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6- توبه کے آثار - حجة الاسلام مولانا غلام حسنين وجدانى
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24/10/06
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محاضرات
توبه کے آثار کیا هیں؟ 1- توبه کرنے والے پر الله کی رحمت نازل هوتی هے. 2- توبه کرنے والے کے تمام گناه معاف کردئے جاتے هیں. 3- هر گناه کے بدلے خدا توبه کرنے والے کو نیکی عطا فرماتا هے. 4- توبه کرنے والا خدا کا محبوب هوتا هے. 5- توبه کرنے والا اگر دوباره گناه کی طرف نه پٹےو تو وه ایک کامیاب اور مخلص انسان بنے گا اور روز قیامت بهشت میں داخل هوگا. انسان کو چاهیے که کبیی بی ناامید نه هو. توبه کے مزید فوائد اور آثار کو جاننے کیلئے ملاحظه فرمائیے....
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Transcript
[0:11]रहु इही मा अस रहु या र मु अजु बिल्ला मिन शैतान
[0:40]रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन वलक बतले तकवा वल यकीन
[0:48]सुम सलातो सलाम अला अशरफ अंबिया वल मुरसलीन वाला अहली बैत तबन
[1:01]तारीन मासूमीन मलन अल्जीना अ बल्ला अनज वतार तरा अल्लाहु सल्ले अला
[1:13]मुहम्मद वाली मोहम्मद वल फरज लान तुला अला आदा अजमान मयना हा
[1:23]लालिका यदन अम्मा बाद फकत काल अल्लाल हकीम फी मोहकम किताब ल
[1:32]करीम बिस्मिल्लाह रहमान रहीम इनल्लाह यब त वाबना वय बुल मुत हरीन
[1:45]अजान गिरामी सबसे पहले आप तमाम नाजरीन और सामन की खिदमत में
[1:54]सलाम अलेकुम रहमतुल्लाह व बरकात पिछले प्रोग्राम में हमने आपकी खिदमत में
[2:00]तौबा के हवाले से गुफ्तगू की थी अखलाक इस्लामी के जैल में
[2:04]यह प्रोग्राम तरतीब दिया गया है हयाते तैयबा के उनवान से और
[2:13]पिछले प्रोग्राम में तौबा के हवाले से जो अहम नुका आपकी खिदमत
[2:19]में पेश किए थे उनमें से अहम तरीन नुक्ता यह पेश किया
[2:25]था कि तौबा किसे कहते हैं तौबा उस चीज का नाम है
[2:35]कि जब इंसान अपनी गलती की तरफ मुतजेंस कि एक बीमार जब
[2:48]उसे पता चलता है कि मैं बीमार हूं और अपनी बीमारी का
[2:55]उसे अंदाजा होता है और उसे मालूम होता है कि और उसे
[2:59]मालूम होता है कि मैं बीमार हूं और बीमारी की नयत का
[3:03]अंदाजा होता है तो फिर वह फौरन उस बीमारी का इलाज करने
[3:11]के दरप रहता है कोशिश करता है कि अपनी बीमारी का इलाज
[3:16]करें ऐसा नहीं हो सकता कि कोई शख्स बीमार हो जाए और
[3:22]अपना इलाज ना कराए और वह बीमारी रोज बरोज बढ़ती चली जाए
[3:29]इसलिए कि अगर इलाज नहीं कराएगा तो आहिस्ता आहिस्ता वह बीमारी उसके
[3:34]बदन में उसके जिस्म में जड़ पकड़ लेगी और उसे इंतिहा नुकसान
[3:42]पहुंचा सकती है और उसके लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है
[3:50]इसी तरीके से जो गुनाह है मुख्तलिफ इंसान अंजाम देते हैं यह
[3:54]गुनाह भी इंतहा खतरनाक तरह की बीमारियां हैं और यह यह बीमारियां
[4:00]जिस्मानी बीमारियां नहीं है बल्कि इनका ताल्लुक इंसान की रूह से है
[4:09]इंसान की जान से है इंसान के नफ्स से है लिहाजा इन
[4:12]बीमारियों का यानी इन रूहानी बीमारियों का जब उसे पता चल जाए
