और नहीं अनिल मुनकर का तरीका बयान करता है कि देखो आकाश
[11:40]अगर सही हो मां रूपकला हो तो खूब से अपनाओ लेकिन अगर
[11:47]मोनू के वक्त चीजों बात है लकी रहो इस्लाम इसकी इजाजत नहीं
[11:52]देता आ कि तमिलनाडु मुक्तसर तरीके से अगर हम इसे समझें तो
[11:57]जब इंसान किसी बात है लकी देखो देखें तो इस्लाम ने बताया
[12:04]हमारे दिल में आए वह अनिल मुनकर का तरीका बताया है तीन
[12:06]महिला बताएं सिर्फ अल्फाज को मुक्तसर तरीके से बयान करके चुके हुए
[12:14]माइक्रोफोन निर्मलकर पूरा एक मौजूद है सबसे पहले इंसान के दिल में
[12:18]इंकार होना चाहिए बातें लकी डे के खिलाफ इनका काव्य कलबी दिल
[12:21]का फल भी इंतजाम इंकार इंसान के दिल से बेरोजगारी साझा करें
[12:30]है और उसके बाद अगर उसके लिए थोड़ा सा और मुमकिन है
[12:33]तो निशान से जवान से इनकार करें जो तीसरा महिला है वह
[12:40]महल्ले वुक़ू है फिजिकल इनका फैमिली इन काव्यावली पहले इनका बिल्कुल भी
[12:46]था दूसरा इनका हुए निशानी तीसरा इनका अमेली फिजिकली इंसान इंकार कैसे
[12:53]कर सकता है कैसे इंकार अभी वाला यह कैसे नहीं अनिल मुनकर
[12:59]कर सकता है कैसे रोक सकता है सामने वाले को है तो
[13:02]उसके लिए इस्लाम ने जन्म मेंहदी याद रखिए है कि जब इंसान
[13:10]फैमिली तौर पर इनकार करना चाहे तो उसके भी तबीयत हैं मसलन
[13:16]मिसाल के तौर पर एक इंसान देखता है कि मैं किसी के
[13:18]बात है लकी दे को सुनूंगा तो बातें लकी देखो सुनते ही
[13:24]कि मैं जब आंखों को भरकर गुस्से में उसे देख लूंगा तो
[13:28]उसे गुस्से में देखने के जरिए ही मुश्किल हो जाएगा इतना उसके
[13:33]लिए काफी है है इससे बढ़कर अगर मैं उसकी मजलीस से या
[13:38]उसकी महफिल से या उसके 10 से उठकर चला जाऊंगा तो इतना
[13:46]ही काफी है है या यह कि मैं उसे उसके के लिबास
[13:50]की वजह से उसके चेहरे की वजह से टो का या तो
[13:55]उसका फ़िदा विवाह पानी से उस जाएगा मसलन जब मैं याद गया
[14:01]तो काफिले के साथ एक शख्स साख वह शख्स यह तकलीफ कहना
[14:07]था कि जो भी नमाज के अंदर शहादतें साले जैसा कि आप
[14:09]सब जानते क्या चीजें नमाज के अंदर कैश युद्ध के अंदर है
[14:14]अल्लाह की गवाही के बाद वसूल की गवाही के बाद मौला अली
[14:18]की गवाही नहीं देता है न उसमें मिला मिर्जा गालिब उसकी नमाज़
[14:21]बातिल है और उसने हराम काम किया उसने नहीं पड़ा है और
[14:25]अब मैं भी वहां पर खड़ा हुआ था मेरी उम्र बहुत कम
[14:29]थी मैं मुख्यालय स्थित लाल के जब यह से उसे समझाने की
[14:33]कोशिश कर रहा था लेकिन वह समझ आता है ना कि आप
[14:38]लेकर दूसरे अपराध एक बुजुर्ग एक शख्स जो बहुत एग्जिट थे उन्होने
[14:42]मुझे रोका और वह प्रकार कैसे मैं जवाब देता हूं का लोगों
[14:50]सुनो इस चीज की तो दाढ़ी नहीं है जिसकी दाढ़ी नहीं हो
[14:52]उसकी तो चांद की गवाही को बोलने की जाती आकार में फैक्ट्री
[14:56]में कैसे कार्रवाई शुरू की जाएगी सिर्फ इतना मुलाकात को इससे लाल
[15:00]नहीं किया कोई गल नहीं क्या कोई गहने क्या सावे कि आपने
[15:03]वाले करने लगे हां इसकी तो गाड़ी नहीं है यह तो फांसी
[15:06]को पास है वह अ है तो क्या-क्या इसने अमर विनिमायकों नहीं
[15:09]अनिल मुनकर के स्टाइल को पहचाना कि किस वक्त क्या बात की
[15:15]जाए के फलों शख्स का सामने वाले कहा कि द विवाह पाने
[15:19]से वह जाए उन बुजुर्ग हंसी जो मैं हूं मैं चुके हैं
[15:21]उनकी मदद के लिए नक्सलवाद बढ़े मोहम्मद वाले मोहम्मद महिला आई लव
[15:30]मोहम्मद अल ए मोहम्मद फिजिकल अमली तौर पर नियुक्त करने के अंदर
[15:36]महाराज ने को यूं लगाइए मसलन पानी के इस्लामी नहीं मानते हैं
[15:45]कि जब तक इंसान के लिए इंसान के लिए लो लेवल का
[15:52]मुमकिन हो वह से बड़े लेवल पर नहीं जा सकता मसलन जिसके
[15:58]लिए दिल से कि इनकार और दिल से हमें बिल मारूफ़ करना
[16:01]मुमकिन हो और उसे पता हो कि मैं मसलन दिल से इंकार
[16:06]करते हुए बीवी खुद की बदन की कैफियत ऐसी हो जाएगी कि
[16:11]सामने वाला वह जाएगा तो रिलेशन की तरफ नहीं जा सकता जवान
[16:12]की तरफ नहीं जा सकता जब उसे पता चले कि अगर मैं
[16:17]जवान से कहूंगा तो तहसील का इस्तेमाल है असर होने का इस्तेमाल
[16:23]है तो तब तक वह अच्छा दोस्त की तरफ नहीं जा सकता
