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Anjana Om Kashyab ne Chatgpt se pucha: Rahbar Mujtaba Khamenei Ayatullah hai?
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محاضرات
Indian Media Vs Chatgpt Vs facts: Rahbar Mujtaba Khamenei Ayatullah hai?
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Transcript
[0:00]आउज बिल्लाह शैतजीम बिस्मिल्लाह रहमा रहीम नाजरीन सलाम वालेकुम ईरान में नए
[0:06]सुप्रीमर हजरत आयतुल्लाह सैयद मुस्तबा हुसैनी खामनाई साहब का इंतखाब हो चुका
[0:10]है लेकिन इंडियन मीडिया में और इंडिया में ये बहस चल रही
[0:12]है कि वो सही में आयतुल्लाह है भी या नहीं है और
[0:17]इस बात का फैसला करवाया जा रहा है एक बहुत ही एक्सपर्ट
[0:21]से और वो एक्सपर्ट पता है कौन है आप गेस कीजिए कौन
[0:22]होंगे वो हैं चैट जीपीटी साहब आप यह देखिए अब उनके बेटे
[0:29]को मुस्तफा को जो बनाया जा रहा है वो आयत अल्लाह तो
[0:33]नहीं है। आयत अल्लाह के लेवल का जो धार्मिक गुरु होता है
[0:36]वो तो वो नहीं है। तो फिर काहे का सिस्टम बेटे को
[0:40]चुन लिया?
[0:42]सिंपल है। ये आपको किसने WhatsApp पे भेजा था कि वो आयतुल्लाह
[0:46]नहीं है। ऊप्स ये सजेशन दिया जा रहा है कि अंजना अपनी
[0:49]पूरी रिसर्च WhatsApp पे करती है। किसी ने WhatsApp पर नहीं भेजा।
[0:53]एक तो तमीज से बात कीजिए। इसमें बदतमीजी वाली क्या बात है?
[0:56]वैलिड एक्सपेक्टेशन है?
[0:57]नहीं मैं तमीज से ही आपसे बात कर रहा हूं। मैं मैं
[1:00]ये एक्सपेक्ट करता हूं कि एक नेशनल टीवी पे एक रिपोर्टर जब
[1:03]कोई बात को पेश कर रही है तो उसका सोर्स भी पेश
[1:07]करे। उसके पास उसका सोर्स होना चाहिए कि किसने कहा, कब कहा,
[1:11]कैसे कहा। पॉइंट तो है। एट सम पॉइंट अंजना सीम्ड वेरी इरिटेटेड।
[1:14]दर से खारिज देता हो। 15 साल से मुझे दर से खारिज
[1:18]देता हो। दर से खारिज देता हो। आई गेस समवन वास टेलिंग
[1:23]हर द फैक्ट्स इन हर इयर पीस। देन वी सॉ हर फ्यूरियसली
[1:25]टाइपिंग। मुस्तबाक खमे इज़ नॉट एन आयतुल्लाह। चैटिली प्लीज बताओ इसको कैसे
[1:30]मैं प्रूव करूं?
[1:32]वहां वो बोले जा रहा है। बोले जा रहा है। बोले जा
[1:35]रहा है। अंजना का ध्यान है लैपटॉप पे। आई नीड अ कम
[1:38]बैक क्विकली। आई नीड अ कम बैक। फाइनली शी गॉट अ कम
[1:41]बैक। क्या यह जानकारी सही नहीं है?
[1:44]क्योंकि इससे पहले जितनी भी आप किताबें और अन्य रेफरेंसेस पढ़िए तो
[1:46]यह बताया जा रहा है कि मुस्तबा खामन एक मिड रैंकिंग क्लरिक
[1:53]थे जिनको कहते हैं होजातले इस्लाम। क्या ये क्या यह बात सच
[1:56]नहीं है?