[4:20]कि मेरे अंदर फलां गुनाह गीबत जैसे गुनाह की बीमारी मेरे अंदर
[4:25]आहिस्ता आहिस्ता जो है वो जड़ पकड़ रही है मेरे अंदर हसद
[4:33]जैसी बीमारी आहिस्ता आहिस्ता फैल रही है या झूठ जैसा गुनाह इंसान
[4:37]अंजाम दे रहा है और उसे अंजाम और उसे अंदाजा हो जाए
[4:44]के यह गुनाह आहिस्ता आहिस्ता मेरी आदत बनता जा रहा है तो
[4:47]लिहाजा इंसान फौरन आकिल इंसान और अकलमंद इंसान का काम यह होता
[4:57]है ऐसे मौके पर कि वह फौरन अपनी इस रू रूहानी बीमारी
[5:03]का इलाज भी करें जिस तरीके से इंसान जिस्मानी बीमारी का इलाज
[5:07]फौरन करता है और डॉक्टर के पास जाता है लिहाजा इसी तरीके
[5:14]से इंसान जो अकलमंद इंसान है एक मोमिन है और एक समझदार
[5:18]इंसान है दीनदार है दीन शनास है तो वह भी फौरन अपनी
[5:23]इस रूहानी बीमारी का इलाज करने के लिए कुरान पैगंबर और अहले
[5:31]बैत से रुजू करता है और इनकी तरफ जाता है और इनसे
[5:37]तमस इख्तियार करता है इन इनके तवसिफ करता है और तौबा करता
[5:46]है यह है तौबा का माना कि इंसान अपनी गलती की तरफ
[5:53]मुतजेंस गलती का इजा करने की कोशिश करें इसके अलावा पिछले प्रोग्राम
[5:59]में एक अहम नुक्ता यह भी बयान किया था कि इंसान जब
[6:03]तौबा करना चाहता है तो उसकी शराय क्या हैं किस तरीके से
[6:11]इंसान तौबा करें इस हवाले से कुछ गुफ्तगू हुई थी हम उसको
[6:13]दोबारा नहीं दोहराएंगे आज के इस प्रोग्राम में हम जिस गुफ्तगू को
[6:21]आगे बढ़ाना चाहते हैं वह है आसार तौबा यानी तौबा के आसार
[6:24]क्या है उसके असरात क्या है उसके मुस्त पहलू और मुस्त जो
[6:30]जाविया हैं वह कौन-कौन से हैं उससे क्या असरात जाहिर होते हैं
[6:34]इंसान के लिए क्या फायदा हो सकता है तौबा के जरिए से
[6:38]इंशाल्लाह कुरान मजीद की मुख्तलिफ आयात के जरिए आज के इस प्रोग्राम
[6:42]में हम इन नुका की तरफ इशारा करेंगे सबसे पहला जो फायदा
[6:50]है तौबा का कुरान मजीद ने खुद बयान किया है सूर अनम
[6:54]की आयत नंबर 54 में आयत नंबर 54 है सूर अनम की
[7:01]कि जिसमें परवरदिगार आलम इरशाद फरमा रहा है के अन्न मनमल मिन
[7:13]कुम सन ब जहालत सुम मता ब मन बाद व असलहा फह
[7:20]गफूर रहीम यानी यह आयत यह बता रही है कि तौबा का
[7:23]फायदा क्या है बहुत सारे फवाइव इदम से उन आसार मुसब्बर एक
[7:31]असर यह है कि जब इंसान तौबा करता है किसी गलती करने
[7:35]के नतीजे में तो परवरदिगार आलम अपनी रहमत नाजिल करता है उस
[7:45]पर परवरदिगार ए आलम उसकी मगफिरत को कबूल करता है यानी बायस
[7:49]रहमत और मगफिरत है यह तौबा जब इंसान सच्चे दिल के साथ
[7:57]इखलास के साथ अपने परवरदिगार की बारगाह में अपने रब के दरबार
[8:00]में जब तौबा करता है तो परवरदिगार की रहमत उसके शामिले हाल
[8:07]होती है परवरदिगार फरमाता है कि तुम में से जो भी उस
[8:10]आयत का तर्जुमा जिसकी तिलावत की तुम में से जो भी नादानी
[8:16]की बिना पर असल नुक्ता यह है कि इंसान बहुत सारे गुनाह
[8:20]ऐसे करता है कि जिसमें नादानी होती यकीनन कोई मुसलमान कोई मोमिन
[8:28]जानबूझकर यह जानते हुए कि यह गुनाह है और मैं हतमान इस