[16:24]वायलेशन की तरफ नहीं जा सकता मारपीट की तरफ नहीं जा सकता
[16:31]तीसरा जो महिला है उसके अंदर फरमाते हैं कि इस मुए दें
[16:36]जहां कत्ल की बात आती है जहां तत्वों की बात आती है
[16:38]किसी के बाद तिलक कि देश के खिलाफ वहां उपाय आपको जा
[16:42]मुशाहिद पक्की की इजाजत लेनी पड़ेगी जैसा कि आपको सलमान रुश्दी के
[16:48]वाकई में नजर आता है कि सलमान रुश्दी के वाकई में जहां
[16:51]मुशाहिद क्योंकि इन्हें वह कभी विमान खोमैनी ने फतवा दिया कि इसका
[16:55]पतंगबाजी बैक यह पॉसिबल कातिल है इसके दादा आपको इस तरीके से
[17:02]हमारा जो मदद की कैफियत नजर नहीं आएगी कि किसी का बात
[17:07]है लकी जाए तो जाकर उन्हें बदल कर दिया जाए नहीं जा
[17:09]हमेशा वाइबर की की इजाजत जरूरी है बिल्कुल यही नजरिया मैं हूं
[17:15]है तो लक्ष्मी कभी है महज में जरूर यह सफर नंबर 30
[17:20]69 में तो तीसरे वाले के अंदर यह जरूरी है कि आमिर
[17:22]शेरावत की इजाजत हासिल की जाए तो यह खरीदा है अकेले की
[17:29]अहमियत कि कितनी ज्यादा है आजादी आपने सुन ली इसकी महत्व दिया
[17:32]आपने सुन ली खुद अ कि देश की अहमियत कितनी जाता है
[17:36]हम जो बच्चों को सिखाते हैं अल्लाह एक है पंजतन पांच है
[17:39]इमामबाड़ा दें मासूम 14वें अंबिया बहुत सातवें या 124000 नबी दें इसे
[17:48]मामूली ना समझे इसे कम न समझें है कि हम जो आकाश
[17:53]बच्चों को सिखाते हैं वह अब्दुल अजीज में हस एनी फैमिली उन्नति
[17:59]थी हाजी अली सलातो अस्सलाम सलवार पड़े मोहम्मद वाले मोहम्मद मांस व
[18:03]आई लव मोहम्मद अली मोहम्मद कि सामने पेश होकर इसी तरीके से
[18:12]बयां करें या विवाहित को देखेंगे तो होंगे जिनका चेहरा और इमाम
[18:21]ने उन्हें बशारत दी थी कि हवन कराया बल्कि इसे ओपन तुम
[18:29]मेरे बेहतरीन दोस्तों और राहत मिलती है कि जिसने भी की कि
[18:36]वह ऐसा है जैसे उसने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत के पास
[18:46]आते हैं और कहते हैं कि अल्लाह मेघ दे लंबा है मासूम
[18:51]14 अब आपको देख-देख इतनी अहमियत है कि अब्दुल नजीर हसन कहते
[18:57]हैं कि दखल तो अल्लाह यह दी अली अपने मोहम्मद फल अम्मा
[19:02]वसूला भी ऑल लिए मैं हवन दिखाया बल्कि SIM अंधत्व लियोन अपन
[19:09]जब शाहिद नदीम हसन इमाम आदि के पास आए तो कहा इमाम
[19:10]महदी अलैहिस्सलाम ने तुम मेरे बेहतरीन दोस्तों तो शायद राशि में शनि
[19:14]कहते हैं कि मैं आपके सामने अपने अधीन बयान करना चाहता हूं
[19:19]इन्हीं ओरिगैनो हमने ayurveda लाइक आदि नहीं मैं अपना दिन बयान करना
[19:21]चाहता हूं किमाम ने का हाथ या बलकार सिंह बयान है वह
[19:26]तो कहा कि इन या स्कूल अल्लाह वाहिद है इन नव वह
[19:32]वाहिद अल्लाह तबारक व ताला वाहिद अल्लाह एक है लें ऐसा काम
[19:35]शु उसके जैसा कोई नहीं है जाने ग्रामीण देखें शब्द अजीम हंसनी
[19:43]जैसा अजीम साहब इमाम के पास आकर अपने आपका इसकी साइज ले
[19:46]है कि अल्लाह एक है उसके जैसा कोई नहीं है यहां लाई
[19:51]सा असली शहद हम तो अपने सफेद कब सुनाते जाकर जब इंसान
[19:56]मुर्दा हो जाता है जब कब्र में दफ़न किया जाता है तब
[20:01]उसे शांति हिला-हिलाकर कहते हैं कि देखो याद रखना अल्लाह एक है
[20:06]अल्लाह तरह क़यामत ह किमाम हक विलायत हक पुलिस सेवा अ यह
[20:13]सारी चीजें हम कवर में कहते हैं चावल जिम हुसैन ज़िंदगी ने
[20:15]जाकर किमाम को अपने आकार पेश करें हम आपको अपना काम की
[20:20]तारीफ हासिल करें हमसे है कि लहसुन का मछली शहर उसके जैसा
[20:27]कोई नहीं है लेकिन आज का मौसम में वह गालियों के और
[20:28]गुल्लू करने वालों के जुमलों को सुनता है और बह जाता है
[20:34]यही आयत कुरान ए मजीद की लालसा कमीशन ही शहर के खुद
[20:40]अल्लाह के जैसा कोई नहीं है एक गाली जाकर एक बैक कवर
[20:46]जाकर आता है और आंखें मोमिन इसे कहते देखो यहां पर लई
[20:48]सा का मैथिली ही अच्छा है यहां पर मिस्लि दिया है वो
[20:52]काफी आया है काव्य में तस्वीर के लिए आता है तो कोई
[20:58]नहीं है मैथिली ही अल्लाह के जैसा यह का आप क्या है
[21:00]तो का के बारे में यह कहता है यह मौलवी कहता है
[21:04]कि काश जायदा है जो जायदा है वह अल्लाह से भाई देकर