[1:58]थैंक यू जैजीबडी। तुमने मेरी लाज रखी इन फ्रंट ऑफ दिस बदतमीज
[2:01]पैनलिस्ट। यहां पर जो न्यू सेंस प्रोग्राम की ये जो एंकर हैं
[2:04]इन्होंने आज तक की जो एंकर है उनके लिए कहा कि उन्होंने
[2:09]चैट जीबीटी पे जाने के बाद यह सर्च किया फौरन वेरीफाई किया
[2:11]कि वो हुज्जतुल इस्लाम है। आयातुल्लाह नहीं है। और उसके बाद फिर
[2:17]उसके बाद कहती है कि नहीं नहीं मैंने भी चेक किया और
[2:19]वहां पर उसको ऐसा ही मिला। हमने भी चैटजीपी किया। सो अंजना
[2:24]इज राइट। मुजबा खामिनाई इज होजतुल इस्लाम। आयतुल्लाह इज़ लाइक द लेवल
[2:29]ऑफ़ एजुकेशन। इट्स लाइक द पोस्ट डॉक इक्विवेलेंट ऑफ़ इस्लामिक स्टडीज। सो
[2:33]इट्स ट्रू दैट मुजतबा खामई डिड नॉट हैव अ पोस्ट डॉक इन
[2:39]इस्लामिक स्टडीज। बट ईरान सुप्रीम लीडर डजंट हैव टू बी इनायतुल्ला। आपसे
[2:42]मुझे यह उम्मीद नहीं थी। इसलिए उम्मीद नहीं थी क्योंकि आप एक
[2:48]जर्नलिस्ट हैं और आप एक मोहतबर जर्नलिस्ट हैं। आपको एक मोहतबर जर्नलिस्ट
[2:50]माना जाता है। आपको रिसर्च करनी चाहिए थी। एक्सपर्ट्स से पूछना चाहिए
[2:54]था चैट जीपीटी की इंफॉर्मेशनेशंस रिलायबल नहीं है। उनके ऊपर भरोसा नहीं
[2:57]किया जा सकता है। आप ये वीडियो देखें। मुस्तहिद फकी और आयातुल्लाह।
[3:06]आयातुल्लाह का मतलब अल्लाह की निशानी। वली फकी अरबी का शब्द है।
[3:09]मतलब जो इस्लामी कानून का संरक्षक है, अभिभावक है। मुस्तहद वह होता
[3:13]है जो इस्लामी कानून का विद्वान माना जाता है। जिसने जीवन के
[3:19]कई साल इस्लामिक कानून, दर्शन, जुबान और अन्य चीजों का गहन अध्ययन
[3:23]किया हो। उसे एक संपूर्ण धार्मिक विद्वान के रूप में देखा जाता
[3:29]है। जो कुरान, हदीस और आज के हालात के हिसाब से इस्लामिक
[3:32]कानून की व्याख्या करने की योग्यता रखता है। क्या सभी मुस्तहिद सुप्रीम
[3:39]लीडर बनने की योग्यता रखते हैं?
[3:40]माना जाता है कि सुप्रीम लीडर वही होगा जो सभी मुस्तहिद में
[3:45]सर्वश्रेष्ठ होगा। मुस्तहिद की क्वालिटी तो होनी ही चाहिए। साथ ही उसके
[3:49]अंदर और भी क्वालिटी होनी चाहिए जो बाकी मुस्तहिद से अलग करती
[3:56]हो। उसके भीतर बसीरत होनी चाहिए। यानी राजनीतिक इंसाइट समझदारी होनी चाहिए।
[4:02]वो जबान शनास होना चाहिए। मतलब जिस दुनिया में वह जिंदा है
[4:08]उसके हालात की पूरी खबर हो। जमान को पहचानने की समझ रखता
[4:11]हो। इसके अलावा वह शजात होना चाहिए। यानी बहादुर होना चाहिए और
[4:16]मुदब्बिर होना चाहिए। यानी उसके भीतर योजना और रणनीति बनाने की योग्यता
[4:23]भरपूर होनी चाहिए। यह कुछ क्वालिटी है जिसके आधार पर मुस्तहिद में