[8:35]गुनाह को अंजाम दूंगा तो अगर ऐसा करता है कोई इंसान तो
[8:40]यह तो जानबूझकर गोया खुदा के मुकाबले पर आ जाता है ऐसे
[8:43]इंसान बहुत कम है अलबत्ता ऐसे इंसानों की तौबा को भी परवरदिगार
[8:50]कबूल कर लेता है लेकिन बहरहाल आम तौर पर जितने भी लोग
[8:56]हैं जब गुनाह करते हैं तो जहालत और नादानी की वजह से
[9:04]करते हैं गफलत की वजह से करते हैं भूल जाते हैं कि
[9:06]यह काम जो है व हराम है या दुनिया की जो जाहिरी
[9:12]चमक दमक है व चमक दमक इन्हें इनकी आंखों को खीरा कर
[9:18]देती है और यह धोखे में आ जाते हैं और धोखे में
[9:23]आने के नतीजे में इंसान गुनाह करता है और परवरदिगार आलम भी
[9:26]फरमाता है कि जो लोग नादानी की बिना पर किसी बुरे अमल
[9:32]के मुरत किब हो और उसके बाद तौबा करके अपनी इस्लाह कर
[9:38]ले वह शख्स तो बेशक तो बेशक परवरदिगार बहुत ज्यादा बख्शने वाला
[9:45]और मेहरबान है यानी परवरदिगार आलम गफूर भी है और रहीम भी
[9:53]है यानी मगफिरत को कबूल करने वाला है मगफिरत माफ करने वाला
[9:56]है और इंसान की तौबा को कबूल करने वाला है और साथ-साथ
[10:01]रहीम भी है यानी उसकी रहमत इंसान के शामिले हाल हो जाती
[10:05]है यह पहला फायदा है तौबा का कि सबसे पहले परवरदिगार उसे
[10:12]माफ कर देता है इसलिए कि इंसान जब गुनाह करता है और
[10:18]गुनाह के बाद तौबा करता है तो उसे यह तव तवको होती
[10:22]है इसलिए कि इंसान जब गुनाह करता है और गुनाह के बाद
[10:24]तौबा करता है तो उसे यह तवको होती है कि उसके गुनाह
[10:29]माफ कर दिए जाए उसकी जितनी भी गल गलतियां है वह परवरदिगार
[10:35]आलम मह कर दे उन्हें मिटा दे तो तौबा के नतीजे में
[10:37]सबसे पहला फायदा यह होता है कि परवरदिगार आलम उसे माफ कर
[10:42]देता है और ना सिर्फ माफ कर देता है अपनी रहमत उसके
[10:45]शामिल हाल कर देता है यह पहला फायदा तबा का उसके बाद
[11:03]दूसरा फायदा खुद कुराने मजीद ने फिर एक एक जगह पर सूर
[11:08]तौबा के अंदर इरशाद फरमाया आयत नंबर 82 में व इनी लगार
[11:15]मन ताबा वामना अमला साहन सु मतदा परवरदिगार आलम सूर तौबा में
[11:26]इरशाद फरमाता है आयत नंबर 82 में के बेशक मैं उसको बख
[11:33]दूं कि जो तौबा करे व इनी ल गफार मैं गफार हूं
[11:35]किसके लिए किस शख्स के लिए लेमन ताबा जो तौबा करे वामना
[11:42]और ईमान ले आए यानी दोबारा से मोमिन है मुसलमान है अल्लाह
[11:49]पर ईमान रखते हैं रसूल पर ईमान रखते हैं अहले बैत अ
[11:51]सलातो सलाम के मोहिब और चाहने वाले हैं उन पर भी ईमान
[11:56]रखते हैं लेकिन इंसान तौबा करके दोबारा दोबारा ईमान ले आए यानी
[12:03]तज दीद मिसाक करे तज दीद अहद करे दोबारा से अपने परवरदिगार
[12:06]के साथ उस अहद को दोबारा से वह बांधे गुनाहों की वजह
[12:13]से फेले हराम का मुसलसल इरत काब करने की वजह से वह
[12:19]अहद पैमान जो इसने आलम अलस्थम एक मुसलमान ने और एक मोमिन
[12:22]ने अल्लाह से बांधा था व जो अहद पैमान था वह टूट
[12:26]चुका था अब वह दोबारा से ईमान लेकर आए दोबारा से तौबा
[12:32]करने के बाद अल्लाह पर अपने ईमान को मुस्तहकम करें रसूल पर