[21:10]वह कोई साइड है उसको इज्जत कलाम कहे यह मौलवी कैसे का
[21:16]आपको ज्यादा कह सकता है अल्लाह है कि जो शायद कलाम ही
[21:18]नहीं सकता तो फ्रेंड्स यह क्या मतलब है यह कहता है इसका
[21:22]मतलब यह है लखनऊ विश्वविद्यालय के अल्लाह के मिशेल के मिशेल अल्लाह
[21:26]के मिशन के जैसा कोई नहीं है नवोदय विद्यालय अल्लाह के रसूल
[21:32]मौला अली है तो अल्लाह के मिशन के जैसा कि मौला अली
[21:33]के जैसा कोई नहीं है न उस मिला मिला लेंगे तो यहां
[21:37]क्या किया इसने इसने मार न को एक तो खुद जो सुनने
[21:42]वाले उन्हें अभी का दिमाग नहीं है कि वहां अभी के अंदर
[21:47]जो कलाम के अंदर कहा जाता है यह हजुर है जाहिदा का
[21:49]मतलब यह नहीं एक्स्ट्रा है ज्यादा का मतलब यह नहीं यह फालतू
[21:54]है जायदा क्यों कहा जाता है इसलिए कहा जाता है ताकि ज्यादा
[22:00]ताकि लगाई जाए मसल आप उर्दू में कहते हैं कि अल्लाह के
[22:03]जैसा फाल कोई है ही नहीं तो आप यह कोई है ही
[22:09]नहीं यही क्या चीज है आप यह भी कह सकते थे अल्लाह
[22:14]के सिवा कोई नहीं है लेकिन आपने का कोई है ही नहीं
[22:19]यह जो ही लगाया यह ताकि लगा और सामने वाले को तो
[22:21]अयोध्या के भाई कोई उसके जैसा है ही नहीं तो परवरदिगार ए
[22:28]आलम स्काइप के जरिए सेबी के अंदर जो जायदा है जाहिदा का
[22:35]मतलब यह ताकि देश है कि उसके जैसा कोई है ही नहीं
[22:36]उसके जैसा कोई हो ही नहीं सकता है वह इमाम को पेश
[22:41]करते हैं अपने आप यॉर्क के व सूखा तमन्ना बीच यह अल्लाह
[22:46]के रसूल खत्म नबी ने खत में नबूवत का भी द शब्द
[22:50]जिन्हें सैनी उस जमाने में जाकर विवाह में हाथी को पेश करें
[22:52]इमामत के बारे में बताते हैं कि पहले इमाम हज़रत अली अलैहिस्सलाम
[22:58]दूसरे इमाम हजरत हसन अलैहिस्सलाम संभल हुसैन सुमाली हुसैन तुम मोहम्मद इब्ने
[23:02]अली तो मजाक है अपने मोहम्मद मूसा ने जहां पर तुम्हारी कितने
[23:06]मूसा तुम्हें मुहम्मद इब्ने अली सोमवार अंतर यह मौलाई के इमाम मोहम्मद
[23:11]तक़ी के बाद आप मेरे इमाम है मामा जी को कहते है
[23:16]तो यह अकेले का बयान कब्जे में मुर्दा को नहीं सुनाना है
[23:23]मौजूदा को सुनाना शीघ्र ही वह उसके लिए अगेंस्ट एक अ उसकी
[23:26]जिंदगी के अंदर उसका खरीदा सबसे अहम है लेकिन उसके बाद भी
[23:33]जब मरने के बाद जो सुनने वाले हैं उनको यह कहा गया
[23:39]है कि जाओ उसके सामने जाकर शिकायत का बयान के वह उसके
[23:41]सामने हिलाओ तो वह तो अपने आमाल को खत्म कर चुका अगर
[23:47]वह मोमिन था तो खुदा के नजदीक मोमेंट महसूस होगा अगर वह
[23:52]काफी अच्छा नार्मल आप उसके जितने भी चाहे हिला कर उसे आकार
[23:55]चुनें उसका अमल और उसका जो जिंदगी के अंदर अमल था वह
[24:01]दबी नहीं होगा उसका नाम है हमारे तमाम हो गया यह जो
[24:03]सुनाया जाता है अगरचे के अगले मोमिन है तो वह मौजूदा भी
[24:10]सुनता है चुके जिंदा है वह जो मेन शहीद कहलाता है वह
[24:15]कौन सा मोमिन है जो मोहब्बत है बैड पर इस दुनिया से
[24:20]रुखसत हो जाता है वह सब के सब सही में शहीद जिंदा
[24:21]है कि वह सोने वाला होता है लेकिन साथ जोश के साथ
[24:25]आने वाले अपराध उन्हें भी सुनाया जा रहा है कि देखो याद
[24:30]रखना अपने फैसले को सही रखना क्योंकि कि यह आधा बहुत अहम
[24:34]है तो यह अब्दुल अज़ीम है सैनी साहब है वह जाकर किमाम
[24:39]में हल्दी को अकसर सुना रहे हैं तो क्या वह बहुत होती
[24:41]है जिनकी वजह से आधा बात हो जाता है हमारे हाथी के
[24:46]बयान पर मानते हैं कि वह चूहा बाद जिनकी वजह से इंसान
[24:52]बातें लकीरें को अपना लेता है उसमें से पहली वजह क्या है
[24:55]अल्लाह को भूल जाता है ख़ुदफरामोशी के है एक तो खुद अपने
[25:01]आपको पहचानता नहीं है इमाम महादी ही की हदीस है कि अल्लाह
[25:06]के नबी ने फ़रमाया मनाए वफ्फा लागत अलापा जिसने अपने आप को
[25:09]पहचाना उसने अपने खुदा को पहचाना जो अपने खुदा को नहीं पहचानता
[25:12]दो बह जाता है खुद आप और हम उसी वैसी चीज है
[25:16]कि जिसकी वजह से इंसान बैंक जाया करता है क़ुरआने मजीद में
[25:20]सोए हुए की 19 वीं आयत को इमाम महदी बयान करते हैं
[25:25]कहते हैं कि वह क्योंकि मां हाथी का जमाना कैसा ज़माना था
[25:27]देखिए अभी जो Aa कांत का अंबार आपके सामने मगर से लिस्ट