[4:26]से किसी एक को रहबर मुअज्जम चुना जाता है। क्योंकि उसे धार्मिक
[4:30]मामलों में फैसले देने के अलावा धार्मिक कानून के हिसाब से देश
[4:37]भी चलाना है और देश चलाते वक्त उसका सामना दुनिया की अलग-अलग
[4:40]चुनौतियों से भी होगा। कोई भी जबरन हाकिम नहीं बन सकता। उसे
[4:47]इसी प्रक्रिया से इस पद पर पहुंचना होगा। हर चारप साल पर
[4:50]उसकी योग्यता और काम की समीक्षा होगी। सेवा विस्तार दिया जाएगा। मगर
[4:54]सुप्रीम लीडर का कार्यकाल फिक्स नहीं होता है। शिया कानून के नजरिए
[5:01]से वली फकी यानी सुप्रीम लीडर उसे माना जाता है जो शिया
[5:04]मजहब के 12वें इमाम मेहंदी की गैबत में यानी उनकी गैर हाजिरी
[5:11]में इस्लामिक हुकूमत की बागडोर संभालने के लिए सबसे योग्य माना जाता
[5:15]है। जाहिर सी बात है कि हम शिया मजहब के विद्वान नहीं
[5:20]हैं। लेकिन बार-बार रहबर-ए-मुअज्ज़म आया मुस्तहिद की चर्चा सुनकर हमने प्रोफ़ेसर जमीर
[5:26]से पूछा तो उन्होंने बताया बहुत कुछ लेकिन हमने उसका कुछ ही
[5:30]हिस्सा बताया। जी हां, यह जिम्मेदारी है। यह एक जिम्मेदार जर्नलिस्ट की
[5:34]पहचान है। उन्होंने रिसर्च की। उन्होंने एक्सपर्ट से पूछा चैट जीबीटी के
[5:38]ऊपर भरोसा नहीं किया। अब आइए आगे बढ़ते हैं। अब यहां पर
[5:41]सवाल यह है कि आयतुल्लाह कौन होता है?
[5:43]ग्रैंड आयतुल्लाह किसे कहते हैं?
[5:44]फकीर किसे कहते हैं?
[5:44]मुश्तहिद किसे कहते हैं?
[5:47]वली फकीर किसे कहते हैं?
[5:48]ये सारी टर्मिनोलॉजीस जो है वो इसको समझना पड़ेगा। मैं बहुत ही
[5:50]खुलासे और बहुत ही कम वक्त लूंगा आपको और इसको आसानी से
[5:55]समझाने की कोशिश करूंगा। आइए इन टर्मिनोलॉजीस और ओदों को समझते हैं।
[5:58]क्योंकि कुछ चीजें इसमें ऐसी हैं जो टर्मिनोलॉजी हैं और कुछ चीजें
[6:02]ऐसी हैं जो ओदे हैं। मैं आपकी खिदमत में एक-एक करके बयान
[6:04]कर रहा हूं। आइए पहले जानते हैं हुज्जतुल इस्लाम को कि जिसके
[6:12]बारे में अभी चैटिटी से सवाल किया गया। तो उसने बताया कि
[6:15]आयतुल्ला मुस्तफा खम नहीं हुज्जतुल इस्लाम है। आयतुल्लाह नहीं है। हुज्जतुल इस्लाम
[6:19]उस इस्लामिक स्कॉलर को कहते हैं कि जो इस्लामिक लॉज़ का स्पेशलिस्ट
[6:22]होता है। लेकिन कुरान और सुन्नत और जो दूसरे सोर्सेस हैं उससे
[6:26]इस्लामिक लॉज़ को डिराइव करने की सलाहियत उसके अंदर नहीं होती है।
[6:32]वो सिर्फ उन अहकाम को और उन लॉज़ को जानता है। उसका
[6:34]एक्सपर्ट और उसका स्पेशलिस्ट होता है। अब आइए चलते हैं फकी की
[6:39]तरफ। फकी किसे कहते हैं?