[12:35]अपने ईमान को मुस्तहकम करें अहले बैत की इता और उन पर
[12:41]ईमान को मुस्तहकम करें तो लिहाजा परवरदिगार फरमाता है सूर तौबा में
[12:44]वनील मनता आमन वामल सान और न फकत ईमान लेकर आए न
[12:53]फकत तौबा करें ना फकत ईमान लेकर आए वामला साहन और साथ
[12:59]साथ अमल सालेह भी अंजाम देता रहे इसलिए कि तौबा करने के
[13:05]बाद जो बुराइयां उसकी मिट चुकी हैं अब वह एक पाक और
[13:08]पाकीजा इंसान बन चुका है अल्लाह पर उसका ईमान कवी हो चुका
[13:14]है ताकतवर हो चुका है लेकिन यह काफी नहीं है उसको बहिश्त
[13:21]में जाने के लिए और उसको मुख्तलिफ दरजा जो बहिश्त में परवरदिगार
[13:25]आलम अता करने वाला है उन दरजा के हुसूल के लिए अमल
[13:32]सालेह बेहतरीन सीढ़ी है जब इंसान अमल सालेह की मुख्तलिफ सीढ़ियों पर
[13:36]कदम रखेगा तो जन्नत के दरजा की तरफ बढ़ता चला जाएगा जन्नत
[13:41]के जो दरजा है मुख्तलिफ आला अलीन तक का जो दरजा है
[13:47]वह ईमान के बाद अमल सालेह के जरिए से हासिल होता है
[13:51]ऐसा नहीं है कि इंसान अमल सालेह को छोड़ दे जैसा कि
[13:52]बाज नादान लोगों का यह अकीदा होता है कि जो कुछ है
[13:58]वह अकीदा है और अकीदा रख रखने के बाद इंसान जो कुछ
[14:01]भी करे उस अकीदेअरेस्ट और अमल सालेह अंजाम देता रहे तो परवरदिगार
[14:32]क्या फरमा रहा है सु मतदा तो इन तमाम चीजों के बदले
[14:41]में परवरदिगार आलम उसे हिदायत अता कर देगा यानी ना फकत तौबा
[14:46]के जरिए इंसान रहमत हासिल कर लेता है परवरदिगार की ना फकत
[14:49]इंसान को माफ कर दिया जाता है बल्कि उसकी हिदायत हो जाती
[14:53]है उसके बाद तीसरी आयत जो इंतहा अहम आयत इस हवाले से
[15:01]तौबा के हवाले से कि तौबा का एक और फायदा जहां रहमत
[15:07]मगफिरत इलाही इंसान के शामिल हाल होती है जहां परवरदिगार उसे हिदायत
[15:10]अता करता है वहां एक और अहम आयत जो तौबा के हवाले
[15:17]से परवरदिगार आलम ने सूर फुरकान की आयत नंबर 70 है इस
[15:24]आयत में परवरदिगार इरशाद फरमा रहा है कि इला मन वामना वामला
[15:33]अमलन सान फला का य बला स हसना अल्लाह अकबर देखिए परवरदिगार
[15:42]कितना गफूर रहीम है कितना इंसान के गुनाहों को छुपाने वाला है
[15:51]सत्तार उल यूब है परवरदिगार आलम एक दफा फर्ज करें कि एक
[15:59]मिसाल आपकी खद पेश कर दूं अगर एक बच्चा है उससे बहुत
[16:02]सारी गलतियां होती हैं और वह अपने बाप के पास आके अपने
[16:10]वालिद के पास आके अपनी वालिदा के पास आके जो उसका बड़ा
[16:13]है उसके पास आके पशेमानी का इजहार करता है तौबा करता है
[16:19]अपनी गलती की या अपनी गलतियों की माफी मांगता है तो बाप
[16:22]क्या करता है खुश होता है कहता है ठीक है बेटा अगर
[16:26]तुमने सच्चे दिल से तौबा की है और अपने अपनी गलतियों की
[16:31]माफी तुम मांग रहे हो तो जाओ मैंने तुम्हें माफ किया यानी
[16:34]वोह गलतियां जो वालदैन की बनिस्बत किसी ने अंजाम दी है तो
[16:38]बाप कहता है मां कहती है कि मैंने तुझे माफ किया लेकिन
[16:43]क्या आपने कभी देखा है कि बाप ने उसे कोई तोहफा भी
[16:49]दिया हो बाप ज्यादा से ज्यादा यह करता है कि अपने बच्चे
[16:53]को माफ कर देता है लेकिन कभी यह नहीं देखा होगा किसी