[25:33]पेश करूं मैं लिस्ट व की कमी की बिना पर पूरे बयान
[25:39]नहीं कर सकता हम हल्दी का जमाना बाकी तमाम के मुकाबले में
[25:42]इन्हें वापस का और खिलाफ आज के ज्यादा होने का जमाना है
[25:50]है कि ऐसे-ऐसे आकारित वाकई पिया का मजहब है गुजरात का मजहब
[25:53]है मु झ है जब रिया शुरू किया है मुझे समय अच्छा
[25:58]यह है मौत से लक सब मिलकर अपने अपने आप रात का
[26:02]बॉय पेश किए हुए थे उस वक्त एक वाह दिमाग में मासूम
[26:04]किमाम में हल्दी आगे बढ़कर इन सब बातें लगायत को खत्म करते
[26:11]हैं कि यह कमाल है आज आपके पास सियत महफूज है यह
[26:13]मासूमियत है वह सलाम का कमाल है अगर वह न होते तो
[26:18]आज हम भी इसी तरीके से नोज मिला मिर्जा गालिब बहते हुए
[26:22]होते के सूअर का दिल जगह इंसान के बदन में लगा दें
[26:26]तो वह जाए जैसे जायज नहीं है इन मसालों के अंदर गिरफ्तार
[26:28]होते कि मक्खी को अगर यहां पर मक्खी नजासत लेकर आ जाए
[26:33]तो नमाज़ बातिल हो जाएगी कि नमाज़ बातिल नहीं होगी जाने के
[26:35]बाद में यह मासूमियत का कमाल था कि ऐसे-ऐसे आप कहें प्रधान
[26:43]शुरू कर दी है यह आदेश कुरान भी मखलूक है कि मखलूक
[26:49]नहीं है खेल के दौरान का मसला आम आदमी के पास शिक्षक
[26:51]साहब कहते है कि मोहल्ला आप यह बताइए कि कौन मखलूक है
[27:00]कि मखलूक नहीं है किमाम कहते हैं इसे छोड़ दो यह उद्योग
[27:02]उसको छोड़ दो यह फूल कोफ्तों को छोड़ दो खालिक फकत खुदावंद
[27:10]मुक्ताहल की जरूरत है उसके इलावा जो कुछ है सब कुछ बकलू
[27:12]कह तुम कि अनुसार गिरफ्तार हो चुके हो इमाम ने अहले सुन्नत
[27:20]के नफरत के आकाश को फोन बदल कर दिया श्याम अब केंद्र
[27:26]बाद लोग आते हैं और कहते हैं कि इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम
[27:30]उपयोगिता का देवता लोग हनुमान विद्यालय मोहम्मद वाले वह यह कहते थे
[27:40]सातवें माह के बाद सातवें माह में नो कमेंट्स सातवें माह में
[27:44]जमाना है वह बाद में चले गए क्यों भाई उनके बाद इमाम
[27:50]रज़ा अलैहिस्सलाम जगह किमाम नहीं है क्यों इसलिए पहली बजाइए कि कि
[27:55]इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम का जनाजा पड़ा नवोदय विद्यालय कोई उन्हें मासूम
[28:02]अवस्थी ने उत्तर नहीं दिया अ है तो इसका मतलब उनका जनाजा
[28:07]नहीं था विमान तो गया बाद में चले गए थे ताकि मां
[28:11]जी से सवाल किए करते हैं कि आप अपने बाबा के बारे
[28:13]में क्या कहते हैं इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम तो उस वक्त और सातवें
[28:19]माह के पास मौजूद नहीं थे तो इसका मतलब मासूम को मानसून
[28:24]कुशल दे सकता है जो तु साठवून कैसे हम है विमान जवाब
[28:31]दिया क्या तू भूल गया वह वैसा के वह बनते को क्या
[28:32]तू भूल गया कि जब तेरा ही तीसरा इमाम शहीद हुआ था
[28:39]कब मिला के अंदर तो कई बला में मौला हुसैन की शहादत
[28:44]के बाद उन्हें गुसल किसने दिया था उन्हें दफन किसने किया था
[28:47]उन्हें दफन किसने किया था इमाम सज्जाद विषुवत एग्जाम से इमामत जिंदा
[28:54]उन में मौजूद होने के बावजूद पांव में बेड़ियां होने के बावजूद
[29:01]इन सब चीजों को तोड़कर पहुंचते हैं और तेरा अपना भी यही
[29:05]खरीदा है कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम उन्हें दफन किया तो तू कैसे
[29:08]तीसरे ईमाम के बाद चौथे इमाम को मानता है तो वह कहने
[29:13]लगा अच्छा अगर जो है वह गुसल नहीं है तो खूब आठवें
[29:18]इमाम की एक जमाने तक औलाद नहीं थी था विमान के पास
[29:23]आकर कहने लगा कि मैं ऑफिस आकर्षक कि आपके पास औलाद नहीं
[29:26]है कर दो कि अगर आप इमाम होते तो आपके औलाद होनी
[29:30]चाहिए थी क्योंकि वसूला कवर मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल लाहो अलैहे व आलेही
[29:36]व सल्लम मस्यौदा लव मोहम्मद वाले कि हल्दी से लोगों के अंदर
[29:46]इछावर देकर गए थे के बाद टाइम आएंगे और उनके नाम बयान
[29:48]करके गए थे आप की औलाद नहीं है तो इसलिए आप इमाम
[29:52]नहीं है प्रेम बजाय उनको उसको जवाब देते हैं कि तुमसे किसने
[29:58]कहा कि मैं अफीम आऊंगा इंशाल्लाह खुदा जल्द इस जल मुझे कैसा