[6:43]फकी कहते हैं एक ऐसे इस्लामिक स्कॉलर को जिसके अंदर इस्लामिक लॉस
[6:49]को समझने की हाई लेवल पे जाकर समझने की कैपेबिलिटी होती है
[6:52]और यह सलाहियत उसके अंदर पाई जाती है। अगर कोई शख्स आयतुल्लाह
[6:57]है या वो मुश्तहिद है तो उसके लिए शर्त यह है कि
[7:02]वो फकी भी हो तो फकी ना पोस्ट है ना टाइटल है
[7:05]बल्कि फकी आयतुल्लाह और मुश्तहिद होने की एक शर्त है और मुश्तहिद
[7:07]ऐसे स्कॉलर कहते हैं कि जिसके अंदर यह सलाहियत और कैपेबिलिटी पाई
[7:12]जाती हो कि जो कुरान, सुन्नत, अक्ल और इज्मा यानी इस्लामिक जो
[7:15]सोर्सेस हैं उनके जरिए से इस्लामिक लॉज़ को डिराइव कर सकता हो
[7:21]और उसके अंदर वो इस चीज के ऊपर मुकम्मल तौर पर मुसल्लत
[7:23]हो और उसके अंदर यह सलाहियत पाई जाती हो। लिटरली आयतुल्लाह के
[7:31]माने होते हैं अल्लाह की निशानी। और आयतुल्लाह ऐसे शख्स को कहते
[7:34]हैं कि जो फकी भी होता है और मुश्तहिद भी होता है।
[7:37]ये टाइटल उसी को मिलता है। यानी जो शख्स इस्लामिक लॉस की
[7:41]हाई लेवल समझ भी रखता है और इस्लामिक लॉज़ को कुरान, सुन्नत,
[7:44]अक्ल, इज्मा और इस्लामिक सोर्सेस से डिराइव करने की सलाहियत रखता है।
[7:50]तो अब इस तरह आयतुल्लाह वही है जो फकी है। वही है
[7:52]जो मुश्तहिद है। यानी फकी मुश्तहिद और आयतुल्लाह तीनों एक ही चीज
[7:57]होते हैं। इनमें से फकी होना शर्त है। मुश्तहिद पोस्ट है। और
[8:00]साथ ही आयतुल्लाह फकी और मुश्तहिद के लिए टाइटल है। अब ईरानी
[8:04]कॉन्स्टिट्यूशन में और आर्टिकल 109, 10 और 11 के मुताबिक अगर कोई
[8:10]ईरान का सुप्रीम लीडर यानी वली-ए फकी बनने जा रहा है तो
[8:12]उसके लिए आयतुल्लाह मुश्तहद और फकी होना जरूरी है। लेकिन उसके लिए
[8:18]ग्रैंड आयतुल्लाह होना या आयतुल्लाह उल उज़मा होना जरूरी नहीं है। इसी
[8:21]के साथ इसके बारे में हम आगे बात करेंगे। और इसी के
[8:25]साथ जो सुप्रीम लीडर बन रहा है उसके लिए तीनचार शर्तें होना
[8:27]और भी जरूरी हैं। पहली शर्त यह है कि उसके अंदर बसीरत
[8:33]हो यानी पॉलिटिकल इंसाइट वो रखता हो। साथ ही वो मुदब्बिर हो
[8:36]यानी बेहतरीन स्ट्रेटजिस्ट हो। प्लानिंग कर सकता हो। शजा और बहादुर हो।
[8:39]यानी वो दुश्मन से डरने वाला ना हो। अगर कोई मुल्क आकर
[8:43]ईरान के लिए खतरा बने और उसको डराना चाहे तो वो डरे
[8:47]नहीं बल्कि बहादुरी के साथ उसका मुकाबला करे। जैसा कि अभी हमने
[8:49]देखा है आयतुल्लाह खामनाई शहीद इमाम शहीद के यहां और साथ ही
[8:55]जैसे अभी पयाम आया है जो मैसेज आया है आयतुल्लाह नए सुप्रीम
[8:57]लीडर का कि उन्होंने कितनी बहादुरी के साथ ये ऐलान किया है
[9:02]और साथ ही जमान शना ये बहुत इंपॉर्टेंट उसकी एक शर्त है
[9:05]जमान शनासो यानी अपने जमाने के हालात से मुकम्मल तौर पर बाखबर
[9:09]हो क्या हो रहा है क्या चल रहा है कौन हमारा दुश्मन
[9:13]है कौन हमारा दोस्त है जमाने के मुताबिक किन चीजों की जरूरत