[16:55]ने कि उसको तोहफे तहाय से नवाजे यानी जितनी नी गलतिया की
[17:01]थी उतनी ही तादाद में व उसे पैसे दे व उसे तोहफे
[17:05]तहा दे वो उसके वह उसको खुश करे किसी तरीके से ऐसा
[17:07]नहीं होता ज्यादा से ज्यादा यह करता है किसी का कोई बाप
[17:15]उसको माफ कर देता जाओ बेटा मैंने तुम्हें माफ किया इससे ज्यादा
[17:18]कोई बाप नहीं करता या कोई भी इंसान लेकिन परवरदिगार आलम इतना
[17:25]रहमान है इसलिए कि बाप और मां के दिल में रहम डालने
[17:32]वाला भी वही परवरदिगार है और वह इतना रहमान है इतना रहमान
[17:38]है और इतना रहीम परवरदिगार है और इतना रहीम रब है कि
[17:42]वाक इंसान जितना भी उसका शुक्र अदा करें उसकी इबादत करें और
[17:50]उसकी बारगाह में गिड़गिड़ा जाए और हमेशा सजदा रेज हो होकर रहे
[17:56]तो तब भी यह तमाम उसकी रुबियस में कुछ भी नहीं है
[18:04]बहुत कम है इस आयत के अंदर परवरदिगार इसी चीज की तरफ
[18:06]इशारा कर रहा है कि इल्ला मन ताबा वामना वालाल साले जिसने
[18:14]तौबा की और ईमान लेकर आया और अमल सालेह उसने अंजाम दिया
[18:22]फला का य बला स हसना के परवरदिगार तो वह है कि
[18:32]जो उनकी बुराइयों को नेकियों में बदल देगा अल्लाह अकबर हमने बुराइयां
[18:38]की थी गुनाह अंजाम दिए थे खुदा की मुखालिफत की थी खुदा
[18:43]के अह काम की मासि अत की थी लेकिन सच्चे दिल के
[18:49]साथ जब अल्लाह की बारगाह में आए तौबा की तौबा करने के
[18:54]बाद परवरदिगार कहता है कि मैं तुम्हारी बुराइयों को नेकियों में तब्दील
[19:02]कर देता हूं इससे बढ़कर रहम दिल और शफीक रब कौन हो
[19:04]सकता है जो अल्लाह की जात है फकत कि ना फकत वह
[19:10]माफ करता है ना फकत वह रहमत नाजिल करता है ना फकत
[19:17]वह इंसान को हिदायत देता है बल्कि तौबा के बाद परवरदिगार आलम
[19:22]इंसान ने जितनी भी बुराइयां की थी परवरदिगार तौबा के बाद उन्हें
[19:26]माफ भी कर देता मिटा देता है और उनकी तादाद के बराबर
[19:32]और उनकी तादाद के बराबर इंसान के नाम आमाल में नेकियां भी
[19:35]लिख देता है यह है परवरदिगार इतना रहीम है हम कुरान की
[19:42]हर आयत को पढ़ने से पहले हर सूरे को शुरू करने से
[19:47]पहले या बहुत सारे काम बल्कि हर काम से पहले हम कहते
[19:49]हैं बिस्मिल्लाह रहमान रहीम शुरू करता हूं उस अल्लाह के नाम से
[19:58]जो रहमान भी है और रहीम भी है हमेशा कहते हैं हम
[20:04]रहीम है रहीम तो वह इतना रहीम है कि ना सिर्फ गुनाहों
[20:06]को मिटाता है बल्कि गुनाहों की जगह पर हसनातन आमाल में लिख
[20:11]देता है यह एक और फायदा तौबा का और उसके बाद जो
[20:18]लोग तौबा करते हैं वह कामयाब लोग होते हैं फिर कुरान मजीद
[20:23]ने एक आयत में इरशाद फरमाया सूर कस की आयत नंबर 67
[20:26]है 67 परवरदिगार आलम इरशाद फरमाता है फमा मन ताबा वामना वामला
[20:37]सान फसायक मिनल मुफ देखि हर जगह यह लफ बारबार रिपीट हो
[20:41]रहा है तकरार हो रहा है जिसने तौबा की और ईमान लेकर
[20:46]आया और अमल सालेह अंजाम देता रहा यह तीनों चीजें साथ है
[20:51]तौबा करे इंसान दोबारा से तजी दे मिसाक करें तज दीद अहद