[30:02]फ़रज़ंद इनायत करेगा जो मुफ्त औजार गिरोह की जबान को भी बंद
[30:09]कर देगा और कयामत तक आने वाले तमाम बातें मुलाकात को खराब
[30:12]कर देगा तो यह मुद्दा के खिलाफ इमाम महादी की भवेश नजर
[30:17]आती है फिर किमाम सही तरीके बताते हैं पहले इन तरीकों से
[30:22]पहले दूसरा जो मौजूद है कि जो एक्स इलावा कब्ज की वजह
[30:27]बनता है वह पिछड़ों मार्फत कि बुमराह ही इंसान अपने फैंस को
[30:29]सही नहीं रखेगा तो ऐसी सूरत में गुमराह हो जाएगा इमाम महादी
[30:35]कुरान की एक आयत फैसला करते हैं कॉल हद न बेवकूफ बैलेंस
[30:38]सवीना मालन अदीना ग्लास आयु हम फिर हफ्ते दुनिया एक अहम यह
[30:44]सब ऊना अन्न हम यहां से नशा ना क्या मैं तुम्हें उन
[30:48]लोगों के बारे में बताऊंगी जिन्होंने नुकसान उठाया खुदा कहना यह भी
[30:51]अब आप कह दीजिए क्या मैं तुम्हें उन लोगों के बारे में
[30:53]रूक बताऊं कि जो अमाल के प्रभाव से व्यवसाय में वही जिनकी
[30:58]पिछली सिर्फ दुनिया से शुरू होती है दुनिया पर ही खत्म हो
[31:04]जाती है उनका पूरा दिन से किसी चीज पर लगता है कि
[31:09]पेट को कैसे भरना है तो उनके पास वैध खराब हो जाए
[31:10]करते हैं तीसरी चीज ख्वाइश चाहते नुकसानी की पैरवी इंसान जब हवा
[31:17]प्रविष्टि का शिकार हो जाता है तो क़ुरआने मजीद की आयत से
[31:19]माधुरी ने फैसला किया कि कान्हा के बतौर लजीना असल उस बहाया
[31:26]वो लोग जिन्होंने अपनी बातें और ख्वाहिशों की पैरवी की शुरुआत तिलक
[31:30]हादसों का शिकार हो जाते हैं तीसरी चीज तकलीफ धीमान अंधे होकर
[31:37]बहरे होकर किसी की बात को सुन लेते हैं हम हल्दी के
[31:41]जमाने में एक सशक्त जाता अहमदाबाद में हूं को देखता है बगदाद
[31:47]में एक शायर है Jio 4G पर बैठकर नान खा रहा है
[31:52]इस शख्स का नाम जो यहां जाता है उसका नाम है उस
[31:56]मानव आंख उस्मान व्याख्याता है शायद से कि साहेब तुम्हें शर्म नहीं
[32:04]आती तुम रोड पर बैठकर इन इंसानों के सामने रोटी खाए है
[32:07]वह तो शायद कहता है कि गाय के और कि ऐसी जगहों
[32:14]के कि जहां पर जानवर रहते हैं मैं यहां के तकाजे के
[32:20]बिना आप रेगुलर इस्तेमाल नहीं करेगा उसके सामने क्या तुम एवं महसूस
[32:24]करोगे कि तुम रोटी खाओ कि जहां पर सब गाय ही गाय
[32:31]हो बकरे ही पक रहे हों तो वह कहते है नहीं गायब
[32:32]बकरे के सामने रोटी खाने से कौन शर्मायेगा का यह सब इंसान
[32:38]गाए हैं और पके हुए हैं यह सब यही है का कैसे
[32:42]साबित करो का आओ मैं तुम्हें दिखाता हूं कि बगदाद के वोट
[32:46]पाए बगदाद के आह्वान पर लेकर गया और जाकर कहने लगा है
[32:52]उस मानववाद देखो यह सब के सब गाए हैं भिड़े हैं कैसे
[32:53]का अभी सुनो वह एक बुलंद जगह पर खड़ा हुआ और उन
[32:59]जगहों पर खड़े होकर कहने के बाद रहने खड़े होने के बाद
[33:04]कहने लगा कि है लोगों अल्लाह एक है अल्लाह से है वो
[33:08]मैं तुम्हें अथवा की वसीयत करता हूं तवा की अहमियत बयान करता
[33:11]हूं हुआ उसने मौज़ा बयान किया जब उसने मौजूदा बयान किया लोग
[33:17]उसके पास जमा होना शुरू हो गए जब बहुत सारे लोग उसके
[33:18]पास जमा होना शुरू हो गए और एक बेहतरीन शुरू करने के
[33:23]बाद उसके पास लोगों का ढेर जमा हो गया तो उसने यह
[33:29]कहना शुरू किया है लोगों मुतव्वा ख्यात मौजूद है कि खुदा ने
[33:33]जहन्नुम की आंखों उस शक्स पर हराम कर दिया है जो अपनी
[33:39]जबान को अपनी नाक तक पहुंचाएगा बस लोगों का सुनना था लोग
[33:43]खड़े हो गए सब अपनी जबान को बाहर निकालकर नाक तक पहुंचाने
[33:48]लगे उसने उस्मान ने बाबा को का देखो मैंने नहीं कहा था
[33:51]कि गाय हैं बड़े हैं कि ऐसा किधर है एक अंधे और
[33:56]बहरे होकर क़ुरआने मजीद की आयत है सुबह दुकान के तहत तबीयत
[34:02]अव्वल नदी नाइस जोक के मुख्य थे भव्य हम अलार्म व्याख्या लें
[34:05]यहां तुम व उनियाना कि वह लोग जो उनके सामने खुदा के
[34:11]कलाम किराया पेश की जाती हैं थे तब भी वो उस पर
[34:17]अंधे बहरे होकर नहीं खेल पाते और एक इंसान एक आम आदमी
[34:22]की बात पर अंधा बहरा होकर उसकी बात को मान ले कि
[34:23]मसलन कोई शख्स मेंबर पर आए और कहने लगे देखो तुमने नहीं
[34:29]देखा कि तारीख में जूमला मिलता है हज़रत अबू तालिब वह खाने