[9:16]है इन तमाम चीजों का होना उसके के लिए जरूरी है। अब
[9:20]सवाल यहां पर पैदा होता है कि यह कैसे पता चलेगा कि
[9:23]यह शख्स जो सामने मौजूद है यह आयतुल्लाह है यानी मुशाहिद और
[9:25]फकी है। चंद तरीके हैं जो मैं आपकी खिदमत में पेश करने
[9:29]जा रहा हूं। पहला तरीका यह है कि ये शख्स जो भी
[9:31]हुजतुल इस्लाम में अभी इस्लामिक लॉस का स्पेशलिस्ट अभी आयतुल्लाह नहीं बना
[9:35]है। वो उस्ताद कि जिनके मुख्तलिफ फील्ड्स में मुख्तलिफ सब्जेक्ट्स में जिनके
[9:40]सामने इसने जाके पढ़ा है, दर्स पढ़ा है, वो आकर इस शख्स
[9:43]को इजाज़ इश्तहाद दें। यानी इश्तहाद करने की इजाजत दें। हैं। वो
[9:49]यह बताएं कि मेरा यह शागिर्द अब इस लेवल के ऊपर पहुंच
[9:50]गया है कि यह इस्लामिक सोर्सेस के जरिए से कुरान, सुन्नत, अक्ल
[9:55]और इज्मा के जरिए से इस्लामिक लॉज़ को डिराइव कर सकता है।
[10:00]ये मुस्तैहिद हो चुका है। और मेरे नजदीक यह मुश्तहिद है। ये
[10:02]जो उस्ताद होते हैं ना दर से खिज के ये खुद आयतुल्लाह
[10:06]ग्रेड के होते हैं या खुद ग्रैंड आयतुल्लाह यानी या आयतुल्लाह उल
[10:09]उज़मा हुआ करते हैं। और साथ ही मैं आपकी खिदमत में अर्ज़
[10:14]करता चलूं कि मुस्तहिद बनने के लिए 10 से 12 सब्जेक्ट्स के
[10:17]ऊपर महारत हासिल करना और उसका एक्सपर्ट बनना ज़रूरी है। दूसरी चीज़
[10:22]यह है कि खुद इस शख्स को जो मुश्तहिद हो गया है
[10:25]या आयतुल्लाह हो गया इसको प्रूव करना होता है कि मैं मुस्तहिद
[10:27]हो गया हो गया हूं। यह कैसे प्रूव करेगा?
[10:29]इसके चंद तरीके हैं। पहला तरीका और सबसे ज्यादा मुअसिर तरीका ये
[10:33]है कि जिस तरीके से वह दूसरे आयतुल्लाह और ग्रैंड आयतुल्लाह के
[10:37]क्लासेस में जाता था। दरसेस खारिज में जाता था और बैठ के
[10:39]उनसे पढ़ता था। अब यह खुद वही क्लासेस ले रहा है। उसी
[10:44]तरीके से उसके पास लोग पढ़ने के लिए आ रहे हैं और
[10:48]वह उनको आयतुल्लाह बना रहा है। उनको मुश्तहिद बनाने का दर्स दे
[10:50]रहा है। और अब वो जब ये दर्स दे रहा है तो
[10:53]इसका मतलब ये कि ये प्रूफ हो रहा है कि ये शख्स
[10:56]आयतुल्लाह और मुश्तहिद या ग्रैंड आयतुल्लाह बन गया है। तीसरा तरीका यह
[11:02]है कि उस वक्त के ओलमा मुश्तहिद आयतुल्लाह या ग्रैंड आयतुल्लाह उसके
[11:04]बारे में ये तस्दीक करें। करें यानी यह वेरीफाई करें कि हमारे
[11:07]नजदीक ये शख्स आयतुल्लाह और मुस्तहद और फकी है। क्योंकि हमने इसके
[11:12]दर्सेस खरिश देखी हैं। इसकी बुक्स देखी हैं जो उसकी इस्लामिक लॉज़
[11:14]के बारे में है। आयतुल्लाह मुस्तबा खामनाई के बारे में बड़े-बड़े जो
[11:17]आयतुल्लाह हैं आयतुल्लाह जवादी आमोली आयतुल्लाह मकारिम शराज आयतुल्ला जाफर सुभानी आयतुल्लाह
[11:23]नूरी हमदानी ये सब के सब बड़े आयतुल्लाह हैं। इनमें से कुछ
[11:28]ग्रैंड आयतुल्लाह हैं। इन्होंने आयतुल्लाह मुस्तबा खामनाई को आयतुल्लाह कहकर खिताब किया