[20:54]करें और उसके बाद अमल सालेह भी अंजाम देता रहे अमल सालेह
[20:59]एक जुज ला यन है जुदा ना होने वाला एक ऐसी चीज
[21:06]है कि जो इंसान के अकीदेअरेस्ट कि इंशा अल्लाह वो इंसान यकीनन
[21:34]कामयाब लोगों में से हो जाएगा कामयाब इंसान है और इंसान चाहता
[21:39]क्या है हर चीज में इंसान कामयाबी चाहता है छोटे से छोटे
[21:46]इम्तिहान से लेकर जिंदगी में बड़े से बड़े इम्तिहान तक इंसान की
[21:49]कोशिश यह होती है कि हर चीज में कामयाब हो जाए तरक्की
[21:52]हो जाए कामयाबी उसे मिल जाए तो लिहाजा परवरदिगार फरमाता है यह
[21:59]मुफलिस हो जाएगा फिर उसके बाद एक और फायदा पांचवा फायदा वह
[22:03]इंसान कि जो तौबा करता है फिर वह अल्लाह का महबूब बन
[22:11]जाता है वह अल्लाह का यानी अल्लाह चाहने वाला होता है और
[22:18]यह अल्लाह का महबूब हो जाता है और परवरदिगार ने इरशाद फरमाया
[22:40]सूर बकरा की आयत नंबर 222 के अंदर इन अल्ला तवा बीना
[22:44]परवरदिगार तवाब से मोहब्बत करता है तवाब उसके महबूब होते हैं यल
[22:51]मुरीन और वह लोग जो पाक रहने वाले हैं जाहिरी पाकीजा शर्त
[23:01]है और बातिन पाकीजा यह बता रहा है वबबल मुत हरीन कि
[23:06]परवरदिगार आलम उन लोगों से मोहब्बत करता है वो लोग खुदा के
[23:12]महबूब हैं जो ना फकत बातिन तहा का ख्याल रखते हैं बल्कि
[23:17]जाहिरी नजासत का भी ख्याल रखते हैं और जाहिरी तहा को भी
[23:23]अहमियत देते हैं जाहिरी नजासत से बचते हैं जहां बातिन नजासत से
[23:27]बचते हैं वहां जाहिरी नजासत से भी बचते हैं और जाहिरी पाकीजा
[23:38]सात से बचना चाहिए लेकिन बतौर खास पेशाब के हवाले से यह
[23:45]रिवायत मौजूद है कि वह अफराद के जो अपने आप को पेशाब
[23:50]से पाक नहीं करते हैं तत करते वक्त और इस्तंजा करते वक्त
[23:53]फशारे कब्र से वह लोग बच नहीं सकते तो लिहाजा हमें कोशिश
[24:00]य करनी चाहिए के जाहिरी नजासत से भी अपने आप को बचाएं
[24:05]और बातिन नजासत जो गुनाह है उनसे भी अपने आप को बचाए
[24:10]तो एक फायदा यह है कि वह इंसान जो तौबा करता है
[24:11]वह अल्लाह का महबूब बन जाता है और उसके बाद आखरी एक
[24:17]और फायदा जो सबसे बड़ा फायदा है जो हर मोमिन की आरजू
[24:23]है जो हर मोमिन की चाहत है और वह क्या है बहिश्त
[24:27]जन्नत है परवरदिगार फरमाता है सूर मरियम के अंदर आयत नंबर 60
[24:38]में इल्ला मन ताबा आमना सा देखिए यहां पर भी वही तीन
[24:40]नुक्ते हैं तौबा करें ईमान लेकर आए अमल सालेह अंजाम दे फ
[24:47]उला का यदल जन्ना वही लोग हैं जो जन्नत में दाखिल होंगे
[24:51]तौबा करें अमल सालेह अंजाम ईमान लेकर आए अमल सालेह अंजाम दे
[24:58]तो वही है कि जो जन्नती है वही है जो बेहती है
[25:03]तो फिर उसे अब परेशानी की क्या जरूरत है तो लिहाजा तौबा
[25:06]के बहुत सारे असरात और फवाइव गू मौजूद है और बहुत सारे
[25:18]अहम नुका की तरफ रिवायत के अंदर भी इशारा है इनमें से
[25:20]एक बहुत तुलानी रिवायत है मैं सिर्फ उसका तर्जुमा आपकी खिदमत में
[25:27]पेश करके तारीखी एक मिसाल भी पेश करूं कि पैगंबर अकरम सल्लल्लाहु
[25:31]अलैहि वा वसल्लम फरमाते हैं अपने असब से के अदर मनता क्या