[34:34]काबा की चाबी उनके पास थी कि तो जिसके पास चाबी यह
[34:40]रूपा यह भी के अंदर उसे कहा जाता था वह बोल काबा
[34:44]के काबा को पालने वाला काबा को संभालने वाला कहा कि निर्देश
[34:46]जारी करने वाला तो देखो याद रखना 21ramzaan को 19 संविधान को
[34:52]जब मौला अली की शहादत युद्ध बिल्कुल सहमत लगी तो जब मॉल
[34:56]आने यह जुमला का पुश्तों के बिल काबा तो उन्होंने डुबलाल मिर्जा
[35:01]आलेख खुदा की कसम नहीं खाई थी वेल गांव में कामयाब हो
[35:05]गया नोबेल प्राइस जारी है तब उजाले की ओर कि यह चीज
[35:10]इंसान सुनता है खामोशी से सुन लेता है परेशान हो जाता है
[35:15]और कहता यह क्या बात बयान कर दी जाएगी ब्राह्मी आ गया
[35:17]इंसान की बस्सी व ज्यादा हो मौला उस वक्त सजदे में वह
[35:24]मौला के जज्बे में किसी जज धागे में खाने के हकीक की
[35:29]को संहिता के में जब गाली मौला के पास आते थे गुलाब
[35:33]मौला के पास आते थे मोहल्ला कहते थे कि जो अपने-अपने को
[35:35]दिवस के वह नहीं मानते थे दो तीन दफा जब उन्होंने नहीं
[35:40]मानव मॉल आने कमबैक को आवाज दी ऐ गम भरा को बुलंद
[35:45]है वह आप जलाओ और इनका खुदा इन्हीं को जहन्नुम उठेगा फिर
[35:49]मौला खुद अपने हाथों से उन्हें इस आग में जला देते थे
[35:54]यह बोला कि भविष्य गुलाब के मुकाबले में है लेकिन इमाम ने
[36:00]बताया कि देखो ऐसे ताकत का मुकाबला कैसे करना है इन अक्षत
[36:06]का मुकाबले की भविष्य बयान पर माफी का के सबसे पहले लोगों
[36:08]के इनको उनकी हिदायत को उनकी वसीयत को उनकी आगामी को बुलंद
[36:15]करो छोटा बच्चा भी जाए उसकी वसीयत को बढ़ाएं उसे मोबाइल के
[36:20]अंदर आजकल के जमाने में मोबाइल के अंदर अनसेंसर्ड चीजें मौजूद हैं
[36:27]बच्चे भी इसमे इंवॉल्व ए ए अपने मां-बाप की जिम्मेदारी है अपने
[36:31]बच्चों को निगाह रखे कि वह क्या देख रहा है इस मोबाइल
[36:38]के अंदर नादिरशाह के जमाने के अंदर एक बच्चा हाथ में कुरान
[36:40]लेकर घूमता है आज के जमाने के अंदर यह बच्चा मोबाइल के
[36:45]अंदर बेहूदगी लेकर घूमता है किसी बच्चे से कहा जाए कि बेटा
[36:47]अपना मोबाइल देना तो का नहीं मैंने भी लॉक नहीं लगा है
[36:50]क्योंकि उसे मालूम उसके अंदर क्या है और नादिरशाह के जमाने में
[36:59]एक बच्चा कुरान को हाथ में लेकर जाएगा था ना दशा देखता
[37:04]है कि बाकि सारे बच्चे खेल में मशहूर है इस बच्चे के
[37:06]हाथ में दौरान है है तो यह चीज पसंद आती है वह
[37:12]कहता है कि जाओ इस बच्चे को बुलाकर लाओ बच्चे को बुलाकर
[37:14]लाया जाता है बच्चे से ना दीक्षा पूछता है कि यह तुम्हारे
[37:20]हाथ में क्या है तो वह कहता है मेरे हाथ में क़ुरआने
[37:26]मजीद है ना दिशाहीन हो जाता है कहते इतना छोटा सा बच्चा
[37:29]इसके हाथ में अल्लाह का कलाम मौजूद है क़ुरआने मजीद मौजूद है
[37:35]खुश हो जाता है इस खुशी में वह एक अशर्फी इस बच्चे
[37:38]को देता है और कहता है यह मेरी तरफ से तुम्हें इन
[37:41]आम है यह बच्चा या शफी वापस कर देता है कहते हैं
[37:46]मुझे यह सब ही नहीं चाहिए ना दशा है वन ये कैसा
[37:50]है तुम्हें ना देश या देवाय भाषाएं वक्त में सोपी देवाय तुम
[37:53]लेने से इंकार कर रहे हो है तो वह बच्चा कहता है
[37:58]कि मेरी मां मुझे डांटेगी कहता है कि क्यों डांटेगी कहा कि
[38:04]मैं यश लेकर जाऊंगा महिमा डाटेंगी तो कहता हूं क्यों डांटेगी कहता
[38:08]है कि इसलिए कि मैं उसको यह बताऊंगा कि निदेशक यह दिया
[38:15]है तो मुझे डांटेगी तू ना दिशा कहता है कि खूब ना
[38:17]दिशा में दिया है तो इससे तो वह खुश होगी यह क्यों
[38:21]डांटेगी इस चीज के उपाय तो बच्चा कहता है कि मेरी मां
[38:26]यह कहेगी कि ना दशा इतना बड़ा वाच्य वह इस प्लान के
[38:31]बदले में सिर्फ एक अशर्फी है यह नहीं हो सकता तू झूठ
[38:35]बोला है ना दशा यह सुना फौरन कहा कैसे अशरफी की पूरी
[38:39]एक पोटली दो वह ट्रोफी की पूरी पोटली जब उसके हाथ में
[38:43]आई तो अब तो तेरी मां गुस्सा नहीं करेगी कहां कि आपको
[38:48]कौन की अहमियत और उसकी इंपॉर्टेंट इतनी ज्यादा है कि मेरी नजर
[38:55]के अंदर इसको आन के बदले में एक अशर्फी काफी नहीं है
[38:57]मेरी मां की नजर में एक अशर्फी काफी नहीं है कि न
[39:02]दशा जैसा बादशाह जिसने अहले बैत की मोहब्बत को व्यूज दिया कुरान