[11:34]है। यानी ये आयतुल्लाह मुस्ताबा खामनाई को आयतुल्लाह मुस्तहिद और फकी मुसल्लम
[11:38]मुस्ताहिद और फकी मानते हैं। तो अब आयतुल्ला मुस्तबा खामनाई के बारे
[11:43]में वो तमाम चीजें जो मैंने बयान की हैं वो तकरीबन सब
[11:45]के सब पाई जाती हैं। लिहाजा उनके आयतुल्लाह होने में कोई शक
[11:49]नहीं किया जा सकता है। 20 साल से आयतुल्लाह मुस्तबा खामनाई दर
[11:51]से खारिज दे रहे हैं। यानी वो दर्रस के जिसको पढ़ के
[11:56]लोग आयतुल्लाह और मुश्तहिद बनते हैं। यह खुद बहुत बड़ा प्रूफ है
[11:59]उनके आयतुल्लाह होने का कि 20 साल से एक आदमी एक शख्स
[12:04]यह क्लासेस ले रहा है कि जिसमें सैकड़ों की तादाद में लोग
[12:06]आते हैं, पढ़ते हैं और आयतुल्लाह बनते हैं और मुश्तहित के दर्जे
[12:11]तक पहुंचते हैं। अब आइए चलते हैं ग्रैंड आयतुल्लाह या आयतुल्लाह उल
[12:17]उज़्मा की तरफ। आयतुल्ला उज़्मा एक ऐसे इस्लामिक स्कॉलर कहते हैं जिसके
[12:20]अंदर जो पीछे बताई गई क्वालिटीज हैं वो सब की सब उसके
[12:24]अंदर पाई जाती है और साथ-साथ वो मरजा तकलीद हो। मर जाए
[12:29]तकलीद यानी लोग उसको फॉलो करते हो। किस चीज में फॉलो करते
[12:31]हो?
[12:32]इस्लामिक लॉज़ पर अमल करने के लिए उसके फतवों के ऊपर वो
[12:37]चलते हो और उसके मुताबिक वो अमल करते हो। इसलिए उसको मजा
[12:40]तकलीद कहा जाता है। ये जो टर्मिनोलॉजी है मजा तकलीद ये एक
[12:45]पोस्ट है आयतुल्लाहुल उज़्मा के लिए। यानी अब लोग अगर अपने इस्लामिक
[12:48]लॉज़ के ऊपर अमल करना चाहते हैं तो इसके बताए हुए जो
[12:53]कानून है, इस्लामिक लॉज़ हैं जो इसने कुरान, सुन्नत अक्ल और इज्मा
[12:55]के जरिए से एक जगह के ऊपर लाकर जमा किए हैं। ये
[12:59]उसके ऊपर अमल करेंगे। ग्रैंड आयतुल्लाह को भी चुना जाता है। वो
[13:05]अहले खुबरा अहले खुबरा यानी एक्सपर्ट की खुबरा यानी एक्सपर्ट्स। अहले कुबरा
[13:10]यानी एक्सपर्ट्स की टीम आकर उसको चुनती है और इंतखाब करती है।
[13:12]और इस तरीके से एक इंसान ग्रैंड आयतुल्लाह बनता है। ईरान में
[13:18]इस वक्त छह या सात ग्रैंड आयतुल्लाह यानी आयतुल्लाह उल उज़्मा है।
[13:21]ईरान में जो टीम ग्रैंड आयतुल्लाह का इंतखाब करती है और आयतुल्लाह
[13:23]उल उज़्मा का जो टाइटल उनको देती है, उसका नाम है जामे
[13:28]मुदरसीन। उम्मीद करते हैं कि जो बातें मैंने आपकी खिदमत में इस
[13:30]थोड़े से वक्त में बयान की है, आपके लिए क्लियर हो गया
[13:33]होगा कि आयतुल्लाह कौन होता है?
[13:35]फकी कौन होता है?
[13:37]मुश्तहिद कौन होता है?
[13:36]वली फकी कौन होता है और साथ-साथ ग्रैंड आयतुल्लाह कौन होता है
[13:41]और यह भी साबित हो गया होगा कि नए सुप्रीम लीडर सैयद
[13:46]आयतुल्लाह मुस्तबा हुसैनी खामनाई मुकम्मल मुस्तहद फकी और आयतुल्लाह हैं। इंशा्लाह किसी
[13:53]नए वीडियो के साथ आपकी खिदमत में हाजिर होंगे। तब तक के
[13:56]लिए खुदा हाफिज।
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