[25:37]तुम जानते हो कि तायब कौन है तौबा करने वाला कौन है
[25:39]तो असब कहते हैं कि नहीं या रसूलल्लाह हम नहीं जानते कि
[25:44]तौबा करने वाला हकीकत में कौन है यानी तौबा हकीकत में किसे
[25:50]कहते हैं और जो तौबा करने वाला है वह हकीकत में किस
[25:52]तरह का इंसान होता है तो एक मर्तबा पैगंबर फरमाते हैं कि
[26:00]जिसकी पैगंबर फरमाते हैं अगर कोई शख्स तौबा करे और जिसकी बुराई
[26:05]की है उसको अगर राजी ना करे या अपने पहनाओ में अपने
[26:12]लिबास में तब्दीली ना लाए अपने गुमराह दोस्तों के साथ अभी तक
[26:16]उठना बैठना बाकी है और उनमें तब्दीली ना लाए अपने कल्ब और
[26:23]अपने हाथों को ना खोले यानी बख्श और अता जो उसके अंदर
[26:26]नहीं थी वह अभी तक बाकी है और लोगों में ताम नहीं
[26:30]करता फकीरों को खाना नहीं खिलाता लोगों की मदद नहीं करता अभी
[26:35]तक यह सिफत उसके अंदर बाकी है और उसके बाद पैगंबर फरमाते
[26:37]हैं कि उसकी लंबी-लंबी आरजू एं और तमन्ना एं बाकी हैं जबान
[26:43]की हिफाजत नहीं करता अखलाक को बेहतर नहीं बनाता अपनी नियत को
[26:47]तब्दील नहीं करता खाने पीने में कमी अभी वाक नहीं हुई है
[26:51]जिस तरह पहले खाता था वैसे खाता जिस तरह पहले पहनता था
[26:56]वैसे ही अभी भी पहन रहा है जो बुरे दोस्त हैं वो
[26:57]भी अब तक उसके साथ मौजूद है इंसान बहुत से होते हैं
[27:00]ना तौबा करते हैं कानों को पकड़ के तौबा तौबा तौबा इस
[27:04]तरह की तौबा करने वालों के बारे में शायद पैगंबर फरमा रहे
[27:06]हैं कि किसी चीज में तब्दीली नहीं आई कि किसी चीज में
[27:10]तब्दीली नहीं आई ना दोस्तों में तब्दीली आई जो बुरे दोस्त है
[27:14]ना उनमें तब्दीली आई ना लिबास में तब्दीली आई ना खाने पीने
[27:16]में तब्दीली आई ना इंसान की नियत में तब्दीली आई किसी चीज
[27:22]में तब्दीली नहीं आई और उसके बाद जब तक इंसान इन तमाम
[27:27]चीजों को तर्क नहीं नहीं करेगा और अच्छी सिफात से अपने को
[27:33]आरा और पैरा नहीं करेगा तो वह हकीकी तौबा करने वाला नहीं
[27:37]होगा यह पैगंबर फरमा रहे हैं और लेकिन जब कोई भी इंसान
[27:43]इन सिफात को हासिल कर ले यानी बुरे दोस्तों को तर्क कर
[27:48]दे अपनी नियत को पाक कर ले अपने लिबास में तब्दीली लेकर
[27:50]आए लिबास गैर इस्लामी लिबास पहनता था लेकिन अब जब तौबा की
[27:54]है तो एक अच्छा और मुनासिब इस्लामी लिबास पहन रहा है उसकी
[28:00]जबान पहले गलीज और गंदी जबान थी अपनी जबान से बुरे अल्फाज
[28:02]निकालता था लेकिन अभी एक अच्छा इंसान बन गया है तो यह
[28:07]है तौबा करने वाला तो पैगंबर फरमाते हैं कि जिसने इन चीजों
[28:09]को तर्क किया और अच्छी सिफात को अपना लिया वह है हकीकी
[28:15]तायब वह है हकीकी तौबा करने वाला और यही वाकई तौबा करने
[28:22]वाला इंसान बन जाएगा और इसकी मिसाले तारीख में वाकय इंसान कभी
[28:27]भी नाउ ना हो जितना बड़ा गुनाह किया हो अगर वह पशेमानी
[28:33]हो गया है और अपनी उस गलती का इजा करना चाहता है
[28:38]बहुत बड़े-बड़े गुनाहगार दुनिया में मौजूद थे लेकिन जब उन्होंने तौबा की
[28:43]तो परवरदिगार ने उनकी तौबा को कबूल किया इसलिए कि अल्लाह की