[39:07]की मोहब्बत को मेवाड़ दिया वह तुम्हें इस करार के बदले में
[39:10]एक अच्छा पीले सलवार पड़े मोहम्मद वाले मोहम्मद मांस व लाडले मोहम्मद
[39:18]वाले मां यह तो इमाम ने पहला तरीका यह बताया कि लोगों
[39:21]की हद तक बच्चों की भी हिदायत वशीभूत को बढ़ाया जाए दूसरा
[39:28]तरीका यह बताया कि बहस के मौजों को इंसान पहचाने जब व
[39:30]कि वे पर गुड्डू करवाओ तो दूसरी चीज जो earn चला जाए
[39:34]जिस मौजूद पर गिवर है उसी पर बहस करें तीसरा तरीका यह
[39:40]बताया कि मौजूदा एवं द होना चाहिए सुकून के साथ होना चाहिए
[39:42]ऐसा ना हो कि इंसान जब अपना का बयान के लिए तो
[39:47]सामने वाला हंसने लगे शोल भाजपा के हृदय नहीं आए वंदे माहौल
[39:53]में बहस हो दूसरी बात यह कि अ ख्याल रखें गाली गलौज
[39:57]पर उतर आया आज का इंसान किसी के बातें लकी दे को
[39:59]देखता है फोन सुविधा मिल जाएगी गालियां देना शुरू कर देता है
[40:04]बच्चों की दुकान पर गोलियां जाति महाद्वीप को यह पसंद नहीं है
[40:06]माओवादी के वे अपनी फिगर को भी सही है वह सामने वाले
[40:10]की पिछड़ों को भी सही करने के लिए आख्या ख्याल रखो और
[40:15]उसके बाद सबसे आखिरी चीज इत्तेहाद और इत्तेफाक को खराब नहीं होना
[40:19]चाहिए कि पंचायत है वह इससे मुख्यालय जमीन आंवला सफाई बापू अल्लाह
[40:27]की बच्ची को चाहे अल्लाह के वंशवाद अहले बैट की जातियों मजबूती
[40:34]से थाम के वर्क ओं और आपस में सफेद का बाजी ना
[40:36]करो खुद इमाम ने भी यही तरीका अपनाया जब यह सारे गिवर
[40:42]है जो थे मु झ जॉब या मोजरेला शायद आप इस आंवले
[40:48]जो भेजों का अंबार था उनके सामने पहला तरीका ही अपनाया कि
[40:51]इल्मी जवाब दिया करते थे सामने वाला स्थल को सुनकर आश्चर्य होता
[40:59]था कि कलाम विसाले लिखा करते थे किताबों के जब यह से
[41:02]खतो-किताबत के जरिए से जवाब देते थे और तीसरा मौके से फायदा
[41:06]उठाते थे जब या बिन अक्षम और इग्नेसिक की से मुतवक्किल मुनाजरा
[41:10]करवाता एवं आम का पेड़ मां मुनाजरे कि भविष्य का फायदा उठाते
[41:16]हुए पूरा वाकया मजा इसमें सुनते रहते हैं या भिन्नक्षम को भी
[41:19]जवाब देते हैं और इतने 21 को भी जवाब देते हैं एक
[41:25]ऐसी चीज इसको इमाम ने दुनियां से खत्म करने की कोशिश की
[41:31]वह यह के इमाम के जमाने में यह नजरिया था कि बाद
[41:32]यूनुस विला में गार्लिक मनहूस हुआ करते हैं अस्सैलेंट भूत का दिन
[41:38]मनहूस है किसी की जान नहीं होता है मंगल का दिन मनहूस
[41:40]है या मशीन किसी को चोट लग जाती तो वह सोचता है
[41:43]वह कहने लगता है आज का दिन तुम्हे लिए बहुत ही महसूस
[41:47]है इमाम ने इस चीज को रोका कहा कि यह तुम कैसी
[41:52]बातें कर रहे हो हसन बिन मसूद एक शख्स था वह इमाम
[41:53]के साथ चलता जाएगा था एक घुड़सवार आता है रॉबर्ट सवाल आकर
[41:59]इस हसन बिन मसूद से टक्कर है उसकी हो जाती है हसन
[42:03]बिन मसूद गिर जाते हैं उनका कपड़ा फट जाता है तो उनके
[42:08]मुंह से जुड़ा निकलता है वह आए हो आज का दिन मेरे
[42:09]लिए कितना मनहूस है तो विमानों से रोकते हैं कहते हैं हसन
[42:15]दिन मजबूत मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी कि तुम इस प्रकार
[42:18]आने का कुसूरवार दिन को ठहराओगे यह दहन जिन्हें तुम कसूरवार ठहरा
[42:28]रहे हो वह मुफ्त कब आए नहीं है पसंद सूत्र कहते हैं
[42:31]मैं अपनी ख़ता पर पशेमान हूं अपनी ख़ता पर मैं शर्मिंदा हूं
[42:36]तो अली मानते हैं कि दिनों का कोई गुनाह नहीं है जो
[42:43]भी मुसीबत आती है अगर वह काफी पर आ रही है तो
[42:43]अजीब है उस पर अगर वह मोमिन परा रही है तो उसका
[42:47]इम्तिहान है उसकी आजमाइश है और यह खुदा की तरफ से उसके
[42:52]लिए इम्तेहान है हौदा ने तेरे लिए इस मुसीबत को तेरा इम्तिहान
[42:55]करवा दिया या हु विन या जीत एक ऐसा हिसाब से वह
[43:00]इमाम के सामने आता है देखता है किमाम बुद्ध के दिन हजामत
[43:05]करें खूब हजामत दोनों तरह के होती है सर की भीड़ जमा
[43:10]होती बदन की भेजा मत होती है तू आकर इमाम को नसीहत
[43:11]करने लगा कहने लगा मोहल्ला कि आपको नहीं मालूम के जोश भी
[43:17]बहुत के दिन हजामत करेगा नौ गृह मंत्रालय उसको वह वाली बीमारी