[28:46]जो रहमत है वह बहुत ज्यादा अजीम है और बहुत ज्यादा वसी
[28:52]है अमीर अल मोमिनीन अली इब्ने अबी तालिब अल सलातो वसलाम दुआए
[28:58]कुमाल में में क्या इरशाद फरमाते हैं कि परवरदिगार तेरी रहमत बहुत
[29:01]ज्यादा वसी है जो हर चीज को घेरे हुए है पशेमानी हराम
[29:08]है लिहाजा इंसान तौबा करे जितना बड़ा गुनाह भी किया होगा अब
[29:14]मैं आपकी खिदमत में एक मिसाल पेश करूं और गुफ्तगू को तमाम
[29:16]कि क्या हुर से बड़ा कोई गुनाहगार हो सकता है कि जिसने
[29:24]पैगंबर खुदा के नवासे को रोका हो रास्ते में इमाम हुसैन अल
[29:30]सलातो वसलाम का रास्ता रोका हो और वह पूरा वाकया मैं नहीं
[29:36]सुनाना चाहता आप जानते हैं कि किस तरीके से हुर ने इमाम
[29:42]हुसैन अल सलातो वस्सलाम का रास्ता रोका और दोनों के दरमियान इमाम
[29:45]हुसैन अल सलाम और हुर के दरमियान जो मुकाल हुआ है जो
[29:51]गुफ्तगू हुई है उसमें इमाम हुसैन ने क्या फरमाया और हुर ने
[29:55]क्या जवाब दिया कितना बड़ा गुनाह किया किया था और इमाम को
[30:00]मजबूर करके घेर के कर्बला तक लेकर आया लेकिन जब तौबा का
[30:07]वक्त आया तो व कैफियत तारी हुई हुर पर कि शबे आशूर
[30:14]अपने खेमे के बाहर अपने कैम के बाहर परेशानी के आलम में
[30:17]इंतहा तजब जुब का शिकार है इंतहा परेशानी के आलम में इधर
[30:22]से उधर टहल रहा है जब इंसान तौबा करने वाला होता है
[30:29]जब पशेमानी होता है तो वाकय यह कैफियत होती है इतना बड़ा
[30:31]गुनाह करने के बाद इससे बड़ा गुनाह शायद कोई नहीं कर सकता
[30:37]कि जिसने फरजंद रसूल का रास्ता रोका हो जो फरजंद रसूल के
[30:39]मुकाबले पे आया हो जो इमाम हक के मुकाबले प आ गया
[30:43]हो जब तौबा की कैफियत तारी हुई एहसास हुआ कि मुझसे बहुत
[30:49]बड़ी गलती हुई है इमाम की खिदमत में आके कहता है कि
[30:54]मौला क्या माफी का कोई रास्ता है इमाम अल सलातो वसलाम ना
[30:56]फकत माफ करते हैं बल्कि जब हजरत र की शहादत होती है
[31:08]और मेरे मौला इमाम हुसैन मैदान कर्बला में हजरत र के सिरहाने
[31:12]पहुंचते हैं तो हजरत हुर की पेशानी से जो खून निकल रहा
[31:18]था उसे बंद करने के लिए मेरे मौला अपने पास से एक
[31:20]रूमाल जो शायद जनाबे सैयदा सलामुल्लाह अलैहा के दस्ते मुबारक से बना
[31:28]हुआ रूमाल था और मेरे मौला के पास था उस रूमाल को
[31:30]मेरे मौला हजरत हुर की पेशानी पर बांध देते हैं देखिए यह
[31:37]है ना सिर्फ गुनाह को माफ किया बल्कि ऐसा हदियाना अल सलातो
[31:44]वस्सलाम ने कि कयामत तक जब तक हजरत हुर दफन है वो
[31:51]रुमाल हजरत हुर के साथ है यह कितना बड़ा तोहफा है तो
[31:57]इंसान कभी भी ना उम्मीद ना हो गुनाहों से मुख्तलिफ इंसान मुख्तलिफ
[32:01]गुनाह अंजाम देते हैं कभी भी इंसानों को ना उम्मीद नहीं होना
[32:09]चाहिए इसलिए कि परवरदिगार आलम गफूर रहीम है तो परवरदिगार की बारगाह
[32:12]में दुआ करते हैं कि परवरदिगार आलम हमें सच्ची तौबा करने वालों
[32:16]में से करार दे वस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकात आ
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