[43:21]हो जाएगी जिसको फांसी में पीसी कहते हैं और उर्दू के अंदर
[43:26]उसका इलाज जो मैं इसके मकान की वजह से नहीं पैदा कर
[43:28]सकता है जिसमें हाथों में धब्बे हो जाते हैं हाथों का एल्बम
[43:33]तब्दील हो जाता है तो इमाम ने कहा कि हूं तू कैसी
[43:38]बातें कह रहें बुध के दिन का इस बीमारी से कोई ताल्लुक
[43:44]नहीं है यह बीमारी एक खास अमल की वजह से हुआ करती
[43:49]है हमने खास अमल बयान किया जो मैं यहां बयान नहीं कर
[43:51]सकता का उसकी वजह से हुई बारिश होती है सा कपिल अभी
[43:57]गल्फ वह आता है इमाम के पास और आकर कहता है कि
[44:02]मौला अल्लाह के रसूल के हदीस है कि लार तो आप ध्यान
[44:07]तो आदि को के अल्लाह के रसूल कहती है कि दिनों से
[44:09]दुश्मनी नहीं करो दिनों से नफरत नहीं करो वरना यह दिन तुमसे
[44:15]नफरत करेंगे तो इस हदीस से साबित होता है कि दिन उपवास
[44:16]करते हैं मैं उस मिला मिर्जा लेकर इमाम के पास आकर कह
[44:21]गए कि इमाम के से कहता है कि रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
[44:26]ने फरमाया कि ला तुआ दोलायमान तो आदि को इसके क्या मायने
[44:29]अगर ऐसा नहीं है कि इस दिन उपवास करते हैं प्रेम जवाब
[44:34]देते हैं नाम अ यह मोहन ओं कि इस विवाहित के अंदर
[44:40]अयेम से मुराद हम अहलेबैत कि जाता है कि हम अहले बैट
[44:47]से नफरत ना के वह Amazing दुश्मनी न केवल फैट माया के
[44:50]पस सब तो इसमें रसूलल्लाह हफ्ते का दिन तो अल्लाह के रसूल
[44:55]का दिन है वह दो अमीरूल मोमिनीन है और इतवार का दिन
[45:00]यह संभोग का दिन तो मौला अली का दिन है वह इसने
[45:04]अल हसन व हुसैन दोस्त संभोग का दिन पीपल का दिन तो
[45:09]हसन हुसैन का दिन है वह सलाह से आलू योग बन हुसैन
[45:11]मोहम्मद इब्ने अली जाफर ने मोहम्मद मंगल का दिन से संभोग का
[45:17]दिन तो इमाम सज्जाद का इमाम बाक़िर का इमाम जाफर का है
[45:19]ऑफिस के बाद समय बुधकर दिन व लाइव यहां पर मुंह सब
[45:24]ने जहां फैमिली अपने मूसा मोहम्मद इब्ने अली वरना के वो बुध
[45:32]का दिन सातवें एवं आठवें मानव एवं और 10 मीडियम कर देने
[45:36]उसके बाद का की जो मेवात का दिन मलखम इसे अपनी अल
[45:40]हसन जो मेवात का दिन इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम का दिन है
[45:46]वह जो महतो एडविन ओए भी नहीं हुआ इलायची और जुमे का
[45:49]दिन इमामे ज़माना किमाम में मुख्यत का दिन है सलवार पड़े मोहम्मद
[45:54]वाले मोहम्मद मांस विद्यालय मोहम्मद वाले यह है जिसके साथ वह जमीन
[46:08]को हिसाब से वैसे ही देंगे जैसे मैं जोश से भरी होगी
[46:15]यह था तो आलू हम दुनिया से दुश्मनी मत करना दिन के
[46:25]अंदर गद्दी लाख से दुनिया में ऑफ करो की ताजा खबर के
[46:33]दिन पहले तुमसे कयामत के दिन नफरत करेंगे फिर उसके बाद का
[46:36]तुम कल बर्थडे मुझे छोड़कर चले जाओ मैं किसी ऐसे शख्स को
[46:41]अपने नजदीक नहीं रखना चाहता कि जिस का नजरिया यह के दिन
[46:43]मनुष्य करते हैं किमाम ने ऐसे अफरीदी को खत्म कर दिया आप
[46:49]देखते हैं कितने बेहतरीन तरीके से इमाम ने डकैत को रोशन किया
[46:53]और बातें लगायत को खत्म किया अ त्यौहार जो इमाम महादी आपको
[47:00]मिलती है उसका तस्कर बार जरूर करूंगा वह तो इसके अलावा इसलिए
[47:02]कि इसके अंदर इमाम ने अपने बेहतरीन अपहृत को बयान किया है
[47:09]यहीं पर अपने मुद्दों का इंतजाम करते हैं वह बना तब्बल मिंस
[47:11]नाइन उपरांत असमिया लिए वह तो आईना इंद्रकांत वह ब्राहीम सूरह फातिहा
[47:18]की गुजारिश है सैयद अमीर हसन वर्ल्ड सैयद काजिम हुसैन ज़ैदी के
[47:22]लिए अ कि वह तमाम के तमाम मैं हूं मीन के लिए
[47:24]शुभ फलदाई मिलाते जॉब या के लिए ऑन मधुबन के लिए जिनके
[47:28]लिए पार्ट है पढ़ने वाला कोई नहीं है और वह तमाम में
[47:33]भूमिहीन के जोश व का एप्स के मैं भूमि ने उन सबके
[47:36]लिए वहीं महिलाओं मन कराल फतेह बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अल्हम्दुलिल्लाह अल्लाह अल्लाह अल्लाह अल्लाह
[47:59]अल्लाह अल्लाह अल्लाह अल्लाह अल्लाह अल्लाह अपने का मुझे उपभोक्तावाद इन न
[48:25]काला खुले शाहीन प्रदीप बहती कल्याण और हमारे वार्म मीन ई
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